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उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने 175 करोड़ के विकास कार्यों का किया लोकार्पण-भूमिपूजन

 उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज सरायपाली के नई मंडी प्रांगण में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सरायपाली नगर पालिका क्षेत्र के लिए 23 करोड़ 28 लाख 61 हजार रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 154 करोड़ 88 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को पेयजल, सामुदायिक भवन, अधोसंरचना और अमृत मिशन सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात मिली। सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक श्रीमती चातुरी नंद, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामलाल चौहान और छत्तीसगढ़ शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजेंद्र नायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।


उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जल जीवन मिशन अंतर्गत रेट्रो फिटिंग एवं एकल ग्राम योजना के कुल 24 ग्रामों में पेयजल सुविधा के लिए 1818. 61 लाख रुपये के कार्यों तथा 510 लाख रुपये के विभिन्न वार्डों में सामुदायिक भवनों एवं अन्य निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने एसटीपी निर्माण से संबंधित 10.21 करोड़ रुपये तथा जल प्रदाय अमृत मिशन 2.0 अंतर्गत 139.55 करोड़ रुपए के विकास कार्यों एवं 512 लाख रुपये के विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन भी किया।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी शुभ कार्य होता है तो इंद्रदेव का आशीर्वाद मिलता है। आज वर्षा के रूप में भी हमें आशीर्वाद मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जिस कार्य का भूमिपूजन करती है, उसका लोकार्पण भी हमारी ही सरकार करती है। विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा कर जनता को उसका लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माथे पर नक्सलवाद का कलंक था, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा ढाई वर्ष में लगभग 12 हजार 666 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अब सरायपाली का विकास भी तीव्र गति से हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन की सरकार में लगातार विकास के काम हो रहे है। देश की दशा और दिशा बदलने का काम हमारी डबल इंजन की सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरायपाली के विकास के लिए पैसों की कोई कमी नही होगी। उप मुख्यमंत्री ने सांसद की मांग पर क्षेत्र के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।

सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव द्वारा बिना भेदभाव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जिसका लाभ आम जनता को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही रेल लाइन की मांग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है और अब सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने अमृत मिशन 2.0 की स्वीकृति के लिए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी की योजना नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सौगात है। महानदी का पानी जब घर-घर पहुंचेगा, तो इसका लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित इस कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया। राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया, स्काउट गाइड संघ के जिलाध्यक्ष श्री ऐतराम साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती चंद्र, उपाध्यक्ष श्री हेमंत प्रधान और कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह सहित जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
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विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं, विकास की गति होगी और तेज : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है। शहरों में आधुनिक अधोसंरचना के निर्माण के साथ नागरिक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे। हमारे प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, मानव संसाधन और अपार संभावनाओं का उपयोग कर हम सब मिलकर एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आज रायपुर जिले के नगर निगम बीरगांव में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इन कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करने के साथ ही क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए लगभग 110 करोड़ रुपये के नवीन विकास कार्यों की घोषणा भी की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीरगांव तेजी से विकसित हो रहा शहरी क्षेत्र है। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ती आबादी के अनुरूप यहां सड़क, पेयजल, स्वच्छता, सीवरेज, खेल सुविधाओं और अन्य नागरिक अधोसंरचनाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध ढंग से कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में बीरगांव नगर निगम क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकार्पित और भूमिपूजन किए गए विकास कार्यों में नगर निगम से संबंधित 94 करोड़ रुपये से अधिक तथा लोक निर्माण विभाग के 38 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही नगरोत्थान योजना के अंतर्गत लगभग 16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया है। इन कार्यों के पूरा होने से बीरगांव और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, खेल अधोसंरचना सहित अनेक बुनियादी सुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

स्टेट कैपिटल रीजन से बीरगांव के विकास को मिलेगी नई दिशा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार रायपुर, दुर्ग-भिलाई और आसपास के क्षेत्रों को सम्मिलित करते हुए स्टेट कैपिटल रीजन विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें बीरगांव भी शामिल है। स्टेट कैपिटल रीजन के माध्यम से पूरे क्षेत्र के सुनियोजित, समन्वित और दीर्घकालीन विकास का रोडमैप तैयार किया जाएगा। इसका लाभ आने वाले वर्षों में बीरगांव को भी मिलेगा और यहां आधुनिक शहरी अधोसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि विकास का अर्थ केवल सड़क और भवन बनाना नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन को आसान बनाना भी है। इसी सोच के साथ सरकार सुशासन और ईज ऑफ लिविंग की दिशा में लगातार सुधार कर रही है। तकनीक के माध्यम से सरकारी सेवाओं को सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बीरगांव में मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय का निर्माण भी किया जाएगा। प्रदेश में 10 मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्री और स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं से भूमि संबंधी सेवाओं को सरल बनाया गया है। मॉडल रजिस्ट्री कार्यालय के निर्माण से बीरगांव और आसपास के नागरिकों को जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित सेवाएं अधिक सुविधाजनक ढंग से उपलब्ध होंगी।

बीरगांव में एसटीपी के लिए 82 करोड़ रुपये की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव के लिए अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए 82 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इससे क्षेत्र में सीवेज प्रबंधन की व्यवस्था को मजबूत करने और स्वच्छता के स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने ओवरहेड टैंक एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपये, अधोसंरचना मद से सड़क एवं नाली निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये तथा सरोरा में खेल मैदान के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने बीरगांव में विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाओं से युक्त नालंदा परिसर के निर्माण के लिए भी 5 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने व्यास तालाब तिराहा से बीरगांव नाला तक स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए एक करोड़ रुपये तथा बुधवारी बाजार बीरगांव से नगर निगम कार्यालय तक स्ट्रीट लाइट के लिए 50 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रावांभाठा में विद्युतीकरण एवं मरम्मत के लिए 50 लाख रुपये, सर्व मांगलिक भवन निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये और शासकीय महाविद्यालय में ई-लाइब्रेरी निर्माण के लिए 89 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव में छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल का जोन कार्यालय प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों का उद्देश्य बीरगांव के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्र को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना है।

सात क्षेत्रों में सर्वे के बाद पात्र परिवारों को मिलेंगे आवासीय पट्टे

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव नगर निगम क्षेत्र के रावांभाठा, बंजारी नगर, शक्तिपारा, मठपारा, शीतलापारा, उरकुरा और मजदूर नगर सरोरा में सर्वेक्षण करवाकर पात्र लोगों को नियमानुसार आवासीय पट्टे वितरित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

गरीब, महिला, श्रमिक और जरूरतमंद परिवारों का कल्याण हमारी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गरीब, महिला, श्रमिक, किसान, युवा और जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवास बनाए जा रहे हैं। सरकार ने 18 लाख गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब तक 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि माताओं-बहनों को प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 5.60 लाख से अधिक भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों को सालाना 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाने के साथ चरण पादुका योजना को फिर से प्रारंभ किया गया है। श्री रामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना और प्रत्येक परिवार को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना है।

विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अब कोई बाधा नहीं : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद छत्तीसगढ़ के विकास में एक बड़ी बाधा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा स्थानीय नागरिकों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। इससे विशेष रूप से उन क्षेत्रों में विकास के नए द्वार खुले हैं, जो लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं और अवसरों से वंचित रहे।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य है। यहां प्रचुर खनिज और वन संपदा है, धरती उर्वर है और यहां के लोगों में अपार सामर्थ्य है। इन संसाधनों और क्षमताओं का बेहतर उपयोग कर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इस राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में छत्तीसगढ़ को अग्रणी भूमिका निभानी है और इसके लिए हम सबको मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।

आयुर्वेद हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन और समृद्ध ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। केंद्र सरकार द्वारा आयुष मंत्रालय का गठन कर आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, आयुर्वेद के प्रति जागरूक रहने और इसके वैज्ञानिक एवं पारंपरिक ज्ञान का लाभ लेने का आग्रह किया।

