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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने धरमजयगढ़ में 62.36 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले धरमजयगढ़ प्रवास के दौरान रायगढ़ जिलेवासियों को 62 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें 42 करोड़ 99 लाख रुपए की लागत से 45 लोकार्पण कार्य एवं 19 करोड़ 36 लाख रुपए की लागत से 70 कार्यों का भूमिपूजन शामिल है। 


    मुख्यमंत्री श्री साय ने 5 करोड़ 25 लाख 11 हजार रुपए की लागत से धरमजयगढ़ के पानीखेत से ऐडुकला मार्ग पर भेंगारी नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य एवं 6 करोड़ 39 लाख 6 हजार रुपए की लागत से लैलूंगा के पाकरगांव मार्ग पर खारून नदी पर पुल निर्माण कार्य, 28 करोड़ 53 लाख 29 हजार रुपए की लागत से खरसिया, लैलूंगा एवं धरमजयगढ़ क्षेत्र में सिंगल विलेज नलजल प्रदाय योजना, रेट्रोफिटिंग नल जल प्रदाय योजना एवं सोलर आधारित नलजल प्रदाय योजना के कार्य, धरमजयगढ़ के बहिरकेला एवं लैलूंगा के लमडांड में  75-75 लाख रुपए की लागत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विकासखण्ड घरघोड़ा के ग्राम कोनपारा में 7 लाख की लागत से निर्मित सामुदायिक भवन तथा धरमजयगढ़ के उपकेन्द्र खडग़ांव में 1 करोड़ 25 लाख रुपए की लागत से सीएसपीडीसीएल 33/11 केवी, 3.15 एमव्हीए कार्य का लोकार्पण किया। 

    इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने 13 करोड़ 28 लाख 36 हजार रुपए की लागत से जिले के 7 जगह धौराभांठा, तमनार, लैलूंगा, घटगांव, घरघोड़ा, बाकारूमा एवं धरमजयगढ़ में पो.मै.आदिवासी बालक छात्रावास भवन निर्माण कार्य, 20 लाख 33 हजार रुपए की लागत से धरमजयगढ़ के स्थल कक्ष क्रमांक 643 आर.एफ. में वॉच टॉवर तथा 10 लाख 88 हजार रुपए की लागत से कक्ष क्रमांक 11 आर.एफ.कुमरता में पेट्रोलिंग कैम्प निर्माण कार्य, धरमजयगढ़ विकासखंड के विभिन्न ग्राम पंचायतों में 2 करोड़ 54 लाख 95 हजार रुपए की लागत से पुलिया, सीसी रोड, फुट वे निर्माण, आरसीसी पुलिया निर्माण, शेड निर्माण, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन एवं मंगल भवन के कार्य के साथ ही लैलूंगा, धरमजयगढ़ एवं खरसिया विधानसभा क्षेत्रों में 3 करोड़ 22 लाख 22 हजार रुपए की लागत से 44 स्वास्थ्य केंद्रों के मरम्मत कार्यों का भूमिपूजन किया।
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छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी में मचेगी दही-हांडी की धूम, 11 लाख के इनाम के लिए जुटेंगे देशभर के गोविंदा

छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी रायपुर की पावन भूमि गुढ़ियारी एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार है। सार्वजनिक दही हांडी उत्सव समिति एवं श्री हनुमान मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में, भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर, दही-हांडी उत्सव का 16वां भव्य आयोजन किया जा रहा है। समिति के संयोजक श्री बसंत अग्रवाल ने बताया कि यह विशाल 7 प्रतियोगिता दिनांक 17 अगस्त 2025, दिन रविवार को शाम 04 बजे से अवधपुरी मैदान, श्री नगर रोड, गुढ़ियारी में आयोजित होगी। विजेताओं को कुल इनाम राशि 11 लाख जिसमे पुरुष दही हांडी 7 लाख, महिला दही हांडी 2 लाख, और ग्रीस युक्त खंभा हांडी 2 लाख रुपये है और 50 लोगों टोली को 11 हजार रुपये और 100 लोगों की टोली को 21 हजार रुपए सांत्वना पुरस्कार राशि रखी गई है, जो इस आयोजन को प्रदेश का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित दही-हांडी उत्सव बनाती है।


देशभर से जुटेंगी गोविंदा टोलियां

इस उत्सव की लोकप्रियता अब केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रही। संयोजक बसंत अग्रवाल के अथक प्रयासों और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि आज यह आयोजन एक राष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से गोविंदा टोलियां प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आ रही हैं। समिति के सह-संयोजक हेमेंद्र साहू ने बताया कि अब तक रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बेमेतरा, कवर्धा की 30 स्थानीय टोलियों समेत कई महिला टोलियों ने भी अपना पंजीयन करा लिया है। इसके अलावा महाराष्ट्र, इंदौर तथा जबलपुर की प्रसिद्ध गोविंदा टोलियों ने भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित की है। यह प्रतियोगिता सभी के लिए पूर्णतः निःशुल्क है।

सितारों से सजेगी मनोरंजन की शाम

 हर वर्ष की तरह इस साल भी समिति ने कृष्ण भक्तों के मनोरंजन का विशेष ध्यान रखा है। गोविंदा टोलियों के उत्साहवर्धन और दर्शकों के मनोरंजन के लिए देश के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। इस बार मंच पर इंडियन आइडल चैंपियन पवनदीप राजन अपनी सुरीली आवाज का जादू बिखेरेंगे, तो वहीं विश्व विख्यात भजन गायिका गीता बेन रबारी अपने भजनों से पूरे माहौल को कृष्णमय कर देंगी। आपको बता दें कि गीता बेन रबारी भारत सहित देश विदेश की महिलाओं में काफी लोकप्रिय है।साथ ही, राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित छत्तीसगढ़ की लोकप्रिय गायिका पूनम-दिव्या तिवारी भी अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगी। ओडिशा के कलाकारों द्वारा पारंपरिक "घंटा बाजा" और ग्रीस युक्त खंभे पर चढ़ने की प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी।


एक छोटे आयोजन से विशाल उत्सव तक का सफर

संयोजक बसंत अग्रवाल ने इस आयोजन के सफर को याद करते हुए बताया, "हमने यह यात्रा सन 2010 में महावीर स्कूल के पास एक छोटे से मैदान से शुरू की थी। तब मोहल्ले की ही कुछ समितियां जैसे मुर्रा भट्टी, सतनामी पारा, सुक्रवारी बाजार की टोलियां भाग लेती थीं। आप सभी के सहयोग और भगवान श्री कृष्ण के आशीर्वाद से आज यह आयोजन एक विशाल रूप ले चुका है।" दो वर्ष कोरोना काल के कारण यह आयोजन संभव नहीं हो पाया था, लेकिन अब यह अपने 16वें वर्ष में पूरी भव्यता के साथ लौट आया है।

सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम

समिति ने हजारों की संख्या में आने वाले दर्शकों और गोविंदा टोलियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। दर्शकों के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रशासन के सहयोग से चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहेगा। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्राथमिक उपचार केंद्र और एम्बुलेंस की व्यवस्था भी मौके पर मौजूद रहेगी। समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रतियोगिता के दौरान किसी भी गोविंदा टोली के साथ होने वाली दुर्घटना की जिम्मेदारी स्वयं टोली की होगी, इसके लिए समिति जिम्मेदार नहीं होगी।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का संकल्प – विकास का अधूरा सपना अब होगा पूरा, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में अधोसंरचना विकास को मिलेगी नई रफ्तार

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के  ग्राम पिपरिया में आयोजित लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि खैरागढ़-छुईखदान-गंडई  जिला का पूर्ववर्ती सरकार के दौरान गठन तो किया गया, लेकिन इसके बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास पर पूर्ववर्ती सरकार ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने इस कमी को दूर करने का बीड़ा उठाया है और अब खैरागढ़-छुईखदान-गंडई को सशक्त अधोसंरचना और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि यहां का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में  खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 611.21 करोड़ रुपये की लागत के 71 विकास कार्यों की ऐतिहासिक सौगात दी, जिसमें 470.98 करोड़ रुपये की लागत से 18 कार्यों का भूमिपूजन और 140.23 करोड़ रुपये की लागत से 53 कार्यों का लोकार्पण शामिल है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इन विकास कार्यों से विकसित खैरागढ़ का सपना साकार होने की दिशा में ठोस शुरुआत हो गई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिले के बुजुर्गों, युवाओं, माताओं और बहनों ने जो सपने संजोए हैं, उन्हें पूरा किया जाएगा। उन्होंने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए पैलीमेटा को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने, छुुईखदान में 50 लाख रुपये की लागत से उच्च स्तरीय पानी की टंकी निर्माण, पान की खेती को बढ़ावा देने के लिए ‘पान कैफे’ खोलने, खैरागढ़ में 500 सीटर सर्वसुविधायुक्त ऑडिटोरियम निर्माण और मुढ़ीपार में महाविद्यालय की स्थापना की घोषणाएं कीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि इन कार्यों को आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खैरागढ़, राजनांदगांव, कवर्धा और मानपुर-मोहला से उनका भावनात्मक और आत्मीय जुड़ाव रहा है। अब, जब उन्हें प्रदेश की बागडोर मिली है, वे पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विगत डेढ़ वर्षों में सरकार ने हर वर्ग के कल्याण के लिए योजनाओं को तेजी से धरातल पर उतारा है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई गारंटियों को साकार करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जिससे उन्हें सीधे और लाभकारी मूल्य का लाभ मिल रहा है। इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं और इनका निर्माण तीव्र गति से हो रहा है, जिससे गांवों में राजमिस्त्री, सेंटरिंग प्लेट निर्माण और अन्य निर्माण कार्य से जुड़े कुशल श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।

महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने हेतु ‘महतारी वंदन योजना’ को एक क्रांतिकारी पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि शीघ्र ही इसके पुनः फार्म भरवाए जाएंगे। वर्तमान में इस योजना से प्रदेश की 70 लाख महिलाएं प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्राप्त कर रही हैं और कई महिलाएं अपना व्यवसाय भी प्रारंभ कर चुकी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में खरीदी दरों में वृद्धि, प्रदेश के 5.62 लाख कृषि भूमिहीन मजदूरों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 22 हजार श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराए जाने का भी उल्लेख किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता के सहयोग से खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिला शीघ्र ही मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापक विकास के साथ प्रदेश के अग्रणी जिलों में शामिल होगा।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार देश की पहली सरकार है, जो किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान की खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें शत-प्रतिशत क्रियान्वित करना है, ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंच सके।

इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, सांसद श्री संतोष पांडेय, खैरागढ़ विधायक श्रीमती यशोदा वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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भारत सरकार द्वारा अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न

 खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार द्वारा खाद्यान्न उपार्जन प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता तथा तकनीकी समावेश को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अधिप्राप्ति सुधारों पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन नवा रायपुर में किया गया, जिसमें प्रदेश के खाद्य, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हुए। कार्यशाला के मुख्य अतिथि भारतीय खाद्य निगम के सीएमडी श्री आशुतोष अग्निहोत्री, भारत सरकार की संयुक्त सचिव सुश्री शिखा तथा छत्तीसगढ़ की खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।


इस अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों द्वारा कस्टम मिलिंग में नवाचार, 10 प्रतिशत ब्रोकन चावल के संबंध में नवीन निर्देश, राइस मिलों के संयुक्त भौतिक सत्यापन की नई मानक संचालन प्रक्रिया, सेंट्रल फूड प्रोक्योरमेंट पोर्टल तथा सेंट्रल फूड स्टोरेज पोर्टल में खाद्यान्न के उपार्जन व वितरण जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें विभिन्न जिलों के जिला कलेक्टर, खाद्य अधिकारी एवं जिला विपणन अधिकारी भी शामिल हुए।

भारत सरकार की संयुक्त सचिव  सुश्री शिखा ने राइस मिलों में ब्रोकन चावल के संबंध में शासन स्तर पर जारी पॉलिसी की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में 25 प्रतिशत तक के ब्रोकन चावल को यांत्रिक उन्नयन के माध्यम से 10 प्रतिशत तक लाने और शेष ब्रोकन चावल को खुले बाजार में विक्रय करने की योजना लागू की जाएगी। भारत सरकार के मार्गदर्शन में भारतीय खाद्य निगम और छत्तीसगढ़ खाद्य विभाग के समन्वय से सेंट्रल पूल अंतर्गत चावल उपार्जन की गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके तहत जून माह में प्रदेश को चावल के निराकरण हेतु 188 रैक उपलब्ध कराए गए, जिससे लगभग 6 लाख मीट्रिक टन चावल का भंडारण संभव हुआ है, और एफसीआई के माध्यम से प्रदेश में उपार्जित चावल कर्नाटक, तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वितरित किया जा रहा है। 

