धर्म समाज
विष्णु के सुशासन से बस्तर संभाग में बदल रही है स्वास्थ्य सुविधाओं की तस्वीर
मुख्यमंत्री साय से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने की सौजन्य मुलाकात
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी 'मन की बात' की 123वीं कड़ी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज ने की सौजन्य भेंट
मुख्यमंत्री साय ने निरंजन पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी कैलाशनंद गिरि जी महाराज के साथ विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, केंद्रीय राज्य मंत्री महिला एवं बाल विकास श्रीमती सावित्री ठाकुर, राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैंकरा, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर शारदाधाम पर्यटन स्थलों की सूची में हुआ शामिल
मुख्यमंत्री ग्राम दोकड़ा में भगवान जगन्नाथ मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय बुधवार को कांसाबेल विकास खंड के ग्राम दोकड़ा के प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर के जीर्णाेद्धार पश्चात प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दोकड़ा में 24 लाख 74 हजार की लागत से बनने वाले महतारी सदन का भूमि पूजन किया। मुख्यमंत्री ने दोकड़ा के श्री जगन्नाथ मंदिर समिति के सदस्यों को धन्यवाद देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।
अयोध्या में हनुमान गढ़ी में आराध्य के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु
रामनगरी अयोध्या में शनिवार को हनुमान जयंती की धूम है। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हनुमान गढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन को पहुंचे। श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखे। पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान रहा।
वैसे तो अयोध्या में उत्तर भारतीय परंपरा के अनुसार हनुमान जयंती छोटी दीपावली को मनाई जाती है। दक्षिण में चैत्र की पूर्णिमा को हनुमान जयंती का आयोजन होता है। शनिवार को हनुमान जयंती के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। हनुमंत लला के दर्शन करके पूजन किया।
कुदरगढ़ महोत्सव आस्था, भक्ति और परंपरा का अनूठा संगम: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
कुदरगढ़ मंदिर धाम ’प्रसाद योजना‘ में शामिल: विकास के लिए केन्द्र सरकार से मिलेगी मदद
जशपुर के मधेश्वर पहाड़ की ख्याति देश-विदेश तक पहुंची : पं.प्रदीप मिश्रा
कुनकुरी मयाली में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ के पास 21 से 27 मार्च तक आयोजित महाशिवपुराण का भव्य समापन किया गया। प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने शिव भक्तों को 7 दिन तक कथा का श्रवण कराया और सभी को भव्य आयोजन के लिए अपनी हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा की महाशिवपुराण कथा का श्रवण करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी आए थे। साथ ही पूरे भारत वर्ष के लगभग 272 देशों के लोगों ने विभिन्न सोशल मीडिया, चौनल के माध्यम से कथा को सुना जशपुर में सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ की ख्याति भारत देश के साथ देश विदेश तक पहुंच चुकी है।
और इसका पूरा श्रेय जशपुर वासियों को जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल्या साय, राजपरिवार, कलेक्टर रोहित व्यास एस एस पी शशि मोहन सिंह जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक कुमार सहित जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारी कर्मचारीयों पत्रकारों, भोजन , पेयजल की व्यस्था नगर पालिका अधिकारी, कर्मचारियों को और आयोजन समिति के साथ प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी लोगों, जशपुर के शिव भक्तों का हृदय से धन्यवाद दिया की आपके सहयोग से शिवमहापुराण कथा सफल हो सका।
