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महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ: बनारस की तर्ज पर गूंजे वैदिक मंत्र

 सावन के पहले सोमवार की संध्या धमतरी की चित्रोत्पला महानदी का तट केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और अध्यात्म का सजीव संगम बन गया। काशी की तर्ज पर जब 108 दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच पहली बार भव्य ‘महानदी गंगा आरती’ का शुभारंभ हुआ, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज से पूरा रुद्री घाट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। धमतरी युवा ब्रिगेड और श्री रुद्रेश्वर महादेव परिवार के इस ऐतिहासिक प्रयास ने नगर की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। अब जनआस्था का यह पावन पर्व सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी के तट पर सजने जा रहा है।

      ​भक्ति के इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच धमतरी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी की शुरुआत हुई है। प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया है। इस परियोजना के माध्यम से रुद्रेश्वर धाम को एक ऐसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।

​तीन चरणों में बदलेगा रुद्रेश्वर धाम का स्वरूप

     ​यह मास्टर प्लान प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत करता है। मंदिर की पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, आकर्षक शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद व स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली की व्यवस्था होगी। परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एआई (AI) आधारित हेल्थ कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह परिसर में उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की 'मैरीन ड्राइव' की तर्ज पर एक सुरम्य तट विकसित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पार्किंग, ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाएगा।
     ​विधायक श्री ओंकार साहू, महापौर श्री जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक श्रीमती रंजना साहू सहित कई गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह आयोजन धमतरी के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए युग का प्रतीक है। महानदी गंगा आरती की अविरल धारा और रुद्रेश्वर धाम का समग्र विकास मिलकर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और जनसहभागिता को भी एक नया आयाम देंगे।
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18 किमी लंबी भोरमदेव पदयात्रा का उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बूढ़ा महादेव मंदिर से किया शुभारंभ

 श्रावण मास के प्रथम सोमवार पर ऐतिहासिक पुरातात्विक, पर्यटन एवं जनआस्था के केंद्र बाबा भोरमदेव मंदिर के लिए आयोजित भव्य भोरमदेव पदयात्रा का शुभारंभ आज प्रातः पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर, कवर्धा से श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ हुआ।


        प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना एवं अभिषेक कर पदयात्रा का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और कल्याण की कामना की। शुभारंभ के पश्चात उपमुख्यमंत्री स्वयं भी श्रद्धालुओं के साथ पदयात्रा में शामिल हुए।

        लगभग 18 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में जिले सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे हजारों शिवभक्त पूरे उत्साह और आस्था के साथ शामिल हुए। श्रद्धालुओं के हाथों में भगवा ध्वज, कंधों पर कांवड़ और मुख पर "हर-हर महादेव", "बोल बम" तथा "जय भोलेनाथ" के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो रहा है। पदयात्रा में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पहुंचे कलाकारों ने शिव की टोली का रूप बनाकर मोहक प्रस्तुतियां दी जा रही है। भोलेनाथ के भक्ति भाव में सराबोर श्रद्धालु बाबा भोरमदेव के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पदयात्रा करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। 

         भोरमदेव मार्ग पर जगह जगह ग्रामवासी और श्रद्धालुजन शिवभक्त पदयात्रियों का स्वागत कर रहे हैं। लोगों के लिए पेयजल और चाय नाश्ते की व्यवस्था विभिन्न संगठनों द्वारा की गई है।
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उप मुख्यमंत्री ने किया बूढ़ा महादेव से खुड़िया तक सावन कांवड़ यात्रा की तैयारियों व विश्रामालयों का मैराथन निरीक्षण

 पवित्र सावन मास में मध्यप्रदेश के नर्मदा नगरी अमरकंटक से जल लेकर भगवान बूढ़ा महादेव एवं भोरमदेव मंदिर में जलाभिषेक करने आने वाले हजारों कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कबीरधाम जिले में व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज बूढ़ा महादेव मंदिर कवर्धा से लेकर भोरमदेव, राजानवागांव, डोंगरिया और मुंगेली जिला के ग्राम खुड़िया तक विभिन्न विश्राम स्थलों, कांवड़ यात्रा मार्ग एवं मंदिर परिसरों का साफ-सफाई, पेयजल, चिकित्सा, सुरक्षा, यातायात और ठहरने की व्यवस्थाओं  का निरीक्षण कर कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। 


          उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सावन माह में हजारों कांवड़िए और श्रद्धालु इस मार्ग से यात्रा करते हैं। उनकी सुविधा के लिए विभिन्न पड़ावों पर विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि अमरकंटक में कावड़ियों के लिए विश्राम और भोजन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि 20–20 लाख रुपए की लागत से खुड़िया और लमनी में प्रतीक्षालय का निर्माण किया गया हैं। उन्होंने आज इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर अधिकारियों को सभी आवश्यक सुविधाएं समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

         उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने भोरमदेव में कांवड़ियों के लिए तैयार किए जा रहे विश्राम स्थल एवं स्वदेश दर्शन योजना के तहत निर्माणाधीन हॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि हॉल के एक हिस्से की तत्काल साफ-सफाई कर उसे कांवड़ियों के ठहरने योग्य बनाया जाए, ताकि सावन माह में श्रद्धालु इसका उपयोग कर सकें। उन्होंने कहा कि कांवड़ियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी हों। निर्माणाधीन कार्यों का निरीक्षण करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित इंजीनियरों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य पूर्ण होने तक नियमित निगरानी रखें तथा कहीं भी तकनीकी कमी या गड़बड़ी दिखाई देने पर तत्काल सुधार सुनिश्चित करें, ताकि बाद में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

       उप मुख्यमंत्री ने कवर्धा स्थित पंचमुखी बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर में निर्माण हुए डोम का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य को बेहतर फिनिशिंग के साथ पूरा करने, डोम में एक अतिरिक्त प्रवेश द्वार बनाने, पर्याप्त पेयजल, शौचालय एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, जिससे कांवड़ियों के ठहरने और आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो। ग्राम राजानवागांव में निर्मित डोम का निरीक्षण करते हुए उन्होंने मरम्मत एवं रखरखाव, साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, पंखे तथा शौचालय की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही परिसर में आकर्षक उद्यान विकसित करने को कहा, ताकि कांवड़ियों और श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुखद वातावरण मिल सके। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि डोंगरिया स्थित जलेश्वर महादेव मंदिर परिसर का विकास किया जा रहा है। मेन रोड से यहां तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण किया जाएगा तथा खाली जगह में शेड का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने सावन माह के लिए  विश्राम स्थल का अवलोकन करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि श्रद्धालुओं के पहुंचने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं और किसी प्रकार की कमी न रहे।

        इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, श्री नंद श्रीवास, जिला पंचायत सदस्य डॉ वीरेन्द्र साहू, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल, मुंगेली जिला पंचायत सीईओ श्री गोकुल राम रावटे सहित जनप्रतिनिधि और जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

खुड़िया में 20 लाख से बनाया गया है प्रतीक्षालय, आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए सावन मास तक रहेगी एंबुलेंस सेवा

         उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से खुड़िया में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से कांवड़ यात्रियों के लिए सुरक्षित पड़ाव के रूप में आधुनिक प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रतीक्षालय की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए भवन के सामने समतलीकरण कराने तथा पूरे परिसर को स्वच्छ एवं व्यवस्थित बनाए रखने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि सावन माह के दौरान कांवड़ियों की सुविधा और आपातकालीन चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए पूरे श्रावण मास तक एक एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर श्रद्धालुओं को तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।

उप मुख्यमंत्री ने भोरमदेव परिसर में अधिकारियों की बैठक लेकर दिए आवश्यक निर्देश
        उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भोरमदेव परिसर में अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर पूरे सावन माह के दौरान कांवड़ियों एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आगामी सोमवार से श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि होगी, इसलिए सभी विभाग समन्वय बनाकर पूर्व तैयारी पूरी करें। उन्होंने मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग, पेयजल, शौचालय, विश्राम भवन, विद्युत व्यवस्था, साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात नियंत्रण एवं चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कवर्धा से भोरमदेव मार्ग में सड़क किनारे झाड़ियों की सफाई, जहां सड़क खराब है वहां तत्काल मिट्टी डालकर मार्ग समतल करने तथा श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा से जुड़ी समितियों के अध्यक्षों की बैठक आयोजित कर स्थानीय स्तर पर समन्वय स्थापित करने तथा श्रद्धालुओं की संख्या के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सत्य साई ग्राम के सेवा मॉडल को बताया जनकल्याण का प्रेरक उदाहरण

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु श्री मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री श्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने श्री सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।
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गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। 


इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशव्यापी 'मेरा परिवार गौव्रति परिवार' अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टि का सुंदर समन्वय

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रामीण समृद्धि की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि बच्चों में गाय के वैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व की समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित गौ विज्ञान परीक्षा अत्यंत सराहनीय पहल है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष प्रदेश के स्कूलों एवं महाविद्यालयों के 1 लाख 64 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने परीक्षा में भाग लिया। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की सहभागिता यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, जीवन मूल्यों और प्रकृति संरक्षण के प्रति सजग हो रही है। मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि वे समाज में गौ संरक्षण और संवर्धन के प्रभावी दूत बनेंगे।