बीरगांव के विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन बीरगांव के लिए ऐतिहासिक और स्वर्णिम अवसर है। झमाझम बारिश के बीच बीरगांव में विकास की भी झमाझम बारिश हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र को 135 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की बड़ी सौगात दी है। इन कार्यों से बीरगांव को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त शहर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बीरगांव के सुनियोजित विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। विधायक श्री मोतीलाल साहू भी क्षेत्र की आवश्यकताओं और विकास कार्यों को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। पिछले ढाई वर्षों में नगर निगम बीरगांव क्षेत्र को 160 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली है, जिनमें लगभग 90 करोड़ रुपये के कार्य पूर्ण हो चुके हैं। आने वाले समय में भी अधोसंरचना और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का यह क्रम जारी रहेगा।

हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ, सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का गृह प्रवेश कराया। उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, मुख्यमंत्री गृह निर्माण सम्मान योजना और नोनी सुरक्षा योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को प्रोत्साहन राशि के डेमो चेक भी प्रदान किए।

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय एवं जनप्रतिनिधियों ने सफाई मित्रों और स्वच्छता दीदियों के पांव धुलवाकर, तिलक लगाकर तथा आरती उतारकर उनकी सेवाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे सफाई मित्र और स्वच्छता दीदियां शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके श्रम और सेवा का सम्मान पूरे समाज का दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बीरगांव नगर निगम को दो नए अग्निशमन वाहन भी समर्पित किए। इससे नगर निगम क्षेत्र में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की क्षमता और मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री ने शासकीय महाविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्रीमती भावना बोहरा, महापौर श्री नंदलाल देवांगन, सभापति श्री कृपाराम निषाद सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल से की सौजन्य भेंट, विश्व पर्यटन दिवस समारोह के लिए किया आमंत्रित

 छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और प्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को देश-दुनिया के मानचित्र पर और अधिक प्रभावी ढंग से स्थापित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन (CTTA) के प्रतिनिधिमंडल ने आज पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने श्री अग्रवाल को 27 सितंबर को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया और कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्यों की जानकारी दी।


प्रतिनिधिमंडल ने श्री राजेश अग्रवाल के साथ छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विस्तार, पर्यटन स्थलों के प्रभावी प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों की सहभागिता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न सुझाव भी साझा किए गए।

श्री राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से पर्यटन क्षेत्र के विकास को लेकर विचार-विमर्श करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और जनजातीय पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं, प्रभावी प्रचार-प्रसार और निजी क्षेत्र की सक्रिय सहभागिता के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों के बीच और अधिक लोकप्रिय बनाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन केवल भ्रमण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं, महिलाओं, कारीगरों, कलाकारों, होम-स्टे संचालकों और छोटे व्यवसायियों को आर्थिक अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सरकार और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े संगठनों के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय से छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास को नई गति दी जा सकती है। उन्होंने पर्यटन उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से प्रदेश की पर्यटन क्षमता को और अधिक प्रभावी रूप से सामने लाया जा सकता है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ट्रेवल एंड टूरिज्म एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में श्री राजेश अग्रवाल की सहभागिता का आग्रह किया। श्री अग्रवाल ने आमंत्रण सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित रहने का आश्वासन दिया।

विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह अवसर छत्तीसगढ़ की पर्यटन संभावनाओं, विविध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।

प्रतिनिधिमंडल ने पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल द्वारा प्रदेश में पर्यटन के विकास के लिए दिए जा रहे मार्गदर्शन एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पर्यटन विभाग, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े संगठनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

श्री राजेश अग्रवाल ने प्रतिनिधिमंडल को विश्व पर्यटन दिवस कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन क्षमता को नई पहचान दिलाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहभागिता, बेहतर सुविधाएं और प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव 24 सितंबर को कवर्धा में 4 लेन सड़क एवं डिवाईडर निर्माण का करेंगे भूमिपूजन

 उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा एवं उप मुख्यमंत्री श्री अरूण साव गुरूवार 24 सितंबर को कृषि उपज मंडी परिसर कबीरधाम में आयोजित समारोह में कवर्धा शहर के विकास को नई रफ्तार देने वाली महत्वपूर्ण 4 लेन सड़क एवं डिवाईडर निर्माण कार्य का भूमिपूजन करेंगे। उल्लेखनीय है कि जिला मुख्यालय कवर्धा में 54 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय राज मार्ग क्रमांक 30 के किलो मीटर 50 से 57 तक 7.8 किलो मीटर का फोर लेन का उन्नयन एवं डिवाईडर निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने से शहर के विकास नई रफ्तार मिलेगी। यह सड़क रायपुर मार्ग से बिलासपुर मार्ग तक, चंद्रयान हॉस्पिटल से कवर्धा शहर होते हुए जोराताल के आगे तक बनाई जाएगी। गुरूवार 24 सितंबर को नवीन कृषि उपज मंडी परिसर आयोजित भूमिपूजन समारोह के अवसर पर श्री सांसद श्री संतोष पांडेय एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहेंगे।


        जिला प्रशासन द्वारा शहर के विकास को गति देने वाली इस महत्वपूर्ण कार्यो के भूमिपूजन समारोह को सफलता पूर्वक संपन्न करने हेतु सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। इसका निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने से शहर में आवागमन सुगम होगा और नागरिकों के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस 4 लेन सड़क परियोजना के तहत दो स्थानों पर भव्य प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे। इन प्रवेश द्वारों को कवर्धा की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान यानी धर्मनगरी के स्वरूप के अनुरूप विकसित किया जाएगा। यह निर्माण कार्य कवर्धा के विकास की दिशा में यह निर्माण शहर की सुव्यस्थित यातायात व्यवस्था, सुंदरता और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कदम होगा।
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भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना को दिल्ली में मिला हाईएस्ट शुगर रिकवरी का नेशनल अवॉर्ड

 कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना कवर्धा ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल एफिशिएंसी अवॉर्ड प्राप्त किया है। छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का अवसर है कि राज्य में पहली बार किसी सहकारी शक्कर कारखाने को इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।


      नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, 15 जनपथ में नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन द्वारा वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए भव्य नेशनल एफिशिएंसी अवॉर्ड समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। विशिष्ट अतिथियों के रूप में केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर सहित विभिन्न राज्यों के सहकारिता मंत्री उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप भी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।

       समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने किसानों की समृद्धि में शक्कर कारखानों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए शक्कर कारखानों के सह-उत्पादों के अधिकतम उपयोग और उनके वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर दिया।

लगातार दो वर्षों के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
       समारोह में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा को वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल अवॉर्ड केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप भी उपस्थित रहे। अकारखाने की ओर से यह प्रतिष्ठित पुरस्कार आयुक्त सहकारिता, छत्तीसगढ़ श्री रमेश शर्मा, सहकारिता विभाग के ओएसडी श्री युगल किशोर, कारखाने के प्रबंध संचालक, महाप्रबंधक एवं इंजीनियर द्वारा संयुक्त रूप से ग्रहण किया गया।

      भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने हर्ष व्यक्त करते हुए इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए क्षेत्रवासियों, कारखाने से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है।

       उल्लेखनीय है कि भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा स्थापना के समय से ही क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। कारखाना गन्ना उत्पादक किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ गन्ना विकास, उन्नत कृषि तकनीक, प्रशिक्षण एवं किसान कल्याण की विभिन्न गतिविधियों का संचालन भी कर रहा है।

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विगत दो वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां

