Love You ! जिंदगी - Newsportal | Chhattisgarh Darpan Media Group

Love You ! जिंदगी

‘राम-नामी’ फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने जताया हर्ष, निर्देशक श्री भारतबाला गणपति सहित पूरी टीम को दी शुभकामनाएं

 रामनामी समुदाय की अनूठी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री’ का प्रतिष्ठित सम्मान मिलने पर संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक श्री भरतबाला गणपति सहित निर्माता एवं पूरी फिल्म टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।


संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और हर्ष का विषय है। यह सम्मान केवल एक उत्कृष्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को मिला पुरस्कार नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों, आध्यात्मिक चेतना और पीढ़ियों से चली आ रही विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान भी है।

उन्होंने कहा कि रामनामी समुदाय की परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता का विशिष्ट उदाहरण है। अपनी अनूठी आस्था, परंपराओं और जीवन मूल्यों के माध्यम से रामनामी समाज ने प्रदेश की लोक संस्कृति को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री ने इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा को प्रभावी ढंग से देश के व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने का कार्य किया है।

श्री अग्रवाल ने फिल्म के निर्देशक श्री भारतबाला गणपति और पूरी टीम के रचनात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि किसी लोक परंपरा को संवेदनशीलता और प्रभावशाली सिनेमाई प्रस्तुति के माध्यम से राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फिल्म से जुड़े प्रत्येक कलाकार, तकनीकी विशेषज्ञ, निर्माता और सहयोगी इस सम्मान के सहभागी हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत व्यापक और विविधतापूर्ण है। यहां की लोककलाएं, लोकगीत, लोकनृत्य, जनजातीय परंपराएं, धार्मिक आस्थाएं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। ‘राम-नामी’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान इन समृद्ध परंपराओं को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

संस्कृति मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की लोक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘राम-नामी’ को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों, रचनाकारों, फिल्मकारों और सांस्कृतिक कर्मियों को भी अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक विरासत को रचनात्मक माध्यमों से सामने लाने के लिए प्रेरित करेगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 की फिल्मों के लिए घोषित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को हिंदी भाषा की सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री के रूप में चुना गया है। फिल्म के निर्माता बीबीपी स्टूडियो वर्चुअल भारत प्राइवेट लिमिटेड और निर्देशक श्री भरतबाला गणपति हैं।

संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्री भारतबाला गणपति एवं ‘राम-नामी’ फिल्म की पूरी टीम को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को देश के राष्ट्रीय पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर है।
और भी

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना ही इस सेवा का उद्देश्य है– उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

जिस हाथ ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहा था। जिस पैर ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहा था। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है।


उपकरण नहीं, आत्मनिर्भर जीवन की शुरुआत
     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखाई, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।

     उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कवर्धा में रहते हुए समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है।

     उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।

बस्तर में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों तक भी पहुंचेगी सेवा
       उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

       दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है। 

      इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव श्री पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए श्री विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव श्री अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

23 से 26 सितंबर तक चलेगा शिविर
      शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 सितंबर तक दिव्यांगजनों को आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान किए जाएंगे।
और भी

चक्रधर समारोह में सजेगी सुर, ताल और संस्कृति की दस दिवसीय महफिल

 महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 में इस बार कला और संस्कृति के विविध रंग एक साथ देखने को मिलेंगे। रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस दस दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में स्थानीय प्रतिभाओं से लेकर देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे से शुरू होने वाली     सांस्कृतिक संध्याओं में शास्त्रीय नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोककला, पंडवानी, लोकसंगीत, कबीर भजन, गजल और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा जीवंत होगी।

और भी

देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और विश्वास का प्रतीक- पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम

 छत्तीसगढ़ के पशुधन विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम दुर्ग जिले के उरला (कुम्हारी) स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित (देवभोग) द्वारा आयोजित दुग्ध किसान सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवभोग ब्रांड गुणवत्ता और अटूट विश्वास का प्रतीक बन चुका है, जिसने अपनी शुद्धता के बल पर देश में एक विशिष्ट पहचान कायम की है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री नेताम ने उरला दुग्ध संयंत्र में नवीन कैंटीन का उद्घाटन किया तथा दुग्ध संयंत्र की विभिन्न प्रणालियों का निरीक्षण कर कार्यप्रणाली का जायजा लिया।


पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका का विमोचन

        पशुधन विकास मंत्री श्री नेताम ने पशुपालकों के लिए तैयार विशेष मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं, देवभोग के रेडियो जिंगल, रिंगटोन एवं प्रेरक गीत का औपचारिक विमोचन किया। डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।

दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता 

      पशुधन विकास मंत्री श्री नेताम ने कहा कि पशुपालन को आजीविका का मजबूत साधन बनाने के लिए दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन नेटवर्क और तकनीकी सेवाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए डेयरी विकास की कार्ययोजनाओं को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप ’’देवभोग’’ को पूरे देश में गुणवत्ता और विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन व्यवस्था, विपणन नेटवर्क और किसानों की भागीदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादक किसानों की आय, आत्मनिर्भरता और समृद्धि में निरंतर वृद्धि होगी।

     सम्मेलन में पशु चिकित्सा सेवाएं के संचालक श्री चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान एवं महिला पशुपालक उपस्थित थे।
और भी

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार दूसरे वर्ष प्रदान करेगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’

 छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने, पर्यटन से जुड़े उद्यमियों, संस्थाओं एवं व्यक्तियों के उत्कृष्ट कार्यों को प्रोत्साहित करने तथा राज्य के पर्यटन स्थलों के विकास, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान किए जाएंगे। इस पुरस्कार योजना के तहत पर्यटन क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले होटल, पंजीकृत टूर ऑपरेटर, जिले, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, पर्यटक सूचना केंद्र, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म साइट और एडवेंचर टूरिज्म संचालकों को सम्मानित किया जाएगा।


योजना के अंतर्गत कुल 10 श्रेणियों में एक-एक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक विजेता को ₹11 हजार की पुरस्कार राशि एवं मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

पर्यटन की पूरी श्रृंखला को प्रोत्साहित करने पर जोर

‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ की खासियत यह है कि इसमें पर्यटन को केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित न रखते हुए उससे जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को भी सम्मान के दायरे में शामिल किया गया है। आतिथ्य, पर्यटन संचालन, जिला पर्यटन प्रबंधन, उद्यमिता, रिसॉर्ट सेवाएं, पर्यटक सहायता, होमस्टे, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और साहसिक पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा।

पुरस्कार की 10 श्रेणियां हैं—
1. सर्वश्रेष्ठ होटल
2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर
3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड
4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार
5. CTB Star Performer – सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट
6. CTB Star Performer – पर्यटक सूचना केंद्र
7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे
8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
9. सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड
10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड

बेहतर सेवाओं और नवाचार को मिलेगा सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होटल श्रेणी में राज्य के आतिथ्य क्षेत्र में प्रभावशाली सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले पर्यटन उद्यम को सम्मानित किया जाएगा। इसमें MICE सुविधाओं, पिछले वित्तीय वर्ष के वित्तीय प्रदर्शन, वार्षिक कारोबार और आयोजित कार्यक्रमों की संख्या जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। पर्यटन प्रचार, सतत पर्यटन, CSR गतिविधियों और रोजगार सृजन में योगदान को भी मूल्यांकन में महत्व दिया जाएगा।

