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क्राइम पेट्रोल

अवैध खनन एवं परिवहन पर साय सरकार की सख्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।


कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा।

सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल

राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है।

लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई

खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक श्री सुजीत कंवर, श्री शिवकुमार लहरे, श्री सतीश साहू एवं सैनिक श्री साहिब गनी शामिल रहे।
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साइबर अपराधों से बचाव के लिए डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता अत्यंत आवश्यक- मंत्री श्री रामविचार नेताम

 डिजिटल युग में इंटरनेट और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। इससे सुरक्षित रहने के लिए जागरूकता और सतर्कता बेहद जरूरी है। यह बात छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास, किसान कल्याण तथा आदिम जाति मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कही। वे इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित “साइबर जागृति अभियान” के तहत एक दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि तथा रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे।


15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चल रहा विशेष अभियान

        छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए 15 अगस्त से 02 अक्टूबर 2026 तक छः सप्ताह का “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और बैंक खाताधारकों को ऑनलाइन ठगी से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना है।

चार वर्षों में 12 गुना बढ़े साइबर अपराध

      कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते चार सालों में देश के भीतर साइबर अपराधों में 12 गुना और ठगी की राशि में 40 गुना की वृद्धि हुई है। वर्तमान में देश में प्रतिदिन लगभग 61 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हो रही है। साइबर ठग लगातार नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे लोगों को अत्यधिक सावधान रहने की आवश्यकता है।

पुलिस ने बताए बचाव के ये प्रमुख उपाय

         व्यक्तिगत जानकारी न बांटें, किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी (OTP), बैंक खाता विवरण, पासवर्ड या एटीएम पिन साझा न करें। किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। फर्जी नौकरी, निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल या सोशल मीडिया पर मिलने वाले प्रलोभनों और धमकियों पर विश्वास न करें।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें संपर्क

       रायपुर पुलिस के अधिकारियों ने अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध या वित्तीय ठगी का शिकार होता है, तो वह बिना देरी किए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करे या पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराए। इस कार्यशाला में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक, कृषि महाविद्यालय रायपुर के अधिष्ठाता, विभिन्न विभागों के संचालक, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी

 कलाई आगे बढ़ी तो कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया। सामने सुरक्षा बल का जवान था और हाथ में राखी लिए खड़ी थी वह महिला, जिसकी जिंदगी के करीब 25 साल जंगल, नक्सली संगठन और संघर्ष के बीच बीते थे। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में टकराव और अविश्वास पैदा होता था, उसी वर्दी की कलाई पर इस बार उसने राखी बांधी। जवान ने भी बहन का रिश्ता स्वीकार किया, शगुन दिया और मिठाई खिलाई।


भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन का यह दृश्य बस्तर की बदलती तस्वीर की कहानी कह रहा था। यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था। यह उस दूरी को पाटने की कोशिश थी, जो वर्षों के हिंसक संघर्ष ने समाज और सुरक्षा बलों के बीच पैदा कर दी थी।

हाथ में हथियार नहीं, राखी थी

करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल सामान्य नहीं था। जंगल की जिंदगी में हथियार और संघर्ष उनका अतीत रहे हैं। लेकिन अब वही हाथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे थे।

सुरक्षा बल के कैंप में पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। शगुन दिया, मिठाई खिलाई और इस रिश्ते को सम्मान दिया।

यह तस्वीर इसलिए भी खास थी क्योंकि बस्तर में कई सालों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच बने इस तनाव के बीच एक राखी ने संवाद और विश्वास की एक नई जगह बनाई।

महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया हाथ

इस आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सल हिंसा के खिलाफ अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे सुरक्षा बल के जवान और पूर्व नक्सली महिलाएं इस दिन किसी संघर्ष के दो पक्ष नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भाई-बहन नजर आए।

रक्षाबंधन के इस छोटे से आयोजन में संदेश बड़ा था—अगर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में स्वीकार्यता मिले और सुरक्षा बलों के साथ विश्वास का रिश्ता बने, तो नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की राह और मजबूत हो सकती है।

एसपी बोले—रिश्ते सामान्य होंगे

कांकेर एसपी श्री  निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।

उन्होंने कहा, यह एक अनूठा प्रयास है कि नक्सलवाद की जो समस्या थी, उसके समाधान की दिशा में हम जो कदम बढ़ा रहे हैं, उसका यह प्रतीक स्वरूप रक्षाबंधन है। इस रिश्ते के धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।

एसपी ने कहा कि ऐसे प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।

मीना के लिए राखी का मतलब सिर्फ त्योहार नहीं

करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ता है। जंगल की जिंदगी, संगठन की सोच और संघर्ष के बीच बीते वर्षों के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। ऐसे में राखी का यह धागा मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए एक नए सामाजिक रिश्ते की शुरुआत जैसा था।

जिस समाज और सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी समाज के प्रतिनिधि जवान की कलाई पर राखी बांधना यह संकेत भी है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश जारी है।

बस्तर में बदल रही है कहानी

बस्तर की कहानी लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़, शहीद जवानों और भय के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही। गांवों में बंदूक की मौजूदगी ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। विकास की राह भी हिंसा के साए में आगे बढ़ती रही। लेकिन अब इसी बस्तर से कहानी के कुछ नए अध्याय सामने आ रहे हैं।

हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोग, गांवों में पहुंचती विकास की योजनाएं, बनती सड़कें, खुलते स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव की मानवीय तस्वीर है।

एक राखी, कई संदेश

राखी का धागा छोटा है, लेकिन इस आयोजन का संदेश बड़ा है। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए थे कि वापसी का रास्ता खुला है। यह समाज के लिए संदेश है कि मुख्यधारा में लौटने वालों को स्वीकार करना जरूरी है। और यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मानवीय पहल है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ विश्वास का रिश्ता भी बनाया जा सकता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—यह भरोसे पर बंधी।

जहां कभी डर था, वहां अब भरोसे की कोशिश

छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि किसी भी संघर्ष का अंत केवल बंदूक से नहीं होता। स्थायी शांति के लिए लोगों के बीच भरोसा लौटना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर के बदलते सामाजिक माहौल की एक भावुक तस्वीर पेश करती है।

कैंप में राखी बंधने के बाद शायद सबसे बड़ा बदलाव यही था कि कुछ देर के लिए वहां किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला कल कौन था।

देखा तो सिर्फ इतना गया कि आज वह सामने खड़ा व्यक्ति कौन है—एक भाई, एक बहन और एक ऐसे समाज का हिस्सा, जो अपने अतीत से आगे बढ़कर शांति की ओर जाना चाहता है।

बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह एक धागा खड़ा था—रिश्तों का, भरोसे का और नए बस्तर का।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने चमोली सुरंग हादसे में कोंडागांव जिले के मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की सहायता देने के दिए निर्देश

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उत्तराखंड के चमोली में निर्माणाधीन सुरंग में पानी भरने की दुःखद घटना में कोंडागांव जिले के 4 श्रमिकों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतक श्रमिकों के परिजनों को ₹5-5 लाख तथा हादसे में घायल दोनों श्रमिकों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।


इस हादसे में कोंडागांव जिले के ग्राम धनसुली के 2, मदनार के 1 और दहीकोंगा के 1 श्रमिक की मृत्यु हुई है, जबकि जिले के 2 श्रमिक घायल हुए हैं। दिवंगत श्रमिकों के पार्थिव शरीर कोंडागांव लाए गए, जहां परिजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार दुःख की इस घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ पूरी संवेदनशीलता से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति एवं शोकाकुल परिजनों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। उन्होंने हादसे में घायल दोनों श्रमिकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की है।
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डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बिलासपुर केंद्रीय जेल का किया आकस्मिक निरीक्षण

 जेल महानिदेशक (डीजी जेल) श्री हिमांशु गुप्ता द्वारा आज बिलासपुर स्थित केंद्रीय जेल का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, कैदियों की समस्याएं सुनीं और जेल के सुदृढ़ीकरण तथा कैदियों के कल्याण हेतु विभिन्न आधुनिक सुविधाओं की स्वीकृति प्रदान की।


डीजी जेल ने खुद ली अंग्रेजी की क्लास

       निरीक्षण के दौरान डीजी जेल श्री हिमांशु गुप्ता ने एक अनोखी पहल करते हुए कैदियों की अंग्रेजी की क्लास ली और उन्हें पढ़ाई तथा भाषा सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स दिए। इसके साथ ही उन्होंने कैदियों से सीधा संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। 

जेल को मिलीं ये नई सुविधाएं एवं स्वीकृतियां

      जेल में उद्योग संचालन के लिए कलर ऑफसेट प्रिंटिंग मशीन तथा एलईडी बल्ब एवं ट्यूबलाइट निर्माण हेतु मशीन सेटअप की स्वीकृति दी गई। कैदियों की शिक्षा के लिए स्मार्ट बोर्ड तथा जेल लाइब्रेरी के लिए प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्रों (टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, हितवाद आदि) की उपलब्धता। कैदियों के लिए 20 नग आरओ वाटर प्यूरीफायर, पाकशाला (रसोई) हेतु ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन तथा कैदियों के लिए 2,000 थाली सेट की व्यवस्था के निर्देश दिए। महिला जेल परिसर के लिए इन्वर्टर की स्वीकृति शामिल हैं। 

      इस निरीक्षण के दौरान डीआईजी जेल श्री एस.एस. तिग्गा, जेल अधीक्षक श्री खोमेश मंडावी, जेल चिकित्सक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
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सुरक्षा के दृष्टि से केन्द्रीय जेल रायपुर में मुलाकात व्यवस्था में अस्थाई परिवर्तन

 केन्द्रीय जेल रायपुर में विगत माह बंदियों से मुलाकात के दौरान कुछ परिजनों द्वारा दैनिक उपयोग की सामग्रियों में प्रतिबंधित वस्तुएँ छिपाकर जेल परिसर के भीतर पहुँचाने का प्रयास किया गया था। जेल शासन के सघन तलाशी एवं सतर्क सुरक्षा व्यवस्था के कारण ऐसे सभी प्रयास विफल कर दिए गए तथा संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जप्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई।


         अधीखक केन्द्रीय जेल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल की सुरक्षा एवं अनुशासन को दृष्टिगत रखते हुए और सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन द्वारा एहतियातन बंदियों के दैनिक उपयोग की कुछ चयनित सामग्रियों को जेल केन्टीन से क्रय कर बंदियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अन्य सभी स्वीकृत सामग्री पूर्ववत् नियमानुसार बंदियों के परिजन स्वयं उपलब्ध करा सकते हैं।

         यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी है तथा इसका उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की जेल में संभावित प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जेल केन्टीन में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियाँ गुणवत्तापूर्ण हैं तथा उनकी दरें सामान्य बाजार दरों से कम निर्धारित की गई हैं, जिससे बंदियों के परिजनों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।
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पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिस जवानों का जाना हाल

 रायपुर में आज एक रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रैली को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल द्वारा बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था संभाली जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों द्वारा अचानक पत्थर एवं बोतलें फेंके जाने से अव्यवस्था की स्थिति निर्मित हो गई, जिसमें ड्यूटी पर तैनात पुलिस के 16 जवान घायल हो गए। घायलों में एक महिला आरक्षक शामिल थी, दो पुलिस जवानों को गंभीर चोटें आई हैं।


        घटना की जानकारी मिलते ही रायपुर के पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला में अस्पताल पहुंच भर्ती पुलिस जवानों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने चिकित्सकों से घायल जवानों के स्वास्थ्य एवं उपचार की विस्तृत जानकारी ली तथा सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

       घायल जवान कलेश्वर वर्मा ने बताया कि बैरिकेटिंग के दौरान भीड़ के बीच फंस जाने से उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल लाया गया। वहीं, प्रशिक्षु उप निरीक्षक (पीएसआई) श्री देवराज सिंह के सिर पर बोतल लगने से गंभीर चोट आई है, जिनका उपचार चिकित्सकों की निगरानी में जारी है।

        अन्य घायल आरक्षकों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इस दौरान पुलिस उपायुक्त (मध्य) श्री तारकेश्वर पटेल, एसीपी श्री नीलेश द्विवेदी, टीआई श्री राजेश मरई सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
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रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में “डायल-112 फेस-2 नेक्स्ट जनरेशन” सेवा का उप मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

 राजधानी रायपुर में नागरिक सुरक्षा एवं आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आज रायपुर पुलिस परेड ग्राउंड में “डायल-112 फेस-2 नेक्स्ट जनरेशन” सेवा का भव्य शुभारंभ उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा किया गया। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा द्वारा हरी झंडी दिखाकर 54 नवीन इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहनों को शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं के लिए रवाना किया गया।

          इस अवसर पर रायपुर (पश्चिम) विधायक श्री राजेश मूणत, रायपुर (उत्तर) विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे, रायपुर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर श्री अमित कांबले, कलेक्टर रायपुर श्री गौरव कुमार, ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्रीमती श्वेता सिन्हा सहित शासन एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

         उपमुख्य मंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्व में डायल-112 सेवा केवल 16 जिलों तक सीमित थी, जिसे अब विस्तारित कर प्रदेश के सभी 33 जिलों में लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि रायपुर कमिश्नरेट क्षेत्र हेतु 33 ईआरवी एवं ग्रामीण क्षेत्र हेतु 21 ईआरवी सहित कुल 54 वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराने हेतु 4 विशेष हाईवे पेट्रोलिंग वाहन भी तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सभी वाहन अत्याधुनिक जीपीएस सिस्टम, स्मार्ट कंट्रोल एवं मॉनिटरिंग सिस्टम, कॉल रिकॉर्डिंग, रियल टाइम ट्रैकिंग एवं डिजिटल कम्युनिकेशन तकनीक से लैस हैं, जिससे सूचना प्राप्त होते ही त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सकेगी। डायल-112 सेवा के माध्यम से पुलिस का रिस्पॉन्स टाइम राष्ट्रीय मानक के अनुरूप रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। गृह मंत्री ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना में तकनीकी एवं रणनीतिक सहयोग प्रदान करने हेतु केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

        डायल-112 सेवा “एक नंबर- सबकी मदद” (एक्के नंबर, सब्बो बर) की अवधारणा पर आधारित है। इसके अंतर्गत नागरिकों को अब विभिन्न सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल ‘112’ डायल कर पुलिस सहायता, फायर ब्रिगेड, मेडिकल इमरजेंसी, महिला हेल्पलाइन (1091), चाइल्ड हेल्पलाइन (1098), आपदा प्रबंधन एवं हाईवे इमरजेंसी जैसी समस्त आपातकालीन सेवाओं का लाभ प्राप्त किया जा सकेगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक श्री राजेश मूणत जी ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज तेजी से सुरक्षित एवं नक्सल मुक्त राज्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है तथा डायल-112 का नेक्स्ट जनरेशन मॉडल प्रदेश की आपातकालीन सेवाओं को और अधिक मजबूत एवं सक्षम बनाएगा।

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की अपील

       रायपुर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी आकस्मिक, आपातकालीन अथवा संकट की स्थिति में बिना किसी संकोच के तत्काल डायल-112 सेवा का उपयोग करें। रायपुर पुलिस नागरिकों की सुरक्षा, सहायता एवं त्वरित सेवा हेतु चौबीसों घंटे प्रतिबद्ध एवं तत्पर है।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने दूरभाष पर पद्मश्री फुलबासन यादव से की चर्चा, जाना हालचाल

पद्मश्री सम्मान से अलंकृत वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती फुलबासन यादव के साथ हुई अप्रिय घटना को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज सुबह स्वयं दूरभाष पर श्रीमती फुलबासन यादव से चर्चा कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा घटना की जानकारी ली। 

