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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भारतीय रेडक्रास सोसायटी के पदाधिकारियों ने की सौजन्य भेंट

विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ शाखा के चेयरमेन श्री तोमन साहू जी चेयरमेन एवं अन्य पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को रेडक्रॉस का बैज पहनाकर एवं  स्मृति चिन्ह भेंट कर विश्व रेडक्रॉस दिवस की शुभकामनाएं दीं।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों को इस अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मानवता की सेवा के साथ ही आपदा के समय में रेडक्रॉस संस्था की भूमिका सराहनीय है।

इस अवसर पर वाइस चेयरमेन श्री रुपेश पाणिग्रही,कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल,राज्य प्रबंध समिति सदस्य श्री प्रदीप साहू, संरक्षक सदस्य श्री दिनेश तापड़िया उपस्थित थे।
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कथित सुशासन की पोल खुल रही तो अधिकारियों को धमकाया जा रहा - दीपक बैज

 तथाकथित सुशासन असली पोल सुशासन त्यौहार में खुल रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मंत्री, विधायक, सांसद अब अधिकारियों को धमकाने, चमकाने पर उतर आये है। ढाई साल के सरकार जनता से दूर हो चुकी है। सुशासन त्यौहार के नाम पर जब जनता के बीच जा रहे तब जनाक्रोश को दबाने अधिकारियों पर दोषारोपण कर रहे है। मंत्री दयालदास बघेल मंच से शराब तस्करी के लिए पुलिस को दोषी ठहरा रहे है, तो विधायक रोहित साहू पटवारी को धमका रहे है, सांसद भोजराज नाग अधिकारी को निपटाने की धमकी दे रहे है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय छत्तीसगढ़ की 1 करोड़ महिलाओं से महतारी वंदन का फार्म भरवाये, 18 लाख पीएम आवास देने का फर्जी दावा किये, 1 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का झूठा वादा किये, अब उस वादाखिलाफी से ध्यान भटकाने सुशासन तिहार के नाम पर एक बार फिर आवेदन जमा किये जा रहे है, सरकार का फोकस समस्या के निराकरण में नहीं है। पेयजल व्यवस्था बदहाल है, बूंद-बूंद पानी के लिए जनता तरस रही है, मनरेगा के श्रमिक काम के इंतजार में खाली बैठे हैं, शिक्षकों की भर्ती रोक दी गई है, अस्पतालों में जांच, इलाज़, दवा का अभाव है और यह सरकार जन सरोकार से आंख मूंदकर सुशासन तिहार मना रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सुशासन का दंभ भरने वाली साय सरकार के राज में आम आदमी छोटे-छोटे काम के लिये सरकारी दफ्तरों का चक्कर काटने को मजबूर है। पटवारी कार्यालय से लेकर तहसील दफ्तरों में लोगों के नामांतरण, फौती, त्रुटि सुधार के लाखों आवेदन लंबित है, लोगों के काम नहीं हो रहे, आम आदमी सरकारी दफ्तर के चक्कर काटने को मजबूर है। बेहद दुर्भाग्यजनक है कि लाखों लोगों को सरकार के पास सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसे रोजमर्रा के कामों के लिये आवेदन देने सरकार के सुशासन तिहार का इंतजार करना पड़ता है। साय सरकार लोगों के मूलभूत काम को भी नहीं कर पा रही है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार किस बात का सुशासन त्यौहार मनाने जा रही? यदि सरकार में सुशासन होता तो लोगों का काम नियमित हो रहा होता तो त्यौहार मनाने की जरूरत क्यों पड़ती? यह सुशासन त्यौहार अपनी विफलता से ध्यान भटकाने का तरीका है। पिछले बार भी सुशासन त्यौहार मनाये थे और जनता से जो लाखों आवेदन प्राप्त हुए उसको कचरे के ढेर में फेंक दिए। इस बार के सुशासन त्यौहार के पहले, पिछले साल के आवेदनों के बारे में जनता को बताये उनका अभी तक निराकरण क्यों नहीं हुआ?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि ढाई साल के भीतर ही शांति का टापू कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ को भाजपा की सरकार ने अपराध गढ़ बना दिया है। हत्या, लूट, डकैती, बलात्कार, चाकूबाजी की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई हैं। अवैध शराब, मिलावटी शराब, नकली होलोग्राम, भू-माफिया और रेत माफियाओं के गुंडागर्दी की शिकायत है रोज उजागर हो रही है। सत्ता के संरक्षण में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। गर्मी के दिनों में जब कृषि मजदूर खाली हो जाते हैं उस दौरान मनरेगा के काम हर ग्राम पंचायत में खोले जाते रहे हैं, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद से मनरेगा के मजदूर काम के लिए तरस रहे हैं और यह सरकार आत्ममुग्धता में सुशासन तिहार मनाने का ढोंग कर रही है।
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बिजली सप्लाई को बेहतर बनाने नई तकनीकों का करें उपयोग-अधिकारी से लाइनमेन तक हों एआई तकनीक से लैस

