शिक्षा

बारहवीं में पढ़ रहे रायपुर प्रयास विद्यालय के 32 बच्चों ने किया है इस साल जेईई एडवांस्ड क्वालीफाई

 राजधानी रायपुर का प्रयास विद्यालय नामी कोचिंग संस्थानों को टक्कर दे रहा है। बारहवीं में पढ़ रहे यहां के 32 बच्चों ने जेईई (Joint Entrance Examination) एडवांस्ड क्वालीफाई कर देश की विभिन्न आईआईटी (Indian Institute of Technology) और समकक्ष राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश के लिए पात्रता हासिल की है। देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों (आईआईटी एवं समकक्ष) में प्रवेश पाने वाले ज्यादातर विद्यार्थी बारहवीं के बाद एक-दो वर्ष की तैयारी वाले होते हैं। लेकिन प्रयास विद्यालय के 32 बच्चों ने बारहवीं की पढ़ाई के साथ-साथ ही देश के श्रेष्ठ एवं प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में प्रवेश का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है। राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली जेईई की कठिन प्रतियोगी परीक्षा में देशभर के लाखों बच्चे बैठते हैं।


हाल ही में 9 जून को घोषित जेईई एडवांस्ड के नतीजों में रायपुर प्रयास विद्यालय के कुलदीप कुमार ने ऑल इंडिया केटेगरी रैंक 459 हासिल किया है। वहीं ओमप्रकाश नेताम को ऑल इंडिया केटेगरी रैंक 473 और रुद्राक्ष भगत को ऑल इंडिया केटेगरी रैंक 825 मिला है। ये तीनों बच्चे राज्य के सुदूर मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोंडागांव और सरगुजा के गरीब आदिवासी परिवारों से आते हैं। इनके साथ पढ़ने वाले त्रिलोक पैंकरा ने ऑल इंडिया केटेगरी रैंक 1123, लीलाधर ठाकुर ने 1174, पंकज रावटे ने 1592, गैंद लाल ने 1638, आदर्श राज पैंकरा ने 1661 और शुभम कश्यप ने 1801 ऑल इंडिया केटेगरी रैंक हासिल की है। ये सभी भी राज्य के सुदूर अधिसूचित विकासखंडों के कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवारों के बच्चे हैं। प्रयास विद्यालय के शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में इन बच्चों ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। 

रायपुर का प्रयास विद्यालय कक्षा नवमीं से बारहवीं तक की पढ़ाई के साथ ही होनहार आदिवासी नौनिहालों का आईआईटी, एनआईटी एवं समकक्ष श्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में पढ़ने का सपना पूरा कर रहा है। विगत अप्रैल में यहां के 64 बच्चों ने जेईई मेन्स (JEE Mains) क्वालीफाई कर जेईई एडवांस्ड के लिए पात्रता हासिल की थी जिनमें से 32 बच्चों ने अब जेईई एडवांस्ड भी क्वालीफाई कर लिया है। जेईई एडवांस्ड क्वालीफाई करने वाले बच्चे जहां देश की विभिन्न आईआईटी एवं समकक्ष संस्थानों में प्रवेश ले सकेंगे, वहीं जेईई मेन्स क्वालीफाई करने वाले बच्चे एनआईटी (National Institute of Technology) एवं समकक्ष संस्थानों में पढ़ने का अपना सपना पूरा करेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली जेईई की कठिन प्रतियोगी परीक्षा क्वालीफाई कर पिछले पांच वर्षों में प्रयास विद्यालय रायपुर के 51 छात्रों ने देश की विभिन्न आईआईटी में प्रवेश प्राप्त किया है। वहीं राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) में 94 बच्चों का चयन हुआ है। 

रायपुर के सड्डू स्थित प्रयास विद्यालय में राज्य के वनांचल और दूरस्थ अधिसूचित क्षेत्रों के बच्चे पढ़ रहे हैं। कक्षा नवमीं से बारहवीं तक यहां करीब 700 बच्चे अध्ययनरत हैं। शिक्षण सत्र 2023-24 में गणित विषय (PCM) लेकर 166 छात्र पढ़ रहे थे। प्रयास विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मंजुला तिवारी बताती हैं कि ग्यारहवीं और बारहवीं के बच्चों को यहां बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दृष्टिकोण से अध्यापन किया जाता है। स्कूल में ही दोनों तरह की पढ़ाई के कारण बच्चे बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के बौद्धिक स्तर और कक्षा में प्रदर्शन के अनुसार अलग-अलग समूहों में बांटकर अध्ययन संबंधी उनकी समस्याओं को दूर किया जाता है। आईआईटी और एनआईटी जैसे संस्थानों के साथ ही प्रयास विद्यालय के बहुत से बच्चे हर साल अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी चयनित होते हैं।
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गुरुकुल परंपरा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है: स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल

 गुरुकुल परंपरा, शिक्षा का एक प्राचीन भारतीय दर्शन रहा है, जो ज्ञान और चरित्र निर्माण पर केंद्रित हैं। गुरुकुल परंपरा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान प्रदाय करना ही नहीं था, बल्कि छात्रों को आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों का भी शिक्षा देना था। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली ने सदियों से ज्ञान का संरक्षण और प्रसार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह बात शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने आज महादेव घाट रोड स्थित मोतीपुर अमलीडीह में सहजानंद अंतरराष्ट्रीय गुरुकुल रायपुर छत्तीसगढ़ के नूतन गुरुकुल के भूमिपूजन के अवसर पर कही। श्री अग्रवाल ने नूतन गुरूकुल का भूमिपूजन कर परिसर में वृक्षारोपण किया।


शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए हमे शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने की आवश्यकता है। जिसमें गुरुकुल परंपरा अहम भूमिका निभायेगी। भारत की गुरुकुल प्रणाली शिक्षा और संस्कृति का एक अनूठा संगम रहा हैं। जिसके कारण विश्व में भारत की एक अलग पहचान है। गुरुकुल परंपरा से ही संस्कार, संस्कृति, शिष्टाचार, समाजिक जागरुकता, मौलिक व्यक्तित्व, बौद्धिक विकास जैसे अमूल्य गुणों को अपनी आने वाली पीढ़ियों को विरासत में दे सकते हैं।