इसी तरह सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर का चयन आवास, परिवहन, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, मनोरंजन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के प्रभावी संचालन तथा छत्तीसगढ़ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों के आधार पर किया जाएगा। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी, इटिनरेरी एवं प्रचार सामग्री के माध्यम से पर्यटन का प्रचार तथा वेबसाइट और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।

पर्यटन विकास में उत्कृष्ट जिले को भी मिलेगा सम्मान

‘सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड’ के तहत उस जिले का चयन किया जाएगा, जिसने पर्यटन के व्यापक विकास, संवर्धन, गंतव्य प्रबंधन तथा घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की दिशा में बेहतर कार्य किया हो।

पर्यटन स्थलों की स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, डस्टबिन की उपलब्धता, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, हरित उपाय, प्रकृति आधारित गतिविधियां, कृषि एवं ग्रामीण जीवनशैली, संस्कृति, मत्स्य पालन, पर्यटकों के लिए विशिष्ट अनुभव और पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन जैसे पहलुओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया गया है।

युवा उद्यमियों और पर्यटन स्टार्टअप को मिलेगा मंच

पर्यटन क्षेत्र में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार रखा गया है। इसके माध्यम से ऐसे स्टार्टअप और व्यक्तिगत उद्यमियों को पहचान एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिन्होंने नवाचार एवं अनुकरणीय गतिविधियों के जरिए छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने का कार्य किया है।

यह पुरस्कार पर्यटन क्षेत्र में नए विचारों, तकनीक, सेवाओं एवं व्यावसायिक मॉडलों के माध्यम से पर्यटन को अधिक आकर्षक, सुविधाजनक एवं प्रतिस्पर्धी बनाने वाले उद्यमियों के प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा।

रिसॉर्ट और पर्यटक सूचना केंद्रों की सेवाओं को भी पहचान

CTB Star Performer की दो श्रेणियों में पर्यटन बोर्ड की प्रीमियम एवं बजट श्रेणी की इकाइयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले रिसॉर्ट तथा उल्लेखनीय बुकिंग उपलब्ध कराने वाले पर्यटक सूचना केंद्रों को सम्मानित किया जाएगा।

सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट के चयन में टर्नओवर, लाभप्रदता और अधिभोग प्रतिशत जैसे मानकों को आधार बनाया जाएगा। वहीं पर्यटक सूचना केंद्रों का मूल्यांकन पूरे वर्ष पर्यटकों के लिए बुकिंग उपलब्ध कराने में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

इन पुरस्कारों के माध्यम से पर्यटन बोर्ड की इकाइयों में बेहतर सेवा, ग्राहक संतुष्टि, प्रभावी संचालन तथा पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

होमस्टे से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वालों का सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होमस्टे श्रेणी में घरेलू पर्यटन से अर्जित राजस्व, वार्षिक वृद्धि दर, बुकिंग की संख्या और घरेलू पर्यटकों की संख्या जैसे मानकों के आधार पर चयन किया जाएगा। पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाएं, ग्राहक समीक्षा, शिकायत निवारण प्रणाली, दिव्यांग पर्यटकों के लिए सुविधाएं तथा होमस्टे की विशिष्ट अवधारणा को भी मूल्यांकन में महत्व दिया जाएगा।

होमस्टे के माध्यम से स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़ने, स्थानीय उत्पादों एवं व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आय के अवसर सृजित करने वाले प्रयासों को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा।

डिजिटल दुनिया में छत्तीसगढ़ पर्यटन की ब्रांडिंग करने वालों को पुरस्कार

सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेणी भी शामिल की गई है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आधारित रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राज्य के पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को इस श्रेणी में सम्मानित किया जाएगा।

फेसबुक, इंस्टाग्राम और यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पहुंच, पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन तथा उपलब्ध होने पर कारोबार संबंधी विवरण को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया गया है।

इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक स्थलों, वन्यजीव, साहसिक गतिविधियों और अन्य पर्यटन आकर्षणों को डिजिटल माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रचारित करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को प्रोत्साहन मिलेगा।

सतत पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता

सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड के जरिए पर्यावरण-अनुकूल एवं सतत पर्यटन को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को सम्मानित किया जाएगा। परियोजना का छत्तीसगढ़ में स्थित होना और कम से कम दो वर्षों से संचालित होना आवश्यक है।

नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण, स्थानीय समुदायों—विशेषकर आदिवासी एवं ग्रामीण आबादी—की भागीदारी, स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान जैसे मानकों को प्राथमिकता दी जाएगी।

इको-टूरिज्म के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अवसर सृजित करने तथा पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन स्थापित करने वाली पहलों को भी मूल्यांकन में विशेष महत्व दिया जाएगा।

साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने वालों को भी सम्मान

छत्तीसगढ़ में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियां संचालित करने वाले श्रेष्ठ संचालक को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड दिया जाएगा। गंतव्य प्रबंधन, घरेलू एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या, साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल तथा गतिविधियों से प्राप्त राजस्व प्रमुख मूल्यांकन मानदंड होंगे।

इसके साथ ही पर्यटकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण साहसिक अनुभव उपलब्ध कराने, नए एडवेंचर प्रोडक्ट विकसित करने तथा छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक गंतव्यों को साहसिक पर्यटन के लिए विकसित एवं प्रचारित करने वाले प्रयासों को भी महत्व दिया जाएगा।

15 सितंबर तक करें आवेदन

पुरस्कार की सभी श्रेणियों के लिए आवेदन प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं एवं संबंधित पर्यटन क्षेत्र के पात्र हितधारक अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट www.tourism.cgstate.gov.in पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।

प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन राज्य पर्यटन विभाग/निर्णायक समिति द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी में प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण संबंधित श्रेणी के लिए निर्धारित पात्रता एवं मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

उत्कृष्टता को प्रोत्साहन और छत्तीसगढ़ पर्यटन को नई पहचान

‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पहचान देने के साथ ही स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नवाचार, सतत पर्यटन और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

पुरस्कार की विभिन्न श्रेणियों में आर्थिक प्रदर्शन के साथ स्वच्छता, सतत पर्यटन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने जैसे पहलुओं को महत्व दिया गया है।

यह पहल होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, टूर ऑपरेटर, स्टार्टअप, जिले, पर्यटक सूचना केंद्र, कंटेंट क्रिएटर और एडवेंचर टूरिज्म संचालकों को अपने उत्कृष्ट कार्यों को सामने लाने का अवसर देगी। साथ ही छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

होटल से टूर ऑपरेटर, होमस्टे, इको-टूरिज्म, एडवेंचर पर्यटन और सोशल मीडिया तक 10 श्रेणियों में होंगे ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’; प्रत्येक विजेता को ₹11 हजार एवं मेमेंटो

पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026, इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं it@visitcg.in पर भेज सकेंगे आवेदन
और भी

नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो उसके साथ परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला एवं संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नारी शक्ति सम्मान समारोह पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।


