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कुटुम्ब न्यायालय का फैसला, स्वेच्छा से अलग रहने वाली महिला भरण-पोषण की हकदार नहीं

जबलपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश विजय सिंह कावछा के न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि स्वेच्छा व परस्पर सहमति से पति से लग रहने वाली महिला भरण-पोषण राशि की हकदार नहीं है।


लिहाजा, उसका आवेदन निरस्त किया जाता है। युवक की ओर से अधिवक्ता जीएस ठाकुर व अरुण कुमार भगत ने पक्ष रखा।

अधिवक्ता जीएस ठाकुर व अरुण कुमार भगत ने दलील दी कि भरण-पोषण की मांग करने वाली महिला छह जून, 2017 को निष्पादित सहमति पत्र के आधार पर अपने पति डेनियल से अलग रह रही है।

साफ है कि उसने स्वेच्छा से पृथक रहने का रास्ता अपनाया है। कमल सिंह विरुद्ध सुनीता के न्यायदृष्टांत के अनुसार पति से सहमति पत्र के आधार पर अलग रहने वाली महिला भरण-पोषण की राशि लेने की अधिकारी नहीं होती है।

लिहाजा, प्रस्तुत आवेदन निरस्त किए जाने योग्य है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि आवेदिका से तलाक का मामला अदालत में विचाराधीन है। आवेदिका पति पर संदेह करती आई है।

इस वजह से दोनों का वैवाहिक जीवन पटरी से उतर गया। दोनों साथ रहने की हालत में नहीं थे। इसीलिए अलग रहना मंजूर किया। ऐसे मामले में भरण-पोषण की मांग बेमानी है। अदालत ने तर्क से सहमत होकर आवेदन निरस्त कर दिया।

 

 

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भारत के खिलाफ नफरत का बाजार फैलाना राहुल गांधी की प्राथमिकता : रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर राजनीतिक निशाना साधते हुए भाजपा ने कहा है कि राहुल गांधी देश मे संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करते हैं और विदेश जाकर भारत की छवि खराब करते हैं।

भाजपा राष्ट्रीय मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी द्वारा भारत के जीडीपी अनुमान को लेकर दिए गए पिछले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि आज भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया का ब्राइट स्पॉट बनी हुई है, दुनिया के बड़े देशों के मुकाबले भारत में मुद्रास्फीति दर भी कम है लेकिन राहुल गांधी ने भारत की अर्थव्यवस्था और जीडीपी को लेकर क्या कहा था।

प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी विदेश में घूम रहे हैं, कहते हैं कि नफरत के बाजार में मोहब्बत का पैगाम लेकर आए हैं, लेकिन वो भारत की विकास यात्रा को लेकर दुनिया में नफरत का बाजार और अविश्वास का बाजार फैला रहे हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का मोहब्बत का पैगाम एक बहाना है, नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत में हो रहे विकास के खिलाफ दुनिया में नफरत का बाजार फैलाना राहुल गांधी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जीडीपी के आंकड़ों ने राहुल के नफरत के बाजार के झूठ को रिजेक्ट कर दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि क्या राहुल गांधी की बात देश के अंदर कोई नहीं सुनता है जो उन्हें विदेश में जाकर भारत की आलोचना करनी पड़ती है।

उन्होंने मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल के दौरान भारत की विकास गाथा और अर्थव्यवस्था को लेकर कई उपलब्धियों का हवाला देते हुए और यूपीए सरकार के कार्यकाल से इसकी तुलना करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस की भी आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी को भारत के विकास से जुड़े रिपोटरें को भी खुले मन से पढ़ने की हिदायत दी।

प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और उनके प्रधानमंत्री होने की सच्चाई को राहुल गांधी स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए नफरत के कारण वो इस तरह की बातें बोलते रहते हैं।

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गुणवत्तायुक्त पौष्टिक भोजन बीमारियों को दूर रखने के लिए आवश्यक: मांडविया

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने हेतु नागरिकों का स्वस्थ होना आवश्यक है और इसके लिए गुणवत्तायुक्त पौष्टिक भोजन अनिवार्य है।

श्री मांडविया ने बुधवार देर शाम उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के अत्याधुनिक राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत को अमृत काल में एक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नागरिकों का स्वस्थ होना आवश्यक है। स्वस्थ नागरिक स्वस्थ राष्ट्र बनाते हैं, जो समृद्ध राष्ट्र की ओर ले जाते हैं। इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री (डॉ.) वीके सिंह, राज्य मंत्री भी उपस्थित थे।

श्री मांडविया ने कहा कि भारत की पारंपरिक भोजन की आदतों और जीवन शैली को 'हमारी रसोई हमारा अस्पताल' के रूप में अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, अच्छी गुणवत्ता वाला पौष्टिक भोजन बीमारियों को दूर रखने में काफी मदद कर सकता है।

देश में खाद्य पदार्थों से उत्पन्न चुनौती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एफएसएसएआई ने राज्य प्राधिकरणों के साथ टीमों का गठन किया है, जो इस तरह की घटनाओं पर नकेल कसेगी। उन्होंने कहा, देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर में बड़े पैमाने पर परीक्षण किए जाएंगे और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

श्री मांडविया ने एफएसएसएआई की दो पुस्तकों - मिलेट्स (श्री अन्न) रेसिपी- मेस और कैंटीन के लिए एक स्वस्थ मेनू और स्वस्थ आंत, स्वस्थ आप - संभावित प्रोबायोटिक लाभों के साथ पारंपरिक व्यंजन का भी विमोचन किया।

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पंजाब के मुख्यमंत्री ने केंद्र की जेड प्लस सुरक्षा लेने से किया इनकार

चंडीगढ़ (छत्तीसगढ़ दर्पण)पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र द्वारा उन्हें दी जा रही जेड प्लस सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य पुलिस पर भरोसा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री कार्यालय ने पंजाब और दिल्ली के लिए सुरक्षा लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि इन दोनों जगहों पर पंजाब पुलिस की विशेष टीम उनकी सुरक्षा कर रही है।