 
मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि इस मामले की हर पहलू से गहन जांच की जाएगी। दोषी चाहे जो हो, बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए हैं।

पद्मश्री श्रीमती फुलबासन यादव ने घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और पुलिस प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया।
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72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

     इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 
             कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी। 
             वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। 
             इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई। 
            लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
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धमतरी सड़क दुर्घटना में कोबरा बटालियन के जवानों के निधन पर मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज धमतरी में हुए सड़क हादसे में कोबरा बटालियन के वीर जवानों के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा में समर्पित हमारे जांबाज जवानों का निधन अत्यंत हृदयविदारक है और यह क्षति अपूरणीय है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने दिवंगत जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने में कोबरा बटालियन के जवानों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। मुख्यमंत्री ने शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा घायल जवान के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर आवश्यक सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को घायल जवान के समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
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नए आपराधिक कानूनों के प्रयोग से पुलिस प्रक्रिया हुई तीव्र एवं आसान - उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने आज गृह एवं जेल विभाग की उपलब्धियों के संबंध में नया रायपुर स्थित संवाद ऑडिटोरियम में पत्रकारों से चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार बनने के साथ ही हम एक नई सोच को लेकर कार्य कर रहे हैं। राज्य की क्षमता में विस्तार के लिए नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन अन्तर्गत आइसीजेएस के तहत पांचों स्तंभों पुलिस, अभियोजन, फारेंसिक, जेल एवं न्यायालय को एकीकृत करने की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ राज्य अग्रणी है। दुर्ग एवं बिलासपुर जिले पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर पांचों पिलर्स को एकीकृत कर एक मॉडल जिले के रूप में उभर कर सामने आये हैं। पहले पुलिस को साक्ष्यों को लेकर कई बार समास्याओं का सामना करना पड़ता था अब ई- साक्ष्य के आने से तुरंत साक्ष्य उपलब्ध हो रहे हैं। जिससे पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ा है।