गौ संरक्षण को जनभागीदारी से मिलेगा स्थायी आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गौ संरक्षण के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए समाज के प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने परिवारों और आसपास के लोगों को गौसेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जागरूक करें तथा इस अभियान को घर-घर तक पहुंचाएं।

न्योता भोज जैसी पहल सामाजिक सहभागिता का उदाहरण

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए शिक्षा सत्र के साथ प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव और न्योता भोज जैसी अभिनव पहल संचालित की जा रही हैं। जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ अथवा माता-पिता की पुण्यतिथि जैसे विशेष अवसरों पर विद्यालयों में बच्चों के साथ भोजन कराने की परंपरा समाज और विद्यालय के बीच आत्मीय संबंध मजबूत कर रही है। इससे बच्चों को अतिरिक्त पोषण भी प्राप्त हो रहा है तथा समाज की भागीदारी भी बढ़ रही है।

गोबर आधारित उत्पाद बन रहे रोजगार का नया माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि गाय से प्राप्त दूध, दही, गोबर और गोमूत्र सहित प्रत्येक उत्पाद मानव जीवन के लिए उपयोगी है। आज गोबर से अनेक  उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार गोबर एवं गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण तथा प्रशिक्षण की व्यवस्था भी करेगी, जिससे गौपालन आय का सशक्त माध्यम बन सके।

गौ संरक्षण के लिए सरकार के प्रभावी कदम

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार गौ संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर  प्रयास कर रही है। पंजीकृत गौशालाओं में प्रति गाय चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। साथ ही सुरभि गौधाम योजना के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं से युक्त गौधाम विकसित किए जा रहे हैं, जहां पशु चिकित्सक, चरवाहे तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

बस्तर में डेयरी विकास का नया अध्याय

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद समाप्त होने के साथ अब विकास का नया दौर प्रारंभ हुआ है। कृषि एवं पशुपालन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से देसी गाय उपलब्ध कराने की योजना प्रारंभ की गई है।उन्होंने कहा कि इस योजना से प्रदेश में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब सरकार इस योजना का लाभ अन्य इच्छुक पशुपालकों, विशेषकर यादव समाज के लोगों तक भी पहुंचाने पर विचार कर रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र को और मजबूती मिलेगी।

गौ सेवा से संस्कृति और मूल्यों से जुड़ रही नई पीढ़ी : स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा के माध्यम से हजारों बच्चों ने गौमाता के महत्व को समझा है। यह पहल नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गौ संरक्षण के लिए गौ अभ्यारण्य विकसित कर रही है, जहां गौवंश के लिए पर्याप्त चारा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। देसी गाय के शुद्ध दूध के उत्पादन को बढ़ावा देकर आर्थिक स्वावलंबन के साथ जनस्वास्थ्य को भी मजबूती मिलेगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचय करा रही है गौ विज्ञान परीक्षा

गौ सेवा गतिविधि के अखिल भारतीय संयोजक श्री अजीत महापात्र ने कहा कि गौ विज्ञान परीक्षा विद्यार्थियों को गाय के वैज्ञानिक महत्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन रही है। इससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो रहा है।

गौ विज्ञान परीक्षा के विजेताओं का हुआ सम्मान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने गौ विज्ञान परीक्षा के तीनों वर्गों के विजेताओं को सम्मानित किया। प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 51 हजार रुपये, द्वितीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 31 हजार रुपये तथा तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह परीक्षा विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, भारतीय परंपराओं के प्रति सम्मान तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन जी महाराज, छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के अध्यक्ष श्री सुधीर गौतम, श्री चंद्रशेखर देवांगन, श्री आत्मबोध अग्रवाल, श्री मनोज पांडेय, श्री गोपाल यादव सहित छत्तीसगढ़ राज्य गौ संरक्षण एवं संवर्धन समिति के पदाधिकारी, प्रदेशभर से आए गौ विज्ञान परीक्षा के प्रतिभागी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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इलाज के साथ आत्मनिर्भरता का मॉडल, सोठी आश्रम के काम से प्रभावित हुए CM साय

 भारत में कुष्ठ रोग के मामलों में कमी आई है, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और प्रभावित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की चुनौती अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इलाज के बाद भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जिन्हें बीमारी से ज्यादा समाज की दूरी, उपेक्षा और अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सोठी (कात्रेनगर) स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम एक ऐसे मॉडल के रूप में सामने आता है, जहाँ कुष्ठ रोगियों को केवल उपचार नहीं, बल्कि आश्रय, पुनर्वास, कौशल और आत्मनिर्भर जीवन का अवसर दिया जा रहा है।