सम्मानित महिलाएं हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं का सम्मान वास्तव में उस नारी शक्ति का सम्मान है, जो परिवार को संस्कार देती है, समाज को दिशा देती है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, सिया-राम और राधा-कृष्ण जैसे संबोधन हमारी उस सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं, जिसमें नारी को शक्ति, करुणा, सृजन और संस्कार का आधार माना गया है। राज्य सरकार इसी भावना को योजनाओं और नीतियों के माध्यम से धरातल पर उतार रही है।

महिला आयोग न्याय के साथ जागरूकता का भी बने सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी मिली है। उनका सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का अनुभव, कानून की समझ और उच्च शिक्षा इस दायित्व के निर्वहन में उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ममता साहू के नेतृत्व में राज्य महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और पीड़ित महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आयोग गांवों, कस्बों, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे तथा महिलाओं को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करे। महिलाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि किसी भी कठिन परिस्थिति में शासन और उसकी संस्थाएं संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को मिले नए अवसर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को नई पहचान, सम्मान और आगे बढ़ने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आसीन होना पूरे देश की नारी शक्ति के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि विकसित भारत की यात्रा महिलाओं के नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी संकल्प के साथ प्रदेश की मातृशक्ति को विकास की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से जोड़ रही है।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन उनके सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। गांवों की महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बहनों के खातों में सहायता राशि समय से पहले अंतरित की। प्रदेश की माताओं-बहनों की खुशियां और उनकी आवश्यकताएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

13.85 लाख से अधिक लखपति दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, कृषि एवं वनोपज आधारित गतिविधियों, लघु उद्योग और स्वरोजगार के साथ महिलाएं अब ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।

प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन का प्रमाण है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

‘महतारी गौरव वर्ष’ मातृशक्ति के योगदान को समर्पित

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के साथ उनके लिए नए अवसरों के सृजन का भी वर्ष है।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत प्रदेश में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, ताकि बेटियों को विद्यालयों में बेहतर और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान तीन महतारी सदनों का लोकार्पण भी किया गया है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

महिलाओं के नाम संपत्ति से मजबूत हो रहा आर्थिक आधार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक अधिकार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उनके नाम पर संपत्ति पंजीयन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति होने से उनका आर्थिक आधार मजबूत होता है तथा परिवार में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दी जा रही रियायतों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन महिलाओं के नाम पर हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए समाज की सोच और व्यवस्था दोनों में सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है। हमारी बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले, युवतियों को रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलें, महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान मिले तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित न्याय मिले - सरकार इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है और जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो पूरा परिवार आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि महिला आयोग पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनके उत्थान के लिए प्रभावी कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है। नारी के सम्मान और सशक्तिकरण के बिना समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करें। आज यह सुखद अवसर है कि महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के पिता श्री कृपाराम साहू भी अपनी पुत्री को महत्वपूर्ण दायित्व संभालते हुए देख रहे हैं।उन्होंने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों के सशक्तिकरण और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना न परिवार की प्रगति संभव है और न ही समाज एवं राष्ट्र का समग्र विकास। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भी सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। यह प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की दिशा में आयोग की लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को नई मजबूती दी है।

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के अध्यक्षगण, संतजन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाएं उपस्थित थीं।
और भी

रंग-तरंग में सजेगा छत्तीसगढ़ का लोक-संगीत, संस्कृति और आधुनिक सुरों का संगम

 छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘रंग तरंग’ कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक आयोजन 1, 2 एवं 3 सितंबर 2026 को प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में आयोजित होगा।


‘रंग तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने-सुनने को मिलेगा। आयोजन का उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें समकालीन संगीत के साथ जोड़कर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।

लोक वाद्यों की गूंज के साथ सजेगी संगीत की महफिल

‘रंग तरंग’ को संस्कृति, रंगों और सुरों का फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। पारंपरिक वाद्यों की धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को सांस्कृतिक विरासत का नया अनुभव प्रदान करेगा।

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा नया मंच

तीन दिवसीय इस आयोजन के जरिए प्रदेश की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही आम लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है।

संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रंग तरंग’ में लोक और आधुनिकता का यह मेल दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर भी बनेगा।

तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों और प्रदेश की कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा। ‘रंग तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक ही मंच पर लाकर संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की पहल है।
और भी

राखी से पहले ‘विष्णु भैया’ की सौगात, प्रेम कुंवर के घर आई खुशियों की मिठास

 रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचने से प्रदेशभर में त्योहार की खुशियां और बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से महिलाओं को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित आर्थिक सहारे का माध्यम बन रही है। ‘विष्णु के सुशासन’ में योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचने से महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है।


मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी निवासी श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम के लिए भी रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन योजना की किस्त किसी सौगात से कम नहीं है। राशि खाते में पहुंचने की जानकारी मिलते ही उनके चेहरे पर खुशी झलक उठी। उन्होंने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहा।

राखी, मिठाई और जरूरी सामान की खरीदारी में मिलेगी मदद

श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद करती है। रक्षाबंधन जैसे विशेष अवसर पर यह राशि और भी उपयोगी साबित हुई है।

उन्होंने कहा कि राखी से पहले खाते में राशि आने से राखी, मिठाई और परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने में काफी सहूलियत होगी। त्योहार के समय मिलने वाली यह आर्थिक सहायता उनके लिए खुशी के साथ-साथ राहत भी लेकर आई है।

प्रेम कुंवर ने भावुक होकर कहा, “विष्णु भैया की इस सौगात से हमारी राखी की खुशियां बढ़ गई हैं। महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहारा मिल रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को मिल रहा नियमित आर्थिक संबल

प्रेम कुंवर का कहना है कि महतारी वंदन योजना की राशि जरूरत के समय परिवार के खर्च में उपयोगी साबित होती है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही है।

उन्होंने बताया कि योजना की राशि से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होती है और महिलाओं के भीतर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।

त्योहार की खुशियों के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे अवसर पर महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की किस्त पहुंचना उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ भावनात्मक खुशी का भी कारण बना है। प्रेम कुंवर जैसी अनेक महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘विष्णु के सुशासन’ की भावना के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंच रहा है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है।

रक्षाबंधन से ठीक पहले मिली 31वीं किस्त ने प्रेम कुंवर श्याम के परिवार की खुशियों में एक और रंग भर दिया है। उनके लिए यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि ‘विष्णु भैया’ की ओर से राखी की सौगात बनकर आई है।
और भी

राखी से पहले ‘विष्णु भैया’ की सौगात, प्रेम कुंवर के घर आई खुशियों की मिठास

 रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि महिलाओं के खातों में पहुंचने से प्रदेशभर में त्योहार की खुशियां और बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना से महिलाओं को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उनके लिए नियमित आर्थिक सहारे का माध्यम बन रही है। ‘विष्णु के सुशासन’ में योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंचने से महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है।


मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत गुदुमदेवरी निवासी श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम के लिए भी रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन योजना की किस्त किसी सौगात से कम नहीं है। राशि खाते में पहुंचने की जानकारी मिलते ही उनके चेहरे पर खुशी झलक उठी। उन्होंने इस सौगात के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहा।

