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बड़ी खबर : राज्यपाल की कार्रवाई पर रोक लगाने मुख्यमंत्री पहुंचे हाईकोर्ट

 रांची (छत्तीसगढ़ दर्पण)। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में अवैध खनन से संबंधित चुनाव आयोग के पत्र के आधार पर राज्यपाल की कार्रवाई पर रोक लगाने का भी आग्रह किया गया है। याचिका में दूसरी राय लेने की प्रक्रिया को भी असंवैधानिक बताया गया है।

इससे पहले 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत दी थी। शीर्ष अदालत ने शेल कंपनियों में निवेश और खनन पट्टे में अनियमितता को लेकर सोरेन के खिलाफ दाखिल की गईं जनहित याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर दिया था। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें उसने इन याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना था।

सीएम हेमंत सोरेन के खिलाफ गलत तरीके से खनन लीज पट्टा आवंटन करने और उनके करीबियों द्वारा शेल कंपनियों में निवेश का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका की वैधता को झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, झारखंड उच्च न्यायालय ने इस याचिकाओं को सुनवाई योग्य माना था। इसके बाद सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।  

वहीं, रविवार 6 नवंबर को सीएम सोरेन कहा कि उन्होंने लाभ के पद के मामले में दूसरी राय को लेकर राज्यपाल रमेश बैस के अनुरोध की प्रति निर्वाचन आयोग से मांगी थी। सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने सोमवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कहा कि राज्य के राज्यपाल रमेश बैस ने अपनी अयोग्यता के मुद्दे पर उनसे दूसरी राय नहीं मांगी है।

इससे पहले 27 अक्टूबर को बैस ने कहा था कि उन्होंने मामले में दूसरी राय मांगी है। उन्होंने दावा किया था कि झारखंड में किसी भी समय परमाणु बम विस्फोट हो सकता है। उन्होंने मामले में लंबित अपने निर्णय की ओर इशारा करते हुए यह बात कही थी। सीएम सोरेन ने कहा कि मैंने लाभ के पद के मामले में अपने वकील के माध्यम से राज्यपाल रमेश बैस के ‘दूसरी राय’ के अनुरोध की एक प्रति निर्वाचन आयोग से मांगी है। साथ ही कहा कि वकील ने मेरी ओर से कहा है कि निर्वाचन आयोग राज्यपाल द्वारा किए गए दूसरे अनुरोध के आधारी पर कोई राय देने से पहले निष्पक्ष और प्रभावी सुनवाई का अवसर प्रदान करेगा।

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