शिक्षा मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि भारत की इस दिव्य विरासत जीवित रखने के लिए यहां गुरुकुल की स्थापना की जा रही है। उन्होंने इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए शास्त्री श्री घनश्याम प्रकाश दासजी एवं श्री कृष्णवल्लभ दासजी के प्रति आभार प्रकट किया।
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औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में छात्रावास अधीक्षक एवं अधीक्षिका के पदों पर दस्तावेज सत्यापन 13 जून को

 राज्य की शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं में छात्रावास अधीक्षक एवं छात्रावास अधीक्षिका के पदों पर अभ्यर्थियों का छठवें चरण का दस्तावेज सत्यापन 13 जून को प्रातः 09:30 बजे से शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, रायपुर, विधान सभा रोड, सड्डू, रायपुर में किया जाएगा।  दस्तावेज सत्यापन हेतु संबंधित अभ्यर्थियों को एसएमएस/व्हाट्सएप्प पर भी सूचना भेजी जा रही है। कट ऑफ मार्क्स संचालनालय की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। उक्त चरण में रिक्त पदों के विरूद्ध 03 गुना अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन हेतु बुलाया गया है। सभी अभ्यर्थी अद्यतन जानकारी हेतु निरंतर संचालनालय की वेबसाइट https://cgiti.cgstate.gov.in/ तथा अपने लॉगिन आईडी का नियमित अवलोकन करते रहें। दस्तावेज सत्यापन उपरांत संबंधित अभ्यर्थी आगामी दिवस को दोपहर 01:00 बजे तक उसी स्थल पर पंजीयन प्रभारी के पास अपना दावा/ आपत्ति भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

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लेखा प्रशिक्षण परीक्षा नवम्बर-2023 से फरवरी-2024 का परीक्षाफल जारी

 छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत शासकीय सेवकों के लिए लेखा प्रशिक्षण परीक्षा का आयोजन प्रतिवर्ष 03 सत्रों (मार्च-जून, जुलाई-अक्टूबर, नवम्बर-फरवरी) में संचालनालय कोष लेखा एवं पेंशन छत्तीसगढ़ द्वारा किया जाता है। इस प्रशिक्षण में राज्य शासन के आधीन कार्यरत सहायक ग्रेड वर्ग-3, अन्य लिपिक वर्गीय कर्मचारी जिन्होंने तीन वर्ष की सेवा पूर्ण कर ली वे प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु संबंधित कार्यालय द्वारा नामांकित किए जाते है। लेखा प्रशिक्षण परीक्षा में प्रथम प्रयास में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले परीक्षार्थियों को एक अग्रिम वेतन वृद्धि का लाभ प्रदाय किया जाता है। संचालनालय कोष लेखा एवं पेंशन द्वारा प्रशिक्षण सत्र नवम्बर-2023 से फरवरी-2024 का परीक्षा परिणाम 06 जून 2024 को घोषित किया गया है।

 
संचालक कोष लेखा एवं पेंशन श्री महादेव कावरे ने बताया कि उक्त सत्र में कुल 246 परीक्षार्थियों में से 159 परीक्षार्थी उत्तीर्ण घोषित किए गए है। उत्तीर्ण परीक्षार्थियों का प्रतिशत 64.63 प्रतिशत रहा। 81 परीक्षार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए है।
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एकलव्य विद्यालय में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा में 81.83 प्रतिशत विद्यार्थी हुए शामिल

आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित प्रदेश भर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 वीं में प्रवेश के लिए इंट्रेंस एग्जाम सफलता पूर्वक सम्पन्न हो गया है। विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के निर्देश एवं कड़ी निगरानी में सचिव श्री नरेन्द्र दुग्गा के मार्गदर्शन में परीक्षा का आयोजन किया गया। 


एकलब्य विद्यालय में प्रवेश के लिए हुए परीक्षा में 29200 छात्र छात्राएं शामिल हुईं जबकि 35684  विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था, इसका प्रतिशत 81.83 रहा। परीक्षार्थियो का तिलक लगाकर स्वागत किया। परीक्षा परिणाम राज्य स्तर पर घोषित होगा और काउंसिलिंग पद्धति से प्रवेश दिया जाएगा। 

आदिम जाति विभाग के अधिकारियों ने आज यहाँ बताया कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के कक्षा 6वीं में सत्र 2024 - 25 में प्रवेश के लिए इंट्रेंस एग्जाम आयोजित की गई है। प्रदेश के 28 जिलों में परीक्षा केंद्र बनाया गया था। एकलव्य विद्यालय में प्रवेश के 29200 छात्र छात्राएं परीक्षा में शामिल हुईं। इसका प्रतिशत 81.83 रहा जबकि 6484 परीक्षार्थी एग्जाम में शामिल नहीं हुए। कुल 35,684 छात्र छात्राओ ने पंजीयन कराया था। इनमे 17 हजार 411 बालक और 18 हजार 273 बालिका शामिल हैं। एकलव्य शाखा प्रभारी उपायुक्त श्री प्रज्ञान सेठ द्वारा उक्त संबंध में आवश्यक लिखित निर्देश जारी कर अधिकारियों को कार्य सौंपे गए जिससे परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
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मतदान ख़त्म होते ही जारी होंगे 10-12वीं के परिणाम, माशीमं की तैयारी पूरी...