1. लगभग 5 हजार नए गन्ना किसानों को कारखाने की सदस्यता

गन्ना उत्पादक किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए कई वर्षों बाद कारखाने में गन्ना आपूर्ति करने वाले लगभग 5 हजार नए गन्ना उत्पादक किसानों को शेयर प्रदान कर कारखाने की सदस्यता दी गई। इससे बड़ी संख्या में नए किसान सीधे कारखाने की सहकारी व्यवस्था से जुड़े हैं।

2. शेयरधारक किसानों को रियायती दर पर शक्कर

भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना द्वारा शेयरधारक किसानों को रियायती दर पर शक्कर उपलब्ध कराने का यह लगातार तीसरा वर्ष है। योजना के अंतर्गत शेयरधारक किसानों को 30 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर से 50 किलोग्राम शक्कर उपलब्ध कराई जाती है।

3. जैविक खाद के लिए रियायती दर पर प्रेसमड

कारखाने से जुड़े शेयरधारक गन्ना किसानों को जैविक खाद के रूप में उपयोग के लिए प्रेसमड भी रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को 1,000 रुपये प्रति ट्रैक्टर की रियायती दर पर प्रेसमड दिया जाता है।

4. गन्ना किसानों के लिए शैक्षणिक भ्रमण एवं प्रशिक्षण

गन्ना किसानों को आधुनिक एवं उन्नत गन्ना उत्पादन तकनीकों से परिचित कराने के लिए कारखाना समय-समय पर शैक्षणिक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। किसानों को उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में अध्ययन एवं प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।
इसके अंतर्गत किसानों को गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ, वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे तथा कृषि विज्ञान केंद्र, बारामती जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में गन्ने की उन्नत खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण दिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त देश के विभिन्न हिस्सों से गन्ना उत्पादन एवं अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों को सेमिनार तथा क्षेत्रीय अध्ययन के लिए आमंत्रित किया जाता है।

5. उन्नत प्रजाति के गन्ना बीज एवं पौध का रियायती दर पर वितरण

क्षेत्र में गन्ने की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से कारखाना गन्ना विकास की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसके अंतर्गत वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे सहित महाराष्ट्र के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों से उन्नत प्रजाति के गन्ना बीज एवं पौध मंगाकर किसानों को रियायती दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस वर्ष कारखाने के प्रयास से लगभग 1,000 एकड़ क्षेत्र में नई एवं उन्नत प्रजातियों के गन्ने का रोपण कराया गया है। इसके साथ ही कारखाना परिसर की उपलब्ध अतिरिक्त भूमि में लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट विकसित किए गए हैं, जहां उन्नत गन्ना प्रजातियों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इससे स्थानीय किसान नई प्रजातियों के उत्पादन एवं परिणामों को प्रत्यक्ष रूप से देखकर उन्हें अपनाने के संबंध में निर्णय ले सकेंगे।

6. कर्मचारी एवं श्रमिक कल्याण की पहल

कारखाने से जुड़े कर्मचारियों एवं श्रमिकों के कल्याण के लिए भी विभिन्न पहल की गई हैं। श्रम विभाग के सहयोग से कारखाना परिसर में मुख्यमंत्री श्रम अन्न योजना के अंतर्गत कैंटीन स्थापित की गई है, जहां श्रमिकों को मात्र 5 रुपये प्रति थाली की दर से गर्म भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
इसके अतिरिक्त शासन के निर्देशानुसार कर्मचारियों एवं श्रमिकों के स्वास्थ्य की नियमित जांच के लिए समय-समय पर हेल्थ चेकअप कैंप एवं अन्य कल्याणकारी गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।

राष्ट्रीय पुरस्कार से गन्ना उत्पादक किसानों और कर्मचारियों का बढ़ा उत्साह

लगातार दो वर्षों के लिए हाईएस्ट शुगर रिकवरी का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों में उत्साह है।
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बदलते बस्तर की तस्वीर: पर्यटन से विकास की नई राह

 छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।

बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 

कनेक्टिविटी से खुल रहे विकास के नए रास्ते

पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।

होमस्टे से गांवों तक पहुंचेगा पर्यटन का लाभ

बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं।

बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं। 

संस्कृति बनी पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत

बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया। 

आस्था से लेकर एडवेंचर तक पर्यटन की विविध संभावनाएं

बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं।

धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है। 

पर्यटन से रोजगार और स्थानीय समृद्धि

बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है। 

बस्तर की नई तस्वीर

बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं। 

बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।
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वीबी-जीरामजी से अब होंगे 375 प्रकार के अनुमेय कार्य - उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने की दिशा में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जीरामजी) का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या अब 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है। 


        उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने अनुमेय कार्यों की संख्या में वृद्धि पर हर्ष जताते हुए कहा कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़कर 375 होने से विकास कार्यों को गति प्राप्त होगी और ग्रामीण विकास सुदृढ होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का लाभ केवल मजदूरी भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में ऐसी परिसंपत्तियों का निर्माण होगा, जो आने वाले वर्षों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगी।

         श्री शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन प्रदान किया गया है। मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन की गई है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण का यह समन्वय ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा तथा गांवों के समग्र विकास को नई गति देगा।

        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत@2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई के रूप में महत्व दिया है। वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।

क्यूआर कोड से मिलेगी अनुमेय कार्यों की जानकारी
        उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि वीबी-जीरामजी के अंतर्गत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य तथा समूह और सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य शामिल हैं। अनुमेय कार्यों की जानकारी प्रत्येक ग्रामीण तक आसानी से पहुंचे, इसके लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है, जिसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

2027 तक हर बालिका के लिए स्कूलों में शौचालय का लक्ष्य
         वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को विशेष महत्व दिया गया है। विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य इसके अंतर्गत किए जा सकेंगे।

       इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बालिकाओं की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में बेहतर सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में आगे बढ़ रहा राज्य
         ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार द्वारा हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया गया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट तथा अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से संबंधित निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को भी अनुमेय बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10 हजार से अधिक बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा।

जल सुरक्षा से लेकर भूजल पुनर्भरण तक
         अनुमेय कार्यों की पहली मुख्य श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट और रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चैनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण तथा रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य शामिल हैं।
        इन कार्यों से गांवों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण, सिंचाई सुविधा के विस्तार और कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। व्यक्तिगत और सामुदायिक दोनों स्तरों पर जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण एवं रखरखाव को भी इसमें स्थान दिया गया है।

सड़क, स्कूल, पंचायत भवन और स्वच्छता सहित मजबूत होगी ग्रामीण अधोसंरचना
        कार्यों की दूसरी मुख्य श्रेणी में ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया एवं क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, सार्वजनिक भवन, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, स्कूल परिसर की दीवारें और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं।
       इसके साथ श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं के निर्माण और विकास को भी अनुमेय कार्यों में शामिल किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य तथा जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव भी इस श्रेणी में शामिल हैं।

आजीविका के साथ स्थानीय स्तर पर आय के अवसर
       कार्यों की तीसरी मुख्य श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न एवं कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं, स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर के भवन, वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र, पशु आश्रय, मत्स्य पालन अधोसंरचना, नर्सरी एवं पौधरोपण तथा भवन निर्माण सामग्री के उत्पादन से जुड़े कार्य शामिल हैं।

        कृषि आधारित प्रसंस्करण को भी इस श्रेणी में स्थान दिया गया है। मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, एकीकृत कृषि प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प प्रसंस्करण, जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण तथा बांस शिल्प जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी। इससे स्थानीय संसाधनों के स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा आधार
           स्व-सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह स्तर की गतिविधियों के लिए अधोसंरचना को अनुमेय कार्यों में शामिल किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को आवश्यक स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराने के अवसर बढ़ेंगे। वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, नर्सरी, कृषि उत्पाद भंडारण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के विविध स्रोत विकसित करने में सहायक होंगी।