एक अधिकारी ने कहा, अगर मुख्यमंत्री को पंजाब और दिल्ली में भी एक केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा संरक्षित किया जाता है, तो इससे यह संदेश जाएगा कि उन्हें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है। मुख्यमंत्री यह संदेश नहीं देना चाहते कि उन्हें पंजाब पुलिस पर भरोसा नहीं है। जेड प्लस सुरक्षा नहीं लेने का फैसला केंद्र द्वारा मान को व्यापक सुरक्षा मुहैया कराने की योजना की घोषणा के कुछ दिन बाद आया है।

देश और विदेश में संभावित खतरों को देखते हुए मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा की पेशकश की गई थी। उन्हें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का वीआईपी सुरक्षा दस्ता मुहैया कराया जाना था।

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अमेरिका में बोले राहुल, भगवान को भी भ्रमित कर सकते हैं मोदी

सैन फ्रांसिस्को (छत्तीसगढ़ दर्पण) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि वह भगवान को भी यह बता सकते हैं कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। अमेरिका की छह दिन की यात्रा पर आए राहुल गांधी ने मंगलवार को प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत करते हुए कहा, मुझे लगता है कि अगर आप मोदी जी को भगवान के साथ बिठाते हैं, तो वह भगवान को समझाना शुरू कर देंगे कि ब्रह्मांड कैसे काम करता है। और ईश्वर भ्रमित हो जाएगा कि मैंने क्या बनाया है।

पूर्व वायनाड लोकसभा सांसद ने आगे कहा कि भारत ऐसे लोगों के समूह द्वारा चलाया जा रहा है जो अति आत्मविश्वासी हैं और उन्हें यह बीमारी है कि वे सब कुछ जानते हैं। पीएम मोदी पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत में कुछ समूहों को इस भ्रम की बीमारी है कि वे सब कुछ जानते हैं।

उन्होंने कहा, भारत में हम विभिन्न भाषाओं, विभिन्न धर्मों के लोगों के साथ बड़े हुए हैं। और इसी पर हमला किया जा रहा है। (महात्मा) गांधी जी और गुरु नानक जी जैसे लोगों के भारत में परंपरा रही है कि आपको यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि हमें सब पता है। यह एक 'बीमारी' है - भारत के कुछ समूह सोचते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा कि लोगों के इस समूह का मानना है कि वे वैज्ञानिकों को विज्ञान, इतिहासकारों को इतिहास और सेना को युद्धनीति के बारे में समझा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके मूल में अज्ञानता है और लोगों का यह समूह वास्तव में कुछ भी नहीं समझता है।

उन्होंने अपनी 4,000 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा के बारे में भी बात की, जो पिछले साल 7 सितंबर को तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई और 30 जनवरी को श्रीनगर में समाप्त हुई, जहां उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

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हर विदेश यात्रा में भारत का अपमान करना राहुल गांधी की आदत : अनुराग ठाकुर

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण) केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अमेरिका में दिए गए राहुल गांधी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि हर विदेश यात्रा में भारत का अपमान करना राहुल गांधी की आदत बन चुकी है और यह प्रायोजित यात्रा भी उसी ओर बढ़ रही है। उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपमान करना चाहते हैं परंतु देश का अपमान करने से भी पीछे नहीं हटते।

राहुल पर हमला जारी रखते हुए ठाकुर ने कहा कि इनके समय में (यूपीए सरकार के दौरान) भारत दुनिया की लड़खड़ाती चरमराती अर्थव्यवस्थाओं में आता था, लेकिन आज पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है। इनके समय में हिंदुस्तान की परंपराओं का गला घोंटा जाता था और यह हर बात के लिए पश्चिमी संस्कृति की ओर देखते थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संस्कृति, सभ्यता और गौरवपूर्ण इतिहास के पुनर्जागरण का कार्य किया है। कांग्रेस की मानसिकता गुलामी की मानसिकता है और ये हमेशा से भारत और भारतीयता को बदनाम करते आए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के पहले के बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर आप उनके पूर्व के बयानों को देखेंगे तो राहुल गांधी भारत को देश ही नहीं मानते बल्कि राज्यों का संघ मानते हैं। वे लगातार भारत के बढ़ते कदमों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं। राहुल गांधी बताएं कि इस प्रायोजित कार्यक्रम के द्वारा वह क्या करना चाहते हैं? क्या विदेश जाकर देश के ऊपर कीचड़ उछालना ही उनका एकमात्र काम बच गया है?

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पुंछ में एलओसी पर घुसपैठ की बड़ी कोशिश नाकाम, तीन आतंकी पकड़े गए

जम्मू  (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर बुधवार को सतर्क सुरक्षा बलों ने घुसपैठ की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया। साथ ही सुरक्षा बलों ने तीन आतंकवादियों को पकड़ा है।

लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने एक बयान में कहा, जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ भारतीय सेना के एक संयुक्त अभियान में, संभावित रूप से 3-4 आतंकवादियों को 30/31 मई 2023 की रात को सीमा पार करने का प्रयास करते हुए पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर रोक दिया गया। वे सभी खराब मौसम और भारी बारिश का फायदा उठा कर भारतीय सीमा में प्रवेश करने वाले थे।

बुधवार को  लगभग 1.30 बजे भारतीय सेना पर गोलीबारी की गई और जवाबी कार्रवाई में कुछ आतंकवादी मारे गए। उन्होंने कहा, इलाके की घेराबंदी कर ली गई है और तलाशी अभियान जारी है। खून के निशान मिले हैं। एक आईईडी और नार्को सहित कुछ हथियारों के साथ तीन आतंकवादियों को पकड़ा गया है। गोलीबारी में भारतीय सेना का एक जवान घायल हो गया और उसे अस्पताल पहुंचाया गया। सेना ने कहा कि तलाशी अभियान जारी है।

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हर-हर गंगे, नमामि गंगे...मोदी ने इस तरह बदल दी जीवनदायिनी माँ गंगा की दशा

(छत्तीसगढ़ दर्पण)। भारतीय संस्कृति में गंगा को मां का दर्जा दिया गया है। एक ऐसी मां, जो अपने बच्चों का भरपूर ख्याल रखती है। लेकिन, अगर मां ही स्वस्थ नहीं होगी, तो वह अपने बच्चों का ध्यान कैसे रख पाएगी। जीवनदायिनी मां गंगा के बिगड़ते स्वास्थ्य में, सबसे ज्यादा उसकी संतानों यानि हम इंसानों का ही सबसे बड़ा हाथ रहा है। हम अपने लालच और लापरवाही के चलते लगातार उसकी उपेक्षा करते गए और उसकी हालत बिगड़ती गई।


