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सूचना-प्रसार की दिशा में छत्तीसगढ़ बना रोल मॉडल: छत्तीसगढ़ संवाद व जनसंपर्क विभाग की कार्यप्रणाली ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को किया प्रभावित

महाराष्ट्र सरकार के जनसंपर्क एवं सूचना विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक अध्ययन दल 5 से 7 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ में प्रवास पर रहा। इस दौरे का उद्देश्य छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सूचना, जनसंपर्क और शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में किए जा रहे नवीनतम नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणालियों का प्रत्यक्ष अवलोकन एवं अध्ययन करना था।


अध्ययन दल में महाराष्ट्र शासन की उप सचिव श्रीमती समृद्धि अंगोलकर, निदेशक श्री किशोर गंगरडे सहित कुल छह वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। दल ने छत्तीसगढ़ शासन के जनसंपर्क विभाग एवं उसकी सहायक संस्था छत्तीसगढ़ संवाद की संपूर्ण कार्यप्रणाली का अध्ययन किया।

भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ई-न्यूज़ क्लिपिंग, ई-आरओ सिस्टम, ई-पब्लिकेशन, पत्रकार अधिमान्यता प्रणाली, तथा पत्रकारों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं का गहन अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ संवाद की संगठनात्मक संरचना, संचालन तंत्र तथा तकनीकी नवाचारों के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी भी प्राप्त की।

इस अवसर पर अध्ययन दल ने जनसंपर्क विभाग के आयुक्त डॉ. रवि मित्तल से सौजन्य मुलाकात की। जनसंपर्क आयुक्त डॉ. मित्तल ने कहा कि छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग का यह सतत प्रयास रहा है कि शासकीय योजनाओं और जनहितकारी नीतियों की जानकारी आम जनता तक त्वरित, पारदर्शी और प्रभावशाली ढंग से पहुँचे। सूचना के क्षेत्र में तकनीक और मानवीय दृष्टिकोण के संतुलित समावेशन ने हमारी कार्यप्रणाली को विशिष्ट बनाया है। यह हमारे लिए प्रसन्नता की बात है कि अन्य राज्य भी हमारे नवाचारों में रुचि ले रहे हैं। यह अनुभव-साझाकरण एक सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में उठाया गया कदम है।

अध्ययन दल ने इंद्रावती भवन स्थित जनसंपर्क संचालनालय एवं छत्तीसगढ़ संवाद कार्यालय का भ्रमण कर विभिन्न शाखाओं के संचालन का प्रत्यक्ष अवलोकन किया और विभाग की प्रमुख गतिविधियों को निकट से जाना।

अपर संचालक श्री जे.एल. दरियो, श्री उमेश मिश्रा एवं श्री संजीव तिवारी ने अध्ययन दल को विभाग की प्रमुख गतिविधियों, कार्यप्रणाली और तकनीकी अनुप्रयोगों की जानकारी विस्तार से प्रदान की।महाराष्ट्र से आए अध्ययन दल के सदस्यों ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सूचना एवं जनसंपर्क के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों की सराहना करते हुए उन्हें अपने राज्य में भी लागू करने की संभावनाओं में गहरी रुचि जताई।

इस अवसर पर जनसंपर्क विभाग   और छत्तीसगढ़ संवाद के विभिन्न अधिकारीगण उपस्थित थे।
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प्रदेश में बुनकरों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण हेतु किए जा रहे हैं विशेष प्रयास - मुख्यमंत्री

 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ बुनकर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री ने बुनकर समाज की सराहना करते हुए कहा कि  हथकरघा कला हमारी समृद्ध विरासत है, जो प्रदेश को एक विशिष्ट पहचान दिलाती है और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता को सशक्त बनाती है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बुनकर समाज अपने श्रम, कौशल और रचनात्मकता के माध्यम से राज्य का गौरव बढ़ा रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों की समृद्धि, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। कच्चा माल सुलभ कराने से लेकर लागत कम करने और विपणन की बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने तक, हर मोर्चे पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बुनकरों की आत्मनिर्भरता ही उनकी रचनात्मक उड़ान को नई ऊँचाई दे सकती है। 

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए "वोकल फॉर लोकल" के मंत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय हमारे पारंपरिक उत्पादों और हुनर को प्रोत्साहन देने का है। हथकरघा उद्योग केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जिसे बुनकर समाज आज भी सहेजे हुए है।

इस अवसर पर समाज के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को बुनकरों द्वारा निर्मित करघा (कपड़ा बुनने की पारंपरिक मशीन) की प्रतिकृति भेंट की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी यह भेंट न केवल आपके सम्मान और भावनाओं का प्रतीक है, बल्कि सृजन, परंपरा और हमारे प्रदेश के सांस्कृतिक मूल्यों का भी प्रतीक है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार बुनकर समाज के हर संभव सहयोग के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और उनके सर्वांगीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय बुनकरों के सम्मान, समृद्धि और सशक्तिकरण का होगा।

इस अवसर पर बुनकर समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री महेश देवांगन, श्री पुरुषोत्तम देवांगन, श्री धनेश देवांगन, श्री गजेंद्र देवांगन सहित अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बन रहा टेक्नोलॉजी हब : नवा रायपुर में कामन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना को मिली मंजूरी

 छत्तीसगढ़ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बड़ी  उपलब्धि मिली है। अब राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स टेस्टिंग या प्रोटोटाइपिंग के लिए बेंगलुरु, पुणे या नोएडा जैसे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नवा रायपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है। 


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदृष्टि और आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में तैयार इस परियोजना से राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री, स्टार्टअप और युवाओं के लिए नया युग प्रारंभ होगा। यह परियोजना छत्तीसगढ़ की उद्योग नीति के अनुरूप निवेशकों को आकर्षक प्रोत्साहन भी प्रदान करेगी।

कॉमन फैसिलिटी सेंटर नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-22 में 3.23 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 108.43 करोड़ रुपये है, जिसमें से 75.00 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भारत सरकार के MeitY मंत्रालय द्वारा EMC 2.0 योजना के अंतर्गत स्वीकृत की गई है। शेष 33.43 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाएंगे तथा भूमि की उपलब्धता नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा सुनिश्चित की जा रही है।

यह कॉमन फैसिलिटी सेंटर इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देने हेतु एक साझा एवं अनुकूल वातावरण निर्मित करेगा, जहां प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) प्रोटोटाइपिंग, 3D प्रिंटिंग, EMC परीक्षण और वुड वर्कशॉप जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र अर्धचालक (सेमीकंडक्टर), माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स, एलईडी लैंप, सोलर चार्ज कंट्रोलर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) समाधान, ऑटोमेशन समाधान और SCADA पैनल जैसी इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित उत्पादन इकाइयों को विशेष लैब और परीक्षण सुविधाएं प्रदान करेगा।

