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मुख्यधारा की ओर लौटता विश्वास: दक्षिण बस्तर में 51 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, शांति और विकास की दिशा में बड़ा कदम - मुख्यमंत्री श्री साय

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। जिला बीजापुर में 30 और सुकमा में 21 माओवादी कैडरों ने राज्य सरकार की पुनर्वास आधारित पहल “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” के अंतर्गत आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले इन कैडरों पर कुल 1.61 करोड़ का इनाम घोषित था।


मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हथियारों का परित्याग कर संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था व्यक्त करना यह स्पष्ट संकेत देता है कि सुरक्षा, सुशासन और समावेशी प्रगति ही किसी भी क्षेत्र के दीर्घकालिक भविष्य की सुदृढ़ नींव होते हैं। यह घटनाक्रम बस्तर में शांति स्थापना के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों का सकारात्मक और ठोस परिणाम है। बीते दो वर्षों में बस्तर के दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इस विकासात्मक पहल ने भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार की सुशासन आधारित नीति का केंद्र बिंदु सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, पुनर्वास और भविष्य की संभावनाओं का निर्माण है। आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विज़न, माननीय अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा राज्य सरकार के सतत प्रयासों से बस्तर आज भय और हिंसा से निकलकर विश्वास, विकास और नए अवसरों की ओर तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में बस्तर एक विकसित, शांत और समृद्ध क्षेत्र के रूप में देश के सामने नई पहचान स्थापित करेगा।
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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'बस्तर पंडुम 2026’ महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन(HINDI)

बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े ‘बस्तर पंडुम’ महोत्सव में आप सबके बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मां दंतेश्वरी के इस पुण्य क्षेत्र में आने का अवसर मिलना मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं, मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां के लोगों से जो अपनत्व और स्नेह मुझे मिलता है, वह मेरे लिए अनमोल है। यह ऐसे कई नायकों की धरती है, जिन्होंने भारत भूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। मैं ऐसे सभी सपूतों की स्मृति में सादर नमन करती हूं।


देवियो और सज्जनो,

बस्तर की सुंदरता को देखकर लगता है कि मां दंतेश्वरी ने स्वयं इसे अपने हाथों से सजाया है। मौसम बदलने के साथ प्रकृति मानो करवट लेती है और यहां के लोग उत्सव मनाते हैं। जब इस ऊर्वर धरती में किसान बीज छिड़कते हैं, तब यह पंडुम होता है। जब आम का मौसम आता है, तब यह पंडुम होता है। बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। जीवन जीने का यह तरीका सभी देशवासी बस्तर के निवासियों से सीख सकते हैं।

पिछले वर्ष आयोजित बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर की जनजातीय संस्कृति की झलक देश भर के लोगों ने देखी थी। मुझे बताया गया है इस वर्ष के पंडुम में पचास हजार से अधिक लोगों द्वारा जनजातीय संस्कृति तथा जीवन-शैली से जुड़े अनेक प्रदर्शन किए जाएंगे। बस्तर की जनजातीय संस्कृति से देशवासियों को अवगत कराने के इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करती हूं।

बस्तर क्षेत्र में एक आकर्षक पर्यटन स्थल बनने की प्रचुर क्षमता है। यहाँ के उत्साही लोग और उनकी प्राचीन संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, जलप्रपात और गुफाएँ पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से पर्यटक यहां आना जरूर पसंद करेंगे। आजकल दुनिया भर में Home stay एक नये प्रकार के पर्यटन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस दिशा में अनुकूल कदम उठा रही है।

देवियो और सज्जनो,

बस्तर की सुंदरता और यहां की संस्कृति हमेशा से लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है लेकिन दुर्भाग्य से चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा। इस कारण यहाँ के निवासियों ने अनेक कष्ट झेले। सबसे ज्यादा नुकसान यहां के युवाओं, आदिवासियों और दलित भाई-बहनों को हुआ। भारत सरकार की माओवादी आतंक पर निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं जिससे नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है।

मुझे बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में पहले माओवाद से प्रभावित रहे लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि जो लोग हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, वो सामान्य जीवन जी सकें। उनके लिए अनेक विकास और कल्याणकारी योजनाएँ चलाई जा रही हैं। राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ ग्रामीणों के सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

सरकार के प्रयास और इस क्षेत्र के लोगों के सहयोग के बल पर आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव में बिजली, सड़क, पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। वर्षों से बंद विद्यालय फिर से खुल रहे हैं और बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। यह बहुत ही सुखद तस्वीर है जो सभी देशवासियों में खुशी का संचार कर रहा है।

देवियो और सज्जनो,

मैं हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे सभी लोगों की सराहना करती हूं। मेरा उनसे अनुरोध है कि देश के संविधान और लोकतन्त्र में वे पूरी आस्था रखें। बस आपको इस व्यवस्था में विश्वास रखते हुए मेहनत व लगन से आगे बढ़ना है। यह लोकतन्त्र की ताकत ही है कि ओड़िशा के एक छोटे से गांव की यह बेटी, भारत की राष्ट्रपति के रूप में आपको संबोधित कर रही है।

गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों का कल्याण करना सरकार की विशेष प्राथमिकता है। पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों के गांवों को विकास से जोड़ा जा रहा है।

शिक्षा, व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। मैं जब भी जनजातीय भाई-बहनों से मिलती हूं, उनको शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक करने का प्रयत्न करती हूं। जनजातीय क्षेत्र के बच्चे अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सकें इसके लिए उन क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय खोले गए हैं। मेरा सभी माता-पिता और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे अपने बच्चों को पढ़ाएं। इसी से छत्तीसगढ़ और भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।

इस क्षेत्र के लोगों ने भाई-चारे और समाज-सेवा के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं में इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती तथा डॉक्टर रामचन्द्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले शामिल हैं। ये पुरस्कार महिला सशक्तीकरण, आदिवासी उत्थान, समाज सेवा और अत्यंत सुदूर आदिवासी इलाकों में मुफ्त चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए दिये जाएंगे। निस्वार्थ सेवा करने वाले ऐसे लोगों के बल पर ही हमारा समाज एक समावेशी और संवेदनशील समाज बन पाएगा।

देवियो और सज्जनो,

छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराओं की गहरी जड़ें आज भी जीवंत बनी हुई हैं। मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का अनूठा उदाहरण है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेते हुए स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करना है। विकास का वही मॉडल सफल है, जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। मैं राज्य के सभी निवासियों, विशेषकर युवाओं से अनुरोध करती हूं कि वे अपनी विरासत का संरक्षण करते हुए आधुनिक विकास को अपनाएं।