राखी, मिठाई और जरूरी सामान की खरीदारी में मिलेगी मदद

श्रीमती प्रेम कुंवर श्याम ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि उनकी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद करती है। रक्षाबंधन जैसे विशेष अवसर पर यह राशि और भी उपयोगी साबित हुई है।

उन्होंने कहा कि राखी से पहले खाते में राशि आने से राखी, मिठाई और परिवार के लिए जरूरी सामान खरीदने में काफी सहूलियत होगी। त्योहार के समय मिलने वाली यह आर्थिक सहायता उनके लिए खुशी के साथ-साथ राहत भी लेकर आई है।

प्रेम कुंवर ने भावुक होकर कहा, “विष्णु भैया की इस सौगात से हमारी राखी की खुशियां बढ़ गई हैं। महतारी वंदन योजना से हर महीने आर्थिक सहारा मिल रहा है। इसके लिए मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद।”

‘विष्णु के सुशासन’ में महिलाओं को मिल रहा नियमित आर्थिक संबल

प्रेम कुंवर का कहना है कि महतारी वंदन योजना की राशि जरूरत के समय परिवार के खर्च में उपयोगी साबित होती है। नियमित रूप से मिलने वाली यह सहायता महिलाओं को छोटी-बड़ी आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने में मदद कर रही है।

उन्होंने बताया कि योजना की राशि से घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सुविधा होती है और महिलाओं के भीतर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। उनके अनुसार, यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।

त्योहार की खुशियों के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे अवसर पर महिलाओं के खातों में महतारी वंदन योजना की किस्त पहुंचना उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ भावनात्मक खुशी का भी कारण बना है। प्रेम कुंवर जैसी अनेक महिलाओं के लिए नियमित आर्थिक सहायता परिवार की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘विष्णु के सुशासन’ की भावना के अनुरूप महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों तक पहुंच रहा है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है।

रक्षाबंधन से ठीक पहले मिली 31वीं किस्त ने प्रेम कुंवर श्याम के परिवार की खुशियों में एक और रंग भर दिया है। उनके लिए यह राशि सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि ‘विष्णु भैया’ की ओर से राखी की सौगात बनकर आई है।
और भी

महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त से बहन देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर खिली रक्षाबंधन की मुस्कान

 प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मविश्वास और सम्मान का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली आर्थिक सहायता से महिलाएं अपनी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में भी सहयोग कर रही हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों से पहले मिलने वाली यह सहायता उनके लिए खुशी और राहत का माध्यम बन रही है।


गौरेला विकासखंड के ग्राम मेढूका निवासी बहन देवेंद्र कुमारी के लिए महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन के पावन अवसर पर विशेष खुशियां लेकर आई। त्योहार से पहले योजना की राशि उनके बैंक खाते में पहुंची, तो उनके चेहरे पर खुशी की मुस्कान खिल उठी। उन्होंने बताया कि 30वीं किस्त की राशि मिलने से रक्षाबंधन की तैयारियों में उन्हें काफी सहूलियत मिली है। वह इस राशि का उपयोग राखी और त्योहार से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में करेंगी।

‘विष्णु भैया’ की पहल से बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल

बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहती हैं। महतारी वंदन योजना के माध्यम से नियमित रूप से मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए भाई के स्नेह, विश्वास और सहयोग की तरह है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व से ठीक पहले खाते में राशि पहुंचना उनके लिए ‘विष्णु भैया’ के उपहार से कम नहीं है।

उन्होंने बताया कि योजना की नियमित सहायता से अब महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को स्वयं पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं। पहले जिन आवश्यकताओं के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर निर्भर रहना पड़ता था, उन्हें अब महिलाएं अपने स्तर पर पूरा कर पा रही हैं। इससे उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है और परिवार की खुशियों में उनकी भागीदारी भी मजबूत हुई है।

राखी से पहले मिला ‘विष्णु भैया’ का उपहार

बहन देवेंद्र कुमारी ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व है। ऐसे में त्योहार से पहले आर्थिक सहायता मिलना उनके लिए विशेष खुशी की बात है। महतारी वंदन योजना की राशि से वह अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन की खुशियां साझा करेंगी और राखी की खरीदारी भी करेंगी।

उन्होंने कहा कि ‘विष्णु भैया’ ने प्रदेश की बहनों के लिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से आर्थिक संबल देने का काम किया है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता से महिलाओं में यह विश्वास बढ़ा है कि वे अपनी जरूरतों के लिए स्वयं भी आर्थिक निर्णय ले सकती हैं। यह सहायता उनके लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मसम्मान और आत्मविश्वास का आधार भी बन रही है।

महिलाओं के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मिल रहा बल

महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इस सहायता का प्रभाव घरेलू जरूरतों से लेकर बच्चों की आवश्यकताओं, व्यक्तिगत खर्चों और त्योहारों की तैयारियों तक दिखाई दे रहा है।

बहन देवेंद्र कुमारी की खुशी इस बात का उदाहरण है कि नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला सकती है। खाते में राशि पहुंचने से उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने का भरोसा मिलता है और परिवार के भीतर आर्थिक निर्णयों में उनकी भूमिका भी मजबूत होती है।

‘विष्णु भैया’ के भरोसे से बहनों के जीवन में नई खुशियां

महतारी वंदन योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने की पहल नहीं, बल्कि प्रदेश की माताओं-बहनों के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का माध्यम भी बन रही है। योजना से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार की जिम्मेदारियों में अधिक प्रभावी ढंग से सहभागी बनने का अवसर दे रही है।

बहन देवेंद्र कुमारी ने ‘विष्णु भैया’ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को आर्थिक संबल दिया है। रक्षाबंधन जैसे पावन पर्व से पहले मिली 30वीं किस्त ने उनकी खुशी को और बढ़ा दिया है।

बहन देवेंद्र कुमारी के चेहरे पर रक्षाबंधन से पहले खिली मुस्कान महतारी वंदन योजना के सकारात्मक प्रभाव की भावपूर्ण तस्वीर है। ‘विष्णु भैया’ के स्नेह और भरोसे के साथ प्रदेश की माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल उनके जीवन में खुशियों, आत्मविश्वास और सम्मान की नई राह खोल रहा है।
और भी

