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पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दिया स्वदेशी अपनाने का संदेश

 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा हथकरघा से निर्मित वस्तुओं के अधिकाधिक उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्पकला और लाखों बुनकर परिवारों के सम्मान से जुड़ा जन आंदोलन है।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर श्री अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ के कुशल बुनकरों द्वारा निर्मित पारंपरिक  गमछा धारण कर प्रदेश की समृद्ध हस्तकरघा परंपरा को सम्मान दिया। उन्होंने कहा कि यह गमछा केवल एक परिधान नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान, श्रम, परंपरा और स्थानीय शिल्प कौशल का जीवंत प्रतीक है।

श्री अग्रवाल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्वदेशी और हथकरघा उत्पादों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि जब हम स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों का उपयोग करते हैं, तब हम न केवल उनकी आजीविका को सशक्त बनाते हैं, बल्कि अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक नागरिक का यह छोटा-सा प्रयास आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में बड़ा योगदान सिद्ध होगा।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के बुनकर अपनी पारंपरिक कला, उत्कृष्ट शिल्पकौशल और रचनात्मकता के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहे हैं। ऐसे प्रतिभाशाली शिल्पकारों का उत्साहवर्धन करना हम सबका  सामूहिक दायित्व है।

श्री अग्रवाल ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपने पसंदीदा हथकरघा उत्पाद के साथ वीडियो अथवा चित्र साझा करने और  राष्ट्रीय हथकरघा दिवस अभियान से जुड़ने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस जनभागीदारी से देश-दुनिया तक हमारे बुनकरों की अद्भुत कला, उनकी मेहनत और भारतीय हथकरघा की समृद्ध परंपरा को नई पहचान मिलेगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी स्वदेशी अपनाने के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएंगे तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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समाज की एकजुटता सामाजिक विकास की सबसे बड़ी शक्ति: श्री राजेश अग्रवाल

 पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अंबिकापुर में आयोजित रजवार समाज की महत्वपूर्ण बैठक एवं सम्मान समारोह में शामिल होकर समाज के वरिष्ठजनों, माताओं, बहनों और युवाओं से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर समाज की ओर से उनका पुष्पमालाओं से स्वागत एवं सम्मान किया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने विभिन्न सामाजिक एवं विकास संबंधी विषयों पर मंत्री को अवगत कराया और समाज के उत्थान के लिए आवश्यक पहल की अपेक्षा व्यक्त की। 


बैठक को संबोधित करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक शक्ति उसकी एकजुटता, शिक्षा और आपसी सहयोग में निहित होती है। उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए तथा वरिष्ठजनों के अनुभवों का लाभ लेकर नई पीढ़ी को संगठित एवं संस्कारित करना समय की आवश्यकता है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। समाज से जुड़े जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक पहल की जाएगी। उन्होंने सामाजिक समरसता बनाए रखने, परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा शिक्षा के स्तर को लगातार बेहतर बनाने का आह्वान किया। 

इस अवसर पर श्री अग्रवाल ने कहा कि रजवार समाज की बैठक में सम्मिलित होकर समाज के सभी वरिष्ठजनों, माताओं, बहनों एवं युवाओं से आत्मीय भेंट का अवसर मिला। इस दौरान आप सभी द्वारा दिए गए स्नेह, सम्मान और आत्मीय आतिथ्य के लिए मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। रजवार समाज का छत्तीसगढ़ के सामाजिक विकास, सांस्कृतिक विरासत और जनसेवा में योगदान सदैव प्रेरणादायी एवं अतुलनीय रहा है। रजवार समाज के सभी सम्मानित सदस्यों का हृदय से अभिनंदन एवं शुभकामनाएँ।

बैठक में समाज के वक्ताओं ने संगठन को गांव-गांव तक मजबूत बनाने, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सहयोग, युवाओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प व्यक्त किया। कार्यक्रम में महिलाओं और युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। 

सम्मेलन में उपस्थित समाजजनों ने मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए समाज के विकास एवं मार्गदर्शन में निरंतर सहयोग की अपेक्षा जताई। इस पर मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि समाज की प्रगति के लिए शासन और समाज को मिलकर कार्य करना होगा, तभी समावेशी और सतत विकास का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा। 

कार्यक्रम का समापन समाज की एकता, संगठन की मजबूती, सामाजिक सद्भाव और विकास के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित समाजजनों ने इस आयोजन को सामाजिक जागरूकता, संगठनात्मक सशक्तीकरण और नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन बताया।
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विश्व स्तनपान सप्ताह : स्वास्थ्य मंत्री करेंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम की अध्यक्षता

 विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) एवं राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एसएचएसआरसी) के सहयोग से 6 अगस्त 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार के नए सभागार में आयोजित होगा।


कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे। सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री अमित कटारिया तथा आयुक्त-सह-संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं श्री संजीव झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ दुग्ध के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, नवजात एवं शिशुओं के समुचित पोषण और बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा विशेषज्ञों, नर्सिंग अधिकारियों, मितानिनों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी।

