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ग्रीन स्टील से शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ ही खुलेंगे आर्थिक संभावनाओं के भी द्वार-मुख्यमंत्री

क्लाइमेट चेंज की चुनौती से निपटने के लिए पूरी दुनिया ग्रीन स्टील की ओर रुख कर रही है। स्टील के उत्पादन में अग्रणी राज्यों में से एक होने के नाते ग्रीन स्टील छत्तीसगढ़ के लिए भी बड़ी संभावनाएं लेकर आया है। इससे न केवल कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमें मदद मिलेगी, अपितु इस क्षेत्र में नवीन पहल कर हम बड़ी आर्थिक उपलब्धियों की संभावनाओं का द्वार खोल सकते हैं। यह बात मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने नवा रायपुर अटल नगर स्थित मेफेयर लेक रिसार्ट में आयोजित ग्रीन स्टील समिट 2024 में शामिल होने के अवसर पर कही। इस समिट का आयोजन भारतीय इस्पात उद्योग को कार्बन रहित बनाने के उद्देश्य से किया गया है। समिट में देश भर के प्रमुख उद्योगपति, व्यापारी उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में सीआईआई को आयोजन के लिए बधाई  देते हुए कहा  कि छत्तीसगढ़ प्रदेश भारत का सबसे प्रमुख स्टील निर्माता है। हमारे यहां सार्वजनिक क्षेत्र के भिलाई स्टील प्लांट और नगरनार स्टील प्लांट जैसी बड़ी इकाईयां तो संचालित है ही, इसके साथ-साथ निजी क्षेत्र के अनेक छोटे-बड़े इस्पात संयंत्र संचालित हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट है और छत्तीसगढ़ में लोहे के विशाल भंडार हैं, जिनमें बैलाडीला, रावघाट और दल्लीराजहरा प्रमुख हैं। छत्तीसगढ़ का देश में कुल उत्पादित स्टील में लगभग 20 प्रतिशत तक का योगदान है और राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योगों की भागीदारी 53.50 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री ने इस्पात उद्योग से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के वैश्विक चिंताओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने का दृष्टिकोण सामने रखा है। उन्होंने केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की घोषणा की सराहना की और राज्य में सौर ऊर्जा और हरित ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीआईआई का यह समिट भारतीय इस्पात उद्योग को कार्बन रहित बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रयास है। आज हम इस समिट में ग्रीन स्टील जैसे रोचक विषय पर बात कर रहे हैं। इस शब्द में खूबसूरती तो है ही, साथ ही साथ जिम्मेदारी भी है।

मुख्यमंत्री ने समिट में उपस्थित सभी प्रतिनिधियों से ग्रीन स्टील उत्पादन की नई तकनीक को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का आह्वान किया और कहा कि हमारी एकजुटता से हम स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक वातावरण का निर्माण करते हुए मिलजुलकर विकास करेंगे।

इस समिट में देश भर के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने ग्रीन स्टील उत्पादन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों और नई तकनीकों पर अपने विचार साझा किए।

इस अवसर पर सीआईआई के पदाधिकारी और उद्योगपति आशीष सराफ, सिद्धार्थ अग्रवाल,  सुवेन्द्र बेहरा, संजय जैन,  पी वी किरण अनंत उपस्थित थे।
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नक्सल पीड़ित परिवारों के परिजनों को प्रथम चरण में 58 लोगों को मिलेगी शासकीय नौकरी

 नक्सली हिंसा में मृतक के परिजनों को छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के तहत शासकीय सेवा में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य के सभी वर्गाें के विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं का त्वरित क्रियान्वयन कर लाभांवित किया जा रहा है। आज बीजापुर जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक में नक्सल पीड़ित परिवारों के 58 लोगों को अनुकम्पा नियुक्ति देने का निर्णय लिया गया। 


पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि अनुकम्पा नियुक्ति के लिए कुल 58 पात्र आवेदकों को प्रथम चरण में अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। पूर्व में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा करते हुए 19 जुलाई तक दावा आपत्ति आमंत्रित की गई थी, बाद में इस तिथि में वृद्धि करते हुए 24 जुलाई 2024 को निर्धारित की गई। उक्त तिथियों में प्राप्त दावा आपत्तियों का निराकरण करते हुए समिति के निर्णय के आधार पर विभिन्न विभागों में चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति हेतु अंतिम रूप से 58 आवेदक प्रथम चरण में पात्र पाए गए हैं, जिन्हें यह नियुक्ति दी जाएगी।
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समूह की दीदियां करेगी अब हल्दी का व्यवसायिक उत्पादन

 हल्दी् (टर्मरिक) एक भारतीय वनस्पति है यह अदरक की प्रजाति का 5 से 6 फिट बढने वाला पौधा है जिसमें जड़ की गाठो में हल्दी मिलती है हल्दी को आयुर्वेद में एक महत्व्पूर्ण औषधि मानी गयी है। इसके अलावा भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी भारतीय समाज में इसको बहुत शुभ समझा जाता है विवाह में तो हल्दीे की रस्म का एक विशेष महत्व है। हल्दी का उपयोग धार्मिक कार्यो के अलावा मसाला, रंग सामग्री, औषधि तथा उबटन के रूप में  किया जाता रहा है।

 

