हिंदुस्तान

15 सेकंड में ही, जयशंकर ने पाकिस्तान को दिया तगड़ा संदेश दिया...

गोवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एससीओ काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स (सीएफएम) की बैठक में भाग लेने के लिए बिलावल भुट्टो की भारत यात्रा,

जम्मू-कश्मीर में सीमा पार आतंकवाद की घटनाओं के बीच हो रही है, जिसपर पूरी दुनिया की नजर है।

SCO Summit S Jaishankar meets Bilawal Bhutto: कहते हैं, डिप्लोमेसी में चेहरे का हावभाव, आंखों की भाषा का काफी महत्वपूर्ण होता है और जब दो देशों के नेता मिलते हैं, तो उनकी चंद सेकंड्स की मुलाकात से ही पता चल जाता है, कि दोनों देशों के बीच के रिश्ते कैसे हैं और आगे कैसे होने वाले हैं। भारत के गोवा में इस वक्त शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक चल रही है, जिसमें एससीओ के सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्री मौजूद हैं। इस संगठन का हिस्सा पाकिस्तान भी है और पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो एससीओ की बैठक में हिस्सा लेने के लिए गुरुवार को भारत पहुंचे हैं। बिलावल भुट्टो के भारत दौरे को लेकर भारतीय और पाकिस्तानी मीडिया में काफी उत्साह है और भारतीय टीवी चैनलों पर बिलावल के दौरे का काफी बड़ा कवरेज भी हो रहा है, लेकिन सिर्फ मीडिया में। आज जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर शिखर सम्मेलन से पहले बिलावल से मिले, तो 15 सेकंड के वीडियो में उन्होंने पूरी तरह से साफ कर दिया, कि पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति क्या रहने वाली है। एस. जयशंकर और बिलावल भुट्टो के आमने-सामने आने का इंतजार कल से ही किया जा रहा था और आज एससीओ की बैठक शुरू होने से पहले एस जयशंकर जब सदस्य देशों के विदेश मंत्री को बैठक स्थल तक जाने के लिए स्वागत कर रहे थे, उस वक्त उन्होंने बिलावल भुट्टो का भी स्वागत किया।

हालांकि, वीडियो में भारतीय विदेश मंत्री की बेरूखी को साफ तौर पर देखा जा सकता है। वीडियो में दिख रहा है, कि भारतीय विदेश मंत्री खड़े हैं और बिलावल भुट्टो उनकी तरफ फोटो खिंचवाने के लिए आगे बढ़ते हैं। एस जयशंकर बिलावल को नमस्ते कहते हैं, जवाब में बिलावल भुट्टो भी भारतीय विदेश मंत्री को नमस्ते के साथ जवाब देते हैं। इस दौरान एस जयशंकर सिर्फ एक सेकंड के लिए बिलावल को देखते हैं और फिर मीडिया के कैमरों के सामने देखने लगते हैं। बिलावल भुट्टो मुस्कुराते रहते हैं। फिर बिलावल भुट्टो, भारतीय विदेश मंत्री से करीब 2 फुट की दूरी पर खड़े हो जाते हैं और मुस्कुराते हुए फोटो खिंचवाने लगते हैं। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर काफी सीरियस दिख रहे थे और उनके चेहरे के हावभाव से समझा जा सकता है, कि बिलावल भुट्टो का उन्होंने कितनी सुस्ती के साथ स्वागत किया है। करीब 7 सेकंड्स तक मीडिया के कैमरे दोनों नेताओं का फोटो खिंचते हैं और उसके बाद एस. जयशंकर हाथों से इशारा करते हुए बिलावल भुट्टो को कार्यक्रम स्थल तक जाने के लिए कहते हैं। जवाब में बिलावल भुट्टो फिर से थोड़ा सा झुकते हुए सीने पर हाथ लगाकर भारतीय विदेश मंत्री का अभिवादन करते हैं। लेकिन, एस. जयशंकर का दोनों हाथ नीचे ही रहता है और वो सिर्फ मुस्कुराते हुए अभिभादन का आदान-प्रदान करते हैं। इसके अलावा भारतीय विदेश मंत्री, बिलावल भुट्टो के साथ एक कदम भी नहीं चलते हैं। ये पूरा घटनाक्रम सिर्फ 15 सेकंड का रहा, लेकिन इन 15 सेकंड्स में एस. जयशंकर ने साफ कर दिया, कि पाकिस्तान के रवैये से भारत बिल्कुल खुश नहीं है। एस. जयशंकर एक मंझे हुए डिप्लोमेट रहे हैं और अब वो भारत के विदेश मंत्री हैं। लिहाजा, उनका हावभाव काफी आसानी से बयां कर रहा था, कि भारत पाकिस्तान के रवैये से खुश नहीं है। पिछले हफ्ते जब एससीओ के रक्ष मंत्रियों की बैठक हुई थी, उस दौरान भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के रक्षा मंत्री से भी हाथ नहीं मिलाया था। बिलावल भुट्टो ने विदेश मंत्री बनने के बाद भारत को लेकर काफी तीखी बयानबाजी की है। वहीं, उन्होंने भारतीय प्रघानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर आपत्तिजनक निजी टिप्पणियां की हैं। बिलावल भुट्टो ने पीएम मोदी को 'बूचर ऑफ गुजरात' भी कहा और भारत की तरफ से इसको लेकर काफी सख्त प्रतिक्रिया दी गई थी। वहीं, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले दिनों साफ तौर पर कहा था, कि 'भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छा संबंध बनाना चाहता है, लेकिन कुछ देश ऐसे होते हैं, जिनके साथ संबंध नहीं बनाया जा सकता है।" वहीं, एस. जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा, कि "आतंकवाद का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता है और इसे सीमा पार आतंकवाद सहित इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में रोका जाना चाहिए"।इसके साथ ही, भारत ने पाकिस्तान को संदेश दे दिया है, कि आतंकी घटनाओं के साथ साथ पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते हैं। कश्मीर के पुंछ में पिछले दिनों आतंकी हमला हुआ था, जिसमें कई भारतीय जवान शहीद हो गये थे और इसमें पाकिस्तान स्थिति आतंकी संगठनों का हाथ है। लिहाजा, भारतीय विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया ने उन अटकलों को विराम दे दिया है, जिसमें छोटी सी आशा लगाई जा रही थी, कि भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हो सकती है।

 

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