आजादी के एतका बछर बीत जाय के बाद घलो, आज हमर 'महतारी भाखा' छत्तीसगढ़ी ला वो मान-सम्मान अउ पद नई मिल पाइस, जेकर वो असली हकदार हे। ए ह बड़े दुख अउ लज्जा के बात हे कि जनगणना विभाग के वेबसाइट में 'नेपाली' जइसन भाखा मन ला जगह मिल गे हे, फेर करोड़ों मनखे मन के बोले जाय वाला हमर सुग्घर छत्तीसगढ़ी ला आज घलो उपेक्षित रखे गे हे।
ये कोनो वेबसाइट के गलती नोहे, ये हमर छत्तीसगढ़िया अस्मिता अउ पहिचान ऊपर हमला आय!
हमन सरकार अउ नेता मन ले सवाल पूछत हन:
अधिकार के लड़ाई: जब हमर भाखा के अपन समृद्ध साहित्य हे, व्याकरण हे, अउ करोड़ों छत्तीसगढ़िया मन एला गर्व ले बोलथें, त फेर संविधान के 8वीं अनुसूची ले एला बाहर काबर रखे गे हे? ए सौतेला व्यवहार कतका दिन तक चलही?
नेता मन के चुप्पी: सरकार कोनो भी हो—चाहे केंद्र के हो या राज्य के—जब छत्तीसगढ़िया मन के अपमान होथे, त हमर नेता मन चुप काबर हो जाथें? भाजपा हो या कांग्रेस, सबले पहिली वो मन छत्तीसगढ़िया अंय। अगर आज वो मन संसद अउ विधानसभा में आवाज नई उठइहें, त हमर भाखा के अस्तित्व ऊपर खतरा मंडराते रही।
सिर्फ वोट बर उपयोग: का हमर भाखा अउ बोली सिर्फ चुनाव के बेरा वोट मांगे बर आय? का हमर गौरवशाली संस्कृति सिर्फ झांकी देखाए अउ तमाशा बर आय?
हमार मांग:
छत्तीसगढ़ी भाखा ला तत्काल प्रभाव ले संविधान के 8वीं अनुसूची में शामिल करे जाय।
जनगणना अउ सरकारी दस्तावेज मन में छत्तीसगढ़ी ला पृथक अउ सम्मानजनक स्थान दे जाय।
प्राथमिक शिक्षा ले लेके राजकाज के काम में छत्तीसगढ़ी के उपयोग अनिवार्य करे जाय।
संगवारी हो, ये लड़ाई कोनो एक झन के नोहे, ये हमर आने वाला पीढ़ी अउ महतारी भाखा के अस्तित्व के लड़ाई आय। अब चुप्पी तोड़े के बेरा आ गे हे।
"छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया" तब होही, जब छत्तीसगढ़ी ला सम्मान मिलही!