छत्तीसगढ़

रमन राज में जब महिलाओं पर अत्याचार हो रहा था तब भाजपाई क्यों चुप थे? : मरकाम

 रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भाजपा की हुंकार रैली उसकी तैयारियों की बैठक पोस्टर जारी करने पर सवाल खड़ा करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि जब प्रदेश में 15 सालों तक महिलाओं के साथ अत्याचारों की पूरी श्रृंखला चालू थी तब भाजपा कहां सोई थी? आज प्रदेश में महिलायें सुरक्षित है, महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों में रमन राज की अपेक्षा कांग्रेस की सरकार बनने के बाद 62 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद महिलाओं को जीवन जीने के लिये सुरक्षित भयमुक्त वातावरण मिला है तब भाजपा हुंकार रैली की नौटंकी करने जा रही है।


मोहन मरकाम ने कहा कि रमन राज में जब प्रदेश में 6 से 14 साल के बच्चियों के साथ झलियामारी के सरकारी आश्रम में दुराचार की घटना हो रही थी तब इन बच्चियों के गुनाहगारों के खिलाफ कार्यवाही के लिये कांग्रेस को आंदोलन करना पड़ा था। जब बिलासपुर में नसबंदी जैसे छोटे ऑपरेशन में 17 महिलाओं की जाने चली गयी तब भाजपा ने हुंकार रैली नहीं निकाला। राजधानी रायपुर में चंद पैसों के लिये महिलाओं के गर्भाशय निकाल लिये गये तब भाजपा की गैरत कहां सोई थी? प्रदेश में 27000 से अधिक लड़कियां गायब हो गयी तब भाजपा की बोलती बंद थी। मीना खल्को, हिडमा मड़कम के साथ अत्याचार हुआ तब भाजपाईयो की संवेदना कहां गयी थी? राजधानी रायपुर में महिला कांस्टेबल के साथ दुराचार के बाद हफ्तों तक एफआईआर नहीं हुआ तब भाजपा चुप थी। कांग्रेस सरकार बनने के बाद राज्य में महिलायें ज्यादा सुरक्षित है तब भाजपाई हुंकार रैली निकाल रहे है।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी पर लगातार बयानबाजी करने वाले भाजपाई जवाब दें कि भाजपा शासनकाल में शराब का सरकारीकरण क्यों किया गया था? प्रदेश में शराब से राजस्व मात्र 300 करोड़ रू. मिलता था, रमन राज में यह बढ़कर 5000 करोड़ हो गया। भाजपा बतायें कि 2018 में छत्तीसगढ़ प्रतिव्यक्ति शराब की खपत में देश में पहले स्थान पर था तब उन्हें शराबबंदी की जरूरत क्यों महसूस नहीं हुई? भाजपा बतायें कि शराबबंदी की विधानसभा की कमेटी में भाजपा ने अपने विधायक का नाम क्यों नहीं दिया? भाजपा का नेता शराब तस्करी में पकड़ाता है तो पूरी भाजपा प्रेस कांफ्रेंस कर बचाव करती है, राजनीति करने के लिये शराबबंदी की बात करते है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद शराब के दुष्प्रभाव के लिये व्यापक प्रचार किया गया, 70 दुकाने बंद की गयी। राज्य आज प्रतिव्यक्ति शराब की खपत में देश में 18वें स्थान पर है। छत्तीसगढ़ में जनजागरण फैलाकर लोगों को जागरूक कर शराबबंदी की ओर आगे बढ़ा जायेगा।

 

 

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