रायपुर: 10-12वीं के छात्र-छात्राओं के रिजल्ट का इंतजार अब खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल चुनाव के बाद 7 मई के बाद रिजल्ट जारी करने जा रहा है। जहां कक्षा 10 वीं की परीक्षा में 3 लाख 45 हजार 556 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वहीं 12 वीं की परीक्षा में 2 लाख 61 हजार 22 छात्र छात्राओं ने एग्जाम दिए थे।

माध्यमिक शिक्षा मंडल ने रिजल्ट घोषित करने को लेकर पूरी तैयारियां कर ली हैं। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की सचिव पुष्पा साहू ने बताया कि, कॉपियों के मूल्यांकन हो जाने से 10 दिन के अंदर रिजल्ट तैयार हो सकता है। ऐसे में एक या सात मई तक परीक्षा परिणाम जारी किये जा सकते हैं। पिछले साल की तरह इस साल भी अलग-अलग एक्टिविटिज में भाग लेने वाले छात्रों को बोनस अंक दिये जाएंगे। इस साल 22-39 छात्रों को बोनस अंक दिये जायेंगे।

छत्तीसगढ़ बोर्ड रिजल्ट 2024 का डायरेक्ट लिंक आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जारी होगा। रिजल्ट जारी होते ही स्टूडेंट्स वेबसाइट पर अपने परिणाम देख सकते हैं। वहीं 10वीं और 12वीं का रिजल्ट चेक करने के लिए छात्रों को अपना रोल नंबर दर्ज करना होगा।

ऐसे चेक करें अपना रिजल्ट
1. रिजल्ट देखने के लिए छत्तीसगढ़ माशिमं की आधिकारिक वेबसाइट cgbse.nic.in पर जायें।
2. जिस क्लास का रिजल्ट चेक करना है उस पर क्लिक करें।
3. मांगी गई डिटेल यानी रोल नंबर और दिया गया कैप्चा कोड भरकर सबमिट करें।
4. आपकी मार्कशीट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगी। यहां से आप रिजल्ट डाउनलोड कर कॉपी सुरक्षित रख लें।

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कलेक्टर ने किया स्कूल-आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण

नारायणपुर: कलेक्टर अजीत वसंत और जिला पंचायत सीईओ देवेश कुमार ने शुक्रवार को जिले के देवगांव के प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला देवगांव के बच्चों को नाश्ता एवं मध्यान्ह भोजन नियमित रूप से खिलाने के निर्देश दिये। उन्होंने निरीक्षण के दौरान कक्षा पांचवी के बच्चों से किताब पढ़ने के लिए कहा और बच्चों ने किताब पढ़कर सुनाया। कक्षा शिक्षक को हिदायत देते हुए कहा कि सभी बच्चों को नियमित रूप से अध्ययन कराएं, जिससे बच्चों के शिक्षा में गुणवत्ता मिल सके।

कलेक्टर ने कक्षा पांचवी के बच्चों की दर्ज की संख्या की जानकारी ली तथा उपस्थित शिक्षक से उनके पढ़ाने के विशय संबंधी जानकारी ली। उन्होंने निरीक्षण के दौरान दी जाने वाली नास्ता में उपमा, पोहा और दलिया प्रतिदिन बच्चों को उनके पसंद के अनुरूप समय पर खिलाने कक्षा शिक्षक को निर्देशित किये। भोजन प्रभारी शिक्षक प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन का जायजा लें ताकि भोजन गुणवत्ता युक्त खिलाया जा सके। निरीक्षण करते हुए प्राथमिक शाला के प्रधान अध्यापक को सभी बच्चों को युनिफार्म साफ सुथरे पहनकर आने विशेश ध्यान देने के निर्देश दिये। कलेक्टर ने मध्यान्ह भोजन बनाने वाले समूह के महिलाओं को साफ सफाई के साथ भोजन बनाने के लिए कहा तथा उनके मानदेय 800 रूपये प्रतिमाह दिये जाने की जानकारी दिये। पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण कर मध्यान्ह भोजन और नाश्ता नियमित रूप से खिलाने के निर्देश दिये। माध्यमिक शाला में उपस्थित शिक्षकों को निर्देशित करते हुए कहा कि कक्षा में दर्ज संख्या के अनुसार बच्चों के शतप्रतिशत उपस्थिति कराएं। उनके द्वारा प्राथमिक शाला के शिक्षकों की जानकारी लेते हुए नाश्ता मीनू के अनुसार समूह के माध्यम से बनाने के निर्देशित किया गया। उन्होंने कक्षा आंठवी के बच्चों की दर्ज संख्या की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान कक्षा में 12 बच्चे उपस्थित थे। उपस्थित बच्चों से उनको नाश्ता में दी जाने वाली उपमा, पोहा और दलिया के संबंध में उनके पसंद के बारे में पूछा। उन्होंने कक्षा आंठवी में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई नहीं छोड़ने और आगे की पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। कक्षा सांतवी के दर्ज संख्या अनुसार सभी बच्चे उपस्थित पाये गये। निरीक्षण के दौरान बच्चों द्वारा डस्टबीन का मॉडल बनाया जा रहा था, कलेक्टर ने बच्चों से डस्टबीन का उपयोग करने की समझाईश दी। कक्षा छठवीं के निरीक्षण के दौरान बच्चों द्वारा सौर मण्डल का मॉडल बनाया जा रहा था, उन्होंने बच्चों से किताब पढ़कर सुनाने को कहा तथा शिक्षा की गुणवत्ता का जायजा लिया।

 



उन्होंने स्कूल निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक एक देवगांव का भी निरीक्षण किया। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी में बच्चों को दी जाने वाली मूंगफली चिक्की, अण्डा नाश्ता और पोषण ट्रेकर की जानकारी ली। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से 3 से 6 वर्श के बच्चो में कुपोशण की जानकारी, बच्चों को गरम भोजन खिलाने तथा पर्यवेक्षक द्वारा किये जाने वाले निरीक्षण पंजी का जायजा लिया। कलेक्टर ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को निर्देशित करते हुए कहा कि आंगनबाड़ी में बच्चों की दर्ज संख्या बढ़ाये तथा बच्चों को अनौपचारिक शिक्षा भी नियमित रूप से दें। उनके द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र में बच्चों के लिए आने वाली सामग्रियों और पेयजल हेतु लगाए गये नल कनेक्शन का भी अवलोकन किया गया।

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10-12वीं मुख्य-अवसर परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर

रायपुर: छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी मुख्य व अवसर परीक्षा वर्ष 2024 के परीक्षा फार्म भरने की तिथियां घोषित कर दी है। सामान्य शुल्क के साथ परीक्षार्थी 31 अक्टूबर तक फार्म भर सकते हैं।


