<rss xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" version="2.0"><channel><title>Chhattisgarh Darpan Feed</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com</link><description>Chhattisgarh Darpan Feed Description</description><item><title>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 67.20 लाख माताओं और बहनों के खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए 630.55 करोड़ रुपये</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=12007</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 20 हजार 125 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 630 करोड़ 55 लाख 54 हजार 300 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार तथा संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव उपस्थित थीं।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की उन प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब माताएं और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तब परिवार मजबूत होता है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज विकास की नई दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए मातृशक्ति का सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह योजना केवल प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। प्रदेश के लाखों परिवारों में यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोग हो रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भूमिका और अधिक सशक्त हुई है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रही हैं। कई माताएं अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में नियमित निवेश कर रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, किराना दुकान, सब्जी विक्रय, पशुपालन, अगरबत्ती निर्माण तथा अन्य छोटे स्वरोजगार शुरू कर अपनी आय बढ़ाई है। इससे वे न केवल परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। महतारी वंदन योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसमें हर महीने बिना एक हजार रुपए की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। डीबीटी व्यवस्था ने पारदर्शिता बढ़ाई है और महिलाओं में शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वित्तीय समावेशन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार बनकर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान कर रही है।


1 मार्च 2024 से पूरे प्रदेश में लागू है योजना : 30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान


महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। आज जारी की गई 30वीं किस्त के बाद योजना के अंतर्गत वितरित कुल राशि बढ़कर 19 हजार 444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक हो गई है।महतारी वंदन योजना का प्रभाव अब प्रदेश के लाखों परिवारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है, घरेलू निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है। अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करना प्रारंभ किया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण ही समावेशी विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। महतारी वंदन योजना इसी सोच को साकार करते हुए मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।</description><guid>12007</guid><pubDate>07-Aug-2026 8:53:37 pm</pubDate></item><item><title>कोसा की चमक अब वैश्विक बाजार तक : मुख्यमंत्री ने लॉन्च किया छत्तीसगढ़ का प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड कोशल फैब</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=12006</link><description> मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के विभिन्न हितग्राहियों तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ करते हुए उसके लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का भी शुभारंभ किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों, विशेषकर बुनकरों एवं शिल्पकारों को, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में इस दिवस को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई तथा प्रदेश के पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा उत्पादों को 'लोकल टू ग्लोबल' की नई पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिज़ाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग, विपणन तथा नए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि उनकी सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अंतर्गत किए गए अधिकांश वादों को राज्य सरकार ने पूरा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। किसानों को धान खरीदी की अंतर राशि का भुगतान, भूमिहीन कृषि मजदूरों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता, महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं का आर्थिक सशक्तीकरण तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए चरण पादुका योजना का पुनः संचालन सरकार की जनकल्याणकारी सोच का प्रमाण है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के 50 हजार से अधिक श्रद्धालु प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचार-मुक्त शासन व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध है। ई-ऑफिस व्यवस्था, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों को समयबद्ध, पारदर्शी और घर बैठे शासकीय सेवाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना तथा आत्मनिर्भर और समृद्ध छत्तीसगढ़ का निर्माण करना है।


बुनकरों के लिए सुशासन सरकार की बड़ी पहल


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों एवं शिल्पकारों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में आयोजित 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई, जिससे बुनकरों को बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे ध्यान में रखते हुए पिछले ढाई वर्षों में 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा पाँच विक्रय भंडारों तथा केंद्रीय वस्त्रागार के माध्यम से विभिन्न शासकीय विभागों को 93 करोड़ रुपये के वस्त्र उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपये के वस्त्रों की शासकीय खरीदी कर उन्हें आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में देश के पाँच प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। वहीं, रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल स्थानीय उत्पादों को आधुनिक विपणन मंच उपलब्ध कराएगा।


उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना से प्रदेश के युवाओं को डिजाइन एवं टेक्सटाइल क्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और छत्तीसगढ़ का हैंडलूम उद्योग नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।


विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया बुनकरों का उत्साहवर्धन


विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में लगभग 1 लाख 20 हजार परिवार हथकरघा एवं इससे संबंधित गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की शुरुआत किए जाने से इस क्षेत्र को नई पहचान और नई ऊर्जा मिली है।


उन्होंने सभी नागरिकों से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने का आग्रह करते हुए कहा कि बुनकरों की मेहनत, उनकी कला और हमारी समृद्ध परंपरा को जीवित रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।


ग्रामोद्योग मंत्री ने स्वदेशी आंदोलन की विरासत को किया याद


ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि 7 अगस्त 1905 को प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन ने देश में आत्मनिर्भरता की अलख जगाई थी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी का देशभर में विशिष्ट स्थान है और राज्य सरकार हथकरघा, हस्तशिल्प तथा ग्रामोद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।


उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बुनकरों, शिल्पकारों और स्थानीय उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराने तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।




मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी एवं स्टॉलों का अवलोकन किया, खरीदी कोसा साड़ी


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम तथा माटीकला बोर्ड सहित विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कोसा, खादी, हस्तशिल्प, मृद्शिल्प एवं अन्य पारंपरिक उत्पादों का अवलोकन करते हुए कारीगरों से संवाद किया तथा उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी ली।


मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अधिकाधिक अपनाने और प्रोत्साहित करने का आह्वान किया। प्रदर्शनी के दौरान उन्होंने हथकरघा स्टॉल से स्वयं तत्काल भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद ही बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सबसे बड़ा सम्मान है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय कदम से कार्यक्रम में उपस्थित बुनकरों और महिला कारीगरों का उत्साह दोगुना हो गया।


आत्मसमर्पित महिलाओं का रैंप वॉक बना आकर्षण का केंद्र


कार्यक्रम का सबसे प्रेरक और भावनात्मक क्षण वह रहा, जब बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क एवं अन्य हैंडलूम परिधानों का आकर्षक प्रदर्शन किया। यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ती महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मानजनक पुनर्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर की सशक्त अभिव्यक्ति थी। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित महिलाओं से आत्मीय संवाद किया, उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उल्लेखनीय है कि इनमें से लगभग सभी महिलाएँ पहली बार रायपुर पहुँची थीं। यह अनुभव उनके जीवन की अविस्मरणीय स्मृतियों का हिस्सा बन गया।


मुख्यमंत्री ने 'कोशल फैब' प्रीमियम ब्रांड का शुभारंभ किया


कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड 'कोशल फैब' का शुभारंभ किया गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ब्रांड के लोगो एवं कैटलॉग का विमोचन भी किया। 'लूम टू लग्जरी' की अवधारणा पर आधारित यह प्रीमियम ब्रांड छत्तीसगढ़ के कोसा एवं पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने तथा उन्हें वैश्विक स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर एवं अन्य नवाचारों का शुभारंभ


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ द्वारा एनआईटी के सहयोग से विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया गया। इस डिजिटल पहल से उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन तथा वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।


इस अवसर पर राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई एवं बाँधनी रंगाई विषयक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। साथ ही जशपुर जिले के गोरिया में स्थापित होने वाली ग्लेजिंग यूनिट का शुभारंभ भी किया गया।


कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्रामोद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। उन्होंने कक्षा 10वीं एवं 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। साथ ही 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि देकर उनके उत्कृष्ट योगदान का सम्मान किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हथकरघा संचालनालय के माध्यम से 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त पाँच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई तथा 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए। साइटसेवर्स इंडिया के सहयोग से नेत्र परीक्षण कराने वाले बुनकरों को चश्मों का भी वितरण किया गया। रेशम संचालनालय द्वारा सिल्क समग्र योजना के अंतर्गत 21 रेशम कृषकों को सहायता राशि प्रदान की गई। वहीं मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के हितग्राहियों को अनुदान राशि वितरित की गई।


इसी प्रकार हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट तथा माटीकला बोर्ड द्वारा 70 पंजीकृत माटी शिल्पियों को विद्युत चाक प्रदान किए गए, जिससे उनके उत्पादन और आजीविका को नई गति मिलेगी।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय स्व. बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार तथा राजराजेश्वरी करुणामाता हथकरघा प्रोत्साहन पुरस्कार से सम्मानित किया।


'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान से जुड़ने की अपील


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा 'सेल्फी विद स्वदेशी' अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद न केवल बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका को सशक्त बनाती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी उत्पाद खरीदकर उसके साथ सोशल मीडिया पर सेल्फी साझा करने वाले प्रत्येक जिले के चयनित प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक लोगों से इस अभियान में सहभागिता कर स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन देने का आग्रह किया।


कार्यक्रम में उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा बुनकर संघ के अध्यक्ष श्री भोजराम देवांगन, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश पांडेय, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, संस्कृत विद्या मंडलम के अध्यक्ष श्री राजेश राजपूत, सचिव श्री राजेश सिंह राणा, श्री चुन्नीलाल साहू सहित जनप्रतिनिधिगण तथा बड़ी संख्या में बुनकर, शिल्पकार और कारीगर उपस्थित थे।</description><guid>12006</guid><pubDate>07-Aug-2026 8:52:01 pm</pubDate></item><item><title>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दिया स्वदेशी अपनाने का संदेश</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/loveyoulife.php?articleid=12005</link><description>राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा हथकरघा से निर्मित वस्तुओं के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान से जुड़ा जन आंदोलन है।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के कुशल बुनकरों द्वारा निर्मित पारंपरिक गमछा धारण कर प्रदेश की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह गमछा केवल एक परिधान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, श्रम, परंपरा और स्थानीय शिल्प कौशल का जीवंत प्रतीक है।


श्री अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी और हथकरघा उत्पादों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब हम स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का उपयोग करते हैं, तब हम न केवल उनकी आजीविका को सशक्त बनाते हैं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक नागरिक का यह छोटा-सा प्रयास आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में बड़ा योगदान सिद्ध होगा।


मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकर अपनी पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्पकौशल और रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। ऐसे प्रतिभाशाली शिल्पकारों का उत्साहवर्धन करना हम सबका सामूहिक दायित्व है।


श्री अग्रवाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पाद के साथ वीडियो अथवा चित्र साझा करने और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस अभियान से जुड़ने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस जनभागीदारी से देश-दुनिया तक हमारे बुनकरों की अद्भुत कला, उनकी मेहनत और भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा को नई पहचान मिलेगी।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी स्वदेशी अपनाने के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएंगे तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।</description><guid>12005</guid><pubDate>07-Aug-2026 7:56:58 pm</pubDate></item><item><title>समाज की एकजुटता सामाजिक विकास की सबसे बड़ी शक्ति: श्री राजेश अग्रवाल</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/loveyoulife.php?articleid=12004</link><description>पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर में आयोजित रजवार समाज की महत्वपूर्ण बैठक एवं सम्मान समारोह में शामिल होकर समाज के वरिष्ठजनों, माताओं, बहनों और युवाओं से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर समाज की ओर से उनका पुष्पमालाओं से स्वागत एवं सम्मान किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न सामाजिक एवं विकास संबंधी विषयों पर मंत्री को अवगत कराया और समाज के उत्थान के लिए आवश्यक पहल की अपेक्षा व्यक्त की।


बैठक को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता, शिक्षा और आपसी सहयोग में निहित होती है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए तथा वरिष्ठजनों के अनुभवों का लाभ लेकर नई पीढ़ी को संगठित एवं संस्कारित करना समय की आवश्यकता है।


मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समाज से जुड़े जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने सामाजिक समरसता बनाए रखने, परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा शिक्षा के स्तर को लगातार बेहतर बनाने का आह्वान किया।


इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने कहा कि रजवार समाज की बैठक में सम्मिलित होकर समाज के सभी वरिष्ठजनों, माताओं, बहनों एवं युवाओं से आत्मीय भेंट का अवसर मिला। इस दौरान आप सभी द्वारा दिए गए स्नेह, सम्मान और आत्मीय आतिथ्य के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। रजवार समाज का छत्तीसगढ़ के सामाजिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और जनसेवा में योगदान सदैव प्रेरणादायी एवं अतुलनीय रहा है। रजवार समाज के सभी सम्मानित सदस्यों का हृदय से अभिनंदन एवं शुभकामनाएँ।