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के अध्यक्ष श्री सुबोध कुमार सिंह ने डंगनिया स्थित मुख्यालय में जनरेशन, ट्रांसमिशन एवं डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बिजली हर व्यक्ति के जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है और उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना पावर कंपनीज़ की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।



            श्री सिंह ने अधिकारियों से कहा कि विद्युत व्यवस्था को आधुनिक, तेज एवं उपभोक्ता केंद्रित बनाने के लिये नवीन टेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने डाटा बेस्ड डिसिजन मेकिंग पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक एआई तकनीक का उपयोग कर विद्युत आपूर्ति, फॉल्ट मॉनिटरिंग, लोड प्रबंधन, उपभोक्ता शिकायत निवारण एवं सिस्टम मॉनिटरिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।


            श्री सिंह ने कहा कि पावर कंपनीज़ में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नई तकनीकों एवं आधुनिक कार्यप्रणाली से लैस किया जाना चाहिए, ताकि कार्य क्षमता, मॉनिटरिंग सिस्टम और उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार किया जा सके।
उन्होंने तीनों कंपनियों के अधिकारियों की अलग-अलग बैठक लेकर विभिन्न योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

 

            बैठक में नए भवन निर्माण कार्यों में तेजी लाने, लंबित परियोजनाओं को समय-सीमा में पूर्ण करने तथा उपभोक्ता सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने के निर्देश दिए गए।अध्यक्ष श्री सिंह ने टोल फ्री कॉल सेंटर नंबर 1912 को और अधिक दक्ष बनाने तथा शिकायतों के निराकरण के रिस्पांस टाइम में तेजी लाने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना पावर कंपनीज़ की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

 

            बैठक में जनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री एसके कटियार, ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री भीमसिंह कंवर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तत्परता से तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यारंभ करें - श्री अरुण साव

 उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज विभागीय मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर सड़कों एवं पुल-पुलियों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तत्परता से तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए। श्री साव ने बैठक में कहा कि सभी मुख्य अभियंता कार्यालय कॉर्पोरेट दफ्तरों की तरह पूरी क्षमता और दक्षता से काम करें। उन्होंने विभाग की कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए फील्ड से लेकर कार्यालय तक तेज गति और जवाबदेही से काम करने को कहा।


उप मुख्यमंत्री श्री साव ने परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग करने और इनके खराब होने पर संबंधित ठेकेदारों से त्वरित मरम्मत कराने को कहा, ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़कों की स्थिति खराब पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसी सड़कों का तत्काल ठेकेदारों से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता को भारत सरकार के साथ लगातार समन्वय कर स्वीकृतियों एवं कार्यों में तेजी लाने को कहा। 