प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कथा के सातवें दिन सुबह 8 बजे 11 बजे तक कथा का श्रवण कराया उन्होंने कहा कि भोला ... कहां... मिलेगा... भोले ...एक.. एक.. कण.. कण .. मिलेंगे भक्तों के हृदय में भोले मिल जाएंगे बाबा ने मनुष्यों को अपने कर्म से महान बनने का संदेश दिया इसके लिए भूखे को खाना खिलाने प्यासे को पानी पिलाया पीपल के नीचे चींटियों को आटा खिलाओ, इस भंडारे के समान ही पुण्य मिलता है। आप भंडारे नहीं कर सकते कोई बात नहीं जितनी शक्ति उतनी भक्ती पंडित मिश्रा ने कहा कि अपने छत पर पक्षियों के लिए चारा पानी की व्यवस्था करें मटका में पानी भरकर रखें गौमाता को घास रोटी पानी पिलाएं यह सब कार्य भंडारे से कम नहीं है। जहां जहां अच्छा कार्य वहां भोले जरूर मिलेंगे। शिव भक्तों को भोले बाबा को एक लोटा जल अवश्य चढ़ाने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जो तुम्हें जल चढ़ाने को मना करते तुम उन्हें छोड़ दो जशपुर के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग मधेश्वर पहाड़ का यह शिव धाम विधी विधान से कलश यात्रा के साथ सात दिन शिव महापुराण कथा से हर हर महादेव से गुंजने लगा है।
मुख्यमंत्री की पत्नी कौशल्या साय ने महाशिवपुराण की कथा के समापन के अवसर पर पंडित प्रदीप मिश्रा और उनके साथ आए सभी लोगों का धन्यवाद दिया। जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वास्थ्य विभाग, पेयजल विभाग, स्वच्छ भारत मिशन, नगरीय निकाय के साथ सभी का सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है।
शिव महापुराण में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने किए पूर्ण इंतेज़ाम
जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखण्ड के मयाली में 21 से 27 मार्च तक आयोजित होने वाली शिव महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। जहां श्रद्धालुओं एवं जनमानस की सुरक्षा हेतु सभी इंतेज़ाम किये गए हैं। जिसके तहत जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन द्वारा लोगों की सुविधा के लिए कंट्रोल रूम नम्बर जारी किए गए हैं, साथ ही 3 कंट्रोल रूम स्थापित किये गए हैं।
जिसमें कंट्रोल रूम कुनकुरी 24 घंटे सेवा में उपलब्ध रहेगा। जिसका दूरभाष नम्बर 07764296765 है। वहीं कंट्रोल रूम पुलिस लाइन जशपुरनगर प्रातः 6 बजे से शाम 6 बजे तक सेवा में रहेंगे। जिसका दूरभाष नम्बर 9479193699 है। एक कंट्रोल रूम मयाली में शिव महापुराण कथा पंडाल स्थल के निकट बनाया गया है। जहां प्रातः 6 बजे से सांय 6 बजे तक सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। तीनों कंट्रोल रूम कार्यक्रम समाप्ति तक कार्यरत रहेंगे, इसके लिए अधिकारियों कर्मचारियों की ड्यूटी भी कंट्रोल रूम में लगाई गई है।
श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई अस्पताल की है व्यवस्था :
