खेरसॉन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। पिछले 9 महीने से यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) की आग में जल रहा है। जंग से निकलने वाली आग की लपटों ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। दुनिया में ऊर्जा संकट बढ़ता जा रहा है। शक्तिशाली देशों की इकॉनोमी स्लो डाउन से गुजर रही है। वहीं, कुछ दिनों से यूक्रेन में रूस के लिए कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है। रूस जैसे शक्तिशाली देश के लिए खेरसॉन से बाहर निकलने का निर्णय किसी बड़ी पराजय से कम नहीं है। वहीं, व्लादिमीर पुतिन के करीबी जानते हैं कि वह 'असली युद्ध हार चुके हैं।
रूस जंग में अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है
दरअसल, रूस यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में नया मोड़ आ गया है। खेरसॉन से रूसी सैनिकों की वापसी के ऐलान के बाद दुनिया की निगाहें युद्ध पर टिकी हैं। एक रिपोर्ट में खेरसॉन से रूस के पीछे हटने के क्या मायने हो सकते हैं, इसकी जानकारी दी गई है। रूसी स्वतंत्र समाचार आउटलेट मेडुजा ने यूक्रेन में रूस के खिलाफ हाल की घटनाओं को बहुत दर्दनाक बताया। रिपोर्ट बताती है कि, खेरसॉन के साथ रूस वास्तविक युद्ध हार चुका है।
खेरसॉन में हार से बौखलाया रूस
रिपोर्ट में कहा गया है कि, खेरसॉन में चारो खाने चित्त होने के बाद भी व्लादिमीर पुतिन जंग को लेकर आशावादी बने हुए हैं। उन्हें लगता है कि,राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने पद से इस्तीफा दे देंगे और इससे रूस के लिए जीत का एक नया द्वार खुल जाएगा। हालांकि, इन उम्मीदों के पीछे कोई तर्क नहीं था।
रूसी सैनिक अब टूट चुके हैं
अंडरस्टैंडिंग अर्बन वारफेयर के लेखक जॉन स्पेंसर ने न्यूजवीक को बताया कि रूस की सेना अब टूट चुकी है, थक चुकी है। सिर्फ सेना में नई भर्ती करने से कुछ नहीं होने वाला है। युद्ध के मैदान में सैनिकों को लड़ने के लिए अत्याधुनिक हथियार और अन्य सैन्य साजो-सामान के साथ-साथ एक लंबे समय तक प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता है। जॉन स्पेन्सर ने आगे कहा कि, 24 फरवरी से जारी जंग ने रूस की युद्धक क्षमता को गंभीर रूप से कमजोर बना दिया है। जंग में यूक्रेन को यूरोप और अमेरिका से सैन्य और आर्थिक सहायता प्राप्त हो रहा है। जेलेंस्की के सैनिक अमेरिका के अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर रूसी सैनिकों पर भारी पड़ रहे हैं। इससे पुतिन की सेना हताश हो चली है।
जंग में अपराधी, एचआईवी मरीजों को भेजा जा रहा है
वहीं, रूस जंग जीतने के लिए अब खूंखार अपराधियों और एचआईवी जैसे भयंकर रोग से ग्रसित मरीजों को जंग के मैदान में भेज रहा है। इससे मॉस्को के सैनिकों को गहरा आघात लगा होगा। बिना किसी प्रशिक्षण के अपराधियों, मरीजों को जंग के मैदान में भेजने से समस्या का समाधान नहीं निकलने वाला है। रूस ऐसे कैसे जंग जीत पाएगा। इन सबके बीच पुतिन परमाणु हमले की धमकी भी दे रहे हैं।
इस जंग का अंत नहीं?
पिछले 9 महीने से यूक्रेन युद्ध की आग में जल रहा है। इससे दुनिया प्रभावित हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। रूस-यूक्रेन के जारी युद्ध में भीषण तबाही हुई। यूक्रेन पर रूसी सैनिकों ने ताबड़तोड़ हमले किए। कई शहरों पर रिहायशी इलाकों में भी मिसाइल अटैक हुए और भारी तबाही हुई। यूक्रेन में हमले के बाद हजारों की संख्या में लोगों की मौत हुई।
जेलेंस्की नाटो की सदस्यता लेना चाहते हैं
जेलेंस्की की जिद्द थी कि यूक्रेन को NATO में शामिल करेंगे। जबकि पुतिन का कहना था कि यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो जाएगा। पुतिन और जेलेंस्की ने कसम खा रखी है कि, वे जीत कर दम लेंगे। वहीं, अमेरिका यू्क्रेन को भारी सैन्य सहायता भेजी,जिससे यूक्रेन जंग में रूस के हौसले पस्त हो गए। अब मास्को की स्थिति हार से कम नहीं है। जंग के लंबा खिंचने के कारण रूस की बची-खुची सेना हताश हो चुकी है। हालांकि, जंग का अंत अब भी नहीं दिख रहा है।