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पैसे बचाने के लिए प्रधानमंत्री ने लगाई पाबंदी, फिर भी विदेशों से लग्जरी सामान क्यों खरीद रहा है पाकिस्तान?

 इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। बढ़ते आयात बिल और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देश की मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट के बीच पाकिस्तान ने आपातकालीन आर्थिक योजना के तहत 38 गैर जरूरी लक्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी। हालांकि देश के वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार इन आयातों की अनुमति देना जारी रखे हुए है।


मई में लगा था प्रतिबंध 
एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट हवाले से बताया गया कि मई में सरकार ने एक आपातकालीन आर्थिक योजना को लागू करते हुए दर्जनों गैर जरूरी लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। वित्तमंत्री इस्माइल ने एक ट्वीट में कहा कि सरकार आयातकों को होने वाले नुकसान से बचने के लिए कम अधिशूल्क के साथ 1 जून तक बंदरगाहों तक पहुंचने वाली सभी वस्तुओं के आयात की अनुमति दे रही है।

आयात की दी अनुमति 
इस्माइल ने एक ट्वीट में लिखा 'सरकार द्वारा कुछ लग्जरी के सामानों पर अस्थायी रूप से प्रतिबंध लगाने के बाद भी, इन वस्तुओं के कई शिपमेंट अनजाने में हमारे बंदरगाहों पर आ गए थे। ऐसे में आयातकों को नुकसान से बचाने के लिए, सरकार उन सभी वस्तुओं के आयात की अनुमति दे रही है जो 1 जून तक हमारे बंदरगाहों पर एक कम अधिशूल्क के साथ पहुंच गई हैं।'एक अन्य ट्वीट में इस्माइल ने लिखा, 'इसके अलावा, फैसल सुब्जवारी, समुद्री मामलों के संघीय मंत्री, समुद्री मंत्री और मैं कोशिश कर रहे हैं कि इन आयातकों को बहुत कम या अच्छा हो कि कोई विलंब शुल्क या कंटेनर बंदी शुल्क का भुगतान न करना पड़े। इसके लिए निश्चित रूप से हमें कंटेनर टर्मिनल के ऑपरेटरों और कंटेनर मालिकों सहयोग की आवश्यकता है।

मई में पीएम ने लगाया प्रतिबंध 
बता दें कि दो महीने पहले प्रतिबंध लगाते हुए सरकार ने कहा था -'बढ़ते आयात बिल और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले देश की मुद्रा में रिकॉर्ड गिरावट के बीच पाकिस्तान ने 'आपातकालीन आर्थिक योजना' के तहत 38 गैर-जरूरी लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जा रही है।'

विदेशी मुद्रा की होगी बचत 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि इस फैसले से देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि लग्जरी वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध से देश की कीमती विदेशी मुद्राओं की बचत होगी। हम तपस्या करेंगे और आर्थिक रूप से मजबूत लोगों को इस प्रयास में नेतृत्व करना चाहिए ताकि हमारे बीच कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों को यह बोझ न उठाना पड़े।
 

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