कार्यक्रम स्थल में श्रद्धालुओं के लिए सभी ज़रूरी इंतज़ाम किये गए हैं। जिसके तहत कार्यक्रम स्थल के निकट अस्थाई अस्पताल का निर्माण किया गया है। जहां पर स्वास्थ्य कर्मिंयों की ड्यूटी लगाई गई है। किसी भी आपात स्थिति के लिए अस्पताल में सभी व्यवस्थाएं की गईं हैं। इसके अतिरिक्त 05 खोया पाया केंद्र, 10 सार्वजनिक पार्किंग स्थल, 03 व्हीआईपी पार्किंग स्थल बनाये गए हैं। रायगढ़, रांची, जशपुर की ओर से बसों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हेलीपेड के निकट बसों का स्टॉप एवं 05 सार्वजनिक पार्किंग स्थल बनाया गया है। वहीं अम्बिकापुर, बगीचा की ओर से बसों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आयोजन स्थल के निकट बस स्टॉप एवं 05 सार्वजनिक पार्किंग स्थल बनाया गया है। कार्यक्रम स्थल के पास 140 यूनिट अस्थाई शौंचालयों का निर्माण किया गया है। किसी भी आपात स्थिति से बचाव के लिए सुरक्षा एवं बचाव प्रणाली के साथ पुलिस बलों की ड्यूटी भी लगाई है। मोबाइल मेडिकल यूनिट भी स्थापित किया गया है।
कार पार्किंग स्थल एवं बस स्टॉप से लोगों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उनका किराया भी प्रति व्यक्ति 10 रुपये नियत किया गया है। सभी ऑटो चालकों को अधिक किराया ना वसूल करने हेतु निर्देश दिए गए हैं। परिवहन की उचित व्यवस्था हेतु परिवहन विभाग द्वारा केंद्र भी स्थापित किया गया है। सभी स्थानों पर व्यवस्था निर्माण हेतु पुलिस के जवानों की भी ड्यूटी लगाई गई है।
प्रयागराज के बाद खाटूश्यामजी में उमड़ा जनसैलाब
झुंझुनूं - विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ चुके प्रयागराज महाकुंभ के बाद अब राजस्थान के खाटूश्यामजी में श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ रहा है। श्रद्धा और आस्था का प्रतीक विश्वप्रसिद्ध सूरजगढ़ निशान आज खाटूश्यामजी के लिए रवाना हो गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक निशान यात्रा में शामिल हुए। खाटूश्यामजी स्थित बाबा श्याम के शिखर पर हर साल फाल्गुन माह की द्वादशी के दिन सूरजगढ़ निशान चढ़ाया जाता है, जो सैकड़ों सालों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है।
श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति भाव के माहौल के बीच झुंझुनूं जिले के सूरजगढ़ निशान को विधिवत पूजा-अर्चना कर रवाना किया गया। राजस्थान की समृद्ध परंपरा को संजोए ऊंट गाड़ियों, भजन-कीर्तन और जयकारों के साथ श्रद्धालु खाटूश्यामजी के लिए निकले। खास बात यह रही कि सैकड़ों महिलाएं सिर पर जलते अंगारों की सिगड़ी रखकर पदयात्रा में शामिल हुईं, जो उनकी गहरी आस्था और दृढ़ निष्ठा को दर्शाता है।
बता दें राजस्थान के सीकर जिले स्थित खाटूश्यामजी के वार्षिक लक्खी मेले का आगाज हो चुका है। देश के कोने-कोने से लाखों को तादाद में श्रद्धालु खाटूश्यामजी पहुंच रहे है। बात करें शेखावाटी अंचल की तो शेखावाटी के तीनों जिले सीकर, झुंझुनूं व चूरू बाबा श्याम के रंग में रंगे नजर आ रहे है। हर ओर बाबा श्याम के जयकारे गूंज रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों का गंगाजल से सामूहिक स्नान, आध्यात्मिक शुद्धि की पहल
छत्तीसगढ़ के रायपुर सेंट्रल जेल में कैदियों ने महाकुंभ से लाए गए गंगाजल से सामूहिक स्नान किया। इस विशेष अवसर पर राज्य की 5 सेंट्रल जेल, 20 जिला जेल और 8 सब-जेल के कैदियों को गंगाजल से स्नान करने का अवसर मिला, जिससे उन्हें आध्यात्मिक शुद्धि का अनुभव हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर कबीरधाम जिले की जिला जेल में भी यह आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर 237 कैदियों ने गंगाजल से स्नान किया, जिससे आत्मशुद्धि और नैतिक उत्थान को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने महाकुंभ से लाया गंगाजल
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा हाल ही में महाकुंभ से गंगाजल लेकर आए थे, जिसे कैदियों के लिए उपलब्ध कराया गया। कैदियों ने इस स्नान को मानसिक और आत्मिक शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया। जेल प्रशासन ने इस आयोजन के लिए विशेष व्यवस्था की और इसे धार्मिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने का सकारात्मक कदम बताया।