       पुलिस कार्यों के आधुनिकीकरण के लिए सीसीटीएनएस द्वारा मेडलीपार, ई- साक्ष्य, ई -सम्मन, ऑनलाइन एफआईआर, ई- साइन, ई- कोर्ट, ई- श्रुति के द्वारा कार्यों को त्वरित और आसान बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को न्याय प्राप्ति में आसानी होगी।
    पुलिस कर्मियों के लिए अब तक किसी प्रकार की बीमा की व्यवस्था नहीं थी, जिसपर ध्यान देते हुए सरकार द्वारा 08 बैंकों के साथ एमओयू कर बिना किसी प्रीमियम के सैलरी अकाउंट पर बीमा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, इसका लाभ छत्तीसगढ़ पुलिस के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारियों को प्राप्त हो रहा है। यह पुलिस कर्मियों के लिये कल्याणकारी योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके तहत अब तक 15 शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रितों को 16 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है।
    पहले अपराध समीक्षा हाथ से लिखकर उपलब्ध कराया जाता था जो पुलिस विवेचना में देरी होती थी, अब राज्य की अभिनव पहल के रूप में अपराध समीक्षा एप्लीकेशन से पूरे राज्य में दर्ज एफआईआर की निगरानी, समीक्षा एवं विश्लेषण की जा रही है। जहां समय-सीमा में अपराधों का विवेचना के साथ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित रूप इसका पर्यवेक्षण किया जा रहा है जिससे जवाबदेहिता सुनिश्चित हो रही है और हर स्तर पर उसकी निगरानी की जा रही है।
      उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय में विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के निराकरण हेतु ऑनलाईन कम्पलेंट मैंनेजमेंट पोर्टल का निर्माण किया गया है। पूर्व में  शिकायतों को संबंधित जिलों में डाक के माध्यम से प्रेषित किया जाता था और जिलों के द्वारा भी संबंधित शिकायतों का जांच प्रतिवेदन डाक के माध्यम से ही मुख्यालय को प्राप्त होता था। इस पोर्टल के निर्माण से इस प्रक्रिया को ऑनलाईन किया गया है, जिससे संसाधनों व समय की बचत के साथ-साथ शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है। शिकायतों के त्वरित निराकरण से पुलिस की छवि में सुधार तथा पीड़ितों को राहत मिल रहा है।
     अवैध प्रवासियों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में टोल फ्री नम्बर जारी कर अवैध प्रवासियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए अवैध प्रवासियों की पहचान कर विशेष टास्क फोर्स का गठन द्वारा उनकी गिरफ्तारी एवं विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत उन पर कार्रवाई करते हुए 34 लोगों को देश से निष्कासित करने का भी कार्य किया गया है। विचाराधीन लोगों के लिए होल्डिंग सेंटर भी बनाये गए हैं जहां उनकी जांच कर नियमानुसार प्रक्रिया की जा रही है। सरकार द्वारा एंटी टेरीरिस्ट स्क्वाड को भी क्रियाशील करने का कार्य किया है जहां बनने के बाद से अब तक इसमें कोई केस दर्ज नहीं हुआ था वर्ष 2025 में इसके द्वारा पहली बार कार्रवाई की गई थी।
     उन्होंने बताया कि धर्मांतरण के मामलों पर सरकार विशेष ध्यान देते हुए इन्हें रोकने के लिए संलग्न लोगों पर कार्रवाई कर रही है सरकार बनने के 23 वर्षों में जितने मामले दर्ज हुए थे उससे दोगुने मामले पिछले 2 वर्षों में दर्ज किए गए हैं।
    उन्होंने बताया कि प्रदेश में गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार की रोकथाम हेतु पुलिस द्वारा लगातार कार्यवाही की जा रही है, जिसमें गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार के प्रकरण दर्ज कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। इनमें प्रयुक्त वाहनों को जप्त कर 142 वाहनों को राजसात कर 27 वाहनों की नीलामी भी की जा चुकी है। देश में पहली बार गौवंश वध, परिवहन एवं व्यापार के आदतन आरोपियों की सूची बनाई गई है और उनपर गैंगस्टर अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए 19 पर निगरानी भी खोलकर सतत् निगरानी की जा रही है।
       राज्य में नशे व्यापार के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार कार्य किया जा रहा है। आदतन आरोपी के विरूद्ध निरोधक आदेश जारी कर एनडीपीएसए के वित्तीय जांच कर नशे के व्यापारियों की वित्तीय आधार खत्म करने के लिए उनकी सम्पत्ति जब्त कर उसे नीलाम करने का भी कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही गांजा, नशीली दवाइयों, एमडीएमए, हेरोईन, ब्राउन शुगर, डोडा को नष्टीकरण करने का कार्य किया गया है एवं संलग्न वाहनों की नीलामी भी की जा रही है।
       साइबर अपराधियों के विरूद्ध तीव्र गति से कार्रवाई के करते हुए ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों के खातों को सीज करने के साथ फर्जी सिम जारी करने वाले पीओएस पर भी अपराध पंजीबद्ध कर 165 संचालको की गिरफ्तारी की कार्यवाही की गई है साथ ही म्यूल खातों पर कार्यवाही करते हुये अपराध पंजीबद्ध कर बैंक कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी की गई है। 
        राज्य में संचालित अनाधिकृत ऑनलाईन गैम्बलिंग प्लेटफार्म पर पहली बार कार्रवाई करते हुए 255 ऑनलाइन लिंक्स और पोर्टल्स को रोकने का भी कार्य किया गया है। साइबर सुरक्षा के लिए रायगढ़, कोरबा, राजनांदगाँव, कबीरधाम, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, जशपुर एवं धमतरी में साइबर थानों का संचालन प्रारंभ किया गया।
    नक्सलवाद के अंत के संबंध में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट किया की शासन बस्तर में शांति के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे के लिए केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 का दिन निर्धारित है, जिस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार अडिग है। लोकतंत्र में बंदूक दिखा कर भय और हिंसा फैलाने वालों का कोई स्थान नहीं है। शासन का प्रयास है अधिक से अधिक माओवादियों का पुनर्वास कराया जाए, इसका प्रभाव है कि राज्य में नक्सल ऑपरेशन में न्यूट्रलाइसड किए गए माओवादियों की संख्या से कई गुना अधिक लोगों ने पुनर्वास का रास्ता चुना है। इसके लिए लगातार सरकार द्वारा रेडियो एवं अन्य माध्यमों से पुनर्वास हेतु संदेश जारी किए थे, इसमें बस्तर के पत्रकार साथियों एवं समाज प्रमुखों का भी बहुत सहयोग प्राप्त हुआ है जो सराहनीय है। उन्होंने बस्तर के समाज प्रमुख गणेश माड़वी के योगदान की विशेषतः रेखांकित किया।
        पुनर्वासित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन द्वारा विभिन्न कार्य किये जा रहे हैं, इसमें उन्हें आजीविका मूलक प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्हें 5जी मोबाइल फोन, विभिन्न स्थानों पर शैक्षणिक भ्रमण भी कराया जा रहा है। जेल में नक्सल प्रकरण में निरुद्ध लोगों के पुनर्वास के लिए उनके परिजनों के माध्यम से उन्हें जेल से पुनर्वास करने की अपील की जा रही है उन्हें पे रोल पर ले जा कर पुनर्वास केंद्रों का भ्रमण कराया जा रहा है। ऐसे पुनर्वासित युवा जिनका विवाह नहीं हुआ था, उनका भी सामूहिक विवाह कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इलवद पंचायत योजना के तहत अब तक दो पंचायतों ने स्वयं को नक्सल मुक्त घोषित भी किया है। पिछले 2 वर्षों में कई पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय कमेटी सदस्य, स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य के द्वारा पुनर्वास के साथ कई नक्सल नेताओं को न्यूट्रलाइस भी किया गया है।
      उन्होंने बताया कि जेलों में व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने पर राज्य की चार केन्द्रीय जेल रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर तथा अंबिकापुर को आई.एस.ओ. प्रमाणन भी प्राप्त हुआ है। युवा बंदियों को सकारात्मक रचनात्मक रूझान प्रदान करने के लिए केन्द्रीय जेल अंबिकापुर में सरगुजा स्कूल ऑफ ऑर्ट्स की स्थापना की गई है। इसमें युवा बंदियों को ड्राईंग, पेंटिंग, योग इत्यादि कलाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बंदियों को मनोरंजन तथा सकारात्मक शिक्षा प्रदान करने हेतु केन्द्रीय जेल रायपुर में 'उमंग-तरंग' नाम से रेडियो स्टेशन का संचालन किया जा रहा है। बंदियों के कौशल विकास एवं पुनर्वास हेतु जेलों में नवीन उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिसमें मसाला उद्योग, ऑयल एक्सट्रेक्शन उद्योग, एलईडी बल्ब, पेट्रोल पंप का संचालन सम्मिलित हैं। इस अवसर पर एसीएस गृह श्री मनोज पिंगुआ, डीजी जेल श्री हिमांशु गुप्ता, सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, एडीजी श्री अमित कुमार, एडीजी श्री एसआरपी कल्लूरी, एडीजी श्री विवेकानंद, एडीजी श्री प्रदीप गुप्ता, आईजी श्री ध्रुव गुप्ता एवं मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है, विकास का नया युग प्रारंभ हो चुका है — मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य के विकास में सबसे बड़ी बाधा रहे नक्सलवाद का जड़ से उन्मूलन अब साकार होता दिख रहा है। यह सफलता डबल इंजन की सरकार के मजबूत नेतृत्व, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की स्पष्ट नीति तथा हमारे वीर सुरक्षाबलों के साहस, पराक्रम और अटूट संकल्प का सामूहिक परिणाम है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सलवाद आज अपने अंतिम चरण में है और यह छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह का स्पष्ट संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक पूरे देश से नक्सलवाद का पूर्ण उन्मूलन किया जाएगा, और यह संकल्प अब धरातल पर साकार रूप लेता दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नक्सली हिंसा के समाप्त होते ही बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और स्थिरता की मजबूत नींव स्थापित हो रही है। वर्षों तक विकास से वंचित रहे क्षेत्रों में अब तेजी से सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, पर्यटन और आजीविका के नए आयाम खुल रहे हैं। उन्होंने कहा कि "बस्तर अब परिवर्तन की राह पर है, और आने वाले वर्षों में वहां विकास की गंगा बहेगी।"

