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ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) ने समावेशी ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार के साथ की साझेदारी

 छठे 'इंडिया रूरल कोलोक्वी' (भारत ग्रामीण संगोष्ठी) के छत्तीसगढ़ चैप्टर की शुरुआत इस ज़ोरदार अपील के साथ हुई कि छोटे किसानों और महिलाओं के नेतृत्व वाले संस्थानों को ग्रामीण बदलाव की नींव के तौर पर पहचाना जाए। टीआरआई और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच यह सहयोग पूरे राज्य में समावेशी और सामुदायिक नेतृत्व में होने वाले ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।


रायपुर में गोष्ठी का उ‌द्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री के सचिव और 'गुड गवर्नेस एंड कन्वर्जेस' विभाग के सचिव, राहुल भगत ने कहा, "छोटे किसान और स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्रामीण बदलाव की असली प्रेरक हैं। पहला कदम उठाने का उनका साहस असंख्य लोगों को बदलाव लाने वाला (चेंजमेकर) बनने के लिए प्रेरित करता है।"

इस चर्चा में नया रायपुर के ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं, नागरिक समाज संगठनों और विकास कार्यों से जुड़े लोगों को एक साथ लाने का काम किया गया। इससे पता चला कि कैसे मज़बूत ज़मीनी नेतृत्व, जवाबदेह संस्थान और सामुदायिक ज्ञान मिलकर ग्रामीण छत्तीसगढ़ के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान 'ग्रीन इकोनॉमिक पाथवेज़ - छत्तीसगढ़' स्टडी रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें जलवायु-अनुकूल और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था निर्माण के तरीकों पर प्रकाश डाला गया।

मुख्य भाषण देते हुए, प‌द्मश्री पुरस्कार विजेता श्री बुद्री थाती ने स्थानीय समुदायों और प्रकृति के बीच तालमेल को फिर से स्थापित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "जहाँ कभी बदलाव मुश्किल लगता था, वहाँ प्यार और सच्ची कोशिशों से बदलाव आया। हर इंसान प्यार चाहता है और उन्हें बस ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत होती है जो उन्हें सच में समझे।"

मजबूत स्थानीय संस्थानों के महत्व पर बात करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टिकाऊ ग्रामीण विकास ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, "हर सरकारी योजना का असली क्रियान्वयन गांव के स्तर पर होता है। अगर गाँव के संस्थान मजबूत नहीं होंगे, तो विकास की गति सीमित ही रहेगी।"

वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए, यह लैंगिक समानता पर केंद्रित अपने दृष्टिकोण को और मजबूत कर रहा है तथा समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडलों का विस्तार कर ग्रामीण भारत में समान और सतत विकास को आगे बढ़ा रहा है।

इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, टीआरआई ने 'विकसित छत्तीसगढ़ के लिए जमीनी नेतृत्व' विषय पर भारत ग्रामीण संगोष्ठी के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। नीति-निर्माताओं, विचारकों और जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों ने इस बात पर अपने विचार साझा किए कि ग्रामीण बदलाव की अगली पीढ़ी का नेतृत्व कौन करेगा। इसमें यह भी चर्चा की गई कि सार्वजनिक संस्थान समुदायों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां कैसे तैयार कर सकते हैं।

इस गोष्ठी का एक मुख्य आकर्षण 'ग्राम संवादः ग्रामीण भारत का भविष्य गढ़ते समुदाय' था। यह अपनी तरह की पहली चर्चा थी जिसमें नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में समुदाय की आवाज़ को रखा गया। महिला लीडर्स, प्रगतिशील किसानों, चुने हुए प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के संस्थानों ने आजीविका बेहतर बनाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और एक सशक्त समुदाय बनाने को ले कर अपने अनुभव साझा किए। साथ ही, उन्होंने असल जीवन की सच्चाइयों पर आधारित व्यावहारिक समाधान भी पेश किए। इन जानकारियों के आधार पर, 'समाधान मंथन पॉलिसी इनोवेशन लैब' ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की टीमों को एक साथ लाकर सामुदायिक ज्ञान से प्रेरित नीतिगत प्रस्ताव तैयार किए। इन विचारों को सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदाय के प्रतिनिधियों की एक प्रतिष्ठित जूरी के समक्ष रखा गया। इससे यह पता चला कि जमीनी स्तर के अनुभव किस तरह बड़े पैमाने पर लागू होने वाली सार्वजनिक नीति-निर्माण और ग्रामीण बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ संवाद में राज्य के ग्रामीण भविष्य को आकार देने में सामुदायिक नेतृत्व की शक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान मजबूत स्थानीय शासन, उत्तरदायी सार्वजनिक संस्थाओं, समुदाय-आधारित नीतिगत समाधानों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी पर चर्चा की गई। साथ ही, जमीनी स्तर के ज्ञान को समावेशी ग्रामीण परिवर्तन के लिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले तरीकों में बदलने पर भी जोर दिया गया।

