छत्तीसगढ़

नेत्रहीन दिव्यांग बालिका को मिलेगा इलेक्ट्रानिक टैबलेट, जनदर्शन में पहुंचा था आवेदन

 दुर्ग (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कलेक्टर जनदर्शन में मंगलवार को एक नेत्रहीन दिव्यांग बालिका अपनी शिक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर कलेक्टर के समक्ष् पहुंची थी। 18 वर्ष की आवेदिका के कथनानुसार वह अपना भविष्य उच्च शिक्षा में देखती है। जिसके लिए शिक्षण सत्र के बाद खाली समय में भी बेहतर पढ़ाई के लिए उसने लेपटॉप की मांग की थी। कलेक्टर ने दिव्यांग आवेदिका के पढ़ाई के संबंध में भी जानकारी ली जिसमें उसने बताया कि वर्तमान में वह बी.एस.सी. फर्स्ट इयर की छात्रा है और उसे ब्रेल लिपि भी आती है। इसी ब्रेल लिपि का उपयोग कर वह दैनिक न्यूज पेपर को दूसरों की सहायता से पढ़वा कर ब्रेल लिपि में तब्दील करती है, जिससे अन्य नेत्रहीन दिव्यांग भी समाचार का हिस्सा बन सके और ज्ञान को आत्मसात कर सके। इस बात पर कलेक्टर ने आवेदिका को शाबाशी भी दी और उसके पढ़ाई के प्रति रूचि को देखते हुए समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक से मदद हेतु प्रवाधानों पर चर्चा की और चर्चा के उपरांत उन्होंने आवेदिका को इलेक्ट्रॉनिक टैबलेट मुहैया कराने के लिए संबंधित अधिकारी को निर्देशित किया।

इसके आलावा बैकुंठधाम भिलाई वार्ड नंबर 32 से भी एक आवेदन प्रस्तुत हुआ था। जिसमें वहां के क्षेत्र में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए ए.एन.एम. की मांग की गई है। आवेदन के अनुसार क्षेत्र में 50 के लगभग गर्भवती महिलाएं और 02 वर्ष तक के बच्चों की संख्या लगभग 120 है। इसलिए आवेदक का निवेदन है कि महिलाओं के रेगुलर चेकअप के लिए और बच्चों के टीकाकरण के लिए वार्ड में ए.एन.एम. की सुविधा दी जाए। कलेक्टर ने आवेदन की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ को आवेदन प्रेषित किया।

कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित संबंधित अधिकारियों के बीच में लगातार जनदर्शन के आवेदनों का निराकरण किया जा रहा है। आज भी कलेक्टर के समक्ष् 72 जनदर्शन के आवेदन पहुंचे थे। कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने सभी लोगों के आवेदन का आवलोकन गंभीरता पूर्वक करते हुए उपस्थित संबंधित अधिकारियों को ग्राम सचिवालय में नोडल नियुक्त कर जनदर्शन की तर्ज पर जनसमस्या निवारण केन्द्र बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने इस चर्चा में कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र से व्यक्तियों के लिए कई बार कलेक्ट्रेट आना संभव नहीं हो पाता है ऐसे में जनहित को ध्यान में रखते हुए ग्राम सचिवालय के क्लस्टर बनाकर वहां नोडल नियुक्त किए जाएंगे। जहां ग्रामीण जन नोडल के समक्ष अपना आवेदन प्रस्तुत करेंगे। यह आवेदन जिले के संबंधित अधिकारियों के पास छंटनी होकर पहुचेंगे, इस प्रकार जनहित के कार्यों के लिए एक श्रृंखला निर्मित होगी।

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