बस्तर के इस क्षेत्र में अकूत प्राकृतिक सम्पदा है। यहाँ के लोग लगनशील तथा मेहनती हैं। मैं इस क्षेत्र के सभी लोगों, विशेषकर युवाओं, से अपील करती हूं कि वो राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा चलाये जा रहे कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ उठाएँ। आपकी प्रगति और खुशहाली राज्य की प्रगति और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि आप सब ‘जय जय छत्तीसगढ़ महतारी’ की भावना के साथ आगे बढ़ते रहेंगे। इससे भारत माता का गौरव बढ़ेगा। मेरी प्रार्थना है कि मां दंतेश्वरी की असीम कृपा सभी देशवासियों पर बनी रहे।
 
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तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्वामी विवेकानंद विमानतल पर किया आत्मीय स्वागत

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे।  स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने आत्मीय स्वागत किया।


इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्री संतोष पांडेय, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री राजेश मूणत, मुख्य सचिव श्री विकास शील, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, अपर मुख्य सचिव (गृह) श्री मनोज पिंगुआ तथा रायपुर  पुलिस कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला उपस्थित थे।
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रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया

 रायपुर में उन्नत हृदय उपचार की बड़ी उपलब्धि: 68 वर्षीय मरीज पर सफल वाल्व-इन-वाल्व TAVI प्रक्रिया

 

उन्नत हृदय-चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए एमएमआई नारायणा हॉस्पिटल, लालपुर, रायपुर के कार्डियोलॉजी विभाग ने 68 वर्षीय मरीज पर जटिल वाल्व-इन-वाल्व ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन (TAVI) प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

 

मरीज को लगभग 12 वर्ष पूर्व लगाया गया बायोप्रोस्थेटिक एओर्टिक वाल्व समय के साथ क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण उन्हें सांस फूलने और शारीरिक क्षमता में लगातार कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मरीज की आयु और स्थिति को देखते हुए दोबारा ओपन हार्ट सर्जरी को उच्च जोखिम वाला मानते हुए डॉक्टरों ने न्यूनतम इनवेसिव, कैथेटर-आधारित उपचार पद्धति अपनाने का निर्णय लिया।

 

यह जटिल प्रक्रिया कार्डियोलॉजी विभाग की अनुभवी टीम द्वारा की गई, जिसका नेतृत्व डॉ. सुमंता शेखर पाढ़ी (क्लिनिकल लीड एवं सीनियर कंसल्टेंट) ने किया। टीम में डॉ. सुनील गौनियाल (सीनियर कंसल्टेंट) और डॉ. स्नेहिल गोस्वामी (कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी) भी शामिल रहे। संपूर्ण प्रक्रिया डॉ. एस. के. जेना (प्रोफेसर, कार्डियोलॉजी, KIMS) के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।

 

प्रक्रिया की योजना अत्याधुनिक CT-आधारित इमेजिंग तकनीक के माध्यम से बनाई गई। ट्रांसकैथेटर वाल्व को फेमोरल आर्टरी के रास्ते क्षतिग्रस्त सर्जिकल वाल्व के भीतर सटीक रूप से स्थापित किया गया, जिससे मरीज को दोबारा छाती की सर्जरी से बचाया जा सका।

 

चिकित्सकों के अनुसार, 26 जनवरी 2026 को की गई इस प्रक्रिया की सफलता में सटीक प्री-प्रोसीजरल इमेजिंग और सही वाल्व साइजिंग की अहम भूमिका रही। प्रक्रिया के बाद वाल्व का कार्य उत्कृष्ट पाया गया, दबाव अंतर न्यूनतम रहा और किसी भी प्रकार का पैरावाल्वुलर लीक नहीं देखा गया। मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और स्ट्रोक, अत्यधिक रक्तस्राव, पेसमेकर की आवश्यकता या वैस्कुलर इंजरी जैसी कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

 

इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया टीम — डॉ. राकेश राजकुमार चंद और डॉ. स्नेहा (सीनियर कंसल्टेंट, एनेस्थीसियोलॉजी) — का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने बताया कि वाल्व-इन-वाल्व TAVI बुजुर्ग मरीजों के लिए एक परिवर्तनकारी विकल्प है, जिनके सर्जिकल वाल्व विफल हो चुके हैं। विस्तृत योजना और सटीक निष्पादन से बेहतर परिणाम, तेज़ रिकवरी और जीवन-गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव हो पा रहा है।

 

उन्नत इमेजिंग टूल्स की सहायता से प्रक्रिया के दौरान वाल्व की स्थिति और रक्त प्रवाह का रियल-टाइम मूल्यांकन किया गया, जिससे तत्काल सफलता की पुष्टि हो सकी। प्रक्रिया के बाद मरीज के लक्षणों में तेजी से सुधार देखा गया।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सफल प्रक्रियाएं भारत में कैथेटर-आधारित वाल्व थैरेपी की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाती हैं, खासकर उन जटिल और उच्च-जोखिम मामलों में जहां पहले उपचार के विकल्प सीमित थे।

 

अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर अजीत बेलमकोण्डा ने इस जटिल प्रक्रिया की सफलता पर कार्डियोलॉजी विभाग को बधाई देते हुए टीम की सराहना की।

 

बढ़ती विशेषज्ञता, मजबूत हार्ट-टीम सहयोग और नवीन वाल्व तकनीकों के साथ ट्रांसकैथेटर वाल्व थैरेपी अब संरचनात्मक हृदय रोगों के उपचार में नई उम्मीद बनकर उभर रही है।


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आदिवासी संस्कृति का महाकुंभ बस्तर पण्डुम 2026

 बस्तर पण्डुम छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र का एक प्रमुख सांस्कृतिक, सामुदायिक और प्राकृतिक उत्सव है, जो जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और जीवन शैली को संरक्षित व प्रदर्शित करता है।  जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत (मांदर-बांसुरी), वेशभूषा, लोक शिल्प (काष्ठ/बांस/धातु) और पारंपरिक खान-पान का प्रदर्शन किया जाएगा। यह उत्सव बस्तर की आत्म-अस्मिता का प्रतीक है, जो स्थानीय कलाकारों को मंच देने के साथ-साथ युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ता है। विभिन्न अंचलों से आए प्रतिभागी बस्तर की 12 पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन करेंगें।


इस वर्ष 54 हजार से अधिक प्रतिभागियों का पंजीयन

             इस वर्ष के आयोजन ने लोकप्रियता के पुराने सभी पैमाने ध्वस्त कर दिए हैं और यह केवल एक प्रतियोगिता न रहकर अब लोक संस्कृति के एक विशाल उत्सव का रूप ले चुका है। आँकड़ों पर नजर डालें तो यह आयोजन इस बार एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। वर्ष 2025 में जहाँ विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 15,596 प्रतिभागियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, वहीं इस वर्ष यह आँकड़ा तीन गुना से भी अधिक बढ़कर 54,745 तक पहुँच गया है।  बस्तर के लोग अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक कलाओं को सहेजने के लिए कितने जागरूक और उत्साहित हैं। विशेष रूप से दन्तेवाड़ा जिले ने 24,267 पंजीयन के साथ पूरे संभाग में सर्वाधिक भागीदारी का रिकॉर्ड बनाया है, जिसके बाद कांकेर, बीजापुर और सुकमा जैसे जिलों ने भी हजारों की संख्या में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई है।