लेकिन, 2014 में केंद्र में एक नई और सबसे मजबूत सरकार का गठन, सबको वर देने वाली मां गंगा के लिए स्वयं जैसे काशीपति भगवान शिव के वरदान की तरह रहा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से चुने जाने के तुरंत बाद, वाराणसी जाकर गंगा को प्रणाम करते हुए कहा, ‘मां गंगा की सेवा करना मेरी नियति है…’ और मां गंगा को उनका खोया गौरव एवं मूल स्वरूप वापस लौटाने का संकल्प लिया।

इसी प्रतिबद्धता को प्रधानमंत्री ने कुछ समय बाद फिर दोहराया। 2014 में, न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने उन्हें गंगा नदी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में बताते हुए कहा था कि देश की 40% आबादी गंगा नदी पर निर्भर है। अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह इस आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। अतः गंगा की सफाई एक आर्थिक एजेंडा भी है।

प्रधानमंत्री जी का यह संकल्प 2014 में ही साकार होना शुरू हो गया, ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण कार्यक्रम के रूप में। गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य के साथ आरंभ होने वाले इस कार्यक्रम के लिए अगले पांच सालों के लिए निर्धारित बजट को चार गुना बढ़ाकर बीस हजार करोड़ रुपये कर दिया गया, ताकि इसमें किसी प्रकार की रुकावट न आए। सौ प्रतिशत केंद्रीय भागीदारी वाली इस कार्ययोजना को केंद्रीय मंत्रीमंडल ने भी अपनी मंजूरी दे दी।

‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम
जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा फ्लैगशिप कार्यक्रम के रूप में अनुमोदित ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग तथा जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है। इसका क्रियान्वयन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) और इसके राज्य कार्यक्रम प्रबंधन समूहों द्वारा किया जाता है। एनएमसीजी माननीय प्रधानमंत्री जी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय गंगा परिषद की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता है, जिसका गठन गंगा नदी के कायाकल्प, संरक्षण और प्रबंधन के उद्देश्य से किया गया था। इसके प्रमुख लक्ष्यों में मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूर्व अवस्था में लाना और सीवेज के प्रवाह की जांच के लिये रिवरफ्रंट के निकास बिंदुओं पर प्रदूषण को रोकने हेतु तत्काल अल्पकालिक कदम उठाना, सतही प्रवाह और भूजल को बढ़ाना व बनाए रखना, प्राकृतिक मौसम परिवर्तन में बदलाव के बिना जल प्रवाह की निरंतरता बनाए रखना, क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पतियों को पुनर्जीवन और उनका रखरखाव, गंगा नदी बेसिन की जलीय जैव विविधता के साथ-साथ तटवर्ती जैव विविधता का संरक्षण व उन्हें पुनर्जीवित करना और इस सब को हासिल करने के लिए नदी के संरक्षण, कायाकल्प और प्रबंधन की प्रक्रिया में जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल हैं। इस दिशा में गंगा की सफाई, अपशिष्ट उपचार संयंत्रों की स्थापना तथा नदी की जैविक विविधता के संरक्षण के लिये वर्ष 2014 में लिए स्वच्छ गंगा कोष का गठन किया गया था।

समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण
भौगोलिक दृष्टि से बहु-क्षेत्रीय और स्वभाव में बहु-आयामी गंगा संरक्षण की चुनौती से निपटने में बहुत से लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि कार्ययोजना की तैयारी एवं इस पर अमल में सभी की सहभागिता हो और विभिन्न मंत्रालयों के बीच और केंद्र और राज्य में अच्छा समन्वय हो, ताकि हर स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर बनाया जा सके। इसके लिए देश में विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए हैं, जिनमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, नौवहन मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, युवा मामले मंत्रालय और खेल, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय व कृषि मंत्रालय आदि शामिल हैं।

परस्पर समन्वय और सामंजस्य के इसी विचार को सार्थक करते हुए भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में पर्यटन सर्किट के विकास के लिये एक विस्तृत और दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा है, तो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय गंगा के तटवर्ती इलाकों में ऑर्गेनिक फार्मिंग और नेचुरल फार्मिंग कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में प्रयास कर रहा है और जल उपयोग दक्षता में सुधार के साथ पर्यावरण हितैषी कृषि को बढ़ावा दे रहा है। इनके अलावा आवासन एवं शहरी मामले मंत्रालय स्वच्छ भारत मिशन 2.0 और अमृत 2.0 (कायाकल्प और शहरी परिवर्तन के लिये अटल मिशन) के अंतर्गत शहरी नालों की मैपिंग तथा गंगा शहरों में ठोस और तरल कचरे के प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी प्रकार पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भी गंगा बेल्ट में वनीकरण गतिविधियों और 'प्रोजेक्ट डॉल्फिन' को बढ़ावा देने की एक व्यापक योजना पर काम कर रहा है।

समन्वय और सहभागिता को आगे बढ़ाते हुए इस कार्यक्रम में युवाओं और जनता को साथ लेकर गंगा नदी के संरक्षण और प्रदूषण मुक्ति की दिशा में योगदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए परियोजना के अंतर्गत निर्धारित गतिविधियों के संपादन के लिए प्रशिक्षित और अत्यधिक प्रेरित स्थानीय युवाओं का कैडर विकसित करना, गंगा नदी के संरक्षण और इसके प्रदूषण को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों व युवाओं का सहयोग हासिल करना और इसका लाभ उठाना, परियोजना के विभिन्न स्तरों पर समर्थन, मार्गदर्शन, पारदर्शिता, निगरानी और ऑडिट के लिए एक संस्थागत तंत्र स्थापित करना, गंगा के प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता का प्रसार करना और संबंधित व्यक्तियों को इसे कम करने के तरीकों के बारे में शिक्षित करना, स्वच्छ गंगा के लिए जनसुविधाओं की उपलब्धता, जल संचयन, संरक्षण आदि से संबंधित सरकारी कार्यक्रमों, योजनाओं और सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना जैसे उपायों को अपनाया जा रहा है।