करीब छह दशक पुराना यह संस्थान अब केवल कुष्ठ रोग उपचार केंद्र नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग का केंद्र बन चुका है। 5 अप्रैल 1962 को समाजसेवी और स्वयं कुष्ठ रोग से प्रभावित रहे स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे द्वारा स्थापित इस आश्रम का उद्देश्य शुरुआत से ही रोगियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना रहा है। यही कारण है कि सोठी का यह आश्रम दान या सहानुभूति से आगे बढ़कर गरिमा-आधारित पुनर्वास के मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

आश्रम में 20 बिस्तरों का अस्पताल है, जहाँ कुष्ठ रोगियों और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त इलाज, दवा, पट्टी, खाना, कपड़े और रहने की सुविधा दी जाती है। यहाँ जाँच के लिए लैब और एक्स-रे जैसी सुविधाएँ भी हैं। जरूरत पड़ने पर मरीजों को बड़े अस्पताल भेजा जाता है। अभी यहाँ 75 मरीज रह रहे हैं और करीब 120 लोग उनकी सेवा में लगे हैं।

यह आश्रम सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को अपने पैरों पर खड़ा होना भी सिखाता है। यहाँ खेती, बागवानी, चॉक, कालीन, रस्सी बनाना, सिलाई, कम्प्यूटर, वेल्डिंग और गाड़ी चलाने जैसे काम सिखाए जाते हैं, ताकि मरीज आत्मनिर्भर बन सकें। उनके बच्चों की पढ़ाई का भी ध्यान रखा जाता है।

आश्रम समय-समय पर मुफ्त स्वास्थ्य और आँखों की जांच शिविर भी लगाता है। अब तक 10 हजार से ज्यादा मोतियाबिंद ऑपरेशन कराए जा चुके हैं। बुधवार को लगे स्वास्थ्य शिविर में 300 से अधिक लोगों की जांच हुई और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के बारे में जागरूकता भी दी गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को आश्रम का दौरा कर संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं और पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने आश्रम को “मानवता, करुणा और सेवा का सच्चा तीर्थ” बताते हुए कहा कि कुष्ठ रोग केवल शारीरिक पीड़ा नहीं, बल्कि सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का भी कारण रहा है। ऐसे लोगों को सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अवसर देना समाज की बड़ी जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण भी किया और कहा कि किसी व्यक्ति को आत्मसम्मान के साथ अपने पैरों पर खड़ा करना समाज की सबसे बड़ी सेवा है।

सोठी आश्रम केवल छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय संस्था नहीं, बल्कि यह उस मानवीय विकास मॉडल का सशक्त उदाहरण है, जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और गरिमा-आधारित पुनर्वास साथ-साथ चलते हैं। ऐसे दौर में, जब विकास की चर्चा अक्सर सड़कों, इमारतों और निवेश तक सीमित रह जाती है, सोठी आश्रम यह बताता है कि किसी समाज की असली प्रगति इस बात से तय होती है कि वह अपने सबसे उपेक्षित और वंचित लोगों को कितना सम्मान, सहारा और आत्मनिर्भरता दे पाता है।
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मानवता, सेवा और संवेदना का जीवंत केंद्र है सोठी आश्रम : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान सोठी स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम पहुँचे। आश्रम आगमन पर संस्था के पदाधिकारियों एवं आश्रमवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने आश्रम प्रमुख श्री सुधीर देव से संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं तथा पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम केवल एक सेवा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और समर्पण का जीवंत केंद्र है। यहाँ वर्षों से समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद लोगों की गरिमा के साथ सेवा की जा रही है, जो भारतीय संस्कृति के 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के आदर्श को साकार करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समाज में संवेदनशीलता, सेवा और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित श्री सिद्धि विनायक मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके सेवा भाव को नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रम के लिए नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह एम्बुलेंस आश्रमवासियों एवं जरूरतमंद मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्रम परिसर का भ्रमण कर सेवा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने आश्रमवासियों से आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उन्हें उपहार भी भेंट किए। इस दौरान उन्होंने गौशाला में गौमाता की पूजा-अर्चना कर हरा चारा अर्पित किया और गौसेवा का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण कर ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, बिलिंग कक्ष, एक्स-रे कक्ष, आईसीयू तथा ऑपरेशन थियेटर सहित विभिन्न इकाइयों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सालय में उपचाररत मरीजों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने पर बल दिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने धनवंतरी जनकल्याण समिति सोसायटी, रायपुर द्वारा संचालित निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग इनिशिएटिव वाहन का भी अवलोकन किया। उन्होंने वाहन के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पहुँचाई जा रही कैंसर जांच सेवाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है तथा ऐसी पहल जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब,सांसद श्रीमती कमलेश देवी जांगड़े, विधायक जगदलपुर श्री किरण सिंह देव, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष श्री भोजराज देवांगन, आश्रम के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।
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नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों की रामलीला, कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुति और कवियों की ओजस्वी रचनाओं ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

 सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा 'जटायु मोक्ष' की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।


नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।

इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने 'जटायु मोक्ष' पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।

महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।

इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया।

रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।
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संत कबीर के आदर्शों पर चलकर समाज में समरसता और सेवा की भावना मजबूत होगी : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।


गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री इंद्र कुमार साहू, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, गौसेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री चंदूलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा,  डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, श्री अखिलेश सोनी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं कबीरपंथी अनुयायी उपस्थित थे।
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शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर श्री स्वामी राजीव लोचन दास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के श्री महंत सुरेंद्र दास जी महाराज, शदाणी दरबार से श्री उदय लाल जी  तथा कबीर आश्रम सोनपैरी के श्री देवकर साहब जी ने सौजन्य भेंट की।


इस अवसर पर संत-महात्माओं ने छत्तीसगढ़ के विद्यालयों में भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं नैतिक शिक्षा से जुड़े पारंपरिक श्लोकों और मंत्रों को पुनः शामिल किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

संतों ने कहा कि पूर्व में विद्यालयों में विद्यार्थियों को "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर" जैसे मंत्रों एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया जाता था, जिससे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास होता था। समय के साथ ये परंपराएं शैक्षणिक वातावरण से धीरे-धीरे विलुप्त होती गईं, किंतु अब राज्य सरकार द्वारा इन्हें पुनः स्थापित करने की पहल अत्यंत स्वागतयोग्य है।

संत समाज ने कहा कि विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र तथा अन्य प्रेरणादायी वैदिक एवं सांस्कृतिक प्रार्थनाओं का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे नई पीढ़ी भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जुड़ सकेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और जीवन मूल्यों के विकास का आधार भी है। हमारी सरकार बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में शांतिपाठ, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं अन्य प्रेरणादायी प्रार्थनाओं के समावेश से विद्यार्थियों में अनुशासन, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का विकास होगा। यह पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए एक संस्कारित, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को इस पहल के लिए साधुवाद देते हुए उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया तथा कहा कि यह निर्णय प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने भिखमपुरा के पंचमुखी सिद्ध हनुमान मंदिर में की पूजा-अर्चना

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सुशासन तिहार के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम भिखमपुरा पहुंचकर स्वामी शिवानंद विद्यापीठ एवं गौसेवा आश्रम परिसर स्थित श्री पंचमुखी दक्षिणाभिमुख सिद्ध हनुमान मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य और राज्य की निरंतर प्रगति की कामना करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की समृद्धि, जनकल्याण और सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की मंगलकामना की।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय इन दिनों सुशासन तिहार के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों के ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों का सतत दौरा कर रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से वे सीधे आमजन से संवाद स्थापित कर शासन की योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं तथा समस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में आवश्यक निर्देश भी दे रहे हैं।

भिखमपुरा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने गौसेवा आश्रम परिसर में आयोजित चौपाल में ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं, सुझाव और अपेक्षाएं सुनीं तथा विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से उन्हें मिल रहे लाभों की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार शासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए प्रशासन सीधे लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है।

इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, स्थानीय नागरिक, आश्रम से जुड़े सदस्य तथा जिला प्रशासन के अधिकारी उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण का किया निरीक्षण, बैठक लेकर की प्रगति की गहन समीक्षा

स्वदेश दर्शन योजना के तहत भोरमदेव क्षेत्र में चल रहे 146 करोड़ रुपए के भोरमदेव कॉरिडोर निर्माण कार्य को लेकर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज भोरमदेव स्थित सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक ली। बैठक में रायपुर से पहुंचे पर्यटन विभाग के एम डी श्री विवेक आचार्य भी मौजूद रहे। बैठक के पहले उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, निर्माण एजेंसीज के इंजिनियर्स और ठेकेदारों के साथ पूरे प्रोजेक्ट एरिया का भ्रमण कर चल रहे कार्यों का विस्तार से मुआयना किया। जिसके पश्चात उन्होंने बैठक लेकर परियोजना के हर हिस्से पर चल रहे काम और आगे की कार्ययोजना की बारी-बारी समीक्षा की। समीक्षा बैठक में मंदिर परिसर, प्रवेश द्वार, संग्रहालय, पर्यटक सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों के प्रोजेक्ट प्लान के अनुसार बेस वर्क, परिसर की लैंडस्केपिंग व वृक्षारोपण, सरोवर के सौंदर्यीकरण जैसे बिंदुओं पर मैराथन समीक्षा हुई।


        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह परियोजना आने वाले कई सालों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है, इसलिए हर कार्य मजबूत, टिकाऊ और मानक अनुसार होना चाहिए। उन्होंने सख्त और स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए और इसके लिए पर्याप्त मशीनरी और मानव संसाधन बढ़ाया जाए। किसी भी स्थिति में कार्य में देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी प्रकार की तकनीकी या अन्य कोई समस्या आती है तो उसकी जानकारी तुरंत दी जाए, आवश्यक काम प्रभावित नहीं होना चाहिए।

       समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री ने हर सोमवार होने वाली प्रगति मॉनिटरिंग की जानकारी ली और अब तक हुए कार्यों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड में मौजूद रहें और निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करें। उन्होंने पर्यटन विभाग के इंजीनियरों को भी निर्देशित किया कि वे निर्माण एजेंसियों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएं ताकि कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों बनी रहे। बैठक के दौरान मंदिर परिसर, सरोवर, मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ तथा सरोदा डैम से जुड़े निर्माण कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई और उनकी प्रगति पर चर्चा हुई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉरिडोर के प्रवेश द्वार, खंभों और दीवारों में फणी नागवंशी स्थापत्य शैली की स्पष्ट झलक दिखाई देनी चाहिए ताकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति से जुड़ सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि द्वार पर स्थापित होने वाला नंदी प्रतिमा विशाल और आकर्षक हो जिससे परिसर का भव्य स्वरूप और अधिक प्रभावी दिखे।

       उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने आदिवासी संग्रहालय के विकास और विस्तार पर भी जोर दिया और कहा कि भोरमदेव क्षेत्र की ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं को संग्रहालय में प्रभावी तरीके से प्रदर्शित किया जाए। साथ ही मंदिर निर्माण की पूरी कथा और इतिहास को भी वहां दर्शाया जाए ताकि पर्यटकों को जानकारी मिल सके। उप मुख्यमंत्री ने स्वच्छता और सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

      उन्होंने कहा कि महिला और पुरुष शौचालय अलग-अलग और व्यवस्थित स्थानों पर बनाए जाएं तथा महिलाओं के लिए सुविधाजनक दूरी पर शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम को ध्यान में रखते हुए पौधरोपण की पूरी तैयारी पहले से कर ली जाए। खुले क्षेत्रों में लैंडस्केपिंग को ध्यान रखते हुए पीपल, बरगद और नीम के पौधों का रोपण तुरंत शुरू किया जाए। बैठक में श्री राजीव लोचन महाराज, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशी राम धुर्वे, जनपद उपाध्यक्ष बोड़ला श्री नंद श्रीवास, श्री राम किंकर वर्मा सहित इंजीनियर, ठेकेदार और निर्माण एजेंसी उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री ने हाटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख समृद्धि की कामना की

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के महादेव घाट स्थित हाटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने महादेव से राज्य की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। 

             इस दौरान कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
             उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री साय आज हाटकेश्वर महादेव मंदिर परिसर महादेव घाट में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में शामिल होने पहुंचे थे।
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तेंदुवा धाम में श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने लिया संतों का आशीर्वाद

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण स्थित राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवा धाम कुरियारी में आयोजित 9 दिवसीय श्रीराम कथा में शामिल हुए। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय के साथ आश्रम पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की तथा प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि सदैव भगवान श्रीराम के चरणों से धन्य रही है। उन्होंने वनवास काल में भगवान श्रीराम के आगमन और माता शबरी की अद्भुत भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने आस्था, समर्पण और विश्वास की अनूठी परंपरा को सहेज कर रखा है। उन्होंने कहा कि तेंदुवाधाम आज धार्मिक और सांस्कृतिक जागरण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, जहां हजारों श्रद्धालु एक साथ श्रीराम कथा का श्रवण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को अत्यंत सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि एक ही मंच से अनेक संतों का सान्निध्य और आशीर्वाद प्राप्त होना विशेष अनुभव है। उन्होंने आश्रम परिसर में हरिवंश औषधालय एवं पंचकर्म केंद्र, श्री राम-जानकी मंडपम, हरिवंश वैदिक पाठशाला, मां दुर्गा गौ मंदिर और हनुमत प्रवेश द्वार सहित विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थानों के लोकार्पण पर आश्रम प्रबंधन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ “धान का कटोरा” होने के साथ-साथ सेवा, समर्पण और आस्था की भूमि भी है। उन्होंने अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर निर्माण के दौरान छत्तीसगढ़ से 11 ट्रक चावल और चिकित्सकों की टीम के वहां पहुंचने का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेशवासियों की गहरी श्रद्धा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि लगभग 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भगवान श्रीराम भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं, जो देश की सांस्कृतिक एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालु अयोध्या धाम के दर्शन कर लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और जवानों के अदम्य साहस से आज प्रदेश से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है तथा राज्य में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” यहां की संस्कृति और जीवन मूल्यों की सच्ची पहचान है।