कार्यशाला में बताया गया कि कस्टम मिलिंग में पारदर्शिता तथा वर्तमान व्यवस्था एवं नीतिगत सुधार हेतु समय-समय पर संयुक्त भौतिक सत्यापन की मानक संचालन प्रक्रिया को अद्यतन किया गया है तथा अनिवार्य संयुक्त भौतिक सत्यापन हेतु राइस मिलों के चयन के लिए स्वचालन एवं सॉफ्टवेयर आधारित पद्धति अपनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के लगभग 25 लाख किसान 2,739 उपार्जन केंद्रों में समर्थन मूल्य पर धान बेचते हैं, और इन केंद्रों के अधोसंरचनात्मक सुधार पर भारत एवं राज्य सरकार सतत निगरानी रख रही है, जिसके लिए पीसीएसएपी सॉफ्टवेयर के माध्यम से उपार्जन केंद्रों में किए गए सुधार की प्रविष्टि करने संबंधी प्रशिक्षण दिया गया। धान उपार्जन में किए गए अतिरिक्त व्यय का दावा भारत सरकार को ऑनलाइन स्कैन मॉड्यूल के जरिए भेजने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई, जिससे दावों का शीघ्र निपटारा संभव होगा, साथ ही धान उपार्जन एवं चावल भंडारण हेतु रूट ऑप्टिमाइजेशन पर भी चर्चा की गई। भारत सरकार के अधिकारियों ने अतिरिक्त मिनिमम थ्रेशहोल्ड पैरामीटर का शत-प्रतिशत अनुपालन करने पर प्रदेश की सराहना की। 

प्रदेश में धान उपार्जन एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली में किए गए नवाचारों, चावल उत्सव, टोकन तुहर हाथ तथा बस्तर क्षेत्र में संचालित नियद नेल्लानार योजना की जानकारी खाद्य सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले ने भारत सरकार के अधिकारियों को जानकारी दी।

आगामी खरीफ वर्ष में धान उपार्जन हेतु किसानों के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य किया गया है, जिससे फर्जी खरीदी पर नियंत्रण होगा, और इस संबंध में जिला कलेक्टरों को आगामी माह में शत-प्रतिशत पंजीयन कराने हेतु प्रशिक्षित किया गया। कार्यशाला के समापन अवसर पर भारत सरकार के अधिकारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। 

कार्यशाला में श्री दलजीत सिंह, कार्यकारी निदेशक, अधिप्राप्ति, भा.खा.नि., डॉ. अश्विनी कुमार गुप्ता, कार्यकारी निदेशक, पश्चिमी अंचल, श्री मातेश्वरी प्रसाद मिश्रा, भारत सरकार द्वारा भी आवश्यक प्रस्तुतिकरण एवं मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर विपणन संघ एवं नागरिक आपूर्ति निगम की प्रबंध संचालक श्रीमती किरण कौशल, संचालक खाद्य श्री कार्तिकेय गोयल, पंजीयक सहकारिता श्री कुलदीप शर्मा, महाप्रबंधक भा.खा.नि. श्री देवेश यादव सहित अन्य अधिकारी  उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आह्वान – हर घर तिरंगा से गूंजे छत्तीसगढ़

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि तिरंगा यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति का एक महान अनुष्ठान है, जो भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी आन-बान-शान है, इसकी रक्षा और मान-सम्मान के लिए हर नागरिक को दृढ़संकल्पित होना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब हर घर तिरंगा फहराएगा और भारत आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से और अधिक सशक्त बनेगा।


मुख्यमंत्री श्री साय ने ‘भारत माता की जय’ और ‘छत्तीसगढ़ महतारी की जय’ के उद्घोष के साथ जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत एक सशक्त और सम्मानित राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने हाल ही में पहलगाम में हुए कायराना हमले के बाद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हमारे वीर जवानों द्वारा दिखाए गए साहस और पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है, जिसने तिरंगे की शान को और ऊंचा किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बीते डेढ़ वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार एरिया डॉमिनेशन कर नक्सलियों का प्रभुत्व समाप्त किया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी नक्सलियों का लाल झंडा लहराता था, आज वहां तिरंगा शान से लहरा रहा है।  कई संवेदनशील गांवों में बरसों बाद गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुनः तिरंगा फहराया गया है, जो शांति, विकास और सुरक्षा का नया संदेश दे रहा है।

विकसित भारत 2047 और ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’ विजन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि तिरंगे की असली गरिमा तब और बढ़ेगी जब देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ ने भी ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ अंजोर’ विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है, जिसमें प्रदेश के समग्र विकास का रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने घरों पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता संग्राम के वीरों का स्मरण करें।

भव्य तिरंगा यात्रा – एकता और उत्साह का अद्भुत संगम

उल्लेखनीय है कि आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आह्वान पर चलाए जा रहे हर घर तिरंगा अभियान के तहत रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। रायपुर के शहीद स्मारक भवन से तेलीबांधा तक निकली तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं शामिल हुए और हजारों नागरिकों के साथ कदम से कदम मिलाकर देशभक्ति का संदेश दिया। यात्रा के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से पूरा मार्ग गूंज उठा।

इस अवसर पर रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि तिरंगा हमारा मान, अभियान और पहचान है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश में तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं।  उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रगति और खुशहाली की ओर अग्रसर है। यह तिरंगा यात्रा उन वीर सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने इसकी रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर किया। कार्यक्रम में विभिन्न सैन्य अभियानों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रदेश के भूतपूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया।

विधायक श्री किरण सिंह देव  ने कहा कि तिरंगा हमारी पहचान और हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यह हमें एकजुट करता है और हमें याद दिलाता है कि हम सब एक भारत हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ तेजी से विकास के पथ पर अग्रसर है।

तिरंगा यात्रा में विधायक श्री सुनील सोनी, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू, छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, सीएसआईडीसी के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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बस्तर के विकास में एक और क्रांतिकारी कदम

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल को रेलवे से सशक्त कनेक्टिविटी देने वाली दल्लीराजहरा–रावघाट रेल परियोजना का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। 95 किलोमीटर लंबी इस परियोजना के तारोकी से रावघाट खंड की लंबाई 77.5 किलोमीटर है, जिसमें यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। बड़े और छोटे पुलों के साथ-साथ ट्रैक बिछाने का काम अब अंतिम चरण में है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के दिसंबर 2025 तक पूर्ण होने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है।


इस रेल परियोजना के पूरा होने से बस्तर क्षेत्र पहली बार राज्य की राजधानी से सीधे रेलवे द्वारा जुड़ जाएगा। इससे बस्तर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और खनिज परिवहन की दिशा में नई गति मिलेगी। बस्तर के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में यह कनेक्टिविटी एक बड़ा बदलाव लाएगी और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक होगी।

