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बीजापुर के अंकित सकनी ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में पाई सफलता, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

 बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के छोटे से ग्राम गुदमा के युवा श्री अंकित सकनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 816वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार और गांव का, बल्कि पूरे बस्तर संभाग और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।


इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अंकित सकनी और उनके माता-पिता से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने अंकित की इस सफलता को प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंकित ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी अंचल के छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।
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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉल के जरिए दी बधाई

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल छत्तीसगढ़ के अभ्यर्थियों से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं।


मुख्यमंत्री श्री साय ने इस दौरान खरसिया (रायगढ़) निवासी श्री रौनक अग्रवाल, रायपुर निवासी श्री संजय डहरिया, धमतरी जिले के परसवानी निवासी श्री डायमंड सिंह ध्रुव तथा एमसीबी जिले के जनकपुर निवासी सुश्री दर्शना सिंह से बातचीत की।मुख्यमंत्री श्री साय ने उनके परिवारजनों से भी संवाद करते हुए इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आप सभी युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और धैर्य के बल पर प्रतिष्ठित यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता प्राप्त कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। आपकी यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है और यह संदेश देती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ से युवाओं का सिविल सेवा में चयन होना प्रदेश के लिए गौरव की बात है। इससे यह सिद्ध होता है कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और हमारे युवा अपने परिश्रम के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफल प्रदेश के अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले छत्तीसगढ़ के सभी अभ्यर्थियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दी हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह उपलब्धि हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने वैभवी अग्रवाल, दर्शना सिंह बघेल, डायमंड सिंह ध्रुव, रौनक अग्रवाल और संजय डहरिया को उनकी उल्लेखनीय सफलता के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इन होनहार बेटे-बेटियों की उपलब्धि प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है और यह दिखाती है कि निरंतर परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण से किसी भी ऊँचाई को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि छत्तीसगढ़ के युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन युवाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के सपनों को नई ऊर्जा और दिशा देने वाली प्रेरणा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ये सभी प्रतिभाशाली युवा प्रशासनिक सेवाओं में रहते हुए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ जनसेवा करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
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कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में प्रो. मनोज दयाल ने संभाला कुलपति का पदभार

 प्रतिष्ठित मीडिया शिक्षाविद प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने आज कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर के कुलपति के रूप में विधिवत कार्यभार ग्रहण किया। इस अवसर पर रायपुर के संभागायुक्त महादेव कावरे ने कुलपति को पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। 

    कुलपति प्रो. दयाल ने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत, अद्भुत संगठन शिल्पी और त्याग-सादगी की प्रतिमूर्ति कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर प्रशासनिक एवं अकादमिक कार्यों की समीक्षा की। इस अवसर पर उन्होंने माननीय राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों से परिचय प्राप्त किया। प्रो. दयाल ने ग्रंथालय में शोधार्थियों एवं पीजी विद्यार्थियों से मुलाकात कर उनके शोध कार्यों की जानकारी ली। विश्वविद्यालय के सामुदायिक रेडियो स्टेशन रेडियो संवाद 90.8 एफएम में उन्होंने शुभकामना संदेश रिकॉर्ड किया तथा टेलीविजन स्टूडियो और विभिन्न संकाय भवनों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही विभिन्न विभागों में संचालित पाठ्यक्रमों की कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से संवाद कर शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प व्यक्त किया।
      इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण, अधिकारी एवं कर्मचारियों ने नवागत कुलपति का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
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स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 5000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाएगा

 स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता एवं सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के कुल 5000 पदों पर भर्ती का विज्ञापन शीघ्र ही जारी किया जा रहा है। शासन ने परीक्षा आयोजन के लिये छत्तीसगढ़ व्यापम को अधिकृत किया है एवं विभाग द्वारा विज्ञापन जारी करने संबंधी सभी प्रक्रियाओं को पूर्ण कर आवश्यक प्रपत्र व्यापम को उपलब्ध करा दिया गया है। इसके साथ ही सीधी भर्ती 2023 की भर्ती प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है।


           छत्तीसगढ़ सरकार स्कूल शिक्षा विभाग में 5,000 से अधिक पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया फरवरी 2026 में शुरू करने जा रही है। इन पदों के लिए चयन व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद, यह भर्ती राज्य के विभिन्न स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए की जा रही है। शिक्षा विभाग के इस फैसले से राज्य भर के सरकारी स्कूलों में टीचरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी । भर्ती प्रक्रिया के बारे में डिटेल्ड गाइडलाइंस आने वाले दिनों में जारी की जाएगी। 

          छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के माध्यम से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी। खास बात यह है कि इसमें व्याख्याता, शिक्षक, सहायक शिक्षक और प्रयोगशाला सहायक जैसे कई पद शामिल किए जा रहे हैं, जिससे अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों को अवसर मिलेगा।

             ज्ञातव्य है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक सीधी भर्ती 2023 अंतर्गत सहायक शिक्षक पद के पांचवें चरण की भर्ती प्रक्रिया में माननीय न्यायालय के निर्देशानुसार सेवा समाप्त किये गये 2621 बी.एड. अर्हताधारियों के स्थापन पर डी.एड. अर्हताधारियों अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया गया है।
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उच्च शिक्षण संस्थानों को उभरते अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा और कौशल विकास के भविष्य पर केंद्रित फ्लैगशिप कार्यक्रम ‘शिक्षा संवाद 2026’ का आज रायपुर के कोर्टयार्ड मैरियट में भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने किया। इस आयोजन का संचालन उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया गया, जिसमें एलिट्स टेक्नोमीडिया सहयोगी संस्था के रूप में जुड़ा रहा।

