चारागाह के आड़ में ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर नोटिस...
बेबस ग्रामीणों ने तहसीलदार से लगाई गुहार
बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)। चारागाह बनाने के आड़ में अवैध कब्जाधारी सरपंच और पंच मिलकर गरीब ग्रामीणों को पंचायत स्तर पर नोटिस जारी कर खुद बेचारा बन रहा है और ग्रामीणों को 7 दिवस के अंदर मकान और बाड़ी हटाने परेशान कर रहे है। यह मामला सुनकर आप लोगों को अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन यह बात सोला आना सच है।
हम बात कर रहें है बिलाईगढ़ इलाका के ग्राम पंचायत रिकोटार की, जहाँ कुछ ऐसा ही मामला देखने को मिला है। गांव के मुखिया, यानी सरपंच और कुछ पंच स्वयं शासकीय जमीन पर अनेक एकड़ अवैध कब्जा कर रखा हैं। किंतु गरीब ग्रामीणों को परेशान करने के उद्देश्य से चारागाह निर्माण के आड़ में उनके मकान और बाड़ी को हटाने पंचायत स्तर से एक नोटिस जारी कर खाली करने कहा गया है। जिनसे गरीब ग्रामीण बेघर और दर-दर की ठोकर खाने मजबूर हो जायेंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच..ग्रामीणों के बीच बैठकर उन्हें रहने और बसने के लिये जगह देने का वायदा किया था जो अब मुकर गया और उन्हें हटाने नोटिस थमा दिया गया। ग्रामीणों के द्वारा दूसरे जगह चारागाह बनाने बोलने पर सरपंच राजनैतिक पार्टी के कुछ पद और सरपंच पद का धौंस दिखाकर डरा धमका रहा हैं ,जिनसे ग्रामीण डरे शिहमे हुये है. किसी भी ग्रामीणों के साथ कुछ अनहोनी होने पर सरपंच को जिम्मेदार ठहरा रहे है। ग्रामीण अब प्रशासन से विनती कर उन्हें बेघर नही करने गुहार लगा रही है और विनती कर रहे है कि किसी अन्य जगह पर चारागाह बनाया जाये।
वहीं ग्रामीणों ने आगे अपनी पीड़ा बताते हुये कहाकि विगत 30 -35 साल से वहीं रह रहा है और जीवन यापन कर रहें हैं। ऐसे में सरपंच अब उन्हें वहां से हटाना चाह रहा है जो गलत है। जबकि सरपंच खुद अवैध कब्जा किया हुआ है। यदि सरपंच चाहे तो चारागाह दूसरे स्थान पर भी बना सकता है। किंतु गरीबो को सताने के लिये ही नोटिस जारी कर हटाने बोला जा रहा है. ऐसे में गरीब बेघर हो कहा रहेंगे।
अब सभी ग्रामीण अपनी आशियाना बचाने तहसीलदार भटगांव के शरण पहुंचा और न्याय की गुहार लगाते चारागाह दूसरे स्थान पर बनाने या ग्रामीणों को रहने-बसने जगह देने का माँग किया गया है। बहरहाल अब देखना होगा कि इन ग्रामीणों को न्याय मिल पायेगा या इनके अधूरे सपनों की तरह इनके आशियाने तोड़ दिये जायेंगे।

