दुनिया-जगत

FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर हुआ पाकिस्तान, 2018 में सूची में आया था नाम, जानिए इससे क्या फायदा होगा?

 

इस्लामाबाद (छत्तीसगढ़ दर्पण)। Pakistan Grey List: आखिरकार चार सालों के इंतजार के बाद पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर हो गया है। पाकिस्तान 4 वर्षों से भी अधिक समय से इस सूची से बाहर निकलने का इंतजार कर रहा था। इस फैसले के बाद पाकिस्तान को अपनी आर्थिक हालत सुधारने में मदद मिलेगी। पाकिस्तान अब विदेशों से धन हासिल कर सकेगा। पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से बाहर निकले इसके लिए सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए। इसके अलावा दुनिया भर में चर्चित आतंकी हाफिज सईद जैसे आतंकियों को जेल में डाला था। एफएटीएफ के मौजूदा अध्यक्ष सिंगापुर के टी. राजा कुमार ने रात करीब साढ़े आठ बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर किए जाने का एलान किया। FATF के बयान के मुताबिक, पाकिस्तान अब FATF की बढ़ी हुई निगरानी प्रक्रिया के अधीन नहीं है। वह धन शोधन विरोधी और आतंकवाद विरोधी वित्तपोषण प्रणाली (AML/CFT) को और बेहतर बनाने के लिए एशिया/पैसिफिक ग्रुप (APG) ऑन मनी लॉन्ड्रिंग के साथ काम करना जारी रखेगा। FATF अध्यक्ष टी राजा कुमार ने कहा कि पाकिस्तान को ग्रे सूची से हटा दिया गया है, हालांकि, उनकी (पाकिस्तान) ओर से अभी भी काम किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान को आतंकवाद के वित्तपोषण से निपटने के लिए कदम उठाने के लिए एशिया-प्रशांत समूह के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

बिलावल भुट्टो ने की घोषणा
FATF की एक अहम मीटिंग पेरिस में चल रही है। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हुई थीं कि क्या पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से निकलने में कामयाब हो पाएगा? और आखिरकार पाकिस्तान के सालों के इंतजार का उसे फल मिला। विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी ने FATF की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले देश को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए यह घोषणा की।

2018 में ग्रे लिस्ट में शामिल हुआ था पाकिस्तान
पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया था। उस पर मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फंडिंग और कमजोर कानून बनाने के आरोप हैं। एफएटीएफ ने उस वक्‍त आतंकवादियों को की जाने वाली फंडिंग, मनी लाड्रिंग, आतंकवादियों के लिए कमजोर कानून बनाने को लेकर को पाकिस्तान को ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम के लिए बड़ा खतरा माना था। FATF ने पाकिस्‍तान को 27 बिंदुओं पर काम करने को कहा था। इसके बाद इन बिंदुओं को बढ़ा कर 34 और फिर 40 तक कर दिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने जून में ही 38 शर्तों को पूरा कर दिया था।

पाकिस्तान को क्या फायदा होगा?
पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से हटने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि देश की प्रतिष्ठा में बढोतरी होगी। पाक को पहले से अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (IMF), वर्ल्‍ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और यूरोपियन यूनियन से आर्थिक मदद हासिल करने में मुश्किलों का सामना कर रहा है अब इस लिस्ट से निकलने से उसकी आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर हो सकती है। पाक को आतंकवादी वित्तपोषण पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से भी क्लीन चिट मिलने की संभावना है। हाल ही में मूडीज द्वारा देश की सावरेन क्रेडिट रेटिंग डाउनग्रेड किया गया है। FATF पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से निकलने पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण, भावना में भी सुधार होगा।

3 बार ग्रे लिस्ट में आ चुका है पाकिस्तान
पाकिस्तान अब तक 3 बार ग्रे लिस्ट में आ चुका है। पहली बार वह 2008 में इस लिस्ट में आया था। उसके बाद वह 2012 और आखिरी बार 2018 में इस लिस्ट में आ चुका है। बता दें कि दो साल के लिए FATF की प्रेसिडेंसी सिंगापुर के पास है। 206 मेंबर्स की लिस्ट में IMF, UN, वर्ल्ड बैंक, इंटरपोल और फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट भी शामिल हैं। गुरुवार को शुरू हुई दो दिनों तक चलने वाली इस मीटिंग में यह भी जांच की जाएगी कि किन देशों की वजह से इंटरनेशनल फाइनेंशियल सिस्टम को खतरा है। मीटिंग में सबसे अधिक नजर ट्रांसपेरेंसी पर होगा।

Leave Your Comment

Click to reload image