हिंदुस्तान

गन्ने के खेत में ढेर हुआ 9 लोगों का हत्यारा...

 बगहा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बिहार के पश्चिम चंपारण में आतंक का पर्याय बन चुके नरभक्षी बाघ को आखिरकार मार गिराया गया। मरने से पहले बाघ ने माँ-बेटे को अपना शिकार बनाया था। शनिवार को आठ शूटरों की टीम ने उसी गन्ने के खेत में जाल बिछाया जहां बाघ ने आखरी शिकार किया था, और वहीं उसे मौत की नींद सुला दिया।



वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) से निकला नरभक्षी बाघ नौ लोगाें को बना चुका था अपना श‍िकार। मरने से नौ घंटे पहले बाघ ने रघिया रेंज के बलुआ में मां-बेटे का शिकार किया था। करीब एक माह से वन विभाग की टीम उसे जिंदा पकड़ने के प्रयास में जुटी थी। दिन प्रतिदिन इंसानों के प्रति बढ़ती बाघ की आक्रामकता को देखते हुए मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक (चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन) ने गुरुवार को उसे मारने का आदेश दिया था। बाघ की उम्र लगभग तीन साल व उसकी पहचान टी-105 के रूप में हुई। उसके शव को गोबर्द्धना रेंज कार्यालय लाया गया।

मां बेटे को मौत के घाट उतारा
शनिवार की सुबह करीब सात बजे रघिया रेंज के बलुवा में सब्जी के खेत में मौजूद स्थानीय निवासी 32 वर्षीय बबीता देवी व उनके सात वर्षीय बेटे शिवम को बाघ ने मौत के घाट उतार दिया और शव को घसीटते गन्ने के खेत की ओर लेकर गया। ग्रामीणों के शोर मचाने पर बाघ भाग निकला। मौके पर पहुंची पुलिस व वन कर्मियों की टीम को शव सौंपने से इन्कार कर दिया।



वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के रघिया रेंज में शनिवार की सुबह हुई घटना के बाद जहां एक ओर लोगों में आक्रोश था वहीं बाघ का दहशत भी, बाघ को मारे जाने की सूचना पर स्‍थानीय लोगों को राहत जरूर म‍िली है। उसके शव को स्‍थानीय लोगों को भी द‍िखाया गया। बताते चलें क‍ि लोग अपने बच्चों को बाहर नहीं भेज रहे थे। गांव के लोगों ने खेत जाना बंद कर रखा था। बड़े भी संभल कर घर से निकल रहे थे। इस नरभक्षी को मारने के लिए जिस सात सदस्यीय टीम का गठन किया गया है उसमें बगहा, बेतिया व मोतिहारी एसटीएफ तथा जिला पुलिस के तेज तर्रार जवानों को शामिल किया गया था। उन्हें अत्याधुनिक असलहे दिए गए थे। वीटीआर की गाड़ी के सवार होकर वे मौके पर पहुंचकर अपना काम कर रहे थे।

ग्रामीणों का कहना था कि जब तक बाघ मारा नहीं जाता हम शव नहीं ले जाने देंगे। करीब नौ बजे नरभक्षी बाघ को मारने के लिए आठ सदस्यीय शूटरों की टीम मौके पर पहुंची। जिसमें बगहा, बेतिया, मोतिहारी व नेपाल के तेज तर्रार जवान शामिल थे। बाघ उसी गन्ने के खेत में मौजूद था जहां मां-बेटे का शिकार किया था। टीम ने गन्ने के खेत को जाल लगाकर घेर दिया। गन्ने के भीतर रेस्क्यू वैन व हाथियों पर सवार शूटर दाखिल हो गए। करीब 3.30 बजे जवानों ने चार गोली चलाया। जिसमें दो गोली बाघ को लगी और वह मौके पर ढेर हो गया। वनकर्मी बाघ को जाल में लपेटकर ले जाने लगे,लेकिन ग्रामीण बाघ के शव को दिखाने की जिद करने लगे। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि बाघ मारा गया है। कुछ ग्रामीणों का आरोप था कि बाघ को सिर्फ बेहोश किया गया है। बाद में एसपी ने ग्रामीणों को बाघ का शव दिखाया।

इन नौ लोगों को बाघ ने बनाया था शिकार
14 मई : सेमरा थाना क्षेत्र के जिमरी नौतनवा निवासी 12 वर्षीय राजकुमार बैठा
20 मई : चिउटहां थाना क्षेेत्र के ढोलबजवा-लक्ष्मीपुर पंचायत के पुरानी कटहां निवासी 50 वर्षीया पार्वती
15 जुलाई : लौकरिया थाना क्षेत्र के बैरिया कला निवासी 65 वर्षीय धर्मराज काजी
12 सितंबर : लौकरिया थाना क्षेत्र के बैरिया कला निवासी 40 वर्षीया प्रेम कुमारी देवी
21 सितंबर : लौकरिया थाना क्षेत्र के बरवा कला निवासी 65 वर्षीय रामप्रसाद उरांव
5 अक्टूबर : गोबर्द्धना थाना क्षेत्र के सिंगाही गांव 12 वर्षीय बगड़ी कुमारी
7 अक्टूबर : गोबर्द्धना थाना क्षेत्र के डुमरी निवासी 35 वर्षीय संजय महतो
8 अक्टूबर : ब‍ब‍िता देवी व उनका सात वर्षीय बेटा श‍िवम कुमार


 

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