नए संसद भवन में पहला काम देश की आधी आबादी को ठगने का हुआ : राधिका
चंडीगढ़: महिला आरक्षण इस देश की आधी आबादी की राजनीतिक भागीदारी और उनके सशक्तिकरण का सबसे ज़रूरी और सबसे सॉलिड माध्यम है। महिला आरक्षण से ज्यादा से ज्यादा महिलाएं देश की राजनीति में आएंगी। पार्लियामेंट में आएंगी। विधानसभा में आएँगी और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी होगी। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसका पूर्ण समर्थन करती हैं। यह कहना है कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं वरिष्ठ नेत्री राधिका खेड़ा का।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय चंडीगढ़ में उन्होंने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि महिलाओं की जो लड़ाई है, वो लंबी चली। लंबी लड़ी गई और उनको लगातार मायूसी का आज भी सामना करना पड़ा है। साल 1989 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण की शुरुआत की। लेकिन इसके लिए जब बिल पेश किया गया तो बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेई, यशवंत सिंह और राम जेठमलानी ने उसके विरोध में वोट किया। वह बिल लोकसभा में पारित हो गया। लेकिन, राज्यसभा में केवल 7 वोटों से गिर गया।
वर्ष 1992 में पूर्व प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव ने पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 33% सीटों का आरक्षण लागू किया। दोनों विधेयक पारित हुए और कानून बन गए। कई राज्यों में, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कोटे के भीतर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित की गईं।