कार्यक्रम में राज्य की 10 ऐसी माताओं को 'माता यशोदा सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने मातृ दुग्ध का दान कर अथवा अन्य शिशुओं को स्तनपान कराकर मानवता और मातृत्व की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है। ये वे शिशु हैं जिनकी माताओं में पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं हो सका अथवा जिनकी माता का निधन हो चुका है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन राज्य के पहले मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक) की स्थापना की घोषणा भी की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे नवजात एवं शिशुओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध कराना है, जिन्हें किसी कारणवश अपनी माता का दूध प्राप्त नहीं हो पाता।

स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है। यह न केवल शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से समुदाय में स्तनपान के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने तथा माताओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग ने मीडिया प्रतिनिधियों एवं आमजन से कार्यक्रम में सहभागिता कर स्तनपान के महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
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वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने किया सम्मानित, 13,912 आवेदनों के सफल निराकरण से बनाया रिकॉर्ड

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं को आमजन तक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से पहुंचाने की दिशा में लगातार उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। इसी कड़ी में बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के सेवा सेतु केंद्र में कार्यरत वीएलई (Village Level Entrepreneur) श्री निर्दोष लकड़ा ने वर्ष 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के टॉप ट्रांजैक्शन वीएलई बनने का गौरव प्राप्त किया है।


रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने श्री निर्दोष लकड़ा को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। यह सम्मान सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध सेवाएं पहुंचाने में उनके उत्कृष्ट योगदान की सराहना है।

वर्ष 2025-26 के दौरान श्री निर्दोष लकड़ा ने सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 13,912 आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल बलरामपुर-रामानुजगंज जिले को गौरवान्वित किया है, बल्कि प्रदेश में डिजिटल सुशासन की दिशा में एक नई मिसाल भी स्थापित की है।

जिले में सेवा सेतु पोर्टल के प्रभावी संचालन के कारण अब ग्रामीण नागरिकों को आय, जाति, निवास, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित अनेक शासकीय सेवाओं के लिए बार-बार जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। सेवाएं अब स्थानीय स्तर पर ही सहज, पारदर्शी और निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध हो रही हैं।

निर्दोष लकड़ा ने तकनीक का प्रभावी उपयोग, कार्य के प्रति समर्पण और जनसेवा की भावना के साथ हजारों ग्रामीण परिवारों तक सरकारी योजनाओं और सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की है। उनका सेवा केंद्र ग्रामीणों के लिए केवल एक सुविधा केंद्र नहीं, बल्कि भरोसेमंद समाधान का माध्यम बन चुका है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद श्री निर्दोष लकड़ा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से प्रत्येक नागरिक का जीवन आसान बनाना है। उन्होंने कहा कि जब लोगों का समय और संसाधन बचते हैं तथा उन्हें बिना किसी परेशानी के सेवाएं मिलती हैं, तभी डिजिटल भारत और सुशासन का उद्देश्य साकार होता है।

बलरामपुर जिले में सेवा सेतु पोर्टल का प्रभावी क्रियान्वयन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन एवं डिजिटल सेवा विस्तार की मंशा को धरातल पर साकार करने का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है।
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भोरमदेव सरस मेला में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम का पालन करने उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की अपील

 पवित्र श्रावण माह में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध भोरमदेव सरस मेला एवं सावन में इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है। मेले की स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन की अपील सभी दुकानदारों एवं श्रद्धालुओं से की है।


           उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव धाम हमारी आस्था, संस्कृति और प्रकृति की अमूल्य धरोहर है। सरस मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, ऐसे में हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस पवित्र स्थल को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त रखने में अपना सहयोग दे। सभी के सहयोग से इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहेगी तथा हमारा भविष्य भी प्रदूषण मुक्त होगा।

          उप मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि हमारा प्रयास हो कि यह संभागीय सरस मेला तथा पूरा भोरमदेव परिसर प्लास्टिक मुक्त हो। प्लास्टिक के स्थान पर वैकल्पिक रूप से कपड़े की अथवा जूट के बैक का इस्तेमाल किया जाए जो प्रकृति के अनुकूल हो। सभी दुकानदार एवं शिविर संचालक गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग रखने का प्रयास करें। कचरा केवल निर्धारित कचरा गाड़ी एवं कचरा पात्र में ही डालें। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया की वे घर से कपड़े का थैला, पानी की बोतल साथ लेकर आएं और खुले में कचरा न फेंकें।

        कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने उपस्थित ग्रामीणों, स्व-सहायता समूह की दीदियों, मितानिन बहनों एवं स्वच्छाग्रहियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के पालन हेतु स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। शपथ में सभी ने कचरा अलग-अलग करने, प्लास्टिक का उपयोग न करने एवं अपने गांव तथा भोरमदेव धाम को स्वच्छ बनाये रखने का संकल्प लिया। इस दौरान उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने कबीरधाम जिला को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ लेकर अपने जान पहचान वालों पड़ोस के लोगों एवं गांव के अन्य लोगों को इस कार्य के लिए जागरूक करने की बात कही।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की पहल से वनांचल के लमनी और खुड़िया में 20-20 लाख रुपए की लागत से बने आधुनिक प्रतीक्षालय शेड

 उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा की विशेष पहल पर पंचायत विभाग द्वारा सुदूर वनांचल के ग्राम लमनी और खुड़िया में 20-20 लाख रुपये की लागत से आधुनिक प्रतीक्षालय शेडों का निर्माण कराया गया है।श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए अमरकंटक से मां नर्मदा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर पदयात्रा करने वाले हजारों श्रद्धालुओं को इस वर्ष बड़ी राहत मिली है। वर्षों से वनांचल क्षेत्रों में विश्राम, पेयजल, प्रकाश और भोजन बनाने जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना करने वाले कांवड़ियों के लिए अब सुरक्षित और सुविधायुक्त विश्राम स्थल उपलब्ध हो गए हैं। 


          ये नवनिर्मित प्रतीक्षालय कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित पड़ाव के रूप में विकसित किए गए हैं। यहां रात्रि विश्राम, भोजन बनाने तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की अपेक्षा अधिक सुरक्षित, सुगम और सुविधाजनक हो सकेगी।

लमनी में पहला सुरक्षित पड़ाव, सोलर ऊर्जा से होगा रोशन

        ग्राम लमनी कांवड़ियों का पहला प्रमुख पड़ाव माना जाता है। अब तक यहां सीमित संसाधनों के बीच श्रद्धालुओं को खुले स्थानों पर रात्रि विश्राम करना पड़ता था। बरसात, अंधेरा और घने जंगलों के कारण यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं को देखते हुए लमनी बैरियर के समीप निर्मित नए प्रतीक्षालय शेड में सुरक्षित रात्रि विश्राम, भोजन बनाने तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। विशेष रूप से यहां सोलर ऊर्जा आधारित विद्युत व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे रात के समय पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध रहेगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा।  इसी प्रकार ग्राम खुड़िया में भी 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित प्रतीक्षालय शेड कांवड़ियों के लिए राहत का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। अब यात्रा के दौरान दोनों स्थान श्रद्धालुओं के प्रमुख विश्राम स्थलों के रूप में उपयोगी साबित होंगे।

वर्षों पुरानी समस्या का हुआ स्थायी समाधान

           कांवड़ यात्रा का मार्ग घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और दूरस्थ वनांचल ग्रामों से होकर गुजरता है। हजारों श्रद्धालु कई दिनों तक पैदल यात्रा कर भगवान शंकर के मंदिरों तक पहुंचते हैं। लंबे समय से इन मार्गों पर सुरक्षित रात्रि विश्राम और मूलभूत सुविधाओं की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई थी। श्रद्धालुओं की इस लंबे समय से चली आ रही आवश्यकता को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने पंचायत विभाग के माध्यम से लमनी और खुड़िया में आधुनिक प्रतीक्षालय शेडों का निर्माण सुनिश्चित कराया, जिससे वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो सका।

यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल सुविधाओं का भी प्रबंध

         उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रयास केवल प्रतीक्षालय निर्माण तक सीमित नहीं हैं। कांवड़ यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक स्तर पर अन्य व्यवस्थाएं भी सुदृढ़ की जा रही हैं। यात्रा के दौरान आकस्मिक स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार हेतु स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। मार्गों की मरम्मत और आवश्यक रिपेयरिंग कर यात्रा को सुरक्षित बनाया जा रहा है। साथ ही विभिन्न स्थानों पर पेयजल की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

भोलेनाथ के भक्तों की सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता – उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

          उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कहा कि श्रावण मास की कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और जनभावनाओं का महापर्व है। उन्होंने कहा कि भोलेनाथ के भक्तों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रतीक्षालयों का निर्माण, स्वास्थ्य शिविर, सड़क मरम्मत, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, ताकि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और सुविधा के साथ अपनी यात्रा पूर्ण कर सकें।

कांवड़ियों ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

       कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने कहा कि पहले वनांचल क्षेत्रों में रात्रि विश्राम के दौरान काफी परेशानियां होती थीं। बारिश और अंधेरे के बीच यात्रा करना तथा सुरक्षित स्थान पर रुकना बेहद कठिन होता था। लमनी और खुड़िया में बने नए प्रतीक्षालय शेडों से अब बड़ी राहत मिलेगी। रात्रि विश्राम, भोजन बनाने और प्रकाश जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और सुरक्षित हो गई है। श्रद्धालुओं ने इन जनहितकारी कार्यों के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन सुविधाओं का लाभ आने वाले वर्षों तक हजारों कांवड़ यात्रियों को मिलता रहेगा।
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प्रकृति के साथ संतुलन और जल संरक्षण भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक – राज्यपाल श्री डेका

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि मनुष्य, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के बीच संतुलन बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण आज गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को भी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से जल संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करने होंगे।


पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का देगा संदेश

           राज्यपाल श्री डेका ने आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा  पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन’के लिए आयोजित राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अभियान में शामिल ब्रह्माकुमारी बहनों एवं भाइयों को  झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 26 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक रायपुर से जबलपुर की यात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देगा।

वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली के लिए प्रेरित करना

          राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की यह पहल केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जन-जागृति का अभियान है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।  

घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर

        श्री डेका ने कहा कि प्रकृति हमारी मां के समान है और उसका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के निवासी सौभाग्यशाली हैं। यह प्राकृतिक संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां के घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर हैं। प्रदेश की जनजातीय संस्कृति भी सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। बदलते समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इसलिए यहां की हरियाली और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना आवश्यक है।

पर्यावरण प्रदूषण कम करने और इको फ्रेंडली तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन

       राज्यपाल ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की उपलब्धता भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ वर्षा जल संचयन और परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए इको फ्रेंडली व्यवस्थाओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देना होगा।

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना

       राज्यपाल ने माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव मां के दूध तक में दिखाई देना भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से समाज एवं समुदाय के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने पर जोर दिया।

आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम करना

         राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी, जागरूकता और प्रभावी आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धरती का बढ़ता तापमान, अनियमित मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं हमें प्रकृति के प्रति अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करने का संकेत दे रही हैं।

सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना

        श्री डेका ने कहा कि यह अभियान विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय का भी संदेश देता है। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। भौतिक प्रगति के साथ नैतिक एवं आध्यात्मिक चेतना भी आवश्यक है।

प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए

          राज्यपाल ने सभी नागरिकों से पानी की एक-एक बूंद बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करने और वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी संतान की तरह देखभाल करे। आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

         इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारी बहनें एवं भाई तथा अभियान से जुड़े सदस्य उपस्थित थे।
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"आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे" – प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार

 महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से राज्य में पोषण, बाल विकास एवं महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से आज सिविल लाइंस स्थित सर्किट हाउस में विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ राज्य स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई।


बैठक की अध्यक्षता करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने कहा कि महिलाओं और बच्चों का समग्र विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन द्वारा संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में उद्योगों की सामाजिक भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण तथा नवाचार आधारित गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने उद्योगों से विभाग के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान करते हुए कहा, "आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।"

महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने कहा कि विभाग तीन प्रमुख आयामों—महिला सशक्तिकरण, बच्चों का संरक्षण तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण—पर निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, पोषण संवर्धन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है।

बैठक में विभाग द्वारा तैयार की गई संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इसमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका एवं मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई।

बैठक के दौरान उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि व्यक्त करते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव साझा किए। यह निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल अधोसंरचना विकास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। विभाग इसके लिए उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समन्वय एवं समीक्षा की प्रभावी व्यवस्था विकसित करेगा।

उल्लेखनीय है कि सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 'पंखुड़ी' पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन द्वारा 'सर' (State CSR) पोर्टल का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और सीएसआर परियोजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
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महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

'नियद नेल्ला नार' से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।
उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की श्रीमती मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं श्रीमती सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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छत्तीसगढ़ पर्यटन विकास को मिलेगी नई गति, पर्यटन मंडल की 38 वीं संचालक मंडल बैठक में बनी रणनीति

 छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के संचालक मंडल की 38 वीं बैठक सोमवार को रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड मुख्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में पर्यटन क्षेत्र के समग्र विकास, वर्तमान योजनाओं की प्रगति, नई पर्यटन पहलों तथा आगामी गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में लिए गए निर्णयों को प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।


बैठक की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने की। इस अवसर पर पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन (भा.प्र.से.), छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य (भा.व.से.), अवर सचिव श्रीमती रुचि शर्मा, उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा, संस्कृति विभाग के संचालक श्री संजय कन्नौजे विभिन्न विभागों के शासकीय सदस्य तथा पर्यटन मंडल के विभिन्न शाखा प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण और हरित पहल के संकल्प के साथ हुई। प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा तथा पर्यटन सचिव डॉ. एस. भारतीदासन को पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। वहीं, उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा ने विभिन्न विभागों के शासकीय सदस्यों का पौधा भेंट कर स्वागत किया।

बैठक के दौरान पर्यटन मंडल द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। परियोजनाओं के समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन, पर्यटन अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार तथा प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों को और अधिक आकर्षक एवं सुविधायुक्त बनाने के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। साथ ही आगामी पर्यटन कार्यक्रमों, प्रचार-प्रसार गतिविधियों, निवेश संभावनाओं तथा पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक एवं जनजातीय पर्यटन संपदा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, पर्यटक अनुभव को बेहतर बनाने तथा स्थानीय समुदाय की सहभागिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा देने, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति प्रदान करने तथा भविष्य में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने की रणनीति पर सर्वसम्मति बनी। संचालक मंडल ने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से प्रदेश की पर्यटन पहचान और अधिक सशक्त होगी तथा छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत करेगा।
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निश्चय कार्यक्रम से आत्मनिर्भर बन रहीं महिला बंदी