चरणबद्ध क्रियान्वयन
कार्यक्रम को क्रियान्वयन की दृष्टि से तीन प्रकार की गतिविधियों में बांटा गया है। एक, ऐसी आरंभिक गतिविधियां, जिन्हें तुरंत लागू किया जा सके। दूसरी, ऐसी गतिविधियां, जिन्हें पांच सालों के भीतर लागू किया जाना है और तीसरी ऐसी गतिविधियां, जिन्हें दस साल के भीतर लागू किया जाना है।

तुरंत लागू की जा सकने वाली गतिविधियों में जहां गंगा की ऊपरी सतह की स्वच्छता, इसमें बहते हुए सॉलिड वेस्ट की समस्या को हल करना, शौचालयों का निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों की स्वच्छता, ऐसे क्षेत्रों की नालियों से बहकर लिक्विड व सॉलिड वेस्ट का प्रबंधन, शवदाह गृहों का निर्माण, आधुनिकीकरण कर अधजले शवों को गंगा में बहाये जाने से रोकना, घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण कर मनुष्य और नदियों के बीच आत्मीय संबंधों को प्रोत्साहन देना आदि शामिल हैं।

वहीं, दूसरे प्रकार की यानि पांच सालों के भीतर लागू की जा सकने वाली गतिविधियों में, अतिरिक्त ट्रीटमेंट कैपेसिटी का निर्माण कर, नगर निकायों और औद्योगिक क्षेत्रों से गंगा में आने वाले अपशिष्ट की समस्या को हल करना जैसे लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। नमामि गंगे मिशन के तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान राज्यों में 48 सीवेज प्रबंधन परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं और 98 सीवेज परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। औद्योगिक प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए कार्यक्रम में गंगा के किनारे स्थित अधिक मात्रा में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को कहा गया है कि गंदे पानी की मात्रा कम करें या इसे पूर्ण तरीके से समाप्त करें। साथ ही सभी उद्योगों को गंदे पानी के बहाव के लिए रियल टाइम ऑनलाइन निगरानी केंद्र स्थापित करने होंगे।

दीर्षकालिक उपायों के अंतर्गत इस कार्यक्रम को बेहतर और टिकाऊ बनाने के लिए प्रमुख वित्तीय सुधार किये जा रहे हैं। परियोजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विचार किया जा रहा है, ताकि प्रयोग किये गए पानी के लिए एक बाजार बनाया जा सके और परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

बहुउद्देश्यीय कार्यक्रम
प्रथम दृष्टया, इस कार्यक्रम को देखने पर प्रतीत होता है कि यह सिर्फ गंगा नदी को प्रदूषण और अस्वच्छता से मुक्त कराकर उसे उसका पुराना वैभव और सौंदर्य लौटाने के उद्देश्य से तैयार किया गया कार्यक्रम है। लेकिन, अगर हम इसे गहराई से देखें, तो समझ में आएगा कि यह एक ऐसा दूरदर्शितापूर्ण और सुविचारित कार्यक्रम है, जिसके प्रभाव बहुत व्यापक होने वाले हैं। और यह सिर्फ एक नदी का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का कायाकल्प करने वाला कार्यक्रम साबित होगा। इसीलिए सरकार अब स्वच्छता संबंधी प्रयासों के साथ-साथ गंगा नदी के संरक्षण, पर्यटन संबंधी सुधारों और आर्थिक विकास सुनिश्चित करने पर भी खासी तवज्जो दे रही है।

‘अर्थ गंगा’ और ‘ग्राम गंगा’ इस मिशन के ऐसे ही कुछ निहित कार्यक्रम हैं। दिसंबर, 2019 में सम्पन्न राष्ट्रीय गंगा परिषद की प्रथम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थ गंगा का विचार प्रस्तुत किया था, जिसका उद्देश्य गंगा से संबंधित आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान देना और साथ ही साथ सतत् विकास का एक मॉडल विकसित करना है। अर्थ गंगा के अंतर्गत सरकार जिन छह कार्यक्षेत्रों पर काम कर रही है, उनमें नदी के दोनों और दस किमी तक रासायनिक मुक्त खेती और गोबर-धन योजना के माध्यम से खाद के रूप में गोबर को बढ़ावा देने वाली जीरो बजट प्राकृतिक खेती, कचरा और अपशिष्ट जल को उपचारित कर स्थानीय शहरी निकायों के लिये सिंचाई, उद्योगों तथा राजस्व सृजन हेतु जल का पुन: उपयोग करना, आजीविका के अवसरों का सृजन करना, नदी से जुड़े हितधारकों के बीच तालमेल के माध्यम से जनभागीदारी बढ़ाना, गंगा एवं उसके आसपास की पर्यटन को बढ़ावा देना व आदर्श उपयुक्त जल प्रशासन के लिये स्थानीय प्रशासन को मजबूती प्रदानकर संस्थागत विकास को बढ़ावा देना शामिल हैं।

वहीं गंगा नदी के तट पर स्थित गांवों में सम्पूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करने के उद्देश्य को लेकर आरंभ ग्राम गंगा परियोजना के अंतर्गत, वर्ष 2017 में पांच गंगा राज्यों, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल, के लगभग साढ़े चार हजार गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्त गांव’ घोषित किया गया और 24 ऐसे गांवों का चयन किया गया, जिन्हें एक वर्ष के भीतर गंगा ग्राम के रूप में परिवर्तित किया जाना था। ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से गंगा तट पर बसे गांवों के सम्पूर्ण विकास के लिये एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए गंगा ग्राम परियोजना में सॉलिड व लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट, तालाबों व अन्य जल स्रोतों का पुनरोद्धार, जल संरक्षण परियोजनाओं, जैविक खेती, बागवानी तथा औषधीय पौधों को प्रोत्साहन आदि शामिल हैं।

इसी के माध्यम से रोजगार सृजन पर भी काफी जोर दिया जा रहा है। इस क्रम में समयबद्ध तरीके से घाट में हाट, आयुर्वेद, जड़ी-बूटियां, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, गंगा प्रहरी और गंगा दूत जैसे स्वयंसेवी तैयार करने की योजनाओं पर अमल जारी है। इसके अलावा गंगा किनारे की सांस्कृतिक विरासतों का दर्शन, पर्यटन, एडवेंचर पर्यटन, नौका पर्यटन व योग को प्रोत्साहन देकर स्थानीय स्तर पर जीविकोपार्जन के साधन विकसित किये जाने पर भी काम चल रहा है।

