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सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान

 महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर  विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।


           विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

         महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।

            तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।

           महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।
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महतारी वंदन योजना से सशक्त हुई महिलाएं, श्रीमती सरस्वती केंवट ने बढ़ाया अपना होटल व्यवसाय

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की महिलाओं को बड़ी सौगात देते हुए महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त का अंतरण किया। राज्य स्तरीय वृहद महतारी वंदन सम्मेलन के माध्यम से प्रदेशभर की महिला हितग्राहियों के खातों में योजना की राशि अंतरित की गई। राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित कर रही है।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम तेंदुभाठा की हितग्राही श्रीमती सरस्वती केंवट से संवाद कर योजना से मिले लाभ और उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलाव की जानकारी ली।

श्रीमती सरस्वती केंवट इस योजना की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग अपने छोटे होटल व्यवसाय को आगे बढ़ाने में किया। आज उनके इस प्रयास से होटल व्यवसाय अच्छी तरह संचालित हो रहा है और उन्हें हर महीने लगभग 10 से 15 हजार रुपये तक की आय होने लगी है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।

संवाद के दौरान श्रीमती सरस्वती केंवट ने मुख्यमंत्री को अपने होटल आने का स्नेहपूर्ण निमंत्रण देते हुए कहा कि वे उनके होटल में आकर चाय और नाश्ता जरूर करें। इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उनका निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा, “हम आपके होटल जरूर आएंगे… हमें चाय पिलाइएगा और भजिया-पकोड़ा भी खिलाइएगा।”

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा में और अधिक सशक्त बनाना है।

मुख्यमंत्री के साथ हुए इस संवाद से श्रीमती सरस्वती केंवट और उनके परिवार में खुशी का माहौल है। उनका यह प्रयास क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बस्तर में होगा ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026:मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जारी करेंगे महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर बस्तर जिले में ‘वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे और सम्मेलन के दौरान प्रदेश की महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी करेंगे। 


कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे।इस गरिमामय आयोजन में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा एवं श्री अरुण साव, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सांसद, विधायक तथा विभिन्न आयोगों और मंडलों के पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आयोजित यह सम्मेलन मातृशक्ति के सम्मान, महिला सशक्तिकरण तथा महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभागीय स्टॉलों के माध्यम से महिलाओं को शासन की विभिन्न योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों तथा पोषण संबंधी कार्यक्रमों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रदेश की 69 लाख से अधिक महिलाओं को लाभान्वित किया जा रहा है। योजना के तहत 25वीं किस्त जारी होने के बाद अब तक कुल 16 हजार 237 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित हो जाएगी। 

इस योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहयोग प्राप्त हो रहा है, जिससे वे अपने परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर भी विशेष ध्यान दे पा रही हैं। यह योजना महिलाओं के आत्मसम्मान और आर्थिक स्वावलंबन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल 
साबित हो रही है।

कार्यक्रम के दौरान बस्तर संभाग में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटी नक्सली महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विशेष पहल की जाएगी। इन महिलाओं को लखपति दीदी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से ब्याजमुक्त एक-एक लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा इन महिलाओं को ‘लक्ष्मी-सखी मिलेट किट’ भी प्रदान की जाएगी। इन महिलाओं को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से मिलेट (मोटे अनाज) आधारित खाद्य उत्पादों के निर्माण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे इन उत्पादों के निर्माण और बिक्री के माध्यम से स्वरोजगार प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला यह वृहद सम्मेलन महिलाओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगा। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं, स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं तथा विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राही शामिल होंगी। यह आयोजन प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगा।
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लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री श्री साय

 छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। 

कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी श्रीमती राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है।

बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं।

जशपुर जिले की लखपति दीदी श्रीमती अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक श्री सुनील सोनी, सचिव श्री भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त श्री महादेव कावड़े, कलेक्टर श्री गौरव सिंह, मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।
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होली पर किसानों के खातों में राशि अंतरण से दोगुनी हुई तिहार की खुशी : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम नगर निगम बिरगांव में आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के नागरिकों को रंगों के इस पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष होली का उत्साह प्रदेश में और भी अधिक है, क्योंकि राज्य सरकार द्वारा अन्नदाता किसानों के खातों में धान उपार्जन के अंतर की राशि अंतरित की गई है। इससे किसानों के परिवारों में खुशी का माहौल है और त्यौहार की रौनक दोगुनी हो गई है। उन्होंने कहा कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी समृद्धि ही राज्य की समृद्धि का आधार है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का पर्व आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। यह त्योहार समाज में एकता, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है तथा लोगों को एक-दूसरे के और करीब लाने का अवसर प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की मंशानुरूप प्रदेश में नक्सलवाद अब समाप्ति की ओर है और बस्तर अंचल में शांति और विकास का नया अध्याय शुरू हो रहा है। राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, विकास और खुशहाली के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक मंडली द्वारा प्रस्तुत मनमोहक फाग गीत का आनंद लिया। साथ ही विधायक श्री अनुज शर्मा की प्रस्तुति पर उपस्थित लोगों ने भी खूब उत्साह दिखाया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने पिचकारी चलाकर रंगों की बौछार की और लोगों के साथ होली की खुशियां साझा कीं।