यह सेंटर क्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उदाहरण के तौर पर, एक छोटी एलईडी लाइट निर्माण इकाई अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए CFC की परीक्षण लैब का उपयोग कर सकेगी। इसी प्रकार, एक स्टार्टअप जो सोलर चार्ज कंट्रोलर डिज़ाइन कर रहा है, वह बड़े पैमाने पर उत्पादन से पूर्व अपने डिज़ाइन को इस केंद्र की प्रोटोटाइपिंग सुविधा में परख सकेगा। एक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) घटक निर्माता अपने उत्पादों की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक संगतता (EMC) का परीक्षण कर सकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सभी प्रणालियाँ सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं। साथ ही, 3D प्रिंटिंग सुविधा कंपनियों को विशेष जिग्स या कस्टम एन्क्लोज़र बनाने में सहायता करेगी, जबकि PCB प्रोटोटाइपिंग सेवा सर्किट बोर्डों के त्वरित विकास और परीक्षण में मदद करेगी, जिससे उत्पाद निर्माण की गति तेज होगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पहले से ही कई आकर्षक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इस कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना को राज्य की उद्योग नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों से और भी बल मिलेगा, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बाहरी और स्थानीय निवेश को गति मिलेगी।

नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRANVP) द्वारा संचालित यह परियोजना राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण एवं निवेश को प्रोत्साहित करेगी। इसके माध्यम से राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को टेक्नोलॉजी क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से समृद्ध बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे न केवल नवाचार और स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि उद्योगों को विश्वस्तरीय परीक्षण और प्रोटोटाइपिंग सुविधाएं भी सुलभ होंगी, जिससे छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक पावरहाउस बनकर उभरेगा।

आवास और पर्यावरण मंत्री श्री ओपी चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी परियोजनाएं छत्तीसगढ़ के तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी। इससे स्थानीय स्टार्टअप्स, युवाओं और उद्यमियों को अत्याधुनिक संसाधन मिलेंगे, जो पहले बड़े शहरों तक ही सीमित थे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह पहल डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी बनाएगी।
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जनभागीदारी से करें आदिवासी बाहुल्य ग्रामों का समग्र विकास: मुख्यमंत्री ने आदि कर्मयोगी अभियान की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  आज मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में निर्देशित किया कि आदि कर्मयोगी अभियान के माध्यम से आदिवासी बाहुल्य ग्रामों का समग्र विकास जनभागीदारी के माध्यम से सुनिश्चित किया जाए। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आदि कर्मयोगी अभियान के तहत पूरे देश में आदिवासी बाहुल्य ग्रामों में 20 लाख स्वयंसेवकों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य में छत्तीसगढ़ राज्य की भागीदारी सक्रिय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 1,32,400 वॉलंटियर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे जनभागीदारी और जनजागरूकता के माध्यम से समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाना है। उन्होंने बैठक में निर्देश दिए कि युवाओं को वॉलंटियर्स के रूप में रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की कार्यवाही की जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य गांवों में बुनियादी अधोसंरचना और सुविधाओं में जो भी ‘क्रिटिकल गैप’ शेष हैं, उनकी पहचान की जाए और आगामी 2 अक्टूबर 2025 को ग्राम सभाओं में इस पर विशेष चर्चा की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इन कमियों को दूर करने के लिए स्थानीय प्रशासन के सहयोग से आवश्यक ठोस कदम उठाए जाएं और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर ग्राम बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त हो।

बैठक में आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने जानकारी दी कि इस अभियान के तहत ग्रामों में ‘आदि सेवा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे, जो न केवल मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता में सहायक होंगे, बल्कि योजनाओं एवं कार्यक्रमों के सतत क्रियान्वयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में धरती आबा और पीएम-जनमन जैसे संतृप्तिमूलक अभियानों की भी शुरुआत की गई है, जिनके अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य ग्रामों एवं पीवीटीजी बस्तियों में आवास, पक्की सड़कें, जलापूर्ति, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम 22 से 28 जुलाई 2025 के मध्य सम्पन्न किया जा चुका है तथा जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स की सूची भारत सरकार को प्रेषित की जा चुकी है। आगामी गतिविधियों में जिला एवं विकासखण्ड स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण सहित अन्य कार्यक्रम प्रस्तावित हैं, जिन्हें शीघ्र क्रियान्वित किया जाएगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, संयुक्त सचिव डॉ. रवि मित्तल, आदिम जाति कल्याण विभाग के आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति: हर घर बनेगा बिजलीघर

 छत्तीसगढ़ सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। उनकी यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और सतत विकास के बड़े लक्ष्यों को भी हासिल करेगी। साथ ही जीरो कार्बन एमिशन लक्ष्यों में योगदान सुनिश्चित होगा।


प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में घर-घर रूफटॉप सोलर पॉवर प्लांट स्थापित कर लोगों को प्रदूषण मुक्त, मुफ्त और निरंतर बिजली देने की परिकल्पना की गई है। इसके माध्यम से प्रत्येक उपभोक्ता को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाकर उनके मासिक खर्चों में भी उल्लेखनीय कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

हर नागरिक की होगी भागीदारी

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्रता रखने वाले सभी नागरिक जिनके पास वैध बिजली कनेक्शन और उपयुक्त छत है, वे इस योजना में आवेदन कर सकते हैं। खास बात यह है कि योजना के अंतर्गत एक बार सोलर पैनल स्थापित होने के बाद उपभोक्ता को हर माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी। इससे न सिर्फ बिजली बिलों का झंझट समाप्त होगा, बल्कि यदि आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन होता है, तो उसे ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी ली जा सकती है।

मिलेगी डबल सब्सिडी 

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 1 किलोवॉट से 3 किलोवॉट तक के सौर संयंत्र लगाने पर प्रति वॉट 45 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दी जा रही है। इसमें राज्य सरकार ने भी अपनी हिस्सेदारी जोड़ दी है, जिससे उपभोक्ताओं को डबल सब्सिडी का सीधा लाभ मिलेगा।

स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण

छत्तीसगढ़ सरकार जीरो कार्बन एमिशन नीति को साकार रूप देने के लिए स्वच्छ ऊर्जा को प्राथमिकता दे रही है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 15 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का उत्पादन हो रहा है। इसे बढ़ाकर सरकार ने वर्ष 2047 तक 45 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। यह नीति न केवल वर्तमान, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हरित और सतत भविष्य सुनिश्चित करेगी।

बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

छत्तीसगढ़ में सौर ऊर्जा क्रांति से रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेगें। इससे सोलर पैनल के निर्माण, स्थापना, रखरखाव आदि जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर बढ़ेगें। वहीं राज्य की आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी।

योजना के फायदे-

केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से डबल सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलेगा। एक बार सौर पैनल की स्थापना के बाद 20-25 वर्षों तक मुफ्त बिजली मिल सकेगी। लोगों को निरंतर विद्युत की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। बार-बार बिजली गुल होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। इसके अलावा बिजली बेचने से अतिरिक्त आमदनी होगी। साथ ही स्वच्छ, हरित और पर्यावरण हितैषी जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा।
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बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ के तहत विश्व स्तनपान सप्ताह में मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर किया गया फोकस