माध्यमिक शिक्षा मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार सामान्य शुल्क के साथ फार्म भरने की तिथि 10 अक्टूबर से शुरू हो गई है। मंडल के सचिव प्रोफेसर व्ही. के. गोयल ने बताया कि परीक्षार्थी विलंब शुल्क के साथ 1 से 15 नवम्बर तक और विशेष विलंब शुल्क के साथ 16 से 31 नवम्बर तक परीक्षा फार्म भर सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्वाध्यायी मुख्य एवं अवसर परीक्षा से संबंधित परीक्षार्थी शासकीय एवं अशासकीय अग्रेषण संस्थाओं के माध्यम से ऑनलाईन परीक्षा फार्म भर सकते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी मंडल की वेबसाईट www.cgbse.nic.in पर उपलब्ध है।

 

 

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जिले में स्वामी आत्मानंद कोचिंग योजना का शुभारंभ

 विशेषज्ञ शिक्षकों से ऑनलाइन कोचिंग के जरिए मिलेगा मार्गदर्शन

 

अम्बिकापुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घोषणानुसार इंजीनियरिंग व मेडिकल में प्रवेश के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा छात्र छात्राओं की मदद के लिए ऑनलाइन स्वामी आत्मानंद कोचिंग योजना का शुभारंभ विकासखण्ड अम्बिकापुर सहित सभी सातों विकासखण्डों में 25 सितंबर से किया गया। कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, केदारपुर में जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. संजय गुहे की उपस्थिति एवं प्राचार्य रूमि घोष की अध्यक्षता में योजना की शुरुआत की गई। इस दौरान रविशंकर पाण्डेय, सहायक परियोजना अधिकारी, एल.पी.गुप्ता, प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मणिपुर, आर.एल.मिश्र, प्राचार्य शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भी उपस्थित रहे।


इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ.संजय गुहे ने बताया कि स्वामी आत्मानंद कोचिंग योजना शासकीय शैक्षणिक शालाओं के कक्षा बारहवीं में अध्ययनरत गणित व जीवविज्ञान संकाय के उन छात्र एवं छात्राओं के लिए उपलब्ध रहेगी, जो इंजीनियरिंग आईआईटी व जेईई तथा मेडिकल पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु नीट की तैयारी करना चाहते हैं। स्वामी आत्मानंद ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था राज्य शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के माध्यम से छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की ओर से चयनित संस्थाओं की ओर से की जाएगी। इस कोचिंग में प्रवेश के लिए प्रत्येक विकासखण्ड के शासकीय शालाओं में कक्षा बारहवीं के अध्ययनरत 50-50 विद्यार्थियों को संबंधित प्री इंजीनियरिंग व प्री मेडिकल परीक्षा की तैयारी के लिए प्रवेश दिया जाएगा, जिसके मूल्यांकन के लिए एससीआरटी द्वारा मानक मूल्यांकन तैयार किया जाएगा। 

विकासखण्ड अम्बिकापुर के कोचिंग केन्द्र शास.उ.मा.वि.केदारपुर सहित समस्त विकासखण्डों में विद्यालय संचालन अवधि के पश्चात ऑफलाइन डाउट क्लासेस भौतिक, रसायन,जीवविज्ञान व गणित विषय के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के माध्यम से प्रतिदिन उपलब्ध करायी जाएगी। जहां विद्यार्थी विषयगत समस्याओं को संबंधित शिक्षकों से ऑफलाइन मोड में मार्गदर्शन प्राप्त कर निराकरण कर सकेंगे। इसके लिए विकासखण्ड अम्बिकापुर सहित जिले सभी विकासखण्डों के चयनित विषय विशेषज्ञ शिक्षक प्रतिदिन कोचिंग केन्द्र पर उपलब्ध रहेंगे।

 
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कलेक्टर ने किया स्वामी आत्मानंद विद्यालय पवनी-परसापाली का निरीक्षण

 स्कूलों की मरम्मत-जीर्णोद्धार शीघ्र पूरा करने दिए निर्देश

सारंगढ़-बिलाईगढ़: कलेक्टर डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी गुरुवार को बिलाईगढ़ विकासखंड के स्कूलों के दौरे पर रहीं। उन्होंने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय पवनी में बीईओ एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के एसडीओ और प्राचार्य से स्कूल की गतिविधियों, शिक्षक व्यवस्था और भवनों की मरम्मत, जीर्णोद्धार कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और किचन शेड एवं चबूतरा निर्माण के लिए जरूरी सुझाव दिए। इसके अलावा कलेक्टर ने विद्यालय में एक पुस्तकालय निर्माण की आवश्यकता पर जोर देते हुए सभी नवीन कार्यों में टाइल्स का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। साथ ही पुराने एवं जीर्ण-शीर्ण भवनों को ध्वस्त कर नवीन निर्माण कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

इसके पश्चात् डॉ. सिद्दीकी ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय परसापाली का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने स्कूल भवन में की जा रही मरम्मत और जीर्णोद्धार के कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी लेते हुए लिए जा रहे गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य करने हेतु निर्देशित किया, साथ ही विद्युतीकरण कार्यों के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने स्कूली बच्चों से पूछा कि भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। छात्र-छात्राओं ने अपनी इच्छा कलेक्टर के सामने व्यक्त की। डॉ. सिद्दीकी ने छात्र-छात्राओं से कहा कि यह सुनहरा समय है, भविष्य में जो भी बनना चाहते हैं, उसको ध्यान में रखते हुए अभी से पढ़ाई करें। कलेक्टर ने विद्यालय के प्राचार्य से बच्चों की पढ़ाई के संबंध में विषयवार जानकारी ली एवं कक्षाओं की नियमितता एवं बच्चों के व्यक्तित्व विकास के आंतरिक मूल्यांकन के संबंध में जानकारी ली। इस अवसर पर अपर कलेक्टर निष्ठा पाण्डेय तिवारी भी उपस्थित थीं।

