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बालसमुंद जलाशय में आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन हेतु जागरूकता कार्यक्रम

आर्द्रभूमियाँ अविश्वसनीय जैव विविधता का घर हैं और पृथ्वी पर सबसे समृद्ध और विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं। ये कई लुप्तप्राय, संकटग्रस्त और स्थानिक प्रजातियों को आश्रय देती हैं जो केवल कुछ निश्चित आर्द्रभूमि आवासों में ही जीवित रह सकती हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर 2 फरवरी को बालसमुंद जलाशय, पलारी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बलौदाबाजार द्वारा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम सह- कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर, बालसमुंद जलाशय क्षेत्र में संपन्न हुआ।


बारनवापारा अभ्यारण्य में 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान
 
         इस विशेष आयोजन का उद्देश्य पृथ्वी के लिए आर्द्रभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, क्योंकि ये पारिस्थितिकी तंत्र जंगलों की तुलना में तीन गुना तेजी से लुप्त हो रहे हैं। इस आयोजन में लगभग 60 प्रतिभागियों, 5 विशेषज्ञों तथा जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से 49 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर समुदाय की सहभागिता को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पक्षी अवलोकन  एवं आर्द्रभूमि अध्ययन की व्यावहारिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं द्वारा जलाशय से जल नमूने एकत्रित किए गए तथा बारनवापारा अभ्यारण्य के फॉरेस्ट गाइड्स के सहयोग से 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई। प्रतिभागियों को तालाब में पाए जाने वाले जलीय जीव-जंतुओं, जल गुणवत्ता तथा आसपास के पारिस्थितिक तंत्र की जानकारी दी गई।

बालसमुंद जलाशय स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

        विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि आर्द्रभूमियाँ न केवल पक्षियों एवं जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि ये भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, स्थानीय जलवायु संतुलन एवं आजीविका समर्थन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बालसमुंद जलाशय जैसे जलस्रोत क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी, श्री धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में जिले की आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर उप-विभागीय अधिकारी (वन) श्री निश्‍चल चंद शुक्ला, वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री प्रखर नायक, एवं कार्यक्रम संयोजक सहायक प्राध्यापक प्रो. अजय मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

         कार्यक्रम में नगर पंचायत पलारी के अध्यक्ष गोपी साहू, उपाध्यक्ष  पिंटू वर्मा, हितेंद्र ठाकुर एवं शोधार्थी  दीपक तिवारी रहे। इसके अतिरिक्त डिप्टी रेंजर सर्वश्री धर्म सिंह बरिहा, बीट प्रभारी  मनबोधन टंडन, आबिद अली खान, रामनारायण यादव सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारीगण और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बैगा बाहुल्य लरबक्की में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का किया लोकार्पण

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्राम लरबक्की में नवनिर्मित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का फीता काटकर लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं, पेंशन वितरण, शासकीय योजनाओं का लाभ जैसे सभी कार्य गांव में ही हो सकेंगे। 

      
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बताया कि अटल डिजिटल सुविधा केन्द्र का उद्देश्य गांव स्तर में ही सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शहरों तक जाने की आवश्यकता न पड़े। पेंशन धारियों के पेंशन आहरण, किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि, महिलाओं को महतारी वंदन की राशि निकासी की सुविधा गांव स्तर पर ही इन केंद्रों से मिलेगी। साथ ही लोक सेवा केंद्रों से संबद्ध होने के कारण ग्रामीणों के आयुष्मान भारत कार्ड और अन्य दस्तावेज़ भी यहां से बन सकेंगे। इस केन्द्र से ग्रामीणों को शहर जाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी, समय, धन और श्रम की बचत होगी। इस अवसर पर इस अवसर पर श्री विदेशीराम धुर्वे, श्री रामकिंकर वर्मा, श्री विजय पाटिल, श्री नंद श्रीवास, श्री नितेश अग्रवाल, श्री बिहारी धुर्वे, श्री रूपसिंह धुर्वे, श्री नरेश चंद्रवंशी, श्री हेमचंद चंद्रवंशी, श्री राजेंद्र कुंजाम सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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पीएम आवास निर्माण में बलौदाबाजार छत्तीसगढ राज्य में अव्वल

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है।इस योजना के तहत कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।


बलौदाबाजार- भाटापारा जिले की उपलब्धियों की फेहरिश्त में एक और कामयाबी शुमार हो गया है। जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बलौदाबाजार -भाटापारा जिला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान पर है। 

     बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में  जिले ने न केवल आवासों की स्वीकृति में तेजी दिखाई है, बल्कि धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने में भी रिकॉर्ड कायम किया है।

      वर्ष 2025-26 में कुल 26843 आवास स्वीकृत किया है जिसमें  24 हजार 313 आवासों को प्रथम किश्त जारी, 20 हजार 480 आवास का निर्माण प्रारम्भ हो गया है और 15 हज़ार 120 आवास प्लिंथ स्तर तक पूर्ण हो गया है।

 सर्वाधिक प्लिंथ निर्माण -
बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में 15 हजार 120 आवासों का प्लिंथ स्तर तक का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो राज्य के किसी भी जिले की तुलना में सर्वाधिक है।26 हजार 439 आवासों का एफटीओ किया जा चुका है जिसमें से 24 हजार 313 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त का सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा चुका है।

        कुल स्वीकृत आवासों में से 20 हजार 480 मकानों पर काम शुरू हो जाना एवं 139 आवास पूर्ण प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के उत्साह को दिखाता है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत भी जिला में प्राथमिकता से कार्य कराके 25 पात्र हितग्राहियों का आवास स्वीकृत कर सभी का शतप्रतिशत आवास पूर्ण करा लिया गया है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण

       जिले को जल संचयन में देश मे द्वितीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ है जिसमें  प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राहियों का विशेष योगदान रहा है। आवास योजनान्तर्गत पूर्ण आवासो में 15 हजार 260 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण कराया गया है।

        इस उपलब्धि से जिले के हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
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प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को मिला डीज़ीपीएस सर्वे एवं वन्यजीव प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण

बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गत दिवस किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस प्रशिक्षण से भावी वन सेवा के अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीक एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित हुए।


     वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अखिल भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आप सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी कौशल को विकसित करें और छत्तीसगढ की वन संपदा की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सतत कार्य करे l उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारी को अपनी शुभकामनाएं दीं l
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्तोविषा समझदार ने डीज़ीपीएस की कार्यप्रणाली, उसकी उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण, सीमांकन एवं प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीज़ीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक डेटा संग्रह संभव होता है जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसी क्रम में उप-निदेशक, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य करता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री एवं प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।

        इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा के अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे।

         अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बारनवापारा अभ्यारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी । इसके साथ ही अधिकारियों को अभ्यारण्य में संचालित वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
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राष्ट्रीय मीडिया की बहसों पर रायपुर साहित्य उत्सव में मंथन

 रायपुर साहित्य उत्सव के दूसरे दिन आज लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘राष्ट्रीय मीडिया में बहस के मुद्दे’ ने मीडिया की मौजूदा दिशा, चुनौतियों और संभावनाओं पर गंभीर विमर्श को मंच दिया। सूत्रधार श्री वरुण सखा के सवालों के जवाबों के रूप में वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका, उसकी प्राथमिकताओं और भविष्य की जरूरतों पर खुलकर बात रखी। यह सत्र छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय श्री रमेश नैयर को समर्पित था।


परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार श्री अनिल पाण्डेय ने कहा कि राजनीति का मीडिया के केंद्र में आना एक सकारात्मक संकेत है। पिछले एक दशक में खबरों के ट्रेंड में बड़ा बदलाव आया है, जहां कभी बॉलीवुड और सिनेमा की खबरें हावी रहती थीं, वहीं अब राजनीति प्रमुख विषय बन रही है। उन्होंने सरकार से प्रेस आयोग या मीडिया आयोग के गठन की मांग करते हुए कहा कि समय के अनुरूप नीतियां और नियमन बनेंगे तो पत्रकारों के हितों की रक्षा संभव होगी। ट्रेड यूनियनों, पत्रकार संगठनों, मीडिया मालिकों और संपादकों के साथ संवाद से मीडिया का माहौल बेहतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज टीवी चैनलों के प्राइम टाइम डिबेट के विषय सोशल मीडिया तय कर रहा है। उन्होंने पत्रकारों के संवेदनशील और अध्ययनशील होने के साथ ही मुद्दों को समझने के लिए उनके समुचित प्रशिक्षण पर भी जोर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार श्री अखिलेश शर्मा ने छत्तीसगढ़ के संदर्भ में राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से जुड़ी घटनाओं को तो राष्ट्रीय मीडिया में प्रमुखता मिलती है, लेकिन नक्सल मोर्चे पर हो रहे सकारात्मक बदलावों और विकास कार्यों को अपेक्षित स्थान नहीं मिल पाता। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में कमियां हो सकती हैं, लेकिन हर पांच साल में सरकार बदलने की प्रक्रिया इसे मजबूत बनाती है। एक पत्रकार के रूप में लोकतंत्र को पंचायत से लेकर संसद तक मजबूत करना मीडिया की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया को केवल टीवी तक सीमित नहीं मानना चाहिए, अखबार और पत्र-पत्रिकाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

वरिष्ठ पत्रकार श्री उमेश चतुर्वेदी ने मीडिया की व्यावहारिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि सूचना का सबसे बड़ा प्रदाता सरकार ही है और लगातार छुट्टियां पड़ने पर अखबार निकालना तक मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों में जमीनी रिपोर्टिंग कम हो रही है, क्योंकि यह खर्चीली है, जबकि प्रायोजित खबरें और डिबेट कम खर्च में आसान विकल्प बन गए हैं। उन्होंने चिंता जताई कि मीडिया संस्थान असल पत्रकारिता, अभिव्यक्ति और भाषा कौशल से भटक रहे हैं, जिससे अनावश्यक शब्दावली और आरोप-प्रत्यारोप बढ़ रहे हैं।
परिचर्चा में यह भी कहा गया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पत्रकारिता की पढ़ाई तो हो रही है, लेकिन व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी है। पत्रकारिता अब खबर और समाज से जुड़ी जिम्मेदारी के बजाय कंटेंट जेनरेशन तक सिमटती जा रही है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।
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रायपुर साहित्य उत्सव में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में हुआ काव्य पाठ

साहित्य महोत्सव 2026 के द्वितीय दिवस की संध्या को विनोद कुमार शुक्ल मंडप में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।


देहरादून के ख्यातिलब्ध गीत कवि श्री बुद्धिनाथ मिश्रा ने अटल जी से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार दिल्ली के कवि सम्मेलन में अटल जी मुझे सुनने के लिए अंतिम समय तक बैठे रहे। मेरी कविता समाप्त होने पर उन्होंने मंच पर आकर मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि तुमने हिंदी की लाज रख ली। श्री मिश्रा ने तुम क्या गए, नखत गीतों के असमय अस्त हुए/ सप्तक ऋषियों में अब तुम भी, अब नए अगस्त हुए और मुक्तकों के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुंबई के श्री अजय साहेब ने अपनी ग़ज़लों से समां बांधा। इंदौर के श्री अमन अक्षर ने उन्हीं आंखों को चश्मे की बहुत ज्यादा जरूरत है/ जिन्हें माँ-बाप का टूटा हुआ चश्मा नहीं दिखता जैसे भावपूर्ण गीत पढ़े। 

रायपुर के श्री त्रिलोक चंद्र महावर ने कैसे संगीन गुनाहों से घिर गया हूं/ कि आज उनकी निगाहों से गिर गया हूं मैं, सूरज बालकनी से लौट जाता है, अंतरिक्ष थे मेरे पिता जैसी कविताएं पढ़ीं। घरघोड़ा के ग़ज़लकार श्री हर्षराज हर्ष ने माँ भी मुझको कान्हा-कान्हा कहती है, भरोसा सबसे उठता जा रहा है/ समय हाथों से निकला जा रहा है/ कमा कर ला रहा, जो रोज घर में/ वो खुद ही खर्च होता जा रहा है जैसे मिसरों और शेरों से माहौल बनाया।

कवयित्री सुश्री श्वाति खुशबू ने सरस्वती वंदना के साथ काव्य पाठ का शुभारंभ किया। उनकी मन अयोध्या सा पावन बना लीजिए, सकारात्मक राजनीति से देश धन्य हो जाता है, या मुझको मधुमास दिला दो/ या दे दो वनवास जैसी कविताओं ने खूब तालियां बटोरीं।