इस अवसर पर रायपुर ग्रामीण विधायक श्री मोतीलाल साहू, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री योगेश साहू, निशक्तजन आयोग के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया, सीआईडीसी अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शंशाक शर्मा, पूर्व विधायक एवं आरडीए अध्यक्ष श्री नंदे साहू, छत्तीसगढ़ राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष श्री मिर्जा एजाज बेग, श्री रमेश ठाकुर, श्री भागीरथी यादव, श्री मनोज जोशी सहित बिरगांव नगर निगम के पार्षदगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।
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प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर तैयार कर रही हैं हर्बल गुलाल बिहान दीदियां

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हर्बल गुलाल बनाने के लिए सब्जियों के प्राकृतिक रंगों से रंगकर और उसमें गुलाब गेंदा, पलाश के फूलों की पंखुड़ियों, गुलाब जल, इत्र आदि मिलाकर हर्बल गुलाल बनाया जा रहा है। पलाश के फूलों से केसरिया गुलाल, पालक भाजी से हरे रंग का गुलाल तथा लाल भाजी से लाल रंग का गुलाल तैयार किया जा रहा है। इस गुलाल में रासायनिक पदार्थों का उपयोग नहीं होने से यह गुलाल त्वचा, आंख, बाल आदि के लिये हानिकारक नहीं है। मानव अनुकूल होने से इस हर्बल गुलाल को बिना किसी चिंता के होली के त्योहार में उपयोग किया जा सकता है।


             बस्तर जिले में इस बार होली का त्यौहार न केवल रंगों भरा होगा, बल्कि सेहत और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई है। इसके अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों के 9 स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को हर्बल गुलाल बनाने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। क्रांतिकारी डेबरीधूर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर में आयोजित इस दो दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में महिलाएं आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर गुलाल तैयार करना सीख रही हैं।

              इस अनूठी पहल की सबसे खास बात यह है कि महिलाएं अपनी रसोई और बाड़ी में मिलने वाली प्राकृतिक वस्तुओं जैसे पालक, लाल भाजी, चुकंदर और फूलों का उपयोग कर सतरंगी गुलाल तैयार करेंगी। बाजार में मिलने वाले सिंथेटिक रंगों और गुलाल में अक्सर हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जो त्वचा में जलन, एलर्जी और आंखों को नुकसान पहुँचाते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए बिहान की दीदियां कॉर्न फ्लावर के आधार (बेस) में चुकंदर और भाजी के अर्क को मिलाकर पूरी तरह चर्म-रोग मुक्त और इको-फ्रेंडली गुलाल का उत्पादन करेंगी।

             प्रशिक्षण के उपरांत महिलाओं ने इस वर्ष 500 किलो से लेकर एक हजार किलो तक हर्बल गुलाल तैयार करने का लक्ष्य रखा है। उत्पादित गुलाल की पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसके तहत जगदलपुर शहर के प्रमुख स्थानों और विभिन्न शासकीय कार्यालयों में विशेष स्टॉल लगाए जाएंगे। साथ ही जनपद स्तर के स्थानीय बाजारों में भी इस शुद्ध देशी गुलाल का विक्रय किया जाएगा। बिहान से जुड़ी इन महिलाओं के लिए यह केवल रंग बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उन्हें स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। इस प्रयास से न केवल बस्तर की महिलाओं की आय में वृद्धि होगी, बल्कि आम नागरिकों को भी रसायनों के खतरे से दूर एक सुरक्षित और खुशहाल होली मनाने का विकल्प मिलेगा।
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मुख्यमंत्री ने झुमका जलाशय में बोटिंग और वाटर स्पोर्ट सुविधाओं का किया अवलोकन, ओपन थिएटर का किया लोकार्पण

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कोरिया प्रवास के दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बैकुंठपुर स्थित प्रसिद्ध झुमका पर्यटन स्थल में निर्मित ओपन थिएटर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने झुमका जलाशय में बोटिंग करते हुए क्षेत्र के मनोहारी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया तथा यहां विकसित की गई पर्यटन सुविधाओं का अवलोकन किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने झुमका जलाशय में शिकारा पर सवार होकर नौका विहार किया। चारों ओर हरियाली, शांत जलराशि और कमल के फूलों से सजा यह रमणीय स्थल अब एक आकर्षक पिकनिक स्पॉट के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने यहां बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स सहित विकसित पर्यटन गतिविधियों की जानकारी ली और व्यवस्थाओं की सराहना की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने लगभग 27 लाख रुपए की लागत से निर्मित ओपन थिएटर का लोकार्पण किया।500 दर्शकों की बैठक क्षमता वाला यह ओपन थिएटर सांस्कृतिक आयोजनों के लिए नया केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि झुमका जलाशय केवल कोरिया जिले की पहचान ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन स्थलों के विकास, सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में स्थापित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पर्यटकों की सुरक्षा, स्वच्छता और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए तथा स्थानीय युवाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।

इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक श्री भैयालाल राजवाड़े, संभागायुक्त श्री नरेंद्र दुग्गा, आईजी श्री दीपक झा, कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक श्री रवि कुमार कुर्रे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति के लिए 6 जिले के 42 स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निर्माण एवं वितरण का कार्य