समृद्ध जनजातीय संस्कृति विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने तैयार 

            बस्तर की माटी की खुशबू और यहाँ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति एक बार फिर विश्व पटल पर अपनी छाप छोड़ने को तैयार है। संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम 07 से 09 फरवरी 2026 तक आयोजित होने वाी है, जिसके लिए अंचल के निवासियों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इस भारी उत्साह के बीच, अब सभी की निगाहें 07 से 09 फरवरी के बीच होने वाली संभाग स्तरीय प्रतियोगिताओं पर टिकी हैं। जिला स्तर की कड़ी प्रतिस्पर्धा से जीत कर आए 84 दल और उनके 705 चयनित कलाकार इस दौरान अपनी कला की जादू बिखरेंगे। इन तीन दिनों में मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेगा जनजातीय नृत्य की थाप, पारंपरिक गीतों की गूंज और नाटकों का मंचन । 

 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे

          प्रतियोगिता में कुल 12 अलग-अलग विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें सर्वाधिक 192 कलाकार जनजातीय नृत्य में और 134 कलाकार जनजातीय नाटक में अपना हुनर दिखाएंगे। यह मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि यह बस्तर के ज्ञान, कला और स्वाद का एक अनुपम संगम होगा। जहाँ एक ओर 65 कलाकार पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन छेड़ेंगे, वहीं दूसरी ओर 56 प्रतिभागी लजीज जनजातीय व्यंजनों की खुशबू बिखेरेंगेे। इसके अतिरिक्त बस्तर की दुर्लभ वन औषधियों, चित्रकला, शिल्प कला, आभूषण और आंचलिक साहित्य का प्रदर्शन भी किया जाएगा, जो नई पीढ़ी को अपनी विरासत से रूबरू कराएगा।

संभाग स्तर पर 340 महिलाएं अपनी कौशल का करेंगी प्रदर्शन 

         इस आयोजन की एक और सबसे खूबसूरत तस्वीर मातृशक्ति की बढ़ती भागीदारी है। संभाग स्तर पर पहुँचने वाली 705 प्रतिभागियों में महिला और पुरुष कलाकारों की संख्या में गजब का संतुलन देखने को मिल रहा है, जिसमें 340 महिलाएं और 365 पुरुष शामिल हैं। यह भागीदारी बताती है कि बस्तर की संस्कृति को आगे ले जाने और उसे संरक्षित करने में यहाँ की महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। कुल मिलाकर बस्तर पण्डुम 2026 अपनी भव्यता और जन-भागीदारी के साथ एक अविस्मरणीय आयोजन की ओर अग्रसर है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए -

 1. मादक पदार्थाें की रोकथाम की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के 10 जिलों में जिला स्तरीय एन्टी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स के गठन हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में प्रावधानित 100 नवीन पदों की  स्वीकृति प्रदान की गई। इसमें रायपुर, महासमुंद, बिलासपुर, दुर्ग, बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम, जशपुर, राजनांदगांव एवं कोरबा जिला शामिल हैं। 


2. मंत्रिपरिषद की बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के मुख्य बजट में पुलिस मुख्यालय के विशेष शाखा अंतर्गत एस.ओ.जी. (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) के गठन के लिए प्रावधानित 44 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई है। एसओजी का काम किसी भी बड़ी या अचानक हुई घटना में तुरंत मौके पर पहुँचकर हालात को संभालना और आतंकी हमला या गंभीर खतरे को जल्दी खत्म करना होता है। एसओजी एक खास तरह की प्रशिक्षित टीम होती है, जिसे ऐसे खतरनाक कामों के लिए तैयार किया जाता है। 

3. मंत्रिपरिषद द्वारा राज्य के विभिन्न एयरपोर्ट एवं हवाई पट्टियों में उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) की स्थापना का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया तथा इसके संचालन के दिशा-निर्देशों का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ में पायलट प्रशिक्षण की सुविधा के लिए राज्य में उड़ान प्रशिक्षण संगठन की स्थापना की जाएगी। विमानन क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए यह संस्थान उपयोगी होगा। इससे एयरक्राफ्ट रिसाइकिलिंग, हेलीकॉप्टर बंकिंग तथा एयरो स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित होगी। फ्लाइट ट्रेनिग ऑर्गनाइजेशन की स्थापना निजी सहभागिता से किया जाएगा। 


4. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ नवाचार एवं स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति 2025-26 का अनुमोदन किया गया। इस नीति से स्टार्टअप ईको सिस्टम के साथ-साथ इन्क्यूबेटर्स एवं अन्य हितधारकों का विकास होगा। छत्तीसगढ़ को देश में एक प्रमुख नवाचार केन्द्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा। भारत सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग द्वारा जारी स्टेट्स स्टार्टअप रैंकिंग में सुधार होने से राज्य में निवेश का आकर्षण बढ़ेगा।

5. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल और रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बनाई गई और पूरी हो चुकी 35 आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम और नगर पालिकाओं को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इन कॉलोनियों में खुले भू-खंड, उद्यान और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल होंगी। हालांकि, आवासीय, व्यावसायिक और अर्द्धसार्वजनिक बिक्री योग्य संपत्तियां इसमें शामिल नहीं होंगी।

अभी इन कॉलोनियों का हस्तांतरण नहीं होने के कारण वहां रहने वाले लोगों को कई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कॉलोनियों के रखरखाव के लिए निवासियों को दोहरा खर्च उठाना पड़ रहा है। एक ओर वे नगर निगम को संपत्ति कर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गृह निर्माण मंडल को भी रखरखाव शुल्क देना पड़ता है। इन कॉलोनियों के हस्तांतरण से नगरीय निकायों द्वारा यहां पानी, बिजली, सड़क, सफाई जैसी सुविधाएं दी जा सकेंगी और कॉलोनीवासियों को अतिरिक्त रखरखाव शुल्क से राहत मिलेगी।

6. मंत्रिपरिषद द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में शासकीय विभागों तथा निगम मंडल के कार्यालयों के लिए नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण द्वारा एक वृहद बहुमंजिला भवन बनाने का निर्णय लिया गया है और यहां विभागों को स्पेस आबंटित किया जाएगा, ताकि भूमि का पूर्ण उपयोग किया जा सके। 

7. मंत्रिपरिषद द्वारा सिरपुर एवं अरपा क्षेत्र में सुनियोजित विकास और विकास कार्यों को गति देने के लिए संबंधित क्षेत्र में शासकीय भूमि के आबंटन का अधिकार संबंधित जिले के कलेक्टर को प्रदान किया गया है। 