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी मुख्य अभियंताओं को प्राथमिकता वाले कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने फील्ड पर निकलकर प्राथमिकता वाली सड़कों के कार्यों की प्रगति का हर सप्ताह निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए कलेक्टरों के साथ समन्वय कर भू-अर्जन की कार्यवाहियों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने ब्लैक-स्पॉट्स दूर करने के साथ ही सड़कों व पुलों के निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा के सभी मानकों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने निर्माण कार्यों और निर्माण सामग्रियों में गुणवत्ता पर जोर देते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों तक लंबित काम विभाग की छवि खराब करता है। इस तरह की स्थिति न बने। हर हाल में समय-सीमा में काम पूर्ण करने का प्रयास करें। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं के साथ ही सेतु संभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता भी बैठक में मौजूद थे।
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मुख्यमंत्री के निर्देश के तहत जिले के सुदूर व पहाड़ी कोरवा बसाहटों में 113 हैंडपंप व बोरवेल की होगी खुदाई

जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।


विगत दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे  पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों  में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल,  लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।

  कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि  हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर  दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित  करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री श्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।
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उप मुख्यमंत्री ने 2.06 करोड़ की लागत से घोटिया विद्युत उपकेंद्र का किया भूमिपूजन

कवर्धा शहर की बढ़ती विद्युत मांग को देखते हुए आज नवीन बस स्टैण्ड घोटिया में 33/11 केव्ही विद्युत उपकेन्द्र निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया गया। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री अधोसंरचना विकास योजना के अंतर्गत लगभग 2.06 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस विद्युत उपकेन्द्र की सौगात दी। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि यह केंद्र शहर की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी तथा आम उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। उपकेन्द्र के शुरू होने से मेडिकल कॉलेज, नवीन बस स्टैण्ड, कृषि महाविद्यालय, तुलसी नगर और राजदीप कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा, वहीं शहर के 8614 उपभोक्ताओं को बेहतर विद्युत सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

      उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कवर्धा शहर की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आज घोठिया स्थित नवीन बस स्टैण्ड के पास नए विद्युत उपकेंद्र का भूमिपूजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद मात्र ढाई वर्षों के भीतर जिले में विद्युत अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं और अब तक चार नए उपकेंद्रों का भूमिपूजन पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि दलदली, सेमो और सरेखा में पहले ही उपकेंद्रों का भूमिपूजन हो चुका है, जबकि जल्द ही दुबहा में भी नए उपकेंद्र का भूमिपूजन किया जाएगा।
        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि महज ढाई वर्षों में जिले में पांच सब स्टेशन स्थापित होने जा रहे हैं, जो विद्युत व्यवस्था को नई मजबूती देंगे। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में भी नए सब स्टेशन और ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाएंगे ताकि हर क्षेत्र तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाई जा सके। उन्होंने बताया कि ट्रांसफार्मर लगने से लो वोल्टेज और बार-बार बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं में बड़ी राहत मिलती है। ढाई साल में अब तक जिले में 486 नए ट्रांसफार्मर लगाए जा चुके हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी।
        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने बताया कि घोटिया उपकेंद्र में 5 एमव्हीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा। अभी तक कवर्धा शहर की पूरी विद्युत व्यवस्था दो पावर ट्रांसफार्मरों के भरोसे संचालित हो रही थी, लेकिन यह तीसरा पावर ट्रांसफार्मर शहर की करीब 40 प्रतिशत आबादी को कवर करेगा। इससे वोल्टेज की समस्या, लाइन फाल्ट और ओवरलोड जैसी परेशानियों से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस नए उपकेंद्र से कवर्धा शहर के 13 वार्डों में विद्युत सप्लाई की जाएगी। इससे मौजूदा दोनों ट्रांसफार्मरों पर लोड कम होगा और दूरस्थ बस्तियों तक भी पर्याप्त वोल्टेज के साथ बिजली पहुंच सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि नवंबर माह तक इस उपकेंद्र से विद्युत आपूर्ति प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्री चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य डाॅ. बीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष श्री सुषमा गणपत बघेल, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओं श्री अभिषेक अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामीण उपस्थित थे।