यह रेलवे लाइन रावघाट लौह अयस्क खदानों और सेल/भिलाई इस्पात संयंत्र के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। वर्तमान में दल्लीराजहरा की खदानों से लौह अयस्क की उपलब्धता घट रही है, ऐसे में यह परियोजना न केवल औद्योगिक जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि क्षेत्र के आर्थिक विकास की रीढ़ साबित होगी। रेल विकास निगम लिमिटेड के अनुसार, 17.5 किलोमीटर भूमि अधिग्रहण कार्य संपन्न हो चुका है। 21.94 लाख घन मीटर मिट्टी कार्य में से अधिकांश पूरा हो चुका है। तीन में से दो बड़े पुल तैयार हो गए हैं, जबकि 61 में से 55 छोटे-मोटे पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। बैलेस्ट प्रोक्योरमेंट और भवन निर्माण कार्य भी अगस्त–सितंबर 2025 तक पूर्ण होने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि कुल 95 किलोमीटर लंबे इस रेलमार्ग में 16 प्रमुख पुल, 19 रोड ओवर ब्रिज, 45 रोड अंडर ब्रिज और 176 छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। केवल 17.5 किलोमीटर लंबे तारोकी–रावघाट खंड में ही 3 प्रमुख पुल, 5 रोड ओवर ब्रिज, 7 रोड अंडर ब्रिज और 49 छोटे पुल बनाए जा रहे हैं। इन सभी कार्यों में तकनीकी सटीकता और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि यह परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित रहे।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इस क्षेत्र में निर्माण कार्य एक बड़ी चुनौती रहा है। परियोजना को बाधित करने के लिए नक्सलियों द्वारा किए गए 12 हमलों में अब तक 4 मजदूरों की मौत और 2 सुरक्षाकर्मियों की शहादत हो चुकी है। इसके अलावा निर्माण कार्य में प्रयुक्त उपकरणों और मशीनों में आगजनी की घटनाएं भी हुई हैं। इसके बावजूद, एसएसबी सुरक्षा कवच मिलने के बाद परियोजना में उल्लेखनीय प्रगति हुई। परियोजना के पूरा होने के बाद बस्तर क्षेत्र में खनिज परिवहन, रोजगार, स्थानीय व्यापार और यात्री सुविधाओं में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। यह रेलवे लाइन खनिज परिवहन को नई दिशा देने के साथ-साथ पूरे क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य करेगी। इससे क्षेत्र में निवेश के अवसर बढ़ेंगे और बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा।

दिसंबर 2025 तक तारोकी–रावघाट खंड पर ट्रेन परिचालन शुरू होने की संभावना व्यक्त की गई है। इस परियोजना के पूरा होते ही बस्तर अंचल एक नई विकास यात्रा पर अग्रसर होगा, जहां रेल पटरी पर दौड़ती गाड़ियां न केवल खनिज और सामान पहुंचाएंगी, बल्कि रोजगार, अवसर और विकास का संदेश भी लेकर आएंगी।
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पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: प्रदीप पटेल के छत पर हर महीने बन रही 350 से 400 यूनिट बिजली

छत्तीसगढ़ में पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से समान्य नागरिक भी अब बिजली उत्पादक बनते जा रहें है। अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर पावर प्लांट लगाने से लोगों की बिजली की समस्या का समाधान तो हो ही रहा है, साथ ही उपयोग के बाद बची हुई बिजली को बेचकर उन्हें अच्छा-खासा फायदा भी हो रहा है। रायगढ़ के सावित्री नगर में रहने वाले श्री प्रदीप पटेल भी ऐसे ही एक बिजली उत्पादक बन गये है। श्री प्रदीप पटेल ने अपने घर पर 3 किलोवॉट का सौर पैनल स्थापित कर बिजली बिल से राहत पाई है। यह पैनल सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत लगाया गया है। इसमें उन्हें केंद्र सरकार से 78,000 रुपए और राज्य सरकार से 30,000 रुपए की मिलाकर कुल एक लाख आठ हजार रूपए की सब्सिडी मिली है। आवेदन करने के मात्र 10 दिन के भीतर ही सब्सिडी की राशि उनके खाते में जमा हो गई। श्री पटेल के यहां प्रतिमाह 350-400 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। उनका औसत मासिक खपत 500 यूनिट है, जिससे उन्हें केवल 100-150 यूनिट का ही बिल चुकाना पड़ता है। उन्होंने योजना की सराहना करते हुए अन्य नागरिकों से भी इसका लाभ उठाने की अपील की और शासन-प्रशासन को धन्यवाद दिया।


जिले के 197 से अधिक घरों में सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता

  प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत रायगढ़ जिले में अब तक 197 से अधिक घरों में सौर रूफटॉप सिस्टम स्थापित हो चुके हैं। इनसे सैकड़ों परिवारों को बिजली बिल से मुक्ति मिली है और वे ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं। स्थापित सोलर रूफटॉप सिस्टम से प्रत्येक घर को प्रतिमाह औसतन 3,000 रुपए से 5,000 रुपए की सीधी बचत हो रही है। योजना से न केवल आर्थिक लाभ हो रहा है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दिया जा रहा है।

योजना की वित्तीय सहायता और उत्पादन क्षमता

 पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत स्थापित 1 किलोवॉट प्लांट में औसतन 120 यूनिट प्रतिमाह माह उत्पादन होता है। इसने 30,000 रुपए सब्सिडी केंद्र से और 15,000 रुपए राज्य से प्रदाय किया जाता है। इसी तरह 2 किलोवॉट प्लांट में औसतन 240 यूनिट प्रतिमाह उत्पादन और सब्सिडी केंद्र से 60,000 रुपए और राज्य से 30,000 रुपए प्रदाय किया जाता है। 3 किलोवॉट प्लांट में औसतन 360 यूनिट प्रतिमाह माह उत्पादन एवं केंद्र से 78,000 रुपए और राज्य से 30,000 रुपए प्रदाय किया जाता है। उपभोक्ता को शेष राशि स्वयं वहन करनी होती है, जो ऋण सुविधा के माध्यम से भी उपलब्ध है।

ऑनलाइन प्रक्रिया से करें आवेदन

योजना का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत दिया जा रहा है। उपभोक्ताhttps://pmsuryaghar.gov.in पोर्टल, पीएम सूर्यघर मोबाइल ऐप, सीएसपीडीसीएल वेबसाइट, मोर बिजली ऐप या टोल फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर आवेदन कर सकते हैं। साथ ही नजदीकी सीएसपीडीसीएल कार्यालय में संपर्क भी कर सकते हैं। उपभोक्ता सौर प्लांट स्थापना हेतु वेंडर का चयन स्वयं ऑनलाइन कर सकते हैं।
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जन सुविधाओं का सतत विस्तार हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला अंतर्गत सारंगढ़ के शासकीय लोचन प्रसाद पांडे महाविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 96 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और 90 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमिपूजन कर जिले को 186 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगात दी।  