राहुल हीरेमठ, प्रोफेसर, आईआईएम रायपुर, सत्य लता मिरी, अध्यक्ष, जिला परिषद, जांजगीर चांपा, हिना अनिमेष नेताम, निदेशक, जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेनका चंद्राकर, उपायुक्त, जनजातीय विभाग, अश्विनी देवांगन, मिशन निदेशक, एसआरएलएम, डॉ. संजीव पाराशर, प्रभारी निदेशक, आईआईएम रायपुर ने भी विभिन्न सत्रों के दौरान अपना संबोधन दिया।

भारत ग्रामीण संगोष्ठी के बारे में:

ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) का प्रमुख आयोजन भारत ग्रामीण संगोष्ठी वर्ष 2026 में अपने छठे संस्करण के साथ वापस आ रहा है। एक वर्चुअल श्रृंखला के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज एक राष्ट्रीय, बहुराज्यीय मंच बन चुका है, जो नीति-निर्माताओं, उ‌द्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों को एक साथ लाकर ग्रामीण भारत के लिए नए विचारों और ठोस कार्य योजनाओं पर चर्चा करता है। इस वर्ष आठ दिनों तक चलने वाली यह संगोष्ठी असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें आजीविका, सुशासन, जलवायु अनुकूलता, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इन विचार-विमर्शों से प्राप्त सुझावों को ग्रामीण भारत के समृद्ध भविष्य के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाओं में बदला जाएगा।
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“दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पहल से यात्री सेवाएँ हुईं और अधिक डिजिटल एवं सुगम”

 भारतीय रेल की डिजिटल परिवर्तन (डिजिटल ट्रांसफार्मेशन) पहल तथा भारत सरकार के डिजिटल इंडिया मिशन के अनुरूप दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे यात्रियों को आधुनिक, तेज, पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) आधारित व्यवस्थाओं का निरंतर विस्तार कर रहा है। डिजिटल टिकटिंग, कैशलेस भुगतान एवं ऑनलाइन सेवाओं के माध्यम से रेलवे यात्रा को अधिक सरल, सुरक्षित एवं सहज बनाया जा रहा है।


यात्रियों को त्वरित एवं सुविधाजनक टिकट बुकिंग सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के 56 स्टेशनों पर 120 ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) तथा 12 स्टेशनों पर 26 मोबाइल यूटीएस (एम-यूटीएस) प्रणाली संचालित की जा रही है। डिजिटल टिकटिंग में एटीवीएम सबसे लोकप्रिय माध्यम बनकर उभरा है, जिसके माध्यम से कुल डिजिटल टिकटों का 37.07 प्रतिशत टिकट जारी किए जा रहे हैं।

रेल टिकटिंग सेवाओं की पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 19 यात्री टिकट सुविधा केंद्र (वाईटीएसके) तथा 4 जन टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों को अपने निकट ही टिकट बुकिंग की सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में डिजिटल भुगतान को भी व्यापक रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है। पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (पीआरएस) के माध्यम से डिजिटल भुगतान का प्रतिशत वर्ष 2021-22 के 1.58 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2026 तक 41.61 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार एटीवीएम के माध्यम से 19.67 प्रतिशत, यूटीएस के माध्यम से 11.34 प्रतिशत तथा स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट (एसटीबीए) के माध्यम से 10.49 प्रतिशत भुगतान डिजिटल माध्यमों से किए जा रहे हैं। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि यात्री अब यूपीआई, क्यूआर कोड तथा अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों को तेजी से अपना रहे हैं।

तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित एवं परेशानी-मुक्त बनाने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 25 जुलाई 2026 से बिलासपुर आरक्षण कार्यालय में सेल्फ-डिस्पेंसिंग पेपरलेस टोकन सिस्टम की शुरुआत की है। इस व्यवस्था से टोकन वितरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित हुई है, भीड़भाड़ में कमी आई है तथा यात्रियों को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा मिल रही है।

भारतीय रेल द्वारा विकसित रेलवन ऐप भी यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से टिकट बुकिंग, ट्रेन संबंधी जानकारी तथा रेल मदद जैसी सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे भविष्य में भी डिजिटल टिकटिंग, कैशलेस भुगतान तथा आईटी आधारित यात्री सेवाओं का निरंतर विस्तार करते हुए यात्रियों को तेज, पारदर्शी, सुरक्षित एवं विश्वस्तरीय रेल सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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"नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने संबंधी विषय पर 2 अगस्त को रायपुर में होगी राज्य स्तरीय कार्यशाला

 न्याय व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अधिक सशक्त, सरल, सुगम एवं पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से आगामी 2 अगस्त 2026 को रायपुर स्थित होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल, वीआईपी रोड में "नवीन आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाना" विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीकों के समावेश के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को अधिक दक्ष, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।


         कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा करेंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेन्द्र यादव तथा न्यायमूर्ति श्री चंद्रवंशी की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर के अन्य न्यायाधीशगण भी कार्यक्रम में सहभागी होंगे।

        राज्य स्तरीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य की न्यायिक सेवा के अधिकारीगण, सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक सहित पुलिस एवं न्यायिक तंत्र के वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे। कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ नवीन तकनीकों के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है।

          कार्यशाला के दौरान अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (सीसीटीएनएस), डिजिटल न्यायिक समन्वय, नवीन आपराधिक कानूनों के अंतर्गत तकनीकी एकीकरण तथा न्याय एवं पुलिस व्यवस्था के डिजिटलीकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श किया जाएगा। इन विषयों के संबंध में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) एवं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वरिष्ठ अधिकारी विषय विशेषज्ञ के रूप में तकनीकी प्रशिक्षण एवं विस्तृत प्रस्तुतीकरण देंगे।

        यह राज्य स्तरीय कार्यशाला न्यायपालिका, पुलिस एवं अभियोजन तंत्र के मध्य समन्वित डिजिटल व्यवस्था को सुदृढ़ करने, नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से नागरिकों को त्वरित, सुलभ, पारदर्शी एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव की पहल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री से पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का किया आग्रह

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे चावल के परिवहन में तेजी आएगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया और अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।


मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय पूल के लिए 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। चावल के समयबद्ध उठाव को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने राज्य को हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री के आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे।
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PMGSY-IV में 10 किमी क्लस्टर की विशेष व्यवस्था का प्रस्ताव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया सकारात्मक आश्वासन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY-IV) में विशेष प्रावधान करने का आग्रह किया। बैठक में प्रदेश के गृह मंत्री श्री विजय शर्मा, भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह भी उपस्थित थे। इस दौरान गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने बस्तर सहित प्रदेश में ग्रामीण विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और राज्य सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के अनेक गांव घने जंगलों, पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत केवल 500 मीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाता है। इस व्यवस्था के कारण बस्तर के अनेक छोटे और दूरस्थ गांव सड़क सुविधा से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने आग्रह किया कि अरुणाचल प्रदेश की तरह बस्तर में भी 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर मानने की विशेष अनुमति दी जाए, ताकि अधिक से अधिक गांवों को सड़क संपर्क से जोड़ा जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब नक्सलवाद के दौर से निकलकर तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में बेहतर सड़क संपर्क क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि विकास, सुरक्षा और समृद्धि की आधारशिला हैं। इसलिए बस्तर की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जानी चाहिए।

केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को गंभीरता से सुना और इस पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बस्तर जैसे दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रही है और राज्य सरकार के प्रस्ताव पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीरामजी योजना के तहत मुक्तिधाम और शौचालय निर्माण जैसे कार्य प्रभावी ढंग से हो रहे हैं। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के बेहतर क्रियान्वयन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिदिन लगभग 1,500 आवासों का निर्माण एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में विकास कार्य और अधिक गति से आगे बढ़ेंगे।
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प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना  का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

5,542 गांवों तक पहुंच रहा विकास, लगभग 39 लाख लोगों को लाभ

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष ‘बस्तर विजन’ की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्त मुन्ने’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं और सेवाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार, प्रधानमंत्री आवास सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ और पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे गांवों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने से शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

421 बंद स्कूल फिर खुले, ओरछा और जगरगुंडा में बनेंगी एजुकेशन सिटी

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में कभी बच्चों के लिए नियमित शिक्षा तक पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू हुई है।

उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के अंतर्गत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में चिकित्सा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेजों और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के स्थायी विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दृष्टि से सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। इस रेल संपर्क से बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण की प्रगति तथा इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।

बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के लिए अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के संरक्षण के साथ किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने दिया बदलाव का संदेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला है और शांति, विश्वास तथा सामाजिक सहभागिता को भी मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की नई पहचान खेल, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, उद्यमिता और विकास से निर्मित हो रही है।

छत्तीसगढ़ को मिले लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें अनेक परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधता आने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी निर्मित होंगे।

निवेश अनुकूल वातावरण में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।
उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026’ की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य ने उद्योगों और उद्यमियों के लिए जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे निवेशकों को निश्चितता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था मिल रही है।

10.42 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर राज्य सरकार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन से तकनीक आधारित सुशासन की ओर छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शासन की सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

वित्तीय अनुशासन के साथ जनकल्याण, राजस्व वृद्धि में छत्तीसगढ़ का मजबूत प्रदर्शन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और राजस्व वृद्धि से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। राज्य में जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