दंतेवाडा़

औषधि एवं घरेलू उपयोग में उपयोगिता इस प्रकार है। इसके साथ ही हल्दी में कैंसर रोधी गुण भी पाये जाते है। इस क्रम में विकासखण्ड कुआकोंडा के 5 ग्रामों को हल्दी की पैदावार के अनुकुल वातावरण के मददे नजर चयन किया गया है। इस संबंध में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ के तहत स्थानीय स्व सहायता की दीदियों को हल्दी उत्पादन, करने हेतु प्रेरित किया जा रहा है। इस कड़ी में ग्राम रेंगानार, गढ़मिरी, कुआकोण्डा, हल्बारास, मैलावाड़ा, गोगपाल के इच्छुक 50 महिलाओं को उद्यानिकी विभाग से 20 क्विंटल हल्दी बीज प्रदाय की गई है और समुह की दीदियों ने 40-40 किलो अपने बाड़ी में हल्दी गाठों का रोपण किया है। इस प्रकार हल्दी उत्पादन इस वर्ष होने पर अगले वर्ष इस हल्दी को मां दन्तेश्वरी महिला फार्मर प्रोडयूसर कंपनी लिमिटेड कुआकोण्डा के द्वारा खरीदी भी की जायेगी। खरीदी कर इस हल्दी का समूह के द्वारा प्रसंस्करण कर जिले के सी-मार्ट दुकान तथा थोक किराना दुकानों में सप्लाई करने की योजना है। जिसमें उत्पादन करने वाली समूह के महिलाए को स्थानीय स्तर पर विक्री करने का स्थान तथा उचित दर प्राप्त होगा। यूं तो जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में हल्दी की खेती पूर्व से ही की जाती रही है। परन्तु एक वृहत पृष्ठ भूमि में व्यवसायिक दृष्टिकोण से इसका रोपण लगभग नगण्य है। इसे दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ’’बिहान’’ द्वारा हल्दी की खेती को महिलाओं की आर्थिक समृद्धि एवं आजीविका से जोड़ते हुए पहल की जा रही है और उम्मीद किया जा सकता है कि निश्चित ही महिलाएं हल्दी का व्यवसायिक उत्पादन कर अपने आर्थिक समृद्धि को बढ़ाएगीं।
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अंतर्राष्ट्रीय कृषि एवं उद्यानिकी एक्सपो के राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के 5 उद्यानिकी कृषक सम्मानित

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में 20 से 22 जुलाई तक  सरकार की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले अंतर्राष्ट्रीय कृषि एवं उद्यानिकी पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मेले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बस्तर अंचल के महिला कृषक को लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। वहीं उद्यानिकी के क्षेत्र में नवाचार तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले छत्तीसगढ़ के पांच कृषकों को भी सम्मानित किया गया है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने उद्यानिकी के क्षेत्र में वनांचल क्षेत्रों सहित प्रदेश के किसानों को अंतर्राष्ट्रीय मेले में अवार्ड मिलने पर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी।   

    उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने आज यहां बताया कि बस्तर के सुदूर अंचल के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में 1000 महिला कृषकों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देने एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली महिला कृषक श्रीमती वेदेश्वरी (बिंदु) शर्मा को उक्त एक्पो में लाईफ टाईम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बस्तर की जैविक महिला की पदवी प्राप्त श्रीमती शर्मा के मार्गदर्शन में जिला-कोंडागांव के ग्राम कोकोड़ी एवं आस पास के गांवों के 1000 महिला कृषक, जैविक खेती अपनाकर विगत 6 वर्षों से अधिक आमदनी अर्जित कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 5 एकड़ खेत में श्रीमती शर्मा द्वारा पूर्ण जैविक खेती ली जा रही है, इनके कठिन परिश्रम के परिणामस्वरूप इन्हें राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कारों से पहले भी सम्मानित किया जा चुका है।

    जिला-बिलासपुर के ग्राम मल्हार के कृषक यदुनंदन प्रसाद वर्मा को विगत 5-6 वर्षों से  2.5 एकड क्षेत्र में केला, सब्जी आदि की जैविक खेती करने के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। जिरेनियम की खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एवं राज्य में इसकी खेती को बढावा देने वाले जयराम नगर जिला-बिलासपुर के कृषक लोकेश बालकृष्ण पताडे को तकनीकी नवाचार के लिए प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। जय किसान नर्सरी, ग्राम बम्हनी चारपारा, जिला राजनांदगांव के कृषक श्री जसवंत कुमार साहू के कुशल मार्गदर्शन एवं अथक प्रयासों से ग्राफ्टेड सब्जी पौध तैयार करने तथा उद्यानिकी के क्षेत्र में नवाचार करने हेतु प्रशस्ति पत्र से नवाज़ा गया। पुष्प की खेती में अपना नाम रोशन करने वाली महिला कृषक श्रीमती अंकिता वर्मा, जिला-रायपुर को ग्रीन हाउस में गुलाब के फूलों की उत्कृष्ट खेती हेतु प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।

    गौरतलब है कि 3 दिवसीय एक्सपो में छत्तीसगढ़ उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी द्वारा स्टॉल लगाकर पुष्प, फल, सब्जी आदि की प्रदर्शनी लगाई गयी तथा विभागीय योजनाओं, गतिविधियों एवं प्रगतिशील कृषकों की सफलता की कहानी को बैनर के माध्यम से प्रदर्शित किया गया था। साथ ही मशरूम के उत्पाद, प्रसंस्करण उत्पाद, महुआ तथा जामुन का जूस आदि भी स्टाल में प्रदर्शनी एवं विक्रय हेतु रखा गया था। स्टाल में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा जरेनियम की खेती, पॉली हाउस में आर्किड की खेती, ग्राफ्टेड बैंगन की खेती, ड्रैगन फ्रूट, कालीमिर्च एवं चाय की खेती की विस्तृत जानकारी के साथ लगे डिस्प्ले जिसे पढने और उसकी अधिक जानकारी प्राप्त करने विभिन्न राज्यों के किसानों के लिए आकर्षण का केन्द्र बना रहा। प्रदर्शनी में आये विशेष अतिथियों एवं अधिकारियों द्वारा भी छत्तीसगढ़ उद्यानिकी के स्टाल में लगाई गयी उत्कृष्ट प्रदर्शनी की प्रशंसा की गयी एवं ‘‘प्रमोशन ऑफ़ बेस्ट हॉर्टिकल्चर एंड फार्म फॉरेस्ट्री प्रैक्टिसेज‘‘ के केटेगरी में भी अवार्ड से सम्मानित किया गया।

