छत्तीसगढ़

झारखण्ड में डायन के सन्देह 3 महिलाओं सहित 4 को प्रताड़ना

जादू-टोने की मान्यता सिर्फ अंधविःडॉ.दिनेश मिश्र

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्र ने कहा झारखंड के दुमका के असवारी गाँव से डायन के संदेह में 3 महिलाओं सहित 4 लोगों को मल मूत्र खिलाने, मार पीट करने ,उन्हें गर्म रॉड से दागने की घटना,अत्यंत निंदनीय,शर्मनाक और अमानवीय घटना है.

कोई नारी डायन नहीं होती. सभी दोषियों पर कड़ी कार्यवाही हो.यह एक विडम्बना ही है कि जब पूरे देश में मातृ शक्ति के प्रतीक  नवरात्रि मनाने की शुरुआत की जा रही थी,तब  वहीं दूसरी ओर  झारखण्ड में ये निर्दोष महिलाएं अंधविश्वास के कारण नर्क जैसी यातनाएं भुगतने को मजबूर थीं. डॉ दिनेश मिश्र ने कहा जादू टोना जैसे अंधविश्वास के कारण  हुई यह घटना अत्यंत निर्मम और शर्मनाक है। दोषी व्यक्तियों को गिरफ्तार कर  कर उस पर कड़ी कार्यवाही होना चाहिए.

डॉ. दिनेश मिश्र ने जानकारी दी  झारखंड  के  दुमका  के सरैयाहाट  अंतर्गत असवारी गांव के दबंगों ने  चार व्यक्तियों कोजिनमें 3 महिलाएं हैं,डायन का आरोप लगाया,मारपीट की, जबरन मल-मूत्र पिलाया और उन्हें लोहे की गर्म छड़ों से दागा. दबंगों के खौफ से प्रताड़ित लोग घंटों तक दर्द से तड़पते रहे, वो ना तो पुलिस के पास जाने की हिम्मत जुटा सके और ना ही किसी को इस बारे में बता पाए. बाद में चारों लोगों को पहले सरैयाहाट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया. इसके बाद इनकी गंभीर हालत को देखते हुए देवघर स्थित अस्पताल ले जाया गया. 

बताया गया कि शनिवार की रात ज्योतिन मुर्मू नाम के व्यक्ति ने गांव के लोगों की बैठक बुलाई थी. इसमें श्रीलाल मुर्मू के घर की 3 महिलाओं को डायन करार दिया गया. कहा गया कि इनके जादू-टोने की वजह से गांव के पशु और बच्चे बीमार हो रहे हैं. इसके बाद करीब दर्जन भर लोग लाठी-डंडों और हथियारों से लैस होकर श्रीलाल मुर्मू के घर पर हमला कर दिया. 

लाठी-डंडों और हथियारों से लैस लोगों ने परिवार की 3 महिलाओं सोनामनी टुडू, रसी मुर्मू, कोसा टुडू के साथ-साथ श्रीलाल मुर्मू की बुरी तरह पीटा. इसके बाद इन चारों को पकड़कर उनके मुंह में जबरन मल-मूत्र डाला गया. हमलावरों ने उन्हें गर्म छड़ों से भी दागा. चारों लोग चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन गांव का कोई भी व्यक्ति उन को बचाने नही आया. पूरी घटना अत्यंत अमानवीय, और दिल दहला देने वाली है.

डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा जादू टोने का कोई अस्तित्व नहीं है,इसलिए जादू टोने से किसी भी व्यक्ति को बीमार करने,नुकसान पहुंचाने की धारणा मिथ्या है ,इस अंधविश्वास के कारण किसी भी महिला,या किसी भी ग्रामीण को प्रताड़ित करना अनुचित, गैरकानूनी है. कोई महिला टोनही नहीं होती.   डायन/टोनही के सन्देह में हुई  प्रताड़ना के लिए दोषी व्यक्तियों पर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए. ग्रामीणों से अपील है ,वे अंधविश्वास में पड़कर कानून अपने हाथों में न लें.

वैज्ञानिक जागरूकता के विकास से विभिन्न अंधविश्वासों का निर्मूलन संभव 

हमारे देश में अनेक जाति, धर्म के लोग हैं जिनकी परंपराएँ व आस्था भी भिन्न-भिन्न है लेकिन धीरे धीरे कुछ परंपराएँ, अंधविश्वासों के रूप में बदल गई है। जिनके कारण आम लोगों को न केवल शारीरिक व मानसिक प्रताडऩा से गुजरना पड़ता है

डॉ. मिश्र ने कहा देश के अनेक प्रदेशों में डायन/ टोनही के सन्देह में  प्रताडऩा की घटनाएँ आम है ,जिनमें किसी महिला को जादू-टोना करके नुकसान पहुँचाने के संदेह में हत्या, मारपीट कर दी जाती है जबकि कोई नारी टोनही या डायन नहीं हो सकती, उसमें ऐसी कोई शक्ति नहीं होती जिससे वह किसी व्यक्ति, बच्चों या गाँव का नुकसान कर सके। जादू-टोने के आरोप में  प्रताडऩा रोकना आवश्यक है। अंधविश्वासों के कारण होने वाली टोनही प्रताडऩा/बलि प्रथा जैसी घटनाओं से भी मानव अधिकारों का हनन हो रहा है।

 डॉ. मिश्र ने कहा समाज में जादू-टोना, टोनही आदि के संबंध में भ्रमक धारणाएँ काल्पनिक है, जिनका कोई प्रमाण नहीं है। पहले बीमारियों के उपचार के लिए चिकित्सा सुविधाएँ न होने से लोगों के पास झाड़-फूँक व चमत्कारिक उपचार ही एकमात्र रास्ता था, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के बढ़ते कदमों व अनुसंधानों ने कई बीमारियों, संक्रामकों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया है तथा कई बीमारियों के उपचार की आधुनिक विधियाँ खोजी जा रही है। बीमारियों के सही उपचार के लिए झाड़-फूँक, तंत्र-मंत्र की बजाय प्रशिक्षित चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।अभी कोरोना काल में चिकित्सा विज्ञान के कारण महामारी के नियंत्रण में सफलता मिली है और वैक्सीन के बनने और लगने से काफी प्रभाव पड़ा है.

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