दुनिया-जगत

पुतिन और किम जोंग उन की नज़दीकियां किसके लिए बन रही हैं सिरदर्द

 
नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रूस और उत्तर कोरिया के बीच एक ज़माने बाद नज़दीकियां बढ़ती हुई दिख रही हैं. शीत युद्ध के ज़माने में उत्तर कोरिया और सोवियत संघ एक दूसरे के काफी करीब हुआ करते थे.

हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन को एक चिट्ठी लिखी है जिसमें दोनों के रिश्तों को और मजबूत बनाने का वादा किया गया है.

किम जोंग उन की ओर से इस चिट्ठी का जवाब भी दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा है, "विरोधी ताक़तों के ख़िलाफ़ साझा हितों के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग अपने उच्चतम स्तर पर है."

साल 2019 में पूर्वी रूस के शहर व्लादिवोस्तोक में एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन हुआ था जिसमें दोनों नेताओं रूस-उत्तर कोरिया की नई दोस्ती पर मुहर लगाई थी.

इसके बाद से ही किम जोंग उन हर विवादास्पद मामले में मॉस्को के लिए अपने समर्थन का खुलेआम एलान करते रहे हैं. यूक्रेन पर जब रूस ने धावा बोला तब भी उत्तर कोरिया ने रूस के लिए अपनी वफादारी दिखलाई.

यूक्रेन के डोनेट्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को जब रूस ने जुलाई के महीने में अपने नियंत्रण में लेने की घोषणा की तो इसका समर्थन करने वाला उत्तर कोरिया तीसरा देश था.

रूस और व्लादिमीर पुतिन की तारीफ़ में किम जोंग उन हमेशा सक्रिय रहे हैं. उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में रूस से जुड़ी ख़बरों को खासी तवज्जो मिलती रही है.

बीबीसी की मुंडो सेवा ने रूस और उत्तर कोरिया के संबंधों को समझने के लिए कई विशेषज्ञों से बात की है.

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साल 1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना से पहले किम इन सुंग ने सोवियत संघ में प्रशिक्षण लिया था

दोनों देशों का इतिहास
वॉशिंगटन डीसी स्थित थिंकटैंक विल्सन सेंटर के एक्सपर्ट सैमुअल वेल्स बीबीसी मुंडो से कहते हैं, "सोवियत संघ के विघटन के बाद प्योंगयांग और मॉस्को के संबंध काफी कमज़ोर हो गए थे. उस लिहाज से देखें तो अब दोनों देशों के रिश्तों में काफी सुधार हो रहा है."

प्योंगयांग और मॉस्को के संबंधों की शुरुआत साल 1948 में उत्तर कोरिया की स्थापना के साथ ही शुरू हो गई थी.

द्वितीय विश्व युद्ध के ख़त्म होने के बाद सोवियत संघ के तत्कालीन नेता जोसेफ स्तालिन ने किम इल सुंग को उत्तर कोरिया की सत्ता में स्थापित करने में काफी मदद की थी. वहां ऐसा निज़ाम स्थापित किया गया जो कोरियाई संस्कृति और परंपरा के मुताबिक़ और सोवियत संघ के अनुकूल था.

किम इल सुंग उत्तर कोरिया के मौजूदा शासक किम जोंग उन के दादा थे.

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उत्तर कोरिया
साल 1950-53 के दौरान हुए कोरियाई युद्ध में दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ सोवियत संघ ने उत्तर का साथ दिया. सहयोग का ये सिलसिला कोरियाई युद्ध के बाद भी जारी रहा. बाद में चीन ने भी किम की हुकूमत को हर तरह के संसाधनों के साथ मदद पहुंचाई.

न्यूज़ एजेंसी ईएफ़ई के लिए उत्तर कोरिया में 14 सालों तक रिपोर्टिंग कर चुके एंड्रेस सांचेज़ बारुन उत्तर कोरिया, रूस और चीन के संबंधों पर लंबा अनुभव रखते हैं.

उन्होंने बीबीसी मुंडो को बताया, "शीत युद्ध के समय किम इल सुंग रूस और चीन के साथ संबंधों में संतुलन साधने में हमेशा कामयाब रहे. बिना किसी पर विशेष रूप से निर्भर हुए वे रूस और चीन दोनों के अच्छे दोस्त बने रहे. साल 1953 में ख्रुश्चेव के सत्ता में आने के बाद रूस और चीन के संबंधों में आई दूरियों का भी उन्होंने फ़ायदा उठाने

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