रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया
रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया
उन्नत हृदय-चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, लालपुर, रायपुर के कार्डियोलॉजी विभाग ने 68 वर्षीय मरीज पर जटिल वाल्व-इन-वाल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
मरीज को लगभग 12 वर्ष पूर्व लगाया गया बायोप्रोस्थेटिक एओर्टिक वाल्व समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उन्हें सांस फूलने और शारीरिक क्षमता में लगातार कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मरीज की आयु और स्थिति को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को उच्च जोखिम वाला मानते हुए डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव, कैथेटर-आधारित उपचार पद्धति अपनाने का निर्णय लिया।
यह जटिल प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की अनुभवी टीम द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी (क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट) ने किया। टीम में डॉ. सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट) और डॉ. स्नेहिल गोस्वामी (कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी) भी शामिल रहे। संपूर्ण प्रक्रिया डॉ. एस. के. जेना (प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, KIMS) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।
प्रक्रिया की योजना अत्याधुनिक CT-आधारित इमेजिंग तकनीक के माध्यम से बनाई गई। ट्रांसकैथेटर वाल्व को फेमोरल आर्टरी के रास्ते क्षतिग्रस्त सर्जिकल वाल्व के भीतर सटीक रूप से स्थापित किया गया, जिससे मरीज को दोबारा छाती की सर्जरी से बचाया जा सका।
चिकित्सकों के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को की गई इस प्रक्रिया की सफलता में सटीक प्री-प्रोसीजरल इमेजिंग और सही वाल्व साइजिंग की अहम भूमिका रही। प्रक्रिया के बाद वाल्व का कार्य उत्कृष्ट पाया गया, दबाव अंतर न्यूनतम रहा और किसी भी प्रकार का पैरावाल्वुलर लीक नहीं देखा गया। मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव, पेसमेकर की आवश्यकता या वैस्कुलर इंजरी जैसी कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।
इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया टीम — डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. स्नेहा (सीनियर कंसल्टेंट, एनेस्थीसियोलॉजी) — का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि वाल्व-इन-वाल्व TAVI बुजुर्ग मरीजों के लिए एक परिवर्तनकारी विकल्प है, जिनके सर्जिकल वाल्व विफल हो चुके हैं। विस्तृत योजना और सटीक निष्पादन से बेहतर परिणाम, तेज़ रिकवरी और जीवन-गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव हो पा रहा है।
उन्नत इमेजिंग टूल्स की सहायता से प्रक्रिया के दौरान वाल्व की स्थिति और रक्त प्रवाह का रियल-टाइम मूल्यांकन किया गया, जिससे तत्काल सफलता की पुष्टि हो सकी। प्रक्रिया के बाद मरीज के लक्षणों में तेजी से सुधार देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफल प्रक्रियाएं भारत में कैथेटर-आधारित वाल्व थैरेपी की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती हैं, खासकर उन जटिल और उच्च-जोखिम मामलों में जहां पहले उपचार के विकल्प सीमित थे।
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेलमकोण्डा ने इस जटिल प्रक्रिया की सफलता पर कार्डियोलॉजी विभाग को बधाई देते हुए टीम की सराहना की।
बढ़ती विशेषज्ञता, मजबूत हार्ट-टीम सहयोग और नवीन वाल्व तकनीकों के साथ ट्रांसकैथेटर वाल्व थैरेपी अब संरचनात्मक हृदय रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभर रही है।