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तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ी तो जिले के संग्राहकों को 18.73 करोड़ अधिक मुनाफा

हरा सोना के नाम से ख्यात तेंदूपत्ता का संग्रहण ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के अतिरिक्त आय का एक पूरक स्त्रोत है। छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर तेंदूपत्ता का संग्रहण लघु वनोपज के रूप में किया जाता है। लाखों ग्रामीण इस कार्य से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य के तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अब 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से भुगतान किया जा रहा है। जिससे संग्राहकों को पहले के 4 हजार प्रति मानक बोरा की तुलना में 15 सौ रुपए अधिक मिल रहे है। इससे संग्राहकों को तेंदूपत्ता संग्रहण से होने वाली आय बढ़ी है। रायगढ़ जिले की बात करें तो 98 हजार 977 संग्राहकों को 68 करोड़ 68 लाख 11 हजार 180 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बढ़ी दरों के लिहाज से जिले के संग्राहकों को 18.73 करोड़ रुपए ज्यादा मुनाफा मिला है।
       जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित, रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ के प्रबंध संचालक ने बताया कि रायगढ़ जिला अंतर्गत दो जिला वनोपज सहकारी यूनियन रायगढ़ एवं धरमजयगढ़ में वर्ष 2024 तेन्दूपत्ता सीजन में 112 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के 94 लॉट निर्धारित है। जिले में संग्रहण हेतु 747 संग्रहण केन्द्र में संग्रहण कार्य हेतु 1 लाख 40 हजार 600 मानक बोरा का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें तेन्दूपत्ता संग्रहण लक्ष्य के विरूद्ध 1 लाख 24 हजार 874.760 मानक बोरा संग्रहण किया गया है। इस वर्ष संग्रहण की दर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा (550 रुपये प्रति सौ गड्डी)निर्धारित है।
गेरवानी समिति फड़ सराईपाली के श्री अमृत लाल अगरिया एवं उनकी पत्नी श्रीमती पुना अगरिया ने बताया कि सीजन में उन्होंने 3640 तेन्दूपत्ता गड्डी तोड़कर उसका विक्रय किया था, जिससे उन्हें 20 हजार 20 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि पुरानी दर के मुकाबले उन्हें प्रति मानक बोरे की दर बढऩे से लगभग साढ़े पांच हजार रूपए ज्यादा मिले। प्राप्त धनराशि को वे खेती-किसानी में खर्च कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस संवेदनशील निर्णय से हम संग्राहकों को पहले से ज्यादा राशि मिल रही है, जो हमारे लिए अतिरिक्त आय का आधार बन रहा है। इसी तरह गेरवानी समिति फड़ गौरमुड़ी के श्री नथीराम एवं उनकी पत्नी सुखमनी ने बताया कि उन्होंने 3420 तेन्दूपत्ता गड्डी तोड़कर उसका विक्रय किया था, जिससे उन्हें 18 हजार 810 रुपये का लाभ प्राप्त हुआ था। प्राप्त रूपये से उन्होंने बरसात में होनी वाली परेशानी को देखते हुए खप्पर वाला घर के छत की मरम्मत कराकर उसमें एस्बेस्टस की छत डलवाए हैं और डोली खेत में भी राशि खर्च की है।

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के पद के लिए 7 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित

राजनांदगांव 
एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना राजनांदगांव ग्रामीण 1 द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 3 उसरीबोड में कार्यकर्ता एवं आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 1 सुकुलदैहान में सहायिका के पद के लिए 7 अगस्त 2024 तक आवेदन पत्र आमंत्रित की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के पद के लिए इच्छुक एवं पात्र आवेदिका निर्धारित तिथि तक कार्यालय एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना राजनांदगांव ग्रामीण 1 जिला राजनांदगांव में सीधे अथवा पंजीकृत डाक के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत कर सकती है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी कार्यालय से प्राप्त की जा सकती हैं। 
 
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बस्तर के हरा सोना संग्राहकों को बैंक मित्र एवं बैंक सखियों से सीधे मिल रही पारिश्रमिक राशि

 बस्तर अंचल में तेंदूपत्ता को हरा सोना माना जाता है,जो वनांचल के संग्राहकों की अतिरिक्त आय का मुख्य जरिया है। गर्मी के दिनों में जब ग्रामीणों के पास न तो खेतों में काम होता है और न ही घर में कुछ काम, तब इसी तेंदूपत्ता यानी हरा सोना का संग्रहण उन्हें मेहनत एवं संग्रहण के आधार पर भरपूर पारिश्रमिक देता है। वनांचल में रहने वाले ग्रामीणों के लिये तेंदूपत्ता के प्रति मानक बोरा की दर में हुई वृद्धि भी खुशियां जगा दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा तेंदूपत्ता का प्रति मानक बोरा राशि 5500 रुपए किए जाने के बाद संग्राहकों में अपार खुशी है। वहीं तेंदूपत्ता संग्राहकों को तेंदूपत्ता पारिश्रमिक राशि स्थानीय स्तर पर बैंक सखियों के माध्यम से भुगतान होने के फलस्वरूप विशेषकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के संग्राहकों को बहुत सहूलियत हो रही है। इसे मद्देनजर रखते हुए कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के मार्गदर्शन में जिले के अंदरूनी ईलाके के संग्राहकों को तेंदूपत्ता पारिश्रमिक राशि का भुगतान बैंक मित्र और बैंक सखियों के माध्यम से किया जा रहा है। तेंदूपत्ता सीजन 2024 में संग्रहित तेंदूपत्ता का 36 हजार 229 संग्राहकों को 12 करोड़ 43 लाख 95 हजार 749 रुपए पारिश्रमिक राशि अपने गांव के बैंक मित्र एवं बैंक सखियों द्वारा की जा रही है।