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कुपोषण दूर करने और महिला सशक्तिकरण के लिए रेडी-टू-ईट फूड निर्माण का काम महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपते हुए 6 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत रायगढ़, बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, और सूरजपुर जिलों में आंगनबाड़ियों के लिए पौष्टिक आहार निर्माण का कार्य महिला समूहों को मिला है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) के निर्माण और वितरण का कार्य महिला स्वसहायता समूहों को सौंपने का फैसला किया। राज्य के 6 जिले के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी टू ईट के निर्माण और वितरण का कार्य सौंपा गया है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति के इस मिशन को प्रथम चरण में प्रदेश के 6 जिलों - बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ एवं सूरजपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। वहीं रायगढ़ प्रदेश का पहला जिला बन गया है, जहां महिला समूहों ने ‘रेडी-टू-ईट’ उत्पादन प्रारंभ किया है। यह पहल महिलाओं की आर्थिक समृद्धि और बच्चों के स्वास्थ्यकृदोनों को नई दिशा प्रदान करेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोरबा-10 स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निमाण का कार्य सौंपा जा चुका है। इसी प्रकार  रायगढ़-10 स्व-सहायता समूह, सूरजपुर और बलौदाबाजार-भाठापारा जिला में 7-7 स्व- सहायता समूह को, बस्तर जिले में 6 स्व-सहायता समूह और दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह को रेडी-टू-ईट निमाण का कार्य सौंपा जा चुका है। इन स्व-सहायता समूहों के द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी टू ईट) का निर्माण और वितरण का कार्य किया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि इन समूहों की बहनें अब आंगनबाड़ी के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ-साथ इस कार्य से अपनी आमदनी भी बढ़ाएंगी, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनेंगी। यह योजना महिलाओं को स्व-रोजगार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण और परिणामोन्मुखी पहल है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से बच्चों को पोषण युक्त आहार प्रदान कर राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी।
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किसान मेला का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना– उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड के सुदूर वनांचल एवं बैगा बाहुल्य क्षेत्र तरेंगांव जंगल में आयोजित जिला स्तरीय किसान मेला में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में किसान मेला लगाने का मुख्य उद्देश्य शासन की योजनाओं और उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि यहां के किसान भी आधुनिक खेती से जुड़कर अधिक लाभ कमा सकें। 

     उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार जिन किसानों ने धान बेचा है, उन्हें 3100 रुपये प्रति क्विंटल के मान से शेष अंतर की राशि का भुगतान होली पर्व से पूर्व एकमुश्त कर दिया जाएगा, जिससे किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी। पीएम श्री एकलव्य आवासीय विद्यालय के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और किसानों को शासन की योजनाओं का लाभ लेने तथा आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
      इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, सभापति श्री रामकुमार भट्ट, डॉ. बीरेन्द्र साहू, श्री नीतेश अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेश राम धुर्वे, श्री संतोष पटेल, श्री मोहन,  बोडला नगर पंचायत अध्यक्ष श्री विजय पाटिल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती बालका रामकिंकर वर्मा, उपाध्यक्ष श्री नंद श्रीवास, श्री मनीराम साहू, श्री नरेन्द्र मानिकपुरी, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री सुरेश दुबे, श्री अमित वर्मा, सहित जनप्रतिनिधि क्षेत्र के नागरिक उपस्थित थे।

उन्नत कृषि से बढ़ेगा उत्पादन और आमदनी

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने उन्नत कृषि के उदाहरण देते हुए टमाटर और बैंगन की मिश्रित ग्राफ्टिंग से तैयार पौधों के उत्पादन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान केवल एक ही फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि बहुफसली खेती अपनाकर आय के नए स्रोत विकसित करें। उन्होंने कहा कि किसान वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कर खेत में जैविक खाद तैयार कर सकते हैं, जिससे लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि खेती किसानों का जीवन और परिश्रम है, इसलिए इसे आधुनिक, लाभकारी और वैज्ञानिक तरीके से करना आवश्यक है।

आजीविका डबरी से मिलेगा दोहरा लाभ

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि आजीविका डबरी योजना के अंतर्गत खेतों में तालाब का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए जिला पंचायत और जनपद पंचायत में आवेदन किया जा सकता है। इससे एक ओर खेत में जल संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर सब्जी उत्पादन, मछली पालन और बकरी पालन जैसे कार्यों से अतिरिक्त आय के साधन विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं के माध्यम से बकरी पालन, मछली पालन सहित अन्य गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है तथा उन्नत किस्म के बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए।

आधुनिक तकनीक के साथ खेती की ओर आगे बढ़े

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में अब युवा वर्ग आधुनिक तकनीक के साथ खेती की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई पीढ़ी खेती को रोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम मानकर इसमें नवाचार और आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर रही है, जिससे उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ आय के नए अवसर भी बन रहे हैं। उन्होंने किसानों से कहा कि समय के साथ खेती की पद्धति में बदलाव लाना जरूरी है। आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, जैविक खाद और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। 

