राज्य सरकार से नाराज चल रहे हैं राज्यपाल, ले सकते हैं कोई बड़ा फैसला...
रांची (छत्तीसगढ़ दर्पण)। झारखण्ड के राज्यपाल रमेश बैस प्रदेश सरकार से नाराज चल रहे हैं। इसके चलते वे कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। इससे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
दरअसल राज्यपाल सह कुलाधिपति रमेश बैस ने विश्वविद्यालयों में नियुक्ति से संबंधित नियमावलियों (स्टैच्यूट) के गठन में हो रही देरी पर एक बार फिर नाराजगी प्रकट की है। उन्होंने शुक्रवार को राजभवन में नियमावलियों के गठन की समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने कहा कि नियमावलियों के गठन में देरी होने से विश्वविद्यालयों में नियुक्ति नहीं हो पा रही है।
राज्यपाल ने बैठक में कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विकास के लिए कार्यप्रणाली में गति लाने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कार्य में शिथिलता शिक्षा जगत एवं राज्य के विकास में बाधक है। वर्ष 2010 एवं 2018 के स्टैच्यूट निर्माण की समीक्षा करते हुए नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि अबतक इसके निर्माण नहीं होने से विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया काफी लंबे समय से लंबित है।
राज्यपाल ने बैठक में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति में दिव्यांग अभ्यर्थियों को दिए जा रहे आरक्षण पर चर्चा करते हुए कहा कि विभिन्न श्रेणी के दिव्यांगों को चार प्रतिशत का आरक्षण सुनिश्चित किया जाय। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सचिव राहुल पुरवार ने बताया कि पूर्व के प्रविधान के अनुसार पर एक ही श्रेणी के दिव्यांग को लाभ मिलने की संभावना बनी रहती थी, जिसे दूर करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। राज्यपाल ने कहा कि दिव्यांग के उल्लेखित श्रेणी में किसी एक श्रेणी का अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होने पर दिव्यांग के अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों की नियुक्ति करने पर चर्चा हुई, ताकि पद रिक्त न रहे।
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग को दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने के बारे में सोचें जिससे कि उनकी बैकलॉग पदों पर नियुक्ति हो सके। बैठक में झारखंड लोक सेवा आयोग की अध्यक्ष डा. मेरी नीलिमा केरकेट्टा, राज्यपाल के प्रधान सचिव डा. नितिन कुलकर्णी, उच्च शिक्षा निदेशक सूरज कुमार व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
अब नहीं करें घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति

