महंगाई की मार से रावण परेशान
रायपुर (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जनजागरूकता देशभर में विजयदशमी के दिन रावण, कुभकर्ण और मेघनाथ के पुतले जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस बार भी राजधानी में 5 अक्टूबर को विजयदशमी का महोत्सव मनाया जाएगा। इसमें रायपुर के बी टी आई मैदान, रावणभाठा भाठागांव मैदान, डब्लू आर एस कालोनी, बीरगांव, अमलीडीह, राजेन्द्र नगर सहित 100 से अधिक स्थानोें में पुतला दहन की तैयारी की गई।
वहीं रायपुर के बांसटाल व आसपास के इलाके बढईपारा, स्टेशन रोड में पुतले बनाने के काम में कारीगर जुटे हुए है, लेकिन वे पुतला बनाने के काम में आनेवाली सामाग्री की उंची कीमतों से परेशान है। इसीलिए इन पुतलों के दाम में 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी है और 32 फीट के रावण के पुतले को बिक्री के लिए कीमत 28 हजार रुपए रखी है। वही मेघनाथ और कुभकर्ण के पुतलों की कीमत 22 हजार रूप्ए तय की है। जबकि सबसे कम उंचाई वाले 5 फीट के पुतले की कीमत 5 हजार और 10 फीट के रावण की कीमत 7 हजार तय की है।
बता दे कि रायपुर का बांसटाल बरसों से रावण के पुतलों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां 100 वर्ष पहले बंसोड़ जाति के लोंगों ने बांस से पुतले बनाने का काम शुरू किया था। इसमें बांसटाल में रहने वाले ओमप्रकाश मरकाम के दादा रामप्रकाश मरकाम ने परंपरा शुरू की। इसीलिए उनका नाम रावण वाला बाबा पड़ गया। अब उनके वंश के लोग पंरपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। पिछले 10साल से रावण का पुतला बनाने वाले ओमप्रकाश मरकाम बताते है कि इस बार 5 नग पुतले रावण के तैयार किए है जिसमें 20 फीट के रावण के पुतले की कीमत 10 हजार और 25 फीट के पुतले की कीमत 12हजार है। उनका कहना था कि ग्राहक की मांग पर कीमत कम ज्यादा करते हेै। इसमें कीमत में 500 और 1000 का अंतर आ पाता है। उन्होने बताया कि 10 साल पहले यही पुतले 1000 से 3000 रूप्ए में बिक्री करते थे इस बार अधिक कीमत पर कारीगर का कहना था कि इसमें लगने वाली सामाग्री बांस, कागज कलर कपड़ा पैरा रंगीन पेपर इत्यादि सभी की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना था कि पुतले के लिए प्रमुख बंास पहले 70 रूप्ए नग और अब 270 रूपए नग मिल रहा है। वही लगने वाला पेंट पहले 100 से 120 रूप्ए डिब्बा और अब 360 रूप्ए डिब्बा में मिल रहा है इसीतरह से सभी वस्तुए मंहगी हुई है । इस कारण दाम बढ़ाने पड़ रहे है।
कारीगर विक्रम नेताम ने जनजागरूकता को बताया कि उन्होने 32 फीट के रावण का पुतला तैयार किया है जिसकी कीमत 28हजार रूप्ए,और मेघनाथ व कुभकर्ण 22 हजार रूप्ए तय की है उनका कहना था कि एक पुतले को तैयार करने में 10 से 15 दिन और 5 से 6 कारीगर लगते है। जिन्हे मेहनत के अनुसार पेंमेट करते है क्योंकि बांस का ढंाचा तैयार करना महत्वपूर्ण नहीं है उसमें कपड़े सिलने और पेंट से सजावट के लिए कारीगर लगते है आमतोैर पर कपड़ा सिलने का काम महिलाएं व लड़कियां करती है। वे बताते है कि यह सीजन का काम है, मुख्य काम बांस से बने उत्पाद टोकरी व अन्य तैयार करना है जिस पर परिवार की आजीविका निर्भर करती है। उनके अनुसार एक सीजन 1 लाख रूप्ए तक व्यापार हो जाता है कीमत पर इस कारीगर ने भी माना कि तारपीन तेल, थिनर,पेंट बांस कपड़ा पेपर, रंगीन पेपर के महंगे होने के कारण कीमत अधिक है इससे पहले कोरोना के 2 साल काफी कम पुतले बनाए थे, क्योंकि ग्राहकी नहीं थी इस बार उम्मीद है ।इसीलिए 6 से 7 नग पुतले तैयार किए है, जिसमें 3 तो आर्डर पर बनाए है शाम तक सभी पुतले की बिक्री हो जाएगी।
राजनीतिक काम आया पुतला
कारीगर अमन बताते है कि शहर में सालभर धरना प्रदर्षन चलते रहते है इसलिए राजनेताओं के पुतले बनते रहते है जो 300 में बनाकर देते है और सभी राजनेताओं के बनाकर देते है। इससे उनका रोजगार बने रहता है। इसके अलावा ताजिया मंदिर के गुमंद 5फीट तक के 1000 रूप्ए में बनाकर देते हेै विजयदशमी में इस बार 25फीट रावण 12हजार, 9फीट का 9हजार,और 10फीट का रावण 10 हजार रूप्ए में तैयार किया है।
उम्मीद इस वर्ष 100 से अधिक पुतले जलेंगे
पिछले साल कोरोना की वजह से पुतले कम संख्या में जलाए गए थे इस बार कोरोना गाइड लाइन में छुट मिलने के कारण ज्यादा संख्या में पुतले जलाएं जाएंगे ऐसे में अच्छी ब्रिकी की उम्मीद है और 100 पुतले जलाएं जा सकते है। कारीगर वरूण मरकाम बताते है कि मुख्य व्यवसाय चिकनकाड़ी का है लेकिन सीजन में पुतले बनाते हेै।
राशन कार्ड में नहीं मिल बांस
महिला कारीगर खेमीन मरकाम बताती है कि वन विभाग से साल में राशनकार्ड में 1500 बांस दिए जाते थे और हर माह 100 बांस। जो बंद कर दिया गया है 700 से 800 रूप्ए में मिल जाता था लेकिन ठेकेदारी के कारण बांस देना बंद कर दिया अब बांस ठेकेदार से खरीदी करने पड़ते है। जो 350 रूप्ए नग की दर से देते है 6 से 7 हजार रूप्ए में पड़ते है उनका कहना है कि सरकार कार्ड नहीं दे सकती रदद कर दे पेंशन दे उन्होनें बताया कि हर साल कार्ड के नवीनीकरण के लिए 100 रूप्ए लिए जाते है जबकि सरकार ने 20 दर तय किया है।

