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भारत ने UNHRC में उठाया तमिल मुद्दा, कहा- ठोस कदम नहीं उठा रहा श्रीलंका, ये हमारे लिए चिंता की बात

 

जेनेवा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारत ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में तमिल का मुद्दा उठाया। भारत ने कहा कि श्रीलंका में मानवाधिकारों का हनन हो रहा है। भारत ने तमिल मुद्दे पर एक राजनीतिक समाधान तक पहुंचने की अपनी प्रतिबद्धता पर श्रीलंकाई सरकार द्वारा किसी भी औसत दर्जे की प्रगति की कमी पर चिंता व्यक्त की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 51वें सत्र में ओएचसीएचआर की रिपोर्ट श्रीलंका में सुलह, जवाबदेही और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के विषय पर आयोजित एक संवाद में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि श्रीलंका खुद अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रहा है और अभी तक उसने तमिल मुद्दे के समाधान को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

श्रीलंका में मानवाधिकार में हो सुधार
भारत ने कहा कि पड़ोसी द्वीप राष्ट्र श्रीलंका में शांति और सुलह पर उसका लगातार दृष्टिकोण एक संयुक्त श्रीलंका के ढांचे के भीतर एक राजनीतिक समाधान के लिए रहा है, लेकिन वहां रहने वाले तमिल लोगों के लिए न्याय, शांति, समानता और सम्मान सुनिश्चित करना भी उसका मानवाधिकार है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका को मानवाधिकारों में सुधार करना चाहिए और मानवीय चुनौतियों से निपटने के लिए संस्थानों को मजबूत करना चाहिए। बता दें कि श्रीलंका इस समय सबसे खराब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। भारत ने कहा कि यह श्रीलंका के सर्वोत्तम हित में है कि वह अपने नागरिकों के हित में कार्य करे और उनके सशक्तिकरण की दिशा में काम करे।

श्रीलंका का समर्थन करने की अपील की
UNHRC के एक शीर्ष अधिकारी नादा अल-नशिफ ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को श्रीलंका का समर्थन करना चाहिए क्योंकि देश में लोग भोजन, ईंधन, बिजली और दवा की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे के नेतृत्व वाली श्रीलंका की नई सरकार से जुलाई में पूर्व राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को बाहर करने में मदद करने वाले विरोधी नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए सुरक्षा कानूनों के उपयोग को समाप्त करने का भी आग्रह किया।
 

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