5 एमव्हीए ट्रांसफार्मर और तीन नए फीडर होंगे स्थापित
      नवीन उपकेन्द्र में 5 एमव्हीए क्षमता का पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही यहां से तीन नए 11 केव्ही फीडर मेडिकल कॉलेज फीडर, तुलसीनगर फीडर तथा राजदीप कॉलोनी फीडर निकाले जाएंगे। इन फीडरों के माध्यम से नव निर्मित मेडिकल कॉलेज, नवीन बस स्टैण्ड, कृषि महाविद्यालय, तुलसीनगर एवं राजदीप कॉलोनी क्षेत्र में बेहतर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

पुराने उपकेन्द्रों पर कम होगा भार
           विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस नए उपकेन्द्र के प्रारंभ होने के बाद लोहारा नाका स्थित उपकेन्द्र का भार यहां हस्तांतरित किया जाएगा। इससे दशरंगपुर, टाउन-1 तथा रामनगर फीडरों पर दबाव कम होगा। साथ ही 11 केव्ही फीडरों की लंबाई घटने से अंतिम छोर तक गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति संभव हो सकेगी।

8614 उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा लाभ
        इस नवनिर्मित उपकेन्द्र से कवर्धा शहर के लगभग 8614 उपभोक्ता सीधे लाभान्वित होंगे। बेहतर विद्युत व्यवस्था से आम नागरिकों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और तेजी से विकसित हो रहे नए क्षेत्रों को भी बड़ी सुविधा मिलेगी।

लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी राहत
           नए उपकेन्द्र के निर्माण से शहर के कई क्षेत्रों में लंबे समय से बनी लो वोल्टेज की समस्या से भी राहत मिलेगी। विद्युत विभाग के अधिकारी ने बताया कि कम दूरी से विद्युत आपूर्ति होने के कारण बिजली की गुणवत्ता में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सकेगी।
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“पीएम आवास सिर्फ मकान नहीं, परिवारों के सपने पूरे होने का प्रतीक”-उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा

 कबीरधाम जिले के ग्राम पंचायत बम्हनी में आयोजित सुशासन तिहार का समाधान शिविर गुरुवार को ग्रामीणों के लिए सीधे संवाद का मंच बन गया। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने यहां जमीन पर बैठकर लोगों की समस्याएं सुनीं। जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने आवेदन लेकर पहुंचे थे। उप मुख्यमंत्री ने सभी की बात ध्यान से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समाधान शिविर शासन, प्रशासन और आमजन के बीच का सेतु है। लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो यह प्रयास होना चाहिए।


         ग्राम पंचायत बम्हनी में 24 गांवों के क्लस्टर को शामिल करते हुए शिविर आयोजित किया गया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी परिवार के लिए पीएम आवास सिर्फ एक मकान नहीं होता, बल्कि वर्षों से देखे गए उस सपने का साकार रूप होता है, जहां परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की उम्मीद करता है। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में पीएम आवास की स्वीकृति का निर्णय इसी सोच और प्रतिबद्धता का हिस्सा था।
उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2024-25 में बम्हनी सेक्टर की 24 ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 8066 आवास स्वीकृत किए गए, जिनमें से 7069 आवास पूर्ण हो चुके हैं। वहीं वर्ष 2025-26 में 1822 परिवारों को आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 480 आवास पूर्ण हो चुके हैं।
            उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण, नाला सफाई, पुलिया निर्माण, आंगनबाड़ी भवन, पक्की नाली और डबरी निर्माण जैसे 163 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इन कार्यों की कुल राशि लगभग 4 करोड़ 92 लाख रुपये है। प्रधानमंत्री आवास योजना सहित विभिन्न कार्यों में लगे मजदूरों को अब तक 3 करोड़ 73 लाख रुपये का मजदूरी भुगतान किया गया है। उन्होंने स्व सहायता समूहों की महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बम्हनी सेक्टर के 456 स्व सहायता समूहों को 68 लाख 40 हजार रुपये की चक्रीय निधि तथा 312 समूहों को 1 करोड़ 87 लाख 20 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि प्रदान की गई है।
         कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ने प्रदेश में नक्सलवाद की समाप्ति के लिए किए प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश नक्सलवाद के दंश से लंबे समय तक पीड़ित रहा। लेकिन गृह मंत्री श्री अमित शाह के सशक्त नेतृत्व और ठोस निर्णयों के साथ 31 मार्च 2026 तक प्रदेश से सशस्त्र नक्सलवाद  समाप्ति की समय सीमा तय की गई। दृढ़ इच्छाशक्ति और रणनीति के तहत सशस्त्र नक्सलिज्म की समाप्ति में सफलता हासिल हुई है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहे हैं। अब तक योजना की 27 किश्तें जारी हो चुकी हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता का आधार दे रहा है
उन्होंने विकास कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों पर कार्रवाई की जाएगी। कार्यक्रम को जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू एवं जनपद अध्यक्ष श्रीमती सुषमा गणपत बघेल ने भी संबोधित किया।

हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभ

       समाधान शिविर के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया। उन्होंने 13 हितग्राहियों को पेंशन पत्र, 3 हितग्राहियों को आवास की चाबी, 25 हितग्राहियों को राशन कार्ड, 14 हितग्राहियों को जॉब कार्ड, 7 हितग्राहियों को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन प्रमाण पत्र, 10 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, 5 हितग्राहियों को आबादी पट्टा तथा किसानों को किसान पुस्तिका, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि ऋण चेक वितरित किए। इस दौरान कक्षा 12वीं में 92.2 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले छात्र खेमलाल गंधर्व को भी सम्मानित किया गया।

उप मुख्यमंत्री ने किया विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण
        जनसमस्या निवारण शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा जन जागरूकता हेतु विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्टाल लगाए गए। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इन स्टाल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य शासन की योजनाओं से आमजन को परिचित कराते हुए उन्हें लाभान्वित करना है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं से जुड़ी सभी अहम जानकारियां पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। उप मुख्यमंत्री ने शिविर में बच्चों का अन्न प्राशन भी कराया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू,  जिला पंचायत सदस्य डाॅ. बीरेन्द्र साहू, जनपद अध्यक्ष श्री सुषमा गणपत बघेल, कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा, जिला पंचायत सीईओं श्री अभिषेक अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, ग्रामीण उपस्थित थे।
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मोर गांव – मोर पानी महाअभियान से मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी बना जल संरक्षण का मॉडल जिला

राज्य शासन के “मोर गांव – मोर पानी” महाअभियान अंतर्गत मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले ने जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) तथा विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से जिले में जल संवर्धन, भू-जल स्तर सुधार और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्य किए गए हैं।  


जिले में बनीं 17 सौ से अधिक आजीविका डबरी

          “जल संरक्षण हमारी जिम्मेदारी” की थीम पर संचालित इस अभियान के तहत जिले में 1700 से अधिक आजीविका डबरी का निर्माण किया गया। प्रत्येक पंचायत में औसतन 9 डबरी विकसित कर जल संरक्षण को आजीविका संवर्धन से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया गया है। सामुदायिक सहभागिता और जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।

पीएम आवासों में बने 2541 सोखता गड्ढे, 87 तलाबों का नवीनीकरण  

       वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को प्रेरित कर 2541 सोख्ता गड्ढे  का निर्माण कराया गया। इसके अलावा श्रमदान एवं जनसहभागिता से 175 बोरी बंधान, 3600 कंटूर ट्रेंच तथा 87 तालाबों का नवीनीकरण कर जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत किया गया। अभियान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए जिले में रैली, कलश यात्रा, शपथ एवं दीपदान जैसे कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।  

जल स्तर में 2.19 मीटर की हुई वृद्धि

        जलदूत ऐप से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले में भू-जल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। प्री मानसून 2024 की तुलना में प्री मानसून 2025 में जल स्तर में 1.81 मीटर तथा पोस्ट मानसून 2024 की तुलना में पोस्ट मानसून 2025 में 2.19 मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। यह आंकड़े अभियान की प्रभावशीलता और जिले में किए गए जल संरक्षण कार्यों की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।  

जिले के तीन विकासखण्ड अब सेफ कैटेगरी में

         अभियान के सकारात्मक परिणामों के फलस्वरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 23 सितम्बर 2025 के अनुसार जिले के तीनों विकासखंड, जो पूर्व में सेमी-क्रिटिकल श्रेणी में शामिल थे, अब “सेफ ब्लॉक” की श्रेणी में वर्गीकृत किए गए हैं। यह उपलब्धि मोहला-मानपुर- अम्बागढ़ चौकी जिले में सामूहिक प्रयास, जनसहभागिता और प्रभावी जल प्रबंधन की एक प्रेरणादायी मिसाल बनकर उभरी है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अखबार में प्रकाशित पेयजल समस्या की खबर पर लिया त्वरित संज्ञान

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले के मैनपाट क्षेत्र की चेराजोबला बस्ती में पेयजल समस्या से संबंधित समाचार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज सुबह समाचार पत्रों का अवलोकन करते समय “नाला और ढोढ़ी के दूषित जल पर आज भी निर्भर हैं वनवासी” शीर्षक से प्रकाशित खबर को गंभीरता से लिया और सरगुजा कलेक्टर श्री अजीत वसंत को फोन कर प्रभावित बस्ती में शीघ्र पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चेराजोबला बस्ती में पेयजल संकट की स्थिति का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार हैंडपंप खनन, वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने यह भी कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के निवास वाले क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका वास्तविक लाभ ज़मीन पर सुनिश्चित करना है।
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कटहल–गुलमोहर की छांव में सजी चौपाल, मुख्यमंत्री ने सरोधी में सुनी जनता की आवाज

सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड छुईखदान के ग्राम सरोधी पहुंचे, जहां उन्हें अपने बीच पाकर ग्रामीणों में उत्साह, आत्मीयता और अपनत्व का अनोखा दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री के आगमन से गांव में खुशी की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण उन्हें देखने और उनसे मिलने उमड़ पड़े।


गांव की महिला स्वसहायता समूह की महिलाओं ने महुआ, चार, आम और रखियां बड़ी भेंटकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया, वहीं स्कूली बच्चों ने अपने हाथों से तैयार गुलमोहर और कनेर के फूलों के गुलदस्ते भेंट कर अपनी खुशी और सम्मान व्यक्त किया। यह स्वागत ग्रामीण संस्कृति और सादगी की जीवंत झलक बन गया।

ग्राम सरोधी के पूर्व माध्यमिक शाला परिसर में कटहल और गुलमोहर के पेड़ों की छांव तले मुख्यमंत्री ने खाट पर बैठकर चौपाल लगाई और ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। इस सहज और आत्मीय वातावरण में उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से हम आपके बीच आकर आपका हाल-चाल जानने, सुख-दुख सुनने और योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन को समझने आए हैं। यह अभियान 1 मई से 10 जून तक चलेगा, जिसमें सरकार स्वयं आपके द्वार तक पहुंचेगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रतीक है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शासन की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचे। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह समस्याओं का संकलन कर समाधान शिविरों के माध्यम से उनका निराकरण किया गया था और इस वर्ष भी उसी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उनकी सरकार को अभी महज 28 माह हुए हैं, लेकिन मोदी की गारंटी के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं, किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है और दो वर्षों का बकाया बोनस भी दिया गया है। 

उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा कर दी गई है, जिससे वनांचल क्षेत्र के लोगों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही श्री रामलला दर्शन योजना और तीर्थ यात्रा दर्शन योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने विशेष रूप से पेयजल समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनसमस्याओं का निराकरण प्राथमिकता के साथ और समयबद्ध तरीके से किया जाए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम सरोधी एवं आसपास के क्षेत्रों के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणा की। इनमें राशन पीडीएस दुकान की स्थापना, नवीन ग्राम पंचायत भवन, पूर्व माध्यमिक शाला के लिए नए भवन का निर्माण शामिल है। इसके साथ ही गंडई से बकरकट्टा मार्ग का चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण, तेन्दूभाठा से जोम ओटेबंध तक सड़क निर्माण, साल्हेवारा-पंडरापानी मार्ग पर मगुरदा नाला पर पुल निर्माण, पीएचसी बकरकट्टा में 108 एम्बुलेंस की तैनाती, बकरकट्टा से नवागांव सड़क का नवीनीकरण तथा क्षेत्र में 33 केवी सब स्टेशन की स्वीकृति दी गई। 

इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, विशेष सचिव श्री रजत बंसल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण उपस्थित थे।
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निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री को श्रमिकों ने दिया भोजन का न्यौता: साथ बैठकर खाया बोरे बासी और आमा चटनी

सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए। निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया।


निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया।

मुख्यमंत्री श्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।  

भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय  ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला।

जब मुख्यमंत्री ने गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
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वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों में सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सुरक्षा ऑडिट एवं सतत मॉनिटरिंग के दिए निर्देश

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई क्रूज हादसे की दुखद घटना के परिप्रेक्ष्य में छत्तीसगढ़ में संचालित सभी वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करते हुए सुरक्षा मानकों का सुदृढ़ता से पालन  करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि जन सुरक्षा के विषय में किसी भी प्रकार की शिथिलता अथवा लापरवाही पूर्णतः अस्वीकार्य होगी।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने धमतरी और कोरबा सहित अन्य सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देशित किया कि जिन स्थलों पर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां संचालित हो रही हैं, वहां सुरक्षा मानकों का तत्काल परीक्षण (सुरक्षा ऑडिट) सुनिश्चित किया जाए तथा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अक्षरशः पालन कराया जाए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि सभी संबंधित वाटर स्पोर्ट्स स्थलों पर उपयोग में लाए जा रहे उपकरणों का नियमित तकनीकी परीक्षण सुनिश्चित किया जाए, प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन की तैनाती की जाए, तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु समुचित आपातकालीन प्रबंधन तंत्र सक्रिय रखा जाए। इसके साथ ही रेस्क्यू उपकरणों, लाइफ जैकेट एवं अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता एवं कार्यशील स्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

उन्होंने कलेक्टरों को यह भी निर्देशित किया कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें तथा किसी भी स्तर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित अधिकारियों/संचालकों की जवाबदेही निर्धारित करते हुए आवश्यकतानुसार दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य शासन नागरिकों एवं पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करता है। इस दृष्टि से यह आवश्यक है कि वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां पूर्णतः सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं मानक अनुरूप संचालित हों, जिससे संभावित जोखिमों का प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाए और समय-समय पर इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को प्रस्तुत की जाए। उन्होंने कहा कि सतर्कता, संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करते हुए ही हम जन-जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने की सुशासन तिहार की तैयारियों की समीक्षा

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने प्रभार के जिलों में सुशासन तिहार के आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में बालोद, बस्तर एवं मोहला-मानपुर जिलों के प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। 

          समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने मनरेगा भुगतान, पेंशन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड वितरण, राजस्व प्रकरण, शिक्षा, जाति प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य सुविधाएं एवं पेयजल व्यवस्था सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली। 
        उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने निर्देशित किया कि सुशासन तिहार में विशेष रूप से राजस्व प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण किया जाए और कोई भी मामला समय-सीमा से बाहर न रहे। उन्होंने नक्शा-खसरा निःशुल्क उपलब्ध कराने, बंटवारा, सीमांकन और नामांतरण जैसे मामलों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिविरों की जानकारी जनप्रतिनिधियों, पंचायत एवं समाज प्रमुखों तक समय पर पहुंचाई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री के संभावित दौरे को ध्यान में रखते हुए सभी लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
           बैठक में ‘सेवा सेतु’ पोर्टल के प्रचार-प्रसार के लिए शिविरों में स्टॉल लगाने और डेमो देने की व्यवस्था करने को कहा गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। प्रभारी मंत्री श्री शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी भी प्रकार का लेन-देन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में योजना की सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए। इसके अलावा खाद वितरण, विद्युत आपूर्ति और पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त रखने, खराब बोर सुधारने, पाइपलाइन बिछाने और जरूरत पड़ने पर पानी टैंकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
        उन्होंने ग्रीष्म ऋतु को ध्यान में रखकर शिविर स्थलों पर पेयजल, कूलर और छाया की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया। उन्होंने पुलिस विभाग को स्कूल-कॉलेजों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाने तथा साइबर अपराध, नशा और यातायात नियमों पर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
सुशासन तिहार के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करने और ग्राम पंचायतों में कोटवार के माध्यम से मुनादी कराने के निर्देश दिए गए, ताकि अधिक से अधिक लोग इस आयोजन का लाभ उठा सकें। प्रभारी मंत्री ने सभी अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर सुशासन तिहार को सफल बनाने के लिए कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में सभी संबंधित जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, डीएफओ एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
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हर बूंद से अधिक उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम: बगिया समृद्धि एम-कैड योजना से 13 गांवों के 4933 हेक्टेयर में होगी सिंचाई - मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के गृह ग्राम बगिया में समृद्धि कमांड क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन आधुनिकीकरण (एम-कैड) योजना के अंतर्गत बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू एवं कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इसके सफल क्रियान्वयन से जशपुर जिला देश के लिए आधुनिक दाबित सिंचाई प्रणाली का मॉडल बनेगा और किसानों को समृद्धि की नई दिशा मिलेगी। 
उन्होंने कहा कि इस परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली के स्थान पर आधुनिक प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क विकसित किया जाएगा। भूमिगत पाइपलाइन व्यवस्था से जल का अपव्यय रुकेगा, जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और भूमि अधिग्रहण की समस्या भी नहीं आएगी। अब तक वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को इस योजना से वर्षभर सिंचाई हेतु पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बगिया समृद्धि एम-कैड योजना न केवल सिंचाई व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि कृषि को तकनीक आधारित, टिकाऊ और लाभकारी दिशा में आगे बढ़ाएगी। यह परियोजना जशपुर को राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल एग्री-इरीगेशन डिस्ट्रिक्ट के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि यह पहल हमारे अन्नदाताओं को समृद्धि, आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई ऊँचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

उल्लेखनीय है कि यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर बगिया बैराज सह दाबित उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से लागू की जा रही है। इसके तहत बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड एवं ढुढुडांड सहित 13 गांवों के लगभग 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि परियोजना की कुल लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि यह योजना क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी और किसानों को स्थायी आय का आधार प्रदान करेगी। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने इसे किसानों के लिए “आने वाले समय का वरदान” बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

समृद्धि योजना के स्टेट नोडल ऑफिसर श्री आलोक अग्रवाल ने बताया कि एम-कैड कार्यक्रम का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में किया गया था। उन्होंने बताया कि यह परियोजना अगले 6 माह में पूर्ण की जाएगी और इसके संचालन एवं संधारण की जिम्मेदारी प्रारंभिक 5 वर्षों तक ठेकेदार द्वारा तथा उसके बाद जल उपभोक्ता समिति द्वारा संभाली जाएगी। इस समिति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति, SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) और IoT (Internet of Things) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे जल का नियंत्रित और वैज्ञानिक उपयोग संभव होगा। डेटा आधारित प्रबंधन के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कब और कितनी मात्रा में पानी देना है। इस योजना का उद्देश्य जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना, प्रत्येक बूंद का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों की आय में स्थायी सुधार लाना है। साथ ही उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से किसानों को जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों से निपटने में सक्षम बनाया जाएगा।
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आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है।

उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।
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राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभार

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित  कार्यालय में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।


इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।

महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री  श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
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छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

 हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।


राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।

राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है। 

महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।

आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।

छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।
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