बैठक में समाज के वक्ताओं ने संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सहयोग, युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही।


सम्मेलन में उपस्थित समाजजनों ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए समाज के विकास एवं मार्गदर्शन में निरंतर सहयोग की अपेक्षा जताई। इस पर मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शासन और समाज को मिलकर कार्य करना होगा, तभी समावेशी और सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।


कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, संगठन की मजबूती, सामाजिक सद्भाव और विकास के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने इस आयोजन को सामाजिक जागरूकता, संगठनात्मक सशक्तीकरण और नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।</description><guid>12004</guid><pubDate>07-Aug-2026 7:55:46 pm</pubDate></item><item><title>26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा जीपीएम, 18 से 21 अगस्त तक जुटेंगे प्रदेशभर के खिलाड़ी</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/sport.php?articleid=12003</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में खेल संस्कृति को नई गति मिल रही है। खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से राज्य सरकार लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी कड़ी में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 18 से 21 अगस्त तक आयोजित होने वाली 26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता की मेजबानी करेगा। चार दिवसीय इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में प्रदेश के पांचों संभागों से 14 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 540 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और खेल कौशल का प्रदर्शन करेंगे।
राज्य सरकार खेलों को केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवन शैली का सशक्त आधार मानती है। शालेय स्तर पर आयोजित होने वाली ऐसी प्रतियोगिताएं युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने के साथ-साथ बड़े मंचों तक पहुंचने का अवसर प्रदान करती हैं।


चार खेलों की स्पर्धाओं से गूंजेगा जीपीएम


प्रतियोगिता के दौरान जिम्नास्टिक (बालक एवं बालिका), क्रिकेट (बालक), ताईक्वांडो (बालक एवं बालिका) तथा कबड्डी (बालिका) की स्पर्धाएं आयोजित होंगी। प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी पांचों संभागों के खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं अधिकारी सहभागिता करेंगे। आयोजन से खिलाड़ियों में प्रतिस्पर्धा की भावना, टीम भावना और खेल उत्कृष्टता को नई दिशा मिलेगी।


उत्कृष्ट आयोजन के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह तैयार


प्रतियोगिता के सफल एवं गरिमामय आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक लेकर तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय-सीमा में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि राज्यभर से आने वाले खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अधिकारियों को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।


सुरक्षा से लेकर आवास और चिकित्सा तक हर व्यवस्था पर विशेष ध्यान


बैठक में खेल स्थलों के चयन, खिलाड़ियों के आवास एवं भोजन, परिवहन, स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा सुविधा, पेयजल, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात प्रबंधन तथा उद्घाटन एवं समापन समारोह की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने सभी विभागों को सौंपे गए दायित्वों का प्रभावी निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश मिश्रा, जिला शिक्षा अधिकारी श्री रजनीश तिवारी सहित खेल एवं युवा कल्याण, वन, स्वास्थ्य, आदिवासी विकास, लोक निर्माण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, विद्युत, खाद्य, परिवहन तथा नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह प्रतियोगिता न केवल प्रदेश की उभरती खेल प्रतिभाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगी, बल्कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को राज्य के प्रमुख खेल आयोजनों के सफल मेजबान के रूप में नई पहचान भी दिलाएगी।</description><guid>12003</guid><pubDate>07-Aug-2026 7:52:24 pm</pubDate></item><item><title>उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद नांदघाट-मुंगेली रोड होगा फोरलेन, राज्य शासन ने मंजूर किए 21.81 करोड़ राशि की स्वीकृति पत्र जारी</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=12002</link><description>राज्य शासन ने बेमेतरा जिले के नांदघाट से मुंगेली जिला मुख्यालय तक टू-लेन सड़क के फोरलेन में उन्नयन के लिए 21 करोड़ 81 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 36.40 किमी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।


उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।


लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है।


कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी। निर्माण कार्य की समयावधि में वृद्धि (Time Extension) नियमानुसार अर्थदंड सहित अधिरोपित करने के निर्देश दिए गए हैं।</description><guid>12002</guid><pubDate>07-Aug-2026 7:49:27 pm</pubDate></item><item><title>ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) ने समावेशी ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ की साझेदारी</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=12001</link><description>छठे 'इंडिया रूरल कोलोक्वी' (भारत ग्रामीण संगोष्ठी) के छत्तीसगढ़ चैप्टर की शुरुआत इस ज़ोरदार अपील के साथ हुई कि छोटे किसानों और महिलाओं के नेतृत्व वाले संस्थानों को ग्रामीण बदलाव की नींव के तौर पर पहचाना जाए। टीआरआई और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच यह सहयोग पूरे राज्य में समावेशी और सामुदायिक नेतृत्व में होने वाले ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।


रायपुर में गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री के सचिव और 'गुड गवर्नेस एंड कन्वर्जेस' विभाग के सचिव, राहुल भगत ने कहा, छोटे किसान और स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्रामीण बदलाव की असली प्रेरक हैं। पहला कदम उठाने का उनका साहस असंख्य लोगों को बदलाव लाने वाला (चेंजमेकर) बनने के लिए प्रेरित करता है।


इस चर्चा में नया रायपुर के ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं, नागरिक समाज संगठनों और विकास कार्यों से जुड़े लोगों को एक साथ लाने का काम किया गया। इससे पता चला कि कैसे मज़बूत ज़मीनी नेतृत्व, जवाबदेह संस्थान और सामुदायिक ज्ञान मिलकर ग्रामीण छत्तीसगढ़ के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान 'ग्रीन इकोनॉमिक पाथवेज़ - छत्तीसगढ़' स्टडी रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें जलवायु-अनुकूल और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था निर्माण के तरीकों पर प्रकाश डाला गया।


मुख्य भाषण देते हुए, पद्मश्री पुरस्कार विजेता श्री बुद्री थाती ने स्थानीय समुदायों और प्रकृति के बीच तालमेल को फिर से स्थापित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, जहाँ कभी बदलाव मुश्किल लगता था, वहाँ प्यार और सच्ची कोशिशों से बदलाव आया। हर इंसान प्यार चाहता है और उन्हें बस ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत होती है जो उन्हें सच में समझे।


मजबूत स्थानीय संस्थानों के महत्व पर बात करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टिकाऊ ग्रामीण विकास ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, हर सरकारी योजना का असली क्रियान्वयन गांव के स्तर पर होता है। अगर गाँव के संस्थान मजबूत नहीं होंगे, तो विकास की गति सीमित ही रहेगी।


वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए, यह लैंगिक समानता पर केंद्रित अपने दृष्टिकोण को और मजबूत कर रहा है तथा समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडलों का विस्तार कर ग्रामीण भारत में समान और सतत विकास को आगे बढ़ा रहा है।


इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, टीआरआई ने 'विकसित छत्तीसगढ़ के लिए जमीनी नेतृत्व' विषय पर भारत ग्रामीण संगोष्ठी के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। नीति-निर्माताओं, विचारकों और जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों ने इस बात पर अपने विचार साझा किए कि ग्रामीण बदलाव की अगली पीढ़ी का नेतृत्व कौन करेगा। इसमें यह भी चर्चा की गई कि सार्वजनिक संस्थान समुदायों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां कैसे तैयार कर सकते हैं।


इस गोष्ठी का एक मुख्य आकर्षण 'ग्राम संवादः ग्रामीण भारत का भविष्य गढ़ते समुदाय' था। यह अपनी तरह की पहली चर्चा थी जिसमें नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में समुदाय की आवाज़ को रखा गया। महिला लीडर्स, प्रगतिशील किसानों, चुने हुए प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के संस्थानों ने आजीविका बेहतर बनाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और एक सशक्त समुदाय बनाने को ले कर अपने अनुभव साझा किए। साथ ही, उन्होंने असल जीवन की सच्चाइयों पर आधारित व्यावहारिक समाधान भी पेश किए। इन जानकारियों के आधार पर, 'समाधान मंथन पॉलिसी इनोवेशन लैब' ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की टीमों को एक साथ लाकर सामुदायिक ज्ञान से प्रेरित नीतिगत प्रस्ताव तैयार किए। इन विचारों को सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदाय के प्रतिनिधियों की एक प्रतिष्ठित जूरी के समक्ष रखा गया। इससे यह पता चला कि जमीनी स्तर के अनुभव किस तरह बड़े पैमाने पर लागू होने वाली सार्वजनिक नीति-निर्माण और ग्रामीण बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।


छत्तीसगढ़ संवाद में राज्य के ग्रामीण भविष्य को आकार देने में सामुदायिक नेतृत्व की शक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान मजबूत स्थानीय शासन, उत्तरदायी सार्वजनिक संस्थाओं, समुदाय-आधारित नीतिगत समाधानों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी पर चर्चा की गई। साथ ही, जमीनी स्तर के ज्ञान को समावेशी ग्रामीण परिवर्तन के लिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले तरीकों में बदलने पर भी जोर दिया गया।


राहुल हीरेमठ, प्रोफेसर, आईआईएम रायपुर, सत्य लता मिरी, अध्यक्ष, जिला परिषद, जांजगीर चांपा, हिना अनिमेष नेताम, निदेशक, जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेनका चंद्राकर, उपायुक्त, जनजातीय विभाग, अश्विनी देवांगन, मिशन निदेशक, एसआरएलएम, डॉ. संजीव पाराशर, प्रभारी निदेशक, आईआईएम रायपुर ने भी विभिन्न सत्रों के दौरान अपना संबोधन दिया।


भारत ग्रामीण संगोष्ठी के बारे में:


ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) का प्रमुख आयोजन भारत ग्रामीण संगोष्ठी वर्ष 2026 में अपने छठे संस्करण के साथ वापस आ रहा है। एक वर्चुअल श्रृंखला के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज एक राष्ट्रीय, बहुराज्यीय मंच बन चुका है, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों को एक साथ लाकर ग्रामीण भारत के लिए नए विचारों और ठोस कार्य योजनाओं पर चर्चा करता है। इस वर्ष आठ दिनों तक चलने वाली यह संगोष्ठी असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें आजीविका, सुशासन, जलवायु अनुकूलता, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इन विचार-विमर्शों से प्राप्त सुझावों को ग्रामीण भारत के समृद्ध भविष्य के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाओं में बदला जाएगा।</description><guid>12001</guid><pubDate>05-Aug-2026 9:13:11 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम (FRA) एवं पेसा कानून (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक संपन्न</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=12000</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act-FRA) एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के बेहतर समन्वय, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास के लिए आवश्यक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेसा कानून का क्रियान्वयन ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। ऐसे में उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून का प्रभावी और आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करता है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूती, रोजगार के अवसरों के विस्तार तथा संतुलित एवं सतत विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे विकास और जनभागीदारी साथ-साथ आगे बढ़ें।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA), दोनों कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।


बैठक में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य ग्राम स्वशासन को मजबूत करना, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की सहभागिता बढ़ाना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुँचाई जाए तथा किसी भी प्रकार के भ्रम का तथ्यात्मक निराकरण किया जाए।


बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के तहत पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (Community Forest Resource Rights-CFRR) की मान्यता, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित किए जाने की प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा की गई।


राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी समन्वय का कार्य


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पेसा कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा एक ही विषय पर बनाए गए अलग-अलग नियमों एवं प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय एवं अभिसरण सुनिश्चित करेगी। इस समिति में संबंधित विभागों के मंत्री एवं सचिव सदस्य होंगे और यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।


उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वर्तमान में जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाए, ताकि जिला स्तर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।


बैठक में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, विधायक श्री नीलकंठ नेताम तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।


