छत्तीसगढ़

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं पर बेवजह लाठीचार्ज दमन की कार्रवाई निंदनीय - दीपक बैज

नीट के पेपर लीक मामले में कार्यवाही की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे एनएसयुआई कार्यकर्ताओं पर किये गये बर्बरतार्पूण लाठीचार्ज की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ी निंदा करते हुए कहा कि भाजपा सरकार अपनी अक्षमता को छुपाने के लिए बर्बरता पर उतर आई है। एनएसयूआई के कार्यकर्ता छात्रों के हक की मांग करने लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडे के नेतृत्व में एकत्रित हुए थे। भाजपा सरकार छात्रों के प्रदर्शन से घबरा गई भाजपा ने उनके खिलाफ लाठियों से प्रहार करवाया।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदर्शन के वीडियो से स्पष्ट है कि शांतिपूर्ण ढंग से नारे लगाते जा रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बेवजह ही लाठीचार्ज किया है। कुछ कार्यकर्ताओं और मीडियाकर्मियों को तो पुलिस द्वारा घेरकर पीटा गया है, कई लोगों को चोटें आई है। नीट के दोषियों पर कार्रवाई की मांग करना भी भाजपा सरकार को बर्दाश्त नहीं हो रहा है, वह लाठीचार्ज करके अपनी नाकामी छिपाना चाहती है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि पिछली बार भी नीट के पेपर लीक मामले में मोदी सरकार ने किसी की जवाबदेही तय नहीं की, न ही कोई ठोस कार्यवाही किया था। जब 2024 में नीट का पेपर लीक हुआ था, लाखों बच्चों की मेहनत बर्बाद हुई थी, तब लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए मोदी सरकार ने चाल चली और एनटीए के डीजी को पद से हटा दिया, लेकिन जैसे ही लोगों का गुस्सा शांत हुआ, इन्हें स्टील मिनिस्ट्री में पोस्टिंग दे दी, उसके बाद छत्तीसगढ़ की भर्ती परीक्षाओं का प्रमुख बना दिया और अब ये छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव हैं। बेहद स्पष्ट है कि पेपर लीक के असल गुनहगारों को भाजपा सरकार का संरक्षण है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में इसी तरह छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को इनाम दिया जाता है, उन्हें बड़े-बड़े पदों पर बैठाया जाता है। कारण साफ है- पेपर लीक के इस गोरखधंधे में भाजपा सरकार खुद ही साझेदार है, जिसका खामियाजा देश के मेहनती छात्रों को चुकाना पड़ रहा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा की सरकार में परीक्षा की सुचिता लगातार भंग हो रही है, भाजपा शासित राज्यों में ही पेपर लीक हो रहे हैं, कारण स्पष्ट है पेपर लीक करने वाले शिक्षा माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। भाजपा का फंडा साफ है- जितनी बड़ी चोरी, उतना बड़ा इनाम, इसीलिए बेखौफ होकर ऐसे कुकृत्य किए जा रहे हैं। दोबारा परीक्षा कराने की मानसिक और आर्थिक जिम्मेदारी कौन लेगा? जिन 22 लाख छात्रों ने सालों से मेहनत की उन्हें दोबारा परीक्षा में झोंकना उनके साथ अन्याय है, बार-बार परीक्षाओं में धांधली से एनटीए की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और विश्वसनीय पर सवाल उठ रहा है, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की खामोशी पेपर लीक जैसे गंभीर विषय पर सरकार के संरक्षण की ओर इशारा करती है।

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