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया ‘जशपुर : एक परिचय’ पुस्तक का विमोचन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान दिल्ली के द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘जशपुर : एक परिचय’ का विमोचन किया। यह पुस्तक जशपुर जिले के इतिहास, प्रशासनिक विकास, सुशासन की व्यवस्थाओं, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन, जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित एक व्यापक अध्ययन है। पुस्तक में आजादी के बाद से जशपुर की प्रशासनिक व्यवस्था में आए बदलावों के साथ वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और कार्यप्रणाली का अध्ययन किया गया है। इस अवसर पर भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की  छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर के चेयरमैन  भूतपूर्व मुख्य सचिव श्री सुयोग्य कुमार मिश्रा, वाइस चेयरमैन भूतपूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. इंदिरा मिश्रा तथा वाइस चेयरमैन भूतपूर्व मुख्य सचिव तथा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण प्रकाशन के लिए भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा को बधाई देते हुए कहा कि जशपुर छत्तीसगढ़ के उन विशिष्ट अंचलों में है, जहां प्रकृति, संस्कृति और परंपराओं की समृद्ध विरासत के साथ विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। जशपुर की पहचान उसके सुंदर पहाड़ों, घाटियों, नदियों, जलप्रपातों और घने वनों से तो है ही, यहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और परंपराएं इसे विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने कहा कि जशपुर की इन विशेषताओं के साथ जिले की विकास यात्रा और प्रशासनिक अनुभवों को एक पुस्तक के रूप में समेटना सराहनीय प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की विकास यात्रा को समझने के लिए वहां के इतिहास, समाज, संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का समग्र अध्ययन आवश्यक है। ‘जशपुर : एक परिचय’ इसी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह पुस्तक केवल जशपुर की वर्तमान तस्वीर प्रस्तुत नहीं करती, बल्कि समय के साथ जिले की प्रशासनिक संरचना और विकास प्रक्रिया में आए परिवर्तनों को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।

श्री साय ने कहा कि जशपुर का सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्वरूप छत्तीसगढ़ के मैदानी और औद्योगिक क्षेत्रों से अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित भू-भाग का हिस्सा होने के कारण यहां की भौगोलिक संरचना, जलवायु, वन संपदा और आजीविका के स्वरूप की अपनी विशिष्टताएं हैं। पीढ़ियों से यहां निवासरत जनजातीय समुदायों ने अपनी परंपराओं, जीवन-पद्धति और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की संस्कृति को संरक्षित रखा है। यही विविधता जशपुर को अध्ययन और विकास, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते वर्षों में जशपुर ने अधोसंरचना, ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में निरंतर प्रगति की है। विकास की इस यात्रा में यह आवश्यक है कि स्थानीय विशेषताओं और जरूरतों को केंद्र में रखकर भविष्य की योजनाएं तैयार की जाएं। इस प्रकार के अध्ययन प्रशासन को क्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों को गहराई से समझने और विकास की भावी प्राथमिकताएं तय करने में उपयोगी आधार प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार, रोजगार और आजीविका के अवसरों का विस्तार करते हुए स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जशपुर में विकास और प्रकृति के बीच संतुलन की बड़ी संभावनाएं हैं। कृषि, वनोपज, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और महिला तथा युवा उद्यमिता को बढ़ावा देकर जिले की अर्थव्यवस्था को और सशक्त बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ के सबसे समृद्ध अंचलों में से एक है। यहां के पहाड़, वन, नदियां, जलप्रपात और सुरम्य घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखती हैं। इसके साथ ही जनजातीय जीवन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और स्थानीय खान-पान जशपुर को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। जिले की इन खूबियों का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण जशपुर को व्यापक पहचान दिलाने में भी सहायक होगा।

श्री साय ने कहा कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान ने देश में लोक प्रशासन के अध्ययन और उसकी गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शोध, प्रशिक्षण, प्रकाशन और नीतिगत विमर्श के माध्यम से संस्थान ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में निरंतर योगदान दिया है। जिला स्तर पर प्रशासन और विकास के अध्ययन की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत की विकास यात्रा को सही मायने में समझने के लिए जिलों और स्थानीय प्रशासन के अनुभवों को समझना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन शासन और नागरिकों के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर सेवा प्रदाय और स्थानीय समस्याओं के समाधान तक जिला स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका होती है। ऐसे में किसी जिले की प्रशासनिक यात्रा, सफल प्रयोगों और चुनौतियों का दस्तावेजीकरण अन्य क्षेत्रों के लिए भी सीख और नवाचार का आधार बन सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जशपुर : एक परिचय’ प्रशासकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और जशपुर के सामाजिक-आर्थिक एवं सांस्कृतिक स्वरूप को समझने की रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री सिद्ध होगी। यह पुस्तक जशपुर की विशिष्टताओं को व्यापक मंच पर सामने लाने के साथ जिले पर आगे होने वाले शोध और विकासपरक अध्ययनों को भी प्रेरित करेगी।

भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत हुआ जशपुर का अध्ययन

उल्लेखनीय है कि भारतीय लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली द्वारा अपनी क्षेत्रीय शाखाओं को संबंधित राज्यों के कम से कम एक जिले का व्यापक अध्ययन करने का प्रोजेक्ट दिया गया है। इसका उद्देश्य आजादी के बाद जिलों की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली में आए बदलावों के साथ उनकी विकास यात्रा का अध्ययन और दस्तावेजीकरण करना है।

इस अध्ययन में वर्तमान प्रशासनिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का आकलन करने के साथ भविष्य में बेहतर प्रशासन और विकास के लिए संभावित दिशा की पहचान पर भी जोर दिया गया है। इसी क्रम में भारतीय लोक प्रबंधन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा रायपुर ने प्रदेश के 33 जिलों में से जशपुर का चयन किया।

जशपुर को अध्ययन के लिए चुने जाने के पीछे जिले की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियां महत्वपूर्ण रही हैं। छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित जशपुर एक प्रमुख जनजातीय बहुल जिला है। इसकी सांस्कृतिक और पारिस्थितिक संरचना प्रदेश के मैदानी कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों से काफी अलग है। छोटानागपुर पठार के विस्तारित क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण जशपुर में ऊंचे भू-भाग, वन आधारित आजीविका और समृद्ध जनजातीय परंपराओं का अनूठा संगम दिखाई देता है।

जशपुर पर अपनी तरह का महत्वपूर्ण समग्र अध्ययन

पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि यह परंपरागत जिला गजेटियर नहीं, बल्कि जशपुर के विविध पक्षों को समेटने वाला संक्षिप्त समग्र दस्तावेज है। वर्ष 1998 में पृथक जिला बनने से पहले जशपुर, रायगढ़ जिले की एक तहसील था। जशपुर का पृथक जिला गजेटियर उपलब्ध नहीं होने के कारण अध्ययन में रायगढ़ जिला गजेटियर सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न प्रकाशनों, जनगणना 2011, शासकीय विभागों की रिपोर्ट और जिले से संबंधित प्रकाशित सामग्री का उपयोग किया गया है।

इस अध्ययन की एक विशेषता यह भी है कि इसे किसी एक व्यक्ति द्वारा तैयार नहीं किया गया है, बल्कि जशपुर जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारियों और सामूहिक सहयोग के आधार पर इसे स्वरूप दिया गया है। जिले के विभिन्न शासकीय कार्यालयों से उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं को संकलित कर जशपुर की समग्र तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पुस्तक जशपुर के प्रशासन और विकास की यात्रा के साथ उसकी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को भी सामने लाती है।भारतीय लोक प्रशासन संस्थान की छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय शाखा ने विश्वास व्यक्त किया है कि जशपुर के विविध पहलुओं पर केंद्रित यह प्रारंभिक समग्र अध्ययन भविष्य में जिले के इतिहास, प्रशासन, समाज, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विकास की संभावनाओं पर और अधिक विस्तृत शोध के लिए आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने 'जशपुर :एक परिचय' के प्रकाशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि यह अध्ययन जशपुर के अतीत और वर्तमान को समझने के साथ उसके उज्ज्वल भविष्य की संभावनाओं को नई दिशा देने में उपयोगी सिद्ध होगा।
और भी