बैठक में मुख्य सचिव श्री विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन श्री मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग श्री सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग श्रीमती शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF) श्री अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग श्रीमती प्रियंका ऋचा महोबिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</description><guid>12000</guid><pubDate>05-Aug-2026 9:11:06 pm</pubDate></item><item><title>विश्व स्तनपान सप्ताह : स्वास्थ्य मंत्री करेंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/loveyoulife.php?articleid=11999</link><description>विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) एवं राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एसएचएसआरसी) के सहयोग से 6 अगस्त 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार के नए सभागार में आयोजित होगा।


कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे। सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री अमित कटारिया तथा आयुक्त-सह-संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं श्री संजीव झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।


कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ दुग्ध के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, नवजात एवं शिशुओं के समुचित पोषण और बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा विशेषज्ञों, नर्सिंग अधिकारियों, मितानिनों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी।


कार्यक्रम में राज्य की 10 ऐसी माताओं को 'माता यशोदा सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने मातृ दुग्ध का दान कर अथवा अन्य शिशुओं को स्तनपान कराकर मानवता और मातृत्व की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है। ये वे शिशु हैं जिनकी माताओं में पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं हो सका अथवा जिनकी माता का निधन हो चुका है।


इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन राज्य के पहले मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक) की स्थापना की घोषणा भी की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे नवजात एवं शिशुओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध कराना है, जिन्हें किसी कारणवश अपनी माता का दूध प्राप्त नहीं हो पाता।


स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है। यह न केवल शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से समुदाय में स्तनपान के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने तथा माताओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया जा रहा है।


स्वास्थ्य विभाग ने मीडिया प्रतिनिधियों एवं आमजन से कार्यक्रम में सहभागिता कर स्तनपान के महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।</description><guid>11999</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:25:37 pm</pubDate></item><item><title>वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया सम्मानित, 13,912 आवेदनों के सफल निराकरण से बनाया रिकॉर्ड</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/loveyoulife.php?articleid=11998</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं को आमजन तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पहुंचाने की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सेवा सेतु केंद्र में कार्यरत वीएलई (Village Level Entrepreneur) श्री निर्दोष लकड़ा ने वर्ष 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के टॉप ट्रांजैक्शन वीएलई बनने का गौरव प्राप्त किया है।


रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने श्री निर्दोष लकड़ा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने में उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना है।


वर्ष 2025-26 के दौरान श्री निर्दोष लकड़ा ने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 13,912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल बलरामपुर-रामानुजगंज जिले को गौरवान्वित किया है, बल्कि प्रदेश में डिजिटल सुशासन की दिशा में एक नई मिसाल भी स्थापित की है।


जिले में सेवा सेतु पोर्टल के प्रभावी संचालन के कारण अब ग्रामीण नागरिकों को आय, जाति, निवास, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित अनेक शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर ही सहज, पारदर्शी और निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध हो रही हैं।


निर्दोष लकड़ा ने तकनीक का प्रभावी उपयोग, कार्य के प्रति समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ हजारों ग्रामीण परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की है। उनका सेवा केंद्र ग्रामीणों के लिए केवल एक सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि भरोसेमंद समाधान का माध्यम बन चुका है।


सम्मान प्राप्त करने के बाद श्री निर्दोष लकड़ा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से प्रत्येक नागरिक का जीवन आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि जब लोगों का समय और संसाधन बचते हैं तथा उन्हें बिना किसी परेशानी के सेवाएं मिलती हैं, तभी डिजिटल भारत और सुशासन का उद्देश्य साकार होता है।


बलरामपुर जिले में सेवा सेतु पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन एवं डिजिटल सेवा विस्तार की मंशा को धरातल पर साकार करने का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।</description><guid>11998</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:20:52 pm</pubDate></item><item><title>डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बिलासपुर केंद्रीय जेल का किया आकस्मिक निरीक्षण</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/crimepatrol.php?articleid=11997</link><description>जेल महानिदेशक (डीजी जेल) श्री हिमांशु गुप्ता द्वारा आज बिलासपुर स्थित केंद्रीय जेल का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, कैदियों की समस्याएं सुनीं और जेल के सुदृढ़ीकरण तथा कैदियों के कल्याण हेतु विभिन्न आधुनिक सुविधाओं की स्वीकृति प्रदान की।


डीजी जेल ने खुद ली अंग्रेजी की क्लास


   निरीक्षण के दौरान डीजी जेल श्री हिमांशु गुप्ता ने एक अनोखी पहल करते हुए कैदियों की अंग्रेजी की क्लास ली और उन्हें पढ़ाई तथा भाषा सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स दिए। इसके साथ ही उन्होंने कैदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।


जेल को मिलीं ये नई सुविधाएं एवं स्वीकृतियां


   जेल में उद्योग संचालन के लिए कलर ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन तथा एलईडी बल्ब एवं ट्यूबलाइट निर्माण हेतु मशीन सेटअप की स्वीकृति दी गई। कैदियों की शिक्षा के लिए स्मार्ट बोर्ड तथा जेल लाइब्रेरी के लिए प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों (टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, हितवाद आदि) की उपलब्धता। कैदियों के लिए 20 नग आरओ वाटर प्यूरीफायर, पाकशाला (रसोई) हेतु ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन तथा कैदियों के लिए 2,000 थाली सेट की व्यवस्था के निर्देश दिए। महिला जेल परिसर के लिए इन्वर्टर की स्वीकृति शामिल हैं।


   इस निरीक्षण के दौरान डीआईजी जेल श्री एस.एस. तिग्गा, जेल अधीक्षक श्री खोमेश मंडावी, जेल चिकित्सक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</description><guid>11997</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:15:42 pm</pubDate></item><item><title>कर्तव्यनिष्ठ होकर जनसेवा एवं सुशासन के लिए जमीनी स्तर पर करें बेहतर कार्य : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11996</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित मख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवचयनित अधिकारियों को उनके भावी प्रशासनिक दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन होना उपलब्धि अवश्य है, लेकिन वास्तविक सफलता तब है जब अधिकारी अपने पद का उपयोग जनसेवा, सुशासन और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए करें।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी शासन और जनता के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उनके निर्णय, व्यवहार और कार्यशैली से आम नागरिक का शासन के प्रति विश्वास मजबूत होता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को संवेदनशीलता, पारदर्शिता, ईमानदारी और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करते समय जनता की अपेक्षाओं और स्थानीय परिस्थितियों को समझना अत्यंत आवश्यक है। अधिकारी यदि लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समयबद्ध समाधान की दिशा में कार्य करें, तो प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास स्वतः बढ़ता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है। यहां प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा, वन संपदा, उर्वर भूमि और मजबूत ऊर्जा क्षमता उपलब्ध है। इन संसाधनों का समुचित उपयोग करते हुए राज्य को विकसित बनाने में प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास में लंबे समय तक नक्सलवाद बड़ी बाधा रहा, लेकिन सुरक्षा बलों के साहस, केंद्र और राज्य सरकार की समन्वित रणनीति तथा जनविश्वास के कारण अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। जिन क्षेत्रों में कभी विकास पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पेयजल और अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें विशेष रूप से दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में कार्य करने का अवसर मिलेगा। ऐसे क्षेत्रों में केवल प्रशासनिक दायित्व निभाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भाव भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों को चाहिए कि वे शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करें।


मुख्यमंत्री ने सुशासन के महत्व पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना की गई है। साथ ही ई-ऑफिस प्रणाली लागू कर शासन की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, दक्ष और समयबद्ध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों को सरल बनाने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजस्व से जुड़े विषय आम नागरिकों के जीवन से सीधे जुड़े होते हैं। भूमि, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और अन्य राजस्व मामलों में लोगों को समय पर राहत मिलना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासनिक अधिकारी की छोटी-सी पहल भी किसी परिवार की बड़ी समस्या का समाधान कर सकती है। इसलिए अधिकारी संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएं और प्रत्येक प्रकरण को मानवीय दृष्टि से देखें।


उन्होंने अधिकारियों को व्यवहार में विनम्रता और संयम बनाए रखने की सलाह देते हुए कहा कि लोगों की शिकायतों को सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। कई बार केवल धैर्यपूर्वक शिकायत सुन लेने से ही आधी समस्या समाप्त हो जाती है। यदि अधिकारी जनता से संवाद नहीं करेंगे, तो छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले सकती हैं। इसलिए प्रत्येक अधिकारी को जनता के प्रति सहज, सुलभ और उत्तरदायी रहना चाहिए।


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रशिक्षु अधिकारियों से उनके प्रशिक्षण अनुभवों की जानकारी भी ली तथा उन्हें भविष्य में अपने पदेन दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश के विकास और सुशासन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।


इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक श्री टी.सी. महावर ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 2025 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारियों का इंडक्शन प्रशिक्षण अब पूर्ण हो चुका है। इसके पश्चात सभी प्रशिक्षु अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदस्थ होकर शासन के विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 बैच में कुल सात अधिकारी शामिल हैं।


इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी के संचालक श्री टी.सी. महावर, संयुक्त संचालक श्रीमती मेनका प्रधान तथा राज्य प्रशासनिक सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।</description><guid>11996</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:13:51 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11995</link><description>मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन को मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। यह मिशन 5 वर्षों के लिए होगा, जिस पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।


इस मिशन के तहत - 100 AI डेटा लैब बनाई जाएंगी, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी, 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कार्यों को आसान और तेज़ बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित की जाएंगी।


यह मिशन भारत सरकार के IndiaAI Mission के अनुरूप छत्तीसगढ़ को उत्तरदायी, नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख डिजिटल राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


2.	मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ में हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट (Heavy Earth Moving Equipment) मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र की स्थापना के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बीईएमएल भारत सरकार का एक प्रतिष्ठित मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रम है। हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र हेतु यह राज्य का पहला उद्योग होगा, जिसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी।


मंत्रिपरिषद के इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य में बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। राज्य में संयंत्र की स्थापना से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छत्तीसगढ़ विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा।


3.	मंत्रिपरिषद् ने लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क्स एण्ड अकाउंट मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को मंजूरी दी है। इस प्रणाली के माध्यम से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया तेज होगी, कार्यों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा।


4.	मंत्रिपरिषद की बैठक में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना अंतर्गत बारहमासी सड़कों के निर्माण हेतु जारी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। संशोधनों के तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पूर्व मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा बढ़ाकर ऐसे सभी ग्रामीण मार्गों को शामिल किया गया है, जो प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अथवा अन्य योजनाओं में सम्मिलित नहीं हैं। आवश्यकता अनुसार नाबार्ड ऋण, पर्यावरण एवं अधोसंरचना विकास मद, खनिज न्यास मद सहित अन्य स्रोतों से भी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकेंगे। कार्यों का अनुमोदन प्रशासनिक विभाग करेगा तथा क्रियान्वयन की समीक्षा एवं अंतर्विभागीय समन्वय के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित की जाएगी।


5.	मंत्रिपरिषद् ने वित्त विभाग के उस प्रस्ताव का अनुमोदन किया है, जिसके तहत Asian Development Bank (ADB) से छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के क्रियान्वयन हेतु Anjor LIGHT (Anjor Linked Implementation  Guidance for Holistic Tracking) तकनीकी सहायता परियोजना के लिए 15 करोड़ रुपये का पूर्णतः अनुदान (Grant) प्राप्त किया जाएगा। यह तीन वर्ष (1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2029) की बहु-क्षेत्रीय परियोजना है, जिसमें राज्य शासन अथवा भारत सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।


परियोजना के अंतर्गत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को सुदृढ़ करना, PPP इकोसिस्टम का विकास, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देना, राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों (SOEs) की कार्यक्षमता में सुधार, क्लाइमेट-रेजिलिएंट परियोजनाओं का विकास तथा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 के अनुरूप प्राथमिकता आधारित परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार की जाएगी। इसके लिए परियोजना प्रबंधन इकाई (PMU) की स्थापना की जाएगी।


यह परियोजना पूर्णतः अनुदान आधारित होने से राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा तथा इससे संस्थागत क्षमता निर्माण, निवेश संवर्धन और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति को गति मिलेगी।


