जमानत पर रोक की मांग को खारिज करते हुए कोर्ट ने संजय राउत को दी राहत...
मुंबई (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पात्रा चॉल मामले में करीब 101 दिन से जेल में बंद शिवसेना सांसद संजय राउत को मुंबई की एक विशेष अदालत ने बुधवार को जमानत दे दी है। जमानत के बाद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने आदेश के अमल पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की मांग की है। जिससे ईडी मुंबई की पीएमएलए अदालत के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सके। पीएमएलए कोर्ट ने शिवसेना सांसद संजय राउत और सह आरोपित प्रवीण राउत की जमानत के आदेश पर रोक को खारिज कर दिया है, उन्हें रिहा किया जाएगा। उन्हें एक अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।
संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 1 अगस्त को मुंबई में पात्रा 'चॉल' के पुनर्विकास में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। ईडी की जांच उपनगरीय गोरेगांव में चॉल या घरों के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और कथित रूप से उनकी पत्नी और सहयोगियों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से संबंधित है।
क्या है पात्रा चॉल मामला ?
पात्रा चॉल के नाम से पहचाने जाने वाला सिद्धार्थ नगर उपनगरीय गोरेगांव में 47 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें 672 किरायेदार परिवार हैं। 2008 में महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) ने एचडीआईएल (हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) की एक सहयोगी कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (जीएसीपीएल) को चॉल के लिए एक पुनर्विकास अनुबंध सौंपा था। जीएसीपीएल को किरायेदारों के लिए 672 फ्लैट बनाने और म्हाडा को कुछ फ्लैट देने थे। हाती जमीन निजी डेवलपर्स को बेचने के लिए स्वतंत्र था।
हालांकि, ईडी के अनुसार पिछले 14 वर्षों में किरायेदारों को एक भी फ्लैट नहीं मिला, क्योंकि कंपनी ने पात्रा चॉल का पुनर्विकास नहीं किया। उसने 1,034 करोड़ रुपये में यह जमीन पार्सल और फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) को बेच दी।