कैदियों में सुधार लाने की पहल : विजय शर्मा
कबीरधाम में जेल प्रशासन द्वारा विशेष इंतजाम किए गए, जिससे कैदियों में उत्साह देखा गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल शारीरिक शुद्धता ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान भी था। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम चलाएगी, ताकि सुधार और पुनर्वास के माध्यम से कैदियों को समाज में पुनः सकारात्मक स्थान मिले। इस पहल से कैदियों को सुधार का अवसर मिलने के साथ-साथ समाज में पुनः समायोजन की दिशा में भी सहायता मिलेगी।
सुधार और पुनर्वास की दिशा में राज्य सरकार की अनूठी पहल
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा कि कैदियों के लिए गंगाजल से स्नान कराने का यह कार्यक्रम महाकुंभ के माहौल में एक महत्वपूर्ण कदम था। इससे राज्य सरकार की सुधारात्मक और पुनर्वास नीति की प्रतिबद्धता जाहिर होती है। यह पहल न केवल अपराधियों को सुधारने का प्रयास करती है, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करने का भी प्रयास करती है।
राज्य की जेलों में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने की कोशिश
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गंगाजल से कैदियों को स्नान कराने की इस पहल को अब और विस्तार दिया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की पहल पर राज्य की 5 सेंट्रल जेल, 20 जिला जेल और 8 सब-जेल में कैदियों को गंगाजल से स्नान कराया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वच्छता नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान भी है। राज्य सरकार की यह पहल कैदियों के आत्मशुद्धि के साथ-साथ समाज में उनके पुनः सम्मानजनक जीवन की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास कर रही है।
यह पहल राज्य सरकार की सुधार और पुनर्वास की नीति को दर्शाती है, जो केवल सजा देने तक सीमित नहीं, बल्कि कैदियों के जीवन में सुधार और समाज में उनके पुनः समायोजन को प्राथमिकता देती है। इस कदम से राज्य की जेलों में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है और कैदी अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से देख सकेंगे।
राजिम कुंभ कल्प के मंच पर उत्तर रामायण पर लाइट एंड साउंड शो कार्यक्रम
राजिम कुंभ कल्प मेला के मुख्य मंच पर 20 फरवरी गुरुवार को उत्तर रामायण पर आधारित लाइट एंड साउंड शो (मनोरमा इंप्रेशन, नितिन दत्तात्रेय बनसोड) का कार्यक्रम मुख्य आकर्षण रहेगा। इसके अलावा मंच पर महादेव हिरवानी की टीम द्वारा लोककला मंच की शानदार प्रस्तुति होगी। लेवेंद्र चंद्राकर और नारायण पचपेड़िया द्वारा लोक कलामंच से छत्तीसगढ़ की गौरव गाथा बताएंगे।
12 बजे से शांम 5 बजे तक सांस्कृतिक मंच पर रामेसर गंधर्व की नाचा पार्टी, शंभुराम टोंनडरे की टीम सतनाम भजन, विश्वास गीत गजल, अरुण निर्मलकर की मंडली द्वारा जस झांकी, धाम सिंग की टीम लोक कला मंच की प्रस्तुति देंगे। कौशल्या बाई साहू सुवा नृत्य, वेदकुमारी द्वारा पंडवानी, प्राची निगम कत्थक नृत्य, महेश पाल भजन संध्या, दिलीप नवरत्न की टीम लोककला मंच की झमाझम प्रस्तुति से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।
राजिम कुंभ कल्प में लगा सेल्फी जोनः पुराने जमाने की यादे हो रही ताजा
