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फिल्म बिहाइंड द हेस्टैक्स में प्रवासी संकट की विचित्र हकीकत को दर्शाया गया

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बिहाइंड द हेस्टैक्स वर्ष 2015 में ग्रीस में उस समय गहराए प्रवासी संकट की पृष्ठभूमि में बनाई गई एक सामाजिक फिल्म है, जब यूरोपीय देशों ने अपनी सीमाओं को बंद कर दिया था, और जिस वजह से प्रवासी और शरणार्थी ग्रीस की उत्तरी सीमा पर एकत्र होने पर विवश हो गए थे। इस फिल्म का अंतर्राष्ट्रीय प्रीमियर 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के दौरान किया गया।

निर्देशक और पटकथा लेखक असि‍मिना प्रोएड्रो ने 'इफ्फी टेबल टॉक्स' में कहा कि इस फि‍ल्‍म की कहानी एक परिवार के सभी तीन केंद्रीय पात्रों यथा एक पिता, मां और एक बेटी के नजरिए से सुनाई गई है। इन तीनों अलग-अलग लोगों को भ्रष्ट व्‍यवस्‍था के आगे झुकने के लिए विवश किया जाता है। असि‍मिना प्रोएड्रो ने कहा, इस फिल्म के तीनों ही खंड में से प्रत्येक में इस बात पर फोकस किया गया है कि कोई भी व्यक्ति आखिरकार इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहा है। 

 

उन्होंने कहा, मैं मुख्य पात्रों में से प्रत्येक को करीब से पेश करना चाहता था। हालांकि, फि‍ल्‍म के आखिर में इन तीनों ही किरदारों के मकसद सामने आ जाते हैं। शुरू में हमने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि ये पात्र अजीबोगरीब व्यवहार क्यों कर रहे हैं।  बिहाइंड द हेस्टैक्स ग्रीस की उत्तरी सीमा पर रहने वाले एक मध्यम आयु वर्ग के कर्ज में डूबे मछुआरे की कहानी है, जो मोटी फीस के बदले सीमावर्ती झील के पार प्रवासियों की तस्करी करना शुरू कर देता है। चर्च जाने के प्रति समर्पित उनकी पत्नी, ईश्वर के वचन में सच्चाई की तलाश कर रही है, जबकि दम्पति की बेटी अपने जीवन को स्वयं परिभाषित करने की कोशिश करती है।

 

परिवार में एक दुःखद घटना के घटित होने का बाद, तीनों पात्र अपने स्वयं के व्यक्तिगत बाधाओं और कमजोरियों का सामना करने के लिए प्रेरित होते हैं और उन्हें जीवन में पहली बार अपने कार्यों की कीमत चुकाने के बारे में विचार करना पड़ता है।

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