उप मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टॉलों का किया निरीक्षण

कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने किसान मेला में लगे कृषि, उद्यानिकी, मछली पालन सहित विभिन्न विभागों के स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं की सही जानकारी देकर अधिक से अधिक लाभान्वित किया जाए।

उत्कृष्ट कृषकों का सम्मान, योजनाओं के तहत सामग्री और सहायता राशि वितरित

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को जैविक कीटनाशक तैयार करने के लिए 100 लीटर क्षमता के प्लास्टिक ड्रम वितरित किए गए। इसके साथ ही गन्ना विकास योजना अंतर्गत चयनित किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर बैटरी स्प्रेयर प्रदान किए गए। कार्यक्रम में किसानों को समूह चेक का वितरण भी किया गया, जिससे उन्हें खेती और आजीविका से जुड़े कार्यों में आर्थिक सहयोग मिल सके।
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मुड़िया जनजाति पर आधारित नाट्य का मंचन, गृहमंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने किया सम्मानित

बस्तर संभाग की गौरवशाली संस्कृति, कला और परंपराओं के संरक्षण हेतु आयोजित 'बस्तर पंडुम 2026' में सुकमा जिले ने सफलता का परचम लहराया है। जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित इस भव्य संभाग स्तरीय प्रतियोगिता में सुकमा के जनजातीय नाट्य दल विधा को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुकमा के कलाकारों को स्मृति चिन्ह और 50 हजार रुपये का चेक प्रदान कर सम्मानित किया।

संस्कृति के संरक्षण की अनूठी पहल

        मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बस्तर के पारंपरिक नृत्य, गीत, खानपान, शिल्प और आंचलिक साहित्य के मूल स्वरूप को सहेजना और स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। प्रशासन की इस पहल से न केवल विलुप्त हो रही विधाओं को संजीवनी मिल रही है, बल्कि जनजातीय समूहों के सतत विकास का मार्ग भी प्रशस्त हो रहा है।

सुकमा के कलाकारों ने जीती प्रतियोगिता

      कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन और जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर के कुशल प्रबंधन में सुकमा जिले से 12 विधाओं के कुल 69 कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।

 प्रथम स्थान कोंटा विकासखंड के सुदूर ग्राम पंचायत कोंडासांवली के आश्रित गांव पारला गट्टा की टीम ने नाट्य विधा में बाजी मारी।

 कला का जीवंत चित्रण

         मुड़िया जनजाति के 13 सदस्यीय दल (9 पुरुष, 4 महिला) ने दैनिक उपयोग की वस्तुओं जैसे ताड़ का पत्ता, मयूर पंख, तीर-धनुष और मछली पकड़ने के जाल का कलात्मक प्रयोग कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इन कलाकारों ने बढ़ाया जिले का गौरव

       कोंटा विकासखंड में स्थित पारला गट्टा निवासी कलाकार लेकम लक्का, प्रकाश सोड़ी, विनोद सोड़ी, जोगा सुदाम और उनकी टीम ने अपनी प्रतिभा से सुकमा जिले को गौरवान्वित किया है। कलाकारों की इस सफलता में नोडल अधिकारी श्री मनीराम मरकाम और श्री पी श्रीनिवास राव का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने कलाकारों को संभाग स्तर तक पहुंचाने और प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभाई।
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बस्तर पंडुम में दिखी आदिवासी जीवन की झलक, प्रदर्शनी देखकर मंत्रमुग्ध हुए केंद्रीय गृहमंत्री

 संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम 2026 के समापन अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने लालबाग मैदान में आयोजित जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर जनजातीय समाज के जीवन में उपयोग होने वाले उत्पादों, हस्तशिल्प और कलाओं की जानकारी ली।


केंद्रीय गृह मंत्री ने ढोकरा शिल्प, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस व लौह शिल्प, जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, जनजातीय चित्रकला, वन औषधि, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की आत्मा का जीवंत स्वरूप है।

प्रदर्शनी में दंडामी माड़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा जनजातियों की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों का प्रदर्शन किया गया। जनजातीय चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। वहीं, वैद्यराज द्वारा वन औषधियों का जीवंत प्रदर्शन भी किया गया।

स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जोंधरी लाई के लड्डू, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजन तथा लांदा और सल्फी पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि “बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार जनजातीय कला, शिल्प और परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।”
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री ने बस्तर पंडुम की बारह विधाओं की प्रतियोगिता में विजेता दलों से भेंट कर उन्हें बधाई दी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

“बस्तर पंडुम 2026” संभाग स्तरीय प्रतियोगिता के विजेता

1. जनजातीय नृत्य – गौर माड़िया नृत्य (बुधराम सोढ़ी, दंतेवाड़ा)
2. जनजातीय गीत – पालनार दल (मंगली एवं साथी, दंतेवाड़ा)
3. जनजातीय नाट्य – लेखम लखा (सुकमा)
4. जनजातीय वाद्ययंत्र – रजऊ मंडदी एवं साथी (कोण्डागांव)
5. जनजातीय वेशभूषा – गुंजन नाग (सुकमा)
6. जनजातीय आभूषण – सुदनी दुग्गा (नारायणपुर)
7. जनजातीय शिल्प – ओमप्रकाश गावड़े (कोया आर्ट्स, कांकेर)
8. जनजातीय चित्रकला – दीपक जुर्री (कांकेर)
9. जनजातीय पेय पदार्थ – भैरम बाबा समूह (उर्मीला प्रधान, बीजापुर)
10. जनजातीय व्यंजन – श्रीमती ताराबती (दंतेवाड़ा)
11. आंचलिक साहित्य – उत्तम नाईक (कोण्डागांव)
12. बस्तर वन औषधि – राजदेव बघेल (बस्तर)
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राष्ट्रपति के समक्ष बास्तानार के युवाओं ने ‘गौर नृत्य’ से बिखेरे अद्भुत लोक-रंग