गौरतलब है कि सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण एवं अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का उद्देश्य संबंधित नदी तटीय क्षेत्रों का योजनाबद्ध और समग्र विकास करना है। इसके लिए मास्टर प्लान के क्रियान्वयन, भूमि नियोजन एवं नगर विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना आवश्यक है। विकास कार्यों को गति देने के लिए शासकीय भूमि का आबंटन जरूरी था। वर्तमान में दोनों प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए शासकीय भूमि का आबंटन रु. 1/- प्रीमियम एवं भू-भाटक पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, भूमि आबंटन के अधिकार संबंधित जिला कलेक्टरों को दिया गया है।

8. मंत्रिपरिषद ने ‘‘छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति‘‘ को प्रदेश में लागू किए जाने की स्वीकृति प्रदान की है। छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति का प्रस्ताव छत्तीसगढ़ शासन के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया। 

छत्तीसगढ़ क्लाउड फर्स्ट नीति के अनुसार राज्य शासन के सभी विभाग, उपक्रम एवं स्वायत्त संस्थाएं केवल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अनुमोदित क्लाउड सेवा प्रदाताओं या भारत में स्थित सुरक्षित डेटा सेंटर एवं डिजास्टर रिकवरी सेंटर से ही क्लाउड सेवाएं लेंगी। किसी विशेष या असाधारण आवश्यकता के लिए राज्य क्लाउड परिषद से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। 

नीति के तहत कम प्राथमिकता वाले एप्लिकेशन एवं आर्काइव डेटा का क्लाउड माइग्रेशन वर्ष 2027-28 तक तथा उच्च प्राथमिकता सेवाओं का माइग्रेशन 2029-30 तक किया जाएगा। सभी नए एप्लिकेशन क्लाउड-नेटिव तकनीक पर विकसित किए जाएंगे। 

कैबिनेट ने इस नीति में भविष्य में आवश्यक संशोधन करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को अधिकृत किया है। इस नीति से आईटी ढांचे में लागत में कमी, संचालन में दक्षता, बेहतर साइबर सुरक्षा, आपदा के समय सेवाओं की निरंतरता तथा नागरिक सेवाओं की 24x7 उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही नागरिकों के डेटा की सुरक्षा, पारदर्शिता और ट्रैकिंग व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।

9. मंत्रिपरिषद द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में डिजिटल अवसंरचना को विस्तार देने के लिए मोबाइल टावर योजना का अनुमोदन किया गया है। भौगोलिक विषमता और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी सीमित होने से शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बाधित हो रहा है। इस योजना से मोबाइल टावर स्थापना हेतु चयनित सेवा प्रदाताओं को अनुमति और प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध किया जाएगा। 

मोबाइल टावर योजना के अंतर्गत चयनित मोबाइल नेटवर्क विहीन बसाहटों में टावर की स्थापना की जाएगी। डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, ई गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। योजना से सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार होगा विशेष कर वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में संचार सुविधा उपलब्ध होने से प्रशासनिक कार्य में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। मोबाइल टावर योजना के लागू होने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, आपातकालीन सेवाएं डायल 112 जैसी योजनाओं की पहुंच दूरस्थ इलाकों के नागरिकों तक सुगमता से होगी।
 
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कौशल उन्नयन से जोड़कर युवाओं को बनाएं आत्मनिर्भर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अधिकारियो को निर्देश दिए हैं कि वे युवाओं को अधिक से अधिक कौशल उन्नयन का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाएं। श्री साय ने कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में नए-नए उद्योग स्थापित होने वाले हैं, इन उद्योगों में युवाओं को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने आज महानदी भवन मंत्रालय में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि समय-समय पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में रोजगार मेले का आयोजन करें। बैठक में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग के मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मुख्य सचिव श्री विकासशील सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। 


बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवाओं को रोजगारोन्मुखी बनाने और तकनीकी संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए विशेष रूप से जोर दिया। उन्होंने कहा कि आईटीआई के आधुनिकीकरण से युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण मिलेगा और राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने सीएसएसडीए एवं राज्य परियोजना लाइवलीहुड कॉलेज सोसायटी के एकीकरण के प्रस्ताव पर सहमति दी और शीघ्र कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जिलों में सहायक निदेशक एवं सहायक परियोजना अधिकारियों की युक्तियुक्त पदस्थापना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रशिक्षण केंद्रों में आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली (एईबीएएस) के प्रभावी क्रियान्वयन तथा प्रशिक्षित युवाओं से फीडबैक हेतु विकसित ज्तंपदमम थ्ममकइंबा मॉड्यूल को और सशक्त करने के निर्देश दिए।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2013 से अब तक 4 लाख 90 हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 2 लाख 71 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। वर्तमान में राज्य में 356 प्रशिक्षण प्रदाता संस्थाएं (वीटीपी) एवं 207 पंजीकृत कोर्स संचालित हैं। केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सेतु योजना के अंतर्गत राज्य में हब-एंड-स्पोक मॉडल पर 6 क्लस्टर का चयन किया गया है, जिसके माध्यम से आईटीआई के उन्नयन एवं आधुनिकीकरण हेतु लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत, राज्य सरकार की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत तथा उद्योगों की हिस्सेदारी न्यूनतम 17 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों के लिए पीएम जनमन योजना अंतर्गत 9 जिलों में लगभग 1,700 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई। वहीं आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास हेतु बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर सहित जिलों में 600 से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा गया है। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में सत्र 2025-26 में गत वर्ष की तुलना में 31 प्रतिशत तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव, श्री सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विभागीय सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, उद्योग सचिव रजत कुमार, श्रम सचिव हिमशिखर गुप्ता, संचालक तकनीकी शिक्षा रोजगार एवं प्रशिक्षण श्री विजय दयाराम के., स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरूण अरोरा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने जिले के अंतिम छोर के सुदूर वनांचल में लगाई चौपाल, लोगों से किया जनसंवाद

 उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आज जिले के अंतिम छोर में सुदूर वनांचल में क्षेत्रों में पहुंचें। यहां उन्होंने चौपाल लगाई और ग्रामवासियों के साथ जमीन में बैठकर उनसे संवाद बातचीत की और उनकी मांगे और समस्याएं सुनीं। उन्होंने बैगा बाहुल्य ग्राम आमानारा, लरबक्की, कुकरापानी मे चौपाल लगाकर लोगों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने 56 लाख से अधिक के कार्यों की घोषणा की। वहीं ग्रामीणों की मांग पर दो स्थानों का प्रभार संभाल रहे सचिव को केवल आमानारा का ही प्रभार देने के निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने आमानारा में कहा कि बीते दो वर्षों में ग्रामीण सुदूर क्षेत्रों में शासन की योजनाओं के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। इन दो वर्षों में इस बैगा बाहुल्य ग्राम आमनारा, लरबक्की और कुकरापानी में पीएम जनमन योजना के तहत बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत हुए हैं। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह 1 हजार रुपए की राशि दी जा रही है। गांव गांव में महिलाओं को राशि आहरण के लिए दूर बैंकों तक जाने की जरूरत न पड़े इसके लिए पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोले जा रहे हैं। इससे गांव में वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन के साथ ही छात्रवृत्ति का आहरण किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि छात्रों के उन्नत शिक्षा के लिए स्कूलों में स्मार्ट क्लासेज लगवाए जा रहे हैं। लरबक्की स्कूल में भी स्मार्ट क्लास लगवाया गया है। जिसका लाभ यहां के छात्रों को मिलेगा। उन्होंने पीएम जनमन योजना का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना चलाई जा रही है। इसके तहत शासन की योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इनकी बसाहटों तक पक्की सड़कों की कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है। इसके तहत कबीरधाम जिले के बैगा बाहुल्य क्षेत्रों में पक्की सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।  इस अवसर पर श्री विदेशीराम धुर्वे, श्री रामकिंकर वर्मा, श्री विजय पाटिल, श्री नंद श्रीवास, श्री नितेश अग्रवाल, श्री बिहारी धुर्वे, श्री रूपसिंह धुर्वे, श्री नरेश चंद्रवंशी, श्री हेमचंद चंद्रवंशी, श्री मोहन धुर्वे, श्री राजेंद्र कुंजाम सहित अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

ग्रामीणों की कई मांग मौके पर ही हुई पूरी, उप मुख्यमंत्री ने दी स्वीकृति

इस दौरान उन्होंने आमानारा में 10 लाख की लागत से सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा की, बरपानी में आंगनबाड़ी भवन निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने चरणतीरथ में मंदिर के सौंदर्यीकरण करवाने की घोषणा की। उन्होंने गाड़ाघाट, झूरगीदादर, आमानारा और बरपानी में हैंडपाइप बनाने के निर्देश दिए। इसी प्रकार ग्राम लरबक्की में नवीन पंचायत भवन के लिए 20 लाख रूपये, 6 लाख रुपए की लागत के सांस्कृतिक मंच और बदनापानी में 5 लाख की लागत से सीसी रोड निर्माण की घोषणा की। ग्राम कुकरा पानी में 5.20 लाख की लागत से वार्ड 7 एवं 8 में सीसी रोड निर्माण, वार्ड 4 में हैंडपंप और वार्ड 8 में सोलर पंप लगाने की घोषणा की। ग्राम कोटनापानी और जामपानी में 05-05 लाख की लागत से सांस्कृतिक मंच निर्माण की घोषणा की।
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उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा गांवों में पहुंच आम लोगों से किया सीधा संवाद

उपमुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सोमवार को  विभिन्न ग्रामों एवं शहरी क्षेत्रों का भ्रमण कर आम नागरिकों से आत्मीय मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी के साथ ज़मीन पर बैठकर लोगों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं और कई मामलों में त्वरित निराकरण के निर्देश अधिकरियों को दिए। 

     उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा अपने जनसंपर्क कार्यक्रम में सर्वप्रथम जिला कबीरधाम के ग्राम बिरोड़ा पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी स्थानीय समस्याओं, ज़रूरतों और सुझावों पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को जनहित से जुड़े विषयों पर संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
     इसके पश्चात उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ग्राम सोनपुरी (लोहारा) पहुंचे, जहां आयोजित जनसंपर्क कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। यहां भी उन्होंने लोगों से सीधे संवाद कर उनकी मांगों और अपेक्षाओं को सुना तथा समाधान हेतु संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
     जनसंपर्क की इसी कड़ी में उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ग्राम रामहेपुर (लोहारा) के कार्यक्रम में भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और इसके लिए जनप्रतिनिधियों का जनता के बीच जाकर संवाद करना अत्यंत आवश्यक है।
     उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा कवर्धा के फुलवारी चौक पहुंच नवधा रामायण कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का संदेश देते हुए सामाजिक समरसता, सद्भाव और सेवा भाव पर बल दिया। इस दौरान वे लोगों से सहजता और आत्मीयता के साथ मिले।
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डबल इंजन सरकार का बड़ा तोहफा - छत्तीसगढ़ में रेलवे विकास के लिए ₹7,470 करोड़: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति किया आभार प्रकट

छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना विकास के लिए ₹7,470 करोड़ के ऐतिहासिक बजट प्रावधान किए जाने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार के सतत प्रयासों से छत्तीसगढ़ में आज रेलवे क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। वर्ष 2009–14 के दौरान वार्षिक औसत ₹311 करोड़ की तुलना में 2026–27 में ₹7,470 करोड़ का बजट प्रावधान लगभग 24 गुना वृद्धि का रिकॉर्ड है। वर्तमान में राज्य में ₹51,080 करोड़ के रेल कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए ट्रैक निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास तथा सुरक्षा उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर में जगदलपुर को जोड़ने वाले रावघाट–जगदलपुर रेल प्रोजेक्ट का प्रारंभ होना बस्तर के जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अमूल्य उपहार है, जो क्षेत्रीय विकास की नई राह प्रशस्त करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि परमलकसा–खरसिया कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ में यात्री गाड़ियों की संख्या आने वाले समय में लगभग  दोगुनी हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के अंतर्गत राज्य के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, जिनमें डोंगरगढ़ (फेज-I), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण हो चुके हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की 2 जोड़ी तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की 1 जोड़ी सेवाएँ यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक रेल सुविधा प्रदान कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 फ्लाईओवर/अंडरपास तथा ‘कवच’ जैसी आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना से रेल सुविधा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं  रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए हृदय से धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आमजन के जीवन में नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।
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सड़क निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त और समय-सीमा में करें पूरा- मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुरदृकोंडागांव के मध्य निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए, इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।


डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति

डबल इंजन की सरकार के तहत विकास कार्यों को गति देते हुए बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। एनएच-130डी, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है, एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह मार्ग कोंडागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

छत्तीसगढ़ में 122 किमी लंबा हिस्सा

नेशनल हाईवे 130-डी का कोंडागांव से नारायणपुर तक लगभग 50 किलोमीटर का हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है, जबकि कुतुल से महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक 21.5 किलोमीटर की दूरी है। इस प्रकार इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी में से लगभग 122 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा, सुरक्षित और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। साथ ही नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुगम एवं सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होगा।