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार की प्रतिबद्धता, केंद्र सरकार का मार्गदर्शन और सुरक्षा बलों का साहस — इन तीनों की संयुक्त शक्ति से छत्तीसगढ़ न केवल नक्सलवाद से मुक्त होगा, बल्कि देश के सर्वश्रेष्ठ विकासशील राज्यों में अग्रणी बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह नया छत्तीसगढ़ शांति, समृद्धि, विश्वास और विकास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बीजापुर में नक्सल-विरोधी अभियान में वीर जवानों की शहादत पर गहरी संवेदना व्यक्त की

 बीजापुर जिले में आज चल रहे नक्सल-विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। संयुक्त सर्च एवं कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों ने 12 माओवादियों को न्यूट्रलाइज किया है। क्षेत्र में अभी भी सर्च अभियान सतत जारी है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अभियान के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए डीआरजी बीजापुर के प्रधान आरक्षक मोनू वडड़ी, आरक्षक दुकारू गोंडे और आरक्षक रमेश सोड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि शोक-संतप्त परिवारों को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति प्रदान करें और दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुठभेड़ में घायल दो अन्य जवान खतरे से बाहर हैं और उनके समुचित उपचार की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। उन्होंने दोनों जवानों के शीघ्र एवं पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारे वीर जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। नक्सलवाद के विरुद्ध यह निर्णायक सफलता यह स्पष्ट संकेत है कि लाल आतंक का अंत अब बहुत निकट है। उन्होंने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार और सुरक्षाबल “माओवाद के पूर्ण खात्मे” के संकल्प पर पूरी मजबूती से अडिग हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जब तक बस्तर के अंतिम गाँव तक शांति, सुरक्षा और विकास का प्रकाश नहीं पहुँच जाता, तब तक यह अभियान पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस सफल कार्रवाई में शामिल सभी सुरक्षा बलों के साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की और कहा कि सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
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साइबर धोखाधड़ी से बचाव में जिला अर्थशाला ने दर्ज की उल्लेखनीय सफलता

 साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी की घटनाएँ तेजी से बढ रही है। इस प्रकार की धोखाधडी से बचाव के लिए बलौदाबाजार -भाटापारा की पहल पर जिला-स्तरीय अर्थशाला(फाइनेंस लैब)। यह फाइनेंस लैब आम नागरिकों को साइबर खतरों से बचाव, आधुनिक वित्तीय प्रणाली, सुरक्षित लेनदेन के तरीके, डिजिटल बैंकिंग के उपयोग से संबंधित प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। जिला फाइनेंस लैब पण्डित चक्रपाणि शुक्ल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बलौदाबाजार में 2 नवम्बर 2025 से संचालित है। 


730 युवा फाइनेंस लैब से जुड़े 

             वर्तमान समय में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय ठगी की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं।  आम नागरिकों को इन खतरों से बचाने और उन्हें वित्तीय रूप से जागरूक बनाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में कलेक्टर बलौदाबाजार -भाटापारा की पहल पर एक महीने से भी कम समय में लगभग 730 युवा इस  फाइनेंस लैब से जुड़ चुके हैं, जो इसकी सफलता को परिलक्षित करता है। इस लैब के माध्यम से वित्तीय अवधारणाओं को समझने और सुरक्षित एवं जिम्मेदार वित्तीय व्यवहार विकसित करने के प्रति युवाओं में  रुचि बढ़ी है।

फाइनेंस लैब की मुख्य उद्देश्य युवाओं को व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा से है जोड़ना 