तकनीक और पारदर्शिता से नागरिक-केंद्रित सुशासन को नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में निरंतर सुधार कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व प्रशासन में व्यापक डिजिटल सुधार करते हुए रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य शासन को नागरिकों के और निकट लाना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के समग्र कायाकल्प से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े राज्य के इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को शांति, समृद्धि और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।
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केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुख्यमंत्री श्री साय ने की मुलाकात, प्रदेश में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ, जनजातीय, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 नए मोबाइल टावरों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प को छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी आज केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तक सहज पहुंच मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के अनेक दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण संचार नेटवर्क का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में 2,305 नए मोबाइल टावरों की स्थापना डिजिटल समावेशन की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उन गांवों और बसाहटों तक भी विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क पहुंचेगा, जो अब तक पर्याप्त संचार सुविधाओं से वंचित रहे हैं।

577 अतिरिक्त टावरों की स्वीकृति से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री श्री साय ने नक्सल प्रभावित रहे एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से बस्तर सहित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है, वहां मजबूत संचार नेटवर्क विकास की गति को और तेज करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत होगा, आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क सुगम होगा और शासन की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लोगों को अपने गांव के निकट ही प्राप्त हो सकेगा।

489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को एनओसी जारी

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वीकृत मोबाइल टावरों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है। कुल 577 स्थानों में से अब तक 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं। शेष 88 स्थानों के लिए भी आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है और शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर आवश्यक अनुमति और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावरों की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य शासन संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रहा है, ताकि टावरों की स्थापना में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।

डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी शिक्षा और स्वास्थ्य की नई ताकत

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत होने से विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और डिजिटल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। इसी प्रकार टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से अधिक आसानी से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने कहा कि मजबूत नेटवर्क से बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों, आवेदनों और अन्य ऑनलाइन शासकीय सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर नहीं जाना पड़ेगा। इस प्रकार डिजिटल कनेक्टिविटी शासन को नागरिकों के और करीब लाने का माध्यम बनेगी।

शांति के साथ विकास और अब डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा बस्तर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ अब डिजिटल कनेक्टिविटी को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। वर्षों तक भौगोलिक कठिनाइयों और अन्य चुनौतियों के कारण संचार सुविधाओं से वंचित रहे गांवों को मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना वहां के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी। ग्रामीण उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों के लिए डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान होगी तथा किसानों को मौसम, कृषि तकनीक और बाजार से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि तकनीक का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि सुदूर वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 मोबाइल टावरों को स्वीकृति मिलने से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को बड़ी गति मिलेगी।
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‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात : मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।


कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। 

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

 इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष श्री राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।
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रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

 रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज वर्चुअल माध्यम से रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस की पहली सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही रामनगर और देहरादून को जोड़ने वाली पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत हुई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस अवसर पर उपस्थित हुए। यह नई ट्रेन इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा किया है और यह उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को काफी मजबूत करेगी।


एक्सप्रेस ट्रेन हर बुधवार और शुक्रवार को चलेगी। ट्रेन संख्या 15310 रामनगर से सुबह 5:50 बजे प्रस्थान करेगी और दोपहर 12:40 बजे देहरादून पहुंचेगी। वापसी यात्रा में, ट्रेन संख्या 15309 देहरादून से दोपहर 15:55 बजे प्रस्थान करेगी और रात 23:30 बजे रामनगर पहुंचेगी। यह ट्रेन रास्ते में काशीपुर, रोशनपुर, पिपल्सना, मुरादाबाद, नजीबाबाद और हरिद्वार स्टेशनों पर रुकेगी।

इस ट्रेन में एसी सेकंड क्लास, एसी थर्ड क्लास, एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास, सेकंड सिटिंग और जनरल सेकंड क्लास के कोच होंगे, जो विभिन्न श्रेणियों के यात्रियों के लिए आरामदायक यात्रा विकल्प प्रदान करेंगे।

यह नई सेवा उत्तराखंड के नैनीताल, उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और बिजनौर जिलों के निवासियों को लाभ पहुंचाएगी, जिनमें छात्र, किसान, व्यापारी और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे देहरादून और हरिद्वार के लिए सुविधाजनक एक ही दिन में कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्री घर लौटने से पहले अपने आधिकारिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक और व्यक्तिगत कार्यों को पूरा कर सकेंगे।

इस ट्रेन से क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थयात्रा को बढ़ावा मिलने की भी आशा है। इससे जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान, रामनगर के पास कोसी नदी के बीच एक विशाल चट्टान पर स्थित गिरिजा देवी मंदिर और सीतामढ़ी/सीतावनी के प्राचीन धार्मिक स्थलों तक उत्तम कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा, हरिद्वार और देहरादून से आगे की कनेक्टिविटी के माध्यम से यात्रियों को बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनात्री सहित चार धाम तीर्थयात्रा मार्ग तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा।

श्री वैष्णव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस उत्तराखंड के कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों के बीच रेल संपर्क को मजबूत करेगी। यह दोनों शहरों के बीच चलने वाली पहली सीधी एक्सप्रेस ट्रेन है और इससे उत्तराखंड के लोगों को तेज, अधिक सुविधाजनक और विश्वसनीय रेल संपर्क मिलने की आशा है।