प्रधानमंत्री के सहयोग से मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सहयोग से इस राष्ट्रीय राजमार्ग के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लीयरेंस एवं निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेज गति से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मार्ग न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगा, बल्कि बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी और क्षेत्र में विश्वास, निवेश तथा आवागमन को नई दिशा देगी। इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्री महेश कश्यप, लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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दिव्यांग बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज नारायणपुर जिले के गरांजी स्थित परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय में अचानक छात्रों के बीच पहुंचे। विद्यालय पहुंचने पर संस्था में अध्ययनरत दिव्यांग छात्र रंजीत बड्डे सहित विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चों द्वारा स्वागत गीत, हनुमान चालीसा एवं बस्तर अंचल के पारंपरिक गीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित सभी अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों की मांग पर मुख्यमंत्री श्री साय ने विद्यालय को एक बस उपलब्ध कराने की घोषणा की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने बच्चों से चर्चा करते हुए कहा कि उन्हें मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। विद्यालय में उपलब्ध सुविधाएं अच्छी हैं, उनका पूरा लाभ लेकर सभी अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएं। उन्होंने बच्चों को आईएएस, आईपीएस जैसे उच्च पदों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया और कहा कि किसी भी प्रकार की शारीरिक कमी से निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि विशेष आवश्यकता वाले व्यक्तियों पर ईश्वर का विशेष आशीर्वाद होता है। बच्चों ने जब उनसे पूछा गया कि उन्हें विद्यालय आकर कैसा लगा, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के बीच आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। एक बच्ची के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने बताया कि बचपन में उन्हें पिट्ठू, फुटबॉल जैसे खेल खेलना बहुत पसंद था।  

मुख्यमंत्री ने संस्था के सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर आशीर्वाद दिया। दिव्यांग बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुख्यमंत्री श्री साय सहित राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, अन्य जनप्रतिनिधियों, मुख्यमंत्री सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर श्री डोमन सिंह एवं आईजी श्री सुंदरराज पी. ने सराहना की।

उल्लेखनीय है कि परीयना दिव्यांग आवासीय विद्यालय का शुभारंभ 11 सितंबर 2023 को किया गया था। इसका संचालन जिला खनिज न्यास निधि से किया जा रहा है। विद्यालय का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को समावेशी शिक्षा प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है, जिससे उनका आत्मविश्वास सुदृढ़ हो और वे समाज में अपनी भूमिका प्रभावी रूप से निभा सकें। यह विद्यालय सामान्य और दिव्यांग बच्चों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में विद्यालय में कुल 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। विद्यालय में आडियोलॉजी, फिजियोथेरेपी, विशेष शिक्षा संगीत शिक्षा, खेलकूद, योग एवं व्यायाम, तथा कंप्यूटर शिक्षा की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
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नारायणपुर अंचल में अमन शांति, आजीविका और स्थानीय सहभागिता बढ़ाने पर फोकस: मुख्यमंत्री श्री साय

दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास पर पहुँचे मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अबूझमाड़ क्षेत्र में आयोजित पीस हाफ मैराथन के शुभारंभ के साथ-साथ अनेक सामाजिक, खेल और पर्यटन गतिविधियों में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन और स्थानीय सहभागिता को बढ़ाने के लिए राज्य शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का अवलोकन किया, उन्हें प्रोत्साहित किया तथा लोगों से संवाद कर सहभागिता और विश्वास को और मजबूत किया।


बाइकर्स को दिखाई हरी झंडी
मुख्यमंत्री श्री साय ने शांत सरोवर के समीप रायपुर के छत्तीसगढ़ राइडिंग क्लब के 40 बाइकर्स को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह बाइकर्स समूह नारायणपुर के सुदूर पर्यटन स्थल कच्चापाल तक की यात्रा करेगा। इस पहल के माध्यम से अबूझमाड़ को जानने, समझने और शांति का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

शांत सरोवर में नौका विहार
बिजली गाँव के समीप स्थित शांत सरोवर में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, सांसद बस्तर श्री महेश कश्यप एवं लघु वनोपज के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम के साथ नौका विहार का आनंद लिया। स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह विशेष पहल स्थानीय प्रशासन के द्वारा की गई है। 

तीर-धनुष से साधा लक्ष्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने बिंजली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान तीरंदाजी के स्थानीय युवा खिलाड़ियों से आत्मीय मुलाकात की और स्वयं तीर-धनुष उठाकर लक्ष्य साधते हुए खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अंचल में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आदिवासी समाज की पारंपरिक दक्षताओं को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। शांति, आजीविका और खेलों के विकास में प्रशासन द्वारा समन्वित प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापना, आजीविका संवर्धन, खेल प्रतिभाओं को मंच देने और विश्वास का वातावरण बनाने के लिए सतत कार्य कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, कमिश्नर श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुंदरराज पी, कलेक्टर सुश्री नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक श्री रॉबिन्सन गुरिया, सीईओ सुश्री आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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सुदूर वनांचलों को मिली कनेक्टिविटी की नई ताकत- मुख्यमंत्री श्री साय

राज्य के दूरस्थ और सीमांत जनजातीय अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री बस सेवा अब नारायणपुर जिले में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जिले के प्रवास के दौरान कुरूसनार से लगभग 4 किमी तक ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा की। 


मुख्यमंत्री का बस सेवा से सफर करना इस योजना की विश्वसनीयता और जनोन्मुखी सोच को रेखांकित करता है। उन्होंने अपने सह यात्रियों से अब इस नक्सल प्रभावित इलाके में बस सेवा शुरू होने से हुए फायदों के बारे में भी ग्रामीणों से पूछा। मुख्यमंत्री का यह दौरा और बस सेवा से किया जाने वाला सफर नारायणपुर जिले में विकास, विश्वास और सुशासन की दिशा में एक सशक्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। 

वर्तमान में नारायणपुर जिले में मुख्यमंत्री बस सेवा के अंतर्गत चार बसें संचालित की जा रही हैं, जिनमें से तीन बसें नियद नेल्ला नार मार्गों पर नियमित परिवहन सेवाएं प्रदान कर रही हैं। ये बसें उन क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा उपलब्ध करा रही हैं, जो बीते एक दशक से माओवादी उग्रवाद के कारण सार्वजनिक परिवहन से लगभग वंचित रहे थे।

पहला मार्ग नारायणपुर-नेलंगूर का है, जिसके अंतर्गत डूमरतराई, कुकडाझोर, आंकाबेडा, कस्तूरमेटा, मोहंदी, कोडलियार, कुत्तूल, बेडमाकोटी तथा नेलंगूर ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं। दूसरा मार्ग नारायणपुर-कुतूल का है, जिसमें कच्चापाल, कोडलियार एवं कुतूल के साथ कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, कोहकामेटा और इरकभट्टी ग्रामों को परिवहन सुविधा मिल रही है। तीसरा मार्ग नारायणपुर-गारपा का है, जिससे कुरूषनार, बासिंग, कुन्दला, सोनपुर, मसपुर और होरादी ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं।