             फाइनेंस लैब का मुख्य उद्देश्य बच्चों और युवाओं को व्यावहारिक वित्तीय शिक्षा से जोड़ना है। आज के समय में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है- वित्तीय साक्षरता और व्यावहारिक समझ भी उतनी ही आवश्यक है। इसी सोच के साथ फाइनेंस लैब को इस प्रकार तैयार किया गया है कि छात्र, युवा और जिले के नागरिक खेलों, गतिविधियों और नवाचार आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से वित्तीय अवधारणाओं को आसानी से सीख सकें।

वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और सीख सकते हैं आर्थिक नियोजन 

            फाइनेंस लैब की अवधरणा- यह एक ऐसा समर्पित स्थान या प्लेटफॉर्म है जो छात्रों, निवेशकों या आम जनता को वास्तविक जीवन के वित्तीय परिदृश्यों  और उपकरणों  के साथ अभ्यास करने का अवसर देता है।यह बजट बनाने, बचत करने, बीमा लेने और निवेश करने के बारे में सूचित  और विचारशील निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ावा देता है।​ वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और आर्थिक नियोजन जैसे जीवन-भर काम आने वाले कौशल सीख सकते  हैं। फाइनेंस लैब में बिजनेस और स्टार्ट अप में रुचि लेने वाले विद्यार्थियों के मार्गदर्शन  के लिए लक्ष्य क़क्ष, आकांक्षा क़क्ष ,उड़ान क़क्ष इत्यादि निर्मित है जहाँ हर ज़रूरी पहलू पर युवाओं का मार्गदर्शन किया जाएगा।यहाँ ग्रुप एक्टिविटीज के माध्यम से ऑक्शन प्रक्रिया की भी जानकारी मिलेगी। ग्रामीण अंचल के युवाओं को वित्तीय साक्षरता प्रदान करने के लिए काफ़ी फायदेमंद है ।

तकनीक एवं सुरक्षित वित्तीय सेवाओं से जुड़ने का अवसर

            फाइनेंस लैब के लाभ-नागरिक सही वित्तीय और डिजिटल लेनदेन के तरीके सीख सकेंगे। साइबर फ्रॉड, फ़िशिंग, एटीएम स्कैम और फर्जी निवेश जैसे जाल से बचाव में मदद मिलेगी। लोग सही निवेश और वित्तीय प्रबंधन सीख सकेंगे। वित्तीय साक्षरता से ग्रामीण और शहरी दोनों समुदायों को मजबूती मिलेगी। युवाओं को नई तकनीक एवं सुरक्षित वित्तीय सेवाओं से जुड़ने के अवसर मिलेंगे। बलौदाबाजार की यह पहल पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बनेगी।
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“हिड़मा के आतंक का अंत, बस्तर में लौट रहा शांति का वसंत” — मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश सीमा पर सुरक्षाबलों द्वारा संचालित सफल ऑपरेशन में शीर्ष नक्सली लीडर एवं सीसी मेम्बर माडवी हिड़मा सहित छह नक्सलियों के न्यूट्रलाइज होने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर सुरक्षाबलों के अदम्य साहस को सलाम करते हुए कहा है कि “यह घटना नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में निर्णायक उपलब्धि है।" 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़–आंध्र प्रदेश सीमा पर सुरक्षाबलों के सफल ऑपरेशन में शीर्ष नक्सली लीडर और सीसी मेम्बर माडवी हिड़मा सहित छह नक्सलियों का न्यूट्रलाइज होना नक्सलवाद के विरुद्ध हमारी लड़ाई में एक निर्णायक उपलब्धि है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सुरक्षाबल के जवानों के अदम्य साहस को नमन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हिड़मा वर्षों से बस्तर में रक्तपात, हिंसा और दहशत का चेहरा था। आज उसका अंत न सिर्फ एक ऑपरेशन की उपलब्धि है, बल्कि लाल आतंक पर गहरी चोट है, साथ ही यह क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की हमारी प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते महीनों में सैकड़ों नक्सलियों का आत्मसमर्पण, टॉप कैडर की गिरफ्तारियाँ और लगातार सफल ऑपरेशन्स बताते हैं कि नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में हमारी सुशासन सरकार बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई धारा बहा रही है।नियद नेल्ला नार, नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति, नवीन सुरक्षा कैंप की स्थापना, इन कदमों ने जनविश्वास को मजबूत किया है और बस्तर के हर गांव में नया आत्मविश्वास भरा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि केंद्र–राज्य की संयुक्त रणनीति के साथ मार्च 2026 तक भारत पूर्णतः नक्सलमुक्त होगा।
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2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खांसी की सिरप देना पूर्णतः प्रतिबंधित

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी की सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, यह दवाएं सामान्यतः पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी अनुशंसित नहीं हैं। यह कदम शिशुओं को संभावित दुष्प्रभावों से बचाने और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।


एडवाइजरी जारी होते ही छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने तत्परता से कार्यवाही करते हुए सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) तथा सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी शासकीय और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि भारत सरकार की इस गाइडलाइन का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

साथ ही आयुक्त स्वास्थ्य सेवाएं द्वारा इस संबंध में एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सभी जिलास्तरीय विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि खांसी या सर्दी की दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय परामर्श पर आधारित होना चाहिए, तथा इस संबंध में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश मामलों में बच्चों में खांसी-जुकाम जैसी सामान्य बीमारियाँ अपने आप ठीक हो जाती हैं और इसके लिए दवा देना आवश्यक नहीं होता। इसलिए आम जनता को भी डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को दवाएं न देने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