आपदा और चरम मौसम से निपटने के लिए भी होंगे कार्य
         चौथी मुख्य श्रेणी में अति विषम मौसमी घटनाओं के न्यूनीकरण और आपदा सजगता से संबंधित कार्य शामिल हैं। इनमें चक्रवात आश्रय, बाढ़ आश्रय, तटबंध, मिट्टी एवं गेबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, लेवल बेंच टेरेस, अपलैंड बेंच टेरेस, स्थिरीकरण तालाब, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन, विंडब्रेक एवं शेल्टरबेल्ट पौधरोपण तथा वन अग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्य शामिल हैं।वन अग्नि प्रबंधन के अंतर्गत फायर ब्रेक हेज, वन अग्नि रेखा और फ्यूल बफर जोन सहित अन्य सहायक कार्य भी अनुमेय हैं। इससे प्राकृतिक आपदाओं और चरम मौसमी परिस्थितियों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक और सामुदायिक परिसंपत्तियों की संरक्षण क्षमता को मजबूत करने में सहायता मिलेगी।

          उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि वीबी-जीरामजी केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह गांवों की आर्थिक क्षमता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय आजीविका को मजबूत करने और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करने का व्यापक अवसर है। 375 अनुमेय कार्यों के माध्यम से रोजगार को परिसंपत्ति निर्माण और परिसंपत्तियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए विकसित गांव की दिशा में ठोस आधार तैयार किया जा रहा है।
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छत्तीसगढ़ में 1.50 करोड़ से अधिक ‘आशीर्वाद के दीये’ प्रज्ज्वलित

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की सेवा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आज छत्तीसगढ़ में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम का व्यापक आयोजन किया गया। प्रदेशभर में नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाते हुए 1.50 करोड़ से अधिक दीये प्रज्वलित किए। गांव से लेकर शहर तक विभिन्न स्थानों पर दीप प्रज्वलन के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दीर्घ सार्वजनिक जीवन, सेवा भावना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के प्रति जनभावनाएं व्यक्त की गईं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने  कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के क्षेत्र में अनेक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी दिन-रात 140 करोड़ देशवासियों की सेवा में जुटे हैं और उनके नेतृत्व में आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘आशीर्वाद के दीये’ कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं, युवाओं, किसानों, श्रमिकों, विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने सामूहिक रूप से दीये जलाकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को शुभकामनाएं दीं। अनेक स्थानों पर दीपों से आकर्षक आकृतियां एवं संदेश भी बनाए गए।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में सेवा और जनभागीदारी का विशेष वातावरण देखने को मिला। मंदिरों, चौक-चौराहों, सार्वजनिक स्थलों और प्रमुख मैदानों में बड़ी संख्या में नागरिक एकत्रित हुए और दीप प्रज्वलित किए। कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सेवा, सहयोग और सकारात्मक बदलाव के संकल्प को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ में 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न जनसेवा एवं जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य सेवा और सुशासन की भावना को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज के विभिन्न वर्गों को रचनात्मक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों से जोड़ना है।
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सवा लाख ‘आशीर्वाद के दीपों’ से जगमगाया खारुन तट, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए हुई महाआरती

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर आज राजधानी रायपुर का महादेव घाट सवा लाख दीपों की ज्योति से जगमगा उठा। खारुन नदी के पावन तट पर आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय शामिल हुए और प्रदेशवासियों के साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। सवा लाख दीपों की एक साथ प्रज्वलित ज्योति से महादेव घाट का पूरा परिसर आलोकित हो उठा। श्रद्धा, आस्था और जनभागीदारी के इस अनुपम संगम के बीच खारुन मैया की भव्य महाआरती की गई।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के क्षेत्र में अनेक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी दिन-रात 140 करोड़ देशवासियों की सेवा में जुटे हैं और उनके नेतृत्व में आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज खारुन मैया के पावन तट पर प्रज्वलित सवा लाख दीप प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति छत्तीसगढ़वासियों के स्नेह, आत्मीयता और शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की।

विराट दीपोत्सव के दौरान साध्वी प्रज्ञा भारती एवं आचार्यों द्वारा विधि-विधान के साथ खारुन मैया की महाआरती की गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने भी महाआरती में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को समर्पित साध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध गीत का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया।

प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश ने देखे ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय और परिवर्तन देखे हैं, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से लेकर अयोध्या में भगवान श्री रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने तक देश ने नए आत्मविश्वास और सामर्थ्य का अनुभव किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित में बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। उनके दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और राष्ट्रसेवा की भावना ने देश में विकास और जनकल्याण की गति को तेज किया है। आज भारत विश्व मंच पर अधिक आत्मविश्वास और सामर्थ्य के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के लिए शासन का केंद्र हमेशा गरीब और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति रहा है। इसी भावना के अनुरूप गरीब परिवारों को पक्का आवास, घर-घर शौचालय, जन-धन खाते, रसोई गैस कनेक्शन, खाद्यान्न सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी प्रत्येक देशवासी को अपने परिवार का सदस्य मानकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के ध्येय के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी सरकार ने गरीब की छोटी से छोटी आवश्यकता और उसके जीवन को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं को शासन की प्राथमिकता बनाया है।

प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अवसर मेरे सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव : मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ अपने कार्य अनुभव को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में जब श्री नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब मुझे भी उनकी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस दौरान मुझे उनकी कार्यशैली, अनुशासन, परिश्रम और जनसेवा के प्रति समर्पण को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और जनसेवा की प्रेरक यात्रा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा और सुशासन को समर्पित रहे हैं। यह देश का सौभाग्य है कि हमें ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने विश्व पटल पर भारत का मान और सम्मान बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री श्री मोदी का छत्तीसगढ़ से रहा है गहरा आत्मीय जुड़ाव

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ गहरा आत्मीय जुड़ाव रहा है। प्रदेश के विकास को केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिला है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की विकास दृष्टि में छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से यहां के जनजातीय तथा दूरस्थ अंचलों के विकास को महत्वपूर्ण स्थान मिला है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक सफलता हासिल की है। वर्षों तक हिंसा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले बस्तर में आज शांति और विकास के नए द्वार खुले हैं। सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं तथा विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों के जीवन में आ रहा यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई शक्ति दे रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शांति के वातावरण में बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, संस्कृति और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को स्थानीय लोगों की समृद्धि और रोजगार से जोड़ा जाए।

जनसेवा के 25 वर्षों पर एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रारंभ हुआ है। यह अभियान प्रधानमंत्री श्री मोदी के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुए सेवा के संकल्प को अपने गांव, शहर, मोहल्ले और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया।

सवा लाख दीपों ने दिया सामूहिक शुभकामनाओं का संदेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज महादेव घाट पर सवा लाख दीप प्रज्वलित कर प्रदेशवासियों ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन के लिए अपनी मंगलकामनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर में विभिन्न स्थानों पर लगभग 32 लाख दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री श्री मोदी के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दीप भारतीय संस्कृति में आशा, विश्वास, सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक है। आज जलाया गया प्रत्येक ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ही सेवा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का भी प्रतीक है।

उन्होंने विराट दीपोत्सव एवं महाआरती के भव्य आयोजन के लिए आयोजकों, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि इतनी विशाल जनभागीदारी ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया है।

इस अवसर पर विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम की संयोजक एवं राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा,  विधायक श्री राजेश मूणत एवं श्री मोतीलाल साहू, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, श्रीमती कौशल्या साय, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष श्रीमती मोना सेन सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, सनातन ध्वज वाहिनी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्मदिन पर हर घर में जलाएं ‘आशीर्वाद का दीप’ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

  मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से आज शाम अपने-अपने घरों में प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना के साथ ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपना जीवन जनसेवा, राष्ट्र निर्माण और गरीब कल्याण के लिए समर्पित किया है। उनके जन्मदिन से प्रारंभ हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’ हम सभी को सेवा के इसी भाव को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी भागीदारी निभाने की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज बीरगांव के बुधवारी बाजार मैदान में आयोजित भगवान विश्वकर्मा पूजा एवं किसान-मजदूर सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज का दिन अनेक दृष्टियों से विशेष है। एक ओर सृजन, निर्माण और शिल्प के आराध्य भगवान विश्वकर्मा की जयंती है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन भी है। भगवान विश्वकर्मा हमें अपने कौशल, श्रम और सृजन से समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं और प्रधानमंत्री श्री मोदी का जीवन सेवा, समर्पण तथा राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान के परिश्रम से हमारे अन्न के भंडार भरते हैं और श्रमिक के श्रम से विकास की आधारभूत संरचनाएं आकार लेती हैं। खेत से लेकर कारखाने तक, निर्माण स्थल से लेकर उद्योगों तक हमारे किसान, श्रमिक, कारीगर और शिल्पकार छत्तीसगढ़ की प्रगति के वास्तविक भागीदार हैं। विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प इन्हीं श्रमवीरों के सामर्थ्य, कौशल और परिश्रम से साकार होगा। राज्य सरकार उनके श्रम के सम्मान के साथ उनके परिवारों के जीवन में समृद्धि, सुरक्षा और खुशहाली लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने माता परमेश्वरी, भगवान विश्वकर्मा और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और निरंतर प्रगति की कामना की। उन्होंने विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान विश्वकर्मा सृजन, कौशल और निर्माण के प्रतीक हैं। उनका संदेश हमें श्रम को सम्मान देने और अपने कौशल के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देता है।

सेवा और जनकल्याण को प्रधानमंत्री श्री मोदी ने बनाया शासन का आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्षों में गरीब, किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले अनेक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। गरीब परिवारों के लिए पक्का आवास, घर-घर शौचालय, बिजली, नल से जल और जन-धन खातों के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने जैसी पहलों ने करोड़ों लोगों के जीवन को आसान बनाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प देश के सामने रखा है। विकसित भारत का यह संकल्प केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य विकास और अवसरों का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तथा देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। इसी संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का विजन तैयार किया है। हमारा लक्ष्य ऐसा समृद्ध, आत्मनिर्भर और आधुनिक छत्तीसगढ़ बनाना है, जिसमें गांव हो या शहर, किसान हो या श्रमिक, युवा हो या महिला - हर किसी को आगे बढ़ने के समान अवसर प्राप्त हों।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से देशभर में सेवा संकल्प अभियान प्रारंभ हुआ है। यह अभियान सेवा को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनभागीदारी का व्यापक संकल्प बनाने का अवसर है। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि आज शाम हर परिवार अपने घर में ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर प्रधानमंत्री श्री मोदी के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करे।

श्रमिक के जीवन में सुरक्षा और परिवार में खुशहाली हमारा लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक केवल निर्माण कार्यों के सहभागी नहीं, बल्कि प्रदेश की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। इसलिए राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को प्राथमिकता देते हुए ऐसी योजनाएं संचालित कर रही है, जो श्रमिक और उसके परिवार को जीवन के अलग-अलग चरणों में सहारा प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों के लिए जन्म से लेकर बच्चों की शिक्षा, आजीविका और अन्य आवश्यकताओं तक विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा और सपनों से समझौता न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रमिक परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना संचालित की जा रही है। इसके अंतर्गत 200 बच्चों को निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने श्रमिकों से शासन की योजनाओं का पूरा लाभ लेने के लिए अपना पंजीयन अनिवार्य रूप से कराने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सरकार लगातार कदम उठा रही है। महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान कर उनके लिए स्वरोजगार और नियमित आय का साधन तैयार किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि श्रमिक परिवार केवल सहायता प्राप्त करने वाले परिवार न रहें, बल्कि अवसरों और संसाधनों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

किसानों की समृद्धि से समृद्ध होगा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में किसानों का महत्वपूर्ण स्थान है। किसान की समृद्धि से गांव समृद्ध होता है और गांव की समृद्धि से पूरा प्रदेश मजबूत होता है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। किसानों को दो वर्षों का बकाया धान बोनस भी प्रदान किया गया है। खेती के लिए सिंचाई सुविधा का विस्तार करने के उद्देश्य से प्रदेश में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। सरकार का प्रयास है कि खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, खेती की उत्पादकता बढ़े और किसानों की आय में निरंतर वृद्धि हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों और श्रमिकों की मेहनत को सम्मान देना ही भगवान विश्वकर्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा है। विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है, जब प्रदेश का अन्नदाता खुशहाल हो और श्रमवीर का परिवार सुरक्षित तथा समृद्ध हो।

माताओं-बहनों की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मिल रही नई शक्ति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की माताओं और बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जा रही है। इससे महिलाओं को अपनी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए आर्थिक संबल मिला है और परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल, स्वरोजगार और आजीविका के अवसरों से जोड़कर दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। स्व-सहायता समूहों सहित विभिन्न माध्यमों से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों का लगातार विस्तार किया जा रहा है।

बीरगांव में ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के साथ शहरों में भी आधुनिक और बेहतर नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए तेजी से कार्य कर रही है। नगरीय क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य अधोसंरचना के विकास के लिए नगरोत्थान सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बीरगांव नगर निगम क्षेत्र में पिछले ढाई वर्षों में लगभग 175 करोड़ रुपए के विकास कार्य किए गए हैं। इन कार्यों के माध्यम से क्षेत्र की अधोसंरचना मजबूत हो रही है और नागरिक सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी बीरगांव की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की विकास दृष्टि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। गांव, कस्बे, छोटे शहर और दूरस्थ जनजातीय अंचल समान रूप से हमारी प्राथमिकता में हैं। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक अच्छी सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की बुनियादी आवश्यकता है।

बस्तर में शांति के साथ खुल रहे विकास और रोजगार के नए द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। नियद नेल्ला नार जैसी पहल के माध्यम से दूरस्थ गांवों तक शासन की योजनाएं और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और वनोपज की दृष्टि से अपार संभावनाओं वाला क्षेत्र है। पर्यटन और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर इन संभावनाओं को स्थानीय युवाओं के रोजगार और जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि से जोड़ने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना के विस्तार के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के नए अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

उत्कृष्ट कार्य करने वाली 76 प्रतिभाओं का सम्मान

समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने सामाजिक, सांस्कृतिक, कला, साहित्य, समाजसेवा, खेल और विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 76 प्रतिभाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी सम्मानित प्रतिभाओं को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोग पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी प्रतिभा और उसके योगदान का सम्मान केवल उस व्यक्ति का सम्मान नहीं होता, बल्कि समाज में सकारात्मक कार्य, सृजनशीलता और उत्कृष्टता की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी बनता है। उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं से इसी ऊर्जा के साथ समाज और प्रदेश की प्रगति में अपना योगदान जारी रखने का आह्वान किया।

कार्यक्रम को कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों से अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम से पूर्व माता परमेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना कर प्रदेश के सभी श्रमिकों, कारीगरों, शिल्पकारों, तकनीशियनों और निर्माण से जुड़े कर्मयोगियों को विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, धरसींवा विधायक श्री अनुज शर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, किसान, श्रमिक, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नगरवासी उपस्थित थे।
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श्रमवीरों के परिश्रम और पसीने से हो रहा समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के श्रमवीर अपने परिश्रम, पुरुषार्थ और पसीने से समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं। गांवों के खेत-खलिहानों से लेकर शहरों की ऊंची इमारतों तक, सड़कों और पुलों से लेकर सिंचाई परियोजनाओं, उद्योगों और अधोसंरचना के निर्माण तक प्रदेश की प्रगति की हर तस्वीर में हमारे श्रमिक भाई-बहनों की मेहनत समाहित है। छत्तीसगढ़ ने अपने गठन के 25 वर्षों में विकास के जो नए प्रतिमान स्थापित किए हैं, उनके पीछे हमारे मेहनतकश हाथों का बड़ा योगदान है। यही हाथ आने वाले वर्षों में विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी साकार करेंगे।


मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेशभर से आए हजारों श्रमिक भाई-बहनों को विश्वकर्मा जयंती की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और भगवान विश्वकर्मा से छत्तीसगढ़ की सुख, शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा निर्माण और सृजन के आराध्य हैं। वे हमें श्रम के सम्मान और अपने हुनर पर गर्व करने की प्रेरणा देते हैं। सही मायनों में हमारे श्रमिक भाई-बहन ही विकसित छत्तीसगढ़ के विश्वकर्मा हैं। राज्य सरकार श्रमिकों के परिश्रम का सम्मान करने के साथ उनके जीवन में सुरक्षा, सुविधा और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की सोच स्पष्ट है कि विकास का लाभ उस श्रमिक तक भी पहुंचे, जिसके श्रम से विकास की नींव तैयार होती है। श्रमिक को उसके परिश्रम का पूरा सम्मान मिले, उसे सामाजिक सुरक्षा का भरोसा मिले, परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बने और उसके बच्चों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें - इसी उद्देश्य के साथ सरकार श्रमिक कल्याण की योजनाओं को लगातार विस्तार दे रही है।

श्रमिक हित में मुख्यमंत्री की तीन बड़ी घोषणाएं

मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में श्रमिक भाई-बहनों की सुविधा, आवागमन और स्वरोजगार को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।

मुख्यमंत्री ने शहरों में रोजगार की तलाश में विभिन्न स्थानों पर एकत्र होने वाले श्रमिकों के लिए सर्वसुविधायुक्त आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। इन केंद्रों में श्रमिकों के बैठने की समुचित व्यवस्था के साथ स्वच्छ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे काम की तलाश में शहर आने वाले श्रमिकों को सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध होगा।

मुख्यमंत्री ने पंजीकृत श्रमिकों के आवागमन को सुगम बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से ई-बाइक सहायता योजना प्रारंभ करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि काम के लिए प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों के लिए आवागमन की सुविधा सीधे तौर पर उनकी आजीविका और जीवन की सहजता से जुड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 50 हजार रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इससे परंपरागत रिक्शा चालकों को आधुनिक साधन अपनाने, अपनी आय बढ़ाने और स्वरोजगार को अधिक मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाना है। श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं को आत्मनिर्भरता और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराकर एक सशक्त श्रमिक परिवार का निर्माण करना सरकार की प्राथमिकता है।

1.43 लाख से अधिक श्रमिकों को 51.32 करोड़ रुपए से अधिक की सौगात

महासम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रम विभाग के विभिन्न मंडलों द्वारा संचालित 26 योजनाओं के अंतर्गत डीबीटी के माध्यम से 1 लाख 43 हजार से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में 51 करोड़ 32 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि अंतरित की। उन्होंने विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के हितग्राहियों को सहायता राशि एवं सामग्री का वितरण भी किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर उनके बच्चों की शिक्षा, विवाह सहायता और आर्थिक सशक्तीकरण तक जीवन के विभिन्न चरणों में ये योजनाएं श्रमिक परिवारों का संबल बन रही हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों तक पहुंचाई गई है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र श्रमिकों से श्रम विभाग में अपना पंजीयन कराने और योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र के साथ श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों को नई उड़ान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘श्रमेव जयते’ के मूलमंत्र को साकार करते हुए राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि संसाधनों की कमी किसी श्रमिक परिवार के प्रतिभावान बच्चे के सपनों की राह में बाधा न बने। श्रमिक का बच्चा भी देश के श्रेष्ठ विद्यालय में पढ़े, उच्च शिक्षा प्राप्त करे और अपनी प्रतिभा के बल पर जीवन में ऊंची उड़ान भरे - सरकार इसी संकल्प के साथ काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के पहले वर्ष 100 बच्चों को इसका लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों की शिक्षा का पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही पात्र विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने में भी सरकार सहयोग कर रही है।

मनिंदर की सफलता बनी श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों की मिसाल

महासम्मेलन में एक प्रेरक क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रमिक परिवार की प्रतिभाशाली बेटी मनिंदर कौर को लैपटॉप और एक लाख 75 हजार रुपए का चेक प्रदान किया। मनिंदर ने अपनी प्रतिभा और कठिन परिश्रम के बल पर जेईई परीक्षा उत्तीर्ण कर एनआईटी सूरत में प्रवेश सुनिश्चित किया है। उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई का पूरा खर्च अब श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने मनिंदर को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह सफलता केवल एक बेटी की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रेरणा है। आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा की उड़ान को सीमित न करें, इसके लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। सरकार उनके इस सपने को अपना संकल्प मानकर आगे बढ़ा रही है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार दिया जा रहा है।

100 श्रमिक दीदियों के हाथों में ई-रिक्शा की चाबी, आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान

मुख्यमंत्री श्री साय ने महासम्मेलन में दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी और हरी झंडी दिखाकर उन्हें रवाना किया। ई-रिक्शा प्राप्त करने वाली महिलाओं के चेहरे पर आत्मनिर्भर भविष्य का उत्साह दिखाई दिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय और श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने हितग्राही श्रीमती यशोदा विश्वकर्मा के ई-रिक्शा में सवारी भी की। मुख्यमंत्री ने सभी लाभार्थी महिलाओं से आत्मीय बातचीत की और उन्हें नए स्वरोजगार के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता पूरे परिवार को सशक्त बनाती है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक बहनों को ऐसे साधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं, जिनसे वे अपने परिश्रम के बल पर सम्मानजनक आय अर्जित कर सकें और परिवार की आर्थिक प्रगति में मजबूत भागीदार बनें।

श्रमिक बहनों के साथ बैठकर मुख्यमंत्री ने किया भोजन

राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन के दौरान आत्मीयता से भरा दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आईं श्रमिक बहनों के साथ बैठकर दोपहर के भोजन में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से सहजता से बातचीत की। उन्होंने उनके कामकाज, परिवार और बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने यह भी पूछा कि उन्हें श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ पात्र श्रमिक तक सरलता और समय पर पहुंचे। उन्होंने श्रमिक बहनों से संवाद के दौरान उनके अनुभव भी जाने। मुख्यमंत्री को अपने बीच बैठकर सहजता से भोजन करते और परिवार के सदस्य की तरह बातचीत करते देखकर श्रमिक बहनों में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

डिजिटल तकनीक से योजनाओं को बनाया जा रहा सरल और पारदर्शी

मुख्यमंत्री श्री साय ने महासम्मेलन में राज्य की नवीन उपकर कटौती वेबसाइट का शुभारंभ किया तथा पीवीसी एवं क्यूआर कोड युक्त नवीन श्रमिक पंजीयन कार्ड का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि श्रमिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इसी सोच के साथ पंजीयन से लेकर योजनाओं का लाभ पहुंचाने तक की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जा रहा है।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन नेशन-वन राशन कार्ड व्यवस्था से रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को बड़ी सुविधा मिली है। अब श्रमिक देश के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हुए भी राशन की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। इसी तरह पीएफ व्यवस्था में तकनीकी सुधारों से रोजगार या कार्यस्थल बदलने पर भी श्रमिकों के लिए खाते से जुड़ी सुविधाओं की निरंतरता आसान हुई है।

हजारों श्रमिकों के साथ मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

विश्वकर्मा जयंती के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर ने महासम्मेलन को विशेष स्वरूप दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पूरे छत्तीसगढ़ की ओर से प्रधानमंत्री श्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने महासम्मेलन में उपस्थित हजारों श्रमिक भाई-बहनों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। श्रमिकों ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में गरीब, किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की गई हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से भी अपने घरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित कर प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करने का आग्रह किया।