6.	मंत्रिपरिषद् ने राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। अब योजनाओं की राशि विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय नहीं रहेगी, बल्कि एक केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से आवश्यकता होने पर ही सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। यह मॉडल भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू SNA प्रणाली की तर्ज पर राज्य की योजनाओं में भी लागू किया जाएगा, जिससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।


इस व्यवस्था से योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी, वित्तीय अनुशासन मजबूत होगा और निष्क्रिय राशि, गबन तथा बैंकिंग धोखाधड़ी जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा। साथ ही, राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी, ब्याज का अनावश्यक बोझ कम होगा और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।


7.	मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को आमजन एवं संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से 200 करोड़ रूपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD)/बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (लिस्टिंग) किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से कंपनी के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प उपलब्ध होंगे, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य के विद्युत अवसंरचना विकास को और गति मिलेगी।


इसके लिए राज्य शासन द्वारा मूलधन एवं ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी प्रदान की जाएगी। साथ ही, लिस्टिंग प्रक्रिया से संबंधित आवश्यक निर्णय लेने हेतु कंपनी के संचालक मंडल तथा आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है।</description><guid>11995</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:11:43 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री  श्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11994</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।


मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।


वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।


श्री कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।


कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) श्री अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।</description><guid>11994</guid><pubDate>05-Aug-2026 8:08:04 pm</pubDate></item><item><title>छत्तीसगढ़ की बेटी सोनम शर्मा करेंगी भारतीय नेटबॉल टीम का हांगकांग में प्रतिनिधित्व</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/sport.php?articleid=11993</link><description>नेटबॉल स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के लिए यह एक अत्यंत गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण है। भिलाई की प्रतिभावान खिलाड़ी सोनम शर्मा का चयन आगामी 14वीं एशियन नेटबॉल चैंपियनशिप 2026 के लिए भारतीय नेटबॉल टीम में हुआ है। यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता 8 अगस्त से 15 अगस्त 2026 तक हांगकांग में आयोजित की जाएगी।

पिछले एक महीने से चल रहे भारतीय टीम के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर (कैंप) के पश्चात आज आधिकारिक तौर पर भारतीय दल की घोषणा की गई, जिसमें सोनम शर्मा ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर अंतिम टीम में अपनी जगह पक्की की है।

सोनम शर्मा का खेल करियर पहले भी बेहद शानदार रहा है। उन्होंने इससे पहले भी एशियाई सीनियर नेटबॉल चैंपियनशिप और एशियाई जूनियर नेटबॉल चैंपियनशिप में भारतीय टीम का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया है। सोनम शुरुआत से ही एक बेहद प्रतिभावान खिलाड़ी रही हैं, जिन्होंने अपने शानदार खेल से लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का मान बढ़ाया है।

सोनम शर्मा की इस शानदार उपलब्धि पर नेटबॉल स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ की अध्यक्ष मीना केरकेट्टा, महासचिव राजेश राठौर, उपाध्यक्ष राजेश प्रताप सिंह, कोषाध्यक्ष योगेश साहू, एग्जीक्यूटिव मेंबर एस. मोहन राव, एग्जीक्यूटिव मेंबर गोपाल साहू, अमित तिवारी, जानकी शरण सिंह, अब्बास आलम, विजय चलोत्रे, संतोष साहू, सजेस बोरकर, मृत्युंजय शर्मा,अनूप यदु ,सीनियर राष्ट्रीय खिलाड़ी इमरान खान, प्रशांत जेकब ,राष्ट्रीय खिलाड़ी अनिल सिंह, मनोज साहू, लोमेन्द्र साहू,निलेश शर्मा, प्रकाश विश्वकर्मा, आकाश वासवानी , टी प्रतिक राव ,जॉन तथा प्रदेश के समस्त जिलों के अध्यक्ष एवं सचिवों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि इस उपलब्धि से प्रदेश के सभी युवा खिलाड़ियों में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। प्रदेश के युवा सोनम शर्मा को अपना रोल मॉडल मानते हुए खेल में उनके जैसी सफलता प्राप्त करने के लिए अब और अधिक कड़ी मेहनत करने की बात कह रहे हैं।

इस अवसर पर नेटबॉल स्पोर्ट्स एसोसिएशन छत्तीसगढ़ के जनरल सेक्रेटरी राजेश राठौर ने कहा:छत्तीसगढ़ के युवा और उभरते खिलाड़ियों के लिए यह उपलब्धि बेहद प्रेरणास्पद है। आने वाले समय में जांजगीर-चांपा सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में नेटबॉल की मजबूत नर्सरी तैयार करने में सोनम शर्मा जैसी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और क्षमता का पूरा उपयोग किया जाएगा।</description><guid>11993</guid><pubDate>05-Aug-2026 4:11:16 pm</pubDate></item><item><title>संत रविदास ने समरसता, समानता और भक्ति का जो मार्ग दिखाया, वही विकसित और सशक्त भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11992</link><description>संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज का जीवन समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का अमर संदेश है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत रविदास ने समाज को ऊंच-नीच, भेदभाव और छुआछूत से ऊपर उठकर मानवता, समान अधिकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग दिखाया। यही मार्ग विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजन-अर्चन कर संत रविदास को नमन किया तथा इसे सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।


संत रविदास के सम्मान में मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रम में अगले वर्ष 2027 में उनकी जयंती (माघी पूर्णिमा) को प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन प्रदेशभर में मांस एवं मदिरा का विक्रय पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।


मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर प्रदान किए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश -
ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।। - का अंकन कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर प्रयास किया जाएगा।


जब-जब समाज में अन्याय बढ़ा, तब-तब संतों और महापुरुषों ने नई दिशा दी


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार, ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा प्रदान की। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने समाज को नई चेतना प्रदान की।


उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का भी साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश मन चंगा तो कठौती में गंगा आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।


मुख्यमंत्री ने संत रविदास से जुड़ा प्रसंग भी साझा किया और कहा कि उनकी अटूट भक्ति और तपस्या के प्रभाव से कठौती में गंगा प्रकट होने की घटना केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश है कि सच्ची श्रद्धा और निर्मल मन से ईश्वर की प्राप्ति संभव है।


'विकास भी, विरासत भी' हमारा मार्गदर्शक मंत्र


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का विकास भी, विरासत भी का संदेश देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का मार्गदर्शक मंत्र है।


उन्होंने कहा कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल का कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को जोड़ने वाला राष्ट्रीय समरसता अभियान है।


कलश वंदन अभियान सामाजिक समरसता का जनआंदोलन बनेगा


मुख्यमंत्री श्री साय ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


उन्होंने सभी जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे तथा गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने वाले वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अभियान संत रविदास के समरसता, समानता और सामाजिक एकता के संदेश को प्रत्येक गांव, प्रत्येक समाज और प्रत्येक घर तक पहुंचाएगा।


संत रविदास का जीवन सर्वसमाज को जोड़ने की प्रेरणा : गुरु खुशवंत साहेब


कैबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। कलश वंदन अभियान गांव-गांव तक जाकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त करेगा।


समरसता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति : श्री अजय जामवाल


इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री अजय जमवाल ने कहा कि संत रविदास का समरसता का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि समाज को जाति, धर्म और भेदभाव के आधार पर विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। संतों की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारकर ही सामाजिक एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे पवित्र कलश को प्रत्येक जिले के सभी आस्था केंद्रों तक पहुंचाकर संत रविदास के विचारों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें।


संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक : सरोज पाण्डेय


इस अवसर पर सुश्री सरोज पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने धर्मांतरण के दबाव का दृढ़ता से विरोध करते हुए सनातन परंपरा, समानता, श्रम और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि संत रविदास का संदेश जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है।


बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, संत समाज एवं श्रद्धालु रहे उपस्थित


कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, खाद्य मंत्री श्री दयाल दास बघेल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, विधायक श्री संपत अग्रवाल, विधायक श्री रोहित साहू, छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा, गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत श्री युधिष्ठिर लाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।</description><guid>11992</guid><pubDate>04-Aug-2026 8:36:15 pm</pubDate></item><item><title>इसरो के वैज्ञानिकों ने किया जिला विज्ञान केंद्र दंतेवाड़ा का भ्रमण</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11991</link><description>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर आनंद और उनकी विशेषज्ञ टीम ने जिला विज्ञान केंद्र, दंतेवाड़ा का भ्रमण कर यहां संचालित वैज्ञानिक और शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया।


टीम ने विज्ञान केंद्र की स्पेस गैलरी, फिजिक्स गैलरी, माइनिंग गैलरी, विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनों, वर्किंग मॉडल्स और विद्यार्थियों के लिए आयोजित करके सीखें गतिविधियों का निरीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने सुदूर जनजातीय क्षेत्र के बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए जिला प्रशासन और विज्ञान केंद्र की पहल की सराहना की।


उन्होंने कहा कि विज्ञान केंद्र बच्चों को प्रयोगों और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इसरो की टीम ने केंद्र प्रमुख उपेंद्र गौतम और उनकी टीम द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की।


वैज्ञानिकों ने केंद्र में नियमित रूप से आयोजित शैक्षणिक भ्रमण, कबाड़ से जुगाड़ विज्ञान गतिविधियां और खगोल विज्ञान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शन को विद्यार्थियों में वैज्ञानिक जिज्ञासा बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों को विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।


भ्रमण के अंत में विज्ञान केंद्र प्रबंधन ने इसरो के वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया। इसरो की टीम के आगमन से विज्ञान केंद्र के विद्यार्थियों, शिक्षकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले युवाओं में उत्साह का वातावरण देखने को मिला।</description><guid>11991</guid><pubDate>04-Aug-2026 8:34:03 pm</pubDate></item><item><title>खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/sport.php?articleid=11990</link><description>उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और उप संचालक श्रीमती रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।


उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।


श्री साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोड़ने की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।</description><guid>11990</guid><pubDate>04-Aug-2026 8:31:28 pm</pubDate></item><item><title>​छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: समान नागरिक संहिता पर जनता से मांगे गए सुझाव</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11989</link><description>​छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों को संविधान के एक समान दायरे में लाने के उद्देश्य से एक विशेष 5-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति ने अब आम जनता, विभिन्न संगठनों और हितधारकों से सुझाव एवं अभिमत आमंत्रित किए हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।


​समिति का स्वरूप और सदस्य


   ​उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा तथा व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का व्यापक अध्ययन और समीक्षा कर रही है। इस समिति में सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के ​श्री शत्रुघ्न सिंह और ​श्री एम. के. राऊत,वरिष्ठ अधिवक्ता ​श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं।
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​समिति के मुख्य कार्य एवं दायित्व


   ​यह समिति राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन से जुड़े सभी विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन कर रही है। इसके प्रमुख दायित्वों में छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधिक स्थिति का विश्लेषण करने के साथ-साथ विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने (दत्तक ग्रहण) जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यावहारिक सुझाव तैयार करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, समिति अन्य राज्यों में लागू UCC व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी तथा आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों व अभिमतों को भी ड्राफ्ट में शामिल करेगी। इन समस्त अध्ययनों और सुझावों के आधार पर एक समग्र ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करना और आवश्यक विधायी व प्रशासनिक अनुशंसाएं देना समिति का मुख्य उद्देश्य है।


​देश का 5वां राज्य बनेगा छत्तीसगढ़


  ​UCC लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी इसे लागू किया जा चुका है। इस क्रम में छत्तीसगढ़ UCC को अपनाने वाला देश का 5वां राज्य बनने जा रहा है।


​सुझाव भेजने के माध्यम


   ​समिति ने शासकीय व गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों सहित सभी नागरिकों से 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार और राय अनिवार्य रूप से जमा करने की अपील की है। नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं:


