राहुल नहीं जानते कि वरिष्ठ नेताओं के साथ कैसा व्यवहार करना है : एमए खान
नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस पार्टी की आतंरिक कलह अब खुलकर सामने आ रही है। पिछले दिनों वरिष्ठ नेता व जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद के इस्तीफे के बाद एक और वरिष्ठ नेता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी के नेतृत्व और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
तेलंगाना के कांग्रेस नेता और राज्यसभा के पूर्व सांसद मोहम्मद अली खान ने भी पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया है। खान ने कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी पर कई आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेतृत्व को लिखे अपने इस्तीफे पत्र में एमए खान ने कहा कि G23 के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के कल्याण और भलाई के लिए अपनी आवाज उठाई थी। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनके इस कदम को नजरअंदाज किया। अगर पार्टी ने उन नेताओं पर भरोसा दिखाया होता और उनकी बात को महत्व दिया होता तथा पार्टी के लिए उनकी चिंता को समझा होता, तो शायद स्थिति आज अलग होतीं। उन्होंने आगे कहा कि मैं अपने छात्र जीवन से ही यानी 4 दशकों से ज्यादा समय तक पार्टी से जुड़ा रहा।
पार्टी को छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं : खान
एमए खान ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाता है। शीर्ष नेतृत्व पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाता और पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी, संजय गांधी एवं राजीव गांधी के नेतृत्व, उनकी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ देश की सेवा करने की बात करता है। यह सब देखने के बाद मेरे पास पार्टी को छोड़ने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इसलिए मैं तत्काल प्रभाव से कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा दे रहा हूं।
कांग्रेस से इस्तीफे के बाद एमए खान ने बताया कि मैंने कांग्रेस इसलिए छोड़ी। क्योंकि राहुल गांधी द्वारा पार्टी उपाध्यक्ष का पद संभाले जाने के बाद से ही चीजें बिगड़ने लगीं। उनकी अपनी एक अलग विचारधारा है। ब्लॉक स्तर से बूथ स्तर तक उनके विचार किसी भी पार्टी सदस्य से मेल नहीं खाते। पूर्व कांग्रेस राज्यसभा सांसद ने कहा कि इसी वजह से कांग्रेस का पतन हो रहा है। ये सब अब इस हद तक पहुंच गया है कि लंबे समय तक पार्टी में अपनी सेवा देने वाले और उसको मजबूत बनाने वाले तमाम दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं। राहुल नहीं जानते कि वरिष्ठ नेताओं के साथ कैसा व्यवहार करना है।