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केन्द्रीय विद्यालय के बच्चों ने शिक्षकों के साथ देखी चन्द्रयान-3 की लैडिंग

 धमतरी : जिले में संचालित लोहरसी स्थित केन्द्रीय विद्यालय में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने साथ बैठकर चन्द्रयान-3 की चन्द्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग का अद्भुत और ऐतिहासिक नजारे को देखा। पूरे भारत सहित स्कूली बच्चों ने इस अभूतपूर्व अविस्मरणीय और ऐतिहासिक पल को टीवी चैनल के माध्यम से देखकर काफी रोमांचित हुए। इस अवसर पर स्कूल के प्राचार्य ने उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं।

 
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उच्च व्यावसायिक संस्थान में प्रवेश के समय विद्यार्थियों को मिलेगी अधिकतम 50 हजार रूपए वार्षिक एकमुश्त राशि

 छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना वर्ष-2023 को स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह योजना आईआईटी, एम्स, आईआईएम, एनएलयू जैसे उच्च शिक्षा व्यावसायिक संस्थानों में प्रवेश लेने वाले निम्न आय वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के प्रवेश को सुगम बनाने और उन्हें तात्कालिक सहायता देने के लिए शुरू की जा रही है। 

 
मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना में योजना का उद्देश्य छत्तीसगढ़ राज्य के प्रतिभावान निम्न आय वर्ग के विद्यार्थी जो उच्च व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के माध्यम से चयन उपरांत इन संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करने के लिए प्रारंभिक तैयारियों यथा-यात्रा व्यय, कपडे, आवास, भोजन, तात्कालिक फीस, दवाई आदि जैसे आवश्यक कार्यों के लिए राशि उपलब्ध नहीं होने से छात्र इन उच्च संस्थानों में प्रवेश से वंचित होने वालो को सहायता हेतु राशि प्रदान करना है। 
 
योजना के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भारतीय प्रबंध संस्थान, भारतीय विधि संस्थान जैसे संस्थानों के अलावा ऐसे सभी व्यवसायिक पाठ्यक्रम संचालित करने वाले शैक्षणिक संस्थान जो भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर के घोषित हो, नीट प्रवेश परीक्षा के माध्यम से, एमबीबीएस पाठ्यक्रम हेतु शासकीय संस्थान, जेईई प्रवेश परीक्षा के माध्यम से बी-टेक पाठ्यक्रम हेतु शासकीय एनआईटी, ट्रीपलआईटी संस्थान को शामिल किया गया है। 
 
योजना में छात्रवृत्ति की राशि एकमुश्त होगी जो संस्थान में प्रवेश के समय विद्यार्थी की आवश्यकता के आधार पर प्रदान की जायेगी। यह राशि अधिकतम पचास हजार रूपये तक वार्षिक होगी। विद्यार्थी का संस्थान में प्रवेश उपरांत समस्त वैध व्यय का देयक प्रमाणित कर विभागाध्यक्ष कार्यालय को संस्थान में प्रवेश के एक माह के भीतर प्रस्तुत करना होगा। छात्रवृत्ति की राशि का दुरूपयोग करने या गलत जानकारी देने पर यह राशि विद्यार्थी एवं पालक से वसूली जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर अन्य विधिक कार्यवाही भी की जाएगी। 
 
पात्रता की शर्तें-  विद्यार्थी छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी होना चाहिये। विद्यार्थी को छत्तीसगढ़ राज्य हेतु अधिसूचित अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल होना चाहिये। विद्यार्थी को उपरोक्त अनुसार उल्लेखित संस्थान में चयन की पात्रता के साथ ही चयनित होने का प्रमाण-पत्र एवं प्रवेश लेने हेतु संस्था द्वारा जारी सूचना पत्र होना चाहिये।
 
आय सीमा-  अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पालक की वार्षिक आय रूपये 2.50 लाख रूपए से अधिक नहीं होना चाहिये। शासकीय सेवकों के आश्रित इस योजना के पात्र नहीं होगें किन्तु चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बच्चे इस योजना का लाभ ले सकेंगे।
 
चयन की प्रक्रिया-  योजना का लाभ लेने हेतु विद्यार्थी को योजना के साथ संलग्न निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होगा। आवेदनों का परीक्षण इस हेतु गठित समिति द्वारा किया जायेगा। आवेदनों की संख्या अधिक होने पर राष्ट्रीय संस्थानों के महत्ता को ध्यान में रखते हुए छात्रवृत्ति की संख्या निर्धारित की जायेगी। समान प्रकृति के संस्थानों हेतु छात्रवृत्ति हेतु चयन के लिए प्रवेश परीक्षा के प्राप्तांक को प्राथमिकता देते हुए चयन की कार्यवाही की जायेगी तथा समान अंक की स्थिति में कक्षा 12वीं के प्राप्तांक के आधार पर प्राथमिकता दी जायेगी। मेरिट सूची पश्चात् नक्सल हिंसा से हुए अनाथ बच्चे, अन्य अनाथ बच्चे, विधवा के बच्चे, विकलांग बच्चों को इसी क्रम में प्राथमिकता देते हुए सूची तैयार की जायेगी।
 
आवेदनों के परीक्षण के लिए राज्य स्तरीय समिति-  प्राप्त आवेदनों का राज्य स्तरीय समिति के द्वारा परीक्षण किया जायेगा। इस समिति में आयुक्त/संचालक, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग अध्यक्ष होंगे तथा आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, संचालक, चिकित्सा शिक्षा विभाग, संचालक, तकनीकी शिक्षा विभाग, वित्त अधिकारी, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग सदस्य होंगे। योजना प्रभारी अधिकारी सदस्य सचिव पर समिति का दायित्व होगा कि योजना के प्रावधान अनुसार आवेदन पत्रों का परीक्षण के बाद पात्रता का निर्धारण कर बजट सीमा के अंतर्गत अनुशंसा के साथ प्रस्तुत करेगी।
 