 केंद्रीय जेल रायपुर में महिला बंदियों के सर्वांगीण सुधार और समाज की मुख्यधारा में उनके सम्मानजनक पुनर्वास के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की गई है। जेल प्रशासन द्वारा संचालित निश्चय कार्यक्रम के अंतर्गत महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे जेल के भीतर ही उनके रोजगार की राह आसान हुई है।


60 महिला बंदियों को मिला अचार और मसाला निर्माण का प्रशिक्षण

         केन्द्रीय जेल रायपुर में विभिन्न अपराधों के तहत बंद 60 महिला बंदियों को बेसिक ऑफ पिकल (अचार) एवं मसाला निर्माण के व्यावसायिक उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य महिला बंदियों को स्वयं की व्यावसायिक इकाई स्थापित करने के योग्य बनाना है।

         प्रशिक्षण के दौरान इन बंदियों को खाद्य उत्पादों के निर्माण और उनकी उत्तम गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग एवं सुरक्षित भंडारण से संबंधित व्यावहारिक जानकारियां दी गईं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिला बंदियों ने जेल के महिला प्रकोष्ठ में ही नियमित रूप से अचार का निर्माण शुरू कर दिया है।

आस्था गृह उद्योग के जरिए मिल रहा बाजार, आत्मनिर्भर बन रहीं बंदी

          महिला बंदियों द्वारा जेल के भीतर पूरी स्वच्छता के साथ आम, नींबू, गाजर और लहसुन जैसी विभिन्न वैरायटियों के स्वादिष्ट और हाइजीनिक अचार तैयार किए जा रहे हैं। इन गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था की गई है। तैयार उत्पादों को केंद्रीय जेल परिसर स्थित आस्था मुंगोडी सेंटर (आस्था गृह उद्योग स्टॉल) और जेल कैंटीन के माध्यम से आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। इस बिक्री से होने वाली आय का एक हिस्सा सीधे इन महिला बंदियों के खातों में जमा किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं।

जेल सकारात्मक परिवर्तन का केंद्र- जेल अधीक्षक

         इस सराहनीय पहल को लेकर केंद्रीय जेल रायपुर के अधीक्षक श्री योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि जेल केवल दंड देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी एक केंद्र है। जेल महानिदेशक श्री हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में जेलों में चलाए जा रहे निश्चय कार्यक्रम के माध्यम से महिला बंदियों को रोजगारपरक कौशल प्रदान किए जा रहे हैं। यह कौशल उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रिहाई के बाद समाज में सम्मानपूर्वक जीने और आजीविका अर्जित करने में सहायक सिद्ध होगा। जेल प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बंदियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस प्रकार के रोजगारपरक प्रशिक्षण कार्यक्रम आगे भी निरंतर संचालित किए जाते रहेंगे।
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छत्तीसगढ़ विधानसभा उत्कृष्ट कार्य संस्कृति और स्वस्थ संसदीय परंपरा का जीवंत उदाहरण : राज्यपाल श्री रमेन डेका

 छत्तीसगढ़ विधानसभा ने अपने गठन के बाद से लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय गरिमा और अनुशासन की ऐसी उत्कृष्ट परंपराएं विकसित की हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना होती है। यह प्रसन्नता का विषय है कि 1 नवंबर 2025 को यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा नवीन विधानसभा भवन का लोकार्पण किया गया था और आज उसी परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण राज्यपाल श्री रमेन डेका के करकमलों से संपन्न हुआ है। यह विधानसभा की संस्थागत क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित प्रेक्षागृह में आज उत्कृष्टता अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  


लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और उत्कृष्ट जनप्रतिनिधित्व को सम्मानित करने के उद्देश्य से आयोजित इस गरिमामयी समारोह में राज्यपाल श्री रमेन डेका ने विधानसभा परिसर में नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण किया।  

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट संसदीय कार्य के लिए बिल्हा विधायक श्री धरमलाल कौशिक तथा अकलतरा विधायक श्री राघवेंद्र कुमार सिंह को उत्कृष्ट विधायक अलंकरण से सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए दैनिक पत्रिका के संवाददाता श्री संतराम साहू को उत्कृष्ट संसदीय पत्रकार अलंकरण तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के लिए आईबीसी-24 के श्री सौरभ सिंह परिहार एवं डॉ. राजेश राज को उत्कृष्ट इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रिपोर्टर अलंकरण प्रदान किया गया।

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा लोकसेवा का वह केन्द्र है जहां जनसेवक संसदीय सदन में लोक कल्याण का पावन अनुष्ठान संपादित करते हैं और इसलिए लोकतंत्र में संसदीय सदन को मंदिर की संज्ञा दी गयी है और इस मंदिर की प्रतिष्ठा सभी सदस्यों के आचरण व्यवहार और विचार पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की गणना देश की श्रेष्ठ विधानसभाओं के उदाहरण के रूप में होती है। इस विधानसभा में पक्ष-प्रतिपक्ष के मध्य जो समन्वय है, सामन्जस्य है, और समादर का भाव है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।

