छत्तीसगढ़

कच्ची शराब खरीदने 4 बजे से लगते हैं मेले

 लापरवाह हो चुका आबकारी विभाग

खरसिया (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अवैध महुआ शराब अंचल के अनेकों गांव में बन रही है। वहीं सुस्त प्रशासन तथा आबकारी विभाग सब कुछ जानते हुए भी अंजाना बना हुआ है।

खरसिया से लगे गांव तेलीकोट, महुआपाली, अंजोरीपाली, डूमरपाली, चोढ़ा, बरगढ़ में और तो और खरसिया के ही पुरानी बस्ती में भी शाम 4:00 बजते ही आस-पास गांव के लोग अपनी शराब की लत से खींचे चले आते हैं। जब मजदूर अपनी ड्यूटी खत्म करते हैं तो सीधे ही यहां आकर छक कर दारू पीते हैं। फिर उन्हें या तो सड़कों के किनारे पड़ा या शराब के नशे में झूमते हुए गाली-गुप्ता करते हुए देखे जा सकता है।

यदा-कदा पुलिस विभाग के द्वारा जरूर इस पर कुछ कार्रवाई की गई थी, परंतु आबकारी विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है, शायद आपस में कोई सामंजस हो। वहीं अगर पुलिस छापा मारने जाती है तो पूर्व में ही इन कच्ची शराबवालों के मुखबिर उन्हें सूचना देकर सतर्क कर देते हैं। जिसके कारण भारी मात्रा में बन रही शराब के बर्तन एवं शराब को आसपास छिपा दिया जाता है। यह भी जानकारी मिली है कि प्रतिदिन इन गांव से करीबन 100 क्विंटल से ज्यादा महुआदारू बिक्री होकर गांव तक पहुंचता है। कुछ गांववालों ने बताया कि शाम होते ही गांव के छोटे-छोटे बच्चे घर से बाहर निकलने में डरते हैं, क्योंकि कभी शराबियों का निशाना न बन जाएं। पुलिस अधीक्षक और जिलाधीश सतत शराब की पाबंदी लगाने के लिए आदेश जारी करते हैं, परंतु पुलिस विभाग सड़कों एवं आने-जाने वाले का 1-2 लीटर शराब पकड़ कर अपनी ड्यूटी की इतिश्री समझ लेते हैं। यदि आबकारी विभाग एवं पुलिस विभाग द्वारा संयुक्त छापेमारी की जाए तो शायद रायगढ़ जिले का सबसे बड़ा अवैध शराब का भंडार जप्त किया जा सकता है, परंतु आबकारी विभाग के गैरजिम्मेदार रवैये के कारण पूरे क्षेत्र में अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को आबकारी विभाग के शह पर राजस्व की कितनी हानि सहनी पड़ रही है। वहीं अवैध शराब के कारण ना जाने कितनों की असामयिक मौत भी हो रही है।

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