स्वीकृति एवं भुगतान की प्रक्रिया-  समिति द्वारा चयन सूची के आधार पर जिस जिले का विद्यार्थी मूल निवासी होगा उस जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास को राशि आवंटित की जायेगी। जिला स्तर पर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास एवं चयनित विद्यार्थी के साथ रायुक्त बैंक खाता खोला जायेगा एवं उसमें राशि हस्तांतरित की जायेंगी। विद्यार्थी द्वारा संस्थान में प्रवेश लेने के पूर्व मदवार राशि की आवश्यकता सहायक आयुक्त को प्रस्तुत की जायेगी। इसके आधार पर सहायक आयुक्त द्वारा आवश्यक राशि का परीक्षण कर तत्काल विद्यार्थी को सहायता उपलब्ध करायेंगे एवं चयनित संस्थान में प्रवेश पश्चात् विद्यार्थी विभिन्न खर्ची का विवरण प्रमाणित कर सहायक आयुक्त को प्रस्तुत करेगा। यदि चयनित विद्यार्थी द्वारा स्वयं का व्यय कर चयनित संस्थान में प्रवेश प्राप्त कर लिया हो तो विद्यार्थी द्वारा खर्चों का विवरण देयक सहित प्रस्तुत करने पर सहायक आयुक्त द्वारा परीक्षण उपरांत उसकी प्रतिपूर्ति संबंधित विद्यार्थी को की जायेगी।
 
आवेदन की प्रक्रिया-  इस योजनांतर्गत दर्शित संस्थानों में प्रवेश के लिए आर्थिक सहायता प्राप्त करने हेतु संबंधित संस्थान में प्रवेश की सूचना प्राप्त होते ही विद्यार्थी को निर्धारित आवेदन पत्र में आवेदन कर एवं उससे संबंधित अभिलेख संलग्न कर 15 दिवस के अंदर आयुक्त/संचालक आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर को प्रस्तुत करना होगा।
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शिक्षण सत्र 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 के लिए निर्धारित की गई फीस इस वर्ष मात्र 5 प्रतिशत वृद्धि की गई

 प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति द्वारा प्रदेश में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों क्रमशः बी.एड., एम.एड., बी.पी.एड., एम.पी.एड. बी.टेक, एम.टेक, एम.बी.ए., एम.सी.ए., डी. फार्मेसी, बी. फार्मेसी, एम. फार्मेसी, बी.एस.सी. नर्सिंग (पोस्ट बेसिक), बी.एस.सी. नर्सिंग, एम.एस.सी. नर्सिंग, पी.एच.डी., बीएचएमएस पाठ्यक्रमों में फीस का अंतिम निर्धारण शिक्षण सत्र 2023-2024, 2024-2025 एवं 2025-2026 के लिए विस्तृत संकल्प पारित कर किया गया है। 

 
प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष श्री प्र्रभात कुमार शास्त्री से प्राप्त जानकारी के अनुसार विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों फीस में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की गई है। पूर्व में लगभग तीन से पांच वर्ष पूर्व इन शिक्षण संस्थाओं की फीस निर्धारित हुई थी, इतने वर्षों के पश्चात इस बार फीस में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। भिन्न-भिन्न शिक्षण संस्थाओं की भिन्न-भिन्न फीस उनके मूल्यांकन के आधार पर समिति द्वारा निर्धारित की गई है। फीस के निर्धारण के समय पड़ोस के राज्यों की फीस, छत्तीसगढ़ राज्य की प्रति व्यक्ति आय आदि तथ्यों को ध्यान में रखते हुए समिति ने उपरोक्त निर्णय लिया है। समिति की 10 अगस्त 2023 को आयोजित बैठक में समिति के अध्यक्ष के अलावा संचालक तकनीकी शिक्षा, सदस्य (पदेन), संचालक चिकित्सा शिक्षा, सदस्य (पदेन), सदस्य (वित्त) श्री योगेश वर्ल्यानी एवं सदस्य (विधि) श्री सैयद अफसर अली शामिल हुए। 
 
प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति निर्धारित शुल्क में समस्त अन्य तथ्यों को सम्मिलित किया गया है, जिसमें यूनिफार्म, आई.डी. कार्ड, लेबोरेटरी, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि मद में अतिरिक्त राशि शिक्षण संस्थाएं नहीं ले सकेंगी। केवल छात्रावास, वाहन सुविधा और मेस के लिए ‘नो प्राफिट, नो लॉस‘ के आधार पर अतिरिक्त राशि ली जा सकती है। प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति द्वारा विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए निर्धारित फीस इस प्रकार है- बी.एड.-अधिकतम फीस 34,697 रूपए, न्यूनतम फीस 31,670 रूपए प्रति वर्ष, एम.एड.-अधिकतम फीस 53,850 रूपए, न्यूनतम फीस 52,850 रूपए प्रति वर्ष, बी.पी.एड.-अधिकतम फीस 34,140 रूपए, न्यूनतम फीस 33,840 रूपए प्रति वर्ष, एम.पी.एड.-अधिकतम फीस 46,500 रूपए प्रति वर्ष निर्धारित की गई है। 
 
इसी तरह बी.टेक-अधिकतम फीस 40,200 रूपए, न्यूनतम फीस 38,300 रूपए प्रति सेमेस्टर, एम.टेक- अधिकतम फीस 37,500 रूपए, न्यूनतम फीस 32,400 रूपए प्रति सेमेस्टर, एम.बी.ए.-अधिकतम फीस 34,500 रूपए, न्यूनतम फीस 33,750 रूपए प्रति सेमेस्टर निर्धारित की गई है।
 
इसी तरह एम.सी.ए.- अधिकतम फीस 31,950 रूपए प्रति सेमेस्टर, डी. फार्मेसी- अधिकतम फीस 60,750 रूपए, न्यूनतम फीस 56,700 रूपए प्रति वर्ष, बी.फार्मेसी- अधिकतम फीस 39,600 रूपए, न्यूनतम फीस 35,150 रूपए प्रति सेमेस्टर, एम.फार्मेसी- अधिकतम फीस 60,300 रूपए, न्यूनतम फीस 56,070 रूपए प्रति सेमेस्टर, बी.एस.सी नर्सिंग (पोस्ट बेसिक)- अधिकतम फीस 52,950 रूपए, न्यूनतम फीस 46,450 रूपए प्रति वर्ष, बी.एस.सी. नर्सिंग-अधिकतम फीस 63,900 रूपए, न्यूनतम फीस 58,022 रूपए प्रति वर्ष, एम.एस.सी नर्सिंग- अधिकतम फीस 95,200 रूपए, न्यूनतम फीस 92,111 रूपए प्रति वर्ष निर्धारित की है।
 