     ‘विकसित छत्तीसगढ़ के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार का सेतु’ थीम पर आधारित उद्घाटन सत्र में उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों के समायोजन और क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा हुई।
      उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवा राज्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को उभरते अवसरों के अनुरूप खुद को तैयार करना होगा। मंत्री ने संस्थागत क्षमता सुदृढ़ करने, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और पाठ्यक्रमों को उद्योग की मांग के अनुरूप ढालने पर बल दिया। साथ ही विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और उद्योग जगत के बीच संरचित समन्वय की आवश्यकता बताई, ताकि विद्यार्थियों को व्यावहारिक दक्षता और रोजगारपरक कौशल प्राप्त हो सके। डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और नीतिगत सुधारों को भी गुणवत्ता सुधार का अहम माध्यम बताया गया।
     कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने शासन के शिक्षा सुधारों, संस्थागत सशक्तीकरण और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि नीति के समुचित कार्यान्वयन, डिजिटल एकीकरण और परिणाम आधारित दृष्टिकोण से राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।
     इस अवसर पर एलिट्स टेक्नोमीडिया के सीईओ एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. रवि गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नीति, अकादमिक और उद्योग जगत के बीच सतत संवाद मंच की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। वहीं, उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने आगे बढ़कर ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया, जिससे शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास का समेकित मॉडल विकसित हो सके।‘
     कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण उच्च शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन और ‘स्वयं प्लस – आईआईटी मद्रास’ के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर रहा। इस समझौते के तहत उच्च गुणवत्ता वाले ऑनलाइन और ब्लेंडेड कोर्स, उद्योग-प्रासंगिक प्रमाणपत्र तथा क्रेडिट-लिंक्ड कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ‘अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ के अंतर्गत क्रेडिट ट्रांसफर को बढ़ावा मिलेगा तथा विद्यार्थियों को उन्नत कौशल आधारित मॉड्यूल्स का लाभ मिलेगा।
  इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा विभाग ने मलेशिया के लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज (LUC) के साथ भी एमओयू किया। इस सहयोग का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारी, छात्र एवं संकाय विनिमय, संयुक्त शोध पहल और वैश्विक एक्सपोजर को बढ़ावा देना है।
   शिक्षा संवाद 2026 में दिनभर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार, डिजिटल नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग, शोध और उद्यमिता जैसे विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा संवाद 2026’ ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा, कौशल और रोजगार के बीच मजबूत सेतु बनाकर ही विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।
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मुख्यमंत्री ने परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों को दिया आत्मविश्वास और सफलता का संदेश

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को परीक्षाओं के अवसर पर शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें आत्मविश्वास और हौसले के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों के नाम अपने आत्मीय संदेश में कहा कि परीक्षाओं का समय जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसमें उत्साह के साथ थोड़ा तनाव भी स्वाभाविक है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है।


मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि परीक्षाओं का समय आ गया है। मैं जानता हूँ कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी। लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए — आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं।

उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है। यह स्वाभाविक है। यदि आपको डर लग रहा है तो इसका अर्थ है कि आप अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य को गंभीरता से लेते हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह समझ लीजिए — डर कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है। लेकिन इस डर को अपने आत्मविश्वास पर हावी न होने दें। आपने पूरे वर्ष मेहनत की है। हर दिन का प्रयास, हर अभ्यास, हर दोहराव — सब आपकी ताकत बनकर आपके साथ खड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी नियमित पढ़ाई करें, कठिन विषयों को दोहराएँ, समय का संतुलन बनाए रखें। पर्याप्त नींद लें, पौष्टिक भोजन करें और कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के सभी विद्यार्थी इस बार भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करेंगे।
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उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शैक्षणिक भ्रमण के लिए बस को दिखाई हरी झंडी

उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज कवर्धा के समनापुर पुल के पास से डेयरी कोऑपरेटिव एवं अमूल डेयरी कोऑपरेटिव बनासकाठा गुजरात के शैक्षणिक भ्रमण पर जाने वाले पशुपालकों और बिहान की दीदियों की बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने बस में पहुंचकर बिहान समूह की दीदियों एवं पशुपालकों से आत्मीय संवाद किया तथा भ्रमण के उद्देश्य और अपेक्षित सीख के संबंध में चर्चा की।

       उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे बनासकाठा जाकर वहां की उन्नत व्यवस्थाओं को गंभीरता से देखें, समझें और सीखें। यह भ्रमण केवल देखने भर का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सीखने और उसे लागू करने का अवसर है। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे वहां के सफल डेयरी मॉडल, प्रबंधन प्रणाली और तकनीकी नवाचारों का गहन अध्ययन कर जिले में दुग्ध उत्पादन एवं आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने में योगदान दें।    
        उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण से प्रतिभागियों को उन्नत पशुपालन तकनीक, संतुलित चारा विकास, डेयरी कोऑपरेटिव की अवधारणा, दुग्ध संकलन एवं प्रसंस्करण प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, डेयरी उत्पाद निर्माण तथा विपणन व्यवस्था के संबंध में व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त होगा। साथ ही उन्हें यह भी समझने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार सहकारी मॉडल के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया जा सकता है।
     उल्लेखनीय है कि उपमुख्यमंत्री व कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा के विशेष प्रयासों से कबीरधाम जिले के 17 बिहान समूह (एनआरएलएम) की दीदियां एवं 17 पशुपालक इस शैक्षणिक भ्रमण में शामिल हो रहे हैं। यह दल गुजरात के बनासकाठा डेयरी कोऑपरेटिव और अमूल डेयरी कोऑपरेटिव का अवलोकन करेगा, जो देश-विदेश में अपनी उत्कृष्ट दुग्ध उत्पादन प्रणाली और सहकारी मॉडल के लिए प्रसिद्ध हैं। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सरकार ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सतत प्रयासरत है। बिहान समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, वहीं पशुपालन विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

      इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, श्री नितेश अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य श्री रामकुमार भट्ट, डॉ. बीरेन्द्र साहू, श्री मनिराम साहू, श्री विजय पाटिल, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री पवन जायसवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संतोष पटेल, पार्षद श्री बिहारी धुर्वे, श्री अजय ठाकुर, श्री योगेश चंद्रवंशी, श्री दीपक सिन्हा, श्री केशरीचंद सोनी, श्री संजीव, श्रीमती सुषमा उपाध्याय, श्री केशरीचंद सोनी, श्री भुनेश्वर चंद्राकर, श्री उमंग पाण्डेय, डॉ. आनंद मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, बिहान समूह की दीदियां एवं पशुपालक उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ प्रिंसिपल एसोसिएशन द्वारा शैक्षिक संगोष्ठी एवं अभिनंदन समारोह आयोजित

छत्तीसगढ़ प्रिंसिपल एसोसिएशन के तत्वावधान में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के प्रेक्षागृह में भव्य शैक्षिक संगोष्ठी एवं अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव थे। समारोह की अध्यक्षता अहिवारा विधानसभा के विधायक एवं अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री डोमन लाल कोर्सेवाडा ने की।


कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधानसभा के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. शैलेंद्र पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

शासकीय विद्यालय समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं – शिक्षा मंत्री

मुख्य अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने उपस्थित प्राचार्यगणों को संबोधित करते हुए कहा कि शासकीय विद्यालय बच्चों में संस्कार, समानता और सामाजिक सद्भावना के केंद्र हैं, क्योंकि यहाँ गरीब-अमीर तथा समाज के सभी वर्गों के बच्चे एक साथ अध्ययन करते हैं।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में संसाधनों के अभाव के बावजूद शासकीय विद्यालयों में नामांकन अधिक था, किंतु आज पर्याप्त संसाधन होने के बाद भी नामांकन में निरंतर गिरावट शिक्षकों एवं प्राचार्यों के लिए चिंतन का विषय है।
श्री यादव ने बताया कि उनके कार्यकाल में पदोन्नति प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई है, जो निरंतर जारी रहेगी तथा शिक्षकों की जायज़ मांगों पर समयबद्ध एवं सार्थक निर्णय लिए जाएंगे।

शिक्षकों को अनुशासन और निष्ठा से कार्य करना चाहिए – कोर्सेवाडा

समारोह की अध्यक्षता करते हुए श्री डोमन लाल कोर्सेवाडा ने कहा कि समय के साथ समाज में शिक्षकों के सम्मान की भावना में परिवर्तन आया है। पहले शिक्षक समाज में सर्वोच्च सम्मान का पात्र होता था, किंतु आज स्थिति बदली है। उन्होंने शिक्षकों से समय के प्रति पाबंद रहते हुए पूरी निष्ठा से अपने दायित्वों के निर्वहन का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री का अभिनंदन कार्यक्रम रायपुर उत्तर में होगा – पुरंदर मिश्रा

रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने अपने रोचक उद्बोधन से उपस्थित प्राचार्यगणों को खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ प्रवास के कारण मुख्यमंत्री इस सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके।
उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के समस्त शिक्षकों एवं प्राचार्यों द्वारा मुख्यमंत्री का अभिनंदन कार्यक्रम छत्तीसगढ़ प्रिंसिपल एसोसिएशन के माध्यम से उनके विधानसभा क्षेत्र रायपुर उत्तर में आयोजित किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण व्यवस्था वे स्वयं करेंगे।

प्राचार्य पदोन्नति के बाद भी अध्यापन से जुड़े रहें – कुल सचिव

विशिष्ट अतिथि डॉ. शैलेंद्र पटेल ने कहा कि पदोन्नति के बाद भी प्राचार्यों को अध्यापन कार्य से जुड़े रहना चाहिए तथा नियमित रूप से कम से कम दो कालखंड पढ़ाना चाहिए।

2800 पदोन्नतियों के लिए सरकार का आभार – अनिल शुक्ला

प्रिंसिपल एसोसिएशन के प्रांतीय संयोजक श्री अनिल शुक्ला ने स्वागत उद्बोधन में सभी पदोन्नत प्राचार्यों को बधाई दी। उन्होंने पदोन्नति प्रक्रिया में संचालनालय से न्यायालय तक संघर्ष में साथ देने वाले साथियों, मुख्यमंत्री एवं स्कूल शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि बीते छह माह में 2800 प्राचार्य, व्याख्याता सहित लगभग 10,000 शिक्षकों एवं प्रधानपाठकों की पदोन्नति पारदर्शिता के साथ की गई है।
प्रदेश के प्राचार्यों को एक मंच पर लाने हेतु छत्तीसगढ़ प्रिंसिपल एसोसिएशन को फर्म्स एवं सोसाइटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत कराया गया है। इस अवसर पर सर्वसम्मति से श्री अनिल शुक्ला को पुनः प्रांतीय संयोजक चुना गया।

