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दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए और अधिक प्रयास जरूरी -राज्यपाल श्री रमेन डेका

  राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।


वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित

          राज्यपाल श्री डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी

          वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका सुश्री के. शारदा के नेतृत्व में हुई। सुश्री शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।


दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर

          राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया

        वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।
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विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता - राज्यपाल श्री डेका

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।


           राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा।

विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए

       श्री डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो।

रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें

        राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल

          श्री डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।

विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो

       श्री डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं।

स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण

       राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए।

छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें

     डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों  को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें 

           राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें

            श्री डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें

          राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया।

          बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव श्री अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष श्री वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।
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700 सहायक प्राध्यापकों की भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करें - उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

 राज्य में उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में गति लाने के उद्देश्य से आज उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विभागीय अधिकारियों की मंत्रालय में समीक्षा बैठक ली। बैठक में 1 जुलाई 2026 को लिए गए निर्णयों पर अब तक हुई कार्यवाही का बिंदुवार क्रियान्वयन की समीक्षा की गया। मंत्री श्री वर्मा ने समयबद्ध कार्यों में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रशासनिक ढिलाई को तुरंत दूर करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के सख्त निर्देश दिए। इस बैठक में सचिव श्री अविनाश चंपावत, आयुक्त श्रीमती रीता यादव सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


​प्राध्यापक भर्ती और पदोन्नति की समयसीमा तय

       ​बैठक के दौरान राज्य के शासकीय महाविद्यालयों में सत्र 2026-27 के तहत जारी प्रवेश प्रक्रिया का जायजा लिया गया। मंत्री श्री वर्मा ने सहायक प्राध्यापक के 700 पदों पर जारी भर्ती प्रक्रिया की रुकावटों को तत्काल दूर करने तथा प्राध्यापकों के 595 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा। स्नातक प्राचार्य के पदों पर पदोन्नति की पेंडेंसी पर  सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने 15 सितंबर 2026 तक समस्त कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अपात्र होने के बावजूद पदोन्नति पाने वाले प्राध्यापकों की जांच कर उन पर की गई कार्यवाही की भी समीक्षा की गई।

​न्यायालयीन प्रकरणों पर चिंता और वेतनमान का त्वरित निराकरण

     वरिष्ठ और प्रवर श्रेणी वेतनमान के प्रकरणों में हो रही देरी के कारण सहायक प्राध्यापकों को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, जिस पर मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने विभाग में लंबित न्यायालयीन प्रकरणों और याचिकाओं का ब्योरा मांगते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 अक्टूबर 2026 तक सभी विचाराधीन प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण कर आदेश जारी किए जाएं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों की पीएच.डी. अनुमोदन की प्रगति और मंत्री कार्यालय द्वारा भेजी गई शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण तलब किया गया। 

​वित्तीय पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर

     मंत्री श्री वर्मा ने समीक्षा के दौरान पिछली बैठक में मांगी गई बजट संबंधी अधूरी जानकारी पर असंतोष जताया गया। उन्होंने  वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रत्येक शासकीय महाविद्यालय को आवंटित बजट की महाविद्यालयवार पूर्ण सूची तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के उद्देश्य से महाविद्यालयों में पदस्थ अतिथि व्याख्याताओं के शिक्षकीय कार्यों का नियमित आकस्मिक निरीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

​सत्र प्रबंधन और नई नीतिगत पहल

     ​छात्र-छात्राओं के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा मंत्री ने महाविद्यालयों में सीट वृद्धि की प्रक्रिया को सुचारू बनाने हेतु नया कैलेंडर लागू करने का सुझाव दिया। इसके तहत शासकीय व निजी महाविद्यालयों से सीट वृद्धि के प्रस्ताव दिसंबर तक मंगाकर जनवरी तक स्वीकृतियां जारी की जाएंगी, ताकि आदेशों में होने वाली त्रुटियों से महाविद्यालयों को मुक्ति मिल सके। लॉ और बी. एड. जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 31 दिसंबर तक प्राप्त होने वाले ऑनलाइन आवेदनों का निराकरण समय सीमा के भीतर करने के निर्देश दिए गए।

        ​इसके साथ ही, 4-वर्षीय बी.एड. पाठ्यक्रम हेतु एन.सी.टी.ई. (NCTE) दिल्ली की नैक ग्रेडिंग शर्तों पर चर्चा के लिए एक विशेष टीम गठित कर दिल्ली भेजने और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के नियमानुसार प्रति सेक्शन 60 विद्यार्थियों के अनुपात को समायोजित करने के लिए अभी से तैयारियां शुरू करने के निर्देश जारी किए गए।
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सैनिक स्कूल विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में निभाते हैं महत्वपूर्ण भूमिका : मंत्री श्री अग्रवाल

 सैनिक स्कूल अंबिकापुर का 18वां स्थापना दिवस समारोह हर्षोल्लास, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों तथा कैडेटों की प्रतिभा को विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया।


समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल रहे। इस अवसर पर सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुमार अग्रवाल सहित संभाग एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ। अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ समारोह का विधिवत शुभारंभ हुआ। विद्यालय की 18 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के उपलक्ष्य में अतिथियों ने केक काटकर स्थापना दिवस मनाया।

विद्यालय के प्राचार्य कर्नल राजेश बैंदा ने सत्र 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, खेलकूद गतिविधियों, सह-पाठ्यक्रम कार्यक्रमों तथा कैडेटों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन की जानकारी दी।

समारोह में सैनिक स्कूल के कैडेटों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। स्वागत गीत, छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति पर आधारित लोकनृत्य, प्रेरणादायक मूक अभिनय, देशभक्ति से ओतप्रोत समूहगान तथा भगवान श्रीराम के जीवन एवं आदर्शों पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों को भाव-विभोर किया।