पी.एच.डी (इंजीनियरिंग)- अधिकतम फीस 35,000 रूपए से 26,500 रूपए-प्रथम सेमेस्टर हेतु एवं द्वितीय सेमेस्टर से 20,000 रूपए से 17,000 रूपए, बी.एच.एम.एस.- अधिकतम फीस 70,000 रूपए प्रति वर्ष निर्धारित की गई है।
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विद्यार्थियों को कौशल, ज्ञान और बुद्धि से लैस करना समय की मांग है - श्री विश्वभूषण हरिचंदन

 विद्यार्थियों को कौशल, ज्ञान और बुद्धि से लैस करना समय की मांग है ताकि छत्तीसगढ़ के छात्र बाहर के बड़े शहरों में पढ़ाई करने वाले छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। हमारे छात्र उच्च अध्ययन के लिए महानगरों में न जाएं बल्कि उन्हें अपने ही राज्य में पाठ्यक्रमों के मामले मेें समान गुणवत्ता, समान बुनियादी ढांचा और समान सुविधाएं मिले यह प्रयास होना चाहिए।

 
राज्यपाल श्री विश्वभूषण हरिचंदन ने आज आंजनेय विश्वविद्यालय के उदघाटन अवसर पर यह उदगार व्यक्त किया। राज्यपाल ने कहा कि समय की मांग है कि ऐसे माहौल को बढ़ावा दिया जाए जहां नवाचार फलता-फूलता हो।   विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का स्थान न बने बल्कि एक यह एक ऐसी जगह हो जहां विद्यार्थियों के सपनों को पोषित किया जाए, संम्भावनाओं को साकार और भविष्य को आकार दिया जाए। विश्वविद्यालय केवल कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का संग्रह नही होना चाहिए। इसमें दुनिया और समाज को बेहतर बनाने के लिए नए-नए रिसर्च कर सकारात्मक बदलाव के लिए प्रतिबद्धता होनी चाहिए। 
 
राज्यपाल ने कहा कि आज हमारे समाने बहुत बड़ी चुनौती है। गरीब, पिछड़े और वंचित लोगों के बारे में सोचना और शासन की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचा कर उन्हे विकास के अवसर उपलब्ध कराना है। राज्यपाल ने कोविड-19 महामारी के दौरान हेल्थ वर्कर, डॉक्टर, नर्स एवं उन सभी फ्रन्ट लाइन वर्कर के योगदान को रेखांकित किया जिन्होने अपनी जान की परवाह न करते हुए जनता की सेवा की और महामारी को नियंत्रित करने में अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए अत्यन्त गर्व विषय है कि हमारा देश विश्व की पांचवी बड़ी आर्थिक शक्ति है और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है।
 
राज्यपाल श्री हरिचंदन ने विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक उत्सव ‘उड़ान‘ के आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि विद्यार्थियों को यह ऊंची उड़ान के लिए प्रेरित करेगी । 
 
कार्यक्रम को विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी संबोधित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह विश्वविद्यालय अपने नाम के अनुरूप विद्यार्थियों को बल, बुद्धि, ज्ञान देने के साथ-साथ देश सेवा का रास्ता भी दिखाएगा।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अभिषेक अग्रवाल ने दिया। आभार प्रदर्शन कुलपति श्री टी.रामाराव ने किया। इस अवसर पर विश्विद्यालय की पत्रिका का विमोचन श्री हरिचंदन के हाथों किया गया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के विजेता क्रिकेट टीम को ट्राफी प्रदान की और संस्था के प्राचार्य  और प्राध्यापकों को सम्मानित किया ।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष ड़ॉ उमेश मिश्रा, विश्वविद्यालय के डायरेक्टर श्री बी.सी जैन अन्य अधिकारी, फैकल्टी मेम्बर, डीन, प्राचार्य, प्राध्यापक, अभिभावक, छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे ।
 
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स्कूली छात्राओं ने खास सहेलियों को बांधी स्वीप फ्रेंडशिप डे का धागा

 सारंगढ़-बिलाईगढ़:  भारत निर्वाचन आयोग के मतदाता जागरूकता अभियान (स्वीप) के तहत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगढ़ के सभागार में स्कूली छात्राओं ने जिले में 6 अगस्त को मनाए जा रहे स्वीप फ्रेंडशिप डे का कार्यक्रम शनिवार को मनाया। जहां छात्राओं ने स्कूल में अपने खास सहेलियों को स्वीप फ्रेंडशिप डे का धागा बांधी। इस धागा के माध्यम से अपने दोस्तों, परिवार और दैनिक दिनचर्या से जुड़े सभी लोगों को जानकारी देकर जन जन तक मतदान के लिए जागरूकता का प्रसार किया जाएगा।

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सीबीएसई स्कूलों को मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने का विकल्प

नई दिल्ली: सीबीएसई स्कूलों को प्री-प्राइमरी से 12वीं कक्षा तक क्षेत्रीय व मातृभाषा में शिक्षा प्रदान करने का विकल्प दिया गया है। अब तक, राज्य बोर्ड स्कूलों के विपरीत, सीबीएसई स्कूलों में केवल अंग्रेजी और हिंदी माध्यम का विकल्प था। सीबीएसई का कहना है कि उनका यह कदम यह एनईपी के के अनुरूप है। इस संबंध में सीबीएसई ने देशभर के अपने स्कूलों से संपर्क किया है।