इस अवसर पर परमपूज्य वासुदेवनंद सरस्वती महाराज, किन्नर अखाड़ा प्रमुख मां टीना सहित अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया गया।

राघव सेवा समिति के प्रमुख डॉ. अशोक हरिवंश ने बताया कि यह स्थल माता शबरी की जन्मभूमि शिवरीनारायण में स्थित है, जहां ‘कलिंग शैली’ में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। आश्रम में औषधालय, वैदिक विद्यालय, गौ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, गीता वाटिका, शबरी रसोई और निर्धन कन्या विवाह जैसी अनेक सामाजिक-धार्मिक पहल संचालित हो रही हैं। कार्यक्रम के तहत विभिन्न वर्गों - दिव्यांगजन, रक्तदाता, कुष्ठ रोगी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों - को समर्पित विशेष दिवस भी आयोजित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, महंत श्री रामसुंदर दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हज यात्रियों को वितरित किया फर्स्ट एड किट: सफल हज यात्रा के लिए शुभकामना देकर यात्रियों का किया स्वागत

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी द्वारा आज राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में  हज यात्रियों को फर्स्टएड किट सौंपकर उनकी सुखद एवं सुरक्षित यात्रा की कामना की।

             मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सौभाग्य का विषय है कि रायगढ़ से सांसद रहने के समय से लेकर आज तक लगातार हज यात्रियों के स्वागत का अवसर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्रदेश से कुल 815 हज यात्री यात्रा पर जा रहे हैं और पहली बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा यात्रियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया तथा मेडिकल किट भी उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने यात्रियों से देश एवं प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करने का आग्रह करते हुए उनकी यात्रा की सफलता की कामना की। 
                 सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह खुशी की बात है कि छत्तीसगढ़ के हज यात्रियों को यह पावन अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे अपनी यात्रा सफलतापूर्वक पूर्ण कर प्रदेश और देश की खुशहाली के लिए दुआ करें। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अब हज यात्रा के लिए लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती और अधिक लोगों को यह अवसर मिल रहा है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संभव हुआ है।
          कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग ने भी संबोधित किया और हज यात्रा से जुड़ी जानकारी साझा की। कार्यक्रम में अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कांवड़िया एवं वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज और छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी की सीईओ डॉ. खुशबू उस्मान समेत समाज के प्रबुद्धजन और प्रदेश भर से आए हज यात्री मौजूद थे।
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पांडुलिपियाँ: हमारी पहचान, हमारा गर्व - संरक्षण के लिए आगे आएँ नागरिक : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि हमारी पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया ‘ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ इस दिशा में एक दूरदर्शी और महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाने का कार्य कर रहा है।

उन्होंने प्रदेश के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज कर इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों का यह छोटा-सा प्रयास हमारी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने में एक बड़ा योगदान सिद्ध होगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी जड़ों को सहेजते हुए इस सांस्कृतिक अभियान में सहभागी बनें और ज्ञान की इस अमूल्य धरोहर को गर्व के साथ आगे बढ़ाएँ।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा "ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान" एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित एवं डिजिटल माध्यम से भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना है। मार्च 2026 से प्रारंभ इस राष्ट्रव्यापी अभियान में छत्तीसगढ़ राज्य की भी नियमित सहभागिता हो रही है। 

छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समिति का गठन और नोडल अधिकारी की नियुक्ति हो गई है, शेष 07 जिलों में गठन / नियुक्ति की कार्यवाही की जा रही है। जिलों में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित कर पाण्डुलिपि संग्रह कर्त्ता व्यक्तियों / संस्थाओं को चिन्हित किया जा रहा है, तथा ग्राम/क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है। प्रशिक्षकों को नोडल विभाग (संस्कृति विभाग) द्वारा ज्ञानभारतम के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ मिलकर जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ज्ञानभारतम भारत सरकार से छत्तीसगढ़ में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 06 जिलों में पाण्डुलिपि सर्वेक्षण का कार्य आरम्भ हो गया है और अब तक 4191 पांडुलिपियों का सर्वे ज्ञानभारतम एप के माध्यम से किया जा चुका है।
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सिंधी समाज का इतिहास पुरुषार्थ, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक : मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित बीटीआई मैदान में छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत द्वारा आयोजित ‘चन्ड्र जी रात, सिंधिन जो मेलो – आनंद मेलो’ में शामिल हुए।इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सिंधी समाज का इतिहास पुरुषार्थ और साहस का इतिहास है। विभाजन की विभीषिका की पीड़ा सबसे अधिक सिंधी समाज ने झेली। उस कठिन समय में आपके पूर्वजों ने अपनी संपत्ति छोड़ी, अपना घर छोड़ा, लेकिन अपना आत्मसम्मान और परिश्रम करने का स्वभाव कभी नहीं छोड़ा। शून्य से शिखर तक कैसे पहुँचा जाता है, यह सिंधी समाज ने आज पूरी दुनिया को सिखाया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की तरक्की में सिंधी समाज की प्रमुख भूमिका रही है। चाहे वह चेंबर ऑफ कॉमर्स हो या प्रदेश का छोटा-बड़ा व्यापार, आपकी मेहनत से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है। आप केवल व्यापार ही नहीं करते, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं।भविष्य में हमने विकसित छत्तीसगढ़ 2047 का जो सपना देखा है, उसमें सिंधी समाज का  महत्वपूर्ण योगदान रहेगा। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने लगभग ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के तहत किए गए अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है और लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज बी.टी.आई. ग्राउंड में जो उत्साह दिखाई दे रहा है, वह बताता है कि सिंधी समाज अपनी जड़ों से कितना गहराई से जुड़ा हुआ है। ‘सिंधियत जो मेलो’ जैसे आयोजन हमारी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, खान-पान और सिंधी भाषा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही उन्हें पवित्र शदाणी दरबार में संतों का आशीर्वाद लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। वहाँ जो स्नेह और आत्मीयता उन्हें मिली, वही अपनापन आज यहाँ भी महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की यही एकजुटता उसकी सबसे बड़ी ताकत है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी प्रदेशवासियों को चेट्रीचंड्र पर्व की अग्रिम बधाई और शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर मुख्य मंच से सिंधु दर्शन यात्रा का भी विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत को इस शानदार आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, धमतरी महापौर श्री रामू रोहरा, छत्तीसगढ़ सिंधी सेवा महापंचायत अध्यक्ष श्री अमर गिदवानी, श्रीचंद सुंदरानी सहित सिंधी समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का अभिनव प्रयास है भजन क्लबिंग – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित माधवास रॉक बैंड के ‘बिगेस्ट भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि भजन क्लबिंग युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने का एक अभिनव और सकारात्मक प्रयास है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही राष्ट्र शक्ति है और युवाओं के कंधों पर ही देश एवं प्रदेश का भविष्य टिका हुआ है। ऐसे आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


प्रसिद्ध भजन बैंड माधवास रॉक बैंड की संगीतमयी प्रस्तुति से पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर हो गया। राधा-कृष्णमय माहौल में मुख्यमंत्री श्री साय ने भी भक्तों के साथ फूलों की होली खेली। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक चेतना मंच द्वारा किया गया था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमें अपनी जड़ों और प्राचीन परंपराओं को कभी नहीं भूलना चाहिए। भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यह अत्यंत प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि जब युवा अध्यात्म से जुड़ते हैं तो उनमें सकारात्मक ऊर्जा, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना और अधिक सशक्त होती है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के किसानों के हित में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और राज्य की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जो किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज प्रदेश के 25 लाख 28 हजार से अधिक अन्नदाता किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की गई है। प्रदेश के 146 विकासखंडों में राशि अंतरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि वे स्वयं बिल्हा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि होली से पहले किसानों के खातों में राशि पहुंचने से उनके परिवारजन हर्षोल्लास के साथ त्योहार मना सकेंगे।

इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा, श्री अजय जामवाल, श्री आलोक डंगस, सामाजिक चेतना मंच के अध्यक्ष श्री उज्ज्वल दीपक सहित अन्य पदाधिकारी, इस्कॉन रायपुर से स्वामी सुलोचन प्रभुजी, स्वामी तमाल कृष्ण प्रभुजी, स्वामी निखिलापति प्रभुजी, स्वामी रघुपति दास तथा बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे।
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