मानसिक स्वास्थ्य पर व्याख्यान एवं टेलीफिल्म का प्रदर्शन

शैक्षिक संगोष्ठी में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रियंवदा श्रीवास्तव एवं उनकी टीम द्वारा छात्रों में मानसिक दबाव एवं अवसाद विषय पर व्याख्यान तथा जागरूकता आधारित टेलीफिल्म का प्रदर्शन किया गया।
नौ सूत्रीय मांग पत्र का वाचन
प्रिंसिपल एसोसिएशन के नौ सूत्रीय मांग पत्र का वाचन श्री राकेश शर्मा द्वारा किया गया। अतिथियों का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया।

प्रदेशभर से बड़ी संख्या में प्राचार्य रहे उपस्थित

कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर श्री हिमांशु भारतीय, विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि ओ.पी. शर्मा, करण सिंह अटेरिया, विद्या भूषण दुबे, गोपाल साहू, जितेंद्र सिंह ठाकुर, सुनील यादव, सूरज प्रसाद देवांगन सहित कोरिया से बस्तर तक सुदूर जिलों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष प्राचार्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य शिरीष तिवारी ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्याम कुमार वर्मा द्वारा किया गया।
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कुरुषनार में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए बनेगा अतिरिक्त कक्ष- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरुषनार स्थित बालक आश्रम पहुंचकर छात्रों से रूबरू हुए आश्रम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों की मांग पर यहां अतिरिक्त कक्ष निर्माण की स्वीकृति प्रदान की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने यहां उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया। इस मौके पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा और वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा कि कहा आप सभी खूब पढ़ाई करें और अपने माता पिता सहित देश प्रदेश का नाम गौरव करें। उन्होंने आश्रम में रहने वाले विद्यार्थी रामजी से कहा की आप पढ़ लिखकर क्या बनना चाहते हैं तब रामजी ने कहा की मैं बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूँ। तब मुख्यमंत्री ने उनकी प्रशंसा की और मेहनत से पढ़ाई करने की समझाइश दी। इसी तरह छात्र सोप सिंह ने मुख्यमंत्री को पहाड़ा सुनाया। स्कूली बच्चों से संवाद के दौरान कक्षा दूसरी में पढ़ने वाला आदित्य ने मुख्यमंत्री से पूछा आपको स्कूल जाने में कैसा लगता था? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे स्कूल जाना अच्छा लगता था। बचपन में पढ़ाई को भरपूर समय दे, बड़ा आदमी बनने के लिए पढ़ाई आवश्यक है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता की जानकारी ली और कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। इस मौके पर स्कूली बच्चों ने मुख्यमंत्री को अंतरिक्ष अभियान के मॉडल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने मॉडल प्रदर्शित करने वाले सभी विद्यार्थियों को खूब पढ़ाई करने और वैज्ञानिक बनने का प्रयास के लिए बधाई दी।

उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शासकीय कार्यक्रमों की क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत देखने कुरूषनार के शासकीय उचित मूल्य दुकान पहुंचे। उचित मूल्य दुकान में मौजूद राशनकार्डधारियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि उन्हें नियमित रूप से समय पर राशन मिल रहा है। 

मुख्यमंत्री ने उचित मूल्य दुकान में मौजूद डुटाखार के मेहरो, दशरी, तिलो एवं सुनिता, गुमियाबेड़ा की रजनी बाई एवं अनिता और ग्राम कंदाड़ी की वीणाबाई से आत्मीयतापूर्वक बातचीत की और उनके परिवार के सदस्यों की जानकारी भी ली। इन सभी ने बताया कि उन्हें हर माह चांवल मिल रहा है और इसकी गुणवत्ता अच्छी है।

मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान उचित मूल्य दुकान में स्टॉक की उपलब्धता, रखरखाव , साफ सफाई, स्टॉक रजिस्टर, भंडारण क्षमता आदि की जानकारी ली। गौरतलब है कि शासकीय उचित मूल्य दुकान से आसपास के 12 गांव आलवर, कंदाड़ी, कुरुषनार, कोडोली (विरान), गुमियबेड़ा, जिवलापदर, अरसगढ़, डुटाखार, कंकाल, जामपारा, कावड़वार और नदीपारा संलग्न है तथा 408 राशन कार्ड धारकों को राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का हुआ लोकार्पण

  राज्यपाल श्री रमेन डेका की पहल पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में स्थापित महान संत, समाज सुधारक और सांस्कृतिक चेतना के प्रणेता श्रीमंत शंकरदेव के विचारों, दर्शन और साहित्य को समर्पित शोध संस्थान का भव्य लोकार्पण आज गरिमामय समारोह में सम्पन्न हुआ। 


इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल श्री रमेन डेका ने की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, डॉ. कृष्ण गोपाल जी सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सहित शिक्षा जगत के विद्वान, शोधार्थी, युवा वर्ग तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इसके साथ ही पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के मध्य एम.ओ.यू. पर भी हस्ताक्षर किया गया। एम.ओ.यू. के पश्चात दोनों ही विश्वविद्यालय के शोधार्थी एक-दूसरे विश्वविद्यालय में अंतरविषयक अनुसंधान कर सकेंगे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, सामानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। 