मुख्य अतिथि श्री राजेश अग्रवाल ने सैनिक स्कूल अंबिकापुर की सत्र 2025-26 की विद्यालय पत्रिका का विमोचन किया। इस अवसर पर संस्कृत शिक्षक श्री सौरभ कुमार जैन के मार्गदर्शन में कैडेटों द्वारा विकसित अभिनव ‘संस्कृत ऐप’ का भी अतिथियों ने अवलोकन किया। उन्होंने ऐप की उपयोगिता एवं विशेषताओं की सराहना की।

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेट एवं हाउस सम्मानित

समारोह में सत्र 2025-26 के दौरान शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कैडेटों को सम्मानित किया गया। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले हाउस को ट्रॉफियां प्रदान की गईं।

सर्वश्रेष्ठ सह-पाठ्यक्रम हाउस का सम्मान कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को प्रदान किया गया। खेलकूद के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भी कटारी हाउस एवं अरिहंत हाउस को सम्मानित किया गया। वहीं शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन सिंह हाउस एवं तेजस हाउस को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक हाउस की ट्रॉफी प्रदान की गई।

विद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, स्टाफ एवं जनरल कर्मचारियों को उत्कृष्ट कार्य, कर्तव्यनिष्ठा, समर्पण तथा सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विकास में महत्वपूर्ण योगदान के लिए कमेंडेशन (प्रशस्ति/सराहना) प्रदान कर सम्मानित किया गया।

कैडेटों को अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के लिए किया प्रेरित

मुख्य अतिथि पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अपने संबोधन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर की शैक्षणिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में हासिल उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कैडेटों को अनुशासन को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने तथा निरंतर परिश्रम एवं समर्पण के साथ अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि सैनिक स्कूल जैसे संस्थान विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कैडेटों से इन मूल्यों को आत्मसात करते हुए जीवन में आगे बढ़ने और देश के गौरवशाली एवं जिम्मेदार नागरिक बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के उप-प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. पी. श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं उपस्थित गणमान्यजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
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वर्तमान पर फोकस करें, निरंतर सीखते रहें और समाज के लिए योगदान दें-श्री डेका

 संत गोबिंदराम शदाणी शासकीय कला एवं वाणिज्य कन्या महाविद्यालय, रायपुर में वर्ष 2026-27 में नवप्रवेशित छात्राओं का दीक्षारंभ कार्यक्रम आज राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्रतिभाशाली छात्राओं का राज्यपाल ने सम्मान भी किया।


राज्यपाल श्री रमेन डेका ने नवप्रवेशित छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन उनके जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत है। यह अध्याय उन्हें केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि एक जागरूक, सशक्त और संवेदनशील नागरिक के रूप में तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय में कदम रखते ही छात्राएं उस गौरवशाली परंपरा की उत्तराधिकारी बन गई हैं, जिसने दशकों से बालिकाओं को ज्ञान और शिक्षा का प्रकाश प्रदान किया है।

श्री डेका ने महिलाओं की तुलना पानी से करते हुए कहा कि जिस प्रकार पानी के बिना जीवन अधूरा है, उसी प्रकार महिलाओं के बिना समाज भी अधूरा है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि वे अपने पास जो कुछ है, उससे संतुष्ट रहें, लेकिन अपने भविष्य को लेकर निरंतर प्रयास करती रहें। जीवन में आगे बढ़ने के अनेक अवसर और क्षेत्र हैं। यदि किसी एक क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है तो निराश होने के बजाय अन्य अवसरों का लाभ उठाकर कर आगे बढ़ना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि जीवन सतत सीखने की प्रक्रिया है और हम जीवनभर विद्यार्थी बने रहते हैं। उन्होंने छात्राओं से कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं , तकनीक ने ज्ञान के नए द्वार खोले हैं, लेकिन तकनीक पर पूर्ण निर्भरता उचित नहीं है। इंटरनेट से बहुत कुछ सीखा जा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और विवेक का स्थान नहीं ले सकता। जीवन को सरल, सार्थक और बेहतर बनाने के लिए ज्ञान प्राप्त करना तथा उसका विवेकपूर्ण उपयोग करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हमें केवल यह नहीं सोचना चाहिए कि समाज ने हमें क्या दिया, बल्कि यह भी विचार करना चाहिए कि हम समाज, अपने पड़ोस और देश की बेहतरी के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। जीवन अनमोल है, इसलिए इसे अनावश्यक चिंताओं में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करते हुए कठोर परिश्रम करना चाहिए। निरंतर प्रयासों से भविष्य निश्चित रूप से बेहतर बनेगा।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षकों का योगदान अमूल्य है, जिसे पैसों में नहीं मापा जा सकता। शिक्षकों को भी अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के सामने ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे वे उनसे प्रेरणा ले सकें।

उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे अपने समाज के लिए छोटे-छोटे सकारात्मक योगदान करें। उनके ये छोटे प्रयास मिलकर समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।

कार्यक्रम में महाविद्यालय की उन प्रतिभाशाली छात्राओं को राज्यपाल ने सम्मानित किया, जिन्होंने अपनी मेहनत, लगन और कुशाग्रता से महाविद्यालय का नाम रोशन किया।

इस अवसर पर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, संत श्री युधिष्ठिर लाल, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती उषा किरण अग्रवाल, जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित थीं।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से नवा रायपुर में खुलेगा प्रतिष्ठित NMIMS, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ लगाएगा नई छलांग

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को उच्च शिक्षा, कौशल और ज्ञान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भूमि की रजिस्ट्री भी पूर्ण कर ली गई। इसके साथ ही नवा रायपुर में NMIMS की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर न जाना पड़े तथा उन्हें अपने ही प्रदेश में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के समान अवसर मिलें, इस दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव श्री अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार उपस्थित थे।

40 एकड़ में विकसित होगा अत्याधुनिक कैंपस

नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर NMIMS का आधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई थी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हुए आज लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि प्रदेश के विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे पहले ही मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्थान के पूर्ण रूप से विकसित होने पर यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

युवाओं के लिए खुलेंगे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए द्वार

NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रदेश के युवाओं को प्रबंधन, कौशल विकास तथा आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही राज्य में प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध होंगे।

इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए देश के बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे नवा रायपुर में विविधतापूर्ण और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।

शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल और उद्यमिता को भी मिलेगी गति

NMIMS की स्थापना का प्रभाव केवल उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित होंगे। विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय से उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक और औद्योगिक क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी विस्तार मिलेगा। विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए कुशल युवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

नवा रायपुर की राष्ट्रीय स्तर के एजुकेशन हब के रूप में मजबूत होगी पहचान

राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी से युक्त शहर के साथ ही एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का यहां स्थापित होना इस परिकल्पना को नई गति देगा।

देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के आने से नवा रायपुर के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवेश का विस्तार होगा। इसके साथ ही शिक्षा से जुड़ी सहायक गतिविधियों, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। इससे नवा रायपुर की पहचान देश के उभरते हुए प्रमुख शिक्षा केंद्रों में और मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान न केवल प्रदेश के हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा, बल्कि नवा रायपुर को राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, कौशल और ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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मुख्यमंत्री ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ को दिखाई हरी झंडी, अब स्कूलों तक पहुंचेगी प्रयोगों की चलती-फिरती विज्ञानशाला

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज कैम्प कार्यालय बगिया में ‘साइंस ऑन व्हील्स’ वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विज्ञान को स्कूलों और विद्यार्थियों के और करीब ले जाने वाली यह चलती-फिरती विज्ञानशाला बच्चों को रोचक प्रयोगों, वैज्ञानिक मॉडलों और गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की दुनिया से परिचित कराएगी। विशेष रूप से आधुनिक वैज्ञानिक संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों में स्वाभाविक रूप से अपने आसपास की दुनिया को जानने और समझने की जिज्ञासा होती है। इस जिज्ञासा को वैज्ञानिक सोच, प्रयोग और नवाचार से जोड़ना आवश्यक है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ बच्चों को किताबों में पढ़े विज्ञान को प्रयोगों के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करेगी। इससे उनमें सवाल पूछने, प्रयोग करने और समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने की प्रवृत्ति विकसित होगी।

उन्होंने कहा कि आज विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आने वाला समय नई तकनीकों और नवाचार का है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूली शिक्षा के दौरान ही विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के व्यावहारिक पक्ष से परिचित कराना उनके भविष्य के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस प्रकार की पहल बच्चों की प्रतिभा को पहचानने और उन्हें विज्ञान, अनुसंधान तथा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘साइंस ऑन व्हील्स’ की विशेषता यह है कि इसमें विज्ञान को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को स्वयं प्रयोग करने और गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। वाहन के माध्यम से स्कूलों तक वैज्ञानिक मॉडल, प्रयोग और प्रदर्शनियां पहुंचाई जाएंगी। इससे विद्यार्थी विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मुख्य रूप से चार महत्वपूर्ण मॉड्यूल से जोड़ा जाएगा। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के माध्यम से उन्हें ब्रह्मांड और अंतरिक्ष विज्ञान की रोचक दुनिया से परिचित कराया जाएगा। रोबोटिक्स के माध्यम से नई तकनीकों, नवाचार और भविष्य के तकनीकी कौशल की समझ विकसित की जाएगी। सतत विकास मॉड्यूल विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और बेहतर भविष्य के निर्माण के प्रति जागरूक करेगा। वहीं जल निस्पंदन के माध्यम से स्वच्छ जल, जल संरक्षण तथा इससे जुड़े वैज्ञानिक समाधानों को प्रयोगों के जरिए समझाया जाएगा।

एक बार की गतिविधि नहीं, विज्ञान से निरंतर जुड़ाव है उद्देश्य

‘साइंस ऑन व्हील्स’ का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल एक बार विज्ञान के प्रयोग दिखाना नहीं, बल्कि विज्ञान, नवाचार और तकनीक के प्रति उनमें स्थायी रुचि विकसित करना है। विभिन्न गतिविधियों, प्रयोगों, मॉडलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों को ऐसा सीखने का अनुभव दिया जाएगा, जो उन्हें स्वयं सवाल पूछने, उनके उत्तर तलाशने और नए विचारों पर काम करने के लिए प्रेरित करे।

इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समस्या-समाधान, तार्किक सोच, रचनात्मकता और नवाचार की क्षमता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाएगा। भविष्य की तकनीकों से विद्यार्थियों का प्रारंभिक परिचय उन्हें बदलती दुनिया की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में भी सहायक होगा।

तीन राज्यों में संचालित हो रहा ‘साइंस ऑन व्हील्स’

उल्लेखनीय है कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल के अंतर्गत इस परियोजना को सहयोग प्रदान किया जा रहा है। ‘साइंस ऑन व्हील्स’ एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे छत्तीसगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में प्लक्ष विश्वविद्यालय, IDYM फाउंडेशन और IIT मंडी के सहयोग से लागू किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में इस पहल के माध्यम से विज्ञान की व्यावहारिक शिक्षा को विद्यार्थियों के और करीब लाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवा मन में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें नई तकनीक और नवाचार से जोड़ना तथा ज्ञान और विज्ञान के माध्यम से सशक्त भारत के निर्माण में उनकी भूमिका के लिए तैयार करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेंद सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में स्व-सहायता समूहों की महिलाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
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श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिल रही उत्कृष्ट शिक्षा, उनके सपनों को पंख देना हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 श्रमिक हमारे विकास की मजबूत नींव हैं। अपने परिश्रम से वे सड़कें, भवन, पुल और विकास की अनेक संरचनाएं खड़ी करते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को अच्छी शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। श्रमिक परिवारों के बच्चे पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगे, अपने सपनों को पूरा करेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का संकल्प भी साकार होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।


समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने योजना के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला तथा सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के अंतर्गत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों को 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की गई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को आज व्यवस्थित यूनिफॉर्म में, आत्मविश्वास के साथ अंग्रेजी में संवाद करते और शिक्षा के साथ खेल तथा अन्य गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते देखकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इन बच्चों का आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि उचित अवसर और अच्छी शिक्षा मिले तो कोई भी परिस्थिति प्रतिभा को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।