श्रमिकों तक समय पर पहुंच रहा योजनाओं का लाभ : श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन

श्रम एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि राज्य सरकार श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचा रही है। डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी हुई है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल पर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से श्रमिक परिवारों के बच्चों को प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। पहले 100 बच्चों को योजना का लाभ दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 200 बच्चों तक कर दिया गया है।

श्री देवांगन ने कहा कि दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत सहायता राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपए किया गया है। आज के कार्यक्रम में 100 श्रमिक दीदियों को ई-रिक्शा प्रदान किए गए हैं। यह पहल श्रमिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सरल, सुगम और पारदर्शी तरीके से श्रमिकों तक योजनाएं पहुंचाना लक्ष्य : डॉ. रामप्रताप सिंह

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों को शासन की योजनाओं से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को विभागीय योजनाओं की जानकारी मिले और उनका लाभ बिना किसी कठिनाई के प्राप्त हो।

उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अटल करियर निर्माण योजना भी संचालित की जा रही है। प्रदेश में अब तक 25 श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन कर बड़ी संख्या में श्रमिकों को योजनाओं और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि श्रमिक कल्याण में डिजिटल तकनीक के उपयोग की छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है और मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रदेश की डिजिटल पहल का प्रस्तुतीकरण किया गया।

श्रमिक परिवारों के सशक्तीकरण से मजबूत होगा छत्तीसगढ़ : सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए लोगों से अपने घर, आंगन और मोहल्लों में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने और महिलाओं को ई-रिक्शा के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ने जैसी पहल श्रमिक परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में रोजगार मेले का आयोजन कर लगभग तीन हजार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल, विभिन्न निगम-मंडलों के अध्यक्ष, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिक भाई-बहन उपस्थित थे।
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सेवा संकल्प अभियान के तहत ग्रामीणों के बीच पहुंचे पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्षों की समर्पित जनसेवा के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर हितग्राहियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत धनौली पहुंचकर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित परिवारों से मुलाकात की और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों की जानकारी ली।


मंत्री श्री अग्रवाल ने पीएम जनमन आवास योजना के हितग्राही श्री कार्तिक राम बैगा एवं श्री धीरपाल सिंह बैगा के नवनिर्मित आवासों का अवलोकन किया। उन्होंने दोनों परिवारों से चर्चा कर आवास मिलने के बाद उनके जीवन में आए बदलावों के बारे में जाना। हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।

सेवा संकल्प अभियान के दौरान ग्रामीणों से संवाद करते हुए मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्री धीरपाल सिंह बैगा की पत्नी श्रीमती भानुकला बैगा की सफलता की कहानी भी जानी। श्रीमती भानुकला बैगा ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हैं और बकरी पालन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपनी आय बढ़ा रही हैं।

स्वसहायता समूह से जुड़कर निरंतर मेहनत और आजीविका गतिविधियों के विस्तार के माध्यम से उन्होंने लखपति दीदी बनने की उपलब्धि हासिल की है। मंत्री श्री अग्रवाल ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना समाज के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने श्रीमती भानुकला बैगा को आगे भी अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार देने के लिए प्रोत्साहित किया।

आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही से जाना योजना का लाभ

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संवाद की कड़ी में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आयुष्मान भारत योजना के हितग्राही श्री नेमचंद गुर्जर से भी मुलाकात की। उन्होंने श्री गुर्जर एवं उनके परिवार से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और आयुष्मान भारत योजना से मिले लाभ के बारे में जाना।

श्री नेमचंद गुर्जर ने बताया कि उन्होंने आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उपचार का लाभ लिया है। उन्होंने रेबीज का टीकाकरण भी कराया है। मंत्री श्री अग्रवाल ने योजना से मिले लाभ की जानकारी लेते हुए परिवार के स्वास्थ्य का हालचाल जाना।

ग्रामीणों की आत्मीयता से अभिभूत हुए मंत्री श्री अग्रवाल

मुलाकात के दौरान गुर्जर परिवार ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें गरमा-गरम स्वादिष्ट भुट्टा खिलाया। ग्रामीण परिवार के इस सहज और आत्मीय आतिथ्य के लिए मंत्री श्री अग्रवाल ने परिवार का धन्यवाद किया। इस दौरान ग्रामीणों और मंत्री के बीच सहज संवाद का वातावरण बना रहा।

मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने ग्रामीणों से सेवा संकल्प अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह अभियान सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने ग्रामीणों से ‘आशीर्वाद का दीप’ जलाकर अभियान से जुड़ने और जनसेवा की भावना को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होता है, जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और लाभार्थी अपने अनुभव साझा कर दूसरे लोगों को भी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करें। सेवा संकल्प अभियान इसी जनभागीदारी और सेवा भावना को व्यापक बनाने का माध्यम है।

इस अवसर पर विधायक श्री प्रणव कुमार मरपची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, कलेक्टर श्री विजय दयाराम के., जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश मिश्रा सहित अनेक जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
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राज्यपाल श्री रमेन डेका से मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने की सौजन्य भेंट

 राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोक भवन में उच्च शिक्षा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

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AI क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार छत्तीसगढ़

 दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में छत्तीसगढ़ भी अब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार एआई को विकास, रोजगार और सुशासन के नए अवसरों से जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। खेती-किसानी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन तक हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग से रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित करते हुए हम विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।


500 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री एआई मिशन

        भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 500 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री एआई मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एआई तकनीक अपनाने वाला राज्य नहीं, बल्कि इसके उपयोग और नवाचार में सिरमौर बनाना है। इस मिशन के तहत प्रदेश में 100 एआई लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।

      योजना के अंतर्गत लगभग 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों को एआई के उपयोग से जोड़ा जाएगा। साथ ही, शासन की 50 से अधिक सेवाओं को एआई के जरिए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी तलाशने वाला) की बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी पैदा करने वाला) बनाने के लिए मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कृषि, स्वास्थ्य और प्रशासन में एआई का प्रयोग

      इस मिशन का दायरा केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए उतारा जा रहा है। कृषि मौसम, फसल, कीट और रोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से किसानों को समय पर सटीक सलाह मिल सकेगी। एआई आधारित तकनीक से जांच, रोग पहचान और स्वास्थ्य संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।

सुशासन एवं उद्योग

    सरकारी पोर्टलों (जैसे सेवा सेतु) के विस्तार और एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाया जा रहा है। वहीं उद्योगों में उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। कारखानों में रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के उपयोग से उत्पादन की गति बढ़ती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। AI सेंसर मशीनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और खराबी आने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे लागत बचती है। उद्योगों में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को समझने और 24X7 सहायता प्रदान करने के लिए AI संचालित टूल का उपयोग किया जाता है।

नवा रायपुर बन रहा तकनीक और एआई का नया हब

    नवा रायपुर को आईटी, एआई और डाटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डाटा सेंटर और एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। एनआईटी रायपुर और ट्रिपल आईटी (IIIT) नवा रायपुर में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनन, इस्पात, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

नवा रायपुर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर

      नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा।  प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा।
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जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने ‘सेवा संकल्प अभियान’ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘सेवा संकल्प अभियान’ जनकल्याण और जनभागीदारी का व्यापक अभियान बने। अभियान के अंतर्गत स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि अभियान के प्रत्येक कार्यक्रम के केंद्र में आम नागरिक और उसकी जरूरतें होनी चाहिए। पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ने, युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के करीब पहुंचाने और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए।


मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों से अभियान की तैयारियों की नियमित समीक्षा करने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ कार्यक्रमों को सुनियोजित ढंग से संपन्न कराने को कहा। उन्होंने कार्यक्रमों की पूर्व सूचना आम नागरिकों तक पहुंचाने और अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