श्री डेका ने कहा कि इस शोध पीठ की स्थापना उत्तर पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को अकादमी एवं शोध के स्तर पर जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह शोध पीठ भारत की महान संत परंपरा, भक्ति आंदोलन और सामाजिक सुधारों पर केंद्रित अध्ययन का सशक्त केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे अकादमिक प्रयास देश की सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करते हैं। 

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस शोध पीठ के संचालन हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 2 करोड़ रूपये दिए गए हैं जिसके लिए उन्हांेने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। 

राज्यपाल ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव ने समाज सुधारक, शिक्षाविद, कलाकार, नाटककार, नाट्य निर्देशक, चित्रकार, साहित्यकार, गीतकार, संगीत और वैष्णव धर्म के प्रवर्तक व प्रचारक के रूप में ख्याति अर्जित की है। श्रीमंत शंकर देव को उत्तर पूर्व भारत के महान समाज सुधारक बताते हुए कहा कि उन्होंने जाति, वर्ग और धर्म से ऊपर उठ कर समरस समाज की कल्पना की। नामघर और सत्र परंपरा के माध्यम से उन्होंने समानता, करूणा और उदारता पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया। श्रीमंत शंकर देव द्वारा रचित साहित्य अंकिया नाट और बोरगीत आज भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। उनके विचारों ने असमिया समाज को एक सूत्र में पिरोया और सामाजिक चेतना को नई दिशा दी। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि पूज्य शंकरदेव जी का कार्यक्षेत्र भले ही असम था, लेकिन उनके द्वारा सामाजिक जागरण का जो कार्य किया गया, उसका प्रभाव संपूर्ण देश पर पड़ा। श्रीमंत शंकर देव जी द्वारा रचित साहित्य, नाटक, भजन में भारतीय संस्कृति का उद्घोष है।. हमारा देश अपनी एकता और अखंडता के लिए जाना जाता है। इसके पीछे श्री शंकरदेव जी जैसे भारत माता के सपूत हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की संस्कृति को समर्पित किया। वर्तमान और नई पीढ़ी को अपने पूर्वजों के योगदान को बताकर हम एक सक्षम और समृद्ध भारत बना सकते हैं। इससे लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार होता है। श्री शंकर देव जी ने अपनी एक रचना में कहा कि भारत भूमि में जन्म लेना सबसे सौभाग्य की बात है। उन्होंने 500 वर्ष पहले एक भारत का जो संदेश दिया, उसे आज हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘ का नारा देकर साकार कर रहे हैं। 

मुख्य वक्ता डॉ कृष्ण गोपाल जी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा असम राज्य विविधताओं से भरा हुआ है। यहां विविध प्रकार की जनजाति भौगालिक, नदी, पहाड़, जंगल, घने वन उपस्थित है। जिस कारण यहां हजारों वर्षों से दूर दूर विविध जनजाति निवास करते है। इन जनजातियों को एक सूत्र में बांधने का महत्वपूर्व कार्य श्रीमंत शंकर देव ने किया। उन्होंने श्री कृष्ण भक्ति के माध्यम से किया लोगो को जोड़ा। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख व्यक्तिव है उन्होंने भक्ति के साहित्य का लेखन किया, नाट्य, गायन खड़े प्रशिक्षण दिया। गांव गांव में नाम घर की स्थापना किए। आज असम के हर गांव है जिसे नाम स्थापित है। भक्ति, संस्कृति एवं सामाजिक सद्भाव का घर कहलाता है। उन्होंने श्रीमंत शंकर देव के योगदान पर विस्तृत प्रकाश डाला।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने कहा कि श्रीमंत शंकरदेव ने शिक्षा को केवल साक्षरता तक सीमित न रखकर उसे संस्कार और संस्कृति से जोड़ा। यह शोध संस्थान केवल भवन नहीं, बल्कि विचारों की कार्यशाला बनकर उभरेगा। यहाँ से निकलने वाले शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पहचान दिलाएंगे। 

कार्यक्रम के अंत में संस्थान की स्थापना से जुड़े सभी सहयोगियों और प्रबंधन समिति को बधाई देते हुए आशा व्यक्त की गई कि यह केंद्र भविष्य में ज्ञान, नवाचार और सत्य की खोज का प्रमुख केंद्र बनेगा तथा वसुधैव कुटुम्बकम् के संदेश को विश्व पटल पर स्थापित करेगा।

गौरतलब है श्रीमंत शंकरदेव शोध पीठ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत तथा मध्य भारत के भक्ति आन्दोलन से जुड़े महान संतों के योगदान एवं व्यापक प्रभाव को भारतीय जनमानस के समक्ष लेकर आना साथ ही दोनों ही क्षेत्रों के जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपरा को लेखबद्ध करना है। शोधपीठ के द्वारा शोधवृत्ति भी शोधार्थियों को प्रदान किया जाएगा। शोधपीठ में भाषा, साहित्य, इतिहास, प्राचीन भारतीय इतिहास, क्षेत्रीय अध्ययन, समाजशास्त्र एवं समाजकार्य के विषय के शोधार्थी शोधकार्य कर सकते हैं।
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परीक्षा पे चर्चा 2026 के प्रथम चरण में महासमुंद की बेटी कु. सृष्टि साहू का हुआ चयन

 परीक्षा पे चर्चा के नवें संस्करण में इस वर्ष भी विद्यार्थियों, पालकों एवं शिक्षकों में व्यापक उत्साह देखने को मिला। पंजीयन की अंतिम तिथि 11 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ राज्य से कुल 29.29 लाख प्रतिभागियों ने पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया। यह आंकड़ा गत वर्ष की तुलना में 7.16 लाख अधिक है, जो कार्यक्रम के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है।