भारत सरकार की प्रमुख सामाजिक पहल ‘‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’’ के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण केंद्र (हब) द्वारा 1 से 7 अगस्त 2025 तक आयोजित ‘‘विश्व स्तनपान सप्ताह’’ के अवसर पर मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में व्यापक जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिला कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के कुशल निर्देशन एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी आर.के. खाती के मार्गदर्शन में परियोजना खड़गवां, चिरमिरी, भरतपुर एवं मनेंद्रगढ़ के अंतर्गत चयनित ग्रामों में आयोजित हुए। कार्यक्रमों में उप स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं ने मिलकर ग्रामीण समुदाय की गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व, विशेषकर पहले पीले गाढ़े दूध (कोलेस्ट्रम) के पोषणीय मूल्य एवं नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुणों के बारे में जागरूक किया।
कार्यक्रम में माताओं को यह बताया गया कि जन्म के तत्काल बाद शिशु को केवल स्तनपान कराना चाहिए और पहले छह माह तक किसी भी प्रकार का ऊपरी आहार न देकर केवल माँ का दूध ही देना चाहिए। क्योंकि यह शिशु को पूर्ण पोषण प्रदान करता है। इसके साथ ही ‘‘रेडी टू ईट’’ पोषण आहार, तिरंगा भोजन, स्थानीय मौसमी साग-सब्जियां, फल एवं पारंपरिक खानपान की पौष्टिकता के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। जिससे माताएं स्वयं भी सुपोषित रहें और उनके शिशु भी स्वस्थ विकसित हो सकें। इस अवसर पर उपस्थित महिलाओं को संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, सुरक्षित प्रसव की तैयारी करने, नवजात शिशु की देखभाल के सही तरीकों, टीकाकरण की अनिवार्यता तथा स्तनपान के माध्यम से मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने हेतु विस्तार से समझाया गया।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। जिसमें प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, छत्तीसगढ़ राज्य महिला कोष अंतर्गत संचालित ‘‘सक्षम योजना’’ तथा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से दी जा रही ऋण योजना प्रमुख रहीं। उपस्थित माताओं को बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत 15 जुलाई से 15 अगस्त 2025 तक विशेष पंजीकरण अभियान संचालित किया जा रहा है। जिसके तहत पहली बार गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें पौष्टिक आहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि उनकी गर्भावस्था सुरक्षित, स्वस्थ एवं सुपोषित हो। इस योजना के अंतर्गत पंजीयन हेतु महिलाएं अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, आशा कार्यकर्ता अथवा मितानिन से संपर्क कर सकती हैं।
कार्यक्रमों के सफल आयोजन में महिला एवं बाल विकास विभाग की पूरी टीम, स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि तथा जनप्रतिनिधियों का सक्रिय सहयोग रहा। जागरूकता शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं, किशोरियाँ, स्वसहायता समूह की सदस्याएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं सम्मिलित हुईं और उन्होंने स्तनपान को लेकर कई सवाल पूछे जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल भाषा में समाधान दिया गया। समूचे जिले में इस कार्यक्रम के माध्यम से एक सकारात्मक संदेश दिया गया कि एक स्वस्थ माँ ही एक स्वस्थ पीढ़ी की जननी बनती है, और स्तनपान इस दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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"हर घर तिरंगा" अभियान आजादी के अमृत महोत्सव से प्रारंभ हुआ जो लगातार चल रहा है- सुनील बंसल

 भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री एवं हर घर तिरंगा अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक सुनील बंसल ने कहा है कि "हर घर तिरंगा" अभियान आजादी के अमृत महोत्सव से प्रारंभ हुआ जो लगातार चल रहा है। इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ में भी हर घर तिरंगा अभियान की सफलता को लेकर प्रदेश जिला एवं मंडल स्तर पर टीम बनाकर कार्यशाला करनी है। श्री बंसल मंगलवार को यहाँ कुशाभाऊ ठाकरे परिसर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में हर घर तिरंगा अभियान को लेकर आहूत बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।


भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री एवं हर घर तिरंगा अभियान के राष्ट्रीय समन्वयक श्री बंसल ने कहा कि तिरंगा यात्रा में युवा मोर्चा एवं महिला मोर्चा की भागीदारी सुनिश्चित की गई है ताकि इस अभियान में युवा और महिलाओं को जागृत किया जा सके। इसके साथ ही ऑपरेशन सिंदूर और उससे पूर्व पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए लोगों को नमन करते हुए इस अभियान को पूर्ण करना है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की वैश्विक पहचान को और ज्यादा मजबूत किया है। इसके साथ ही 10 अगस्त से 14 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान मंडल से लेकर बूथ स्तर तक यह कार्यक्रम करना है। हर घर तिरंगा अभियान पिछली बार की तुलना में इस बार और प्रभावी रूप से हो, इस पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम के तीसरी कड़ी में स्वाधीनता संग्राम में शहीद लोगों के मूर्ति स्थल पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा, साथ ही शहीद सेनानियों की प्रतिमाओं/चित्रों पर माल्यार्पण का भी कार्यक्रम किया जाएगा। इसी कड़ी में 14 अगस्त विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाते हैं और इस दौरान विभाजन की विभीषिका के बारे में देश के हर नागरिक को बताना है कि किस तरह विभाजन की विभीषिका के दौरान लाखों लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई। इसके साथ ही विभाजन की विभीषिक को लेकर मौन जुलूस, समाधान कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी का भी आयोजन किया जाएगा।

भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शांति और सद्भाव का प्रतीक है- अजय जम्वाल

भाजपा क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जम्वाल ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से पूर्ण करने के लिए हम सभी लगातार मेहनत करेंगे। कार्यक्रम में 50 लाख घरों में तिरंगा लगाने के लक्ष्य को सबकी सहभागिता से पूरा करना है। हर घर तिरंगा अभियान में प्रभावी व्यक्तियों को जोड़कर उनका सम्मान भी किया जाएगा। हर घर तिरंगा अभियान की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरुआत की है। गुलामी से समाज में जो कुरीतियां और विकृतियां व्याप्त हुई हैं, उन्हें दूर करना है और देश को गौरवान्वित करना है। श्री जम्वाल ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शांति और सद्भाव का प्रतीक है। अपने बलिदानी क्रांतिकारियों और महापुरुषों को याद करते हुए और देश की सेवा में अपनी आहुति देने वाले शहीद जवानों को भी याद करते हुए उन्हें नमन करना है। तिरंगा अभियान के माध्यम से हम लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करेंगे।

"मोर तिरंगा-मोर अभिमान" के माध्यम से लोगों में देशभक्ति की भावना को जागना है - पवन साय