       लोहण्डीगुड़ा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम कुथर के तेंदूपत्ता संग्राहक आयतू और बैसू तेंदूपत्ता संग्रहण कर उसे समिति में बेचने का कार्य वर्षों से कर रहे हैं। एक सीजन में तीन से पांच से आठ हजार रूपए तक कमाई करने वाले इन संग्राहकों का कहना है कि वे सुबह से शाम तक पत्ते तोड़कर उसे गड्डी तैयार करते हैं, फिर फड़ में ले जाकर विक्रय करते हैं। उनका अधिकांश समय वन में ही गुजरता है। मुख्यमंत्री द्वारा 04 हजार रूपए प्रति मानक बोरा राशि की दर को 05 हजार 500 रूपए किए जाने पर खुशी जताते हुए बैसू ने कहा कि इससे उसके जैसे अनेक संग्राहकों को अच्छा लाभ मिला है।दरभा ब्लॉक के ग्राम पखनार की रहने वाली संग्राहक मासे मंडावी एवं सुकली मंडावी का कहना है कि वह कई साल से तेंदूपत्ता तोड़ने का कार्य कर रही है। संग्राहकों के हित में 4000 की राशि 5500 रूपए प्रति मानक बोरा होने पर गरीब संग्राहकों को इससे फायदा होने की बात कही। बकावंड ब्लॉक के डिमरापाल निवासी सुकरी नेताम ने बताया कि वह खेती-किसानी के साथ-साथ तेंदूपत्ता संग्रहण का काम कई वर्षों से कर रही हैं। गांव में तेंदूपत्ता संग्रहण से गर्मी के दिनों में कुछ कमाई हो जाती है। एक-एक पत्तों को तोड़कर बण्डल बनाने में मेहनत लगता है। शासन ने संग्राहकों के परिश्रम का महत्व को समझते हुए राशि बढ़ाई है जो सराहनीय है।
       इन ग्रामीण संग्राहकों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति मानक बोरा दर 4000 रुपए से बढ़ाकर 05 हजार 500 रूपये किए जाने से संग्राहकों को राहत मिल रही है। बकावंड डिमरापाल के संग्राहक सैयतो यादव ने बताया कि गांव के पास ही मरहान और जंगल है। आसपास के क्षेत्र में तेंदूपत्ता संग्रहण आसानी से हो जाता है। तेंदूपत्ता संग्रहन से राशि मिलती है तो घर-परिवार की जरूरतें होती है। यह ग्रामीण संग्राहकों के लिए अतिरिक्त आमदनी का मुख्य जरिया है। इस प्रकार तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रति मानक बोरा दर में वृद्धि से जिले के वनांचल में रहने वाले सभी तेंदूपत्ता संग्राहकों को सुखद अनुभूति हुई है।
       बैंक मित्र पखनार रामो कुंजाम ने बताया कि वह ईलाके के 05 ग्राम पंचायतों के 250 से ज्यादा तेंदूपत्ता संग्राहकों को तेंदूपत्ता पारिश्रमिक राशि का भुगतान कर चुके हैं। वहीं लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के कस्तूरपाल के बैंक मित्र सामू कश्यप ने 50 से अधिक संग्राहकों तथा बस्तर विकासखण्ड के भानपुरी की बैंक सखी जमुना ठाकुर ने 56 से ज्यादा संग्राहकों को भुगतान किया है। वहीं बकावंड ब्लॉक के डिमरापाल की बैंक सखी तुलेश्वरी पटेल अब तक डिमरापाल एवं छिंदगांव के 90 से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को डेढ़ लाख रुपए से ज्यादा का भुगतान कर चुकी हैं।

जिले के 15 समितियों के तेंदूपत्ता संग्राहकों को बैंक सखियों ने किया भुगतान

   वनमंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक जिला सहकारी यूनियन जगदलपुर श्री उत्तम गुप्ता ने बताया कि जिले के सभी 07 विकासखण्डों के अंतर्गत 15 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के कुल 36 हजार 229 संग्राहकों को 12 करोड़ 43 लाख 95 हजार 749 रुपए पारिश्रमिक राशि अपने गांव के बैंक मित्र एवं बैंक सखियों से भुगतान किया जा रहा है। जिसके तहत लोहण्डीगुड़ा ब्लॉक के 13 ग्राम पंचायतों के 1947 संग्राहकों को 79 लाख 47 हजार 665 रुपए, तोकापाल विकासखण्ड के एक ग्राम पंचायत के 76 संग्राहकों को 03 लाख 36 हजार 193 रुपए,बास्तानार ब्लॉक के 22 ग्राम पंचायतों के 1831 संग्राहकों को 79 लाख 69 हजार 995 रुपए,बस्तर विकासखण्ड के 65 ग्राम पंचायतों के 10 हजार 78 संग्राहकों को 02 करोड़ 68 लाख 72 हजार 736 रुपए, दरभा ब्लॉक के 21 ग्राम पंचायतों के 1782 संग्राहकों को एक करोड़ 37 लाख 71 हजार 934 रुपए तथा बकावंड विकासखण्ड के 86 ग्राम पंचायतों के 16 हजार 510 संग्राहकों को 05 करोड़ 45 लाख 47 हजार 614 रुपए पारिश्रमिक राशि का भुगतान स्थानीय बैंक सखियों द्वारा किया जा रहा है। जिससे जहां ग्रामीण संग्राहकों को भुगतान प्राप्त करने में सुविधा हुई,वहीं इन बैंक सखियों को भी अच्छी कमीशन राशि मिली।

 

 

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कर्तव्यों में लापरवाही बरतने पर सचिवों को किया गया निलंबित

