रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया है। सदन में विधेयक पास होने के बाद सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि बधाई ! मनाइए उत्सव…अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 32%, अनुसूचित जाति के लिए 13%, पिछड़ा वर्ग के लिए 27% और ग़रीबों के लिए 4% आरक्षण विधेयक को विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया है।
छत्तीसगढ़ में अब कुल आरक्षण 76 फ़ीसदी होगा। राज्यपाल की मंज़ूरी के लिए आज ही बिल भेजा जाएगा। तमिलनाडु में 69, महाराष्ट्र में 68 फ़ीसदी आरक्षण है।
सीएम बघेल ने ट्वीटर पर लिखा कि छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग व आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण के लिए सर्वसम्मति से पारित विधेयक को केंद्र सरकार के पास भेजने का संकल्प भी विधानसभा में पारित हो गया है।
इस संकल्प में केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह इस आरक्षण प्रावधान को नौंवी अनुसूची में शामिल करे। मुख्य विपक्षी दल भाजपा भी इस संकल्प में साथ देती तो राज्य की जनता को और अच्छा लगता।
मैंने सभी दलों के नेताओं से अनुरोध किया है कि वे विधानसभा अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जी के पास चलें और आरक्षण प्रावधानों को नौवीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध करें। हमें राज्य की जनता के हितों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देखने की ज़रूरत है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था (प्रवेश में आरक्षण) संशोधन विधेयक, 2022 को भी विधानसभा ने सर्वसम्मति से पारित किया है। इस विधेयक को भी आज रात वरिष्ठ मंत्रिगण महामहिम राज्यपाल के पास हस्ताक्षर के लिए लेकर जाएंगे।
अब आरक्षण छत्तीसगढ़ में बाक़ायदा एक क़ानून बन जाएगा। इस विधेयक पर तत्काल हस्ताक्षर करने का अनुरोध लेकर वरिष्ठ मंत्रिगण सदन की बैठक ख़त्म होते ही महामहिम राज्यपाल के पास जाएंगे। उम्मीद है कि यह औपचारिकता भी आज रात तक पूरी हो जाएगी।
आरक्षण विधेयक पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बधाई देता हूं बहुत अच्छा बोले, बेहतर सुझाव दिए। विपक्ष को दो महीना 10 दिन बहुत बड़ा लगा, लेकिन 2012 में आरक्षण लागू करने के बाद 6 साल इन्हें बहुत कम लगा।
भूपेश बघेल ने कहा कि बीजेपी के पास अपने प्रभारियों को बताने के लिए कुछ नहीं है। इसलिए आरोप लगा रहे हैं। आरक्षण मामले में कुणाल शुक्ला पर विपक्षी सवाल खड़े कर रहे हैं, जबकि सच यह है कि आरक्षण मामले में 41 लोग कोर्ट गए थे। उनमें से एक नाम कुणाल शुक्ला का है। ॉ
बीजेपी शासन काल में आरक्षण का विषय था। बीजेपी में मंत्रियों की कमेटी बनी, लेकिन कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में सबमिट नहीं की। क्वावांटिफाबल डाटा आयोग 7 साल में बीजेपी नहीं बना पाई। जब हमारी सरकार आई तो हमने आयोग बनाया और उसकी रिपोर्ट भी 3 साल में आ भी गई, जबकि 2 साल कोरोना में बीता है।
छत्तीसगढ़ के जंगली इलाकों में जो लोग रह रहे हैं। उनकी स्थिति कमजोर है। आरक्षण में उन्हें स्थान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार से कहा कि जनगणना करा लें। हम भी संख्या के आधार पर SC वर्ग को 16 प्रतिशत आरक्षण देंगे।
हमारे मंत्री आज ही राजभवन जाएंगे। राज्यपाल से बिल पर दस्तख़त करने का आग्रह करेंगे। आरक्षण बिल की मंशा भी उन्हीं की थी। भूपेश बघेल ने कहा कि अनुसूची 9 में शामिल करने प्रधानमंत्री मोदी से मिलने पक्ष-विपक्ष के सभी सदस्य मिलकर चलें।दर्पण)।