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सर्वोदय का दर्शन है मनुष्‍य को करुणा संपन्‍न बनाना : प्रो. रजनीश शुक्ल

 वर्धा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने बुधवार को कहा है कि सर्वोदय का दर्शन है-मनुष्‍य को करुणा संपन्‍न बनाना। सर्वोदय लोक कल्‍याण की दृष्टि से सर्वोत्तम सोची गई अवधारणा है - किसी को कोई नुकसान न हो, किसी को कोई तकलीफ न हो, किसी को नीचे की ओर न जाना हो, जिसमें सबका उदय हो, सब प्रगति की ओर आएं और अंतत: सब जीवन की श्रेष्‍ठतम और उच्‍चतम स्थिति को प्राप्‍त करें। सर्वोदय की अवधारणा एक वैश्विक अवधारणा है। यह नैतिकता, कल्‍पना, परदु:खकातरता, स्‍वयं के लिए अधिकतम कष्‍ट सहने की वृत्ति और तितीक्षा पर आधारित है। प्रो. शुक्‍ल आजादी का अमृत महोत्‍सव के अंतर्गत भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित ‘सर्वोदय के दार्शनिक : विनोबा भावे’ विषय पर विश्‍वविद्यालय में संमिश्र पद्धति से आयोजित विशिष्ट व्याख्यानमाला समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।


हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला के पूर्व कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि स्‍वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत सत्ताधीशों ने गांधी विचारों को अप्रासंगिक करार दिया लेकिन गांधीजी के दर्शन में विनोबा की परम आस्‍था थी। यही कारण है कि विनोबा ने गांधी दर्शन को जमीन पर उतारा। सर्वोदय की संकल्‍पना को साकार करने के लिए ही उन्‍होंने भूदान यज्ञ चलाया और श्रम की महत्ता को भी प्रतिष्‍ठापित किया। उन्‍होंने कहा कि जो समाज शारीरिक श्रम को महत्ता नहीं देता है वह समाज संतुलित विकास नहीं कर सकता है।

कुलपति प्रो. शुक्ल ने आगे कहा कि भारत की सांस्‍कृतिक परंपरा को समझने की दृष्टि से गांधी ने विनोबा को आध्‍यात्मिक गुरु मानते हुए अपना उत्तराधिकारी भी माना था। उन्‍होंने कहा कि सर्वोदय की दृष्टि स्पष्ट संकेत करती है कि विकास का कोई एकांगी स्वरूप नहीं हो सकता है। मनुष्य को दैहिक, दैविक, भौतिक; सभी दृष्टियों से विकसित करना, करुणा संपन्न बनाना, अन्यों के लिए त्याग करने की वृत्ति वाला मनुष्य बनाना और जो उत्पादन है दुनिया में, यह उन सभी तक पहुँच सके, जिनको उनकी अपेक्षा है। सर्वोदय के दर्शन में सबके संरक्षण की बात निहित है और सब भारत के विकास का साधन बन सके, उन्नत भारत के निर्माण में सबकी भूमिका बन सके। प्रो. शुक्ल ने कहा कि औद्योगीकरण तकनीकी वर्चस्ववाद और अनैतिक उपभोक्तावाद के जरिए अपना प्रभाव बढ़ा रहे आर्थिक उपनिवेशवाद का समाधान सर्वोदय की विचारधारा में ही है।

स्वागत वक्तव्य प्रतिकुलपति प्रो. चंद्रकांत एस रागीट ने दिया। दर्शन एवं संस्कृति विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सूर्य प्रकाश पाण्डेय ने कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन किया तथा दर्शन एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष डॉ. जयंत उपाध्याय ने धन्यवाद ज्ञापित किया। शुरुआत दीप प्रज्वालन, कुलगीत तथा छात्र चंदन मिश्र द्वारा प्रस्तुत भारत वंदना से की गयी। इस अवसर पर अधिष्ठातागण, विभागाध्यक्ष, अध्यापक, विद्यार्थी एवं शोधार्थी बड़ी संख्या‍ में उपस्थित थे। आभासी माध्यम से भी बड़ी संख्या में अध्यापक एवं विद्यार्थी सहभागी हुए।

 

 

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