​ई-मेल: *ucc-chhattisgarh@cg.gov.in

​वेब पोर्टल:
https://ucc.cgstate.gov.in/

​डाक पता: कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-202, रायपुर, छत्तीसगढ़ - 492001</description><guid>11989</guid><pubDate>04-Aug-2026 8:23:13 pm</pubDate></item><item><title>महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ: बनारस की तर्ज पर गूंजे वैदिक मंत्र</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/religioussociety.php?articleid=11988</link><description>सावन के पहले सोमवार की संध्या धमतरी की चित्रोत्पला महानदी का तट केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और अध्यात्म का सजीव संगम बन गया। काशी की तर्ज पर जब 108 दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच पहली बार भव्य महानदी गंगा आरती का शुभारंभ हुआ, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज से पूरा रुद्री घाट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। धमतरी युवा ब्रिगेड और श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के इस ऐतिहासिक प्रयास ने नगर की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। अब जनआस्था का यह पावन पर्व सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी के तट पर सजने जा रहा है।
   ​भक्ति के इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच धमतरी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी की शुरुआत हुई है। प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया है। इस परियोजना के माध्यम से रुद्रेश्वर धाम को एक ऐसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।


​तीन चरणों में बदलेगा रुद्रेश्वर धाम का स्वरूप


  ​यह मास्टर प्लान प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत करता है। मंदिर की पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, आकर्षक शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद व स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली की व्यवस्था होगी। परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एआई (AI) आधारित हेल्थ कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह परिसर में उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की 'मैरीन ड्राइव' की तर्ज पर एक सुरम्य तट विकसित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पार्किंग, ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाएगा।
  ​विधायक श्री ओंकार साहू, महापौर श्री जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू सहित कई गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह आयोजन धमतरी के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए युग का प्रतीक है। महानदी गंगा आरती की अविरल धारा और रुद्रेश्वर धाम का समग्र विकास मिलकर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और जनसहभागिता को भी एक नया आयाम देंगे।</description><guid>11988</guid><pubDate>04-Aug-2026 8:15:47 pm</pubDate></item><item><title>भोरमदेव सरस मेला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम का पालन करने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की अपील</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/loveyoulife.php?articleid=11987</link><description>पवित्र श्रावण माह में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध भोरमदेव सरस मेला एवं सावन में इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। मेले की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन की अपील सभी दुकानदारों एवं श्रद्धालुओं से की है।


     उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव धाम हमारी आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। सरस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस पवित्र स्थल को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त रखने में अपना सहयोग दे। सभी के सहयोग से इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहेगी तथा हमारा भविष्य भी प्रदूषण मुक्त होगा।


     उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि हमारा प्रयास हो कि यह संभागीय सरस मेला तथा पूरा भोरमदेव परिसर प्लास्टिक मुक्त हो। प्लास्टिक के स्थान पर वैकल्पिक रूप से कपड़े की अथवा जूट के बैक का इस्तेमाल किया जाए जो प्रकृति के अनुकूल हो। सभी दुकानदार एवं शिविर संचालक गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग रखने का प्रयास करें। कचरा केवल निर्धारित कचरा गाड़ी एवं कचरा पात्र में ही डालें। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया की वे घर से कपड़े का थैला, पानी की बोतल साथ लेकर आएं और खुले में कचरा न फेंकें।


    कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने उपस्थित ग्रामीणों, स्व-सहायता समूह की दीदियों, मितानिन बहनों एवं स्वच्छाग्रहियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन हेतु स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। शपथ में सभी ने कचरा अलग-अलग करने, प्लास्टिक का उपयोग न करने एवं अपने गांव तथा भोरमदेव धाम को स्वच्छ बनाये रखने का संकल्प लिया। इस दौरान उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने कबीरधाम जिला को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ लेकर अपने जान पहचान वालों पड़ोस के लोगों एवं गांव के अन्य लोगों को इस कार्य के लिए जागरूक करने की बात कही।</description><guid>11987</guid><pubDate>04-Aug-2026 7:55:09 pm</pubDate></item><item><title>दिव्यांगजनों के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11986</link><description>किसी भी संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान इस बात से होती है कि वहां प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने का अधिकार मिले। दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उनकी प्रतिभा, क्षमता तथा आत्मविश्वास को सही अवसर उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार इसी सोच के साथ दिव्यांगजनों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक अपना योगदान दे सकें।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित प्रोजेक्ट 'सहारा' के अंतर्गत दिव्यांगजन सहायक उपकरण वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांगजनों के प्रति देश की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का ऐतिहासिक कार्य किया है। उन्होंने केवल कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार ही नहीं किया, बल्कि उन्हें 'दिव्यांग' कहकर सम्मान और आत्मगौरव का नया भाव भी दिया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि समाज की सोच और दृष्टिकोण का परिवर्तन है। प्रधानमंत्री के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' के मंत्र को आत्मसात करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार भी दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।


 मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार, मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण के लिए 7 करोड़ रुपये की राशि प्रदान किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि खेल अधोसंरचना का विकास केवल खिलाड़ियों के लिए ही नहीं, बल्कि ऐसे सामाजिक और जनहितकारी आयोजनों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड ट्राई साइकिल, ट्राई साइकिल, व्हीलचेयर, हियरिंग एड, कृत्रिम हाथ-पैर, वैशाखी, वॉकिंग स्टिक तथा अन्य आधुनिक सहायक उपकरण वितरित किए। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया और कहा कि ये उपकरण केवल सहायता सामग्री नहीं हैं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन की नई शुरुआत हैं। इनकी सहायता से दिव्यांगजन शिक्षा, रोजगार, आवागमन और दैनिक जीवन के कार्यों में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे तथा समाज की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ पाएंगे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेशवासियों को सावन माह के प्रथम सोमवार की शुभकामनाएं देते हुए भगवान भोलेनाथ से प्रदेश की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति सेवा, करुणा और मानवता का संदेश देती है तथा समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सहायता करना हम सभी का दायित्व है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर जिले में विशेष अभियान चलाकर दिव्यांगजनों की व्यापक स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 1600 से अधिक दिव्यांगजनों की पहचान की गई। इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए भारत सरकार से 3 करोड़ 58 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पहले ही 500 से 600 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं, जबकि आज 1000 से अधिक हितग्राहियों को विभिन्न उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 1739 दिव्यांगजन प्रोजेक्ट 'सहारा' के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल केवल उपकरण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को अधिक सम्मानजनक, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर जीवन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सर्वांगीण कल्याण के लिए सहायक उपकरण वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण, कौशल विकास, पुनर्वास और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। सरकार का प्रयास है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन शासन की सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने सभी हितग्राहियों से शासन की योजनाओं का अधिकतम लाभ लेने का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में मोदी की गारंटी के अधिकांश संकल्पों को धरातल पर उतारा है। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन योजना, रामलला दर्शन योजना तथा मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जैसी अनेक योजनाओं ने समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को 29 किश्तों के माध्यम से अब तक 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों तक शासन की सेवाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना है। इसी उद्देश्य से 'सेवा सेतु' एप के माध्यम से 36 विभागों की 500 से अधिक सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे शिकायत दर्ज कराने और समयबद्ध समाधान प्राप्त करने की सुविधा भी नागरिकों को उपलब्ध कराई गई है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट धड़कन, प्रोजेक्ट सुरक्षा, प्रोजेक्ट रेडक्रॉस, प्रोजेक्ट दधीचि, प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी, प्रोजेक्ट निःक्षय मित्र, प्रोजेक्ट वंदन और प्रोजेक्ट गोल्डन आवर जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासन की ये पहलें संवेदनशील और जनकेंद्रित सुशासन का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं नवाचारों की श्रृंखला में प्रोजेक्ट 'सहारा' दिव्यांगजनों के जीवन में नई आशा, नई सुविधा और नया आत्मविश्वास लेकर आया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट सरल एवं प्रोजेक्ट गोल्डन आवर का शुभारंभ भी किया तथा नवाचार से प्रगति पथ पर अग्रसर रायपुर कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।


राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रोजेक्ट 'सहारा' के तहत वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश में दिव्यांगजनों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण तैयार किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन केवल शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हैं, उनकी प्रतिभा, क्षमता और हौसले किसी भी प्रकार से कम नहीं होते।


तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि प्रोजेक्ट 'सहारा' केवल सहायक उपकरण वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, स्वावलंबन और सामाजिक समावेशन का अभियान है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया के इस दौर में राज्य सरकार आईटीआई एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के माध्यम से दिव्यांगजनों को समय-समय पर कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रही है, जिससे वे दक्ष होकर आत्मनिर्भर बनें और सम्मानजनक रोजगार से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज वितरित किए जा रहे सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र जीवन और नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।


मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का किया अवलोकन


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं एवं नवाचारों से संबंधित स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने हितग्राहियों से आत्मीय संवाद कर योजनाओं से प्राप्त लाभ की जानकारी ली तथा अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना का लाभ पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।


इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री इंद्रकुमार साहू, रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल, प्रमुख सचिव समाज कल्याण श्रीमती शहला निगार, संभागायुक्त श्री श्याम धावड़े, कलेक्टर श्री गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी, समाजसेवी एवं बड़ी संख्या में दिव्यांगजन तथा उनके परिजन उपस्थित थे।</description><guid>11986</guid><pubDate>03-Aug-2026 8:48:08 pm</pubDate></item><item><title>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11985</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक श्री अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री श्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।


इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक श्री अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।


उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।</description><guid>11985</guid><pubDate>03-Aug-2026 8:44:40 pm</pubDate></item><item><title>पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किया उद्घाटन</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11984</link><description>कबीरधाम जिले के भोरमदेव मंदिर चौरा में आयोजित पांच दिवसीय संभागीय सरस मेला का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। इस दौरान स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि संभागीय सरस मेला से ग्रामीण महिलाओं के स्वरोजगार को एक नई दिशा मिलती है तथा यह आयोजन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक होता है।


     सरस मेला में स्वदेशी, प्राकृतिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की भव्य प्रदर्शनी सह विक्रय हेतु संभागीय सरस मेला समूह की दीदियों के लिए सफलता के द्वार खोलेगा। संभागीय सरस मेला के उद्घाटन के दौरान अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग श्री बिसेसर पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट, श्री वीरेंद्र साहू, श्री लोकचंद साहू, श्री संतोष पटेल, श्री विदेशी राम धुर्वे, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, सीईओ जिला पंचायत श्री अभिषेक अग्रवाल, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक जिले के अधिकारी गण, स्व सहायता समूह की दीदियों सहित ग्रामीण उपस्थित रहे।


     मेले में लगे स्टालों का उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अवलोकन किया तथा महिला समूह से उनके उत्पादन के विषय में विस्तार से जानकारी ली। इस दौरान स्टॉल से खरीदी कर महिला समूह का हौसला बढ़ाया तथा उन्हें सफल व्यवसाय की शुभकामनाएं दी।


     संभागीय सरस मेला के संबंध में कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि मेले का आयोजन सावन माह में किया गया है जो 06 अगस्त की शाम तक चलेगा। विश्व प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर की पावन एवं ऐतिहासिक धरा पर आयोजित यह मेला केवल खरीदारी का अवसर नहीं बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 50 से अधिक स्टॉलों के द्वारा एक ही छत के नीचे ताज़े एवं पौष्टिक मिलेट उत्पाद, स्वादिष्ट घरेलू खाद्य सामग्री, वनोपज आधारित अन्य स्थानीय उत्पादन मिल रहा है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा सामग्री बाँस एवं बेंत से बने आकर्षक उत्पाद,घरेलू सजावटी वस्तुएँ, पारंपरिक परिधान तथा अनेक प्रकार के अन्य उपयोगी स्वदेशी सामग्रियों का विशाल भंडार विक्रय के लिए उपलब्ध होगा।


     मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक अग्रवाल ने बताया की समूह की दीदियों द्वारा निर्मित सामग्रियों को बाजार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से संभागीय सरस मेला का आयोजन हो रहा है। प्रत्येक खरीदी पर ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वदेशी भारत का संकल्प होगा। जैविक खाद्य सामग्री, आकर्षक सजावट के सामान सहित अन्य उपयोगी वस्तु कम दर पर उपलब्ध है। सभी जिलेवासियों से अपील की जाती है कि वह सावन के इस पवित्र महीने में बाबा भोरमदेव के दर्शन के साथ ही संभागीय सरस मेला का लाभ उठाए।


प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तरुणा साहू और स्कूली बच्चों के शिव तांडव की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया
    छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका श्रीमती तरुणा साहू के पंडवानी गायन ने सभी का मन मोह लिया। द्रोपदी चीर हरण सहित अन्य प्रसंगो की मार्मिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को उस काल खण्ड की याद दिला दी। इसी तरह स्वामी आत्मानंद इंग्लिश स्कूल बोड़ला के बच्चों द्वारा शिव तांडव का नृत्य प्रस्तुत किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सरस मेला में उपस्थित सभी लोगों का खूब मनोरंजन किया।


    उल्लेखनीय है कि संभागीय सरस मेला में दुर्ग संभाग के कबीरधाम सहित जिला दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमेतरा, मोहला- मानपुर- अंबागढ़ चौकी एवं खैरागढ़- छुईखदान- गंडई के अतिरिक्त अन्य ज़िलों की महिला स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा उत्पादित आकर्षक सामग्रियों की प्रदर्शनी सह विक्रय के लिए 50 स्टॉल गए हैं। इन स्टॉलों में विभिन्न जैविक खाद्य सामग्री जैसे हल्दी, मिर्ची, धनिया, कोदो- कुटकी, कटहल, आम, नीबू महुआ के आचार, पापड़, ब्लैक राइस के साथ अगरबत्ती, दोना-पत्तल,बैग, सिंगार के सामान, हैंड बैग सहित अनेको आकर्षक सामग्री महिला समूह द्वारा बनाये गए है।</description><guid>11984</guid><pubDate>03-Aug-2026 8:21:48 pm</pubDate></item><item><title>18 किमी लंबी भोरमदेव पदयात्रा का उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बूढ़ा महादेव मंदिर से किया शुभारंभ</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/religioussociety.php?articleid=11983</link><description>श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर ऐतिहासिक पुरातात्विक, पर्यटन एवं जनआस्था के केंद्र बाबा भोरमदेव मंदिर के लिए आयोजित भव्य भोरमदेव पदयात्रा का शुभारंभ आज प्रातः पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर, कवर्धा से श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ हुआ।


    प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना एवं अभिषेक कर पदयात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। शुभारंभ के पश्चात उपमुख्यमंत्री स्वयं भी श्रद्धालुओं के साथ पदयात्रा में शामिल हुए।


    लगभग 18 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में जिले सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों शिवभक्त पूरे उत्साह और आस्था के साथ शामिल हुए। श्रद्धालुओं के हाथों में भगवा ध्वज, कंधों पर कांवड़ और मुख पर हर-हर महादेव, बोल बम तथा जय भोलेनाथ के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो रहा है। पदयात्रा में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे कलाकारों ने शिव की टोली का रूप बनाकर मोहक प्रस्तुतियां दी जा रही है। भोलेनाथ के भक्ति भाव में सराबोर श्रद्धालु बाबा भोरमदेव के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पदयात्रा करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।


    भोरमदेव मार्ग पर जगह जगह ग्रामवासी और श्रद्धालुजन शिवभक्त पदयात्रियों का स्वागत कर रहे हैं। लोगों के लिए पेयजल और चाय नाश्ते की व्यवस्था विभिन्न संगठनों द्वारा की गई है।</description><guid>11983</guid><pubDate>03-Aug-2026 8:15:27 pm</pubDate></item><item><title>दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पहल से यात्री सेवाएँ हुईं और अधिक डिजिटल एवं सुगम</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11982</link><description>भारतीय रेल की डिजिटल परिवर्तन (डिजिटल ट्रांसफार्मेशन) पहल तथा भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों को आधुनिक, तेज, पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित व्यवस्थाओं का निरंतर विस्तार कर रहा है। डिजिटल टिकटिंग, कैशलेस भुगतान एवं ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से रेलवे यात्रा को अधिक सरल, सुरक्षित एवं सहज बनाया जा रहा है।


यात्रियों को त्वरित एवं सुविधाजनक टिकट बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 56 स्टेशनों पर 120 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) तथा 12 स्टेशनों पर 26 मोबाइल यूटीएस (एम-यूटीएस) प्रणाली संचालित की जा रही है। डिजिटल टिकटिंग में एटीवीएम सबसे लोकप्रिय माध्यम बनकर उभरा है, जिसके माध्यम से कुल डिजिटल टिकटों का 37.07 प्रतिशत टिकट जारी किए जा रहे हैं।


रेल टिकटिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 19 यात्री टिकट सुविधा केंद्र (वाईटीएसके) तथा 4 जन टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को अपने निकट ही टिकट बुकिंग की सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं।


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में डिजिटल भुगतान को भी व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) के माध्यम से डिजिटल भुगतान का प्रतिशत वर्ष 2021-22 के 1.58 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2026 तक 41.61 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार एटीवीएम के माध्यम से 19.67 प्रतिशत, यूटीएस के माध्यम से 11.34 प्रतिशत तथा स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट (एसटीबीए) के माध्यम से 10.49 प्रतिशत भुगतान डिजिटल माध्यमों से किए जा रहे हैं। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि यात्री अब यूपीआई, क्यूआर कोड तथा अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों को तेजी से अपना रहे हैं।


तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं परेशानी-मुक्त बनाने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 25 जुलाई 2026 से बिलासपुर आरक्षण कार्यालय में सेल्फ-डिस्पेंसिंग पेपरलेस टोकन सिस्टम की शुरुआत की है। इस व्यवस्था से टोकन वितरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है, भीड़भाड़ में कमी आई है तथा यात्रियों को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा मिल रही है।


भारतीय रेल द्वारा विकसित रेलवन ऐप भी यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से टिकट बुकिंग, ट्रेन संबंधी जानकारी तथा रेल मदद जैसी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।


दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे भविष्य में भी डिजिटल टिकटिंग, कैशलेस भुगतान तथा आईटी आधारित यात्री सेवाओं का निरंतर विस्तार करते हुए यात्रियों को तेज, पारदर्शी, सुरक्षित एवं विश्वस्तरीय रेल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।</description><guid>11982</guid><pubDate>03-Aug-2026 7:48:49 pm</pubDate></item><item><title>नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने संबंधी विषय पर 2 अगस्त को रायपुर में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11981</link><description>न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सशक्त, सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आगामी 2 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीकों के समावेश के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।


    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति श्री चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी कार्यक्रम में सहभागी होंगे।


    राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।


     कार्यशाला के दौरान अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस), डिजिटल न्यायिक समन्वय, नवीन आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण तथा न्याय एवं पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों के संबंध में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।


    यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य समन्वित डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नागरिकों को त्वरित, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।</description><guid>11981</guid><pubDate>01-Aug-2026 9:41:58 pm</pubDate></item><item><title>कुलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के परिजनों से उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने की बात</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11980</link><description>जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दीपक रात्रे एवं भूपेन्द्र की निर्मम हत्या की सूचना मिलते ही उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान तत्काल दोनों दिवंगतों के परिजनों से दूरभाष पर चर्चा की। उन्होंने शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाते हुए इस कठिन समय में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। श्री शर्मा ने अधिकारियों को भी आवश्यक समन्वय एवं हरसंभव सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। घटना ने पूरे प्रदेश को गहरे शोक में डाल दिया है।


     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या मानवता के विरुद्ध जघन्य अपराध है। आतंकवाद के ऐसे कायराना कृत्य किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है और इस नृशंस हमले में शामिल आतंकियों को उनके अपराध की कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि आतंकियों को उनके कृत्य का मुंहतोड़ जवाब मिलेगा और इस हमले का बदला अवश्य लिया जाएगा।


    श्री शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा दोनों पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा पर मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का यह संवेदनशील निर्णय शोक संतप्त परिवारों को कठिन समय में संबल प्रदान करेगा तथा राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।


    उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री सुनील शर्मा भी घटनास्थल पर मौजूद हैं। वे पीड़ित परिवारों के साथ रहकर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने तथा स्थानीय प्रशासन के साथ आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि प्रभावित परिवारों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।</description><guid>11980</guid><pubDate>01-Aug-2026 7:24:37 pm</pubDate></item><item><title>बस्तर के प्रतिनिधियों ने देखा राष्ट्रपति भवन, बस्तर की संस्कृति का हुआ भव्य सम्मान</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11979</link><description>राष्ट्रपति भवन में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल के लिए एक अविस्मरणीय और ऐतिहासिक क्षण साकार हुआ। महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर से पहुंचे परगना मांझियों, चालकियों, बस्तर पंडुम के जनजातीय कलाकारों तथा समाज प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने सभी अतिथियों का शॉल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया और बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा एवं संस्कृति के प्रति अपना विशेष स्नेह व्यक्त किया।


    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा तथा संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन और पहल से आयोजित इस विशेष यात्रा ने बस्तर के जनजातीय समाज को देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया। राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति का जो सम्मान हुआ, उसने प्रतिनिधिमंडल के प्रत्येक सदस्य को गौरव और आत्मविश्वास से भर दिया।


     प्रतिनिधिमंडल के लिए सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण उस समय आया, जब राष्ट्रपति महोदया ने एक आत्मीय मेजबान की भूमिका निभाते हुए स्वयं अपने हाथों से सभी अतिथियों को भोजन परोसा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रतिनिधियों को दाल परोसी, जबकि उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने सभी को मिठाई परोसकर उनका स्वागत-सत्कार किया। राष्ट्रपति भवन में आत्मीयता और अपनत्व से भरे इस दृश्य ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावविभोर कर दिया। बस्तर से आए जनजातीय प्रतिनिधियों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।


राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य
   इस अवसर पर एक और ऐतिहासिक पल तब आया, जब बस्तर पंडुम के विजेता कलाकारों ने राष्ट्रपति भवन परिसर में अपनी पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। बस्तर की लोक संस्कृति, वेशभूषा और पारंपरिक कला का यह अनुपम प्रदर्शन उपस्थित सभी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना और राष्ट्रपति भवन पहली बार बस्तर की सांस्कृतिक रंगत से सराबोर हो उठा। माहौल ऐसा हुआ कि उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित बस्तर कमिश्नर श्री डोमन सिंह, पूर्व बस्तर आई जी श्री सुंदरराज पी और सभी अधिकारी भी लोकनृत्य में झूमने लगे।


बस्तर की कला अब विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाएगी
   राष्ट्रपति महोदया से बात करते हुए कांकेर के पद्म सम्मान से अलंकृत काष्ठ कलाकार श्री अजय मंडावी ने कहा कि बस्तर की कला और संस्कृति विश्व में अद्वितीय है। लंबे समय तक भय और असुरक्षा के वातावरण के कारण इस विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना संभव नहीं हो पाया था। उन्होंने कहा कि अब सुरक्षा बलों के साहस और सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति का वातावरण स्थापित हुआ है, जिससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दुनिया के सामने रखने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर की कला वैश्विक पहचान बनाएगी।


प्रतिनिधियों ने साझा किए बदलते बस्तर के अनुभव
   गढ़िया-लोहंडीगुड़ा परगना के मांझी श्री बलराम कश्यप ने राष्ट्रपति महोदया को बताया कि पहले बस्तर के लोगों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने मांझी समाज की ओर से राष्ट्रपति महोदया को विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण भी दिया। जिसे राष्ट्रपति ने अपने भाषण में सहृदय स्वीकार भी किया।


   बीजापुर के मिरतुर परगना के चालकी श्री भरत कश्यप ने बताया कि अब बच्चे बिना किसी भय के विद्यालय जा रहे हैं। गांवों में सड़कें बन रही हैं, दूरसंचार सुविधाओं का विस्तार हो रहा है और विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते बस्तर में लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।