गत वर्ष पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम स्थान पर रहा था, जबकि इस वर्ष अंडमान एवं निकोबार, चंडीगढ़ एवं लक्षद्वीप के बाद राज्य को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि इस वर्ष राज्य से 1.41 लाख पालकों द्वारा पंजीयन किया गया, जो पालकों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का स्पष्ट संकेत है।

प्रथम चरण की चयन प्रक्रिया

प्रथम चरण में विद्यार्थियों के चयन हेतु जिलों से विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों से संबंधित वीडियो आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित तिथि तक कुल 171 विद्यार्थियों के वीडियो प्राप्त हुए। गठित समिति द्वारा इन वीडियो का गहन परीक्षण किया गया, जिसके उपरांत 18 विद्यार्थियों का चयन कर उनका विवरण केंद्र को भेजा गया। चयनित विद्यार्थियों में पीएमश्री विद्यालय से 04, सेजस से 06, निजी विद्यालयों से 04, शासकीय विद्यालयों से 03 तथा केजीबीव्ही से 01 विद्यार्थी शामिल हैं।

कु. सृष्टि साहू का केंद्रीय स्तर पर चयन

केंद्र की समिति द्वारा महासमुंद जिले के स्वामी आत्मानंद विद्यालय, नयापारा की गणित संकाय की कक्षा 12वीं की छात्रा कु. सृष्टि साहू का चयन किया गया है। कु. सृष्टि साहू, पिता श्री नरेन्द्र कुमार साहू एवं माता श्रीमती दिनेश्वरी साहू को 21 जनवरी 2026 को दिल्ली में आयोजित परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया गया है।

प्रशासन एवं शाला परिवार की प्रतिक्रिया

कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगहे ने उनसे भेंट कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शाला की प्राचार्या श्रीमती अमी रूफस ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि कु. सृष्टि एक अनुशासित, परिश्रमी एवं अध्ययनशील छात्रा है। उन्होंने यह भी बताया कि कु. सृष्टि बाल दिवस के अवसर पर शाला नायक की भूमिका में प्राचार्य की कुर्सी पर बैठकर नेतृत्व प्रदान कर चुकी है।

परिवार का गर्व और सहयोग

कु. सृष्टि साहू के पिता शासकीय विद्यालय में शिक्षक हैं तथा माता गृहणी हैं। दोनों ने अपनी पुत्री के चयन पर गर्व एवं प्रसन्नता व्यक्त की है और इसे परिवार के साथ-साथ जिले के लिए भी गौरव का विषय बताया है।

शाला एवं विभागीय प्रयासों की सराहना

शाला प्राचार्य के अनुसार विद्यालय के सभी शिक्षकों द्वारा परीक्षा पे चर्चा में विद्यार्थियों के पंजीयन हेतु विशेष प्रयास किए गए। विद्यालय में 100 प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित किया गया तथा विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास भी कराया गया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।

कु. सृष्टि साहू के चयन पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री विजय कुमार लहरे एवं शिक्षा विभाग द्वारा हार्दिक बधाई दी गई। छात्रा के दिल्ली प्रवास से संबंधित आवश्यक व्यवस्थाएं समय-सीमा में पूर्ण कराने में जिला परियोजना समन्वयक श्री रेखराज शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं राज्य परियोजना कार्यालय, समग्र शिक्षा रायपुर द्वारा भी महासमुंद जिले को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।

आगामी चरण की प्रतीक्षा

परीक्षा पे चर्चा 2026 के आगामी चरणों में और विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है, जिसके परिणामों की प्रतीक्षा की जा रही है।
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मंत्री श्री रामविचार नेताम ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक भ्रमण बस को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

 राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत जिले के प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के विद्यार्थियों के लिए आयोजित शैक्षणिक भ्रमण को कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह भ्रमण कलेक्टर श्री एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में समग्र शिक्षा के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत सूरजपुर जिले के लगभग 200 छात्र-छात्राओं को सरगुजा संभाग के प्रमुख शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों इंदिरा गांधी कृषि अनुसंधान केंद्र, आकाशवाणी केंद्र, दरिमा हवाई पट्टी, ठिनठिनी पत्थर तथा संजय पार्क का भ्रमण कराया जा रहा है। छात्र-छात्राएं महिला एवं पुरुष गाइड शिक्षकों के नेतृत्व में इन संस्थानों का अवलोकन कर आधुनिक कृषि तकनीक, रेडियो प्रसारण प्रणाली तथा हवाई यातायात संचालन से संबंधित व्यवहारिक ज्ञान प्राप्त करेंगे।

इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नवाचार और व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना है, जिससे उनका शैक्षणिक विजन व्यापक हो और वे पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविक जीवन के अनुभव प्राप्त कर सकें। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हो रहा है।

इस अवसर पर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व अध्यक्ष श्री भीमसेन अग्रवाल, वरिष्ठ समाजसेवीजन सर्वश्री मुरली मनोहर सोनी, राम कृपाल साहू, शशिकांत गर्ग, संदीप अग्रवाल,  कौशल प्रताप सिंह, संत सिंह, अरविंद मिश्रा, राजेश महलवाला, शंकर जिंदिया, अजय अग्रवाल, राजेश्वर तिवारी, शैलेश अग्रवाल, देव गुप्ता, अशोक अग्रवाल, संस्कार अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थित रही। 