इन गतिविधियों के अलावा कार्यक्रम में जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी कदम उठाए गए हैं और कछुए, गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल, गोल्डन महासीर आदि जैसी महत्वपूर्ण जलजीव प्रजातियों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। अभी तक 4.25 अरब डॉलर निवेश वाली इस पहल में 230 संगठन शामिल हैं, जिनके साथ मिलकर करीब 30,000 हेक्टेयर जमीन का वनीकरण किया जा चुका है और 2030 तक 1,34,000 हेक्टेयर भूमि का वनीकरण करने का लक्ष्य है।

इस प्रकार बीते एक दशक में यह कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ता गया है और अपने खाते में एक के बाद एक उपलब्धियां दर्ज करता गया है। इन्हीं उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ग्लोबल वाटर इंटेलिजेंस द्वारा ग्लोबल वाटर अवार्ड्स, 2019 में “पब्लिक वाटर एजेंसी ऑफ द ईयर” पुरस्कार जीत चुका है। यह इस कार्यक्रम की बढ़ती लोकप्रियता और प्रतिष्ठा का ही नतीजा है कि ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फिनलैंड, इजराइल आदि देशों ने गंगा कायाकल्प के लिए भारत के साथ सहयोग करने में रुचि दिखाई है। इस कार्यक्रम को पिछले साल संयुक्त राष्ट्र द्वारा दुनिया की दस सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलों में शामिल किया गया है। गत वर्ष दिसंबर माह में कनाडा के मॉन्ट्रेयल में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (सीओपी15) के दौरान जारी एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भारत की पवित्र नदी गंगा के मैदानी हिस्सों की सेहत सुधारने के उद्देश्य वाली परियोजना दुनिया भर की उन दस ‘बड़ी महत्त्वपूर्ण’ पहलों में से एक है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने प्राकृतिक दुनिया को बहाल करने में उनकी भूमिका के लिए चिन्हित किया है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गंगा नदी पुनर्जीवन परियोजना में गंगा के मैदानी हिस्सों की सेहत बहाल करने, प्रदूषण कम करने, वन्य क्षेत्र का पुन: निर्माण करने तथा इसके विशाल तलहटी वाले इलाकों के आसपास रह रहे 52 करोड़ लोगों को व्यापक फायदे पहुंचाने के लिए अहम है। अब मिशन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी परामर्श और वित्त पोषण दिया जाएगा।

नमामि गंगे 2.0
नमामि गंगे कार्यक्रम के दूसरे चरण (2021-26) में सीवेज ट्रीटमेंट, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, नदी-सतह की सफाई, जैव विविधता, वनीकरण, जन जागरण, औद्योगिक प्रवाह निगरानी व गंगा ग्राम जैसे पहले से चल रहे उपक्रमों को जारी रखते हुए समस्त परियोजनाओं के रख-रखाव पर और जोर दिया जाएगा। साथ ही इसमें छोटी नदियों और आर्द्रभूमि के पुनरुद्धार पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रत्येक प्रस्तावित गंगा जिले में कम से कम 10 आर्द्रभूमि हेतु वैज्ञानिक योजनाओं और स्वास्थ्य कार्ड का प्रावधान है। इसके अलावा इसमें शहरी स्थानीय निकायों से जुड़े कार्यक्रमों एवं योजनाओं तथा यमुना, काली एवं अन्य सहायक नदियों की स्वच्छता संबंधी परियोजनाओं पर भी कार्य होगा। राज्य परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने और गंगा के सहायक शहरों में परियोजनाओं के लिये विश्वसनीय विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

 

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एयर इंडिया की फ्लाइट में हंगामा, यात्री ने क्रू पर किया हमला...

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। एयर इंडिया की फ्लाइट में यात्रा के दौरान एक यात्री ने चालक दल के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की और उनमें से एक सदस्य पर हमला भी किया। एयर इंडिया के प्रवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 29 मई की है। एयर इंडिया की ओर से जारी बयान के मुताबिक, 29 मई को फ्लाइट एआई882 में एक यात्री ने उपद्रवी व्यवहार किया।

प्रवक्ता ने कहा, उक्त यात्री ने चालक (क्रू) दल के सदस्यों के साथ गाली-गलौज की और फिर उनमें से एक पर शारीरिक हमला किया। दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने पर यात्री ने आक्रामक व्यवहार जारी रखा। प्रवक्ता ने कहा कि यात्री को सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया है। हमने इस घटना की सूचना नियामक को भी दे दी है।

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पिछले नौ वर्षों में साढे 3 करोड से अधिक पक्‍के मकान का निर्माण हुआ : निर्मला सीतारामन

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)केंद्रीय वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि देश में पिछले नौ वर्षों में साढे तीन करोड से अधिक पक्‍के मकान और करीब ग्‍यारह करोड 72 लाख शौचालयों का निर्माण किया गया।

एनडीए सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुंबई में उन्‍होंने कहा कि 12 करोड घरों को स्‍वच्‍छ जल मिल रहा है जिससे जलजनित रोगों में कमी आई है और लोगों की कठिनाईयाँ कम हुई है। उज्‍जवला योजना के अंतर्गत 9 करोड 60 लाख परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्‍शन दिये गये हैं जिससे घरों को धुँएं से छुटकारा मिला है और महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार हुआ है।

वित्‍तमंत्री ने दुनिया के सबसे बडे स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल कार्यक्रम आयुष्‍मान भारत का उल्‍लेख किया जिसके अंतर्गत करीब पांच लाख लाभार्थियों को मुफ्त ईलाज उपलब्‍ध कराया गया है। उन्‍होंने कहा क‍ि कोविड महामारी के दौरान 80 करोड लोगों को मुफ्त खाद्यान वितरित किया गया जो यूरोप की जनसंख्‍या से भी अधिक है।

 

 

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सुप्रीम कोर्ट में ईडी की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका वापस...