उन्होंने यह भी बताया कि हरिद्वार पर दबाव कम करने के लिए ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को फीडर स्टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसमें अतिरिक्त क्षमता सृजित करना और हरिद्वार और ऋषिकेश आने-जाने वाले यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी में सुधार करना शामिल है।

श्री वैष्णव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि उत्तराखंड में रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने आगे बताया कि राज्य में 11 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें देहरादून, हरिद्वार जंक्शन, हर्रावाला, काशीपुर जंक्शन, किच्छा, कोटद्वार, रुड़की, काठगोदाम, लाल कुआं जंक्शन, रामनगर और टनकपुर शामिल हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून स्टेशनों के पुनर्विकास की योजना इस प्रकार बनाई जा रही है कि गरीब और मध्यम वर्ग के यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भीड़भाड़ न बढ़े। रेल से जुड़ी अन्य पहलों के बारे में बताते हुए, श्री वैष्णव ने बताया कि हाल ही में शुरू की गई टनकपुर-नांदेड़ एक्सप्रेस को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इस इलाके में वंदे भारत सेवाएं भी अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि रामनगर-देहरादून एक्सप्रेस का शुभारंभ उत्तराखंड में रेल संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नई रेल सेवा शुरू होने पर राज्य के लोगों को बधाई दी और इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड में रेल संपर्क में हाल के वर्षों में काफी सुधार हुआ है और राज्य भर में कई नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं। श्री धामी ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह उत्तराखंड के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए जीवन रेखा साबित होगी।

इसके अलावा, श्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड को रेलवे के लिए रिकॉर्ड 4,769 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जबकि राज्य में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक की रेलवे परियोजनाएं वर्तमान में कार्यान्वयन के अधीन हैं। हरिद्वार में रेलवे विकास का जिक्र करते हुए श्री धामी ने कहा कि आगामी कुंभ महोत्सव को देखते हुए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और ट्रेन सेवाएं शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।

हरिद्वार निर्वाचन क्षेत्र के सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल निर्वाचन क्षेत्र के सांसद अनिल बलुनी और वरिष्ठ रेलवे अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में शामिल हुए।
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छत्तीसगढ़ को मिले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेज मिलने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा का जताया आभार

 राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।

मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।
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​देवभूमि और छत्तीसगढ़ के बीच बढ़ा वैचारिक सेतु:मुख्यमंत्री श्री धामी से मिले छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री निवास (देहरादून) में आज छत्तीसगढ़ के मीडिया प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी से एक अत्यंत गरिमामय और सौजन्य भेंट हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री धामी ने छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम और अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए और उत्तराखंड के बहुआयामी विकास, सांस्कृतिक धरोहर तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे अभूतपूर्व कार्यों की जानकारी दी।

​'विकास भी, विरासत भी': क्षेत्रीय प्राधिकरणों से संवर रहा है उत्तराखंड

     ​मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार "विकास भी, विरासत भी" के मूल मंत्र पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि नैनीताल, गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों के लिए अलग-अलग विकास प्राधिकरणों का गठन कर उनके विकास के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों का संतुलित सामाजिक, आर्थिक और नैसर्गिक विकास करना है, ताकि यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।

   उत्तराखंड के ​मुख्यमंत्री श्री धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड ऋषियों, मुनियों और संतों की पावन तपोस्थली है। इस देवभूमि की आध्यात्मिक पहचान को संभालना हम सभी का परम दायित्व है। उन्होंने नैसर्गिक संपदा (प्राकृतिक संसाधनों) के संरक्षण पर विशेष बल दिया, ताकि भविष्य में आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण संजोकर रखा जा सके।

​लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूत करने में छत्तीसगढ़ सरकार की भूमिका अनुकरणीय

     ​संवाद के दौरान मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरगामी सोच की जमकर सराहना की। उन्होंने सीएम श्री साय की मंशानुरूप इस महत्वपूर्ण भ्रमण कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह और संयुक्त सचिव सह आयुक्त जनसंपर्क श्री रजत बंसल को विशेष रूप से बधाई दी।

    ​श्री धामी ने इस बात को रेखांकित किया कि देश के लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (मीडिया) की स्वतंत्रता को अक्षुण्ण रखने और पत्रकार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य रहा है। अधिकारियों के कुशल नेतृत्व में ऐसे अंतर्राज्यीय भ्रमणों से दोनों राज्यों के बीच वैचारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को एक नया आयाम मिलता है।

​अगले वर्ष हरिद्वार कुंभ के लिए विशेष आमंत्रण

    ​भेंट के सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के मीडिया दल को अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले भव्य महाकुंभ के लिए सस्नेह आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री श्री धामी ने एक बड़ा दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि कुंभ के पावन अवसर पर देश के सभी राज्यों के मीडिया प्रतिनिधियों को एक-एक अवसर दिया जाना चाहिए।