मुख्यमंत्री श्री साय ने जिले में विभिन्न जनसुविधाओं के विस्तार के लिए 13.40 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों की घोषणा मंच से की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने अपने उद्बोधन में कहा कि सांसद के रूप में उन्होंने लंबे समय तक सारंगढ़ की सेवा की है और अब प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में छत्तीसगढ़ को विकास पथ आर अग्रसर करने के दायित्व को विगत डेढ़ वर्षों से पूर्ण लगन और समर्पण के साथ निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की गारंटियों को पूरा करने की दिशा में सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान 3,100 रुपये की दर से खरीदा जा रहा है। 18 लाख प्रधानमंत्री आवास निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है और तीव्र गति से हितग्राहियों के मकानों का निर्माण हो रहा है, जिसकी गति इतनी तेज है कि गांवों में राजमिस्त्री और सेंटरिंग प्लेट की भी कमी महसूस होने लगी है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्रदेश की 70 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल मिला है। हर माह मिलने वाली राशि से महिलाएं अपना खुद का व्यवसाय भी प्रारंभ कर रही हैं। सारंगढ़ जिले के दानसरा की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से अपने गांव में राम मंदिर निर्माण की पहल की है, जिसे आज पूरा प्रदेश जानता है। तेंदूपत्ता खरीदी के दाम बढ़ाए गए हैं। 5.62 लाख कृषि भूमिहीन मजदूरों को 10-10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। श्री रामलला दर्शन योजना से अब तक 22 हजार श्रद्धालु अयोध्याधाम में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर चुके हैं।

राजस्व और जिले के प्रभारी मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि हमारी सरकार पिछले डेढ़ वर्षों में प्रदेश के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सभी जगह विकास कार्यों को गति देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में करोड़ों की विकास कार्यों की सौगात मिलने से यहां जनसुविधाओं में वृद्धि होगी। 

सांसद श्री राधेश्याम राठिया ने कहा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकास कार्यों और अधोसंरचना विस्तार के कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ पीएम आवास जैसे कार्यों को प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। 

जगदलपुर विधायक श्री किरण देव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के जनकल्याणकारी कार्यों को जमीन पर उतारने के साथ प्रदेश में विकास कार्यों को नई ऊंचाई देने का कार्य मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में निरंतर जारी है।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले को 186 करोड़ की सौगात मिली है, जो जिले में अधोसंरचना विकास को मजबूती प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने  इस अवसर पर  भारत माता चौक से गढ़ चौक होते हुए कोसीर चौक तक गौरव पथ निर्माण हेतु 5 करोड़ रुपये, नगर पालिका सारंगढ़ में गार्डन निर्माण हेतु 1 करोड़ रुपये, सारंगढ़ में पी.जी. कॉलेज हेतु भवन निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपये, इंडोर स्टेडियम सारंगढ़ के जीर्णोद्धार हेतु 2.5 करोड़ रुपये, बालक छात्रावास सारंगढ़ के मरम्मत हेतु 1 करोड़ रुपये, नवीन जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा हेतु कक्ष निर्माण के लिए 40 लाख रुपये, बस स्टैंड सारंगढ़ में सुविधा विस्तार हेतु 50 लाख रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की।

कार्यक्रम में  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अध्यक्ष श्री अनुराग सिंहदेव  सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में करेंगे ध्वजारोहण

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह में राजधानी रायपुर के पुलिस मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और परेड की सलामी लेंगे। बस्तर जिला मुख्यालय में केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, बिलासपुर में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव तथा दुर्ग में उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।


सामान्य प्रशासन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, सरगुजा में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम, गरियाबंद में खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल, बालोद में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, कोरबा में उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, जशपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायगढ़ में वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी, सूरजपुर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, जांजगीर-चांपा में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, बलौदाबाजार में सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, बेमेतरा में सांसद श्री विजय बघेल, कवर्धा में सांसद श्री संतोष पांडेय, बलरामपुर में सांसद श्री चिंतामणि महाराज, महासमुंद में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, सारंगढ़ में सांसद श्री राधेश्याम राठिया, सक्ती में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, बीजापुर में सांसद श्री महेश कश्यप, कांकेर में सांसद श्री भोजराज नाग, तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह ध्वजारोहण करेंगे।

मुंगेली जिला मुख्यालय में विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में विधायक श्री धरमलाल कौशिक, कोरिया में विधायक श्री अमर अग्रवाल, धमतरी में विधायक श्री अजय चंद्राकर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में विधायक श्रीमती रेणुका सिंह, कोंडागांव में विधायक सुश्री लता उसेंडी, नारायणपुर में विधायक श्री विक्रम उसेंडी, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में विधायक श्री राजेश मूणत, दंतेवाड़ा में विधायक श्री किरण देव और सुकमा जिला मुख्यालय में विधायक श्री धरमजीत सिंह स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण करेंगे।
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छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाली स्वच्छता दीदियों का पद-प्रक्षालन कर होगा सम्मान

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा बिलासपुर जिले में 12 अगस्त 2025 को आयोजित होने वाले ‘स्वच्छता संगम-2025’ में, छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाली स्वच्छता दीदियों का पद-प्रक्षालन कर उन्हें सम्मानित करेंगे। इस अवसर पर वे स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-25 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नगरीय निकायों को भी सम्मान प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री श्री साय  12 अगस्त को बिलासपुर के बहतराई स्थित इंडोर स्टेडियम में  260 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन करेंगे। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव,  केन्द्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री श्री तोखन साहू, विधायकगण श्री धरमलाल कौशिक, श्री अमर अग्रवाल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री दिलीप लहरिया, श्री सुशांत शुक्ला एवं श्री अटल श्रीवास्तव तथा बिलासपुर की महापौर श्रीमती पूजा विधानी उपस्थित रहेंगी। ‘स्वच्छता संगम’ में राज्य के सभी नगर निगमों के महापौर, सभापति, स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी सदस्य, नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी सदस्य, निगम आयुक्त, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगरीय निकायों के वरिष्ठ अभियंता तथा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के नोडल अधिकारी सहित नौ हजार स्वच्छता दीदियों को आमंत्रित किया गया है।


नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस. ने बताया कि ‘स्वच्छता संगम’ में शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली स्वच्छता दीदियों का पद-प्रक्षालन कर सम्मानित किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सात नगरीय निकायों को नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से पुरस्कृत होने का गौरव प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम में इन नगरीय निकायों के साथ ही संभाग स्तर पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 30 से अधिक नगरीय निकायों को भी सम्मान प्रदान किया जाएगा।