भाजपा प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि हर घर तिरंगा अभियान के माध्यम से हम लोगों में राष्ट्र प्रेम की भावना को सर्वोपरि करेंगे। इसके साथ ही "मोर तिरंगा-मोर अभिमान" के माध्यम से अधिक-से-अधिक लोगों को जोड़कर लोगों में देशभक्ति की भावना को जागना है। कार्यक्रम में शहीद परिवार के लोगों का सम्मान किया जाएगा। श्री साय ने आगामी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि हर घर तिरंगा अभियान हम एक महोत्सव के रूप में मनाएंगे ताकि भारत का शौर्य वैश्विक स्तर पर और भी बढ़े। इसके साथ ही हमें छत्तीसगढ़ राज्य को देश का नंबर वन राज्य बनाना है। 

बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रदेश के राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान की सफलता के लिए प्रशासन अपनी ओर से पूर्ण सहयोग करेगा। विभाजन विभीषिका की घटना के बारे में अधिकाधिक युवाओं महिलाओं बुजुर्गों बच्चों को जागरूक करना है।

हर घर तिरंगा अभियान के तहत 50 लाख घरों में तिरंगा फहराने का संकल्प है - शिवरतन शर्मा

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव से ही हर घर तिरंगा अभियान की शुरुआत हो चुकी है यह कार्यक्रम पिछले 4 वर्षों से निरंतर चल रहा है। हर घर तिरंगा अभियान के तहत पिछली बार 25 लाख घरों में तिरंगा लगा था, इस वर्ष 50 लाख घरों में तिरंगा फहराने का संकल्प है। प्रत्येक बूथ पर योजना बनाकर तिरंगा फहराना है। इसके साथ ही जन जागरण के कार्यक्रम भी रखे जाएंगे जिनमें विभिन्न समाज के लोगों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही जनप्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता देकर कार्यक्रम की सफलता में योगदान देंगे। इसके साथ ही तिरंगा यात्रा के दौरान पदयात्रा भी करने का कार्यक्रम है। विभाजन विभीषिका की त्रासदी से लोगों को जागरूक किया जाएगा कि कैसे जब देश का विभाजन धर्म के आधार पर किया गया तो निर्दोष हिंदुओं की निर्मम हत्या की गई।

बूथ स्तर तक जाकर हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाना है – नीलू शर्मा

हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम के संयोजक नीलू शर्मा ने कहा कि 'मोर तिरंगा-मोर अभिमान' अभियान पूरे छत्तीसगढ़ और देशभर के विभिन्न राज्यों में चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में बूथ स्तर तक जाकर हर घर तिरंगा अभियान को सफल बनाना है। पहलगाम हमले के बाद देश के जवानों ने शौर्य और पराक्रम दिखाया और ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। देश की सेना के पराक्रम को नमन करते हुए श्री शर्मा ने कहा कि मोर तिरंगा मोर अभियान कार्यक्रम संभाग स्तर पर एक बड़ी कार्यशाला के माध्यम से करेंगे। इसके पश्चात जिला, मंडल एवं बूथ स्तर पर कार्यशालाएँ रखी जाएंगीं। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश महामंत्री एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने किया। कार्यक्रम में हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम के सदस्य श्रीमती हर्षिता पांडेय, विश्वविजय सिंह तोमर, दीपेश अरोरा सहित सभी जिलों के जिला संयोजक, सह संयोजक, एवं भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। 

कार्यक्रम की रूपरेखा

हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम के लिए जिला स्तर पर योजना बैठक 6 और 7 अगस्त को होगी। मण्डल स्तर की योजना बैठक 7 और 8 अगस्त को आयोजित की जाएगी। अभियान के दौरान हमारे सुरक्षा बलों एवं बलिदानियों के साथ-साथ रक्षा उपकरणों की प्रशंसा करते हुए प्लेकार्ड्स ले जाकर उनका प्रदर्शन किया जाएगा। 10 से 14 अगस्त तक प्रत्येक मण्डल में 'तिरंगा यात्रा' का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में युवा मोर्चा और महिला मोर्चा की प्रमुख भूमिका होगी। सभी समाज के सदस्यों की अधिक-से-अधिक संख्या में भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। 13 से 15 अगस्त तक सभी घरों और प्रतिष्ठानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा तिरंगा फहराया जाएगा। 

अभियान के दौरान 12 से 14 अगस्त तक स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्मारकों, युद्ध स्मारकों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी महत्वपूर्ण जगहों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। स्वच्छता अभियान के उपरांत सभी स्थानों पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। प्रत्येक मण्डल में युद्धवीरों, शहीदों, देश की सेवा में प्राण न्यौछावर करने वाले सैनिकों/पुलिस कर्मियों के घरों का दौरा कर उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर सभी जिलों में मौन जुलूस, उपयुक्त बैनर व प्लेकार्ड्स के साथ हॉल मीटिंग्स, विभाजन से प्रभावित लोगों से भेंट एवं प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा।
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"स्वतंत्रता दिवस स्वच्छता पखवाड़ा" के तहत आज रायपुर मंडल के सभी प्रमुख स्टेशनों में उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से यात्रियों को स्वच्छता के प्रति किया गया जागरूक

भारतीय रेलवे द्वारा "आजादी का अमृत महोत्सव" के अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) की पूर्व संध्या पर दिनांक 01 अगस्त से 15 अगस्त 2025 तक विशेष स्वच्छता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में व्यापक स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ।

"स्वच्छ भारत मिशन" एवं "स्वतंत्रता दिवस स्वच्छता पखवाड़ा" के अंतर्गत मंडल के विभिन्न रेलवे स्टेशनों, कार्यालय परिसरों एवं रेल कालोनियों में स्वच्छता अभियान को प्रभावशाली ढंग से संचालित किया जा रहा है। इस दौरान यात्रियों एवं नागरिकों को स्वच्छता हेतु प्रेरित किया गया।
 
इसी क्रम में आज 05 अगस्त 2025 को मंडल के सभी सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों में उद्घोषणा प्रणाली और ट्रेनों में घोषणाओं के माध्यम से यात्रियों को स्टेशन एवं कोच को स्वच्छ बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया। स्टेशनों में वाणिज्यिक कर्मचारियों की भागीदारी के साथ यात्रियों को स्वच्छता हेतु प्रेरित किया गया ।
 
इसके अलावा मंडल के सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, कार्यालय परिसरों तथा रेलवे कालोनियों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। इस अभियान के अंतर्गत नालियों और शौचालयों की गहन सफाई की गई तथा नियमित सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया। शौचालयों में स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव किया गया एवं कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए । साथ ही विभिन्न स्थानों पर बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित की गई ।
 
मंडल का यह प्रयास न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने में सहायक सिद्ध हो रहा है बल्कि यात्रियों एवं रेल कर्मचारियों में स्वच्छता को लेकर सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दे रहा है।
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कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ें, युवाओं को बनाएं आत्मनिर्भर – मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में कौशल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को सीधे रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है। इसके लिए विभाग द्वारा निरंतर नवाचार और प्रभावी कार्ययोजना आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने बैठक में विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए वर्ष 2025–26 के लिए जिलेवार प्रशिक्षण उपलब्धि और आबंटित बजट पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को दिए जा रहे प्रशिक्षण के सम्बन्ध में जानकारी ली। बैठक में बताया गया कि अब तक 549 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि पुनर्वास केंद्रों में 382 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में पीएम जनमन योजना के तहत अत्यंत पिछड़ी जनजाति (PVTG) के युवाओं को दिए जा रहे कोर्सवार प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई।