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। रायपुर छत्तीसगढ़ के 2000 करोड़ रु के शराब घोटाले के आरोपियों ने ईडी की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका वापस ली। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते कहा कि- PMLA एक्ट के प्रावधानों को सही ठहराया जा चुका है। फिर भी आरोपी गिरफ्तारी से राहत के लिए उन्हें चुनौती दे रहे हैं। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

गौरतलब है कि ईडी ने शराब में राज्य में 2 हजार करोड़ रुपए से अधिक रुपए के भ्रष्टाचार और मनी लांड्रिंग का दावा किया है। इसमें अनवर ढेबर को गिरफ्तार किया गया है। ईडी ने दावा किया है कि राज्य में 2019 से 2022 तक 2 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। इसमें राज्य के बड़े नेताओं और अधिकारियों का समर्थन था।

त्रिलोक सिंह ढिल्लों पर आरोप लगे है कि उसने अपने स्वेच्छा से और जानबूझकर अपने बैंक खातों और फर्मों को बड़ी मात्रा में घोटाले पैसे के लिए उपयोग करने की अनुमति दी है। इस मामले में प्रमुख लाभार्थी है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल उनके फर्मों के नाम पर 27.5 करोड़ रुपए की एफडी फ्रिज कर दी है और 52 लाख रुपए नगदी भी जब्त की है।

 

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राष्ट्रपति से मिले कांग्रेसी नेता, एसआईटी गठित करने की मांग...

मणिपुर में बिगड़े हालात को लेकर रखीं 12 मांगें, सौंपा ज्ञापन

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। हिंसाग्रस्त मणिपुर में शांति बहाली के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई जगहों पर हिंसा की खबरें आ रही हैं। इस हिंसा में कई लोगों की जान जा चुकी है। जहां आज सरकार ने पीड़ित परिवारों के दुख पर मरहम लगाने के लिए मुआवजे का एलान किया है। तो वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं के एक प्रतिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर एक उच्च स्तरीय जांच आयोग के गठन की मांग की।

मणिपुर की स्थिति को लेकर मंगलवार दोपहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। यहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। वहीं, कांग्रेस नेता ने बताया कि मणिपुर के बिगड़ते हालात को काबू लाने के लिए उन्होंने मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। नेता ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट के एक सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच आयोग के गठन सहित 12 मांगें रखी हैं।

10 लाख रुपये मुआवजे का एलान
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि केंद्र और मणिपुर राज्य सरकार ने मणिपुर में जातीय संघर्ष के दौरान मरने वालों के परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही, दंगे में मरने वालों के परिवार के एक सदस्य को भी नौकरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुआवजे की राशि केंद्र और राज्य सरकार समान रूप से वहन करेगी।

अधिकारियों ने बताया कि अफवाहों की वजह से राज्य में लगातार हिंसा बढ़ी है। जब भी शांति का माहौल बनता है तो कोई न कोई गलत जानकारी देकर अशांति फैला देता है। इसलिए अब अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए एक टेलिफोन नंबर भी जारी करने का फैसला लिया है।

बता दें, सोमवार देर रात केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के बीच हुई बैठक में मुआवजे देने का फैसला लिया गया। शाह की बैठक में यह भी सुनिश्चित करने का फैसला किया गया कि कीमतें कम करने के लिए पेट्रोल, एलपीजी गैस, चावल और अन्य खाद्य उत्पादों जैसी आवश्यक वस्तुओं को बड़ी मात्रा में उपलब्ध कराया जाएगा। सोमवार रात इंफाल पहुंचे गृह मंत्री के साथ गृह सचिव अजय कुमार भल्ला और खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन कुमार डेका भी मौजूद रहे।

अमित शाह मंगलवार को मेइती और कुकी दोनों समुदायों के राजनीतिक और नागरिक समाज के नेताओं के साथ कई बैठकें करेंगे और इस महीने की शुरुआत में सबसे खराब दंगों के स्थल चुराचांदपुर का दौरा करेंगे।

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आरबीआई के खिलाफ याचिका को हाईकोर्ट ने किया खारिज

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की उन अधिसूचनाओं को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें बिना किसी पहचान प्रमाण के नोट बदलने की अनुमति दी गई थी। मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने 23 मई को अपना फैसला सुरक्षित रखने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। आरबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता पराग पी. त्रिपाठी के वकील ने पिछले हफ्ते जनहित याचिका (पीआईएल) पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि इसे खारिज किया जाना चाहिए।

जनहित याचिका भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी। त्रिपाठी ने आगे कहा था कि यह एक वैधानिक कवायद है न कि नोटबंदी।उन्होंने कहा, मेरे विद्वान मित्र द्वारा उठाया गया कोई भी बिंदु सार्वजनिक मुद्दों पर किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होता है। जनहित याचिका में कहा गया कि 19 और 20 मई को प्रकाशित अधिसूचनाएं मनमानी थीं और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती थीं।

याचिका में आरबीआई और एसबीआई को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई कि 2000 रुपये के नोट संबंधित बैंक खातों में ही जमा किए जाएं, ताकि काला धन और आय से अधिक संपत्ति रखने वाले लोगों की पहचान की जा सके।

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नौ साल में दुनिया में बढ़ा भारत का मान, हमें कोई आंख नहीं दिखा सकता : योगी

लखनऊ (छत्तीसगढ़ दर्पण) यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नौ साल के कार्यकाल में जहां एक तरफ दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है, वहीं देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा सु²ढ़ हुई है। आज भारत को कोई आंख दिखाने का साहस नहीं कर सकता। गरीबों का कल्याण और इन्फ्रास्ट्रक्च र डेवलपमेंट जैसे चार स्तंभों को मोदी सरकार ने बीते नौ साल में मजबूत आधार प्रदान किया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को राजधानी में मोदी सरकार के 9 साल के कार्यकाल के पूरे होने पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कही। उन्होंने कहा कि पिछले 9 साल में बदली हुई परिस्थितियों को हम सब ने ना केवल महसूस किया है बल्कि हमने इस दौरान नये भारत का दर्शन भी किया है। आज का भारत चार महत्वपूर्ण स्तंभों पर खड़ा है।