शनिवार का दिन बस्तर के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब संभाग स्तरीय ‘बस्तर पण्डुम’ के शुभारंभ अवसर पर देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर की आदिम संस्कृति का सजीव और जीवंत स्वरूप प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस गरिमामयी अवसर पर बास्तानार क्षेत्र के आदिवासी युवाओं द्वारा प्रस्तुत विश्व-प्रसिद्ध ‘गौर नृत्य’ ने पूरे परिसर को ढोल की थाप और घुंघरुओं की झनकार से गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने इस मनोहारी प्रस्तुति का तन्मयता से अवलोकन करते हुए बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से महसूस किया।


बास्तानार के युवाओं द्वारा प्रस्तुत यह नृत्य केवल एक सांस्कृतिक प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि ‘दंडामी माड़िया’ (बाइसन हॉर्न माड़िया) जनजाति की परंपराओं, जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक चेतना का एक जीवंत दस्तावेज था। जैसे ही नर्तक दल मंच पर उतरा, उनकी विशिष्ट वेशभूषा ने उपस्थित जनसमूह का ध्यान सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर लिया। पुरुष नर्तकों के सिर पर सजे गौर के सींगों वाले मुकुट, जिन्हें कौड़ियों और मोरपंखों से अलंकृत किया गया था, बस्तर की वन्य संस्कृति तथा गौर पशु के प्रति आदिवासी समाज के गहरे सम्मान और श्रद्धा को प्रतीकात्मक रूप से अभिव्यक्त कर रहे थे। वहीं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों से सुसज्जित महिला नर्तकियों ने जब अपने हाथों में थमी ‘तिरूडुडी’ (लोहे की छड़ी) को भूमि पर पटकते हुए ताल दी, तो एक अद्भुत, गूंजती और लयबद्ध ध्वनि ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नृत्य के दौरान पुरुष नर्तकों ने गले में टंगे भारी ‘मांदरी’ (ढोल) को बजाते हुए जंगली भैंसे की आक्रामक, चंचल और ऊर्जावान मुद्राओं की प्रभावशाली नकल प्रस्तुत की। यह दृश्य दर्शकों को ऐसा अनुभव करा रहा था, मानो वे जंगल के सजीव और प्राकृतिक परिवेश के प्रत्यक्ष साक्षी बन गए हों। उल्लास और आनंद से परिपूर्ण इस नृत्य में माड़िया जनजाति की शिकार-परंपरा, साहस और अदम्य ऊर्जा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती रही। गोलाकार घेरे में थिरकते युवक और उनके कदम से कदम मिलाती युवतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता के इस दौर में भी बस्तर ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ संजोकर रखा है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की गरिमामयी उपस्थिति में बास्तानार के कलाकारों द्वारा दी गई यह सशक्त और भावपूर्ण प्रस्तुति न केवल बस्तर पण्डुम की भव्य सफलता का प्रतीक बनी, बल्कि इसने बस्तर की लोक-कला, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव को राष्ट्रीय पटल पर पुनः प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया।
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जनजातीय परंपराओं और संस्कृति पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने किया अवलोकन

बस्तर पंडुम के शुभारंभ समारोह में शामिल होने पहुंचीं राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज बस्तर की माटी की सुगंध और आदिम जनजातीय परंपराओं पर आधारित भव्य प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर वहां मौजूद स्थानीय निवासियों और कारीगरों से प्रदर्शित कलाओं एवं उत्पादों की विस्तृत जानकारी ली।


राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने बस्तर पंडुम को आदिवासी विरासत को संजोने और उसे पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने एक-एक कर ढोकरा हस्तशिल्प कला, टेराकोटा, वुड कार्विंग, सीसल कला, बांस कला, लौह शिल्प, जनजातीय वेश-भूषा एवं आभूषण, तुम्बा कला, बस्तर की जनजातीय चित्रकला, स्थानीय व्यंजन तथा लोक चित्रों पर आधारित आकर्षक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसकी सराहना की।

बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर जनजातीय हस्तशिल्प आधारित प्रदर्शनी में ढोकरा कला से निर्मित सामग्रियों का विशेष प्रदर्शन किया गया। इस हस्तशिल्प में लॉस्ट वैक्स कास्टिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह भारत की प्राचीन जनजातीय धातु कला है, जिसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और ग्रामीण जीवन की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। ढोकरा की प्रत्येक कृति पूर्णतः हस्तनिर्मित होती है। इसके निर्माण में समाड़ी मिट्टी, मोम वैक्स, तार, पीतल, गरम भट्टी एवं सफाई मशीन का उपयोग किया जाता है। स्थानीय टेराकोटा कला को दर्शाती मिट्टी से बनी आकृतियों का भी प्रदर्शन किया गया, जो लोक आस्था, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक विश्वासों को सजीव रूप में प्रस्तुत करती हैं।