बैठक में विभागीय उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 1 जुलाई 2025 से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत चेहरा-आधारित स्कैनिंग प्रणाली द्वारा प्रशिक्षणार्थियों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निगरानी में सुधार हुआ है।
बैठक में विभाग द्वारा निजी संस्थाओं के साथ किए गए एमओयू की जानकारी भी साझा की गई, जिनमें नांदी फाउंडेशन और महिंद्रा एंड महिंद्रा संस्थानों से किए गए समझौते शामिल हैं। इन संस्थानों के माध्यम से राज्य में गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है।

बैठक में ‘कौशल तिहार 2025’ के आयोजन की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई, जिसका उद्देश्य युवाओं में कौशल के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह प्रतियोगिता जिला और राज्य स्तरीय दो चरणों में आयोजित की जाएगी, जिसमें दो आयु वर्ग – 22 वर्ष से कम एवं 22 वर्ष से अधिक – के प्रतिभागी भाग लेंगे। प्रतियोगिता में 10 प्रमुख ट्रेड ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी, ब्रिकलेइंग, रिन्युएबल एनर्जी
हेल्थ एंड सोशल केयर, प्लंबिंग एंड हीटिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशंस, इलेक्ट्रॉनिक्स फील्ड टेक्नीशियन, कंप्यूटर, मोबाइल फोन टेक्नीशियन, ग्राफिक डिजाइन टेक्नोलॉजी/डेस्कटॉप पब्लिशिंग तथा रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग शामिल है।जिला स्तर पर प्रत्येक ट्रेड और आयु वर्ग से दो विजेताओं का चयन किया जाएगा, जो राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेंगे। राज्य स्तर के विजेताओं को पुरस्कार, ट्रॉफी और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। उन्हें इंडिया स्किल्स 2025 की क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार किया जाएगा, जहाँ से चयनित प्रतिभागी ‘वर्ल्ड स्किल्स 2026’, शंघाई (चीन) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कौशल विकास योजनाओं को युवाओं की आजीविका, आत्मनिर्भरता और भविष्य के निर्माण से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में सतत प्रयास करने के निर्देश दिए।

बैठक में वन एवं कौशल विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, कौशल विकास विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास अभिकरण (CSDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के सहित अन्य वरिष्ठ विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में महत्वपूर्ण खनिजों की खोज से खुला समृद्धि का नया द्वार

खनिज विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। मेसर्स डेक्कन गोल्ड माइनिंग लिमिटेड (DGML) ने राज्य में हाल ही में प्राप्त संयुक्त अनुज्ञा क्षेत्र में निकल (Nickel), क्रोमियम (Chromium) और प्लेटिनम समूह के तत्वों (PGEs) की खोज की है। यह उल्लेखनीय उपलब्धि छत्तीसगढ़ में रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और उनके सतत विकास के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।


यह खोज महासमुंद जिले के भालुकोना–जामनीडीह निकल, क्रोमियम और PGE ब्लॉक में हुई है, जो लगभग 3000 हेक्टेयर में फैला हुआ है। इस क्षेत्र का प्रारंभिक अन्वेषण भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा G4 स्तर पर किया गया था, जिसमें इन खनिजों की उपस्थिति की संभावना प्रकट हुई थी। इस आधार पर, छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग के अंतर्गत भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय (DGM) ने विस्तृत भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का संकलन कर ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया संपन्न कराई।

दिनांक 6 मार्च 2023 को ब्लॉक का सफलतापूर्वक नीलामीकरण हुआ, जिसमें DGML ने 21%  सबसे ऊँची बोली लगाकर इसे हासिल किया। इसके पश्चात DGM छत्तीसगढ़ द्वारा अन्वेषण कार्यों को शीघ्र गति देने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग प्रदान किया गया। आवश्यक वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त होने के बाद, DGML ने अन्वेषण कार्यों की शुरुआत की, जिनमें विस्तृत भू-वैज्ञानिक मानचित्रण, रॉक चिप सैम्पलिंग, ड्रोन आधारित मैग्नेटिक सर्वेक्षण तथा इंड्यूस्ड पोलराइजेशन (IP) सर्वेक्षण शामिल हैं। प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। अब तक लगभग 700 मीटर लंबी खनिजीकृत पट्टी की पहचान की गई है, जो संभावित मैफिक-अल्ट्रामैफिक चट्टान संरचनाओं में स्थित है। भूभौतिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त संकेतों के अनुसार 300 मीटर गहराई तक सल्फाइड खनिजों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जो इस ब्लॉक की समृद्ध खनिज क्षमता को रेखांकित करती है।

भालुकोना ब्लॉक के समीप ही स्थित केलवरडबरी निकल, क्रोमियम एवं PGE ब्लॉक पूर्व में मेसर्स वेदांता लिमिटेड को नीलामी के माध्यम से प्रदान किया गया था। इन दोनों ब्लॉकों के संयुक्त विकास से महासमुंद क्षेत्र को देश के रणनीतिक खनिजों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाएँ सशक्त हुई हैं।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक खोज राज्य और देश के लिए अत्यावश्यक खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन की भावना को सशक्त करती है और रणनीतिक क्षेत्रों में सतत एवं आत्मनिर्भर विकास को प्रोत्साहित करती है। छत्तीसगढ़ शासन वैज्ञानिक एवं विस्तृत खनिज अन्वेषण तथा विकास को पूर्ण समर्थन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्य शासन द्वारा रणनीतिक एवं महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, जिसका प्रमाण 2024-25 के अन्वेषण प्रस्तावों में परिलक्षित होता है, जहां 50% से अधिक प्रस्ताव इन्हीं खनिजों पर केंद्रित हैं। अब तक राज्य द्वारा 51 खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी की जा चुकी है, जिनमें ग्रेफाइट, निकल, क्रोमियम, PGEs, लिथियम, ग्लॉकोनाइट, फॉस्फोराइट एवं ग्रेफाइट-वैनाडियम जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 6 टिन ब्लॉकों को भारत सरकार के खनिज मंत्रालय को आगामी नीलामी हेतु सौंपा गया है।

इस दिशा में योजनाबद्ध एवं संस्थागत प्रयासों को गति देने के लिए DGM, छत्तीसगढ़ ने एक क्रिटिकल मिनरल सेल (Critical Mineral Cell) का गठन किया है, जो शोध, शैक्षणिक एवं पेशेवर संस्थानों के साथ सहभागिता बढ़ाकर खनिज अन्वेषण एवं परिशोधन को प्रोत्साहित कर रहा है।