    दंतेवाड़ा की बस्तर पंडुम विजेता गौर नृत्यांगना श्रीमती लक्ष्मी सोढ़ी ने राष्ट्रपति महोदया से कहा कि जिस बस्तर पंडुम की शुरुआत आपने की थी, उसी प्रतियोगिता की विजेता के रूप में राष्ट्रपति भवन पहुंचना उनके लिए गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर में शांति का वातावरण है और लोग मेला, जात्रा एवं मड़ई जैसे पारंपरिक आयोजनों को पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।


पहली बार दिल्ली के ऐतिहासिक स्थलों का किया भ्रमण
   बस्तर के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का विस्तृत भ्रमण कर उसके गौरवशाली इतिहास और विरासत की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान प्रतिनिधियों ने इंडिया गेट, कर्तव्य पथ और अमर जवान ज्योति का भी अवलोकन किया। बस्तर के लोगों को राजधानी में देख सभी चकित नजरों से उन्हें देख रहे थे, सभी उनके साथ फोटो खिंचा रहे थे। इंडिया गेट के सामने सभी ने मिलकर 'ऐसा जादू है मेरे बस्तर में' और अन्य हल्बी-गोंडी गानों पर सभी के साथ सुर में सुर मिला कर आनंद लिया। राजधानी दिल्ली का यह अनुभव विशेष रूप से उन युवाओं के लिए यादगार रहा, जो पहली बार अपने गाँव और बस्तर से बाहर निकल कर देश की राजधानी पहुंचे हैं।
     प्रतिनिधिमंडल ने संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के साथ राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। बस्तर के दल ने पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक, जामा मस्जिद, शीशगंज गुरुद्वारा, सरोजनी मार्केट सहित विभिन्न ऐतिहासिक एवं राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भी भ्रमण किया है।</description><guid>11979</guid><pubDate>31-Jul-2026 9:06:16 pm</pubDate></item><item><title>5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव की पहल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री से पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का किया आग्रह</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11978</link><description>मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे चावल के परिवहन में तेजी आएगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया और अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।


मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय पूल के लिए 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। चावल के समयबद्ध उठाव को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने राज्य को हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।


केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री के आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे।</description><guid>11978</guid><pubDate>31-Jul-2026 8:59:44 pm</pubDate></item><item><title>PMGSY-IV में 10 किमी क्लस्टर की विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया सकारात्मक आश्वासन</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11977</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) में विशेष प्रावधान करने का आग्रह किया। बैठक में प्रदेश के गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। इस दौरान गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर सहित प्रदेश में ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के अनेक गांव घने जंगलों, पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केवल 500 मीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाता है। इस व्यवस्था के कारण बस्तर के अनेक छोटे और दूरस्थ गांव सड़क सुविधा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अरुणाचल प्रदेश की तरह बस्तर में भी 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर मानने की विशेष अनुमति दी जाए, ताकि अधिक से अधिक गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जा सके।


मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के दौर से निकलकर तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में बेहतर सड़क संपर्क क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, सुरक्षा और समृद्धि की आधारशिला हैं। इसलिए बस्तर की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जानी चाहिए।


केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इस पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बस्तर जैसे दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।


बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीरामजी योजना के तहत मुक्तिधाम और शौचालय निर्माण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से हो रहे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के बेहतर क्रियान्वयन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,500 आवासों का निर्माण एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में विकास कार्य और अधिक गति से आगे बढ़ेंगे।</description><guid>11977</guid><pubDate>31-Jul-2026 8:47:07 pm</pubDate></item><item><title>सुरक्षा के दृष्टि से केन्द्रीय जेल रायपुर में मुलाकात व्यवस्था में अस्थाई परिवर्तन</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/crimepatrol.php?articleid=11976</link><description>केन्द्रीय जेल रायपुर में विगत माह बंदियों से मुलाकात के दौरान कुछ परिजनों द्वारा दैनिक उपयोग की सामग्रियों में प्रतिबंधित वस्तुएँ छिपाकर जेल परिसर के भीतर पहुँचाने का प्रयास किया गया था। जेल शासन के सघन तलाशी एवं सतर्क सुरक्षा व्यवस्था के कारण ऐसे सभी प्रयास विफल कर दिए गए तथा संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जप्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई।


    अधीखक केन्द्रीय जेल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल की सुरक्षा एवं अनुशासन को दृष्टिगत रखते हुए और सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन द्वारा एहतियातन बंदियों के दैनिक उपयोग की कुछ चयनित सामग्रियों को जेल केन्टीन से क्रय कर बंदियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अन्य सभी स्वीकृत सामग्री पूर्ववत् नियमानुसार बंदियों के परिजन स्वयं उपलब्ध करा सकते हैं।


    यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी है तथा इसका उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की जेल में संभावित प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जेल केन्टीन में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियाँ गुणवत्तापूर्ण हैं तथा उनकी दरें सामान्य बाजार दरों से कम निर्धारित की गई हैं, जिससे बंदियों के परिजनों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।</description><guid>11976</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:54:15 pm</pubDate></item><item><title>डिजिटल इंडिया ने भारत को विश्व में नई पहचान दिलाई, सीएससी डिजिटल क्रांति के वास्तविक सूत्रधार : वित्त मंत्री ओपी चौधरी</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11975</link><description>वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी आज रायपुर में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) द्वारा आयोजित 17 Years of Progress with Purpose कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले सीएससी संचालकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा डिजिटल इंडिया अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में उनके योगदान की सराहना की।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाई है। आज भारत डिजिटल लेन-देन के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और तकनीक का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है। उन्होंने प्रदेश के 38 हजार पंजीकृत सीएससी संचालकों और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ नागरिकों को सरकारी सेवाएँ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं। उन्होंने कहा कि सीएससी ने वास्तविक अर्थों में 'सिंगल विंडो सिस्टम' को चरितार्थ किया है, जहाँ एक ही स्थान पर राजस्व, श्रम, बिजली, आयुष्मान, बैंकिंग सहित अनेक सेवाएँ आम नागरिकों को मिल रही हैं।


मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि वर्ष 2015 में जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इंडिया मिशन की शुरुआत की थी, तब कई लोगों ने इसकी सफलता पर सवाल उठाए थे। लेकिन आज भारत डिजिटल भुगतान, यूपीआई और जनसेवा के क्षेत्र में दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है। गाँवों तक डिजिटल सेवाओं की पहुँच ने डिजिटल डिवाइड को समाप्त करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल जीडीपी बढ़ाने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। इसी सोच के साथ प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अंत्योदय की भावना को आगे बढ़ाया है। इसी से प्रेरित होकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने 'छत्तीसगढ़ अंजोर विजन-2047' तैयार किया है, जिससे विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य हासिल किया जा सके।


वित्त मंत्री ने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल (JAM) के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था ने भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है। आज महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अनेक योजनाओं की राशि बिना किसी कटौती के सीधे हितग्राहियों के खातों में पहुँच रही है। इसमें सीएससी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार का मजबूत माध्यम बन रहे हैं। भविष्य में अधिक से अधिक सरकारी सेवाओं को सीएससी से जोड़ने तथा विकसित भारत 'जी-राम-जी' अभियान के माध्यम से ग्राम पंचायतों में आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में भी सरकार कार्य करेगी।


मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सरकार सीएससी नेटवर्क को और अधिक सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभिन्न विभागों की नई सेवाओं को सीएससी से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में इनके लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि नागरिकों को और अधिक सुविधाएँ एक ही स्थान पर मिल सकें।


कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री ने सीएससी की पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि राज्य सरकार हमेशा सीएससी संचालकों के साथ खड़ी रहेगी और जनसेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।</description><guid>11975</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:43:45 pm</pubDate></item><item><title>कटघोरा में अटलजी की कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11974</link><description>नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर में स्थापित कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता श्री चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से आज उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।


कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता श्री चन्द्र प्रकाश जायसवाल उत्तरदायी पाये गये हैं। उनके इस कृत्य के पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।


निलंबन अवधि में श्री जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।</description><guid>11974</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:40:18 pm</pubDate></item><item><title>प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और बस्तर विजन पर हुई विस्तृत चर्चा</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11973</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।


461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता


मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।


रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।


5,542 गांवों तक पहुंच रहा विकास, लगभग 39 लाख लोगों को लाभ


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष बस्तर विजन की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि नियद नेल्ला नार 2.0 और बस्त मुन्ने के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं और सेवाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार, प्रधानमंत्री आवास सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ और पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे गांवों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने से शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।


421 बंद स्कूल फिर खुले, ओरछा और जगरगुंडा में बनेंगी एजुकेशन सिटी


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में कभी बच्चों के लिए नियमित शिक्षा तक पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू हुई है।


उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।


मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच


मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में चिकित्सा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेजों और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।


सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के स्थायी विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दृष्टि से सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। इस रेल संपर्क से बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण की प्रगति तथा इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।


बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में प्रयास


मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के लिए अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के संरक्षण के साथ किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।


बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने दिया बदलाव का संदेश


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला है और शांति, विश्वास तथा सामाजिक सहभागिता को भी मजबूती मिली है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की नई पहचान खेल, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, उद्यमिता और विकास से निर्मित हो रही है।


छत्तीसगढ़ को मिले लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव


मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें अनेक परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।


उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधता आने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी निर्मित होंगे।


निवेश अनुकूल वातावरण में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य ने उद्योगों और उद्यमियों के लिए जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे निवेशकों को निश्चितता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था मिल रही है।


10.42 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य


मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर 10.42 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाया है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर राज्य सरकार काम कर रही है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित लखपति दीदी सम्मेलन की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।


₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन से तकनीक आधारित सुशासन की ओर छत्तीसगढ़


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शासन की सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।


वित्तीय अनुशासन के साथ जनकल्याण, राजस्व वृद्धि में छत्तीसगढ़ का मजबूत प्रदर्शन


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और राजस्व वृद्धि से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। राज्य में जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।


तकनीक और पारदर्शिता से नागरिक-केंद्रित सुशासन को नई गति


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में निरंतर सुधार कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था भी विकसित की गई है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व प्रशासन में व्यापक डिजिटल सुधार करते हुए रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य शासन को नागरिकों के और निकट लाना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के समग्र कायाकल्प से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े राज्य के इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को शांति, समृद्धि और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।</description><guid>11973</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:35:44 pm</pubDate></item><item><title>केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुख्यमंत्री श्री साय ने की मुलाकात, प्रदेश में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/national.php?articleid=11972</link><description>मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ, जनजातीय, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 नए मोबाइल टावरों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प को छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी आज केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तक सहज पहुंच मिल सकेगी।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के अनेक दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण संचार नेटवर्क का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में 2,305 नए मोबाइल टावरों की स्थापना डिजिटल समावेशन की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उन गांवों और बसाहटों तक भी विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क पहुंचेगा, जो अब तक पर्याप्त संचार सुविधाओं से वंचित रहे हैं।


577 अतिरिक्त टावरों की स्वीकृति से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी कनेक्टिविटी


मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित रहे एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से बस्तर सहित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है, वहां मजबूत संचार नेटवर्क विकास की गति को और तेज करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत होगा, आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क सुगम होगा और शासन की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लोगों को अपने गांव के निकट ही प्राप्त हो सकेगा।


489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को एनओसी जारी


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वीकृत मोबाइल टावरों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है। कुल 577 स्थानों में से अब तक 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं। शेष 88 स्थानों के लिए भी आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है और शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।


उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर आवश्यक अनुमति और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावरों की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य शासन संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रहा है, ताकि टावरों की स्थापना में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।


डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी शिक्षा और स्वास्थ्य की नई ताकत


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत होने से विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और डिजिटल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। इसी प्रकार टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से अधिक आसानी से जुड़ सकेंगे।