      ​मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि इस पहल से देश भर की मीडिया देवभूमि की पावन तपोभूमि, आध्यात्मिक ऊर्जा और वहां की विश्वस्तरीय व्यवस्थाओं को अपनी आँखों से देख सकेगी और इन अद्भुत अनुभवों को अपने-अपने राज्यों की जनता तक पहुँचा सकेगी।

​एक अनूठा संगम

    छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, खनिज व नैसर्गिक संपदा और उत्तराखंड की हिमालयी दिव्यता व आध्यात्मिक चेतना के बीच हुआ यह संवाद आने वाले समय में अंतर्राज्यीय समन्वय और राष्ट्रीय एकता का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरेगा।
      इस भ्रमण दल में मुख्यमंत्री श्री धामी से मिलने वालों में दुर्ग,​रायपुर,​कोरबा,​जगदलपुर,​बिलासपुर,​राजनांदगांव,​कोरिया और ​धमतरी जिले के मीडिया प्रतिनिधी और छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय के अधिकारियों के साथ उत्तराखंड के सूचना एवं जनसंपर्क के निदेशक श्री बंशीधर तिवारी,मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री पांडे,संयुक्त संचालक श्री के.एस. चौहान सहित संबंधित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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हटिया-एलटीटी-हटिया के मध्य चल रही समर स्पेशल ट्रेन के परिचालन में विस्तार

 रेलवे प्रशासन द्वारा हटिया-एलटीटी-हटिया के मध्य 08609/08610 हटिया-एलटीटी-हटिया साप्ताहिक समर स्पेशल ट्रेन का परिचालन 01 जुलाई 2026 तक किया जा रहा है | यात्रियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखते हुये इस गाड़ी के परिचालन का विस्तार 15 जुलाई 2026 तक किया गया है । 


    परिचालन में विस्तार होने के बाद गाड़ी संख्या 08609 हटिया-एलटीटी समर स्पेशल ट्रेन, हटिया से एलटीटी के लिये प्रत्येक सोमवार को 13 जुलाई 2026 तक चलेगी । इसी प्रकार गाड़ी संख्या 08610 एलटीटी-हटिया समर स्पेशल ट्रेन, एलटीटी से हटिया के लिए प्रत्येक बुधवार को 15 जुलाई 2026 तक चलेगी ।
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छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के स्थापना का प्रस्ताव, अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

 छत्तीसगढ़ को आयुर्वेद चिकित्सा, अनुसंधान और उच्च शिक्षा के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास, जनकल्याण और विभिन्न समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) की स्थापना का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी थे।


मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री को बताया कि नई दिल्ली और पणजी में संचालित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान देश में आयुर्वेद आधारित चिकित्सा, अनुसंधान और नवाचार के उत्कृष्ट केंद्र के रूप में स्थापित हो चुके हैं। इन संस्थानों ने आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी है तथा बड़ी संख्या में दक्ष आयुर्वेद चिकित्सक और शोधकर्ता तैयार किए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों और औषधीय संपदा से समृद्ध राज्य है। प्रदेश का बड़ा हिस्सा वनाच्छादित है, जहां अनेक दुर्लभ औषधीय वनस्पतियां और जड़ी-बूटियां प्राकृतिक रूप से उपलब्ध हैं। जनजातीय अंचलों में पारंपरिक औषधीय ज्ञान की समृद्ध विरासत भी मौजूद है। ऐसे में यहां अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना आयुर्वेद चिकित्सा और अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने कहा कि AIIA की स्थापना से प्रदेशवासियों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी, वहीं युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में अध्ययन, अध्यापन और अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। इससे आयुर्वेद आधारित चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि संस्थान का लाभ केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मध्य भारत के व्यापक क्षेत्र को मिलेगा। पड़ोसी राज्यों के नागरिकों को भी बेहतर आयुर्वेदिक उपचार और शोध सुविधाओं का लाभ प्राप्त हो सकेगा।

श्री साय ने केंद्रीय बजट 2026 में देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना की घोषणा का उल्लेख करते हुए आग्रह किया कि इनमें से एक संस्थान छत्तीसगढ़ को प्रदान किया जाए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ रोजगार, अनुसंधान और ज्ञान आधारित विकास को भी नई गति देगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर सहित राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों, अधोसंरचना विस्तार और जनहितकारी योजनाओं की प्रगति की जानकारी भी केंद्रीय गृह मंत्री को दी।

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने राज्य में विकास और जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
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टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों एवं मुख्य सचिवों से की चर्चा

 केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये नई दिल्ली से देश के सभी राज्यों के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रियों से टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर व्यापक चर्चा की। छत्तीसगढ़ से वीडियो कॉन्फ्रेंस से स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भाग लिया और उन्होंने टीबी मुक्त भारत के तहत छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। 


