KCR कांग्रेस पर क्यों हुए गरम व बीजेपी पर पड़े नरम
हैदराबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के कांग्रेस को निशाना बनाने और भाजपा पर चुप रहने की नई रणनीति से इस साल के अंत में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज कर दी हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान मुख्यमंत्री केसीआर ने राज्य में तीन जनसभाओं को संबोधित किया और सभी में कांग्रेस पार्टी की आलोचना की, लेकिन, भाजपा को छोड़ दिया।
हालांकि केसीआर की इस नई रणनीति पर कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने कोई हैरानी नहीं जताई। उनका मानना है कि केसीआर का भाजपा के साथ हमेश गुप्त समझौता रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद अली शब्बीर ने कहा, कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस की जीत के बाद, भाजपा और बीआरएस ने खुद को एक कदम पीछे खींच लिया है। केसीआर अब कांग्रेस को एक ऐसी पार्टी के रूप में देखते हैं, जो उन्हें हरा सकती है।
उन्हें आश्चर्य नहीं है कि केसीआर ने भाजपा को बख्शते हुए अपने हमलों के लिए कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। एक सप्ताह में निर्मल, नागरकुर्नूल और गडवाल में हुई जनसभाओं में केसीआर के भाषणों ने राजनीतिक गलियारों को चकित कर दिया है। इन सभाओं में केसीआर ने कांग्रेस पर तो खूब हमला किया, लेकिन भाजपा की आलोचना करने से परहेज किया।
उनके भाषणों की विषय-वस्तु, लहजा और तेवर नवंबर-दिसंबर 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले उनकी रणनीति में बदलाव का संकेत देते हैं।शब्बीर ने कहा, यह और कुछ नहीं, बल्कि बीआरएस और बीजेपी के बीच समझौते का हिस्सा है। बीजेपी सीबीआई, ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करने की धमकी देकर लगभग हर राज्य में एक ही रणनीति का इस्तेमाल कर रही है।