राज्यपाल श्री डेका ने अपने संबोधन में सभी सम्मानित जनप्रतिनिधियों एवं पत्रकारों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोकतंत्र के इस मंदिर में जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे जनता के प्रति उत्तरदायी रहते हुए समर्पण भाव से कार्य करें। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि सभी प्रतिनिधि मिलकर प्रदेश के विकास के लिए कार्य करें, तभी राज्य निरंतर प्रगति करेगा। उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से संवाद, स्वच्छता अभियान में सहभागिता तथा समाज के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने का भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा देश की पहली और एकमात्र ऐसी विधानसभा है, जहां गर्भगृह में किसी विधायक के प्रवेश करते ही वे स्वतः निलंबित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि आत्मानुशासन, संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है। ऐसी विशिष्ट संसदीय परंपराओं ने छत्तीसगढ़ विधानसभा को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने लोकतंत्र में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को जनता से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक विमर्श को निष्पक्ष एवं तथ्यपरक ढंग से जनता तक पहुँचाने में संसदीय पत्रकारों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सम्मानित पत्रकारों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी निष्पक्ष एवं जिम्मेदार पत्रकारिता लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सम्मानित विधायकों की सराहना करते हुए कहा कि श्री धरमलाल कौशिक का सार्वजनिक जीवन अत्यंत समृद्ध और अनुभवपूर्ण रहा है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए संसदीय परंपराओं को समृद्ध किया है। वहीं श्री राघवेंद्र कुमार सिंह ने प्रथम बार विधायक निर्वाचित होने के बावजूद सदन में तथ्यपूर्ण, अध्ययनशील एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात रखकर एक सकारात्मक पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि दोनों जनप्रतिनिधियों का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों और उत्कृष्ट संसदीय आचरण के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि नवीन विधानसभा भवन के लोकार्पण के बाद आज नवनिर्मित प्रेक्षागृह का लोकार्पण विधानसभा के विकास की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की षष्ठम विधानसभा अपने कार्यकाल में उत्कृष्ट संसदीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सदैव स्मरणीय रहेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पक्ष और प्रतिपक्ष राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रदेशहित के विषयों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा करते हैं। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि उत्कृष्टता अलंकरण केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का सम्मान नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपराओं को प्रोत्साहित करने का माध्यम भी है। ऐसे सम्मान जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक उत्तरदायी तथा उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित करते हैं।

समारोह के सांस्कृतिक आयोजन में देश के प्रख्यात भजन गायक श्री अनूप जलोटा ने अपने लोकप्रिय भजनों की मनोहारी प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। उनकी मधुर एवं भावपूर्ण प्रस्तुति ने पूरे प्रेक्षागृह को आध्यात्मिक वातावरण से अनुप्राणित कर दिया और कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप, नेता प्रतिपक्ष श्री चरणदास महंत, विधायकगण, विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा,  वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, पत्रकार तथा विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ की मनोहारी पर्यटन छटा से अभिभूत हुए, पूर्व पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार

 भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की पूर्व महानिदेशक श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ का विस्तृत भ्रमण कर प्रदेश के पर्यटन वैभव, प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और आत्मीय आतिथ्य की मुक्त कंठ से सराहना की। अपनी 14 दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों का अवलोकन किया और कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा पर्यटन गंतव्य है, जहां प्रकृति, संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिकता और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह प्रदेश देश के प्रत्येक पर्यटक की यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।


उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भारत के पर्यटन क्षेत्र में कार्य करने के बावजूद उन्हें पहली बार पर्यटक के रूप में छत्तीसगढ़ आने का अवसर मिला और यह यात्रा उनके लिए अत्यंत सुखद एवं अविस्मरणीय रही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने उन्हें सकारात्मक रूप से आश्चर्यचकित किया। यहां की प्राकृतिक संपदा, घने वन, विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय लोगों का आत्मीय व्यवहार इसे देश के सबसे विशिष्ट पर्यटन राज्यों में स्थान दिलाता है।

श्रीमती शर्मा ने अपनी यात्रा की शुरुआत रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन एवं जनजातीय संग्रहालय से की, जहां उन्होंने प्रदेश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को निकट से देखा। इसके बाद उन्होंने कबीरधाम जिले के प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल, छेरकी महल तथा आसपास के वन क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक परिवेश में स्थित भोरमदेव परिसर भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत का अनुपम उदाहरण है।

यात्रा के अगले चरण में उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे  अमरकंटक पहुंचकर मां नर्मदा उद्गम स्थल, सायंकालीन आरती, कलचुरीकालीन मंदिर समूह, दूधधारा एवं कपिलधारा जलप्रपात, राजमेरगढ़, कबीर चबूतरा तथा जैन मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने इस क्षेत्र को आध्यात्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन का अद्वितीय संगम बताया। वापसी के दौरान उन्होंने रतनपुर स्थित मां महामाया शक्तिपीठ में दर्शन कर प्रदेश की समृद्ध धार्मिक परंपराओं का अनुभव प्राप्त किया।

