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उच्‍चतम न्‍यायालय से राष्‍ट्रीय न्‍यायिक नियुक्ति आयोग का निरस्‍त होना संसदीय सम्‍प्रभुता का गम्‍भीर उल्‍लंघन : धनखड

 नई दिल्ली (छत्तीसगढ़ दर्पण)। राज्‍यसभा के सभापति जगदीप धनखड ने कहा है कि वर्ष 2015 में उच्‍चतम न्‍यायालय से राष्‍ट्रीय न्‍यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम का निरस्‍त होना संसदीय सम्‍प्रभुता के साथ एक गंभीर समझौता और जनादेश का अपमान था। श्री धनखड ने कहा कि कार्यपालिका, न्‍यायपालिका और विधायिका का अपने दायरे में ही रह कर कार्य करना लोकतंत्र के हित में है। उन्‍होंने कहा कि जब ये तीनों अंग अपने दायरे में रहकर अपना काम करते हैं, तभी लोकतंत्र फलता-फूलता है। श्री धनखड ने कहा कि इन तीनों में से काई भी अंग अगर अपनी सीमा से इतर जाकर दूसरे के कार्यक्षेत्र में प्रवेश करता है तो इससे शासन में अव्‍यवस्‍था पैदा होती है। श्री धनखड़ कल से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में राज्यसभा के सभापति का पद ग्रहण करने के बाद राज्यसभा को संबोधित कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्‍वास व्‍यक्‍त किया है कि राज्‍यसभा के नए सभापति जगदीप धनखड के नेतृत्‍व में सदन नए कीर्तिमान स्‍थापित करेगा। राज्‍यसभा में शीतकालीन सत्र के पहले दिन उनका स्‍वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने सभापति का आसन संभालने पर श्री धनखड को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री धनखड का जीवन सभी के लिए प्रेरक है। उन्‍होंने कहा कि उप-राष्‍ट्रपति का संबंध किसान परिवार से है और उन्‍होंने एक सैनिक स्‍कूल से शिक्षा ली है।  उन्‍होंने कहा कि श्री धनखड में किसान और जवान दोनों के ही गुण हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्‍यसभा भारत की सबसे बडी शक्ति है क्‍योंकि देश के अनेक प्रधानमंत्री इसके सदस्‍य रहे हैं। उन्‍होंने उप-राष्‍ट्रपति को किसान-पुत्र बताते हुए कहा कि उन्‍हें कानूनी मामलों की भी काफी जानकारी है। श्री मोदी ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले ही विश्व ने भारत को जी-20 समूह की मेजबानी की जिम्मेदारी सौंपी है और यह अमृत काल का आरंभ भी है। उन्होंने कहा कि अमृत काल नये विकसित भारत के निर्माण का काल ही नहीं होगा बल्कि भारत इस अवधि में विश्व की भावी दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

 

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