डॉ. अंशु जोगी ने पलकों के झूले में पलती हैं स्त्रियां जैसी स्त्री विमर्श की रचनाएं पढ़ीं। कोलकाता के श्री राहुल अवस्थी ने घोर तमस जब छाएगा/ जब राह नजर न आएगी/ विजयी पुरखों का निर्णय ही/ तब श्रेष्ठ राह बतलाएगा, प्रेम हमारा मूल धर्म है/ दुनियाभर को बांटेंगे जैसी राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविताएं प्रस्तुत कीं।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में हुए शामिल

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के श्रीराम बिजनेस पार्क में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित राडा ऑटो एक्सपो-2026 के शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर क्षेत्र में निरंतर विकास के लिए प्रयासरत है। राज्य में आम नागरिकों की परचेसिंग पावर बढ़ी है, जिसके चलते बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। उन्होंने सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए लोगों से ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम के दौरान यामाहा एक्सएसआर-155, टाटा सिएरा तथा महिंद्रा 7 एक्सओ वाहनों की लॉन्चिंग की। इसके साथ ही उन्होंने “मनी मैटर्स” पुस्तक का भी विमोचन किया।

राडा ऑटो एक्सपो-2026 को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विगत दो वर्षों में राज्य के किसानों को धान का उचित मूल्य प्राप्त हो रहा है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों में किए गए सुधारों से कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न स्थानों पर लोगों से चर्चा के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि जीएसटी दरों में कमी से बाइक की कीमत में लगभग 15 से 25 हजार रुपए तक का लाभ हो रहा है। वहीं, एक व्यक्ति ने बताया कि हार्वेस्टर की कीमत में करीब 2 लाख रुपए तक की कमी आई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य में नई उद्योग नीति लागू की गई है, जिसकी देश-विदेश में सराहना हो रही है। पिछले एक वर्ष में लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई परियोजनाओं पर धरातल पर कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उन्हें ऑटो एक्सपो में आने का अवसर मिला था, उस समय भी सरकार द्वारा रोड टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट दी गई थी, जिसका व्यापक लाभ मिला। उस दौरान 25 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन लगभग 29 हजार वाहनों का विक्रय हुआ। इससे सरकार को करीब 800 करोड़ रुपए का जीएसटी तथा परिवहन विभाग को 129 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। आम नागरिकों को भी ऑटो एक्सपो का प्रत्यक्ष लाभ मिला।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष राडा ऑटो एक्सपो का आयोजन और अधिक वृहद स्तर पर किया गया है। एक्सपो का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है तथा इसमें 300 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। पूरे प्रदेश से उद्यमी और विभिन्न कंपनियां इसमें सहभागिता कर रही हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि पहले ही दिन लगभग 2000 वाहनों का पंजीयन हो चुका है और उन्हें विश्वास है कि इस वर्ष 50 हजार वाहनों की बिक्री का लक्ष्य भी अवश्य पूरा होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑटो एक्सपो का आयोजन प्रतिवर्ष इसी तरह किया जाना चाहिए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अपने संबोधन में कहा कि राडा ऑटो एक्सपो का यह नौवां संस्करण केवल वाहनों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश में रोजगार सृजन और ऑटो सेक्टर की प्रगति का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा रोड टैक्स में दी जा रही 50 प्रतिशत छूट से ग्राहकों के साथ-साथ प्रदेश के छोटे और मध्यम व्यवसायियों को भी लाभ मिल रहा है। राज्य में सड़कों का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे कनेक्टिविटी बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की बिक्री में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ में ऑटो सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है।

उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद द्वारा राजधानी रायपुर में 20 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के पश्चात पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। इस निर्णय का लाभ पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को मिलेगा, इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने ऑटो एक्सपो में सड़क सुरक्षा शपथ पर हस्ताक्षर किए और आमजन से ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने आगामी महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाली नारी मैराथन के पोस्टर का भी विमोचन किया।

इस अवसर पर परिवहन सचिव श्री एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त श्री डी. रविशंकर, कैट के वाइस चेयरमैन श्री अमर परवानी, श्री राजकुमार सिंघानिया, श्री रविन्द्र भसीन, श्री विवेक गर्ग सहित बड़ी संख्या में रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के सदस्यगण उपस्थित थे।
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साहित्य उत्सव से छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई पहचान

 बसंत पंचमी 23 जनवरी से नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन परिसर में तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देश भर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित साहित्यकार शामिल होने जा रहे हैं। इस तीन दिवसीय उत्सव से छत्तीसगढ़ को एक नई पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर पूरा प्रदेश रजत महोत्सव मना रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ को साहित्यिक जगत में एक नई पहचान प्रदान करेगा तथा जनसमुदाय को साहित्य, लेखन और पठन-पाठन की ओर प्रेरित करेगा। साहित्य महोत्सव के दौरान साहित्य विमर्श खुले संवाद, समकालीन विषयों पर विचार-विमर्श होगा। साहित्य महोत्सव को लेकर आम-लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। 


आज जब सोशल मीडिया के कोलाहल मंे ज्ञान की धारा अक्सर सूचनाओं के शोर में दब जाती है। ऐसे समय में साहित्य उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है। जहां विचार-विमर्श के बीच संवाद की संस्कृति जीवित रहती है। सृजन वही जन्म लेता है, जहां मन खुला हो और कथा वही आकार लेती हैं जहां मनुष्य अपने सत्य से संवाद करने का साहस रखता है। साहित्य महोत्सव के लोगो (डिजाइन) में अंकित ‘‘आदि से अनादि’’ तक वाक्य साहित्य के उस अटूट यात्रा को दर्शाता है, जिसमें आदिकालीन रचनाओं से लेकर निरंतर विकसित हो रहे आधुनिक साहित्य तक सभी रूप समाहित हैं। साहित्य कालातीत है, वह समय, समाज भाषा और पीढ़ियों को जोड़कर चलने वाली निरंतर धारा हैै। तीन दिनों तक पुरखौती मुक्तांगन में साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और कला-प्रदर्शनियों का जीवंत केंद्र बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रायपुर साहित्य उत्सव पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सांस्कृतिक गर्व का विषय है क्योंकि इसमें राज्य की हजारों साल पुरानी साहित्यिक जड़े, जनजातीय परंपराएं, सामाजिक समरसता और आधुनिक रचनात्मक दृष्टि सभी का सुंदर सार्थक और कलात्मक संगम दिखाई देगा। छत्तीसगढ़ की साहित्यिक यात्रा आदि से अनादि तक अविचल, जीवंत और समृद्ध रही है, और आगे भी इसी धारा में निरंतर विकास की नई कहानियां लिखती रहेंगी। साहित्य उत्सव में कुल 11 सत्र शामिल होंगे, इनमें 5 समानांतर सत्र, 4 सामूहिक सत्र और 3 संवाद सत्र आयोजित किये जाएंगे जिनमें साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के बीच सीधा संवाद और विचार-विमर्श होगा। रायपुर साहित्य उत्सव साहित्य, विचार और संस्कृति के संगम का उत्सव है, इसमें युवाओं, शिक्षकों, लेखकों और आम पाठकों की सहभागिता रहेगी। नई पीढ़ी को साहित्य विचार और संस्कृति से जोड़ना इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य है।

