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ज्यादातर क्षेत्रीय फिल्मों में झलकता है भारत का सार : अभिनेता अखिलेंद्र छत्रपति मिश्रा

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। फिल्म लोटस ब्लूम्स के कलाकारों और क्रू ने इफ्फी टेबल टॉक्स के हिस्से के तौर पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। जाने माने अभिनेता अखिलेंद्र छत्रपति मिश्रा ने कहा, मैंने इस प्रोजेक्ट में काम करना इसलिए चुना क्योंकि ये संदेश व्यक्त करने के लिए सिनेमा की भाषा का इस्तेमाल करता है। इस फिल्म के विषय पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये दिखाती है कि जीवन भी कमल के फूल की तरह है, जो सूर्योदय के साथ खिलता है और सूर्यास्त के साथ मुरझा जाता है।

उन्होंने इस फिल्म में इसलिए भी काम किया क्योंकि ये मैथिली भाषा को बढ़ावा देती है। उन्होंने टिप्पणी की कि भारत का सार ज्यादातर क्षेत्रीय फिल्मों में झलकता है, हालांकि क्षेत्रीय भाषाओं में ज्यादा फिल्में नहीं बनती हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में और फिल्में बनाई जानी चाहिए और दिखाई जानी चाहिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि सिनेमा जीवन का ही विस्तार है। इसे लार्जर दैन लाइफ कहा जाता है क्योंकि ये संस्कृति, भाषा और आध्यात्मिक दृष्टि को अपने में समाहित करता है। उन्होंने कहा कि जो नवरस होते हैं वो ही सिनेमा की भाषा गढ़ते हैं।

 

 

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