स्वच्छता संगम में नगरीय निकायों में स्वच्छता और शहरी सौंदर्यीकरण के मानकों को बढ़ाने हेतु राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का शुभारंभ किया जाएगा। इस प्रतियोगिता के माध्यम से शहरी स्वच्छता को सुदृढ़ करने के साथ ही सुशासन द्वारा प्रशासनिक कौशल में सुधार तथा नगरीय सौंदर्यीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल न केवल शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में सहायक होगी, बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता को भी संवर्धित करेगी। यह हर नगरीय निकाय के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों को स्वच्छता और शहरी सौंदर्यीकरण के क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

कार्यक्रम में तीन नगर निगम—बिरगांव, भिलाई-चरोदा और धमतरी—तथा 43 नगर पालिकाओं में ऑनलाइन संपत्ति कर जमा करने की सुविधा हेतु जीआईएस आधारित प्रॉपर्टी टैक्स लाइव पोर्टल का लोकार्पण किया जाएगा। इस प्रकार एक साथ 46 शहरों में ऑनलाइन संपत्ति कर जमा करने की सुविधा प्रारंभ होना, स्थानीय स्वशासन को आधुनिक बनाने और नागरिकों को घर बैठे सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे कर संग्रहण की गति में भी वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री श्री साय 63.57 करोड़ रुपये के 24 कार्यों का करेंगे लोकार्पण, 197 करोड़ रुपये के 25 कार्यों का करेंगे भूमिपूजन 

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ‘स्वच्छता संगम’ के अवसर पर 260 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन करेंगे। इसके अंतर्गत वे बिलासपुर जिले में विभिन्न विभागों के 63 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक की लागत के 24 निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 197 करोड़ रुपये से अधिक की लागत के 25 कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। कार्यक्रम में वे विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं चेक का वितरण भी करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय बिलासपुर के नूतन चौक में तीन करोड़ 85 लाख रुपये की लागत से निर्मित व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, कोनी में नौ करोड़ पांच लाख रुपये की लागत के एस.टी.पी., चार करोड़ 82 लाख रुपये की लागत के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के कन्या छात्रावास, छह करोड़ 29 लाख रुपये से निर्मित 3.6 किमी लंबाई के नगोई बस्ती से मोढ़े नाका मार्ग, 12 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत के सात किमी लंबाई के उसलापुर-दैजा मार्ग के चौड़ीकरण, मजबूतीकरण एवं डामरीकरण कार्य तथा पांच करोड़ 45 लाख रुपये की लागत के साढ़े तीन किमी लंबाई के मंगला भैंसाझार से दीनदयाल कॉलोनी लोखंडी रेलवे फाटक तक टू-लेन सड़क निर्माण कार्य का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही वे बिलासपुर जिले के 11 गांवों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत नल-जल योजना का भी शुभारंभ करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय दयालबंद में 26 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से एजुकेशन हब के अंतर्गत नालंदा परिसर एवं एकेडमिक ब्लॉक निर्माण कार्य, तथा मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के अंतर्गत अशोक नगर चौक से बिरकोरा मोड़ तक 17 करोड़ रुपये की लागत के गौरव पथ का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त वे मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना के तहत अरपा इंद्रासेतु से राम सेतु तक नौ करोड़ 74 लाख रुपये की लागत के अटल पथ निर्माण, और पांच करोड़ नौ लाख रुपये की लागत के मंगला चौक से आजाद चौक सड़क निर्माण का भूमिपूजन करेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय 11 करोड़ 56 लाख रुपये की लागत से शनिचरी-चांटीडीह मार्ग में अरपा नदी पर उच्च स्तरीय पुल, तीन करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से तखतपुर-बरेला के मध्य मनियारी नदी पर पुल, नौ करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से बहतराई, राजकिशोर नगर, लिंगियाडीह, देवरीखुर्द एवं सिरगिट्टी में संचालित जल आपूर्ति प्रणाली के उन्नयन कार्य, 34 करोड़ 16 लाख रुपये की लागत से 12.6 किमी लंबाई के बुटेना-धौंराभाटा मार्ग के मजबूतीकरण कार्य, दस करोड़ रुपये की लागत से अंग्रेजी माध्यम आदर्श महाविद्यालय भवन तथा बिलासपुर में 22 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से बनने वाले ऑडिटोरियम का भूमिपूजन करेंगे। इसके अलावा वे विजयपुर में छह करोड़ 81 लाख रुपये की लागत के एनीकट और बिलासपुर जिले के सोन से सोनसरी सबरिडेरा के बीच सात करोड़ 96 लाख रुपये की लागत के सरार नाला पर पुलिया सहित ढाई किमी लंबाई के सड़क निर्माण, साथ ही नगर निगम, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ की पहली महिला सांसद मिनीमाता की पुण्यतिथि पर उनके अविस्मरणीय योगदान को किया नमन

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद और महान समाजसेविका स्वर्गीय मिनीमाता जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन निस्वार्थ सेवा, अटूट साहस और सामाजिक परिवर्तन का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मिनीमाता जी ने वंचित वर्गों, महिलाओं, दलितों और गरीबों के अधिकारों की रक्षा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया और समाज में सम्मान, समानता एवं न्याय की नींव मजबूत की।


मुख्यमंत्री श्री साय ने स्मरण किया कि संसद में अपने कार्यकाल के दौरान मिनीमाता जी ने बाल विवाह, दहेज प्रथा और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध सशक्त और निर्भीक स्वर उठाया। उन्होंने मजदूरों के अधिकारों की रक्षा, महिला शिक्षा के प्रसार और सामाजिक समानता की स्थापना के लिए जो योगदान दिया, वह इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है। उनकी सादगी, संवेदनशीलता और सेवाभाव ने उन्हें जनमानस में अमिट स्थान दिलाया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मिनीमाता जी की विचारधारा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वर्तमान और भविष्य के लिए प्रकाशस्तंभ की तरह है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर, भाईचारे, समानता और न्याय पर आधारित एक सशक्त, समावेशी और प्रगतिशील छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
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कोनी-मोपका बायपास के पुनर्निर्माण हेतु 59.55 करोड़ रुपए की स्वीकृति

 छत्तीसगढ़ शासन के लोक निर्माण विभाग ने बिलासपुर जिले के कोनी-मोपका बायपास के पुनर्निर्माण के लिए 59 करोड़ 55 लाख 27 हजार रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान के अंतर्गत दी गई है।