उत्सव के दौरान पुस्तक मेला का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लगभग 40 स्टॉल लगाएं जाएंगे जिसमें देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकें प्रदर्शित की जाएगी एवं विक्रय के लिए उपलब्ध रहेगी। रायपुर साहित्य उत्सव में विशेष रूप से चाणक्य नाटक का मंचन किया जाएगा जो भारतीय बौद्धिक परंपरा और नाट्य कला का प्रभावशाली उदाहरण होगा। इसके साथ ही लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शको को राज्य की जीवंत लोक संस्कृति से रू-ब-रू कराया जाएगा। विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगी, जहाँ उनकी सशक्त रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक रसास्वादन कराएँगी। साथ ही पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनमें समकालीन सामाजिक-सांस्कृतिक विषयों पर सार्थक चर्चा होगी। 

यह आयोजन छत्तीसगढ़ की साहित्यिक चेतना, विचार परंपरा और सांस्कृतिक आत्मा को राष्ट्रीय संवाद से जोड़ने की एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है। रायपुर साहित्य उत्सव 2026 न केवल लेखकों और पाठकों के बीच सेतु बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और विचार के प्रति संवेदनशील बनाने का भी माध्यम बनेगा। साहित्यिक विमर्श, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध यह तीन दिवसीय उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और यादगार अध्याय सिद्ध होगा। 
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ऑटो एक्सपो–2026: वाहन खरीदी पर आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट

छत्तीसगढ़ में परिवहन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार रायपुर ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन द्वारा 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, एमजीएम हॉस्पिटल के सामने, विधानसभा रोड, सड्डू रायपुर में ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन किया जा रहा है।

उक्त ऑटो एक्सपो में विक्रय होने वाले वाहनों पर परिवहन विभाग द्वारा एकमुश्त 50 प्रतिशत जीवनकाल कर (आरटीओ टैक्स) में छूट प्रदान की जा रही है, जिससे प्रदेश के आम नागरिकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।

ऑटो एक्सपो–2026 का आयोजन 20 जनवरी 2026 से 05 फरवरी 2026 तक श्री राम बिजनेस पार्क, रायपुर में किया जा रहा है। इस अवधि में वाहन क्रय करने वाले ग्राहकों को आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत की छूट का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

यह प्रदेश का पहला ऑटो एक्सपो है, जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ के आम नागरिकों को लाभ मिलेगा। वाहन खरीदने के लिए आमजन को रायपुर आने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वे अपने शहर अथवा गांव के निकटतम प्रतिभागी/पंजीकृत डीलरों के माध्यम से इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

ऑटो एक्सपो–2026 के अंतर्गत सभी नागरिकों को अपने गृह जिले में ही वाहन पंजीयन कराने की सुविधा उपलब्ध होगी। अर्थात, क्रय किए गए वाहन पर अपने गृह जिले के परिवहन कार्यालय का पंजीयन चिन्ह (आरटीओ कोड) प्राप्त किया जा सकेगा।
दूरस्थ क्षेत्रों के डीलर्स भी इस ऑटो एक्सपो में भाग ले रहे हैं, जिससे छोटे व्यावसायिक विक्रेताओं को रोजगार के उपयुक्त अवसर प्राप्त होंगे और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

रायपुर ऑटो एक्सपो में छत्तीसगढ़ की जनता को एक ही स्थान पर सभी प्रकार के वाहन मॉडल एवं नवीनतम तकनीक से युक्त नए मॉडलों को देखने, परखने और चुनने का अवसर मिलेगा। इससे आमजन नवीनतम ऑटोमोबाइल तकनीकों से भी अवगत हो सकेंगे।

रायपुर ऑटो एक्सपो–2026 में देश के विभिन्न फाइनेंसर एवं बैंक न्यूनतम दरों पर वाहन ऋण उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं इंश्योरेंस कंपनियां न्यूनतम दरों पर वाहन बीमा की सुविधा प्रदान कर रही हैं। इससे वाहन क्रय करने वाले नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

ऑटो एक्सपो–2026 में आरटीओ टैक्स में 50 प्रतिशत छूट के साथ-साथ फाइनेंस कंपनियों, बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों एवं विभिन्न डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा के कारण न्यूनतम दरों पर वाहन उपलब्ध होंगे, जिससे आमजन को व्यापक आर्थिक राहत मिलेगी।

रायपुर के इस ऑटो एक्सपो में रायपुर जिले के 95 डीलर्स तथा अन्य जिलों के 171 डीलर्स, कुल 266 डीलर्स भाग ले रहे हैं, जिससे प्रदेशभर के नागरिकों को विविध विकल्प उपलब्ध होंगे।

उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 2025 के ऑटो एक्सपो में कुल 29,348 वाहनों की बिक्री हुई थी, जिसके माध्यम से आम जनता को लगभग 120 करोड़ रुपये की आरटीओ टैक्स में छूट प्रदान की गई थी, जिससे नागरिकों को उल्लेखनीय आर्थिक सहायता प्राप्त हुई थी।

इस प्रकार, ऑटो एक्सपो–2026 प्रदेश के नागरिकों के लिए किफायती दरों पर वाहन क्रय करने, स्थानीय स्तर पर पंजीयन सुविधा प्राप्त करने तथा व्यापक आर्थिक लाभ उठाने का एक महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हो रहा है।
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रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में साहित्य प्रेमियों के लिए निःशुल्क चलेंगी बसें

रायपुर साहित्य उत्सव के दौरान आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों और युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शहर में निःशुल्क बस सेवा संचालित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवहन की असुविधा के कारण कोई भी व्यक्ति इस महत्वपूर्ण साहित्यिक आयोजन में भाग लेने से वंचित न रह जाए। निःशुल्क बस सेवा से शहरवासियों को उत्सव स्थल तक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी।