उन्होंने कहा कि मजबूत नेटवर्क से बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों, आवेदनों और अन्य ऑनलाइन शासकीय सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर नहीं जाना पड़ेगा। इस प्रकार डिजिटल कनेक्टिविटी शासन को नागरिकों के और करीब लाने का माध्यम बनेगी।


शांति के साथ विकास और अब डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा बस्तर


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ अब डिजिटल कनेक्टिविटी को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। वर्षों तक भौगोलिक कठिनाइयों और अन्य चुनौतियों के कारण संचार सुविधाओं से वंचित रहे गांवों को मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना वहां के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


उन्होंने कहा कि बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी। ग्रामीण उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों के लिए डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान होगी तथा किसानों को मौसम, कृषि तकनीक और बाजार से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि तकनीक का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि सुदूर वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 मोबाइल टावरों को स्वीकृति मिलने से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को बड़ी गति मिलेगी।</description><guid>11972</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:31:33 pm</pubDate></item><item><title>गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ अधोसंरचना सरकार की प्राथमिकता- मंत्री श्री टंक राम वर्मा</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/education.php?articleid=11971</link><description>गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ अधोसंरचना (बुनियादी ढांचा) किसी भी राष्ट्र के विकास की मुख्य नींव हैं, जिन्हें सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक माहौल मिलता है। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने शुक्रवार को वनांचल क्षेत्र नगरी को शिक्षा और आधारभूत विकास की बड़ी सौगात दी। उन्होंने शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय, नगरी में 50 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण किया। इसके साथ ही नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया। ​इस दौरान मंत्री ने महाविद्यालय की वार्षिक साहित्यिक एवं शैक्षणिक पत्रिका श्रेष्ठांश का विमोचन किया तथा परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।


निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं
 
     मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुदूर ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज के युवा ही राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। बेहतर अधोसंरचना, आधुनिक संसाधन और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण से ही प्रदेश के भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार होंगे। नया अतिरिक्त कक्ष विद्यार्थियों के अध्ययन, शोध, सेमिनार और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा। ​उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और नवाचार का मंत्र देते हुए कहा कि निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।


विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास


   ​  मंत्री श्री वर्मा ने ​पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कर एक-एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के लिए हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।इस दौरान मंत्री श्री वर्मा ने महाविद्यालय भवन के साथ-साथ नगर पंचायत नगरी के लिए कई महत्वपूर्ण बुनियादी विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया।


     ​कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत नगरी अध्यक्ष, पूर्व विधायक पिंकी ध्रुव सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय परिवार, प्राध्यापकगण, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं नागरिक उपस्थित रहे।</description><guid>11971</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:27:43 pm</pubDate></item><item><title>महिलाएं हो रही हैं सशक्त एवं सक्षम ई-रिक्शा में बैठकर स्पीकर हाउस के लिए रवाना हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11970</link><description>राजनांदगांव के पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित श्रमिक सम्मेलन में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने शिरकत की। सम्मेलन के उपरांत डॉ. रमन सिंह नया ढाबा की हितग्राही ई-रिक्शा चालक दीदी श्रीमती सरिता वर्मा के ई-रिक्शा में बैठकर स्पीकर हाउस के लिए रवाना हुए। इस दौरान ई-रिक्शा में उनके साथ जिला पंचायत सीईओ श्री दुर्गा प्रसाद अधिकारी एवं श्री सुमीत उपाध्याय भी उपस्थित रहे।


आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ रहे महिलाओं के कदम


    श्रमिक महिलाओं का हौसला बढ़ाते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज के समय में महिलाएं साइकिल, मोटरसाइकिल, कार से लेकर पायलट बनकर हवाई जहाज तक चला रही हैं। महिलाओं ने शिक्षा के साथ-साथ सक्षम, सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाए हैं। विधानसभा अध्यक्ष की इस आत्मीयता और प्रोत्साहन से ई-रिक्शा चालक दीदी सरिता वर्मा के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था।


श्रमिक सम्मेलन में साझा किए अनुभव


    श्रमिक सम्मेलन के दौरान शासन की जनहितकारी योजनाओं से आ रहे सामाजिक परिवर्तन की बानगी देखने को मिली, जहाँ हितग्राही श्रमिक महिलाओं ने अपने जीवन में आए बदलाव और अनुभवों को साझा किया। शिक्षा जारी रखने की प्रेरणारू डॉ. रमन सिंह ने एक अन्य ई-रिक्शा चालक दीदी श्रीमती उषा साहू से बातचीत कर उनकी शिक्षा के बारे में जानकारी ली और उन्हें 10वीं के बाद भी अपनी पढ़ाई निरंतर जारी रखने की सलाह दी।


परिवार का मिला सहयोग


   बातचीत के दौरान श्रीमती उषा साहू के पति श्री भावेश साहू ने बताया कि उन्होंने ही अपनी पत्नी को ई-रिक्शा चलाना सिखाया है और वे उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते हैं, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और बचत भी बढ़ रही है।</description><guid>11970</guid><pubDate>31-Jul-2026 7:25:48 pm</pubDate></item><item><title>उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अमरकंटक के मृत्युंजय आश्रम में निःशुल्क भंडारा के लिए अन्नकूट रथ को किया रवाना</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/chhattisgarh.php?articleid=11969</link><description>सावन मास के पावन अवसर पर अमरकंटक से कवर्धा तक निकलने वाली कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं और कांवड़ियों के लिए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर मृत्युंजय आश्रम, अमरकंटक में प्रतिदिन निःशुल्क भंडारा संचालित किया जाएगा। इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज विधायक कार्यालय से भंडारे के लिए आवश्यक भोजन सामग्री से भरे वाहन अन्नकूट रथ को रवाना किया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा के साथ जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण के श्री भगत पटेल, श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, श्री रवि राजपूत, श्री खिलेश्वर साहू, श्री प्रवीण परिहार, सहित जनप्रतिनिधियों, पार्षदगण की उपस्थिति में हर-हर नर्मदे और बोल बम के जयकारों के साथ भोजन सामग्री वाहनों को विधिवत पूजा-अर्चना के पश्चात अमरकंटक के लिए रवाना किया गया।


     उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की इस पहल के अंतर्गत मृत्युंजय आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को निःशुल्क ठहरने और भोजन की सुविधा दी जाएगी। भोजन में दाल, भात, सब्जी, खीर, पूड़ी, हलवा जैसे स्वादिष्ट व्यंजन प्रतिदिन श्रद्धालुओं को परोसे जाएंगे वह भी पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ। मृत्युंजय आश्रम में संचालित इस भंडारे की लोकप्रियता और व्यापक सेवा भाव का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि विगत वर्ष लगभग हजारों श्रद्धालुओं और कांवड़ियों ने इस निःशुल्क सेवा का लाभ उठाया था। इस वर्ष भी उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, की सहभागिता से यह सेवा और भी विस्तार के साथ संचालित की जा रही है।


    उल्लेखनीय है कि सावन मास में लाखों श्रद्धालु अमरकंटक से जल लेकर भोरमदेव और बुढ़ामहादेव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए पदयात्रा करते हैं। ऐसे में मृत्युंजय आश्रम में संचालित यह भंडारा भक्ति के साथ-साथ सेवा का प्रतीक बन गया है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की यह पहल जनआस्था के प्रति संवेदनशीलता, धार्मिक समर्पण और सामाजिक सेवा के आदर्श को साकार करती है।</description><guid>11969</guid><pubDate>29-Jul-2026 7:31:18 pm</pubDate></item><item><title>उप मुख्यमंत्री ने किया बूढ़ा महादेव से खुड़िया तक सावन कांवड़ यात्रा की तैयारियों व विश्रामालयों का मैराथन निरीक्षण</title><link>https://chhattisgarhdarpan.com/religioussociety.php?articleid=11968</link><description>पवित्र सावन मास में मध्यप्रदेश के नर्मदा नगरी अमरकंटक से जल लेकर भगवान बूढ़ा महादेव एवं भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने आने वाले हजारों कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कबीरधाम जिले में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज बूढ़ा महादेव मंदिर कवर्धा से लेकर भोरमदेव, राजानवागांव, डोंगरिया और मुंगेली जिला के ग्राम खुड़िया तक विभिन्न विश्राम स्थलों, कांवड़ यात्रा मार्ग एवं मंदिर परिसरों का साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा, यातायात और ठहरने की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।


     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सावन माह में हजारों कांवड़िए और श्रद्धालु इस मार्ग से यात्रा करते हैं। उनकी सुविधा के लिए विभिन्न पड़ावों पर विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि अमरकंटक में कावड़ियों के लिए विश्राम और भोजन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि 2020 लाख रुपए की लागत से खुड़िया और लमनी में प्रतीक्षालय का निर्माण किया गया हैं। उन्होंने आज इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


    उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भोरमदेव में कांवड़ियों के लिए तैयार किए जा रहे विश्राम स्थल एवं स्वदेश दर्शन योजना के तहत निर्माणाधीन हॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि हॉल के एक हिस्से की तत्काल साफ-सफाई कर उसे कांवड़ियों के ठहरने योग्य बनाया जाए, ताकि सावन माह में श्रद्धालु इसका उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी हों। निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित इंजीनियरों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य पूर्ण होने तक नियमित निगरानी रखें तथा कहीं भी तकनीकी कमी या गड़बड़ी दिखाई देने पर तत्काल सुधार सुनिश्चित करें, ताकि बाद में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।


   उप मुख्यमंत्री ने कवर्धा स्थित पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर में निर्माण हुए डोम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य को बेहतर फिनिशिंग के साथ पूरा करने, डोम में एक अतिरिक्त प्रवेश द्वार बनाने, पर्याप्त पेयजल, शौचालय एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे कांवड़ियों के ठहरने और आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। ग्राम राजानवागांव में निर्मित डोम का निरीक्षण करते हुए उन्होंने मरम्मत एवं रखरखाव, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पंखे तथा शौचालय की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही परिसर में आकर्षक उद्यान विकसित करने को कहा, ताकि कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुखद वातावरण मिल सके। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि डोंगरिया स्थित जलेश्वर महादेव मंदिर परिसर का विकास किया जा रहा है। मेन रोड से यहां तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण किया जाएगा तथा खाली जगह में शेड का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने सावन माह के लिए विश्राम स्थल का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और किसी प्रकार की कमी न रहे।


    इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, श्री नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेन्द्र साहू, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल, मुंगेली जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल राम रावटे सहित जनप्रतिनिधि और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।


खुड़िया में 20 लाख से बनाया गया है प्रतीक्षालय, आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए सावन मास तक रहेगी एंबुलेंस सेवा


    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से खुड़िया में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से कांवड़ यात्रियों के लिए सुरक्षित पड़ाव के रूप में आधुनिक प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रतीक्षालय की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए भवन के सामने समतलीकरण कराने तथा पूरे परिसर को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाए रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सावन माह के दौरान कांवड़ियों की सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए पूरे श्रावण मास तक एक एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।


उप मुख्यमंत्री ने भोरमदेव परिसर में अधिकारियों की बैठक लेकर दिए आवश्यक निर्देश
    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भोरमदेव परिसर में अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर पूरे सावन माह के दौरान कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आगामी सोमवार से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, इसलिए सभी विभाग समन्वय बनाकर पूर्व तैयारी पूरी करें। उन्होंने मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग, पेयजल, शौचालय, विश्राम भवन, विद्युत व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण एवं चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कवर्धा से भोरमदेव मार्ग में सड़क किनारे झाड़ियों की सफाई, जहां सड़क खराब है वहां तत्काल मिट्टी डालकर मार्ग समतल करने तथा श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा से जुड़ी समितियों के अध्यक्षों की बैठक आयोजित कर स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने तथा श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।</description><guid>11968</guid><pubDate>29-Jul-2026 7:29:46 pm</pubDate></item></channel></rss>