इस संदर्भ में खनिज संसाधन विभाग के सचिव, श्री पी. दयानंद, ने कहा कि यह खोज केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि एक रणनीतिक छलांग है। बढ़ती वैश्विक मांग के मद्देनज़र, हरित ऊर्जा एवं हाई-टेक तकनीकों के लिए आवश्यक खनिज — जैसे निकेल और प्लेटिनम समूह के तत्व — भविष्य की तकनीकों की रीढ़ हैं। छत्तीसगढ़ भारत के रणनीतिक खनिज मानचित्र में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए कटिबद्ध है और हम इसके लिए आवश्यक संस्थागत और संचालनात्मक सहयोग सुनिश्चित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल छत्तीसगढ़ की खनिज समृद्धि की स्थिति को और मजबूत करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में उपयोगी खनिजों की खोज की दिशा में अद्भुत संभावनाओं की नींव भी रखती है।
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कार्डियक अरेस्ट के दौरान डॉ. सुनील गौंडिया ने की आपातकालीन एंजियोप्लास्टी, 48 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन

एक असाधारण चिकित्सीय कार्य का परिचय देते हुए, एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ सुनील गौंडिया एवं उनकी टीम ने 48 वर्षीय महिला की जान बचाई, जो हार्ट अटैक के बाद अचानक कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो गई थीं। यह एक अत्यंत दुर्लभ और उच्च जोखिम वाली स्थिति थी, जिसमें तत्काल निर्णय और अत्यंत दक्ष चिकित्सीय हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।


महिला को किसी भी पूर्व ज्ञात कारण के बिना एक ऐंठन जैसी दर्द की शिकायत के साथ आपातकालीन विभाग में लाया गया। प्रारंभिक जांच में उन्हें हार्ट अटैक की पुष्टि हुई। हालांकि, उपचार शुरू होने से पहले ही उन्हें कार्डियक अरेस्ट हो गया – एक गंभीर स्थिति जिसमें ह्रदय की धड़कन बंद हो जाती है और शरीर में रक्त प्रवाह रुक जाता है।

आपातकाल में डॉ सुनील गौंडिया एवं उनकी टीम ने तुरंत कार्डियोपल्मनरी रिससिटेशन (CPR) शुरू किया, जिसमें निरंतर छाती पर दबाव और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाली चिकित्सा शामिल थी। 30 मिनट तक प्रयासों के बावजूद महिला की धड़कन बहाल नहीं हुई।

ऐसे में यह स्थिति और दुर्लभ एवं गंभीर हो गई, डॉ सुनील गौंडिया एवं उनकी टीम ने बेझिझक और तेजी से कार्य करते हुए आपातकालीन एंजियोप्लास्टी करना शुरू किया। सामान्यतः ऐसी स्थिति में CPR जारी रखने के बावजूद बहुत कम मरीज ही बच पाते हैं, लेकिन इस में एंजियोप्लास्टी अत्यंत जल्द और जोखिम भरा विकल्प होता है, जिसमें सजीव सम्बन्धित (लाइव) चिकित्सा अवस्था में ह्रदय की रक्तवाहिनियों को खोला जाता है।

चमत्कारी रूप से, अवरुद्ध धमनी को खोलने के कुछ ही मिनटों बाद महिला का दिल फिर से धड़कने लगा। उसके बाद महिला को तुरंत ICU में शिफ्ट किया गया, शिथिलता से उबर कर वह महिला कोमा से बाहर आ गई और तीन दिन वेंटिलेटर से हटा दी गई। पांच दिन बाद उन्हें पूरी तरह स्वस्थ स्थिति में छुट्टी दी गई, और उसके जीवन की भी कोई स्थायी नुकसान नहीं हुआ।

“डॉ. सुनील गौंडिया सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर ने कहा “यह घटना रायपुर और अब तक संपन्न हुए सबसे जटिल मामलों में से एक था, जिसका इलाज समय रहते करना एक ऐसे चिकित्सीय परिणाम के लिए हो सका जो अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। डॉ गौंडिया ने विशेष रूप से बताया कि यह एमएमआई नारायणा अस्पताल के इमरजेंसी एवं कार्डियक विभाग के सहयोग से संभव हो पाया। इस कार्य में डॉ.अर्पित श्रीवास्तव (सीनियर इन्टरनल मेडिसिन) और डॉ. अजीत सिंह (जूनियर रेसिडेंट इमरजेंसी मेडिसिन) ने दक्षता पूर्वक सहयोग प्रदान किया जो विशेष रूप से सराहनीय रहा।”

“डॉ. सुनील गौंडिया ने कहा CPR के दौरान एंजियोप्लास्टी करना अत्यंत दुर्लभ और जटिल होता है। इसमें ER और Cath Lab टीम के बेहतरीन समन्वय का विशेष स्थान होता है। इस मामले में रोगी की बनी किसी भी गतिविधि को बचा पाने में इमरजेंसी सिस्टम, कार्डियक इमरजेंसी और टीम की तत्परता को दर्शाता है।”

यह असाधारण मामला न केवल चिकित्सीय विशेषज्ञता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि हार्ट अटैक के लक्षणों को जल्दी पहचानना, समय पर PCI-सुविधाओं युक्त अस्पताल पहुंचना और सक्रिय इमरजेंसी चिकित्सा प्रणाली कितना जीवन रक्षक सिद्ध हो सकता है। एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल में स्थापित आधुनिक इमरजेंसी सेवाओं ने एक जीवन को बचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। एमएमआई नारायणा अस्पताल, रायपुर cardiac emergencies में सर्वश्रेष्ठ उपचार के केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो 24x7 घंटे उच्च सुविधा और जीवन-रक्षक देखभाल प्रदान करता है।
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बस्तर में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदल रही है तस्वीर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

1 जनवरी 2024 से 16 जून 2025 तक केवल बस्तर संभाग में ही कुल 130 स्वास्थ्य संस्थाओं को NQAS के अंतर्गत गुणवत्ता प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जिनमें 1 जिला अस्पताल, 16 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 113 उप-स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 65 अन्य संस्थाओं का प्रमाणीकरण कार्य प्रक्रियाधीन है। खास बात यह है कि नक्सल प्रभावित जिलों—कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा—के 14 संस्थानों को भी गुणवत्ता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक व्यापक बनाने के उद्देश्य से नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत आयुष्मान कार्ड के कवरेज को भी गति दी जा रही है। योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग में मात्र एक वर्ष में ही 36,231 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। अब तक 52.6 प्रतिशत कवरेज हो चुका है, और 6,816 हितग्राहियों को 8 करोड़ 22 लाख रुपये की चिकित्सा सहायता का लाभ मिल चुका है।