यह निःशुल्क बस सेवा 23, 24 और 25 जनवरी 2026—तीन दिनों तक लगातार संचालित की जाएगी। इन तीनों दिनों में बसों का संचालन पूरी तरह निःशुल्क रहेगा, जिससे आमजन बिना किसी अतिरिक्त खर्च के रायपुर साहित्य उत्सव में शामिल हो सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 15 बसें इस निःशुल्क सेवा के अंतर्गत चलाई जाएंगी। ये बसें उत्सव स्थल तक आने और लौटने—दोनों दिशाओं में संचालित होंगी, ताकि दर्शकों को कार्यक्रम समाप्ति के बाद भी किसी प्रकार की असुविधा न हो। बसों की संख्या इस प्रकार निर्धारित की गई है कि भीड़ के समय भी सुचारु आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।

शहर के अधिकतम क्षेत्रों को इस सुविधा से जोड़ने के लिए बस संचालन हेतु कुल 6 प्रमुख रूट तय किए गए हैं। इन रूट्स के माध्यम से रायपुर के विभिन्न हिस्सों से लोगों को उत्सव स्थल तक पहुंचने की सुविधा मिलेगी। सभी बसें पुराने रायपुर क्षेत्र से पुरखौती मुक्तांगन नवा रायपुर स्थित रायपुर साहित्य उत्सव स्थल तक संचालित की जाएंगी।निःशुल्क बस सेवा के अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों पर रायपुर साहित्य उत्सव की विशेष ब्रांडिंग की जाएगी। इससे न केवल शहर में साहित्य उत्सव का माहौल बनेगा, बल्कि नागरिकों में आयोजन को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी और पूरे रायपुर में उत्सव की पहचान और प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

बसों की विस्तृत समय-सारणी शीघ्र जारी की जाएगी, ताकि नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार यात्रा की योजना बना सकें। समय-सारणी जारी होते ही इसे विभिन्न माध्यमों से सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें। प्रशासन द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि बस सेवा समयबद्ध, सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संचालित हो।

उल्लेखनीय है कि रायपुर साहित्य उत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। निःशुल्क बस सेवा की यह व्यवस्था अधिकाधिक नागरिकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि परिवहन की किसी भी असुविधा के बिना लोग इस उत्सव का हिस्सा बन सकें। इस पहल के माध्यम से रायपुर साहित्य उत्सव को एक व्यापक जन-सांस्कृतिक आयोजन के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
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23 से 25 जनवरी तक नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में होगा तीन दिवसीय आयोजन

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने तथा देशभर के साहित्यकारों, चिंतकों, कलाकारों और पाठकों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से 23, 24 और 25 जनवरी को ‘रायपुर साहित्य उत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इस त्रि-दिवसीय महोत्सव का केंद्रीय विचार ‘आदि से अनादि तक’ है, जो भारत की साहित्यिक परंपरा की निरंतरता और विकास को रेखांकित करता है। इन तीन दिनों तक नवा रायपुर में साहित्य रंग और कला की त्रिवेणी की अविरल धारा बहती रहेगी। 


नवा रायपुर बनेगा साहित्य का केंद्र

यह प्रतिष्ठित आयोजन अटल नगर नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित किया जाएगा, जहाँ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और समकालीन साहित्यिक अभिव्यक्तियों का सुंदर संगम देखने को मिलेगा। यह उत्सव छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय साहित्यिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भव्य उद्घाटन समारोह से होगी गरिमामय शुरुआत 

रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ 23 जनवरी को भव्य उद्घाटन समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रीगण, प्रतिष्ठित साहित्यकार और सांस्कृतिक क्षेत्र की प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित रहेंगी, जिससे आयोजन को गरिमामय शुरुआत मिलेगी। यह समारोह पूरे आयोजन की दिशा और स्वर निर्धारित करेगा।

देशभर के साहित्यकार और विचारक होंगे शामिल

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रसिद्ध साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। कार्यक्रम के दौरान साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। 

युवाओं में दिख रहा खासा उत्साह

इस साहित्य उत्सव की विशेष बात यह है कि इसमें नई पीढ़ी के लेखकों और कवियों को सशक्त मंच प्रदान किया जा रहा है, जहाँ वे अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कर सकेंगे। युवा पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने के लिए विशेष युवा-केंद्रित सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को सहभागिता के लिए प्रेरित किया जा रहा है और इसका व्यापक असर  दिखाई दे रहा है। अब तक 4,000 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और पंजीकरण की प्रक्रिया लगातार जारी है।

पुस्तक मेले में लेखकों और पाठकों के मध्य सीधा संवाद

साहित्य उत्सव में स्थानीय और राष्ट्रीय प्रकाशकों की पुस्तकों की प्रदर्शनी और बिक्री के लिए एक भव्य पुस्तक मेला लगाया जाएगा, जिसमें देश के ख्यातिप्राप्त प्रकाशन समूह भाग लेंगे। यहाँ पाठक नई और लोकप्रिय पुस्तकों से सीधे जुड़ सकेंगे। उत्सव के दौरान नई पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा। यहां लेखकों तथा पाठकों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा, जिससे साहित्यिक संवाद को नई दिशा मिलेगी।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ करवाएंगी लोक संस्कृति से रूबरू

लोकनृत्य, लोकगीत और छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों को राज्य की जीवंत लोकसंस्कृति से रूबरू कराया जाएगा। इन प्रस्तुतियों में रंग, संगीत और लोक परंपराओं के दर्शन होंगे। 

संवाद सत्रों का होगा आयोजन 

साहित्य उत्सव के दौरान पत्रकारों, विचारकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ खुले संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें समकालीन मुद्दों और साहित्यिक विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

कवि सम्मेलन का ले सकेंगे आनंद

विख्यात कवियों की उपस्थिति में कवि सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें उनकी सशक्त और लोकप्रिय रचनाएँ श्रोताओं को साहित्यिक आनंद से भर देंगी।

पुस्तक मेले में देश के लब्ध प्रतिष्ठ प्रकाशक शामिल होंगे

साहित्य उत्सव में एक पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें देश के प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान उनके द्वारा प्रकाशित विविध आयामों की किताबों से पाठकों के लिए सुरूचिपूर्ण साहित्य उपलब्ध कराएंगे।
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रायपुर साहित्य उत्सव 2026 की तैयारियों को अंतिम रूप देने की कवायद, व्यवस्थाओं को लेकर हुई समीक्षा बैठक

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के रूप में छत्तीसगढ़ की राजधानी में शब्दों और विचारों का एक भव्य उत्सव आकार ले रहा है। इस प्रतिष्ठित आयोजन की तैयारियों को लेकर नवा रायपुर स्थित संवाद भवन में आयोजन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 