प्रदर्शनी में लकड़ी की नक्काशी (Wood Carving) कला के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति देखने को मिली। लकड़ी की मूर्तियां बनाने के लिए सागौन, बीजा, सिवनर एवं साल लकड़ी का उपयोग किया जाता है, जिसमें कारीगर पारंपरिक औजारों से बारीक आकृतियां उकेरते हैं। इसी तरह सीसल कला से बने जूट के कपड़े एवं अन्य हस्तशिल्पों का भी राष्ट्रपति ने अवलोकन किया।

एक अन्य स्टॉल में बांस से बनी पारंपरिक उपयोगी एवं सजावटी वस्तुओं का प्रदर्शन किया गया। वहीं गढ़ा हुआ लोहे की कला (Wrought Iron Art) से निर्मित कलाकृतियों ने भी राष्ट्रपति को विशेष रूप से आकर्षित किया।

जनजातीय आभूषणों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल ने राष्ट्रपति का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल में चांदी, मोती, शंख एवं विभिन्न धातुओं से हाथ से बनाए गए जनजातीय आभूषण (Tribal Jewellery) प्रदर्शित किए गए। ये आभूषण आदिवासी समुदायों की पहचान, सामाजिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं।
तुम्बा कला (Tumba Art) के अंतर्गत सूखी लौकी जैसी फली से बनाए गए पारंपरिक वाद्य यंत्र एवं सजावटी वस्तुएं भी प्रदर्शनी में रखी गई थीं। जनजातीय वेशभूषा एवं आभूषण स्टॉल में बस्तर क्षेत्र की प्रमुख जनजातियां — दंडामी माढ़िया, अबूझमाड़िया, मुरिया, भतरा एवं हल्बा — की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण संबंधित जनजातियों के युवक-युवतियों 
द्वारा प्रदर्शित किए गए।

बस्तर पंडुम स्थल पर जनजातीय चित्रकला से जुड़ी जीवंत प्रदर्शनी का भी राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में बस्तर की चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और परंपराओं की सजीव झलक प्रस्तुत की गई। बस्तर की कला में जंगल, लोक देवता, पर्व-त्योहार और दैनिक जीवन को सहज रंगों और प्रतीकों के माध्यम से उकेरा जाता है। यह चित्रकला पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

स्थानीय व्यंजन स्टॉल में जनजातीय दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली खाद्य सामग्री एवं पेय पदार्थों का प्रदर्शन किया गया। इसमें जोंधरी लाई के लड्डू, जोंधरा, मंडिया पेज, आमट, चापड़ा चटनी, भेंडा चटनी, कुलथी दाल, पान बोबो, तीखुर जैसे पारंपरिक व्यंजनों के साथ पेय पदार्थ लांदा और सल्फी को प्रदर्शित किया गया।
लोक जीवन से संबंधित लोकचित्रों की प्रदर्शनी में बस्तर की संस्कृति और इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य, लोकजीवन एवं लोक परंपराओं से जुड़ी तस्वीरों के साथ-साथ बस्तर के जनजातीय समाज और लोक संस्कृति से संबंधित साहित्य भी प्रदर्शित किया गया।
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मुख्यमंत्री ने किया ‘वूमेन फॉर वेटलैण्ड्स’ अभियान के पोस्टर का विमोचन

 विश्व आर्द्रभूमि दिवस  के अवसर पर बीते दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में ‘वुमेन फॉर वेटलैण्ड्स ’ अभियान के पोस्टर का अनावरण किया,इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आर्द्रभूमि एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण हेतु चलाए जा रहे इस अभियान की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जल ही जीवन है और आर्द्रभूमियां मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मातृशक्ति को इस पवित्र अभियान से जोड़ना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायी कदम है।


            मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि “नदियां, तालाब, कुएं, पोखर और आर्द्रभूमियां केवल जल-स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी प्रकृति की पहचान हैं। इन्हें बचाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।”

प्रज्ञा निर्वाणी चला रहीं व्यापक जन-जागरण अभियान

           ‘वूमेन फॉर वैटलैंड्स ’ अभियान की संस्थापक एवं  महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष प्रज्ञा निर्वाणी द्वारा प्रदेशभर में आर्द्रभूमि संरक्षण हेतु निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, इस अभियान के अंतर्गत तालाब, नहर, कुएं, नदियों एवं प्राकृतिक जल-स्रोतों के संरक्षण के लिए महिलाओं को संगठित किया जा रहा है। प्रज्ञा निर्वाणी ने मुख्यमंत्री को नवागढ़ स्थित गिधवा-परसदा-नगधा पक्षी विहार क्षेत्र को रामसर साइट घोषित करने हेतु ज्ञापन भी सौंपा, 

           मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि “महिलाएं प्रकृति की प्रथम संरक्षक हैं,यदि मातृशक्ति आगे आएगी तो जल-स्रोतों का संरक्षण जन-आंदोलन बन जाएगा।” पोस्टर अनावरण कार्यक्रम के दौरान प्रसन्ना अवस्थी, प्राची शर्मा, प्रणीता शर्मा, आरविका अवस्थी सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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बालसमुंद जलाशय में आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन हेतु जागरूकता कार्यक्रम

आर्द्रभूमियाँ अविश्वसनीय जैव विविधता का घर हैं और पृथ्वी पर सबसे समृद्ध और विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से हैं। ये कई लुप्तप्राय, संकटग्रस्त और स्थानिक प्रजातियों को आश्रय देती हैं जो केवल कुछ निश्चित आर्द्रभूमि आवासों में ही जीवित रह सकती हैं। विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 के अवसर पर 2 फरवरी को बालसमुंद जलाशय, पलारी में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बलौदाबाजार द्वारा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं जैव विविधता संवर्धन के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम सह- कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम सिद्धेश्वर महादेव मंदिर परिसर, बालसमुंद जलाशय क्षेत्र में संपन्न हुआ।


बारनवापारा अभ्यारण्य में 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान
 
         इस विशेष आयोजन का उद्देश्य पृथ्वी के लिए आर्द्रभूमि की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, क्योंकि ये पारिस्थितिकी तंत्र जंगलों की तुलना में तीन गुना तेजी से लुप्त हो रहे हैं। इस आयोजन में लगभग 60 प्रतिभागियों, 5 विशेषज्ञों तथा जिले के विभिन्न महाविद्यालयों से 49 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व, जैव विविधता संरक्षण तथा स्थानीय स्तर पर समुदाय की सहभागिता को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पक्षी अवलोकन  एवं आर्द्रभूमि अध्ययन की व्यावहारिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। छात्र-छात्राओं द्वारा जलाशय से जल नमूने एकत्रित किए गए तथा बारनवापारा अभ्यारण्य के फॉरेस्ट गाइड्स के सहयोग से 46 पक्षी प्रजातियों की पहचान की गई। प्रतिभागियों को तालाब में पाए जाने वाले जलीय जीव-जंतुओं, जल गुणवत्ता तथा आसपास के पारिस्थितिक तंत्र की जानकारी दी गई।

बालसमुंद जलाशय स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण

        विशेषज्ञों ने अपने संबोधन में बताया कि आर्द्रभूमियाँ न केवल पक्षियों एवं जलीय जीवों का प्राकृतिक आवास हैं, बल्कि ये भूजल पुनर्भरण, बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धिकरण, स्थानीय जलवायु संतुलन एवं आजीविका समर्थन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बालसमुंद जलाशय जैसे जलस्रोत क्षेत्रीय स्तर पर स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में वनमंडलाधिकारी, श्री धम्मशील गणवीर के मार्गदर्शन में जिले की आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। इस अवसर पर उप-विभागीय अधिकारी (वन) श्री निश्‍चल चंद शुक्ला, वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री प्रखर नायक, एवं कार्यक्रम संयोजक सहायक प्राध्यापक प्रो. अजय मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही।

         कार्यक्रम में नगर पंचायत पलारी के अध्यक्ष गोपी साहू, उपाध्यक्ष  पिंटू वर्मा, हितेंद्र ठाकुर एवं शोधार्थी  दीपक तिवारी रहे। इसके अतिरिक्त डिप्टी रेंजर सर्वश्री धर्म सिंह बरिहा, बीट प्रभारी  मनबोधन टंडन, आबिद अली खान, रामनारायण यादव सहित वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारीगण और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बैगा बाहुल्य लरबक्की में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का किया लोकार्पण

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्राम लरबक्की में नवनिर्मित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र का फीता काटकर लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं, पेंशन वितरण, शासकीय योजनाओं का लाभ जैसे सभी कार्य गांव में ही हो सकेंगे। 

      
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए बताया कि अटल डिजिटल सुविधा केन्द्र का उद्देश्य गांव स्तर में ही सभी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें शहरों तक जाने की आवश्यकता न पड़े। पेंशन धारियों के पेंशन आहरण, किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि, महिलाओं को महतारी वंदन की राशि निकासी की सुविधा गांव स्तर पर ही इन केंद्रों से मिलेगी। साथ ही लोक सेवा केंद्रों से संबद्ध होने के कारण ग्रामीणों के आयुष्मान भारत कार्ड और अन्य दस्तावेज़ भी यहां से बन सकेंगे। इस केन्द्र से ग्रामीणों को शहर जाने की परेशानी से मुक्ति मिलेगी, समय, धन और श्रम की बचत होगी। इस अवसर पर इस अवसर पर श्री विदेशीराम धुर्वे, श्री रामकिंकर वर्मा, श्री विजय पाटिल, श्री नंद श्रीवास, श्री नितेश अग्रवाल, श्री बिहारी धुर्वे, श्री रूपसिंह धुर्वे, श्री नरेश चंद्रवंशी, श्री हेमचंद चंद्रवंशी, श्री राजेंद्र कुंजाम सहित अन्य जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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पीएम आवास निर्माण में बलौदाबाजार छत्तीसगढ राज्य में अव्वल