कड़ी निगरानी में है औषधि आपूर्ति प्रणाली

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (सीजीएमएससी) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन दो कंपनियों के विरुद्ध अन्य राज्यों में कार्रवाई की गई है, उनकी राज्य में किसी भी प्रकार की सरकारी आपूर्ति नहीं रही है। ये कंपनियाँ सीजीएमएससी के डेटाबेस में पंजीकृत भी नहीं हैं।
यह तथ्य राज्य में सरकारी स्तर पर आपूर्ति शृंखला की पारदर्शिता और सतर्कता की पुष्टि करता है।

निर्माण इकाइयों और निजी औषधालयों का निरीक्षण तेज

भारत सरकार के स्वास्थ्य सचिव द्वारा 5 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस के पश्चात, छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने भी निगरानी और कार्रवाई को तेज कर दिया है। राज्यभर में औषध निर्माण इकाइयों का जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-Based Inspection) करने हेतु औषधि निरीक्षकों के दल गठित किए गए हैं।

प्रदेश के सभी सहायक औषधि नियंत्रकों और औषधि निरीक्षकों को पत्र जारी कर निर्देशित किया गया है कि वे सभी औषधि विक्रय संस्थानों का तत्काल निरीक्षण करें, ताकि एडवाइजरी के उल्लंघन की कोई संभावना न रहे। इसके साथ ही निजी फार्मेसियों का आकस्मिक निरीक्षण भी किया जा रहा है। इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों के संदर्भ में किसी भी प्रकार की दवाओं का अनुचित या असावधानीपूर्वक उपयोग पूर्णतः बंद हो। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा अभिभावकों से अनुरोध किया गया है कि वे बिना चिकित्सकीय परामर्श के अपने बच्चों को कोई भी दवा न दें।
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डबल इंजन की सरकार में ड्रग्स कैसे पाकिस्तान से छत्तीसगढ़ पहुंच रहा- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार सीमा पार से होने वाली नशीली वस्तुओं की तस्करी रोकने में नकारा साबित हो गई है। अडानी के मुद्रा पोर्ट में हजारों करोड़ों रुपए का ड्रग्स पकड़ा गया किसी भी प्रकार से कानूनी कार्यवाही नहीं की गई। सीमा पार से आतंकवादी विदेशी हथियार, नशीली वस्तुएं, घुसपैठ हो रहा है इसकी जिम्मेदारी किसके ऊपर है, केंद्र सरकार के नाकामी के चलते पूरे देश में नशा का कारोबार फल-फूल रहा है, छत्तीसगढ़ भी इससे अछूता नहीं है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के 21 महीने के कार्यकाल में प्रदेश में ड्रग्स, अफीम, गांजा, हीरोइन, नकली शराब, अवैध शराब बिना रोक-टोक के गली-गली में बिक रहा है, हर चौक चौराहा में नशीली वस्तु बेचने वालों का गैंग है, जिसके चलते प्रदेश में आपराधिक घटनाएं भी बड़ी है। प्रदेश में नशेड़ियों का जमवाड़ा हो गया है। सूर्यास्त होने के बाद जिस प्रकार से नशाखोरी हो रहा है, हर वर्ग नशा की ओर आकर्षित हो रहा है, इसकी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की है। ये सरकार की असफलता है। यह बेहद चिंता का विषय है सरकार इसे रोकने सख्त कदम उठाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार के राज में छत्तीसगढ़ अपराध और नशाखोरी का गढ़ बन गया है। प्रदेश में रोज- रोज हो रही आपराधिक घटनाएं, हत्या, बलात्कार, चाकूबाजी की घटनाएं बढ़ती, नशे का व्यापार प्रदेश की खास्ताहाल हो चुकी कानून व्यवस्था का उदाहरण है। राज्य की राजधानी में औसतन रोज एक से दो हत्याएं हो रही है। प्रदेश का कोई शहर नहीं बचा है, जहां हत्या, बलात्कार, चाकूबाजी की घटनाएं रोज न हो रही हो।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार दावा करती है कि उसने राज्य में पाकिस्तान से आने वाले ड्रग्स की सप्लाई चैन को तोड़ दिया है। देश में 11 साल से मोदी की सरकार है, राज्य में पौने दो साल से भाजपा की सरकार है। भाजपा बताये कि देश की सीमा से पार होकर भारत के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ में ड्रग्स कैसे पहुंच रहा था? केंद्र सरकार सीमा को सुरक्षित नहीं रख पा रही है, तभी तो स्मग्लर सीमा पार से ड्रग्स छत्तीसगढ़ पहुंचा रहे थे। सरकार बताये सीमा पार से आने वाला ड्रग्स छत्तीसगढ़ की सीमा में कैसे पहुंच रहा था, क्योंकि राज्य सरकार की नाकामी नहीं है?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कानून का राज समाप्त हो गया है। गृह मंत्री केवल बयानबाजी करने के लिए ही उनसे गृह विभाग नहीं संभल रहा है। पुलिस विभाग अवैध वसूली का गिरोह बन चुका है। उसे आम आदमी की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। सरकार पुलिस को उसका मूलकाम करवाना छोड़ विरोधियों के खिलाफ षड़यंत्र में लगा रखी है।
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