मुख्यमंत्री ने पहले स्तंभ की चर्चा करते हुए कहा कि आज वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ा है। भारत को दुनियाभर मे सम्मान मिल रहा है। हाल ही में पीएम ने तीन देशों की यात्रा की है, उसका ²श्य हम सबके सामने है। पापुआ न्यू गिनी में पीएम मोदी का वहां के प्रधानमंत्री ने पैर छूकर अभिनंदन किया। प्रोटोकॉल तोड़ के देर सायंकाल स्वयं आगवानी की। यह पहली बार हुआ है जब किसी संप्रभु राष्ट्र ने अपने समकक्ष का अभिनंदन इस प्रकार किया हो। पापुआ न्यू गिनी और फिजी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा।

इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के पीएम के वक्तव्य को भी हम सबने सुना, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी को बॉस कहके संबोधित किया था। यही नहीं अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से पीएम मोदी का ऑटोग्राफ लेने की इच्छा व्यक्त करना, ना सिर्फ भारत बल्कि देश की 140 करोड़ जनता का सम्मान है। हर भारतवासी इसपर गर्व करता है। आज दुनिया में भारत की विरासत को सम्मान मिला है। हर साल 21 जून को पूरी दुनिया योग से जुड़कर भारत की विरासत का सम्मान कर रही है।

 
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आंधी के साथ तेज बारिश, महाकाल लोक की कई मूर्तियां गिरी

उज्जैन (छत्तीसगढ़ दर्पण)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में ‘श्रीमहाकाल लोक’ गलियारे की छह मूर्तियां रविवार दोपहर आयी तेज आंधी के चलते गिरकर क्षतिग्रस्त हो गईं। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।

उन्होंने बताया कि जब मूर्तियां गिरीं तो यह गलियारा श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था, लेकिन कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ।

उन्होंने स्वीकार किया कि मूर्तियों और गलियारे के काम में गुजरात की कंपनियों को लगाया गया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ महीने पहले 900 मीटर लंबे "श्री महाकाल लोक" गलियारे के पहले चरण का लोकार्पण किया था। कुल 856 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण में ‘श्री महाकाल लोक’ को 351 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन में स्थित है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

उज्जैन के जिलाधिकारी कुमार पुरुषोत्तम ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘श्री महाकाल लोक गलियारे में 160 मूर्तियां हैं, जिनमें से आज दोपहर आयी तेज आंधी से छह मूर्तियां गिरकर टूट गईं। ये टूटी मूर्तियां वहां स्थापित किये गये सात सप्त ऋषियों में से हैं और करीब 10 फीट ऊंची थी। ठेकेदार नयी मूर्तियां लगाएंगे, क्योंकि पांच साल तक की देखरेख का जिम्मा भी उनका ही है। हम आगे के लिए भी नियम और सख्त कर रहे हैं और उनकी जवाबदारी तय करने वाले हैं।’’
पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया, ‘‘ये गिरकर टूटी हुई मूर्तियां महाकाल मंदिर के अंदर नहीं थीं। वे ‘श्री महाकाल लोक’ गलियारे में थीं।’’

उन्होंने कहा कि गलियारे को आंधी-तूफान आने के बाद करीब शाम चार बजे लोगों के लिए बंद कर दिया गया था। उनके अनुसार इसे शाम सात बजे फिर से आम जनता के लिए खोला गया और इस दौरान करीब एक लाख लोग वहां उमड़ पड़े।

उन्होंने कहा कि आज की तेज आंधी से उज्जैन जिले में दो लोगों की मौत भी हुई है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, जिले में तूफान से कुछ घर भी गिरने की सूचना मिली है।इसी बीच, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने ट्वीट किया, ‘‘मध्य प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जब उज्जैन में महाकाल मंदिर परिसर का भव्य निर्माण करने का संकल्प लिया था तब इस बात की कल्पना नहीं की थी कि बाद की (भाजपा नीत) सरकार महाकाल लोक के निर्माण में भी गंभीर अनियमितता करेगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज जिस तरह से महाकाल लोक परिसर (गलियारा) में आंधी चलने से देव प्रतिमाएं जमीन पर गिर गईं, वह दृश्य किसी भी धार्मिक व्यक्ति के लिए अत्यंत करुण दृश्य है। मैं मुख्यमंत्री से मांग करता हूं कि महाकाल लोक में जो प्रतिमाएं गिरी हैं, वहां नई प्रतिमाएं तुरंत स्थापित की जाएं और घटिया निर्माण करने वालों को जांच कर दंडित किया जाए।’

कांग्रेस नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरूण यादव ने ट्वीट किया, ‘‘उज्जैन महाकुंभ में करोड़ों रुपये का घोटाला करने वाली भाजपा सरकार के 50 फीसदी कमीशन के चक्कर में महाकाल लोक गलियारा में लगायी गयीं करोड़ों रुपये की मूर्तियां मानसून से पहले हुई आंधी-बारिश में ही धराशायी हो गई एवं महाकाल लोक की आधी से ज्यादा कुर्सियां टूट गई हैं।’’

ट्वीट करने के बाद यादव ने फोन पर पीटीआई-भाषा से कहा कि भाजपा सरकार भगवान को भी नहीं बख्श रही है और आज महाकाल मंदिर में विकास से भ्रष्टाचार की बू आ रही है।

स्थानीय मौसम की स्थिति के बारे में फोन पर बात करते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल केंद्र के ड्यूटी अधिकारी जे पी विश्वकर्मा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि रविवार के पूर्वानुमान में कहा गया है कि उज्जैन में अलग-अलग स्थानों पर दिन के दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी।

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘उज्जैन में हवा की गति को मापने के लिए उज्जैन में हमारे पास एक स्वचालित मौसम स्टेशन नहीं है। हम इसकी मांग करेंगे।’

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सुनील छेत्री भी प्रदर्शनकारी पहलवानों पर कार्रवाई के ख़िलाफ़ आए सामने

दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)ओलंपियन नीरज चोपड़ा के बाद अब भारत के फुटबॉल खिलाड़ी सुनील छेत्री भी प्रदर्शनकारी पहलवानों पर कार्रवाई के ख़िलाफ़ सामने आए हैं। सुनील छेत्री ने एक ट्वीट में लिखा है कि पहलवानों को घसीटने की क्या ज़रूरत है।