खस से बनी अनोखी राखियां, पानी की बूंद पड़ते ही बिखेरेंगी खुशबू

 खस की जड़ों से बनी अनोखी और पर्यावरण-कल अनुकूल राखियां पानी की एक बूंद पड़ते ही अपनी प्राकृतिक और सोंधी खुशबू बिखेरने लगती हैं। ये राखियां पूरी तरह प्राकृतिक, हाथ से बनी और बायोडिग्रेडेबल होती हैं, जो त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं।


            इस रक्षाबंधन भाइयों की कलाई पर बंधने वाली राखियां सिर्फ बहन के प्यार और स्नेह का प्रतीक नहीं होंगी, बल्कि अपनी खुशबू से एक अनोखा एहसास भी कराएंगी। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक औषधीय एवं सुगंधित पौधों से जुड़ी स्थानीय प्रतिभा और हुनर को बढ़ावा देते हुए खस से विशेष राखियों का निर्माण किया जा रहा है। इन राखियों की खासियत यह है कि पानी की बूंद पड़ने, नमी आने या गीली होने पर इनमें से मनमोहक खुशबू निकलती है। यानी अब भाइयों की कलाई महकेगी बहन के प्यार से।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप की संवेदनशील पहल से परंपरा और नवाचार का संगम

           वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप वन संपदा और पारंपरिक औषधीय पौधों से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं। इसी संवेदनशील पहल को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा खस जैसी सुगंधित वनस्पति के उपयोग से राखियों को नया स्वरूप दिया जा रहा है।

          बोर्ड अध्यक्ष श्री विकास मरकाम और उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला के मार्गदर्शन में अन्नपूर्णा महिला स्व सहायता समूह, नारी जिला धमतरी की 10 महिलाओं द्वारा 1000 तैयार की गई है। ये राखियां परंपरागत भावनाओं को आधुनिक सोच से जोड़ने का सुंदर उदाहरण हैं। इनमें छत्तीसगढ़ की वन संपदा, स्थानीय हुनर और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की खुशबू एक साथ महसूस की जा सकती है।

पानी की बूंद पड़ते ही महकेगी राखी

         खस से बनी इन राखियों की सबसे खास विशेषता उनकी प्राकृतिक खुशबू है। सामान्य राखियां जहां केवल कलाई की शोभा बढ़ाती हैं, वहीं ये विशेष राखियां नमी के संपर्क में आने पर अपनी सुगंध बिखेरती हैं। बारिश के मौसम में या हाथ धोते समय पानी की बूंद पड़ने पर राखी से उठती खुशबू भाई को बहन के स्नेह का अनोखा एहसास कराएगी।

वन संपदा से रोजगार और नवाचार की नई राह

         इन राखियों का निर्माण केवल रक्षाबंधन के त्योहार को खास बनाने की पहल नहीं है, बल्कि यह वन आधारित उत्पादों को बाजार से जोड़ने और स्थानीय हुनर को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खस जैसी उपयोगी वनस्पतियों से तैयार उत्पादों के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी विकसित किए जा रहे हैं।

राखी में रिश्तों की मिठास और छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू

        इस नवाचार के संदर्भ में वन मंत्री श्री केदार कश्यप कहते हैं कि सचमुच ! इस रक्षाबंधन में बहनों का प्यार बांधेगा राखी, और महकेगी भाइयों की कलाई। इस बार जब बहन अपने भाई की कलाई पर खस से बनी यह राखी बांधेगी, तो उसके साथ सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा स्नेह भी बंधेगा। पानी की बूंद के साथ जब राखी महकेगी, तो भाई को बहन के प्यार और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा की खुशबू एक साथ महसूस होगी।
और भी

हर-घर जल के लिए कलेक्टर व्यक्तिगत रूचि लें : मुख्य सचिव

 मुख्य सचिव श्री विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये प्रदेश में जल-जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा के लिए कलेक्टर कॉन्फ्रेंस आयोजित की। मुख्य सचिव ने जिलों के कलेक्टरों से उनके जिले के जल-जीवन मिशन के कार्यों की जानकारी ली। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा  कि वे जल-जीवन मिशन के तहत हर घर जल पहुचांने के लिए व्यक्तिगत रूचि लेकर काम करें। लोगों के घरों में नलों से पानी मिल इसके लिए चलायी जा रही स्कीमों को तहत पूर्ण करायें। पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भौतिक सत्यापन करायें और पंचायतों को हस्तांतरित योजनाओं के लंबित भुगतान शीघ्र करायें। मुख्य सचिव ने साफ कहा है जल जीवन मिशन के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 


             कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में सोलर आधारित योजनाओं एवं क्रेडा संबंधित नल-जल योजनाओं के कार्यों के संबंध में विचार विमर्श किया गया एवं आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्ण एवं हस्तांतरित योजनाओं के भुगतान की कार्यवाही शीघ्रता से करने के निर्देश दिए गए है।  कलेक्टरों को स्त्रोत समस्यामूलक योजनाओं के कार्यों को स्थानीय निधि से पूर्ण कराने कहा गया है। 

              मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि जहां सब इंजीनियरों की कमी है वहां पर दूसरे विभागों के इंजीनियरों से जल-जीवन मिशन के कार्यों को कराने के लिए कार्यवाही करें। कॉन्फ्रेंस में जिला जल एवं स्वच्छता समिति की नियमित मासिक बैठक हो यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बैठक की कार्यवाही का समय पर विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाए तथा जल जीवन मिशन की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कलेक्टर स्पष्ट आकलन, बेहतर योजना और प्रभावी समन्वय के साथ मिशन मोड में कार्य करें, ताकि राज्य के प्रत्येक परिवार को समयबद्ध रूप से हर घर नल से जल उपलब्ध कराया जा सके। 

            बैठक में 55 एलपीसीडी 7 दिवसों से कम जल प्रदाय की जा रही स्कीमों की जानकारी अधिकारियों से ली गई। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री अब्दुल कैसर हक सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जल जीवन मिशन के अधिकारी मौजूद थे। वीडियो कॉन्फ्रेंस से सभी जिलों के कलेक्टर एवं जिला स्तरीय विभागीय अधिकारी शामिल हुए।
और भी

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया दृश्य संवाद 2026 का शुभारंभ

 स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने आज विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित तीन दिवसीय फोटो जर्नलिस्ट फेस्ट ‘दृश्य संवाद 2026’ का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में रायपुर के प्रेस फोटो जर्नलिस्टों के साथ-साथ प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। प्रदर्शनी में तस्वीरों के जरिए प्रकृति, छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा तथा जनसरोकार से जुड़े विषयों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।


चार कैटेगरी में आयोजित प्रदर्शनी की ‘प्रकृति एवं पर्यावरण’ कैटेगरी में प्रदर्शित तस्वीरों ने प्रदर्शनी स्थल पर प्राकृतिक सौंदर्य को साकार कर दिया। वहीं ‘संस्कृति एवं परंपरा’ कैटेगरी की तस्वीरों में छत्तीसगढ़ की लोककला, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की महक महसूस की जा सकती है। ‘समाचार एवं जनसरोकार’ कैटेगरी में फोटो जर्नलिस्टों की नजर से महत्वपूर्ण घटनाओं और सामाजिक सरोकारों को एक क्लिक में जीवंत रूप दिया गया है।