              स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ में तेजी से कई गांव एवं ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुए है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव श्री विकासशील भी छत्तीसगढ़ से शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंस में सभी राज्यों के मुख्य सचिव भी शामिल हुए। 

              श्री नड्डा ने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए हम सभी केन्द्र एवं राज्यों की सरकारें आपसी समन्वय से कार्य कर रहे है। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को सभी के सहयोग से पूरा कर लिया जाएगा। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने टीबी के मरीजों की तेजी से पहचान करने, इलाज में नियमिता, हाई रिस्क वाले क्षेत्रों में मरीजों की जांच एवं ईलाज तथा त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना जरूरी है। इसी तरह से जनप्रतिनिधियों के सहयोग एवं जनसहभागिता से कार्य करने पर बल दिया है। वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अधिकारी भी शामिल हुए।
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मानवता को शांति, आत्मसंयम, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं भगवान महावीर के विचार : लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला

 लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित आचार्य पदारोहण एवं सहस्त्रावधान तपस्या महोत्सव में शामिल हुए। दोनों अतिथियों ने जैन मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त कर आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हो रहे पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज को नमन किया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि आचार्य पद केवल एक पद नहीं, बल्कि तप, त्याग, ज्ञान और समाज को दिशा देने वाली साधना का सर्वोच्च प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर और जैन दर्शन के सिद्धांत आज भी मानवता को शांति, आत्मसंयम, करुणा और अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं। वर्तमान समय में जब विश्व तनाव और संघर्षों से जूझ रहा है, तब जैन दर्शन की शिक्षाएं और अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।

श्री बिरला ने कहा कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पदारोहण संपूर्ण जैन समाज के लिए गौरव का क्षण है। वहीं शतावधानी हंसभद्र मुनि जी महाराज ने अपनी विलक्षण स्मरणशक्ति, ज्ञान और साधना के बल पर देशभर में विशेष पहचान बनाई है। उनके तप और साधना से समाज को नई दिशा मिल रही है।

उन्होंने कहा कि भौतिक संसाधन केवल सुविधाएं प्रदान कर सकते हैं, लेकिन जीवन का वास्तविक सुख आत्मनियंत्रण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक साधना से प्राप्त होता है। जैन संतों का तपस्वी जीवन समाज को प्रेरणा देता है और मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने सभी जैन संतों, साध्वियों और श्रद्धालुओं को नमन करते हुए महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन धरती पर पहली बार आयोजित हो रहा यह आचार्य पदारोहण महोत्सव प्रदेश के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, साधना और संस्कृति का यह विराट आयोजन पूरे प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर बन गया है। मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-साध्वियों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ धन्य हुआ है और इस आयोजन से पूरे प्रदेश में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य विनयकुशल मुनि जी महाराज का आचार्य पद पर पदारोहण उनके ज्ञान, तप, संयम, साधना और समाज के प्रति समर्पित जीवन का सम्मान है। उन्होंने 14 वर्षीय बाल मुनि शतावधानी हंसभद्रमुनि जी महाराज को भी नमन करते हुए कहा कि इतनी कम आयु में उनकी अद्भुत स्मरणशक्ति, एकाग्रता और ज्ञान-साधना सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। एक साथ हजार प्रश्नों को स्मरण रखना और उनका क्रमवार उत्तर देना असाधारण उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज रायपुर का यह इंडोर स्टेडियम ज्ञान, साधना और अध्यात्म का तीर्थस्थल प्रतीत हो रहा है। जैन संतों ने सदैव अहिंसा, करुणा, सत्य और आत्मसंयम का संदेश दिया है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है। भगवान महावीर स्वामी का ‘जियो और जीने दो’ का संदेश वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक परंपराओं की भूमि है तथा राज्य सरकार सर्वधर्म समभाव की भावना के साथ सभी वर्गों के कल्याण और प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि जैन मुनिगण कठिन तप, उपवास और संयम के माध्यम से समाज को प्रेरणा देते हैं। उन्होंने लंबी पदयात्रा और तपस्या के बाद रायपुर पहुंचे साधु-संतों का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि प्रदेश के लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि इतने बड़े आध्यात्मिक आयोजन में देशभर के संत-साध्वी और श्रद्धालु एकत्र हुए हैं। उन्होंने कहा कि जैन संतों का त्याग, तपस्या और अनुशासित जीवन समाज को सदैव प्रेरित करता है।विनयकुशल मुनि जी के आचार्य पदारोहण का यह आयोजन लोगों को अध्यात्म और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करेगा।

कार्यक्रम में सकल जैन श्रीसंघ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, श्री विजय बघेल, श्रीमती कमलेश जांगड़े, श्री महेश कश्यप, विधायक श्री राजेश मूणत सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
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केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री श्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी।

इस अवसर पर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।
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युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना राज्य की सर्वाेच्च प्राथमिकता : राज्य नीति आयोग उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा

छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा है कि राज्य के सामने वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी, मोबाइल एडिक्शन, ड्रग्स की बढ़ती लत, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और बढ़ती आपराधिक गतिविधियां शामिल हैं। इन चुनौतियों का समाधान केवल रोजगार सृजन और कौशल विकास के माध्यम से ही संभव है।


छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग नवा रायपुर में में आयोजित एसएसएम पीआईयू एवं एम एंड ई यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि आज गांवों में बड़ी संख्या में ऐसे युवा हैं जो खेती-किसानी से जुड़ना नहीं चाहते, लेकिन उनके पास रोजगार के पर्याप्त अवसर भी नहीं हैं। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार का लक्ष्य 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़कर उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

उपाध्यक्ष श्री जी एस मिश्रा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की अब तक की सबसे बड़ी टीम छत्तीसगढ़ में कार्य कर रही है और अगले छह महीनों में युवाओं के कौशल विकास और रोजगार सृजन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने यूएनडीपी के विशेषज्ञों को निर्देश दिए कि ग्रामीण युवाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप प्लंबर, गार्डनर, कारपेंटर, इलेक्ट्रीशियन, टी.वी. मैकेनिक, मोबाईल रिपेयरिंग तथा अन्य रोजगारपरक व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक परियोजना तैयार की जाए।

श्री मिश्रा ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को केवल कौशल तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि ऐसा मॉडल विकसित किया जाएगा जिससे प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवाओं को तत्काल रोजगार के अवसर मिल सकें। इसके लिए उद्योगों, निजी संस्थानों और सिविल सोसायटी संगठनों के सहयोग से प्रत्येक जिले में विशेष रोजगार आयोजन किए जाएंगे, जहां प्रशिक्षित युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें सम्मानजनक आजीविका से जोड़ना है। इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि युवाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, सामाजिक चुनौतियों पर नियंत्रण मिलेगा और राज्य के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी। 

उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि कौशल विकास, उद्योगों की सहभागिता और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश में युवा सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बनकर उभरेगा।
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छत्तीसगढ़ को 2047 तक विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में लाना हमारा लक्ष्य : राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा

 छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ को विकसित राज्यों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल योजनाओं के निर्माण से नहीं, बल्कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सटीक आंकड़ों पर आधारित नीति निर्माण और परिणामोन्मुखी कार्यसंस्कृति से संभव होगा।


नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आयोजित स्टेट सपोर्ट मिशन (SSM), प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) एवं मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन (M&E) यूनिट्स के इंडक्शन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मिश्रा ने कहा कि राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार ‘‘अंजोर विजन-2047’’ राज्य के दीर्घकालिक विकास का व्यापक रोडमैप है, जिसमें आर्थिक विकास, सुशासन, सामाजिक प्रगति, निवेश संवर्धन और मानव विकास से जुड़े स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) और अंजोर विजन-2047 एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों का मूल उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों को इन लक्ष्यों के अनुरूप क्रियान्वित करना होगा। इस दिशा में राज्य नीति आयोग के अंतर्गत गठित SSM, PIU एवं M&E इकाइयां महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

श्री मिश्रा ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। अब राज्य का लक्ष्य केवल सूचकांकों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन लाना है। उन्होंने कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि उत्पादकता, औद्योगिक विकास, महिला श्रम भागीदारी, डिजिटल अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाना हमारी प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग के साथ कार्य कर रही विशेषज्ञ टीमों को विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर KPI आधारित समीक्षा, नीति विश्लेषण, निगरानी एवं मूल्यांकन तथा साक्ष्य आधारित सुझावों के माध्यम से विकास की गति को और तेज करना होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं विशेषज्ञों से नवाचार, जवाबदेही और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने का आह्वान किया।

उपाध्यक्ष श्री मिश्रा ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और राज्य नीति आयोग के संयुक्त प्रयासों से अंजोर विजन-2047 के लक्ष्य निर्धारित समयावधि में प्राप्त किए जा सकेंगे तथा छत्तीसगढ़ समावेशी, सतत और विकसित राज्य के रूप में नई पहचान स्थापित करेगा।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 राज्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, जब छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त हुआ। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के उस संकल्प का उल्लेख किया, जिसमें बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने की बात कही गई थी। श्री मिश्रा ने कहा कि बस्तर संभाग राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और ‘‘बस्तर अंजोर’’ पहल के तहत सात प्रमुख नवाचारों के माध्यम से क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को मूर्त रूप दिया जाएगा। इससे बस्तर विकास, सुशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।

इस दौरान राज्य नीति आयोग के सदस्य सचिव श्री आशीष कुमार भट्ट, सदस्य डॉ के सुब्रह्मण्यम सहित यूएनडीपी के विभिन्न क्षेत्र के विशेषज्ञ उपस्थित थे।
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