इस सुगठित व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सरकार ने पिछले डेढ़ वर्षों में बस्तर संभाग में 33 मेडिकल स्पेशलिस्ट, 117 मेडिकल ऑफिसर और 1 डेंटल सर्जन की नियुक्ति की है। इसके अतिरिक्त राज्य स्तर से 75 और जिला स्तर से 307 स्टाफ व प्रबंधकीय पदों पर भर्ती पूरी की गई है, जबकि 291 पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। यह नियुक्तियाँ न केवल सेवाओं की पहुंच को सशक्त बना रही हैं, बल्कि गुणवत्ता और दक्षता में भी उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय और सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सुशासन और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से अब बस्तर जैसे दुर्गम और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों की पहुंच में हैं। सरकार की जन-केंद्रित सोच, ठोस रणनीति और ज़मीनी स्तर पर समर्पित क्रियान्वयन से स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अब वहां तक संभव हो रही है, जिसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में एक समय असंभव माना जाता था।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर विस्तार और गुणवत्ता में सुधार पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि मितानिनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और विभागीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी और प्रतिबद्धता के कारण ही आज यह परिवर्तन संभव हुआ है। बस्तर के लिए हमारी सरकार का विशेष फोकस है और हम इसे निरंतर मजबूत करते रहेंगे।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने जानकारी दी कि सरकार का लक्ष्य पूरे छत्तीसगढ़ में समान रूप से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। बस्तर में चलाए जा रहे मलेरिया मुक्त अभियान के तहत घर-घर जाकर जांच, त्वरित उपचार और जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से मलेरिया के प्रसार को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया गया है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के अंतर्गत पूरे राज्य में, विशेषकर बस्तर क्षेत्र में, स्वास्थ्य संस्थानों ने अनुकरणीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं।

राज्य सरकार की यह स्पष्ट प्राथमिकता रही है कि नक्सल प्रभावित इलाकों—कांकेर, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों—में स्वास्थ्य सेवाओं का जमीनी विस्तार हो। आज इन अंचलों में भी लोग गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। यह परिवर्तन श्री विष्णु देव साय के सुशासन और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर उनके विशेष फोकस का प्रमाण है।

इन उपलब्धियों की गहराई से समीक्षा और ज़मीनी प्रगति के प्रत्यक्ष अवलोकन हेतु स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल 5 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक तीन दिवसीय बस्तर दौरे पर रहेंगे। उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं तकनीकी दल भी रहेगा। इस दौरान वे बस्तर संभाग के प्रमुख जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करेंगे, स्वशासी समिति की बैठकें लेंगे, मलेरिया मुक्त अभियान की समीक्षा करेंगे तथा बीजापुर और सुकमा जैसे दूरस्थ जिलों के अंतिम छोर पर बसे गांवों में जाकर भी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति का मूल्यांकन करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में हो रहा यह परिवर्तन सिद्ध करता है कि जब सरकार की नीयत स्पष्ट हो, योजना व्यावहारिक हो और सिस्टम में प्रतिबद्धता हो—तो किसी भी दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। बस्तर अब पिछड़ेपन और असुविधा की छवि से निकलकर विकास और सशक्तिकरण की पहचान बन रहा है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय में जो क्रांतिकारी बदलाव बस्तर में हो रहा है, वह पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
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हॉफ बिजली बिल योजना: 31 लाख सामान्य और कमजोर वर्ग के उपभोक्ताओं को पहले की ही तरह हॉफ बिजली बिल योजना का मिलेगा लाभ

राज्य सरकार द्वारा हॉफ बिजली बिल योजना के अंतर्गत दी जाने वाली छूट की सीमा में युक्तियुक्त संशोधन किया गया है। अब प्रतिमाह दी जाने वाली 400 यूनिट की छूट के स्थान पर 100 यूनिट तक की मासिक खपत पर 50 प्रतिशत रियायत दी जाएगी।


वर्तमान में राज्य के 45 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से लगभग 31 लाख परिवार (करीब 70%) ऐसे हैं जिनकी खपत 100 यूनिट प्रतिमाह से अधिक नहीं है। अतएव हॉफ बिजली बिल की छूट सीमा के इस पुनरीक्षण के बावजूद इन 31 लाख जरूरतमंद सामान्य एवं कमजोर वर्ग के उपभोक्ता परिवारों को योजना का लाभ पहले की ही तरह मिलता रहेगा।  प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता परिवार हॉफ बिजली योजना से पूर्ववत् लाभान्वित होते रहेंगे।

इन 31 लाख परिवारों में 15 लाख बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवार भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्ववत् हॉफ बिजली बिल योजना का लाभ मिलता रहेगा। इन परिवारों को 30 यूनिट तक की मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत पहले की तरह प्राप्त होती रहेगी, साथ ही वे हॉफ बिजली बिल योजना के अन्य सभी लाभों से भी यथावत् लाभान्वित रहेंगे।  राज्य सरकार गरीब परिवारों को बिजली खर्च में राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है।

राज्य सरकार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना को गति दे रही है, जिसके अंतर्गत 3 किलोवॉट या उससे अधिक क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट की स्थापना पर केंद्र सरकार से ₹78,000/- तथा राज्य सरकार से ₹30,000/- की कुल ₹1,08,000/- तक की सब्सिडी दी जा रही है। 2 किलोवॉट क्षमता के सोलर प्लांट पर 75% (₹90,000/-) का अनुदान उपलब्ध है, जिससे उपभोक्ता प्रतिमाह 200 यूनिट से अधिक बिजली का उत्पादन कर सकते हैं। यह उत्पादन वर्तमान में हॉफ बिजली बिल योजना से मिलने वाली अधिकतम छूट (400 यूनिट पर 200 यूनिट की छूट) से भी अधिक है।

400 यूनिट तक औसत खपत करने वाले उपभोक्ताओं का बिजली बिल आमतौर पर ₹1000/- से अधिक होता है, जो सोलर प्लांट की स्थापना के बाद लगभग शून्य हो जाएगा। इस प्रकार के उपभोक्ता हॉफ बिजली बिल योजना से “मुफ्त बिजली बिल” योजना की ओर अग्रसर होंगे, और दीर्घकालिक बचत प्राप्त करेंगे।

उपभोक्ता स्वयं की छत पर उत्पादित बिजली के अतिरिक्त शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर प्राप्त कर सकेंगे अतिरिक्त आय

रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने वाले उपभोक्ता अपनी छत पर उत्पादित बिजली का उपयोग करने के साथ-साथ शेष बिजली को ग्रिड में प्रवाहित कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर सकेंगे।प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के अंतर्गत 25 प्रतिशत शेष लागत उपभोक्ता स्वयं वहन कर सकते हैं, या फिर बैंक से न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस ऋण की मासिक किस्त लगभग ₹800/- होगी, जो कि वर्तमान में 400 यूनिट पर देय औसत बिजली बिल ₹1000/- से भी कम है।

इस प्रकार, उपभोक्ता अपने मासिक बिजली बिल को कम करते हुए भविष्य में आत्मनिर्भर ऊर्जा उत्पादक बन सकते हैं। यह कदम न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।

राज्य सरकार का यह निर्णय गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं को राहत देने, तथा उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित करने का एक सशक्त और दूरदर्शी प्रयास है। यह योजना राज्य को स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक बचत के पथ पर अग्रसर करेगी।
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मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिले को विकास कार्यों की सौगात

