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कार्य के प्रति समर्पण सफलता की प्रथम कुंजी : अधिवक्ता वर्षा गुप्ता

नई दिल्ली  बीते दशक में कानूनी पेशे और संबंधित व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है । देश के विभिन्न अदालतों में महिला अधिवक्ताओ की भूमिका अहम है । इसी कड़ी में समाचार एजेंसी यूनाइटेड बुलेटिन से साक्षात्कार में मध्य प्रदेश की अनुभवी एवं चर्चित अधिवक्ता वर्षा बंसल ने अपने वर्षो की प्रैक्टिस, कानून में चुनौतियां, कानून में करियर बनाने को लेकर सुझाव एवं साइबर अपराध की चुनौतियों से निपटने जैसे विषयों पर चर्चा की। 


कानूनी पेश में रुचि और इसमें अपना करियर बनाने को लेकर अधिवक्ता वर्षा गुप्ता ने कहा कि वह बचपन से ही जिज्ञासु और बेबाक प्रवत्ति की रही है । वाद विवाद, भाषण, स्पर्धा में रुचि होने से विधि का ज्ञान लेना और इसी में करियर बनाना तय किया।

अपने वर्षों के अभ्यास में महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव पर बात करते हुए श्रीमती गुप्ता ने कहा कि
महिलाओं के प्रति दृश्टिकोण में बदलाव का प्रतिशत आज भी कम है । जहा तक महिलाएं हर क्षेत्र में अव्वल है वही उनको आगे बढ़ता हुआ देख पुरुष प्रधान समाज से उनकी उपलब्धियां सहन नही होती । आज भी उनको लगता है महिलाएं आगे तो बढ़े पर मर्यादा, समाज, परिवार की बेड़ियों के साथ । बदलाव का प्रतिशत 50 से 60 फीसदी ही बढा है ।

साइबर उत्पीड़न कई पर अंकुश लगाने के उपाय पर बात करते हुए श्रीमती गुप्ता ने कहा कि डिजिटल युग में साइबर लॉ की जानकारी ही साइबर उत्पीड़न से बचा सकता है। एक और जहा साइबर सेल और सरकार जागरूकता अभियान चला रही है, वही थोड़ी सी सावधानी बरतने से और किसी समस्या पर तुरंत साइबर सेल को मिले । 

कानूनी पेशे में पुरुषों और महिलाओं के बीच अधिक समानता सुनिश्चित करने के सवाल पर अधिवक्ता ने कहा कि कानूनी पेशा महिला और पुरुष से नही बल्कि कानूनी दलीलों और ज्ञान से चलता है । तक समानता की बात है तो न्यायालय के सामने दोनो वर्ण समान है,परंतु यदि नौकरी की बात करे तो समानता नही है। महिलाओ को आरक्षित होने का एहसास न कराकर खुद आगे बढ़ने में यकीन होना चाहिए। 

एक अन्य सवाल के जवाब पर अधिवक्ता ने कहा कि कानून नीव है जिससे समाज का संचालन होता है। नए कानून चाहे वो विधवा विवाह, लव जिहाद या समलैंगिक विवाह हो उसका असर समाज पर तो होता ही है। कानूनी पेश वो चिंगारी है जो समाज को प्रकाशित कर सकता है ।

युवा महिला अधिवक्ताओं को लेकर श्रीमती गुप्ता ने कहा कि यह समझने की जरूरत है कि आप दूसरी महिलाओं की पथ प्रदर्शक है जिसमे उन्हें सर्वप्रथम घरेलू मामलों को शांतिपूर्वक तरीके से निपटाना और सामज में सुधार करना । वही कानून का विशिष्ठ ज्ञान लेकर सही ढंग से ड्राफ्टिंग पर जोर देना चाहिए । सीधे ही सीनियर बनने का सपना ना देखते हुए दूसरे वरिष्ठ अधिवक्ताओ के अनुभवों से भी मार्गदर्शन लेना चाहिए ।

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