इस वर्ष रायपुर प्रेस क्लब ने प्रदर्शनी को और व्यापक स्वरूप देते हुए प्रेस क्लब के गैर सदस्य  प्रोफेशनल और शौकिया फोटोग्राफरों के लिए भी ओपन कैटेगरी में भागीदारी का अवसर दिया। इस श्रेणी में 35 से अधिक प्रतिभागियों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं।

फोटोग्राफी चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी वाला काम : श्याम बिहारी जायसवाल
प्रदर्शनी का अवलोकन करने के बाद मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने फोटो जर्नलिस्टों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल कैमरे से तस्वीर खींचने का काम नहीं, बल्कि एक पल को इतिहास के लिए सुरक्षित कर देने की कला और जिम्मेदारी है। खासतौर पर फोटो जर्नलिज्म में परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं। फोटो जर्नलिस्ट को घटनास्थल पर मौजूद रहकर बेहद कम समय में यह तय करना होता है कि कौन-सा क्षण महत्वपूर्ण है और उसे किस एंगल से कैमरे में कैद किया जाए।
उन्होंने कहा कि एक अच्छी तस्वीर के पीछे तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ त्वरित निर्णय लेने की क्षमता, सही समय की पहचान, सही एंगल और परिस्थितियों को समझने की दृष्टि भी जरूरी है। कई बार पत्रकार घटना को शब्दों में विस्तार से बताते हैं, लेकिन एक तस्वीर वही बात एक क्षण में लोगों तक पहुंचा देती है। यही फोटो जर्नलिज्म की ताकत है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब द्वारा विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी का आयोजन सराहनीय पहल है। इससे वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्टों के अनुभव नई पीढ़ी तक पहुंचेंगे और युवा तथा शौकिया फोटोग्राफरों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलेगा। उन्होंने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं दीं।


तस्वीर पत्रकारिता की अधूरी खबर को पूरा करती है : मोहन तिवारी

रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने सभी फोटो जर्नलिस्टों और फोटोग्राफरों को विश्व फोटोग्राफी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘दृश्य संवाद’ केवल एक फोटो प्रदर्शनी नहीं, बल्कि तस्वीरों के माध्यम से समाज और समय से संवाद करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता, फोटो जर्नलिस्ट साथियों के बिना अधूरी है। खबर को जीवंतता और प्रभाव देने में एक तस्वीर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि एक सशक्त तस्वीर के लिए कई बार लंबे कैप्शन की जरूरत नहीं होती। बिना किसी कैप्शन के भी तस्वीर अपने आप में पूरी खबर कहने की ताकत रखती है। फोटो जर्नलिस्ट जिस क्षण को कैमरे में कैद करता है, वह आने वाले समय में उस घटना का दस्तावेज बन जाता है। उन्होंने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब आने वाले वर्षों में भी विश्व फोटोग्राफी दिवस पर इस तरह की प्रदर्शनी और फोटो जर्नलिस्ट गतिविधियों की परंपरा को आगे बढ़ाएगा।

कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब के महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू, भूपेश जांगड़े, वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, वरिष्ठ फोटो जर्नलिस्ट गोकुल सोनी, राजकुमार चतुर्वेदी, नरेंद्र बंगाले, प्रदीप डडसेना, पंकज चौहान, फोटो जर्नलिस्ट प्रकोष्ठ के संयोजक दीपक पांडे, दीपेंद्र सोनी, रमन हलवाई, जय गोस्वामी , सागर फारीकार, पंकज सिंह,विजय देवांगन मनोज देवांगन विनय घाटगे ,हेमंत गोस्वामी किशन लोखंडे त्रिलोचन मानिकपुरी, राजेश सोनकर  सहित बड़ी संख्या में फोटो जर्नलिस्ट एवं पत्रकार उपस्थित रहे।

तीन दिवसीय ‘दृश्य संवाद 2026’ फोटो प्रदर्शनी में दर्शक इन तस्वीरों का तीन दिन अवलोकन कर सकेंगे और फोटोग्राफी की दृष्टि से छत्तीसगढ़ की प्रकृति, संस्कृति, समाज और घटनाक्रम को एक अलग नजरिए से देख सकेंगे।
और भी

श्रमिक परिवारों को मिले शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ: श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन

 श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम विभाग के काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ई-केवायसी प्रक्रिया के तहत किसी भी श्रमिक का आवेदन लंबित न रहे और सभी पात्र श्रमिकों को शासन की योजनाओं का समय पर लाभ मिले।


67 कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर  

       मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। राज्य में संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के हितों के संरक्षण के लिए विभिन्न श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से 67 कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों को मिले, इसे सुनिश्चित करने के लिए विभागीय अधिकारी आवश्यक कार्यवाही करें।

श्रम संहिताओं के अध्ययन और अधोसंरचना विस्तार के निर्देश  

      श्रम मंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा चार नए श्रम संहिताएं बनाई गई हैं। सभी श्रम अधिकारी इन कानूनों का अध्ययन कर लें। उन्होंने कहा कि नए जिलों के श्रम कार्यालयों में जल्द ही सेटअप अनुसार अधोसंरचना का विस्तार किया जाएगा। 

कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करें

         बैठक में उन्होंने श्रमिकों के पंजीयन के लिए प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। ठेकेदार को जितने श्रमिकों का लाइसेंस प्राप्त है, उतने ही श्रमिक कार्यरत हैं या नहीं, यह सुनिश्चित करने तथा कारखानों की नियमित जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।

योजनाओं की जिलेवार समीक्षा  

          बैठक में ऑनलाईन रेण्डम निरीक्षण, अभियोजन एवं निराकरण की कार्यवाही, छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना अधिनियम अंतर्गत पंजीयन की समीक्षा सहित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई। इनमें मिनी माता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना, असंगठित कर्मकार छात्रवृत्ति योजना, ई-रिक्शा सहायता योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना, असंगठित कर्मकार महतारी जतन योजना और बस्तर मुन्ने पोर्टल (नियद नेल्ला नार 2.0) शामिल हैं।

अपात्रों को लाभ मिलने पर होगी कार्रवाई  

          सचिव सह श्रमायुक्त श्री हिमशिखर गुप्ता ने जिलों के श्रम पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि इस योजना में अपात्र व्यक्ति को लाभ मिलता है अथवा किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो संबंधित जिलों के श्रम अधिकारी जवाबदेह होंगे और उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।

उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन 24 अगस्त को

           सचिव श्री गुप्ता ने बताया कि 24 अगस्त मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में राजधानी रायपुर में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री की पहल पर चालू शैक्षणिक सत्र से इस योजना में सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है। इसके तहत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक श्रेष्ठ आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है, जिसका पूरा खर्च श्रम विभाग द्वारा वहन किया जाएगा।