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में आधारभूत संरचना के विकास को नया आयाम मिलने जा रहा है। महिला एवं बाल विकास मंत्री तथा भटगांव विधायक श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के सतत् प्रयासों से लोक निर्माण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए कुल 26 करोड़ 03 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से जिले में महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

प्रमुख स्वीकृत कार्यों में सूरजपुर जिले के सिलपल्ली एन.एच. 43 से महेशपुर-लटोरी रोड तक 5.80 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण निर्माण कार्य शामिल है, जिसकी लागत 1269.90 लाख रूपये है। इसी प्रकार भवरखोल से गंगापुर-कुम्पी तक 5.10 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य को स्वीकृति दी गई है जिसकी लागत 729.51 लाख रूपए और विकासखंड ओडगी के मुख्य मार्ग चोंगा से भोडवानीपारा-मौहारीपारा तक कुल 4.20 किलोमीटर लंबाई के पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य के लिए 604.03 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
इन कार्यों के स्वीकृत होने पर मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से सूरजपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आवागमन सुगम होगा और स्थानीय लोगों को यातायात की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही, व्यापार और कृषि से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास के हर वादे को धरातल पर उतारने का कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इन परियोजनाओं से जुड़े निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी।

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केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से मिले मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज संसद भवन में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से सौजन्य भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, माओवादी चुनौती से निपटने की रणनीति सहित विभिन्न विषयों पर केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से चर्चा की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री को माओवादी विरोधी अभियानों की उपलब्धि एवं भविष्य की कार्ययोजना से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों में पिछले डेढ़ वर्षों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। दिसंबर 2023 से अब तक 33 बड़ी मुठभेड़ों में शीर्ष माओवादी नेताओं सहित 445 माओवादी न्यूट्रलाइज़ किए गए हैं। वहीं, 1554 माओवादी गिरफ्तार किए गए हैं, एवं 1588 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। 

उन्होंने कहा राज्य सरकार की “समन्वित विकास और सुरक्षा” नीति के तहत माओवादी प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन प्रयासों से न केवल माओवादी प्रभाव कम हुआ है, बल्कि स्थानीय समुदायों में प्रशासन के प्रति भरोसा भी बढ़ा है। 

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की माओवाद उन्मूलन हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माओवादी उन्मूलन के लिए राज्य सरकार के प्रयासों को ऐतिहासिक बताया और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का वादा किया।

बैठक में छत्तीसगढ़ के गठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले अमृत रजत महोत्सव 2025 की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि इस आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता, और आर्थिक उपलब्धियों को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर के विकास और सुरक्षा में सहयोग और मार्गदर्शन पर श्री शाह को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
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प्रदेश में अब तक 621.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 621.5 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 950.9 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 324.2 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।

रायपुर संभाग में रायपुर जिले मे 576.7 मि.मी., बलौदाबाजार में 553.3 मि.मी., गरियाबंद में 492.3 मि.मी., महासमुंद में 532.4 मि.मी. और धमतरी में 494.3 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

बिलासपुर संभाग में बिलासपुर जिले में 670.1 मि.मी., मुंगेली में 678.4 मि.मी., रायगढ़ मंे 770.7 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 849.9 मि.मी., कोरबा में 671.6 मि.मी., गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 620.0 मि.मी., सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 579.2 मि.मी., सक्ती में 721.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

दुर्ग संभाग में दुर्ग जिले में 505.9 मि.मी., कबीरधाम में 471.5 मि.मी., राजनांदगांव में 578.2 मि.मी., बालोद में 590.1 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 789.1 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 448.8 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

सरगुजा संभाग में सरगुजा जिले में 440.0 मि.मी., सूरजपुर में 759.0 मि.मी., जशपुर में 705.1 मि.मी., कोरिया में 700.4 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 655.7 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है।

बस्तर संभाग में बस्तर जिले में 721.2 मि.मी., कोंडागांव में 469.8 मि.मी., नारायणपुर में 591.9 मि.मी., बीजापुर में 803.2 मि.मी., सुकमा में 494.2 मि.मी., कांकेर में 639.0 मि.मी., दंतेवाड़ा में 662.0 मि.मी. और औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।

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बस्तर ओलंपिक को मिला ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का दर्जा, रायपुर-बिलासपुर में खुलेंगे मेडिकल-नर्सिंग कॉलेज – मुख्यमंत्री साय की केंद्रीय मंत्री मांडविया से मुलाकात

छत्तीसगढ़ को खेल और स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ देने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल हुई। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार, युवा कार्य एवं खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया से नई दिल्ली में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान बस्तर ओलंपिक को इस वर्ष से "खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स" के रूप में आयोजित करने की सहमति प्रदान की गई। यह निर्णय न केवल जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खेल संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाएगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर और बिलासपुर में 220-बेड के मेडिकल एवं नर्सिंग कॉलेज खोलने का प्रस्ताव भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखा, जिससे राज्य को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। इस पर केंद्रीय मंत्री श्री मांडविया ने कहा कि केंद्र सरकार शीघ्र ही इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय लेकर आवश्यक स्वीकृति की प्रक्रिया प्रारंभ करेगी।

साथ ही, मुख्यमंत्री ने लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा संस्थान (LNIPE) का क्षेत्रीय केंद्र छत्तीसगढ़ में स्थापित करने तथा राज्य में खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए नए स्टेडियम एवं प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना की माँग भी रखी। केंद्रीय मंत्री ने इन विषयों पर भी शीघ्र स्वीकृति दिए जाने का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध सिंह एवं मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत भी उपस्थित थे।
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छत्तीसगढ़ में विरासत संरक्षण के लिए केंद्र का बड़ा कदम, ₹26.24 करोड़ का आवंटन

भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ में स्मारकों, किलों और अन्य धरोहर संरचनाओं की पहचान और संरक्षण के लिए व्यापक सर्वेक्षण किया है और पिछले पाँच वर्षों में इन कार्यों के लिए ₹26.24 करोड़ का आवंटन किया है। यह जानकारी संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में सांसद श्रीमती फूलो देवी नेताम के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

मंत्री ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक छत्तीसगढ़ में गांव-गांव सर्वेक्षण किया। इस दौरान 764 गांवों का सर्वेक्षण हुआ, जिनमें से 73 गांवों में प्राचीन अवशेष पाए गए, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में केंद्र संरक्षित स्मारकों और स्थलों की मरम्मत, संरक्षण और रखरखाव के लिए वर्ष 2020-21 में ₹2.89 करोड़, 2021-22 में ₹4.78 करोड़, 2022-23 में ₹7.50 करोड़, 2023-24 में ₹5.94 करोड़ और 2024-25 में ₹5.13 करोड़ का आवंटन किया। हर वर्ष यह राशि पूरी तरह खर्च की गई।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल देश की मूर्त सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक महत्व के स्मारकों व स्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार चलाए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है।
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