उन्होंने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष इसका विस्तार करते हुए 200 बच्चों को योजना के अंतर्गत प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा का अवसर दिया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित प्रतिभावान बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना कभी श्रमिक परिवारों के लिए कठिन सपना हुआ करता था, आज राज्य सरकार उस सपने को साकार कर रही है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल बच्चों को अच्छे विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की योजना नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर वातावरण, आत्मविश्वास और अपने सपनों को पूरा करने के लिए समान अवसर देने की पहल है।

श्रमिकों के परिश्रम से खड़ी होती है विकास की मजबूत बुनियाद

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश और देश के निर्माण में श्रमिकों के योगदान को नमन करते हुए कहा कि शहरों की ऊंची इमारतों से लेकर गांवों की सड़कों तक और बड़े पुलों से लेकर विकास की अनेक अधोसंरचनाओं के पीछे श्रमिकों का परिश्रम है। सरकार का दायित्व है कि राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण के लिए 67 प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल उन्नयन, रोजगार और आवास सहित जीवन के विभिन्न चरणों में सहायता देने वाली योजनाएं शामिल हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से पात्र श्रमिकों तक पहुंचे और सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ उनके परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, परिस्थितियां नहीं रोक सकतीं आगे बढ़ने का रास्ता

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अभी से बड़े सपने देखें और तय करें कि भविष्य में किस क्षेत्र में जाकर देश और प्रदेश की सेवा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि कोई डॉक्टर बनना चाहता है, कोई इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी, तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा अथवा अन्य क्षेत्र में जाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। इसलिए बच्चों को मिले इस अवसर का पूरा लाभ उठाते हुए अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आज उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान उपलब्ध हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा हेतु ऋण तथा विदेश में अध्ययन के लिए सहायता जैसी व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं। सरकार चाहती है कि आर्थिक परिस्थितियां किसी प्रतिभावान बच्चे की शिक्षा और उसके सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी खुल रहे शिक्षा और विकास के नए द्वार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के बाद प्रदेश के विकास में नक्सलवाद एक बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता मिली है। जिन क्षेत्रों में कभी शिक्षा और विकास की पहुंच कठिन थी, वहां अब नए अवसरों के द्वार खुल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के वही अवसर मिलें, जो बड़े शहरों के बच्चों को उपलब्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूलमंत्र को ध्येय मानकर छत्तीसगढ़ सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सिद्धि के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और विकास के अवसर पहुंचाना आवश्यक है। श्रमिक परिवारों के बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

ढाई वर्षों में श्रमिकों के खातों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

श्रम मंत्री श्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहल की जा रही है। श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से वर्तमान में 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में अंतरित की गई है। सरकार का प्रयास है कि श्रमिक का बच्चा परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को सीमित न करे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस, वैज्ञानिक, उद्यमी अथवा अपनी पसंद के किसी भी क्षेत्र में ऊंचाइयां हासिल करे।

श्रम मंत्री ने बताया कि बदलते रोजगार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए श्रमिक कल्याण योजनाओं का दायरा भी बढ़ाया जा रहा है। पार्सल डिलीवरी से जुड़े श्रमिकों को वाहन खरीदने के लिए सहायता तथा चरवाहों को आर्थिक सहायता देने जैसी नई योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण आवश्यक है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा में साथ लेकर चलना होगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना श्रमिक परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने का बड़ा अवसर दे रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से पूरी मेहनत और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

डॉ. रामप्रताप सिंह ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना ने ऐसे परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए प्रतिष्ठित विद्यालयों के द्वार खोले हैं, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखारकर जीवन में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर पढ़ने और अपने माता-पिता तथा छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

किसी का सपना आईएएस बनना, किसी को मिला अंग्रेजी बोलने का आत्मविश्वास

समारोह में अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। बच्चों की बातों में नए अवसर मिलने की खुशी के साथ भविष्य के बड़े सपनों का आत्मविश्वास भी दिखाई दिया।

राजनांदगांव के दिल्ली पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत बीजापुर के अतीश ने बताया कि उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी कि उन्हें इतने प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर मिलेगा। अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिला है। अतीश ने मुख्यमंत्री के सामने आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने का अपना सपना भी साझा किया।

रुंगटा पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत कबीरधाम की छात्रा इशिका डाहरे ने बताया कि पहले उन्हें विश्वास नहीं था कि वे अंग्रेजी में सहजता से बात कर पाएंगी। नए विद्यालय में मिले वातावरण और अवसरों ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है। विद्यार्थियों के अभिभावकों ने भी मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना उनके लिए कठिन था, लेकिन इस योजना ने उनके बच्चों के बेहतर भविष्य के सपने को साकार किया है।

बच्चों के बीच सहज हुए मुख्यमंत्री, साथ बैठकर किया भोजन

समारोह का सबसे आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ दोपहर का भोजन करने बैठे। मुख्यमंत्री बच्चों के बीच सहजता से बैठे और परिवार के सदस्य की तरह उनसे बातचीत करते रहे। औपचारिक कार्यक्रम से अलग इस संवाद में बच्चों ने भी मुख्यमंत्री से खुलकर सवाल किए।

किसी ने मुख्यमंत्री के बचपन के बारे में पूछा, तो किसी ने उनकी पढ़ाई, पसंदीदा भोजन और जीवन के संघर्षों के बारे में जानना चाहा। मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए बच्चों के प्रत्येक सवाल का जवाब दिया और अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्हें मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी।

