5-6 आयु वर्ग के बच्चों को उनकी अपनी भाषा में सिखने-सिखाने की व्यवस्था है बालवाड़ी
गरियाबंद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नौनिहालों का भविष्य सुधारने के लिए शासन स्तर पर विभिन्न प्रकार की योजनाएं संचालित है। इसी कड़ी शिक्षा विभाग की ओर से इस बार चयनित स्कुलो में बालवाड़ी योजना संचालित की है। जिसका क्रियान्वयन संकुल केंद्र अतरमरा के चयनित स्कुलो में बेहतर तरीके से किया जा रहा है। संकुल केन्द्र अतरमरा विकासखंड छुरा जिला गरियाबंद में बालवाड़ी शा.प्रा. शाला खट्टी व कुम्हरमरा में कुशल शिक्षिकाओं की ओर से प्रारंभ किया गया। जहां बच्चों को समुचित शिक्षा प्रदान किया जा रहा है।
जिला शिक्षा अधिकारी करमन खटकर व जिला मिशन समन्वयक श्याम चन्द्राकर के निर्देशानुसार बालवाड़ी का संचालन संकुल प्रभारी प्राचार्य बी देवांगन व संकुल समन्वयक विनोद सिन्हा के कुशल मार्गदर्शन में किया जा रहा है। बालवाड़ी खोलने का प्रमुख उद्देश्य छोटे आयु वर्ग के बच्चों को उनके आयु अनुरूप लर्निंग आउटकम हासिल करने की दिशा में प्रयास करना है।सीखने के शुरुआती दौर में जब मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से हो रहा हो उस समय उन्हें सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देने की आवश्यकता होती है। ऐसा करने से आगे की कक्षाओं में भी सीखना बहुत ही आसान हो जाता है। संकुल समन्वयक विनोद सिन्हा के मार्गदर्शन में बालवाड़ी प्रा.शाला खट्टी व प्रा शाला कुम्हरमरा में 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के समस्त बच्चों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है।
शिक्षिका मीना ध्रुव व शिक्षिका पुष्पलता चक्रधारी के द्वारा उपरोक्त बालवाड़ी का कुशल संचालन किया जा रहा है। समय-समय पर निकट के प्राथमिक स्कूलों में ट्विनिंग आफ स्कूल कार्यक्रम के अन्तर्गत अनुभव लेने का अवसर दिया जाता है। शाला प्रबंधन, विकास समिति और पालकों की बैठक लेकर उन्हें 5 से 6 आयु- वर्ग के बच्चों के नियमित बालवाड़ी भेजने हेतु प्रेरित किया जाता है। छोटे बच्चों को उनकी अपनी भाषा में सिखने-सीखाने की व्यवस्था किया गया है। जिले में प्रचलित स्थानीय भाषा में सामग्री का निर्माण कर बच्चों को सीखने में सहयोग किया जाता है।