तय हुई आयोजन की रूपरेखा

इस अवसर पर आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की सहभागिता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, साहित्यिक सत्रों तथा प्रचार-प्रसार की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा ने बैठक में कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की बौद्धिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का अवसर है। उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर अटल नगर के पुरखौती मुक्तांगन में 23 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। 

देशभर के साहित्यकार और विचारक होंगे शामिल

रायपुर साहित्य उत्सव 2026 में देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, लेखक, पत्रकार, विचारक और युवा रचनाकार एक साथ मंच साझा करेंगे। इस दौरान साहित्यिक संवाद, पुस्तक विमोचन, विचार-मंथन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर पुस्तक मेले का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के ख्यातिनाम प्रकाशण समुह शामिल होंगे।

पुरखौती मुक्तांगन बनेगा साहित्य और संस्कृति का केंद्र

यह उत्सव पुरखौती मुक्तांगन, अटल नगर, नवा रायपुर में आयोजित किया जाएगा, जहाँ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और समकालीन साहित्यिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम देखने को मिलेगा।

राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ता रायपुर साहित्य उत्सव

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 को देश के प्रमुख साहित्यिक आयोजनों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। यह उत्सव न केवल लेखकों और पाठकों को जोड़ेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक छवि को भी राष्ट्रीय स्तर पर और सुदृढ़ करेगा। आयोजन से जुड़ी विस्तृत कार्यक्रम-सारणी और अतिथियों की सूची शीघ्र ही सार्वजनिक की जाएगी। बैठक में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शंशाक शर्मा, जिला पंचायत रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विश्वरंजन, अपर संचालक जनसंपर्क श्री उमेश मिश्रा एवं श्री आलोक देव ने भी रायपुर साहित्य उत्सव के सफल आयोजन को लेकर मार्गदर्शन दिया।
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स्वदेशी संकल्प दौड़ में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए

भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा केंद्रीय नेतृत्व के आह्वान पर स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर स्वदेशी संकल्प दौड़ आयोजित की गई। स्वदेशी संकल्प दौड़ सुभाष स्टेडियम से प्रारंभ हुई जिसका समापन बूढ़ातालाब स्थित स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। स्वदेशी संकल्प दौड़ प्रदेश के पांचों संभागों में आहूत की गई। जिसमें प्रदेश भर से युवा हजारों की संख्या में शामिल हुए।


स्वामी विवेकानंद जी के विचार, दर्शन और जीवन आदर्श युवाओं को प्रेरित करते हैं - टंकराम वर्मा 

इस दौरान प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती हर वर्ष 12 जनवरी को मनाई जाती है और इसी दिन पूरे भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) भी मनाया जाता है। इस वर्ष हम उनकी 164वीं जयंती मना रहे हैं। भारत सरकार ने वर्ष 1984 में स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित किया था। स्वामी विवेकानंद जी के विचार, दर्शन और जीवन आदर्श देश के युवाओं को प्रेरित करते हैं। उन्होंने युवा शक्ति को राष्ट्र-निर्माण का सबसे बड़ा स्तंभ माना था और कहा था - “युवा वह शक्ति है जो असंभव को संभव में बदल सकती है।” उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी युवाओं के प्रेरणा स्रोत है आज युवा स्वामी विवेकानंद जी के विचारों को आत्मसात कर रहे हैं।

स्वामी विवेकानंद जी के विचार हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है - राहुल योगराज टिकरिहा

भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल योगराज टिकरिहा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी हम सब के प्रेरणा पुरुष है। उनके जीवन दर्शन एवं विचार युवाओं को हमेशा जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते है। स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये। उन्होंने कहा कि रन फॉर स्वदेशी (स्वदेशी संकल्प दौड़) युवाओं को ध्यान में रखकर एक प्रेरक कार्यक्रम की श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी मूल्यों, राष्ट्रीय गौरव और स्वामी विवेकानंद की शाश्वत शिक्षाओं का प्रसार करना है। यह आयोजन छात्रों, युवा समूहों और समुदाय को फिटनेस, जागरूकता तथा आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ स्वामी विवेकानंद जयंती मनाने हेतु जोड़ता है। इसका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को भारतीय उत्पाद अपनाने, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन देने और आत्मनिर्भर भारत की भावना को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करना है|

इस दौरान धरसीवां विधायक अनुज शर्मा, युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष रायपुर शहर रमेश सिंह ठाकुर, अंजय शुक्ल, भाजपा रायपुर महामंत्री अमित मैशेरी, भाजपा रायपुर जिला मंत्री तुषार चोपड़ा, अमन प्रताप सिंह, शुभम जायसवाल,  विशाल पाण्डेय, वासु शर्मा,अंकित द्विवेदी, सचिन सिंघल, मनीष विष्कर्मा, अमन यादव जी, अर्पित सूर्यवंशी, प्रणय साहू, अनमोल तिवारी मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया ‘ADHYAY – The Women Who Lead’ का विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की महिला उद्यमिता, नेतृत्व और नवाचार की प्रेरक यात्राओं को समर्पित कॉफी टेबल बुक ‘ADHYAY – The Women Who Lead’ का रायपुर स्थित श्रीराम बिज़नेस पार्क में आयोजित कॉस्मो एक्सपो के दौरान विमोचन किया।  कार्यक्रम में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी श्री राकेश चतुर्वेदी, कॉस्मो एवं रोटरी के पदाधिकारी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। 


यह विशेष प्रकाशन छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की प्रगति, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव में योगदान देने वाली 25 महिला उद्यमियों की जीवन यात्राओं को संजोया गया है। संपादक उचित शर्मा और उनकी टीम ने इसका संपादन किया है ।

 कार्यक्रम के दौरान पुस्तक में सम्मिलित सभी महिला उद्यमियों को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। यह सम्मान उनके साहस, नेतृत्व, नवाचार और उद्यमशील योगदान के लिए प्रदान किया गया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर ADHYAY कॉफी टेबल बुक की सराहना करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ की महिला शक्ति, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की जीवंत गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का दस्तावेज़ बनेगी। उन्होंने इस तरह के दस्तावेज़ीकरण को महिला उद्यमिता के लिए प्रेरणादायी और मार्गदर्शक बताया। इस पुस्तक का उद्देश्य उन महिलाओं को मंच देना है जिन्होंने व्यवसाय, उद्योग, सेवा, नवाचार और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ की महिलाएँ आज केवल उद्यम नहीं चला रहीं, बल्कि समाज और सोच को नई दिशा दे रही हैं।
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प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह

धुन के पक्के लोग अपने संकल्प और परिश्रम से न केवल स्वयं का जीवन संवारते हैं, बल्कि समाज के लिए भी प्रेरणा बनते हैं। वैशाली नगर, राजनांदगांव निवासी श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपने दृढ़ इरादों से यह सिद्ध कर दिखाया है कि सही योजना और मेहनत के सहारे आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी जा सकती है।


योजना के तहत 10 लाख रूपए तक सब्सिडी

        प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) भारत सरकार की एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जो खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के छोटे उद्यमियों (सूक्ष्म उद्यमों) को सशक्त बनाने, उन्हें औपचारिक बनाने और बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है, जिसके तहत नए और मौजूदा उद्यमों को ऋण-आधारित सब्सिडी (35 प्रतिशत तक, अधिकतम 10 लाख रुपये), ब्रांडिंग और मार्केटिंग सहायता, सामान्य बुनियादी ढांचा और प्रशिक्षण जैसी मदद मिलती है, जिससे वे आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल के तहत प्रतिस्पर्धा कर सकें और आय बढ़ा सकें। 

 प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह 

            प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के अंतर्गत श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने अपना उद्योग प्रारंभ कर स्वरोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। इस योजना ने उन्हें न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के लिए आवश्यक मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया।

 लघुवनोपज आधारित उद्योग से मिली आर्थिक मजबूती 

         प्रदेश में उपलब्ध लघुवनोपज की व्यापक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा पर आधारित प्रोसेसिंग उद्योग की स्थापना की। इस उद्योग के लिए मशीन एवं शेड निर्माण हेतु कुल 5 लाख 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ, जिसमें से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत 2 लाख 13 हजार 500 रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ।

 महिला स्वसहायता समूह को मिला स्थायी रोजगार 

        उद्योग की स्थापना के साथ ही श्री देशपांडे ने कौरिनभाठा स्थित संस्कारधानी महिला कृषक अभिरुचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। इससे महिलाओं को नियमित आय का साधन मिला और वे आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हुईं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक परिवर्तन आया।

 आधुनिक मशीनों से बढ़ी उत्पादन और मूल्य संवर्धन क्षमता 

        योजना से प्राप्त राशि का उपयोग कर उन्होंने आईटीआई मुंबई से चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर मशीन क्रय की। इस मशीन के माध्यम से चिरौंजी का छिलका अलग कर गिरी निकाली जाती है, वहीं छिलकों से चारकोल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही चिरौंजी, हर्रा एवं बहेरा की गिरी से तेल निष्कर्षण तथा हर्रा-बहेरा डिकॉल्डीकेटर मशीन द्वारा छाल पृथक्करण का कार्य भी किया जा रहा है।

 सोलर ऊर्जा से संचालित प्रोसेसिंग यूनिट 

           ग्रामीण एवं वनीय क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति की असुविधा को ध्यान में रखते हुए श्री देशपांडे ने अपने प्रोसेसिंग यूनिट को सोलर प्लांट से संचालित किया है। सोलर ऊर्जा के उपयोग से बिजली बिल शून्य हो गया है और उत्पादन कार्य में निरंतरता बनी हुई है, जिससे लागत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

 चार राज्यों तक विस्तारित कारोबार, सालाना 4 लाख की आय 

            चिरौंजी, हर्रा और बहेरा उत्पादों की बाजार में निरंतर मांग के चलते उनका व्यवसाय अब छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा तक विस्तारित हो चुका है। इस व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 4 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनका जीवनस्तर बेहतर हुआ है।

वन संरक्षण, आजीविका और जागरूकता का समन्वय

            इस पहल से वनीय क्षेत्रों में लघुवनोपज के संग्रहण, पौध संरक्षण एवं सतत आजीविका के प्रति जागरूकता बढ़ी है। स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार मिलने से वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

 प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति व्यक्त किया आभार 

           श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे ने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। उन्होंने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
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सशक्त मानसिकता से आत्मनिर्भरता की ओर- पोषण निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं सूरजपुर की महिलाएं

आर्थिक रूप से सशक्तिकरण की नींव सशक्त मानसिकता पर आधारित होती है। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास व्यक्ति को सफलता की दिशा में आगे बढ़ाते हैं। सूरजपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने इस सोच को व्यवहार में उतारते हुए आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल प्रस्तुत की है। ये महिलाएं न केवल स्वयं सशक्त बन रही हैं, बल्कि जिले की महिलाओं एवं बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के अभियान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।


पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है

पोषण आहार (रेडी-टू-ईट या RTE) निर्माण संयंत्र सरकार द्वारा संचालित ऐसी इकाइयाँ हैं, जो आंगनवाड़ियों और अन्य योजनाओं के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के लिए पौष्टिक, पहले से तैयार भोजन बनाती हैं, जिसे महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा चलाया जाता है, जिससे पोषण और महिलाओं का सशक्तिकरण दोनों होता है, जिसमें गेहूं, दालें, और दूध जैसे घटक शामिल होते हैं, जो प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। 

स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण 

           जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तत्काल उपभोग हेतु तैयार पोषण आहार (रेडी टू ईट) निर्माण संयंत्र का शुभारंभ किया गया है। इन संयंत्रों में स्वादिष्ट एवं पौष्टिक नमकीन दलिया तथा मीठा शक्ति आहार का निर्माण किया जा रहा है, जो विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, थायमिन, राइबोफ्लेविन, नियासिन, पाइरीडॉक्सिन, फोलिक अम्ल, कोबालामिन, लोह तत्व (आयरन), कैल्शियम एवं जिंक जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर है।

तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न

          जिले प्रशासन द्वारा जिले में कुल 07 पोषण आहार निर्माण संयंत्र स्थापित किए गए है। यहां वर्तमान में भैयाथान, प्रतापपुर एवं सूरजपुर विकासखंड में तीन संयंत्रों का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इन तीनों संयंत्रों में 32 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से पोषण आहार निर्माण कार्य में संलग्न हैं। निर्मित पोषण आहार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। इस प्रकार स्व-सहायता समूहों की महिलाएं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण में अप्रत्यक्ष किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण बात है कि पोषण आहार के निर्माण के साथ-साथ उसके वितरण की भी जिम्मेदारी भी महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपी गई है।