मुख्यमंत्री की सहजता और आत्मीयता ने बच्चों को खासा प्रभावित किया। एक बच्चे ने उत्साह के साथ कहा - “मुख्यमंत्री जी हमारे अच्छे टीचर जैसे हैं। उनसे जितने भी सवाल पूछो, वे परेशान नहीं होते और हर सवाल का जवाब देते हैं।” बच्चों ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ बैठकर भोजन करना, उनसे खुलकर बातें करना और अपने सपने साझा करना उनके लिए ऐसा अनुभव है, जिसे वे हमेशा याद रखेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से कहा कि उनकी सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी। वे खूब पढ़ें, अपने सपनों को बड़ा रखें और जब जीवन में सफल हों तो समाज तथा अपने प्रदेश के प्रति अपने दायित्व को भी हमेशा याद रखें।

उल्लेखनीय है कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के माध्यम से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के प्रतिभावान बच्चों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना का उद्देश्य आर्थिक परिस्थितियों के कारण प्रतिभावान बच्चों के अवसर सीमित न होने देना और उन्हें उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराकर भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है।

कार्यक्रम में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष श्री योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष श्री किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
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मंत्री श्री नेताम की अध्यक्षता में संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न

 आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की अध्यक्षता में आज नवा रायपुर स्थित टीआरटीआई के सभाकक्ष में आदिम जाति कल्याण आवासीय एवं आश्रम शैक्षणिक संस्थान समिति के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के संचालन, शैक्षणिक गुणवत्ता तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की गई। मंत्री श्री नेताम ने इस अवसर पर टीआरटीआई द्वारा प्रकाशित गुमनाम जननायक पुस्तक का भी विमोचन किया। उन्होंने इस दौरान शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सह स्मारक में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर रही सुश्री अंबिका ध्रुव का नगर सैनिक में चयनित होने पर सम्मानित भी किया।


मंत्री श्री नेताम ने एकलव्य विद्यालयों में गणवेश, मेस संचालन, भोजन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं में एकरूपता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण एवं गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक में नेस्ट्स एवं राज्य सरकार के भर्ती नियमों के अनुरूप योग्यता रखने वाले एकलव्य विद्यालयों के पूर्व अतिथि शिक्षकों को पुनः अवसर प्रदान करने के विषय पर भी सहमति बनी।

बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। साथ ही एकलव्य विद्यालयों की चतुर्थ राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता में प्रदेश के विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी दी गई। नवंबर 2025 में ओडिशा के सुंदरगढ़ में आयोजित प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के 466 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। खिलाड़ियों ने 55 स्वर्ण पदक सहित कुल 126 पदक अर्जित किए। मंत्री श्री नेताम ने इस उपलब्धि पर विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों की सराहना की। 

इस अवसर पर विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव, आयुक्त श्री डी राहुल वेंकट, टीआरटीआई की संचालक श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संचालक मंडल के सदस्य एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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विद्यार्थियों ने देखी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी

 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।


इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा

प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।

योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर

प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।

महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।

सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक

प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।

एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।
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जीजामगांव के नवीन आईटीआई में शुरू हुआ ‘मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल’ ट्रेड; युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

 छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवीन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), जीजामगांव में सत्र 2026-27 से पहली बार मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेड का प्रथम बैच प्रारंभ किया गया है। यह इस संस्था का भी पहला प्रशिक्षण सत्र होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए यह ट्रेड युवाओं के लिए करियर की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।


दो वर्षीय पाठ्यक्रम और आधुनिक प्रशिक्षण

       मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के साथ-साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली (BMS), मोटर कंट्रोल, चार्जिंग सिस्टम, वाहन सर्विसिंग और फॉल्ट डायग्नोसिस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में यह ट्रेड छत्तीसगढ़ के चुनिंदा 5 शासकीय आईटीआई संस्थानों में ही संचालित है, जिससे जीजामगांव आईटीआई में इसकी शुरुआत जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रोजगार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर

      ई-व्हीकल के बढ़ते चलन से अधिकृत सर्विस सेंटरों, ई-व्हीकल निर्माण कंपनियों, चार्जिंग स्टेशनों और बैटरी से संबंधित सेवा इकाइयों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, प्रशिक्षित युवा खुद का सर्विस सेंटर या तकनीकी सेवा शुरू कर स्वरोजगार भी स्थापित कर सकेंगे।

क्षेत्र का तेजी से हो रहा विकास

        जीजामगांव क्षेत्र में फॉरेस्ट पार्क, फूड पार्क सहित विभिन्न विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने नवीन आईटीआई भवन के लिए चिह्नित भूमि का निरीक्षण भी किया था। जिला धमतरी की नोडल संस्था शासकीय आईटीआई कुरूद के प्राचार्य श्री योगेश देवांगन ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए इस नवीन ट्रेड में प्रवेश लें।

प्रवेश प्रक्रिया और अन्य सौगातें

       आईटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए शासकीय आईटीआई कुरूद से संपर्क किया जा सकता है।

       उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 23 सितंबर को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने ग्राम करेली बड़ी में आयोजित समारोह में जिले के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की घोषणा की थी, जिसमें जीजामगांव में नवीन आईटीआई की स्थापना भी शामिल थी।
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ अधोसंरचना सरकार की प्राथमिकता- मंत्री श्री टंक राम वर्मा

 गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ अधोसंरचना (बुनियादी ढांचा) किसी भी राष्ट्र के विकास की मुख्य नींव हैं, जिन्हें सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर और आधुनिक माहौल मिलता है। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने शुक्रवार को वनांचल क्षेत्र नगरी को शिक्षा और आधारभूत विकास की बड़ी सौगात दी। उन्होंने शासकीय सुखराम नागे महाविद्यालय, नगरी में 50 लाख रुपए की लागत से नवनिर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण किया। इसके साथ ही नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया। ​इस दौरान मंत्री ने महाविद्यालय की वार्षिक साहित्यिक एवं शैक्षणिक पत्रिका ‘श्रेष्ठांश’ का विमोचन किया तथा परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।


निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं 
    
           मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुदूर ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। आज के युवा ही राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। बेहतर अधोसंरचना, आधुनिक संसाधन और अनुकूल शैक्षणिक वातावरण से ही प्रदेश के भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार होंगे। नया अतिरिक्त कक्ष विद्यार्थियों के अध्ययन, शोध, सेमिनार और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान करेगा। ​उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और नवाचार का मंत्र देते हुए कहा कि निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।

विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास

       ​     मंत्री श्री वर्मा ने ​पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कर एक-एक पौधा लगाने और उसके संरक्षण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ व सुरक्षित पर्यावरण भावी पीढ़ियों के लिए हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।इस दौरान मंत्री श्री वर्मा ने महाविद्यालय भवन के साथ-साथ नगर पंचायत नगरी के लिए कई महत्वपूर्ण बुनियादी विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास किया।

          ​कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद पंचायत नगरी अध्यक्ष, पूर्व विधायक पिंकी ध्रुव सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि, महाविद्यालय परिवार, प्राध्यापकगण, प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं नागरिक उपस्थित रहे।
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धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नैतिकता के आधार पर नहीं राजनैतिक मजबूरी - कांग्रेस

 केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नैतिकता के आधार पर नहीं राजनैतिक मजबूरी है। धर्मेन्द्र प्रधान एवं भारतीय जनता पार्टी में नैतिकता होती तो मार्च में जब नीट का पेपर लीक हुआ था उसी समय धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो जाता। भाजपा ने हर संभव नीट के मामले को दबाने तथा युवाओं के अधिकार को कुचलने का काम किया, जब छात्र युवा विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दबाव बनाने लगे देश भर में सरकार के खिलाफ आवाज उठी उसकी मजबूरी में धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा आया है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि जिस प्रकार से पूरे देश में मोदी सरकार के खिलाफ आम जनता विरोध में है। छात्र नौजवान दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के हर शहर में आंदोलन कर रहे है। यह बताता है कि सरकार जनता के विश्वास खो चुकी है। प्रधानमंत्री अपनी विफलता स्वीकार करें तथा तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें। किसी प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ देश के युवाओं में ऐसा आक्रोश पहली बार देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री जनभावना की कद्र करे इस्तीफा दें।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पेपर लीक का संकट अब एक राष्ट्रीय महामारी का रूप ले चुका है। मोदी की सरकार आने के बाद से देश में अब तक 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं ने 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित किया है, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है। लाखों अभ्यर्थी भारी दबाव के बीच औसतन पांच वर्षों तक प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। इस तैयारी में न केवल अभ्यर्थियों, बल्कि उनके परिवारों को भी भारी आर्थिक बोझ और त्याग का सामना करना पड़ता है। क्योंकि अन्य अवसरों के दरवाजे उनके लिए बंद होते जा रहे है, इसलिए हर साल लगभग 9 करोड़ अभ्यर्थियों को केवल 6 लाख सरकारी नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
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शिक्षा ही सफलता का मूल मंत्र है, कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे — पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल

  सरगुजा जिले में शैक्षणिक सत्र 2026-27 की उत्साहपूर्ण शुरुआत जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के साथ हुई। पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने विद्यालय की घंटी बजाकर नवप्रवेशी बच्चों का स्वागत किया और उन्हें तिलक लगाकर, पुष्पमाला पहनाकर तथा मिठाई खिलाकर विद्यालय में प्रवेश दिलाया। पूरे कार्यक्रम में शिक्षा के प्रति उत्साह, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आशा और समाज को शिक्षित बनाने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि बच्चों के बीच उपस्थित होकर उन्हें विद्यालय की नई शुरुआत के लिए प्रेरित करना अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही सफलता का मूल मंत्र है और यही वह आधार है जो व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल बच्चों का नामांकन कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से विद्यालय पहुंचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे और अपने सपनों को साकार करे।

उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा और ड्रॉपआउट की स्थिति समाप्त करने के लिए शासन लगातार प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से सरगुजा जैसे जनजाति बहुल क्षेत्र में शिक्षा का महत्व और अधिक है। पहाड़ी कोरवा सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों की उन्होंने सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने तथा माता-पिता, गुरुजनों, जिले और प्रदेश का नाम रोशन करने का आह्वान किया। वहीं अभिभावकों से बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा बेटा-बेटी को समान अवसर प्रदान करने की अपील भी की।

छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर ने विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति समर्पित रहने और जीवन में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि शाला प्रवेश उत्सव छोटे बच्चों के मन में विद्यालय को लेकर होने वाले भय को दूर करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि राज्य शासन लगातार विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। श्री भरत सिंह सिसोदिया ने शिक्षकों से बच्चों को शिक्षा के साथ श्रेष्ठ संस्कार देने का आग्रह किया।

कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि भवनविहीन विद्यालयों के लिए भवन स्वीकृत किए गए हैं, विद्यार्थियों के जाति प्रमाणपत्र बनवाए गए हैं तथा विशेष पिछड़ी जनजाति के बच्चों का उच्च कक्षाओं में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को रायपुर के निजी कोचिंग संस्थानों में प्रवेश दिलाया गया है। जिले में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव तैयार करते हैं, इसलिए उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा तैयार की गई दीवार पत्रिका का भी विमोचन किया गया।

शाला प्रवेश उत्सव के अवसर पर कक्षा पहली, छठवीं और नवमी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को गणवेश, पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, स्कूल बैग तथा अन्य अध्ययन सामग्री वितरित की गई। शिक्षा के प्रति बच्चों का उत्साह बढ़ाने और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल रही।

कार्यक्रम में शासन की साइकिल वितरण योजना के अंतर्गत पात्र 21 छात्राओं को साइकिल प्रदान की गई। इस अवसर पर श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि साइकिल जैसी योजनाएं बालिकाओं को विद्यालय तक सहज पहुंच उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का भाव विकसित करती हैं। उन्होंने छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। शिक्षा दूत पुरस्कार 2025-26 प्राप्त करने वाले 21 शिक्षकों तथा ज्ञान दीप पुरस्कार 2025-26 प्राप्त करने वाले 3 शिक्षकों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। साथ ही शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों का भी सम्मान किया गया और उनके स्वस्थ एवं सुखद भविष्य की कामना की गई।

उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत असाक्षरों को साक्षर बनाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वॉलेंटियरों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सभी उपस्थित जनों ने साक्षरता की शपथ लेकर समाज में शिक्षा के प्रसार और निरक्षरता उन्मूलन का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम में नगर निगम महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, नगर निगम अंबिकापुर के सभापति श्री हरमिंदर सिंह टिन्नी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और अभिभावकों की उपस्थिति ने शाला प्रवेश उत्सव को शिक्षा के जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि शासन, प्रशासन, शिक्षक, अभिभावक और समाज के सामूहिक प्रयास से ही प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाकर समृद्ध और शिक्षित छत्तीसगढ़ का निर्माण किया जा सकता है।
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शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही समृद्ध छत्तीसगढ़ की नींव - राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा

 राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही एक समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की सच्ची नींव है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार राज्य में गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और संस्कारयुक्त शिक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी संस्कृति से जुड़कर एक जिम्मेदार नागरिक बन सके। राज्य के विद्यालयों में छात्रों को भारतीय ज्ञान-परंपरा, नैतिक मूल्यों और अनुशासन से जोड़ने के लिए शालाओं में प्रार्थना, सरस्वती वंदना और श्लोक का समावेश किया गया है। उन्होंने बलौदाबाजार विधानसभा ​क्षेत्र के 11 विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण हेतु 3 करोड़ की राशि स्वीकृत 

 
        रायपुर जिले के तिल्दा विकासखंड के शासकीय बीएनबी हायर सेकेंडरी स्कूल में  विकासखंड स्तरीय शालेय प्रवेश उत्सव उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, जिला पंचायत प्रतिनिधियों एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति रही। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नैतिक मूल्यों के साथ जीवन पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।

​संकल्प से ही प्राप्त होती है सिद्धि

     ​ देश के पूर्व राष्ट्रपति, भारतरत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी के विचारों को रेखांकित करते हुए राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि सपने वे नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, सपने तो वे हैं जो हमें सोने ही नहीं देते। ​सफलता की आधारशिला बड़े सपनों और दृढ़ संकल्प पर टिकी होती है। जिस प्रकार एक अभिभावक अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का, शिक्षक अपने विद्यालय की उत्कृष्टता का और जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के विकास का सपना देखते हैं; ठीक उसी प्रकार विद्यार्थियों को भी उच्च लक्ष्य निर्धारित कर लगातार मेहनत करनी चाहिए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से सिद्धि के मंत्र को दोहराते हुए विद्यार्थियों को निरंतर प्रयासरत रहने का आह्वान किया।

​दृष्टिकोण बदलता है जीवन की दिशा

    ​कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के संदेश उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए का स्मरण कराते हुए विद्यार्थियों में असीम ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण का संचार किया गया। ​एक प्रेरक प्रसंग के माध्यम से मंत्री श्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि एक ही कार्य को करने वाले लोगों का दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकता है। जैसे बाँध निर्माण में लगे तीन मजदूरों में से सकारात्मक सोच वाले मजदूर ने अपने कार्य को जन-कल्याण और समृद्धि से जोड़कर देखा, ठीक उसी तरह विद्यार्थियों को भी अपनी पढ़ाई का उद्देश्य तय करना होगा। जब दृष्टिकोण स्पष्ट होता है, तो लक्ष्य प्राप्ति निश्चित हो जाती है।

​नई शिक्षा नीति 2020- भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कारों का समावेश

      मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि ​विष्णु देव साय सरकार द्वारा शिक्षा के सर्वांगीण विकास के लिए उठाए जा रहे है। ​राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत राज्य में शिक्षा को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा (वेद, शास्त्र, रामायण एवं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर) से जोड़ा गया है। ​शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रहकर बच्चों में नैतिक मूल्य, विनम्रता, अनुशासन और अपने माता-पिता व बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने का माध्यम बन रही है।

​बलौदाबाजार के विद्यालयों को मॉडल बनाने 3 करोड़ रुपए की स्वीकृति

     ​    क्षेत्रीय अधोसंरचना विकास पर राजस्व मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र के विद्यालयों को सर्वसुविधायुक्त मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है। बलौदाबाजार विधानसभा ​क्षेत्र के 11 विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों के निर्माण हेतु 3 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। ​बाउंड्री वॉल, शौचालय, शुद्ध पेयजल, विद्युत व्यवस्था और बैठक व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण किया जा रहा है। ​बीएनबी हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के सांस्कृतिक व बौद्धिक विकास हेतु एक आधुनिक एवं भव्य रंगमंच के निर्माण की भी स्वीकृति दी गई।

​2047 तक छत्तीसगढ़ देश का सबसे समृद्धशाली और सशक्त राज्य बनेगा

         कार्यक्रम में राजस्व मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महतारी वंदन योजना और कृषक उन्नति योजना जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ अधोसंरचनात्मक विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जब वर्ष 2047 में भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा, तब हमारा छत्तीसगढ़ भी देश का सबसे समृद्धशाली और सशक्त राज्य बनकर उभरेगा। ​कार्यक्रम में नए शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर सभी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर व मिठाई खिलाकर अभिनंदन किया गया तथा उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी गईं।
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मोबाइल और डिजिटल एडिक्शन से बचें, मानव बुद्धि ही सर्वाेच्च है: राज्यपाल श्री डेका

 राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अपना बचपन याद आ जाता है। आज जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि उनके समय में सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई होती थी, तथा मेहनत और लगन ही सफलता का आधार थी। आज इंटरनेट और   कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस युग में सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन विद्यार्थियों को अपनी मौलिक सोच और अध्ययन की आदत को बनाए रखना चाहिए। 