सेवा सेतु शिविरों में पात्र हितग्राहियों को मौके पर मिलेगा योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘सेवा सेतु’ अभियान को जनकल्याण की दृष्टि से प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया। अभियान के अंतर्गत चयनित गांवों में स्वास्थ्य शिविर के साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को चिन्हित कर योजनाओं से जोड़ा जाएगा और उनकी समस्याओं का यथासंभव मौके पर निराकरण किया जाएगा।

शिविर स्थलों पर आवेदन प्राप्त करने के लिए काउंटर स्थापित किए जाएंगे। प्राप्त आवेदनों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी। जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव नहीं होगा, उनकी साप्ताहिक समीक्षा कर समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शिविर आयोजित होने से पहले ही संबंधित क्षेत्र के संभावित पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाए, ताकि शिविर के दौरान उन्हें योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जा सके। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी पहले से गांवों और नागरिकों तक पहुंचाई जाए, जिससे अधिक से अधिक लोग इनमें शामिल हो सकें।

रोजगार मेलों से युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कौशल विकास विभाग द्वारा आयोजित किए जाने वाले रोजगार मेलों को भी सेवा संकल्प अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोजगार मेलों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि युवाओं से आवेदन प्राप्त कर रोजगार के अवसरों से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जाए और चयनित युवाओं को शिविरों में नियुक्ति पत्र प्रदान किए जाएं।

आंगनबाड़ियों में पोषण और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर

‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, ‘मेरी पौष्टिक थाली’, चित्रकला प्रतियोगिता, न्योता भोज तथा फल एवं मिठाई वितरण जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने पोषण चौपालों में अधिक से अधिक माता-पिता की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने जीवन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं को भी सम्मानित किया जाएगा।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के लिए खिलौने उपलब्ध कराने में सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में भी नागरिकों को आंगनबाड़ियों में बच्चों के उपयोग के लिए खिलौने भेंट करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अभियान के दौरान प्रदेश के शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावकों, शाला प्रबंधन समितियों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने शाला प्रबंधन समितियों को इन कार्यक्रमों से सक्रिय रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को नुक्कड़ नाटकों जैसी रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। विशेष उपलब्धि प्राप्त दिव्यांग बच्चों को अपने हुनर और प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच उपलब्ध कराया जाएगा।

रक्तदान, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ेगी जनभागीदारी

‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के अंतर्गत रक्तदान, वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, स्वच्छता तथा जनसरोकार से जुड़ी 25 से अधिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। नदी घाटों की स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रमों के बाद भी स्वच्छता व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। ‘स्वच्छता ही सेवा’ के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाली स्वच्छता गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत होगा वृक्षारोपण

मुख्यमंत्री श्री साय ने अभियान के दौरान किए जाने वाले वृक्षारोपण को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरचनाओं, सार्वजनिक स्थलों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 17 अक्टूबर को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का समापन कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है। इस वर्ष प्रदेश में 2.5 करोड़ पौधे लगाने के निर्धारित लक्ष्य को भी पूरा किया जाएगा।

विकास के प्रतीक स्थलों को भी जनभागीदारी से जोड़ें

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान की वास्तविक सार्थकता तभी होगी, जब इसकी गतिविधियों का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। स्वास्थ्य शिविर में जरूरतमंद को उपचार मिले, पात्र परिवार योजनाओं से जुड़े, युवाओं को रोजगार मिले, बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिले और स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण में समाज की सक्रिय भागीदारी बढ़े।

उन्होंने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान को पूरी संवेदनशीलता और सुनियोजित कार्ययोजना के साथ संचालित करें तथा यह सुनिश्चित करें कि जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियों का अधिकतम लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचे।

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
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जोखिमपूर्ण भवनो की जांच में होगी लापरवाही, तो तय होगी जवाबदेही - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 विद्यार्थियों और नागरिकों के जीवन की सुरक्षा शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी केवल किसी घटना के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें दूर करना भी हमारी जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों तथा वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी जिलों में हॉस्टल, पीजी, कोचिंग सेंटर, स्कूल तथा बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश देते हुए कहा कि जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आएं, वहां समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित कराया जाए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने  कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में स्वयं इसकी नियमित निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि शासन के निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर दिखाई दे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्थित पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भवन, जिनकी स्थिति जोखिमपूर्ण है अथवा जिनसे किसी प्रकार की जनहानि की आशंका हो सकती है, उनकी पहचान कर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान हो और दुर्घटना की आशंका को पहले ही समाप्त कर दिया जाए। विशेष रूप से बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों के पालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जिलों में सुरक्षा से संबंधित निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। केवल शिकायत अथवा दुर्घटना सामने आने के बाद कार्रवाई करने की प्रवृत्ति के स्थान पर सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित करनी होगी।

अवैध और मिलावटी शराब के विरुद्ध प्रदेशभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश

मुख्यमंत्री श्री साय ने अधिकारियों को अवैध एवं मिलावटी शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। जिन क्षेत्रों अथवा स्थानों पर अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या मिलावट की आशंका हो, वहां संयुक्त टीमों के माध्यम से छापेमारी की जाए।

सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाएं निगरानी, दूसरे राज्यों से अवैध शराब की आवक पर लगे प्रभावी रोक


उन्होंने पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करते हुए संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब के निर्माण अथवा मिलावट में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा उदासीनता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देशित किया कि बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू किया जाए तथा जिलों में की गई कार्रवाई की नियमित समीक्षा भी सुनिश्चित की जाए।

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव श्री रजत बंसल, संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल- शशिकांत को एम्स रायपुर में कराया भर्ती

 छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशील पहल से धमतरी जिले के ग्राम देवपुर निवासी 29 वर्षीय शशिकांत भरत को बेहतर इलाज की नई उम्मीद मिली है। सोशल मीडिया के माध्यम से शशिकांत की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और उनसे दूरभाष पर बात कर कुशलक्षेम जाना।


         मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शशिकांत को 9 सितंबर की शाम अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), रायपुर में भर्ती कराया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने उनके उपचार के लिए 4 लाख रुपये की सहायता राशि भी स्वीकृत की है।

2016 में हुए हादसे के बाद से प्रभावित है स्वास्थ्य

       वर्ष 2016 में एक सड़क दुर्घटना के दौरान शशिकांत को गंभीर चोटें आई थीं, जिसके कारण वे करीब 50 दिनों तक कोमा में रहे। दुर्घटना में सर्वाइकल की समस्या उत्पन्न होने से उनके हाथ-पांव की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। लंबे समय तक विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पाया था।

शशिकांत ने जताया आभार

        मुख्यमंत्री से बातचीत और तुरंत मिली चिकित्सकीय सहायता के बाद शशिकांत ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं फोन कर हाल-चाल पूछना और एम्स में इलाज के साथ 4 लाख रुपये की सहायता देना उनके और उनके परिवार के लिए बहुत बड़ा संबल है।
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नुआखाई, महाअष्टमी और गोवर्धन पूजा के अवसर पर शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं रहेंगी बंद

 सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा जारी आदेश के तहत रायपुर जिले में तीन स्थानीय अवकाश घोषित किए हैं। यह अवकाश रायपुर जिले, शहर (राजधानी) स्थित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं में लागू होंगे।


        जारी आदेश के अनुसार नुआखाई पर्व के लिए 15 सितंबर 2026 (मंगलवार), महाअष्टमी के लिए 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) तथा गोवर्धन पूजा (दीपावली के दूसरे दिन) के लिए 9 नवंबर 2026 (सोमवार) को स्थानीय अवकाश रहेगा। जारी आदेश के अनुसार ये अवकाश रायपुर जिले के अंतर्गत संबंधित शासकीय कार्यालयों एवं संस्थाओं पर लागू होंगे।
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