लगभग 14 किलोमीटर लंबी इस सड़क की स्थिति विगत कई वर्षों से अत्यंत दयनीय थी। एनटीपीसी सीपत, स्पंज आयरन फैक्ट्रियों, कोलवाशरी और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ घने शहरी यातायात का भारी दबाव इस मार्ग से गुजरता है, जिससे सड़क अत्यधिक क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से इसके पुनर्निर्माण की माँग की जा रही थी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा इस परियोजना को बजट में प्राथमिकता दी गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अधोसंरचना विकास, विशेष रूप से सड़कों की मजबूती और गुणवत्ता, राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। जनसुविधा से जुड़े ऐसे कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी।

उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के उपरांत, विभाग ने मंत्रालय स्तर से वित्तीय स्वीकृति संबंधी परिपत्र प्रमुख अभियंता को जारी कर दिया है। साथ ही निर्माण कार्य को समय-सीमा के भीतर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।

श्री साव ने कहा कि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, कार्य प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि संपूर्ण परियोजना की सतत निगरानी सुनिश्चित की जाए और किसी भी स्तर पर निर्माण कार्य में त्रुटि पाए जाने पर जवाबदेही तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाए।

इस बायपास के पुनर्निर्माण से न केवल औद्योगिक क्षेत्रों की आवाजाही सुगम होगी, बल्कि शहरवासियों को भी भारी यातायात से राहत मिलेगी। राज्य शासन का यह निर्णय आमजन की बहुप्रतीक्षित माँग के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्वबोध को दर्शाता है।

लोक निर्माण विभाग द्वारा शीघ्र ही कार्यादेश जारी कर निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। शासन की मंशा है कि यह परियोजना उच्च गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण हो, ताकि नागरिकों को शीघ्र और स्थायी राहत प्रदान की जा सके।
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रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के अटूट बंधन का प्रतीक है – मुख्यमंत्री श्री साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन पर्व के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और परस्पर सौहार्द की मंगलकामना करते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता, समर्पण और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन का त्यौहार भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है, जिसमें बहनें अपने भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए रक्षा-सूत्र बांधती हैं, वहीं भाई भी बहनों की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेते हैं। रक्षाबंधन पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों को सशक्त करने वाला पर्व है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन केवल एक पारंपरिक त्यौहार नहीं है, बल्कि यह आपसी विश्वास, प्रेम, करुणा और दायित्वबोध की भावना को भी उजागर करता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर पर समाज में सौहार्द्र, भाईचारा और महिला सम्मान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए संकल्प लें।

मुख्यमंत्री श्री साय ने विशेष रूप से प्रदेश की बेटियों, बहनों और मातृशक्ति को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पावन पर्व सभी नागरिकों के जीवन में प्रेम, उमंग और एक नई ऊर्जा का संचार करेगा।
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दुबे जी के घर की छत पर सौर ऊर्जा से चलने वाला पावर प्लांट, घर का बिजली बिल हुआ शून्य, सरकार को भी कर रहे हैं बिजली की आपूर्ति

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना ने सौर ऊर्जा के माध्यम से अनेक घरों को रोशन किया है। बिलासपुर जिले के निवासी श्री शशांक दुबे ने अपने घर की छत पर एक पूर्ण सौर ऊर्जा पावर प्लांट स्थापित कर लिया है। इस सौर ऊर्जा संचालित प्लांट से न केवल उनका घर रोशन हो रहा है, बल्कि उनका बिजली बिल भी अब शून्य हो गया है। इतना ही नहीं, श्री दुबे अब सरकार को भी बिजली की आपूर्ति कर रहे हैं।


श्री दुबे ने बताया कि जब से उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाए हैं, तब से उनके घर का बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। सौर पैनलों के माध्यम से छत पर हो रहा बिजली उत्पादन उनके मासिक बिजली व्यय की पूर्णतः बचत कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी छत पर पाँच किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित है, जिससे हो रहे बिजली उत्पादन से उन्हें अब मासिक बिजली बिल की कोई चिंता नहीं रह गई है, साथ ही वे एक उत्पादक के रूप में बिजली की सप्लाई भी कर रहे हैं। सोलर पैनल लगवाने के पश्चात उनके घर का बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है।

श्री दुबे ने बताया कि पाँच किलोवाट सोलर पैनल लगवाने में उन्हें लगभग दो लाख रुपये की लागत आई, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा ₹78,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई है, और राज्य सरकार की ओर से भी शीघ्र ही ₹30,000 की अतिरिक्त सब्सिडी प्राप्त होने वाली है।

उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत केवल एक बार निवेश करना होता है, जिसके पश्चात 25 वर्षों तक निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति मिलती रहती है। योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु उपभोक्ता pmsuryaghar.gov.in पोर्टल या पीएम सूर्यघर ऐप के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं। दीर्घकालिक दृष्टि से यह योजना अत्यंत किफायती सिद्ध होती है, जिसमें बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी प्रदान की जाती है।

श्री दुबे ने यह भी बताया कि एक बार सोलर पैनल लगवाने के पश्चात इस पर किसी प्रकार का नियमित मेंटेनेंस खर्च नहीं आता, तथा सोलर पैनल लगाने वाली कंपनी द्वारा पाँच वर्षों तक नि:शुल्क सर्विसिंग की सुविधा दी जाती है। उन्होंने कहा कि यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी है। सौर ऊर्जा का उपयोग कर वे स्वच्छ (ग्रीन) ऊर्जा के उत्पादन में सहभागी बन रहे हैं, जिससे नवीनीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

श्री दुबे ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे इस योजना को अपनाएं, सौर ऊर्जा का उपयोग करें और बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनें। साथ ही, पर्यावरण संवर्धन में भी अपना सक्रिय योगदान दें।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को अपने घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह प्लांट नेट मीटरिंग के माध्यम से विद्युत ग्रिड से जुड़ता है, जिससे उपभोक्ता अपनी आवश्यकता से अधिक उत्पन्न बिजली को ग्रिड में भेज सकता है। इससे न केवल उपभोक्ता के घर का बिजली बिल शून्य हो जाता है, बल्कि ग्रिड को दी गई अतिरिक्त बिजली के बदले उन्हें आय भी प्राप्त होती है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जा रही है। इस योजना से उपभोक्ताओं को अधिक आमदनी, न्यूनतम बिजली बिल तथा नवीन रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही, नवीनीकृत ऊर्जा स्रोतों के प्रति जन-जागरूकता में भी वृद्धि होगी।
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छत्तीसगढ़ में शिक्षा, नवाचार और कौशल विकास के नए युग की शुरुआत – मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

 मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आज छत्तीसगढ़ में शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन के मध्य हुए त्रिपक्षीय एमओयू पर हस्ताक्षर के साक्षी बने। इस समझौते के अंतर्गत स्थापित होने वाले उद्यमिता केंद्र का निर्माण वर्ष 2025-26 में प्रारंभ होगा तथा इसे वर्ष 2027-28 तक पूर्ण रूप से क्रियाशील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।


