दीमक की तरह हमारी युवा पीढ़ी को खत्म कर रहा है नारकोटिक्स : अमित शाह
नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर में मादक पदार्थों की तस्करी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक उच्चस्तरीय क्षेत्रीय बैठक की अध्यक्षता की। अमित शाह ने कहा कि एक ओर नारकोटिक्स दीमक की तरह हमारी युवा पीढ़ी को खत्म कर रहा है और दूसरी ओर नारकोटिक्स के व्यापार से आने वाला अवैध धन आतंकवाद को भी पोषित करता है।
उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को सुरक्षित रखने और आतंकवाद के वित्त पोषण पर करारा प्रहार करने की दृष्टि से इस लड़ाई को भारत सरकार की सभी ऐजेंसियां, राज्य सरकारों की सभी ऐजेंसियां और पुलिस को एक साझा लड़ाई के रूप में एक स्पिरिट के साथ लड़ना और जीतना होगा। उन्होंने कहा कि भारत में आज नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई एक नाजुक और महत्वपूर्ण मोड़ पर है और अगर हम एक ही रणनीति के साथ लड़ते हैं तो हम जीतेंगे लेकिन अगर हम बिखराव के साथ इसे एक सामान्य अपराध मानकर चलते हैं, तो ड्रग्स ऑपरेटर जीतेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे संविधान ने कानून और व्यवस्था को राज्यों का मुद्दा बनाया है और ये उचित भी है। लेकिन विगत चार दशकों में कई इस प्रकार के अपराध अलग-अलग पद्धतियों से अस्तित्व में आए हैं जिनकी प्रकृति ना केवल राष्ट्रीय है बल्कि अंतर्राष्ट्रीय भी है, जैसे ड्रग्स की तस्करी और इसका प्रसार। ये देश की सीमाओं के दूसरी ओर से हमारे देश पर थोपा जा रहा एक अपराध है और देश की सीमाओं के अंदर भी अंतर्राज्यीय गिरोहों के माध्यम से ये अपराध छोटे छोटे शहरों, गांवों और कस्बों तक पहुंचा है और हमारी युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था राज्यों का विषय होने के बावजूद भी अगर हम अक्रॉस बॉर्डर लड़ने का अप्रोच नहीं रखते तो इस पर नियंत्रण नहीं कर सकते, इसीलिए सभी राज्यों की पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की सभी ऐजेंसियां, भारत सरकार का राजस्व, समाज कल्याण, आरोग्य विभाग और सीमा सुरक्षा का काम करने वाली सभी सीएपीएफ, तटरक्षक बल और नौसेना का व्यापक समन्वय करके अगर हम नीति नहीं बनाते हैं तो इस समस्या को पूर्णतया नष्ट करना असंभव है।
इसीलिए मोदी जी के नेतृत्व में 2019 से एक अप्रोच लिया है कि समन्वय और सहयोग के आधार पर नारकोटिक्स के खिलाफ हमारी लड़ाई को पुख्ता, मज़बूत करना, परिणामलक्षी बनाना और सफल करना। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के क्षेत्रीय सम्मेलनों के बाद ज़िलास्तरीय एन्कॉर्ड की रचना हुई है, एफएसएल का उपयोग भी बढ़ा है, राज्यों के हाई कोर्ट में राज्य प्रशासन द्वारा स्पेशल कोर्ट की अनुमति मांगने की संख्या भी बढ़ी है।