           बैठक में अपर श्रमायुक्त द्वय श्री एस.एल. जांगड़े एवं श्रीमती सविता मिश्रा, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मण्डल के सचिव श्री गिरीश रामटेके सहित विभिन्न जिलों से आए श्रम विभाग के मैदानी अधिकारी उपस्थित थे।
और भी

असम के cपीड़ितों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने दिए 5 करोड़ रुपये

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल श्री रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्यपाल को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। राज्यपाल श्री डेका ने भी मुख्यमंत्री को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

vvvvvv
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि का चेक राज्यपाल श्री रमेन डेका को सौंपा। यह सहायता राशि असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों के राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग के लिए प्रदान की गई है। उल्लेखनीय है कि राज्यपाल श्री रमेन डेका 16 अगस्त को असम के दौरे पर रहेंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने असम में बाढ़ से हुई जन-धन की क्षति पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता असम के भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है। 

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और विधायक श्री पुरंदर मिश्रा उपस्थित थे।
और भी

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने बाइक चलाकर किया नेतृत्व, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचेगा तिरंगा

 बस्तर में शांति, एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश लेकर बुधवार को नारायणपुर जिला मुख्यालय के हायर सेकेंडरी स्कूल ग्राउंड से श्बस्तर तिरंगा यात्रा 2026श् का शुभारंभ हुआ। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री श्री केदार  कश्यप बाइक पर तिरंगा लेकर यात्रा का नेतृत्व करते हुए रवाना हुए, जिसे क्षेत्र के विभिन्न समाज प्रमुखों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बस्तर तिरंगा यात्रा के आयोजन में शामिल बच्चों से मंत्री द्वय ने उनके बीच पहुंच कर आत्मीयता के साथ मुलाकात की और सभी का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने विकास का बिगुल फूंकते हुए सभी को शांति और विकास का संदेश दिया।

 
        उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह यात्रा उन क्षेत्रों से होकर गुजरेगी, जहां पहले नक्सली घटनाओं ने लोगों को प्रभावित किया था। उन्होंने कहा कि यात्रा के माध्यम से देश और दुनिया को यह संदेश दिया जाएगा कि इन क्षेत्रों में अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है। उन्होंने बताया कि नारायणपुर का चयन विशेष उद्देश्य के तहत किया गया है, क्योंकि यह जिला सबसे लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा है। यात्रा का समापन 14 अगस्त को बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर किया जाएगा।

      उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में माओवाद के विरुद्ध नीति बनाकर नियत तिथि पर 31 मार्च 2026 में नक्सलवाद राज्य के साथ साथ देश से समाप्त किया गया है। आज के बाद हर राष्ट्रीय पर्व एवं स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के कोने-कोने तक भारत का तिरंगा पूरी आन, बान और शान से लहराएगा। उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 से लेकर अब तक बस्तर के अनेक दुर्गम गाँवों में लगातार राष्ट्रीय पर्वों पर ध्वजारोहण किया गया है। इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर सम्भाग के 90 से अधिक ऐसे गाँव हैं, जहाँ आजादी के बाद पहली बार इस स्वाधीनता दिवस पर तिरंगा लहराया जाएगा। उन्होंने कहा कि तिरंगा फहरने का मतलब बाबा साहब के द्वारा लिखा संविधान अब राज्य के कोने कोने पर लागू होगा। 

       श्री शर्मा ने कहा कि आज जब मैं बस्तर के अलग अलग गांवों में जाता हूँ तो बस्तरवासी कहते हैं कि वे खुद को सही मायनों में स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं और अब कोई ऐसी ताकत नहीं बची जो भारत के राष्ट्रीय ध्वज को नकार सके। पहले राष्ट्रीय पर्वों पर माओवादियों का फरमान होता था कि अपने घरों में काला झंडा लगाया जाए, आज हर घर में तिरंगा फहर रहा है। इसमें बस्तर के लोगों ने अपने मनोबल और जवानों का अदम्य साहस सहयोग रहा, जिससे नक्सलावाद से मुक्ति पाई है। अब समय आ गया है कि दुनिया के लोग बस्तर को जानें, अब बस्तर के लोग दुनिया में छाने वाले हैं। बस्तर के लोग आगे चलकर नया इतिहास लिखने वाले हैं। 

        गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर में अब लोगों को मूलभूत सुविधाएं, विकास कार्य और सुरक्षा का वातावरण मिल रहा है। शासन बस्तर में सड़क, शिक्षा, कौशल विकास, लघु वनोपज के प्रसंस्करण और रोजगार के क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम कर रही है। वहीं विकास कार्यों में गुणवत्ता को लेकर उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

       वन मंत्री एवं नारायणपुर विधायक श्री केदार कश्यप ने कहा कि कभी नक्सल गतिविधियों का केंद्र माने जाने वाले क्षेत्रों से आज तिरंगा यात्रा निकल रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा उन स्थानों की मिट्टी एकत्रित करेगी, जहां जवानों और नागरिकों ने शहादत दी है। इस मिट्टी का उपयोग भविष्य में बनने वाले स्मारक में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 12 अगस्त से प्रारंभ होकर 14 अगस्त तक बस्तर के अति-संवेदनशील और भीषण माओवाद प्रभावित रहे इलाकों से गुजरेगी।

       आज पहले दिन यात्रा नारायणपुर से शुरू होकर यात्रा मुंजमेटा, झारागांव, धौड़ाई, कन्हारगांव, कड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंची। दूसरे दिन यात्रा दंतेवाड़ा से सुकमा और बीजापुर जिले के विभिन्न नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। तीसरे दिन बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी, ताड़पाला होते हुए कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर यात्रा का समापन होगा।

                इस अवसर पर लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष नारायण मरकाम, नगर पालिका के अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल, जनप्रतिनिधि राहुल टिकरिया श्रीमती संध्या पवार सहित अन्य जनप्रतिनिधि और कमिश्नर बस्तर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री बद्री नारायण मीणा, कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, एसपी श्री संदीप कुमार पटेल, जिला पंचायत सीईओ डीएफओ  सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
और भी

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दिया स्वदेशी अपनाने का संदेश

 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा हथकरघा से निर्मित वस्तुओं के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान से जुड़ा जन आंदोलन है।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के कुशल बुनकरों द्वारा निर्मित पारंपरिक  गमछा धारण कर प्रदेश की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह गमछा केवल एक परिधान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, श्रम, परंपरा और स्थानीय शिल्प कौशल का जीवंत प्रतीक है।

श्री अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी और हथकरघा उत्पादों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब हम स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का उपयोग करते हैं, तब हम न केवल उनकी आजीविका को सशक्त बनाते हैं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक नागरिक का यह छोटा-सा प्रयास आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में बड़ा योगदान सिद्ध होगा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकर अपनी पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्पकौशल और रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। ऐसे प्रतिभाशाली शिल्पकारों का उत्साहवर्धन करना हम सबका  सामूहिक दायित्व है।

श्री अग्रवाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पाद के साथ वीडियो अथवा चित्र साझा करने और  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस अभियान से जुड़ने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस जनभागीदारी से देश-दुनिया तक हमारे बुनकरों की अद्भुत कला, उनकी मेहनत और भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा को नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी स्वदेशी अपनाने के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएंगे तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
और भी
Previous123456789...5354Next