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण बेघर नागरिकों को पक्का मकान प्रदान करना है।इस योजना के तहत कच्चे मकानों में रहने वाले या बिना छत वाले परिवारों को पक्के मकान बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जिसमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।


बलौदाबाजार- भाटापारा जिले की उपलब्धियों की फेहरिश्त में एक और कामयाबी शुमार हो गया है। जिले ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में बलौदाबाजार -भाटापारा जिला पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में प्रथम स्थान पर है। 

     बलौदाबाजार- भाटापारा जिला के कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं सीईओ जिला पंचायत के नेतृत्व में  जिले ने न केवल आवासों की स्वीकृति में तेजी दिखाई है, बल्कि धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने में भी रिकॉर्ड कायम किया है।

      वर्ष 2025-26 में कुल 26843 आवास स्वीकृत किया है जिसमें  24 हजार 313 आवासों को प्रथम किश्त जारी, 20 हजार 480 आवास का निर्माण प्रारम्भ हो गया है और 15 हज़ार 120 आवास प्लिंथ स्तर तक पूर्ण हो गया है।

 सर्वाधिक प्लिंथ निर्माण -
बलौदाबाजार- भाटापारा जिले में 15 हजार 120 आवासों का प्लिंथ स्तर तक का कार्य पूर्ण हो चुका है, जो राज्य के किसी भी जिले की तुलना में सर्वाधिक है।26 हजार 439 आवासों का एफटीओ किया जा चुका है जिसमें से 24 हजार 313 हितग्राहियों के खातों में पहली किश्त का सफलतापूर्वक हस्तांतरण किया जा चुका है।

        कुल स्वीकृत आवासों में से 20 हजार 480 मकानों पर काम शुरू हो जाना एवं 139 आवास पूर्ण प्रशासन की मुस्तैदी और ग्रामीणों के उत्साह को दिखाता है। पीएम जनमन योजना अंतर्गत भी जिला में प्राथमिकता से कार्य कराके 25 पात्र हितग्राहियों का आवास स्वीकृत कर सभी का शतप्रतिशत आवास पूर्ण करा लिया गया है।

रेनवाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण

       जिले को जल संचयन में देश मे द्वितीय पुरुस्कार प्राप्त हुआ है जिसमें  प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के हितग्राहियों का विशेष योगदान रहा है। आवास योजनान्तर्गत पूर्ण आवासो में 15 हजार 260 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण कराया गया है।

        इस उपलब्धि से जिले के हजारों परिवारों का अपने पक्के घर का सपना अब हकीकत में बदल रहा है। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति दे रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है।
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प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारियों को मिला डीज़ीपीएस सर्वे एवं वन्यजीव प्रबंधन का व्यवहारिक प्रशिक्षण

बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन गत दिवस किया गया। प्रशिक्षु अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, आईटी आधारित वन प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। इस प्रशिक्षण से भावी वन सेवा के अधिकारियों ने क्षेत्रीय स्तर पर उपयोग में आने वाली तकनीक एवं प्रबंधन प्रक्रियाओं से व्यावहारिक रूप से परिचित हुए।


     वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने अखिल भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आप सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर अपनी कौशल को विकसित करें और छत्तीसगढ की वन संपदा की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सतत कार्य करे l उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारी को अपनी शुभकामनाएं दीं l
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्रीय निदेशक सुश्री स्तोविषा समझदार ने डीज़ीपीएस की कार्यप्रणाली, उसकी उपयोगिता तथा वन सर्वेक्षण, सीमांकन एवं प्रबंधन में इसके महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीज़ीपीएस आधारित सर्वेक्षण से वन क्षेत्रों में सटीक डेटा संग्रह संभव होता है जो दीर्घकालिक संरक्षण योजनाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसी क्रम में उप-निदेशक, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व वरुण जैन ने “गज संकेत” मोबाइल एप्लिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह एप हाथी मॉनिटरिंग, मूवमेंट ट्रैकिंग, मानव–हाथी संघर्ष प्रबंधन तथा त्वरित सूचना साझा करने में एक प्रभावी डिजिटल टूल के रूप में कार्य करता है। प्रशिक्षु अधिकारियों को एप के फील्ड उपयोग, डेटा एंट्री एवं प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक पहलुओं से भी अवगत कराया गया।

        इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार धम्मशील गणवीर ने कहा कि इस प्रकार के तकनीकी एवं फील्ड आधारित प्रशिक्षण भावी वन सेवा के अधिकारियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल टूल्स एवं वैज्ञानिक प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से वन एवं वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को जमीनी स्तर पर बेहतर निर्णय लेने में सहायक सिद्ध होंगे।

         अधीक्षक बारनवापारा अभ्यारण्य कृषानू चन्द्राकार ने प्रशिक्षु अधिकारियों को बारनवापारा अभ्यारण्य की भौगोलिक, पारिस्थितिक एवं संरक्षण संबंधी विशेषताओं की जानकारी दी । इसके साथ ही अधिकारियों को अभ्यारण्य में संचालित वनभैंसा संरक्षण केंद्र, ब्लैकबक रिलोकेशन एवं संरक्षण केंद्र, ग्रासलैंड विकास क्षेत्रों सहित अन्य महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण कराया जिससे उन्हें संरक्षण कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
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