हिंदुस्तान

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर मंथन कराएगी फिल्म हाउ टू ब्लो अप ए पाइपलाइन

 पणजी (छत्तीसगढ़ दर्पण)। जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कोई जादुई गोली या तत्काल उपाय नहीं है। सही दिशा में सटीक चर्चा और पहल ही इसका समाधान है। फिल्म के निर्देशक डैनियल गोल्डहेबर ने कहा कि 'हाउ टू ब्लो अप ए पाइपलाइन' के जरिए हम इस ज्वलंत मुद्दे पर सार्थक चर्चा शुरू करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। गोवा में चल रहे 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान आयोजित 'टेबल टॉक' सत्र में मीडिया और महोत्सव के प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान डैनियल गोल्डहेबर ने जोर देकर कहा कि इस फिल्म का मकसद न तो पर्यावरण संबंधी अतिवाद के समर्थन का है न ही उसकी तलाश का।

उन्होंने आगे कहा, हम यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्यों कुछ लोगों को पर्यावरणीय अतिवाद में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह इस तरह के अतिवादी कृत्यों के नतीजों के बारे में भी स्पष्ट नजरिया रखने की कोशिश करती है। 53वें इफ्फी में फिल्म का एशियाई प्रीमियर हुआ। इस बात को दृढ़ता के साथ रखते हुए कि जलवायु परिवर्तन और इसका सामना करने की रणनीति पर बातचीत बहुत सीमित है। 

 

डैनियल ने कहा, इस तरह की बातचीत मुख्य रूप से उन कॉरपोरेशन और देश के नेतृत्व में होती है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से मुनाफा कमाते हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु का मसला एक महासागर की तरह है जिसकी हमने सच में पड़ताल नहीं है। डैनियल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के परिणाम उन देशों को फौरन महूसस नहीं होते हैं जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, बल्कि ग्रह के किसी दूसरे स्थान पर पता चलते हैं। उन्होंने कहा, इससे निपटने की हम पर एक बड़ी जिम्मेदारी है।

 

 

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