छत्तीसगढ़

वायु, जल और कचरे से होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम करने पर जोर

 जिला पर्यावरण योजना के क्रियान्वयन हेतु हुआ सम्मेलन का आयोजन

सूरजपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा संशोधित आदेश के परिपालन में जिला पर्यावरणीय योजना के संबंध में आज जिला पंचायत सभाकक्ष में कलेक्टर इफ्फत आरा के अध्यक्षता में जिला पर्यावरणीय योजना के उन्नयन हेतु सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिला पर्यावरणीय योजना के संशोधित एवं अद्यतन क्रियान्वयन  के संबंध में आयोजित सम्मेलन में विषयवस्तु पर श्री पीके रबड़े क्षेत्रीय अधिकारी छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल अंबिकापुर सरगुजा द्वारा दी गई एवं जिला पर्यावरणीय योजना में समावेशी जानकारियों के अतिरिक्त संशोधित एवं अद्यतन जानकारी सम्मेलन में उपस्थित विभागीय अधिकारियों के द्वारा विभाग वार जानकारी दी गई। जिसमें प्रमुखता से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषित नदी,प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्र, जल स्रोत का संरक्षण, ई कचरा का प्रबंधन, अवैध रेत खनन, प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग्स के संबंध में, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों एवं गतिविधियों का विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण दी।

       कलेक्टर सुश्री आर ने जिले की नगरीय क्षेत्रों के लिए तैयार की गई जिला पर्यावरणीय योजना की जानकारी ली तथा अमानक पॉलीथिन बेचने वालो एवं निर्माताओं पर समझाइश देकर कार्रवाई  करने के निर्देश दिए। रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे खतरनाक उद्योगों को शहर से बाहर शिफ्ट कराए। अवैध रूप से रिहायशी क्षेत्र में संग्रहित विस्फोटक सामग्री, डीजल एवं पेट्रोल की सतत निगरानी रखे। उन्होंने वायु, जल और कचरे से होने वाले प्रदूषण को न्यूनतम स्तर पर लाने की कवायद तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिक से अधिक पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जन जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने जल स्रोतों के संरक्षण के संबंध में जानकारी ली तथा नदियों एवं नालों के पानी जहां प्रदूषित हो रहे हैं पानी पीने लायक नहीं है वहां भ्रमण कर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यावरण के संरक्षण के संबंध में विभागीय अधिकारियों को समन्वय कर गंभीरता से कार्य करने निर्देशित किया जिससे आने वाले पीढ़ी सुरक्षित रहे इसके लिए बेहतर कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने नगरीय क्षेत्रो में ठोस अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन करें। ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभिन्ना सार्वजनिक स्थलों एवं अन्य ऐसे स्थल जहां ध्वनि विस्तारक यंत्रो का प्रयोग हो रहा है की ध्वनि प्रवलता जांचे।

जल प्रदाय की जांच करवाएं

एनजीटी के आदेश का पालन कराने के लिए निर्धारित समय अवधि तय कर ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर पाबंदी लगाए। शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाए। नगरीय निकाय जल प्रदाय की गुणवत्ता में सुधार लाए। किए जा रहे जल प्रदाय की प्रतिदिन जांच भी करवाए। विभिन्न स्थलों पर डस्टबिन रखवाएं एवं दुकानदारों को भी अपने दुकान के आगे डस्टबिन रखने के लिए निर्देशित करें। खनिज अधिकारी ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में चल रहे स्टोन क्रेशर पर भी वायु प्रदूषण रोकने के उपाय लागू कराए। बैठक में अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के लिए भी कहा गया। उन्होंने मेडिकल वेस्ट, वायु प्रदूषण, नहरों व नदी में बहने वाले गंदे पानी, भूजल, मिट्टी, इलेक्ट्रानिक उपकरणों के वेस्ट और कचरा प्रबंधन, अंधाधुंध जल दोहन और पेड़ कटान आदि बिंदुओं को ध्यान में रखकर शून्य प्रदूषण की स्थिति की योजना तैयार करने निर्देशित किया।  

       सम्मेलन में डीएफओ श्री संजय यादव, जिला पंचायत सीईओ सुश्री लीना कोसम, एसडीओपी श्री प्रकाश सोनी, सीएमएचओ डॉ आर एस सिंह, पीएचई विभाग के अधिकारी श्री समर सिंह, जल संसाधन विभाग के अधिकारी श्री ध्रुव, उद्योग विभाग श्री जय सिंह राज, डीईओ श्री वीके राय, श्री पीके रबडे, श्री आरके सिंह कनिष्ठ वैज्ञानिक, एचके तिवारी, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के समन्वयक श्री दीपक साहू, संजय सिंह, नगर पालिका पालिका, नगर पंचायत के अधिकारी सहित पर्यावरण विभाग की कर्मचारी उपस्थित थे।

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