राजनांदगांव 

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह ने ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों की जांच पश्चात जनपद पंचायत डोंगरगढ़ अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत मेढ़ा के पूर्व सचिव एवं वर्तमान सचिव ग्राम पंचायत कोल्हिापुरी (नवागांव) श्री प्रकाश रामटेके तथा पूर्व सचिव एवं वर्तमान सचिव ग्राम पंचायत अउरदा श्री मनहरण राउत्रे को पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने एवं उच्च कार्यालयों के निर्देशों का पालन नहीं किये जाने के कारण निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में श्री प्रकाश रामटेके का मुख्यालय जनपद पंचायत डोंगरगढ़ एवं श्री मनहरण राउत्रे का मुख्यालय जनपद पंचायत राजनांदगांव निर्धारित किया गया है। निलंबित सचिवों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी। 
    मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत राजनांदगांव सुश्री सुरूचि सिंह ने मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिला अंतर्गत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मोहला से प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार सचिव संलग्न जनपद पंचायत मोहला श्री जितेन्द्र कुमार धु्रव एवं सचिव ग्राम पंचायत डूमरटोला श्री तिलक राम हेड़ामे को अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने एवं उच्च कार्यालयों के निर्देशों का पालन नहीं किये जाने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में में सचिवों का मुख्यालय जनपद पंचायत मोहला निर्धारित किया गया है। इसी तरह मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अम्बागढ़ चौकी से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार सचिव ग्राम पंचायत आटरा श्री हेमुलाल कोमरे को पदीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने एवं उच्च कार्यालयों के निर्देशों का पालन नहीं किये जाने के कारण निलंबित किया कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत अम्बागढ़ चौकी निर्धारित किया गया है। निलंबित सचिवों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी। 
 
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कलेक्टर ने डोंगरगांव विकास योजना प्रारूप 2031 के संबंध में विकास योजना समिति की ली बैठक

 कलेक्टर  संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट सभाकक्ष में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा डोंगरगांव विकास योजना (प्रारूप) 2031 के संबंध में विकास योजना समिति की बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने डोंगरगांव विकास योजना (प्रारूप) 2031 में सम्मिलित ग्रामों के सरपंच एवं नगरीय निकाय एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से आवश्यक सुझाव प्राप्त करने डोंगरगांव नगर पंचायत में बैठक आयोजित करने कहा। उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) डोंगरगांव, सम्मिलित ग्रामों में सरपंच एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत डोंगरगांव एवं नगरीय निकाय के स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त कर विकास योजना में समाहित करने के निर्देश दिये, ताकि डोंगरगांव क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए विकास योजना तैयार की जा सके। इस अवसर पर अध्यक्ष जिला पंचायत  गीता साहू, वनमंडलाधिकारी आयुष जैन, सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, उप संचालक नगर एवं ग्राम निवेश  कमला सिंह, विकास योजना समिति के सदस्यगण, संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

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ग्राम किरगी रिवागाहन में मनाया गया स्वच्छता त्यौहार

 राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम किरगी रिवागाहन में विगत दिनों जिला पंचायत के सहयोग एवं एबीस पहल द्वारा दो दिवसीय स्वच्छता त्यौहार मनाया गया। दो दिनों तक चले स्वच्छता त्यौहार का मुख्य उद्देश्य ग्राम को ओडीएफ प्लस बनाने के लिए ग्रामवासियों को जागरूक करना था। जिसके तहत स्कूली बच्चों द्वारा पोस्टर प्रतियोगिता, सेग्रेगेशन को लेकर जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वच्छता का संदेश दिया गया। इसके अलावा बच्चों ने कबाड़ से जुगाड़ का प्रदर्शन करते हुए ग्रामीणों को प्लास्टिक के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती पूर्णिमा साहू, जनपद पंचायत डोंगरगांव एसीईओ होरी लाल साहू, प्राचार्य श्री नरोत्तम लाल कमरिया, ग्राम पंचायत सचिव पूनम साहू, एबीस एक्सपोट्र्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से असिस्टेंट मैनेजर सीएसआर महिमा सोनी, पहल मोटीवेटर विनोद एवं भूमिका सहित विकासखंड समन्वयक एसबीएम, पंच, ग्राम पटेल, शिक्षक, स्वच्छताग्राही दीदी, स्कूली बच्चे एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री ने नालंदा परिसर की तर्ज पर 13 नगरीय निकायों में लाइब्रेरी की दी सौगात

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर प्रदेश के 13 नगरीय निकायों में लाइब्रेरी निर्माण के प्रस्ताव को वित्त विभाग से हरी झंडी मिल गई है। लाइब्रेरी को “नॉलेज बेस्ड सोसायटी” यानी “ज्ञान आधारित समाज’’ के प्रतीक के रूप में प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में स्थापित किया जाएगा। 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के तैयारी के लिए उच्च गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने संकल्पित है। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित लाइब्रेरी की सौगात दी है, जिसका लाभ युवाओं को मिलेगा। उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे प्रदेश के युवाओं को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। वित्त विभाग ने रायपुर के नालंदा परिसर की तर्ज पर प्रदेश के 13 नगरीय निकायों में लाइब्रेरी के लिए 85 करोड़ 42 लाख रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की है। प्रदेश के 4 नगरीय निकायों में 500 सीटर और 9 नगरीय निकायों में 200 सीटर लाइब्रेरी का निर्माण किया जाएगा। 


उल्लेखनीय है कि यह उन विद्यार्थियों के लिए लाभदायक होगा, जो छोटे शहरों में रहकर उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करना चाहते हैं या फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। लाइब्रेरी निर्माण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं के शैक्षिक और सांस्कृतिक विकास को सुनिश्चित करना है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपने मुख्य बजट भाषण में भी इसका जिक्र करते हुए कहा था कि युवाओं के अध्ययन के लिए नालंदा परिसर की तर्ज पर लाइब्रेरी निर्माण किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि इन केंद्रों को ‘‘नॉलेज बेस्ड सोसायटी’’ यानी ज्ञान आधारित समाज के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि ये युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत और सरकार के लिए एक आदर्श बन सके।

