संविधान का प्राणतत्व है उद्देशिका : प्रो. रजनीश शुक्ल
वर्धा (छत्तीसगढ़ दर्पण)। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में संविधान दिवस (26 नवंबर) के अवसर पर संविधान की उद्देशिका का वाचन किया गया। इस अवसर पर उपस्थितों को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि संविधान की उद्देशिका संविधान की आत्मा और प्राणतत्व है। इसे बार-बार पढ़ना अपने में पर्याप्त है। ये उद्देशिका उन विशिष्ट लक्ष्यों का विधान है जिसको लेकर आजाद भारत एक संविधान के अंतर्गत आगे चलने वाला था। इसे पढेंगे तो हमें ध्यान में आयेगा कि हम उस लक्ष्य की पूर्ति में अपना योगदान कहां तक कर सके हैं जिसे हमने आत्मार्पण और आत्मसात किया था और इसके द्वारा भारत को चलाने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी का सम्यक विचार कर सबकी समता, स्वतंत्रता और अस्मिता का संरक्षण किस प्रकार से स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में होगा, इसकी व्यवस्था बनी थी। उन्होंने संविधान निर्माताओं को याद करते हुए बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, अय्यंगर, राजगोपालाचारी और सच्चिदानंद सिन्हा के योगदान को रेखांकित किया।
विश्वविद्यालय के वाचस्पति भवन के दीक्षांत प्रांगण में संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन किया गया। इसके पूर्व विश्वविद्यालय में स्थापित बोधिसत्व बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर कुलपति प्रो. शुक्ल ने माल्यार्पण कर अभिवादन किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के अधिष्ठातागण, कुलसचिव, वित्ताधिकारी, विभागाध्यक्ष, केंद्र निदेशक, अध्यापक, अधिकारी, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