राज्यपाल श्री डेका ने आज रायपुर के विमतारा ऑडिटोरियम में पीएसवाय एजुकेशन एवं रिसर्च फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान समारोह एवं पदक तथा निधि वितरण 2026 के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों के मेधावी विद्यार्थियों एवं उत्कृष्ट जिला शिक्षा अधिकारियों को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि छात्र जीवन की मित्रता सबसे निर्मल और अमूल्य होती है, जिसे जीवनभर संजोकर रखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार की लत से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि डिजिटल एडिक्शन भी अन्य नशों की तरह हानिकारक है। मोबाइल का उपयोग केवल आवश्यक अध्ययन और उपयोगी कार्यों तक सीमित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में गूगल और एआई उपयोगी साधन हैं, लेकिन वे मानव बुद्धि का विकल्प नहीं बन सकते। जीवन में गूगल इफेक्ट नहीं होना चाहिए। सोचने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

राज्यपाल ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों की प्रतिभा और रुचि को पहचानें तथा उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि हर बच्चा आईआईटी या मेडिकल के क्षेत्र में ही जाए, यह आवश्यक नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में विद्यार्थियों की विविध प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए अनेक नए पाठ्यक्रम और विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। आज प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं और नवाचार के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने सपने बड़े रखें। व्यक्ति किस पृष्ठभूमि से आता है, यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसकी मेहनत, लगन और संकल्प ही उसका भविष्य तय करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल सफल व्यक्ति ही खुश हो, यह आवश्यक नहीं है, बल्कि संतुष्ट व्यक्ति ही वास्तविक रूप से प्रसन्न रहता है। परिवार, पड़ोसियों और मित्रों के साथ सौहार्द एवं शांति से जीवन जीना ही सच्ची सफलता है।

राज्यपाल ने कहा कि आज यहां सम्मानित होने वाले प्रत्येक विद्यार्थी की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उसके माता-पिता के त्याग और गुरुजनों के मार्गदर्शन का भी परिणाम है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की तुलना दूसरों से न करने का आग्रह करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चा अपने आप में विशिष्ट होता है। उसे अंधी प्रतिस्पर्धा में धकेलने के बजाय उसकी रुचि और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए। जब बच्चा अपनी पसंद के क्षेत्र में कार्य करता है, तभी उसकी उत्कृष्ट प्रतिभा निखरकर सामने आती है।

उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आगे चलकर आत्मनिर्भर भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि, विधायक तथा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। प्रत्येक विद्यार्थी का एक स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए और उस लक्ष्य को प्राप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम शिक्षा है। शिक्षा पर जितना अधिक ध्यान दिया जाएगा, भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।

विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए सफलता के लिए अनुशासन, परिश्रम और निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में पीएसवाय शैक्षणिक एवं अनुसंधान संघ के निदेशक डॉ. एस.के. मिश्रा ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। अंत में मुख्य योजना समन्वयक पीएसवाय श्रीमती शुभ्रा शुक्ला मिश्रा ने आभार व्यक्त किया।

समारोह में सीबीएसई के क्षेत्रीय निदेशक श्री जगदीश बर्मन, पीएसवाय के पदाधिकारी, प्रदेश के सभी संभागों से आए जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य, शिक्षक, सम्मानित विद्यार्थी, उनके अभिभावक उपस्थित थे।
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समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।


मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहब, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक श्री प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनाने वाले ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी

 वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज (एमएआईसी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन "Artificial Intelligence & Digital Transformation: Opportunities, Challenges and Future Impact" में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर युवाओं का आह्वान किया कि वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और नई तकनीकों से भयभीत होने के बजाय उन्हें अपने भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा अवसर मानें।


अपने संबोधन में मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आज पूरी दुनिया तेजी से ज्ञान, तकनीक और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। भारत का स्वर्णिम इतिहास भी ज्ञान, शिक्षा और नवाचार की नींव पर खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत लगभग 1600 वर्षों तक विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इसलिए रहा क्योंकि यहां शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च स्थान दिया गया।

मंत्री श्री चौधरी ने युवाओं से कहा कि आज दुनिया के सबसे सफल उद्योगपति और उद्यमी वे हैं जिन्होंने नए विचारों और नवाचार के बल पर अपनी पहचान बनाई है। एलन मस्क, एनवीडिया और एप्पल जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज तकनीक की शक्ति इतनी बड़ी हो चुकी है कि कई टेक्नोलॉजी कंपनियों का मूल्यांकन अनेक देशों की अर्थव्यवस्था से भी अधिक है। इसलिए युवाओं को समय रहते तकनीकी परिवर्तन को समझकर स्वयं को उसके अनुरूप तैयार करना होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि "जो एआई को अपनाएगा वही भविष्य का नेतृत्व करेगा। जो इससे दूर भागेगा, वह प्रतिस्पर्धा में पीछे रह जाएगा।" उन्होंने कहा कि हर तकनीकी परिवर्तन चुनौतियां लेकर आता है, लेकिन वही परिवर्तन नए अवसर भी पैदा करता है। आवश्यकता इस बात की है कि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएं।

उन्होंने कहा कि एआई कई कार्यों को सरल बना सकता है, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता, करुणा और मानवीय स्पर्श का विकल्प कभी नहीं बन सकता। इसलिए युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ना चाहिए जहां मानवीय मूल्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है, जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, नर्सिंग और अन्य सेवा क्षेत्र।

मंत्री श्री चौधरी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे केवल नौकरी तलाशने तक सीमित न रहें, बल्कि नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ें तथा विश्वस्तरीय स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियां स्थापित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और पूरी दुनिया में भारतीय तकनीकी नेतृत्व का लोहा माना जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत @2047 के विजन से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ सरकार भी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन @2047" पर कार्य कर रही है। इस दिशा में नवा रायपुर को उभरते तकनीकी और नवाचार केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां सेमीकंडक्टर यूनिट, एआई डाटा सेंटर तथा ट्रिपल आईटी में अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं सहित अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य हो रहा है।

कार्यक्रम के अंत में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल कॉलेज प्रबंधन, आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के युवा नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे।
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