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कलेक्टर ने किया परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण

 माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा संचालित हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट  द्वितीय मुख्य एवं अवसर परीक्षा 2024 का आयोजन किया जा रहा है। कलेक्टर नम्रता गांधी ने स्थानीय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धमतरी स्थित परीक्षा केन्द्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल परिसर स्थित कम्प्यूटर कक्ष में बच्चों से भी चर्चा कर कम्प्यूटर संबंधी सवाल पूछे। कलेक्टर ने स्कूल के प्राचार्य को निर्देशित किया कि बारिश के कारण परिसर में पानी जमा न हो, इसकी निकासी की समुचित व्यवस्था के साथ ही सावधानी बरती जाए। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री टीआर जगदल्ले, प्राचार्य श्रीमती बीना मैथ्यु उपस्थित थे।

 

 

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खरीफ फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई

 उप संचालक कृषि पीएस कुसरे ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले के किसान मुख्य फसल धान सिंचित, धान असिंचित, मूंग, उड़द, मूंगफली एवं कुटकी का बीमा करा सकते हैं। वहीं वर्ष 2024-25 के लिए खरीफ फसल बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है।

किसानों के फसल को प्रतिकुल मौसम, सूखा, बाढ़, जलप्लावन, कीटव्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को होने वाले नुकसान से राहत दिलाने के लिए बीमा में शामिल किए जाने वाले किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत ऋणी एवं अऋणी किसान जो भू-धारक एवं बटाईदार हो सम्मिलित हो सकते हैं। बीमा करने हेतु कृषक संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विभाग के जिला अथवा विकासखण्ड मुख्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

 

 

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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के लिए आवेदन 6 तक

 एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग-शहरी अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रिक्त पदों पर भर्ती की जानी है। नियुक्ति हेतु आवेदन 06 अगस्त 2024 तक एकीकृत बाल विकास परियोजना कार्यालय दुर्ग-शहरी (पांच बिल्डिंग, बाल संरक्षण गृह परिसर महिला एवं बाल विकास विभाग) में सीधे अथवा पंजीकृत डाक से कार्यालयीन समय सुबह 10 बजे से शाम 5.30 बजे तक (शासकीय अवकाश को छोड़कर) जमा किया जा सकता है। आंगनबाड़ी केन्द्र संतराबाड़ी केन्द्र क्र.-02 वार्ड क्रमांक 26 संतराबाड़ी वार्ड और सुभाष नगर केन्द्र क्र.-02 वार्ड क्रमांक 43 कसारीडीह पूर्व के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद की भर्ती की जानी है।

परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना दुर्ग-शहरी से मिली जानकारी अनुसार आवेदन किये जाने हेतु शासन द्वारा निर्धारित आवश्यक गाईडलाईन के तहत आवेदिका की आयु 18 से 44 वर्ष के मध्य होनी चाहिए। आयु की गणना आवेदन आमंत्रित करने की सूचना जारी होने की तिथि से की जाएगी। सेवा की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष होगी। (एक वर्ष या अधिक सेवा का अनुभव रखने वाली कार्यकर्ता/सहायिका/सह-सहायिका/संगठिका को आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दी जाएगी)। आवेदिका उसी वार्ड की स्थायी निवासी होनी चाहिए जिस वार्ड में आंगनबाड़ी केन्द्र स्थित है। निवासी होने के प्रमाण में नगरीय क्षेत्र में संबंधित वार्ड की अद्यतन मतदाता सूची में नाम दर्ज हो तो आवेदन पत्र में उसके क्रमांक का उल्लेख कर प्रतिलिपि लगाई जाए अथवा वार्ड पार्षद तथा पटवारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र जिसमें वार्ड एवं ग्राम में निवासरत् रहने का पता सहित स्पष्ट उल्लेख हो, मान्य किया जाएगा।

आवेदिका की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आंगनबाड़ी कार्यकता पद हेतु 12वीं अथवा 11वीं बोर्ड उत्तीर्ण। अनुभवी कार्यकर्ता/सहायिका/सह-सहायिका होने पर, गरीबी रेखा परिवार, अनुसूचित जाति, जनजाति परिवार की महिला होने पर तथा विधवा, परित्यक्ता अथवा तलाकशुदा महिला होने पर निर्धारित अतिरिक्त अंक दिये जाएंगे। ऐसी कार्यकर्ता जिन्हें अनिमितता के कारण पूर्व में सेवा से बर्खास्त किया गया है। ऐसे आवेदक द्वारा प्राप्त आवेदन अमान्य किये जा सकेंगे। उक्त अर्हता रखने वाले इच्छुक आवेदिका रिक्त कार्यकर्ता पद हेतु आवेदन कर सकते हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का पद पूर्णतः मानसेवी तथा अशासकीय पद है। इन्हें केन्द्र शासन एवं राज्य शासन द्वारा निर्धारित मानदेय दिया जाएगा।

जिन वार्डो के रिक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं, उस वार्ड में निवासरत इच्छुक आवेदिकाओं को वार्ड का निवासी होने संबंधी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही आवेदन पत्र कार्यालय से प्रदाय किए जाएंगे। अन्य वार्ड में निवासरत आवेदिकाओं को आवेदन पत्र नही दिए जाएंगे। कार्यालय द्वारा जारी पंजीकृत आवेदन पत्र ही मान्य किए जाएंगे। आवेदन की फोटोकापी अमान्य होगी। आवेदन में संलग्न समस्त दस्तावेज आवेदिका द्वारा स्व प्रमाणित होना चाहिए। कार्यालय से आवेदन प्राप्त कर जमा करने की अंतिम तिथि के पश्चात आवेदन स्वीकार नही किए जाएंगे।