राजिम कुंभ कल्प में कुलेश्वर महादेव मंदिर के पास संत समागम के सामने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को सहेजती तथा पुनर्जीवित कर उसके संरक्षण के लिए संकल्पित सेल्फी जोन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग वर्ग के लोग भरपूर मनोरंजन करते नजर आ रहे है। साथ ही मेले में बिताए अपने हर पर को यादगार बनाने के लिए वहां के हर एक सामग्री के साथ सेल्फी लेकर उसे अपने कैमरे में कैद कर रहें है। सेल्फी जोन ग्रामीण जीवन शैली पर आधारित बनाया है जहां बैलगाड़ी की तरफ सबसे ज्यादा भीड़ है। लोग किसान का वेश पहनकर सेल्फी ले रहे हैं।
इस सेल्फी जोन में सभी पुराने गहने और वेशभूषा संग्रहित है। स्टाल में पर्रा, टोकरी, पारंपरिक गहने बिछिया, करधन, सुता ऐठी, सुर्रा, किला साडी, खुमरी, राउत वेशभूषा आदि छत्तीसगढ़ी आभूषण लोगो के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है।
सेल्फ़ी जोन की संचालिका गिनिज बुक आफ वर्ड रिकार्ड (बायो आर्ट) एवं तीन बार सीएम अवार्ड से सम्मानित रानी निषाद ने बताया कि आधुनिक पीढ़ी को अपनी संस्कृति की पहचान कराने के लिए यह सेल्फी जोन बनाया गया है। जोन में युवक, युवतियों और महिलाओं के लिए अलग अलग वस्त्र और आभूषण रखे गए है। युवकों के लिए भी धोती, जैकेट, कलगी , सुता , खुमरी , राउत डंडा संग्रहित किया गया है। वहीं युवतियों और महिलाओं के लिए भी विभिन्न प्रकार के पारंपरिक गहने और वस्त्रों का संकलन रखा गया है।
महाशिवरात्रि से पहले काशी में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में महाकुंभ पलट प्रवाह के 35वें दिन मंगलवार को सुबह से 12 बजे तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन कर लिया। भोर में मंगला आरती के बाद से ही भक्तों की लाइनें गोदौलिया और मैदागिन तक लगी रहीं। वहीं वीआईपी और प्रोटोकॉल दर्शन भी हो रहे हैं। गर्भगृह के एक द्वार से डबल लाइन में भक्तों को दर्शन कराकर भीड़ प्रबंधन किया जा रहा है।
मंदिर सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने कहा कि गर्भगृह के एक द्वार से दो दो लाइनों में लगे भक्तों को दर्शन कराया जा रहा है। मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा के पहल पर ये व्यवस्था लागू की गई है। इससे ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जा पा रहा है। इसमें एक लाइन में लगे मंदिर के सामान्य श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं।
वहीं दूसरी लाइन में आने वाले भक्तों को सीढ़ीदार प्लेटफॉर्म बनाकर गर्भगृह के बाहर से झांकी दर्शन कराया जा रहा है। ऐसे में एक समय में एक गेट से दो लाइनों में लगे श्रद्धालुओं को दर्शन करा दिया जा रहा है।
मंदिर सीईओ ने कहा कि इसके अलावा मंदिर के अंदर भीड़ प्रबंधन को लेकर भी काम चल रहा है। महाशिवरात्रि पर भी मंदिर में दर्शन- पूजन महाकुंभ में लागू किए गए नियमों के अनुसार ही होगा।
सुरक्षा इंतजामों में लगे काशी जोन के एडीसीपी
उधर, भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए काशी जोन के एडीसीपी सरवणन टी. ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। कहा कि महाकुंभ के पलट प्रवाह के चलते वाराणसी में पर्यटकों और तीर्थयात्रियों का बड़ा जमावड़ा है। हर रोज यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि पर्यटक और तीर्थयात्री सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सकें। तीर्थयात्रियों के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग जगह बनाई गई है। जिससे आवाजाही में कोई बाधा न आए। साथ ही ड्रोन से नावों में भीड़भाड़ को लेकर निगरानी की जा रही है। सभी नाव मालिकों को पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जानकारी भी दी गई है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमद्भागवत कथा में किया श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का श्रवण, छत्तीसगढ़ की समृद्धि और खुशहाली की कामना की