यह बस सेवा सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें संचालन की जिम्मेदारी एक निजी बस ऑपरेटर को सौंपी गई है, जबकि शासन द्वारा मार्ग निर्धारण और निगरानी की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सीमांत जनजातीय समुदायों को विश्वसनीय, सुलभ और सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना, सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देना तथा क्षेत्र में आवागमन और कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना है।
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महतारी वंदन योजना से महिला सशक्तिकरण को मिला नया आयाम: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा आज जिला नारायणपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम से छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना की 24वीं किस्त की राशि जारी किया गया। इस अवसर पर प्रदेश की 68 लाख 39 हजार 592 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 641 करोड़ 34 लाख रुपए की राशि का अंतरण किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने राशि का अंतरण करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना से छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम मिला है। 


उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 21 वर्ष अथवा उससे अधिक आयु की विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें।

योजना के शुभारंभ से अब तक 23 किस्तों के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं को कुल 14 हजार 954.42 करोड़ रुपए की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। यह व्यवस्था वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल सिद्ध हो रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय द्वारा 24वीं किस्त के रूप में 641.34 करोड़ रुपए की राशि जारी किए जाने के पश्चात महतारी वंदन योजना के अंतर्गत कुल वितरित राशि बढ़कर 15 हजार 595.77 करोड़ रुपए हो जाएगी। यह राज्य सरकार की महिला कल्याण एवं सशक्तिकरण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा यह प्रमाणित करती है कि योजना से प्रदेश की लाखों महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रही हैं। नारायणपुर जिले में महतारी हितग्राहियों की संख्या 27 हजार 272 है। इन हितग्राहियों के खातों में 2 करोड़ 72 लाख 72 हजार रुपए अंतरित किया गया। इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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आधुनिक घोटुल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान आज ‘गढ़बेंगाल घोटुल‘ पहुंचकर बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और लोक-संस्कृति के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की। इस मौके पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि और ग्रामीणों के आत्मीय स्वागत के बीच मुख्यमंत्री श्री साय स्वयं लोक-रंग में रंगे नजर आए। 


मुख्यमंत्री श्री साय ने घोटुल की अनूठी स्थापत्य कला का अवलोकन किया और बस्तर की विभूतियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि घोटुल प्राचीन काल से ही आदिवासी समाज के लिए शैक्षणिक एवं संस्कार केंद्र रहा है। चेंद्रु पार्क के समीप स्थित यह आधुनिक घोटुल न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा, बल्कि देश-दुनिया के पर्यटकों को भी आदिवासी जीवनशैली और सामाजिक व्यवस्था से परिचित कराने का सशक्त माध्यम बनेगा। गढ़बेंगाल का यह घोटुल हमारी गौरवशाली विरासत को सहेजने का प्रतीक है। हमारी सरकार बस्तर की इस अनूठी संस्कृति, परंपरा और ज्ञान को संरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने घोटुल परिसर के लेय्योर एवं लेयोस्क कुरमा: युवाओं और युवतियों के लिए निर्मित कक्षों के साथ ही बिडार कुरमा: पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र एवं सांस्कृतिक सामग्रियों का संग्रह का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों की आग्रह पर मुख्यमंत्री श्री साय ने सगा कुरमा में बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेकर क्षेत्र की खान-पान संस्कृति का सम्मान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री के भोजन में विशेष रूप से भोजन गाटो-भात, कोदो-भात, उड़िद दार, हिरुवा दार, जीरा भाजी, कनकी पेज, भाजी घिरोल फुल, चाटी भाजी, कांदा भाजी, मुनगा भाजी, इमली आमट, मड़िया पेज, टमाटर चटनी, चिला रोटी, रागी कुरमा, रागी केक, रागी लट्टू, रागी जलेबी परोसा गया। 

इस दौरान वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम, पद्मश्री श्री पंडीराम मंडावी, लोककलाकार श्री बुटलू राम, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्रीमती संध्या पवार ने साथ बैठकर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया।

बस्तर की विभूतियों से आत्मीय भेंट

मुख्यमंत्री ने इस प्रवास को केवल एक औपचारिक दौरा न रखते हुए इसे एक आत्मीय मिलन का रूप दिया। क्षेत्र की महान प्रतिभाओं - वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, पद्मश्री पंडीराम मंडावी और सुप्रसिद्ध लोक-कलाकार बुटलू राम से भेंट कर उनका सम्मान किया। उन्होंने टाइगर ब्वॉय चेंदरू के परिवारजनो से भी मुलाकात की। 

इको-फ्रेंडली घोटुल:

वन विभाग और पद्मश्री पंडीराम मंडावी के मार्गदर्शन में निर्मित यह घोटुल पूर्णतः इको-फ्रेंडली (लकड़ी, मिट्टी और बांस) सामग्री से बना है। मुख्यमंत्री ने घोटुल के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, जिसे स्वयं पद्मश्री पंडीराम मंडावी ने उकेरा है। जिसमें नक्काशी, सांस्कृतिक जुड़ाव, विरासत का संरक्षण का प्रभावी प्रयास किया गया है।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। 


इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। उन्होंने सत्याग्रह के माध्यम से हमें सीख दी की दृढ़ संकल्प से जीवन की सभी चुनौतियों को परास्त किया जा सकता है। गांधी जी के विचार हम सबको आज भी प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा और श्री राम गर्ग भी उपस्थित थे।
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पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की

छत्तीसगढ़ शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व श्री विवेक आचार्य ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं का विस्तृत विवरण दिया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और विरासत संवर्धन तीनों क्षेत्रों में समन्वित प्रगति का मॉडल स्थापित किया है।

पर्यटन को मिला उद्योग का दर्जा

पर्यटन विभाग- निवेश, रोजगार और वैश्विक पहचान की ओर तेज़ कदम

         छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से निजी निवेश के नए द्वार खुले। राज्य और देश के प्रमुख शहरों में आयोजित  इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रमों के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक निजी निवेश सुनिश्चित किया गया। इससे पर्यटन अधोसंरचना, होटल, रिसॉर्ट और साहसिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। रामलला दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के साथ हुए समझौते के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में लगभग 42 हजार 500 श्रद्धालुओं को विशेष ट्रेनों से अयोध्या दर्शन कराया गया। यह योजना धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। राज्य में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नई होम-स्टे नीति लागू की गई। 500 नए होम-स्टे विकसित करने का लक्ष्य है। राज्य सरकार ने 24 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ होम-स्टे नीति 2025-30 को अधिसूचित किया है। यह नीति राज्य भर में नए होम-स्टे के विकास को प्रोत्साहित करने के लिए पंूजी निवेश सब्सिडी और ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है, जो ग्रामीण और समुदाय आधारित पर्यटन का समर्थन करती है, इसके लिए राज्य सरकार ने बजट भी स्वीकृत किया है। 

फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर- 350 करोड़ की परियोजना

           डॉ. रोहित यादव ने बताया कि भारत सरकार की राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) के तहत एकीकृत फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर के विकास की मंजूरी मिली है, जिसकी कुल अनुमानित लागत 350 करोड़ रूपए है। भूमि पूजन 24 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के करकमलों से हुई है। यह छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम है। चित्रोत्पला फिल्म सिटी के निर्माण से फिल्म निर्माण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया में एक नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी पहल के माध्यम से छत्तीसगढ़ न केवल फिल्म निर्माण और सांस्कृतिक आयोजनों का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर होगा, बल्कि यह परियोजना राज्य की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी। चित्रोत्पला फिल्म सिटी और ट्राइबल एंड कल्चरल कन्वेंशन सेंटर के निर्माण से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच मिलेगा, निवेश के नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त होगी। यह परियोजना आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, कलाकारों और पर्यटन क्षेत्र के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी।

भोरमदेव मंदिर कॉरिडोर परियोजना

           संचालक, संस्कृति एवं पुरातत्त्व श्री विवेक आचार्य ने  कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जा रही है।  राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। एक जनवरी 2026 को भारत के पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस परियोजना का भूमिपूजन किया। भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है।

मयाली-बगीचा विकास, सिरपुर एकीकृत विकास का मास्टर प्लान तैयार

         भारत सरकार ने जशपुर में मयाली-बगीचा सर्किट अंर्तगत तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 10 करोड़ रूपए मंजूर किए हैं। इस परियोजना का भूमिपूजन 25 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा किया गया था।  सिरपुर एकीकृत विकास सिरपुर को एक विश्व विरासत स्थल में बदलने के लिए एक मास्टर प्लान विकसित किया जा रहा है। 

चित्रकोट ग्लोबल डेस्टिनेशन डेवलपमेंट

        चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट नामक एक व्यापक प्रस्ताव पर्यटन मंत्रालय को प्रस्तुत करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य चित्रकोट को एक वैश्विक स्तर पर पुनर्विकसित करना है। इस परियोजना हेतु पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार से 250 करोड़ रूपए की फंडिंग अपेक्षित है। 

छत्तीसगढ़ पर्यटन का राष्ट्रव्यापी प्रचार

पर्यटन सचिव ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड ने स्पेन, थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों में आयोजित वैश्विक यात्रा कार्यक्रमों में भाग लेकर छत्तीसगढ़ पर्यटन का देश-विदेश मे भी प्रचार-प्रसार किया, जिससे छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को वैश्विक मानचित्र पर भी जगह मिली। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल ने फिक्की जैसी संस्थाओं के साथ भी भागीदारी की है, जिससे देश के प्रमुख प्रचार मंचों और कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। यूनिवर्सल ट्रैवल कॉन्क्लेव जैसी प्रसिद्ध यात्रा प्रदर्शनियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। 

राज्य में पर्यटन से संबंधित व्यवसायों के पंजीकरण में तेजी से वृद्धि

छत्तीसगढ़ में जनवरी 2024 तक टूर ऑपरेटर व ट्रेवल ऑपरेटरों की संख्या मात्र 30 थी, वर्तमान में यह संख्या 300 से अधिक पहुंच चुकी है। इसके अतिरिक्त 15 होटल छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के साथ पंजीकृत है, जिसकी और अधिक बढ़ने की संभावना है। रिसॉर्टस और मोटल की परिचालन दक्षता और रणनीतिक प्रबंधन के कारण छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल का वित्तीय लाभ वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 2 करोड़ रूपए था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में लाभ पांच गुना बढ़कर 10 करोड़ रूपए हो गया है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन से स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार, 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य

सचिव डॉ. रोहित यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति 2026 के तहत अगले पांच वर्षों में 350 करोड़ रूपए. से अधिक के निवेश का अनुमान है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल लीजकम डेवलपमेंट मॉडल के तहत 17 पर्यटन संपत्तियों को निजी भागीदारी से आउटसोर्स कर 200 करोड़ रूपए का निवेश आकर्षित करने की योजना बना रही है, जिससे सैकड़ों स्थानीय व्यक्तियों के लिए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। राज्यभर में 500 नए होमस्टे विकसित करने का लक्ष्य है। इसी तरह चित्रकोट में टेंट सिटी के विकास की योजना है, जिसके तहत चित्रकोट फॉल्स के पास साहसिक गतिविधियों के साथ कम से कम 50 लक्जरी टेंट लगाए जाएंगे। फिक्की के सहयोग से छत्तीसगढ़ ट्रैवल मार्ट नामक एक वार्षिक फ्लैगशिप कार्यक्रम स्थापित किया जाएगा। यह आयोजन बीटूबी पर्यटन को बढ़ावा देने पर केन्द्रित होगा, जिसके तहत भारतीय राज्यों के 200 से अधिक टूर ऑपरेटरों को आकर्षित करने योजना है।
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की उपलब्धियां

संस्कृति एवं पुरातत्त्व के संचालक श्री विवके आचार्य ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के कलाकारों, साहित्यकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन किया जा रहा है, जिससे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सके। उन्होंने बताया कि चिन्हारी पोर्टल मंे पंजीकृत 141 कलाकारों एवं साहित्यकारों को वित्तीय वर्ष-2024-25 में लगभग 34 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 130 कलाकारों को लगभग 31 लाख रूपए की राशि पेंशन के रूप में प्रदान की गई। इसी तरह कलाकार कल्याण कोष योजना के अंर्तगत कलाकारों और साहित्यकारों अथवा उनके परिवार के सदस्यों की बीमारी, दुर्घटना एवं मृत्यु की स्थिति में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 08 अर्थाभाव ग्रस्त साहित्यकारों/कलाकारों को 2 लाख रूपए एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 44 प्रकरणों हेतु 14 लाख रूपए स्वीकृत किया गया है। राज्य शासन छत्तीसगढ़ के कलाकारों एवं साहित्यकारों के प्रत्येक सुख-दुख मेें साथी है, तथा संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ राज्य के कलाकारों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। 

बस्तर पंडुम

          छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग द्वारा बस्तर पंडुम 2026 का आयोजन बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए किया जा रहा है। यह उत्सव तीन चरणों में 10 जनवरी से 9 फरवरी 2026 तक चलेगा। जनजातीय नृत्य, लोकगीत, नाट्य, वाद्य यंत्र, वेश-भूषा-आभूषण, पूजा पद्धति, हस्तशिल्प, चित्रकला, जनजातीय पेय, पारंपरिक व्यंजन, क्षेत्रीय साहित्य, वन-आधारित औषधीय ज्ञान, पर्यटन और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी।

पुरातत्व क्षेत्र की उपलब्धियां

       छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी।

        भारत भवन विविध कला एवं सांस्कृतिक केन्द्र, राज्य अभिलेखागार, राजकीय मानव संग्रहालय एवं स्वामी विवेकानंद स्मारक संग्रहालय की स्थापना की योजना है।
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