 

 

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नल जल योजना से जल संकट वाले गांवों में दूर होने लगी है पेयजल की समस्या

 यह कोरबा जिले के कोरबा विकासखण्ड के अंतर्गत  विमलता गाँव है। भले ही इन गांव में रहने वाले परिवारों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन पानी को लेकर यहाँ की समस्या बहुत बड़ी है। गर्मी क्या आई ? गाँव का हैंडपंप जलस्तर नीचे जाने से जवाब दे जाता था। इस गांव के लोगों ने ऐसे कई गर्मी के मौसम देखे हैं, जो उन्हें पानी के बूँद-बूँद के लिए मोहताज करते हुए उनकी आँखों से आँसुओं के बूँद गिराए हैं। अब जबकि गाँव में जल जीवन मिशन से घर-घर नल लग गया है तो यहाँ पीने के पानी के लिए गर्मी के दिनों में ग्रामीणों को आँखों से आँसुओं की बूंद नहीं गिराना पड़ता। गाँव में लगे नल और घरों के कनेक्शन से उन्हें गर्मी और बरसात में स्वच्छ पानी की धार मिल जाती है। उन्हें लगभग एक किलोमीटर दूर पहाड़ के नीचे मुसीबत मोल लेकर खतरनाक ढोढ़ी में पानी भरने नहीं जाना पड़ता।

कोरबा ब्लाक के नकिया पंचायत अंतर्गत ग्राम विमलता में जल जीवन मिशन के माध्यम से नल कनेक्शन घर-घर लगाया गया है। जल संकट वाले इस ग्राम में हर साल गर्मी के दिनों में पानी की समस्या विकराल हो जाती थी। बारिश के समय जान जोखिम में लेकर पहाड़ के चट्टानों के बीच ढोढ़ी का पानी निकालना पड़ता था। इस दौरान पत्थरों के फिसलन होने से गिरने का खतरा भी बना रहता था। वे मटमैला पानी पीने मजबूर थे। ग्राम विमलता की महिला रामवती बाई, फुसुन्दरी बाई ने बताया कि गर्मी आते ही सभी को पानी के लिए जूझना पड़ता है। जलस्तर नीचे चले जाने के बाद समस्या और भी बढ़ जाती थी। बारिश के समय बहुत कम पानी से काम चलाना पड़ता था। अब घर में नल का कनेक्शन लग जाने से सुबह शाम पानी उपलब्ध हो जाता है। उन्हें 01 किलोमीटर दूर ढोढ़ी से पानी नहीं लाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गर्मी के दिनों में पानी की समस्या देखकर रोना आ जाता था। ग्रामीण दिलमती बाई ने बताया कि पास का हैण्डपम्प से लगातार पानी निकालने से हैंडपंप भी बिगड़ जाते थे। गांव में सोलर ड्यूल पंप लगा है, जिससे गांव वालों को आसानी से पीने का पानी मिलने लगा है। उन्होंने बताया कि घरों में पेयजल के लिए सबसे ज्यादा महिलाओं को ही परेशानी उठानी पड़ती थी। उन्हें ही दूर कहीं से पानी लाना पड़ता था। अब ऐसी समस्या दूर हो गई है। गाँव के जनेऊ सिंह का कहना है कि घर-घर नल लगाना बहुत अच्छी पहल है। इससे स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। घरों में नल का कनेक्शन भी लगा है। पानी की सप्लाई से गाँव वालों को राहत मिलने लगी है। सोलर ड्यूल पंप लग जाने से 24 घण्टे पानी की सुविधाएं मिल गई है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव द्वारा हर घर पेयजल पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। कलेक्टर श्री अजीत वसंत के निर्देशन में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा दूरस्थ ग्रामों में क्रेडा के सहयोग से सोलर ड्यूल पंप स्थापित कराकर घरों में नल कनेक्शन दिया गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में पानी की गंभीर समस्या कम हो गई है। उन्हें घर पर ही पानी उपलब्ध हो पा रहा है।

 

 

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वनांचल क्षेत्रों में नये भवन बनने से बच्चों को पढ़ाई में होगी सहुलियत

 कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने जिले के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के गांवों में आंगनबाड़ी भवनों की समस्या को दूर करने 34 नये आंगनबाड़ी भवनों की स्वीकृति प्रदान की है। इनमें से 17 भवनविहीन एवं 17 अति जर्जर भवनों के बदले स्वीकृत की गई है। नये आंगनबाड़ी भवन बनने से छोटे बच्चों के मानसिक एवं बौद्धिक विकास तथा पढ़ाई-लिखाई में भी सहायक होगी। साथ ही भवनों की समस्याओं से भी निजात मिल सकेगा। उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व कुछ गांव के ग्रामीणों ने गांव में नये आंगनबाड़ी भवन एवं जर्जर भवनों के बदले नये निर्माण की मांग को जिला प्रशासन को अवगत कराया था। छोटे बच्चों के भविष्य एवं पढ़ाई-लिखाई की बेहतर सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री अग्रवाल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए नये भवनों की स्वीकृति दी है। साथ ही कलेक्टर श्री अग्रवाल ने नये आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य को जल्द शुरू कर निर्धारित समय-सीमा अंतर्गत कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश भी दिये है। 34 नये स्वीकृत नये भवन मनरेगा अभिसरण, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं 15वें वित्त आयोग के समन्वय से निर्मित किया जायेगा।

