छत्तीसगढ़

मंत्री लखमा ने रानी दुर्गावती, वीर गैंद सिंह व गुंडाधुर की प्रतिमाओं का अनावरण किया

कांकेर (छत्तीसगढ़ दर्पण)अंतागढ़ स्थित मद्रासी पारा आमाबेड़ा चौक पर गुरुवार को उद्योग व आबकारी मंत्री कवासी लखमा के मुख्य आतिथ्य एवं अंतागढ़ विधायक अनूप नाग की अध्यक्षता में वीरांगना रानी दुर्गावती, शहीद वीर गैंद सिंह एवं शहीद गुंडाधुर की मूर्ति का अनावरण किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंत्री कवासी लखमा, अध्यक्षता कर रहे विधायक अनूप नाग और विशिष्ठ अतिथि कांति नाग समेत अन्य अतिथियों ने वीरांगना रानी दुर्गावती, शहीद वीर गैंद सिंह एवं शहीद गुंडाधुर को याद करते हुए उनके अमर कहानी पर प्रकाश डाला।

मंत्री लखमा ने इस दौरान कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती सरीखे महान देशभक्तों का स्मरण करते ही जीवन में रोमांच भर जाता है। रानी दुर्गावती के रास्ते पर चलकर जीवन में देश की मिट्टी के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने का जज्बा लेकर कार्य करने का प्रण हम सभी लोगों को अवश्य लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती न सिर्फ आदिवासी समाज का बल्कि पूरे राष्ट्र का गौरव है। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगां में देश की मिट्टी के प्रति प्रेम एवं समर्पण के भाव के साथ जीवन में अपने कर्तव्यों का सहज निर्वहन करने के कार्यों की जमकर सराहना भी की।

विधायक अनूप नाग ने छत्तीसगढ़ में आजादी का बिगुल फूंकने वाले अमर शहीद गैंद सिंह को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सन् 1857 में हुए देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से काफी पहले ही अंग्रेजों की गुलामी और शोषण के विरूद्ध आवाज उठाई थी। बस्तर के अबूझमाड़िया भाई-बहनों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेतृत्वकर्ता जमींदार गैंदसिंह को 20 जनवरी सन् 1825 को परलकोट के महल के सामने फांसी दी गई थी। विधायक ने कहा कि बस्तर के अबूझमाड़ में क्रांति की मशाल जलाने वाले शहीद गैंदसिंह को हमेशा गर्व और सम्मान के साथ याद किया जाता है। ऐसे वीर सपूत को छत्तीसगढ़ और पूरा देश नमन करता है, उनका बलिदान युगों तक याद किया जाएगा।

मूर्ति अनावरण कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि राज्य योजना आयोग की सदस्य कांति नाग ने भी तीनों शहीदों को नमन किया और उनकी अमर कहानी को लोगों के संग साझा किए। उन्होंने शहीद गुंडाधूर को याद करते हुए कहा कि एक छोटे से गांव में पले-बढ़े गुंडाधुर ने अंग्रेजों को इस कदर परेशान किया था कि कुछ समय के लिए अंग्रेजों को गुफाओं में छिपना पड़ा था। अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाला ये क्रांतिकारी हमेशा बस्तर के लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। देश के लिए अपना सब-कुछ न्यौछावर करने वाले वीर सपूतों के साथ ही कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिन्होंने आजादी के सफर में अपना एक अलग योगदान दिया है, जिन्हें इतिहास कभी भुला नहीं सकता, ऐसे ही वीर क्रांतिकारी “शहीद गुंडाधुर” है। मंत्री लखमा और विधायक नाग ने इसके पश्चात कहा की ऐसे वीर एवं वीरांगना की मूर्ति इस चौक में स्थापित होने से आज से इस चौक की शोभा और भी बढ़ गई है। ऐसे महान विभूतियों का एक ही स्थान पर मूर्ति स्थापित होना चौक की गरिमा के लिए गर्व की बात है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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