उन्होंने लिखा, "बिना सोचे-समझे हमारे पहलवानों को इस तरह घसीटे जाने की क्या ज़रूरत है? किसी के साथ बर्ताव करने का ये सही तरीका नहीं है. मुझे उम्मीद है कि इस पूरी स्थिति का आकलन उसी तरह किया जाएगा, जैसा होना चाहिए। "

इससे पहले रविवार को नीरज चोपड़ा ने भी प्रदर्शनकारी पहलवानों पर कार्रवाई का वीडियो ट्वीट करते हुए साथ में लिखा था, "यह देख कर मुझे दुख हो रहा है. इस हालात से निपटने का दूसरा तरीका भी हो सकता था। "

दिल्ली पुलिस ने विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया को रविवार को सुरक्षा घेरा तोड़कर महिला ‘महापंचायत’ के लिए नए संसद भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करने के बाद कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर हिरासत में लिया था।

देर रात पुलिस ने साक्षी मलिक, विनेश फोगाट और संगीता फोगाट को छोड़ दिया था लेकिन कुछ पहलवान अभी भी हिरासत में हैं।

देश के शीर्ष पहलवानों ने 23 अप्रैल को भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ़्तार करने की मांग को लेकर अपना आंदोलन फिर से शुरू किया था। प्रदर्शनकारी पहलवानों ने बृजभूषण पर एक नाबालिग सहित कई महिला पहलवानों के यौन शोषण का आरोप लगाया है।

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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्रियों का नहीं आना दुर्भाग्यपूर्ण और गैर जिम्मेदाराना : रविशंकर प्रसाद

नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण) भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी मुख्यमंत्रियों के नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं होने की आलोचना करते हुए इन मुख्यमंत्रियों के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण और गैर जिम्मेदाराना बताया है।

भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना , बिहार, दिल्ली , पंजाब और राजस्थान के मुख्यमंत्री सहित आठ मुख्यमंत्री नीति आयोग की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं होकर अपने ही प्रदेश की जनता का अहित क्यों कर रहे हैं? यह सब बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और गैर जिम्मेदाराना है। हालांकि राजस्थान के सीएम गहलोत के नहीं आने को लेकर उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें यह बताया गया कि अशोक गहलोत स्वास्थ्य कारणों से नहीं आये हैं हालांकि सच तो वही बताएंगे।

प्रसाद ने कहा कि नीति आयोग देश के विकास और योजनाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस बैठक के लिए 100 मुद्दे तय किए गए हैं, अब जो मुख्यमंत्री नहीं आए हैं वो अपने प्रदेश की जनता की आवाज यहां तक नहीं ला रहे हैं। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में आखिर ये दल कहां तक जाएंगे ? उन्होंने आगे कहा कि गवनिर्ंग काउन्सिल में महत्वपूर्ण चर्चा होती है, महत्वपूर्ण फैसले होते हैं और उसके बाद ये फैसले जमीन पर लागू होते हैं। लेकिन बावजूद इसके भी ये मुख्यमंत्री क्यों नहीं आ रहे? आखिर ये मुख्यमंत्री अपने प्रदेश की जनता का अहित क्यों कर रहे हैं?

प्रसाद ने कहा कि ये विपक्षी दल भाजपा सरकार पर यह आरोप लगाते हैं कि हमारी सरकार संस्थाओं का सम्मान नहीं करती है जबकि वास्तविकता यह है कि इनमें से कई दल पहले कैग, चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक पर सवाल उठा चुके हैं, खुलेआम आलोचना कर चुके हैं।

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मुख्यमंत्री ने अपने पास रखा वित्त विभाग, जानें किस मंत्री को क्या मिला...

बेंगलुरु (छत्तीसगढ़ दर्पण) कर्नाटक में मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद मंत्रियों का पोर्टफोलियो तय हो गया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के पास वित्त विभाग रहेगा। वहीं, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के पास प्रमुख और मध्यम सिंचाई और बेंगलुरु शहर का विकास विभाग रहेगा। इसके साथ ही कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल को बनाया गया है।


वहीं, कर्नाटक के नए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री दिनेश गुंडू राव होंगे और कृष्णा बेयरे गौड़ा को राजस्व मंत्री (मुजरई को छोड़कर) बनाया गया है। बता दें कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने 24 मंत्रियों के लिए नामों को अंतिम रूप देते हुए कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया पूरी कर ली।

सीएम सिद्धारमैया ने अपने पास वित्त, सामान्य प्रशासन और इंटेलीजेंस विभाग रखा है। वहीं, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार सिंचाई और बेंगलुरु सिटी डेवलपमेंट विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। जी. परमेश्वर को गृह विभाग दिया गया है।

कर्नाटक में सीएम पद के लिए पांच दिन की जद्दोजहद के बाद सीएम के नाम तय हुआ था। इसके बाद सीएम और डिप्टी सीएम के साथ आठ विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 27 मई को राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 24 और विधायकों ने मंत्री पद की शपथ दिलाई। इसके बाद विभागों का बंटवारा किया गया है। मंत्रियों के विभाग के बंटवारे की जो लिस्ट आई है, उसके मुताबिक सीएम सिद्धारमैया ने अपने पास कैबिनेट मामले, इंटेलीजेंस, पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म और सूचना विभाग रखा है। एसएच के पाटिल को लॉ एंड पार्लियामेंट अफेयर्स, केए मुनियप्पा को फूड एंड सिविल सप्लाई और कन्ज्यूमर अफेयर दिया गया है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खरगे को ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग दिया गया है। अब सिद्धारमैया कैबिनेट में 34 मंत्री हो गए है। इनमें जी.परमेश्वर, के.एच. मुनियप्पा, के.जे. जॉर्ज, एम.बी. पाटिल, सतीश जारकीहोली, प्रियंका खड़गे, रामालिमगा रेड्डी और बी.जेड. जमीर अहमद खान, दिनेश गुंडू राव, कृष्णा बायरे गौड़ा, ईश्वर खंड्रे, रहीम खान, संतोष लाड, के एन राजन्ना, के वेंकटेश, एचसी महादेवप्पा, बैराथी सुरेश, शिवराज तंगड़ी, आरबी तिम्मपुर, बी नागेंद्र, लक्ष्मी हेब्बलकर, मधु बंगारप्पा, डी सुधाकर, चेलुवारया स्वामी, मंकुल वैद्य और एमसी सुधाकर शामिल हैं।

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