छत्तीसगढ़

छगविस : अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए समय बता पाना संभव नहीं : भूपेश बघेल

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर बुधवार को विधानसभा में काफी बहस हुई। सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि नियमितीकरण पर विचार के लिए उच्च स्तरीय समिति बनी हुई है। एक साल चुनाव, और फिर दो साल कोरोना की वजह से प्रक्रिया में देरी हुई।

उन्होंने जोर देकर कहा कि घोषणा पत्र में जो कहा है, उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे। सीएम के जवाब से विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। शोर-शराबा और हंगामे के कारण सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। कार्रवाई दोबारा शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने सवाल पूछे, और संतोष जनक जवाब नहीं आने का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

प्रश्नकाल में भाजपा सदस्य विद्यारतन भसीन की जगह नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि अनियमित, संविदा, और दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए सरकार ने अभिमत मांगा, लेकिन वर्ष-2019 से अब तक अभिमत नहीं आना सरकार की नीयत को दर्शाता है। उन्होंने पूछा कि कर्मचारियों को कब तक नियमित करेंगे? इसके जवाब में सीएम ने कहा कि प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक हुई है, जानकारी जुटाई जा रही है।

उन्होंने कहा कि जो भी घोषणा पत्र में कहा है उसे पूरा करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि नियमितीकरण के लिए समय-सीमा बता पाना संभव नहीं है।

पूर्व मंत्री चंद्राकर ने कहा कि कुछ कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है। अभिमत आ चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 25 कर्मचारियों को नियमित किया गया है। उन्होंने पूछा कि ये कर्मचारी किस आधार पर नियमित हुए हैं? सीएम ने कहा कि प्रमुख सचिव उद्योग की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। इसमें विधि, जीएडी , वित्त और ट्रायबल विभाग के सचिव हैं। उन्होंने कहा कि इस पर महाधिवक्ता से राय ली जा रही है।

विपक्षी सदस्यों ने देरी पर सवाल उठाए, तो खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि 15 साल में आपने कुछ नहीं किया। सीएम ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवेहलना न हो। इसलिए जानकारी एकत्र की जा रही, और इस पर निर्णय भी लिया जाएगा। भाजपा सदस्य शिवरतन शर्मा ने पूछा कि क्या कभी इसकी समीक्षा हुई है? इस पर क्या निर्णय लिया गया है? भाजपा सदस्य सौरभ सिंह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को पता था कि अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं हो सकता था। इसके बावजूद घोषणा पत्र में शामिल किया गया।

सीएम ने कटाक्ष किया कि जिस तरह से सेना ने चार साल का नियम लागू कर दिया गया है, उसी तरह अगर सभी विभागों में यही नियम लागू हो गया, तो उसकी तैयारी अभी से करनी होगी। शिवरतन शर्मा के पूरक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि समिति का गठन 2019 में हुआ था। कमेटी की बैठक से पहले जीएडी ने अभिमत के लिए विधि विभाग को भेज दिया। इससे विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। सत्ता, और विपक्षी सदस्यों के बीच नोंक-झोंक शुरू हो गई। विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद सदन की कार्रवाई 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। कार्रवाई दोबारा शुरू हुई, तो सीएम ने जवाब दोहराया। विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं हुआ, और सदन से वॉकआउट कर दिया।

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