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के डुंडा स्थित अशोका पाम मिडोज कॉलोनी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। इस पावन अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी से समस्त छत्तीसगढ़वासियों की सुख-समृद्धि, शांति और मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ का नमन करते हुए कथाव्यास पंडित श्री कृष्ण गौड़ शास्त्री से आशीर्वाद लिया और श्रीकृष्ण-सुदामा प्रसंग का श्रवण किया।
दिन में तीन रूप बदलते है भगवान राजीव लोचन
राजिम का भगवान राजीव लोचन न सिर्फ आध्यात्मिक धार्मिक रूप से, बल्कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। राजीव लोचन भगवान को लेकर क्षेत्र में कई किवदंतियां प्रसिद्ध है। काले पत्थर से बनी भगवान राजीव लोचन की मूर्ति की विशेषता यह है कि यह मूर्ति एक ही पत्थर से निर्मित जीवंत विग्रह है। जिसके कई प्रमाण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से देखने को मिलेगा।
भगवान राजीव लोचन को प्रति शनिवार तेल चढ़ाया जाता है। यह तेल भगवान राजीव लोचन का विग्रह सोख लेता है, जो अपने आप में एक हैरात अंगेज करिश्मा है कि आखिर पत्थर की इस प्रतिमा में चढ़ाया हुआ तेल कहां चला जाता है। राजीव लोचन मंदिर के पूर्व मुख्य पुरोहित स्व. नारायण प्रसाद पांडेय ने दावा करते हुए ये बात बताई थी कि उनके शरीर में स्पर्श करने पर शरीर के रोम होने का एहसास मैंने एक बार नहीं कई बार किया है।
इसके अलावा मान्यता है कि भगवान राजीव लोचन दिन में तीन स्वरूप बदलते हैं। प्रातः काल बाल्यावस्था, दोपहर में युवावस्था और रात्रि कालीन वृद्धा अवस्था में उनके दर्शन किए जा सकते हैं। इन स्वरूपों का अनुभव किया जाना कई श्रद्धालुओं ने स्वीकार भी किया है। भगवान राजीव लोचन की पूजा अर्चना और श्रृंगार धार्मिक मान्यताओं के आधार आयोजित होने वाले पर्व और त्यौहार पर आधारित है। वर्षभर में जितने भी पर्व और त्यौहार आते हैं। उनका श्रृंगार उसी पर्व और त्यौहार के अनुरूप किया जाता है और उसी विधि विधान से उनका पूजन अर्चन होता है।
कहा जाता है कि पूर्व में भगवान राजीव लोचन रात्रि शयन आरती के बाद भोग लगाने की परंपरा नहीं थी। इसी लिए भूख लगने पर वे बूढ़े के वेश में राजिम के एक दुकान में जाकर खाने-पीने की वस्तु लेकर अपनी भूख शांत किया करते थे। एक बार मंदिर की कटोरी उसी हलवाई की दुकान पर देखकर मंदिर के पुजारी ने उनसे पूछा कि ये मंदिर का बर्तन तुम्हारे पास कहां से आया, जिसमें भगवान राजीव लोचन को भोग लगाया जाता है, तब उस हलवाई ने बताया कि रोज रात को एक बुजुर्ग व्यक्ति आते हैं और खाने-पीने की वस्तुएं मांग कर खाते हैं उसके बदले में उन्होंने मुझे यह बर्तन दिया। तब पुजारियों को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने रात्रिकालीन सयन आरती के बाद भोग लगाने की परंपरा शुरू की और उनके विग्रह के सामने लकड़ी का एक पाटा लगाया गया, ताकि वे रात को निकलकर बाहर न जा सके। रात्रिकालीन सयन आती में उन्हें चावल से बना मिष्ठान जिसे अनरसा कहते है, उसका भोग लगाया जाता है। सुबह बाल भोग के रूप में उन्हें माखन मिश्री और दोपहर को उन्हें भोजन का प्रसाद चढ़ाया जाता है।
राजीव लोचन मंदिर की पूजा पद्धति और प्रसाद जगन्नाथपुरी मंदिर के विधि विधान से काफी मिलते है। ऐसी मान्यता भी है कि माघ पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ पुरी से भगवान राजीव लोचन के दर्शन करने राजिम आते हैं और इस दिन जो दिन के तीन पहर में भगवान राजीव लोचन के दर्शन करता है उसे जगन्नाथ पुरी यात्रा का पुण्य लाभ मिलता है।