बस्तर प्रवास के दौरान श्रीमती शर्मा ने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात, टाटामारी घाटी, कोंडागांव शिल्प ग्राम, नारायणपाल मंदिर, मेंदरी घुमर एवं तामड़ा घुमर जलप्रपात का भ्रमण किया तथा चित्रकोट में नौकायन का आनंद भी लिया। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय कला विश्व पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की क्षमता रखती है।

उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन मंदिरों के नगर बारसूर, जगदलपुर पुरातत्व संग्रहालय, बस्तर राजमहल तथा स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों का भी अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर की ढोकरा कला, बेलमेटल शिल्प, बांस एवं लकड़ी की कलाकृतियों को स्थानीय संस्कृति की जीवंत पहचान बताते हुए कहा कि यहां का हस्तशिल्प विश्व स्तर पर विशेष पहचान बनाने की क्षमता रखता है।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में उन्होंने तीरथगढ़ जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, धुड़मारास, बांस राफ्टिंग तथा केचला क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति और साहसिक पर्यटन के प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र किसी स्वर्ग से कम नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा के जैपुर, कोलाब बांध, जगन्नाथ मंदिर, कोरापुट कॉफी प्लांटेशन, देओमाली पर्वत, दुदमा जलप्रपात, बोंडा जनजातीय बाजार तथा कोटपाड़ बुनकर ग्राम का भी भ्रमण किया, जिससे बस्तर और कोरापुट क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को निकट से समझने का अवसर मिला।

अपने अनुभव साझा करते हुए श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि पर्यटन केवल किसी स्थान को देखने का माध्यम नहीं, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपराओं और लोगों से जुड़ने का अवसर भी होता है। इस दृष्टि से छत्तीसगढ़ अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहां आने वाला पर्यटक भीड़भाड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून, आध्यात्मिक शांति और जनजातीय जीवन की मौलिकता का वास्तविक अनुभव प्राप्त करता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यदि यहां के विशिष्ट और अपेक्षाकृत कम चर्चित पर्यटन स्थलों का राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह राज्य देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकता है। उन्होंने प्रदेश में विकसित हो रही पर्यटन अधोसंरचना, स्थानीय समुदाय की सहभागिता तथा पर्यटकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की भी सराहना की।

श्रीमती मीनाक्षी शर्मा ने देश-विदेश के पर्यटकों से छत्तीसगढ़ आने का आग्रह करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति एक बार छत्तीसगढ़ आएगा, वह यहां की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राचीन धरोहरों, जनजातीय जीवन, आत्मीय आतिथ्य और अविस्मरणीय अनुभवों की यादें हमेशा अपने साथ लेकर जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ अपनी मौलिक पहचान, अद्वितीय पर्यटन संसाधनों और सतत पर्यटन विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों के बल पर आने वाले वर्षों में भारत के सर्वाधिक आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
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'एक पेड़ मां के नाम' अभियान 3.0, विधानसभा परिसर में सीएम श्री विष्णु देव साय और डॉ. रमन सिंह ने लगाया रुद्राक्ष का पौधा

 छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान आज विधानसभा परिसर हरियाली, जनभागीदारी और मातृ सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया। 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान के अंतर्गत आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप सहित विधानसभा के सभी सदस्यों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दोहराया। यह संकल्प केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के संरक्षण, मातृत्व के सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं हरित भविष्य के निर्माण का सामूहिक संकल्प बनकर उभरा। कार्यक्रम के दौरान सभी जनप्रतिनिधियों ने अभियान के लिए तैयार विशेष सेल्फी प्वाइंट पर तस्वीरें भी खिंचवाईं तथा प्रदेशवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।

 


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान आज पूरे देश में जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। यह अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मां के प्रति कृतज्ञता, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर पौधा लगाता है तो उस पौधे के साथ उसका भावनात्मक रिश्ता भी जुड़ जाता है और वह उसके संरक्षण के लिए स्वयं प्रेरित होता है। यही भाव इस अभियान को स्थायी, प्रभावी और जनभागीदारी आधारित बनाता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में विधायकों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधारोपण किया जाना अत्यंत प्रेरणादायी पहल है। विधानसभा परिसर से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई जागरूकता उत्पन्न करेगा। उन्होंने इस अभिनव आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल समाज में वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा, बढ़ते तापमान और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण केवल पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के संतुलन के आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु, जल संरक्षण, जैव विविधता का संरक्षण और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी उसी आत्मीयता से करनी चाहिए, जिस भाव से वह अपने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश में वन संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जल संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा जनभागीदारी आधारित पर्यावरणीय अभियानों को निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 'एक पेड़ मां के नाम 3.0' अभियान प्रदेश के गांव-गांव, शहर-शहर और प्रत्येक परिवार तक पहुंचेगा तथा प्रकृति संरक्षण को सामाजिक दायित्व और जन आंदोलन का स्वरूप प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में उत्कृष्ट मॉडल बन सकता है।

कार्यक्रम में विधानसभा के सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी माताओं के नाम पर विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण का संकल्प लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग श्री मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री अरुण पाण्डेय सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
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ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर कोलकाता-2026 में ‘बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस’ सम्मान से बढ़ी प्रदेश की प्रतिष्ठा

ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।


10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।

आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।

मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।

आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री श्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने कहा कि पर्यटन बोर्ड राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ-2026 में मिली सफलता और राष्ट्रीय सम्मान राज्य के पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है तथा इससे छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के अभियान को नई गति मिलेगी।

टीटीएफ कोलकाता-2026 में प्राप्त “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, जनजातीय विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन विकास की संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सशक्त पहचान का प्रतीक है। यह उपलब्धि आने वाले समय में राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने, निवेश आकर्षित करने तथा देश-विदेश के अधिकाधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विधानसभा में दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
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मानसून में भी पर्यटन का आनंद: बारनावापारा अभयारण्य 31 अक्टूबर तक बंद

 वन्यजीवों की सुरक्षा और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने के लिए बारनावापारा वन्यजीव अभयारण्य 1 जुलाई से 31 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। हर वर्ष मानसून के दौरान वन्यजीवों के प्रजनन काल को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया जाता है।

हालांकि, इस दौरान पर्यटकों को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ने के लिए बलौदाबाजार वनमंडल ने "बारनावापारा–सिरपुर पर्यटन सर्किट : द सेक्रेड गारलैंड" की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से राजधानी रायपुर के आसपास स्थित प्राकृतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक पर्यटन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।
इस पर्यटन सर्किट में सिरपुर, धसकुंड जलप्रपात, तुरतुरिया ईको कल्चरल सेंटर, गिरौदपुरी धाम, सिद्धखोल जलप्रपात, सोनाखान, शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक, देवपुर नेचर कैंप, अचानकपुर का देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, कोडार जलाशय सहित कई प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं। यहां पर्यटक हरियाली, झरनों, पहाड़ियों, वन क्षेत्र, धार्मिक स्थलों, पुरातात्विक धरोहरों और जनजातीय संस्कृति का अनूठा अनुभव प्राप्त कर सकेंगे।
मानसून के मौसम में पूरा क्षेत्र हरियाली से भर जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक सुंदरता और भी बढ़ जाती है। देवपुर नेचर कैंप, देव हिल्स ईको एथनिक स्टे, सिद्धखोल जलप्रपात, तुरतुरिया धाम, धामनी ईको विलेज, धसकुंड फॉल और सिरपुर इस मौसम के प्रमुख आकर्षण होंगे।
इस पर्यटन सर्किट को देशभर में पहचान दिलाने के लिए टूर ऑपरेटरों, ट्रैवल एजेंसियों, ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स और नेचर फोटोग्राफर्स को भी जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य जिम्मेदार और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना है।
वनमंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर ने बताया कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार यह पहल प्रकृति, संस्कृति, विरासत और स्थानीय समुदायों को एक मंच पर लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि अभयारण्य बंद रहने के दौरान भी पर्यटक बारनावापारा–सिरपुर बफर क्षेत्रों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों का आनंद ले सकेंगे। साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाकर सतत पर्यटन और रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
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हरी खाद से संवर रही खेतों की सेहत, प्राकृतिक खेती की मिसाल बने किसान नरेंद्र सिंह

  छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद के उपयोग हेतु लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी पहल का सकारात्मक परिणाम सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगंवा में देखने को मिला है, जहां प्रगतिशील किसान श्री नरेंद्र सिंह ने लगभग चार एकड़ भूमि में ढैंचा की फसल उगाकर उसे खेत में पलट दिया है। अब वे इसी खेत में धान की खेती करेंगे।


किसान श्री नरेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वराशक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से ढैंचा की खेती अपनाई। उन्होंने बताया कि फूल आने से पहले ढैंचा को खेत में पलट देने पर यह कुछ ही दिनों में सड़कर प्राकृतिक जैविक खाद में परिवर्तित हो जाती है। इससे मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है और फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा जैसी दलहनी हरी खाद वाली फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी को प्राकृतिक रूप से समृद्ध बनाती हैं। इसके साथ ही फास्फोरस, जिंक एवं आयरन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता भी बढ़ती है, जिससे आगामी फसल का विकास बेहतर होता है।

हरी खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में उल्लेखनीय सुधार होता है। ढैंचा के अपघटन से बनने वाला ह्यूमस मिट्टी को भुरभुरा बनाता है, जिससे उसमें हवा और पानी का बेहतर संचार होता है। इससे जड़ों का विकास मजबूत होता है और फसल अधिक स्वस्थ एवं उत्पादक बनती है। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता भी बढ़ती है, जिससे नमी लंबे समय तक बनी रहती है और सिंचाई की आवश्यकता कम होती है। ढैंचा की सघन बढ़वार खरपतवारों की वृद्धि को भी प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती है।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई से पहले ढैंचा, सनई अथवा अन्य हरी खाद वाली फसलों का उपयोग करें। इससे रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च कम होगा, मिट्टी की दीर्घकालीन उर्वरता बनी रहेगी और टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल तथा लाभकारी कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
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