सीबीएसई ने अपने सभी संबंधित स्कूलों से कहा है कि जब भी संभव हो सके तो पांचवीं कक्षा तक क्षेत्रीय भाषा या फिर मातृभाषा में पढ़ाई के विकल्प उपलब्ध कराए जाएं। पांचवीं से बढ़ाकर इसे आठवीं तक ले जाने का प्रयास करने को भी स्कूलों से कहा गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, स्कूल में पढ़ाई जाने वाली एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें भारत की क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगी।

शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन पाठ्य पुस्तकों को भारत की 22 विभिन्न भाषाओं उपलब्ध कराए जाने की योजना बनाई गई है। शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों को विकसित किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय की इस महत्वपूर्ण परियोजना का उद्देश्य देशभर के छात्रों को उनकी ही क्षेत्रीय अथवा मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना है।

पुस्तकों को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के विषय पर मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण बैठक भी हो चुकी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बैठक की अध्यक्षता की थी। नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा और एनईपी 2020 पर आधारित नई पाठ्यपुस्तकों पर व अन्य कई कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई है। गौरतलब है कि बीते दिनों केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में पाठ्यपुस्तकों को विकसित करने के लिए कहा है।

यह बहुभाषा शिक्षा प्रदान करने के राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य के अनुरूप होगा। यह भी कहा कि एनसीईआरटी द्वारा विकसित शिक्षण-शिक्षण सामग्री 'जादुई पिटारा' को खुले शिक्षा संसाधनों के रूप में हर स्कूल तक पहुंचाने के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसे एक जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता है।

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जब स्कूल यूनिफार्म में शिक्षिका पहुंची स्कूल

 शिक्षिका को नए रूप में पाकर बच्चों ने पढ़ाई में दिखाया उत्साह

रायपुर; स्कूली बच्चों की मनोदशा और उनकी मानसिक स्तर को समझते हुए यदि शिक्षक कक्षा में किसी विषय को पढ़ाते हैं तो वह बच्चों के दिमाग में सीधे उतर जाता है। कुछ ऐसी ही पहल शिक्षिका श्रीमती जान्हवी यदु ने की है। बच्चों ने शिक्षिका को स्कूल यूनिफार्म में देखा तो बच्चे बहुत खुश हुए। नए रूप में शिक्षिका को देखकर बच्चों ने पढ़ाई में अधिक उत्साह दिखना शुरू कर दिया। बच्चों को लगा कि शिक्षिका उनकी एक अच्छी मित्र और मार्गदर्शक है। सोशल मीडिया में इसकी बड़ी चर्चा हो रही है।

बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और उनमें अनुशासन का भाव जगाने के उद्देश्य से शिक्षिका श्रीमती जान्हवी यदु ने स्कूली बच्चों जैसा स्कूल यूनिफार्म पहन कर आना शुरू किया। इससे ऐसे विद्यार्थी जो यूनिफार्म मेें स्कूल नहीं आते थे उन बच्चों ने स्कूल में यूनिफार्म पहन कर आना शुरू कर दिया। यह नजारा राजधानी रायपुर के रामनगर स्थित शासकीय गोकुलराम वर्मा प्राथमिक स्कूल का है। बच्चे कक्षा में पढाई जा रही विषय वस्तु कितना समझते है इसके आकलन के लिए शिक्षिका ने स्कूल यूनिफार्म में बच्चों के बीच बैठकर आकलन किया। जिन बच्चों को समझने में कठिनाई आ रही थी उन्हें फिर से उनके बीच बैठकर सीखने में सहयोग किया।  

शिक्षिका जान्हवी यदु का कहना है कि स्कूली बच्चों के प्रेरणा के स्त्रोत शिक्षक होते हैं। बच्चों को शिक्षकों को देखकर ही उनमें अनुशासन आता है। यदि शिक्षक स्कूल के नियमों का पालन सही तरीके से करते हैं तो बच्चे भी उनका अनुशरण करते हैैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए उन्होंने नए गैट-अप में स्कूल आना शुरू किया तो इसके कई रोचक अनुभव भी हुए। कई बार उन्हें उनके सहकर्मी पहचान नहीं पाए तो कई बार बच्चों ने भी उनसे बच्चों जैसा बर्ताव किया।

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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग शुरू

मनेंद्रगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण) प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भरतपुर विकासखंड मुख्यालय जनकपुर में निःशुल्क विशेष कोचिंग कक्षाओं का शुभारंभ किया गया। कोचिंग कक्षा का संचालन सोमवार से शासकीय महाविद्यालय जनकपुर में अपरान्ह 4.30 से प्रारंभ किया गया। निःशुल्क कोचिंग सुविधा का लाभ लेने के लिये कुल 332 प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया था जिसमें से प्रथम दिन 88 प्रतिभागी उपस्थित रहे।

मार्गदर्शन कक्षा के आरंभ में तहसीलदार भरतपुर विप्लव श्रीवास्तव ने विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी के संबंध में अपने अनुभव साझा किये। परीक्षाओं की तैयारी के लिए भारत एवं छत्तीसगढ़ की सामान्य जानकारी के साथ-साथ गणित, रिजनिंग, अंग्रेजी, हिन्दी एवं अन्य कुछ विषयों का ज्ञान आवश्यक है। इसके अलावा मेन्स की तैयारी के लिए लेखन कौशल को विकसित करना ज़रूरी है। आज की कड़ी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए परीक्षा में सफल होने के लिए 6 से 8 घण्टे की नियमित तैयारी आवश्यक है। इसके लिए लगन, इच्छा–शक्ति, मेहनत, जुनून और प्रतिस्पर्धा की भावना अपने अंदर जगाना होगा, जिससे सफलता अवश्य मिलेगी। विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी ने प्रतिभागियों की तार्किक एवं गणितीय क्षमता परखने के लिए कुछ सवाल जवाब किया।

दूरस्थ वनांचल भरतपुर विकासखंड में निःशुल्क कोचिंग कक्षा के संचालन से छात्रों को बहुत लाभ होगा। इस नवीन पहल से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं में ख़ुशी की लहर है। छात्रों ने निःशुल्क कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ज़िला प्रशासन को धन्यवाद दिया।

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