शैक्षणिक विभाग की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी श्री अजय कुमार मिश्रा, जिला मिशन समन्वयक श्री मनोज कुमार साहू, एपीसी श्री शोभनाथ चौबे, बीआरपी गाइड शिक्षक श्री टंडन, श्री विनोद यादव, श्री हर्ष नारायण शर्मा, श्री गौतम शर्मा, श्री अजीत कुमार गुप्ता, श्री अजय उपाध्याय, श्री श्रीकांत पाण्डेय, श्री लौकेश साहू एवं श्रीमती ज्योति साहू उपस्थित थी। 

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परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि: पालक सहभागिता में देश में प्रथम

 प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा को तनावमुक्त उत्सव के रूप में मनाने की पहल “परीक्षा पे चर्चा 2026” में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ ने पालकों की भागीदारी में प्रथम स्थान हासिल कर पूरे देश में उदाहरण प्रस्तुत किया है। 


अब तक छत्तीसगढ़ से 25.16 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन किया है, जिनमें 22.75 लाख विद्यार्थी, 1.55 लाख शिक्षक और 81,533 पालक शामिल हैं। यह उपलब्धि राज्य में परीक्षा प्रबंधन, समय प्रबंधन, पालकों को अपने बच्चों को परीक्षा में अधिक अंक लाने हेतु अनावश्यक दबाव देने से बचने तथा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किए जा रहे सुनियोजित प्रयासों को दर्शाती है।

'परीक्षा पे चर्चा' में पालकों की भागीदारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में प्रथम स्थान पर है। कुल पंजीयन के मामले में छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्तर पर चौथे स्थान पर है।  बलोदाबाजार जिले में 14,658 तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 9,952 पालकों द्वारा पंजीयन किया गया है, जो इस अभियान के प्रति अभिभावकों की बढ़ती जागरूकता, सहभागिता और विश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल संख्यात्मक सफलता नहीं है, बल्कि यह परीक्षा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव का भी संकेत देती है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे राज्य में अपनाई गई नवाचारपूर्ण रणनीतियाँ महत्वपूर्ण रही हैं। जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित की गई, शिक्षक प्रशिक्षण केंद्रों पर ऑन-साइट पंजीयन की व्यवस्था की गई तथा युवा क्लब और “अंगना म शिक्षा कार्यक्रम” के माध्यम से समुदाय को बड़े पैमाने पर जोड़ा गया। 

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” से एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन दर्ज हुए, जबकि इससे पहले प्रतिदिन औसत पंजीयन लगभग 1500 के आसपास था। पिछले प्रयासों के रूप में आयोजित शिक्षक-पालक सम्मेलन और मेगा पीटीएम ने भी अभिभावकों की सजगता और सहभागिता को नई दिशा दी है।

परीक्षा पे चर्चा से जुड़े प्रेरक अनुभव भी लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम में शामिल हुई कु. युक्तामुखी ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस वर्ष अधिक से अधिक विद्यार्थियों से पंजीयन कर अपने प्रश्न पूछने की अपील की है। उनका प्रेरक संदेश विद्यार्थियों में उत्साह, आत्मविश्वास और सक्रिय सहभागिता की भावना जागृत कर रहा है। 

इसी प्रकार सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में शीतकालीन अवकाश के दौरान आयोजित “परीक्षा पे चर्चा मेला” में सभी विद्यालयों, समुदाय, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और इस आयोजन के परिणामस्वरूप एक ही दिन में 10,000 से अधिक पंजीयन हुए। इस सफलता से प्रेरित होकर छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी परीक्षा पे चर्चा मेलों का आयोजन किया जा रहा है और लोग उत्साहपूर्वक इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में परीक्षा पे चर्चा में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शिक्षक प्रशिक्षण स्थलों पर ही पंजीयन की व्यवस्था की गई। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पंजीयन प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई और वहीं पर पंजीयन कराने में सहयोग दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों द्वारा बहुत बड़ी संख्या में पंजीयन किया गया। 

पंजीयन प्रक्रिया 11 जनवरी 2026 तक खुली रहेगी और इस बात की पूरी संभावना है कि छत्तीसगढ़ में 30 लाख से अधिक पंजीयन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि “परीक्षा पे चर्चा” माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का वार्षिक संवाद कार्यक्रम है, जिसमें वे विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों से सीधे संवाद करते हैं। इस संवाद में परीक्षा से जुड़ी चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया जाता है तथा पालकों को यह संदेश भी दिया जाता है कि वे अधिक अंक लाने के लिए अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास बढ़ाएँ। यह पहल अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है और परीक्षा को तनाव का विषय न मानकर उत्सव के रूप में मनाने की व्यापक सामाजिक चेतना विकसित कर रही है।

“परीक्षा पे चर्चा 2026 में छत्तीसगढ़ द्वारा प्राप्त की गई यह उपलब्धि पूरे राज्य के विद्यार्थियों, शिक्षकों और पालकों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा परीक्षा को तनाव नहीं बल्कि उत्सव के रूप में मनाने का जो संदेश दिया गया है, उसे छत्तीसगढ़ ने दिल से अपनाया है। कुल पंजीयन में देश में चौथा स्थान और पालक सहभागिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना इस बात का प्रमाण है कि हमारे यहां अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है और वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनका आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि इसी उत्साह के साथ हम 30 लाख से अधिक पंजीयन के लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे और परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के इस अभियान को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाते रहेंगे।” - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से भारतीय ज्ञान परम्परा को नया आयाम

 राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और भारतीय ज्ञान प्रणाली के एकीकरण पर केंद्रित “एक समग्र शैक्षिक परिकल्पना” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ आज शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, रायपुर में किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा एवं कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहब ने संयुक्त रूप से किया।


भारतीय ज्ञान परम्परा अतीत नहीं, भविष्य की राह दिखाने वाली – श्री टंकराम वर्मा

     उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय सभ्यता और संस्कृति की महान विरासत को सुदृढ़ करने वाली नीति है। यह केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र एवं संतुलित शैली प्रस्तुत करती है।उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, महाभारत, आयुर्वेद, योग, गणित, दर्शन, ज्योतिष और खगोल शास्त्र जैसी भारतीय ज्ञान विधाएं हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। गुरुकुल परम्परा में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और समाज सेवा था।
     मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि आधुनिक समय में भारतीय ज्ञान परम्परा को पुनः शिक्षा व्यवस्था में आत्मसात करने की आवश्यकता है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 इसी दिशा में सशक्त कदम है। यह नीति प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के 2047 विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

आधुनिकता और संस्कृति का संतुलन ही नई पीढ़ी का मार्ग – श्री गुरु खुशवंत साहेब

     कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 आने वाली पीढ़ी को आधुनिक तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ने का कार्य करती है।
    उन्होंने बताया कि राज्य सरकार नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि शिक्षा व्यवस्था को व्यवहारिक, रोजगारोन्मुख और संस्कारयुक्त बनाया जा सके। यह नीति भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति का गहन अध्ययन और सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. अतुल कोठारी

     विशिष्ट अतिथि एवं राष्ट्रीय सचिव, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का गहन अध्ययन कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन समय की मांग है। सभी शिक्षाविदों को मिलकर इस नीति को धरातल पर उतारने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

शिक्षाविदों और कुलपतियों की गरिमामयी उपस्थिति

     कार्यक्रम में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग डॉ. संतोष कुमार देवांगन, शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय बस्तर के कुलपति प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. ए.डी.एन. वाजपेई, पंडित सुंदरलाल शर्मा विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति प्रो. वीरेंद्र कुमार सारस्वत, छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई के कुलपति डॉ. अरुण अरोरा सहित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नोडल अधिकारी, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि एवं प्रदेशभर के महाविद्यालयों के प्राचार्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
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मुख्यमंत्री श्री साय से शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री साय को शहीद वीर नारायण सिंह जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।


शहीद वीर नारायण सिंह जयंती के अवसर पर यह भव्य समारोह 15 दिसंबर 2025 को रायपुर में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी छात्र-छात्राओं द्वारा शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास, पेंशन बाड़ा, रायपुर में शाम 7 बजे से किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आयोजन की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कार्यक्रम के सफल आयोजन की कामना की। इस अवसर पर छात्रावास अध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम नेताम सहित छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ला के स्वास्थ्य लाभ की कामना की

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज शाम राजधानी रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पहुँचे और वहां उपचाररत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ साहित्यकार श्री विनोद कुमार शुक्ला से मुलाकात कर  उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने चिकित्सकों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी प्राप्त की और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि श्री विनोद कुमार शुक्ल भारतीय साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सृजनशीलता, संवेदना और सरल भाषा में गहन अनुभूतियों की अभिव्यक्ति देश और प्रदेश—दोनों को गौरवान्वित करती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा एवं छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा उपस्थित थे।
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शिक्षा ही सामाजिक विकास का मूलमंत्र : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

सामाजिक विकास का वास्तविक आधार शिक्षा है। चाहे जीवन जीने की कला हो, व्यापार हो, कृषि हो या कोई अन्य क्षेत्र — हर क्षेत्र में सफलता का पहला कदम शिक्षा ही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रदेश सर्व रविदास समाज के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री साय ने मंच पर सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रारंभ से ही शिक्षा के स्तर को उन्नत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राज्य गठन के समय जहाँ मात्र एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज प्रदेश में लगभग 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। इसी प्रकार, छत्तीसगढ़ में आईआईटी, ट्रिपल-आईटी, आईआईएम, लॉ यूनिवर्सिटी, एम्स, सिपेट जैसे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को बड़े अवसर प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि समाज को मजबूत और संगठित होना समय की आवश्यकता है, क्योंकि संगठित समाज ही राष्ट्र निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मूलमंत्र — “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” — का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार राज्य सरकार 23 महीनों से सभी वर्गों के हित में काम कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हाल के महीनों में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमें अन्नदाताओं के लिए कृषक उन्नति योजना, प्रत्येक परिवार को पक्का मकान देने हेतु प्रधानमंत्री आवास योजना, माताओं और बहनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने वाली महतारी वंदन योजना, दूरस्थ अंचलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु शिक्षक युक्तियुक्तकरण जैसे कदम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अब तक विभिन्न विभागों में 10 हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं पूर्ण निष्पक्षता के साथ संपन्न कराई गई हैं, जिससे युवाओं में नया विश्वास उत्पन्न हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने नई उद्योग नीति लागू की है, जिससे स्थानीय लोगों को अधिक अवसर, रोज़गार और स्वरोजगार प्राप्त हो सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समाज के लोगों से आग्रह किया कि वे अधिकाधिक संख्या में शासन की योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ।

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा ने भी संबोधित किया और नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी।

इस अवसर पर सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय मेहरा, रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कांवरे, श्री दिलीप वासनीकर सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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