भैयाथान विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह

            सूरजपुर विकासखंड में 15 स्व-सहायता समूह तथा प्रतापपुर विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूह सक्रिय रूप से वितरण कार्य में अपनी भूमिका निभा रही है। इन समूहों के माध्यम से कुल 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार वितरण कार्य में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इस योजना से महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। मानसिक रूप से सशक्त ये महिलाएं अब घरेलू कार्यों के साथ-साथ आजीविका से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल न केवल निश्चित रूप से जिले में पोषण स्तर सुधारने में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।
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महिलाओं ने मखाना खेती में देखी आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह

 कृषि विविधीकरण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में धमतरी जिले ने एक और ठोस कदम बढ़ाया है। विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का एक दल रायपुर जिले के विकासखंड आरंग अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुंचा, जहाँ उन्होंने मखाना प्रोसेसिंग एवं आधुनिक खेती तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अध्ययन भ्रमण एवं प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई। 

ख़ास कर कलेक्टर धमतरी ने मखाना खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी को लेकर रुचि ले रहे हैं । 

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी

       अब जल्द ही धान से आगे सोच से मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी ।  छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।

मखाना का उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से दी जानकारी

     कलेक्टर के सतत प्रयासों से धमतरी जिले के ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह एवं सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने  स्थानीय ओजस फार्म का भ्रमण करते हुए मखाना की खेती, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी संपूर्ण श्रृंखला को नजदीक से समझा। फार्म प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने किसानों को बताया कि मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने तकनीकी पहलुओं, बीज चयन, उत्पादन लागत और बाजार संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी तथा यह भी बताया कि उचित प्रशिक्षण एवं सरकारी सहयोग से यह फसल किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित

      इस अवसर पर श्री शिव साहू ने मखाना खेती के व्यावसायिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह फसल कम जोखिम वाली है और इससे स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मखाना खेती से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का नया अवसर दिखाई दे रहा है।
 
एक किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार

       बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने प्रसंस्करण की बारीकियां समझाते हुए बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत 700 रुपये से 1000 रुपए प्रति किलो तक होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसान स्वयं उत्पादन के साथ प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग करें, तो प्रति एकड़ लाभ में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त

         इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि छह माह की अवधि वाली इस फसल में कीट-व्याधि का प्रकोप नगण्य होता है तथा चोरी जैसी समस्याएं भी नहीं होतीं, जिससे यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बनती है।

किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की दी गई जानकारी

           उप संचालक उद्यानिकी, धमतरी  डॉ.पूजा कश्यप साहू के मार्गदर्शन में ग्रामीण उद्यानिकी अधिकारी श्री चंद्रप्रकाश साहू एवं बीटीएम श्री पीताम्बर भुआर्य के साथ आए किसानों ने मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। डॉ.पूजा ने बताया कि मखाना की खेती को प्रोत्साहन देने हेतु प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता एवं सब्सिडी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
   
 राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित

      उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था, जहाँ राज्य का पहला मखाना प्रसंस्करण केंद्र भी स्थापित हुआ।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
        आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बन रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन,प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
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कामधेनु विश्वविद्यालय में पूर्व छात्र-छात्राओं का मिलन समारोह संपन्न

 दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, दुर्ग में कुलपति डॉ.आर.आर.बी. सिंह के मार्गदर्शन में  विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं का मिलन समारोह एलुमनाई मीट-2025 संपन्न हुआ। इस मौके पर  'स्ट्रेदनिंग द प्रोफेसनल्स अलाईन्स अमंग एलुमनाई विषय पर राष्ट्रीय सेमीनार आयोजित किया गया।

  कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों जैसे जम्मूकश्मीर पंजाब, उत्तराखण्ड, बिहार, झारखंण्ड, गुजरात, महाराष्ट्र मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल तथा छत्तीसगढ़ से कुल 400 पूर्व छात्रों ने भाग लिया। इसके साथ ही कतर, कनाड़ा व अमेरिका से 05 छात्र उपस्थित रहे । पूर्व छात्र छात्राओं से इस दौरान अपने अपने अनुभवों को साझा किया।

विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अतिथिगणों  में  अहिरवारा विधायक श्री डोमनलाल कोर्सवाडा , श्री ललित चंद्राकर जी विधायक दुर्ग ग्रामीण श्री रिकेश सेन जी विधायक वैशालीनगर भिलाई के साथ-साथ अधिष्ठाता डॉ. संजय शाक्य डॉ मनोज गेंदले, डॉ. सुधीर उपरीत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बीपी राठिया उपस्थित थे। वहीं विशेष अतिथिगणों में मीनल सिंह, श्रीमती पायल अहवाल ही कंके, चूय व ब्रिगेडियर डॉ अमित रस्तोगी उपस्थित थे।

विधायक श्री कोर्सेवाडा ने कहा कि गर्व की बात है कि इस संस्था में उत्तीर्ण छात्र शासन में पशु चिकित्सक के रूप में, सेना में, बैंकिन में, कार्पोस्ट के क्षेत्र में , पुलिस सेवा,  प्रशासनिक अधिकारी सहित  अन्य पदों पर अपनी सेवायें दे रहे है और विश्वविद्यालय प्रदेश एवं देश का नाम रोशन कर रहे है।

सभी पूर्व छात्र अपने पुराने साथियों, अध्यापकों से मिलकर बहुत आनंदित हुये तथा अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने अपनें स्वागत भाषण में बताया कि हमारा 40 साल पुराना रिश्ता है जो आज एक बार फिर जीवंत हो उठा है और यह एक स्वाभाविक पल है कि हम सब यहाँ साथ है तथा एक दूसरे को सहयोग करने के लिये प्रतिबद्ध है।

विधायक श्री कार्सवाडा जी ने कहा कि आज का दिन समी का याद करने का दिन है । श्री ललित धन्दकार जी ने कहा कि वर्तमान सरकार राज्य के विकास में आप सभी को हर तरह से सहायोग करेगी। श्री रिकेश सेन जी ने कहा कि यह कार्यक्रम एक उत्सव है। यह  पल हमेशा यादगार रहेगा। 

कार्यक्रम में श्री विजय अग्रवाल सीनियर पुलिस अधिक्षक दुर्ग उपस्थित हुये अतिथिगणों ने एलमनाई मीट के आयोजन की महत्ता बताई।
श्री अग्रवाल ने बताया कि यहाँ उपस्थित सभी पशु चिकित्सका अपना काम की खुबी से कर रहे है ।

 
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