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि नये आंगनबाड़ी भवनों के लिए प्रति भवन 11 लाख 69 हजार रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस राशि में से मनरेगा अभिसरण से 8 लाख रूपये, महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रूपये एवं 15वें वित्त आयोग या अन्य मद से 1 लाख 69 हजार रूपये समन्वय किया गया है। उन्होंने बताया कि नये स्वीकृत भवनों में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई एवं खेलकूद तथा बौद्धिक-मानसिक विकास के लिए सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जायेगी। जिससे बच्चों को पढ़ाई का बेहतर माहौल मिलेगा। नये स्वीकृत भवनों में विकासखण्ड मैनपुर अंतर्गत ग्राम भूतबेड़ा, खासरपानी, ग्राम नवापारा के माहुलपारा, भैसमुड़ी, जाड़ापदर के नाउमुड़ा, कोकड़ी, ग्राम बुरजाबहाल के कमारपारा, झरगांव, धनोरा, सरनाबहाल के फलसापारा, खरीपथरा के बस्तीपारा, उरमाल एवं धनोरा के पीपलखुटा में नये आंबनबाड़ी भवनों का निर्माण किया जायेगा। इसी प्रकार विकासखण्ड छुरा के ग्राम मेड़कीडबरी के सुरंगपानी रसगीपारा, केंवटीझर के परसापानी, पंडरीपानी, कुड़ेरादादर, रसेला के लादनपारा, देवरी के बिरोडार, मातरबाहरा एवं गाड़ाघाट में आंगनबाड़ी का निर्माण किया जायेगा। देवभोग अंतर्गत गाड़ाघाट, केंदुबन, कोदोभाठा के दरलीपारा, कुम्हड़ईकला में दो भवन, कोड़कीपारा एवं पीटापारा में आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जायेगा। फिंगेश्वर ब्लॉक के बोरसी एवं तर्रा में आंगनबाड़ी भवन बनेगा। इसी प्रकार गरियाबंद ब्लॉक के बेगरपाला के पंडरीपानी, हाथबाय के तरीपारा, केचूना एवं सड़कपरसुली में आंगनबाड़ी भवन निर्माण किया जायेगा।

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पुल के ऊपर पानी रहने पर पार नहीं करने लोगों को किया जा रहा जागरूक

 पिछले कुछ दिनों से जिले में लगातार हो रही बारिश से कई नदी नाले उफान पर है। साथ ही कई जगहों पर बारिश का पानी सड़कों और पुल-पुलियों के उपर से भी बहने की सूचना मिल रही है। ऐसे में कलेक्टर दीपक अग्रवाल ने लोगों को भारी बारिश से सुरक्षित रखने एवं सावधानीपूर्वक पुल-पुलियों को पार करने के लिए जागरूक करने के निर्देश विभागीय अधिकारी को दिये हैं। कलेक्टर श्री अग्रवाल के निर्देशानुसार लोगों को सावधानीपूर्वक पुल-पुलियों को पार करने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से पुल-पुलियों एवं सड़कों के किनारे सावधानी बोर्ड लगाया जा रहा है। इस कार्य में लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, एनएच एवं अन्य विभागों द्वारा समन्वय करके सावधानी बोर्ड लगाया जा रहा है। जिले के मैदानी सहित दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों के पुल-पुलियों एवं सड़कों में भी सावधानी बरतने के सूचनायुक्त बैनर, फ्लैक्स एवं स्थायी सूचना बोर्ड लगाया जा रहा है। इसके तहत जिले के दूरस्थ क्षेत्र मैनपुर के कामेपुर रोड, अड़गड़ी नाला, राजापड़ाव से गौरगांव रोड़, जरहीडीह नाला, धवलपुर से जरन्डीह, भाखड़ी पैरीनदी एवं गरियाबंद से उर्तुली, पारागांव नाला में सावधानी बोर्ड लगाकर लोगों को अधिक जलभराव से सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

अधिक जल भराव वाले सड़क एवं पुल-पुलियों में लोगों को पुल के उपर से पानी बहने पर पार नहीं करने तथा सावधानीपूर्वक आवागमन करने की सूचना बोर्ड के माध्यम से दी जा रही है। आसपास गांव के लोगों को यह भी समझाईश दी जा रही है कि पुल-पुलियों से अधिक जल बहाव की स्थिति में जान-माल के नुकसान को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरती जाए। साथ ही अधिक पानी की स्थिति में अन्य लोगों को भी बचने के लिए अवगत कराया जाए।

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नक्सल पीड़ित परिवारों के परिजनों को मिलेगा अनुकंपा नियुक्ति

 नक्सली हिंसा में मृतक के परिजनों को छत्तीसगढ़ शासन के पुनर्वास नीति के तहत शासकीय सेवा में अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की बैठक  कलेक्टर अनुराग पाण्डेय की अध्यक्षता में इन्द्रावती सभाकक्ष में आयोजित हुई।

जिसमें कुल 58 पात्र आवेदकों को प्रथम चरण में अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। पूर्व में जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त प्रकरणों की समीक्षा करते हुए 19 जुलाई तक दावा आपत्ति आमंत्रित की गई थी। जिसे तिथि में पुनः वृद्धि करते हुए 24 जुलाई 2024 को निर्धारित की गई। उक्त तिथियों में प्राप्त दावा आपत्ति का निराकरण करते हुए समिति के निर्णय के आधार पर विभिन्न विभागों में चतुर्थ वर्ग के पदों पर नियुक्ति हेतु अंतिम रूप से 58 आवेदक प्रथम चरण में पात्र पाए गए हैं, 2015 के बाद यह नियुक्ति दी जा रही है। 30 अगस्त को आवेदकों की कौसलिंग इन्द्रावती सभाकक्ष में प्रातः 11ः00 बजे आयोजित की जाएगी। अनुकंपा नियुक्ति के संबंध में पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने आवश्यक जानकारी दी।

बैठक में सीईओ जिला पंचायत हेमंत रमेश नंदनवार, डीईओ रमेश निषाद, एसडीएम बीजापुर जागेश्वर कौशल, पुलिस उप अधीक्षक तुलसीराम लेकाम, सीएमएचओ डॉ. बीआर पुजारी, सहायक आयुक्त आदिवासी डॉ. आनंद सिंह, सहित जिला पुनर्वास समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

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