गांव-गांव तक पहुंचेगी शिक्षा, कौशल और नवाचार की क्रांति: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि आज हस्ताक्षरित एमओयू से "छत्तीसगढ़ अंजोर विजन" को साकार करने में महत्वपूर्ण सहायता प्राप्त होगी। इस साझेदारी से प्रदेश में गांव-गांव तक शिक्षा, कौशल विकास और नवाचार की क्रांति पहुंचेगी, जो युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत "श्रीमती मिथिलेश अग्रवाल नवाचार एवं उद्यमिता उत्कृष्टता केंद्र" की स्थापना की जाएगी, जो युवाओं को शोध, प्रयोग और उद्यमिता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का कार्य करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह उत्कृष्टता केंद्र केवल आईआईएम या एनआईटी के विद्यार्थियों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव-गांव के युवाओं को भी लाभान्वित करे। मुख्यमंत्री ने उद्योग जगत से भी इस शिक्षा और कौशल विकास के आंदोलन से जुड़ने का आग्रह किया।

संसाधन-आधारित नहीं, नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करेगा छत्तीसगढ़: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ अब कोर सेक्टर के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फार्मा, डिफेंस, एयरोस्पेस और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेज़ी से अग्रसर हो रहा है। बीते 20 महीनों में किए गए साढ़े तीन सौ से अधिक सुधारों के परिणामस्वरूप राज्य में निवेश का अनुकूल वातावरण निर्मित हुआ है और केवल आठ माह में 6.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि हम सभी यह संकल्प लें कि छत्तीसगढ़ को संसाधन-आधारित नहीं, बल्कि नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने वाला राज्य बनाएंगे – जहाँ युवा बदलाव के वाहक बनें और उद्यमिता से समाज को दिशा दें।

किसानों के लिए बनेगा देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र

मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन के सह-संस्थापक एवं चेयरमैन श्री रामदेव अग्रवाल ने कार्यक्रम में रायपुर में किसानों हेतु देश का सबसे बड़ा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ एक अत्यंत समृद्ध प्रदेश है, जिसमें विकास की अपार संभावनाएं हैं। उनका फाउंडेशन इस विकास यात्रा में पूर्णतः समर्पित है। श्री अग्रवाल ने बताया कि फाउंडेशन ने अपनी कुल निधि का 10 प्रतिशत समाज कल्याण के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया है, जिसका उपयोग शिक्षा, कौशल और कृषि से संबंधित कार्यों में किया जाएगा।

मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन का 172 करोड़ रुपये का योगदान

मोतीलाल ओसवाल फाउंडेशन ने आईआईएम रायपुर एवं एनआईटी रायपुर को कुल 172 करोड़ रुपये का दान देने की घोषणा की है। इसमें से 101 करोड़ रुपये आईआईएम रायपुर को तथा 71 करोड़ रुपये एनआईटी रायपुर को प्रदान किए जाएंगे।

इस दानराशि से आईआईएम रायपुर में "ओसवाल छात्रावास" के 202 कमरे और "दाऊ राम गोपाल अग्रवाल नॉलेज सेंटर" की स्थापना की जाएगी। इसके अतिरिक्त अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से छह अंतरराष्ट्रीय एमबीए कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएंगे।

इसी प्रकार, एनआईटी रायपुर में "श्रीमती मिथिलेश अग्रवाल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" की स्थापना की जाएगी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ब्लॉकचेन और क्लीन एनर्जी जैसे डीप-टेक क्षेत्रों पर कार्य करेगा।

यह केंद्र वर्ष 2030 तक 10,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण देगा, 250 से अधिक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट करेगा और 5,000 से अधिक कुशल नौकरियों का सृजन करेगा। यह पहल छत्तीसगढ़ की औद्योगिक आवश्यकताओं – विशेषकर खनन, इस्पात और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों – के अनुरूप विकसित की गई है, और यह स्थानीय उद्योगों के साथ मिलकर वास्तविक समस्याओं के समाधान पर केंद्रित रहेगी।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारीक, उच्च शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विजय दयाराम के, एनआईटी रायपुर के चेयरमैन डॉ. सुरेश हावरे, आईआईएम रायपुर के चेयरमैन श्री पुनीत डालमिया, एनआईटी के निदेशक श्री एन. वी. प्रसन्ना राव, आईआईएम रायपुर के प्रभारी निदेशक डॉ. संजीव पाराशर, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
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पंजाब एंड सिंध बैंक द्वारा शुरू की गई नवीन पहलें

पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रधान निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री स्वराज कुमार शाव ने रायपुर अंचल के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर का भ्रमण किया। उनके साथ बैंक के प्रधान महा प्रबंधक श्री राकेश कुमार रॉय (महाप्रबंधक), तथा श्री तार चंद माना (अंचलिक प्रमुख, मान्यता) की गरिमामयी उपस्थिति रही।


प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बैंक द्वारा शुरू की गई नवीन पहलें जैसे कि डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं, नवीनतम उत्पाद योजनाएं, ग्राहकों की आवश्यकताओं के लिए चल रही विभिन्न सहयोग, तथा सामाजिक गतिविधियों प्रयासों की विस्तृत जानकारी साझा की गई। श्री शाव ने कहा कि बैंक के माध्यम से सेवा में तेजी लाकर ग्राहकों तक पहुँचना और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सेवाएं उपलब्ध कराना ही बैंक का प्रमुख उद्देश्य है।

इसके पूर्व, श्री शाव ने बैंक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ एक टाउन हॉल मीटिंग का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने बैंक के वर्तमान और भविष्य के रणनीतिक दृष्टिकोण पर चर्चा की। इस बैठक में उन्होंने उपस्थित स्टाफ, अधिकारियों एवं प्रबंधकों को संबोधित करते हुए कहा कि बैंकिंग सेवा एक जन सेवा है। इसमें जिम्मेदारी और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण होते हुए उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवा कोई नौकरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक सेवा है जिसे मन, वचन और कर्म से निभाना देना चाहिए।

इसके उपरांत, शाम 3 बजे से एक ग्राहक बैठक (Customer Meet) का आयोजन किया गया, जिसमें रायपुर और आसपास के अंचल के आमंत्रित ग्राहकों ने भाग लिया। इस संवादात्मक सत्र में श्री शाव ने ग्राहकों से प्रत्यक्ष संवाद करते हुए उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं, एवं सुझावों को जाना। उन्होंने आश्वासन दिया कि बैंक के ग्राहक की सुविधा के लिए निरंतर प्रयासरत है और उनके प्रतिक्रिया के आधार पर सेवाओं में सुधार किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रायपुर और उसके अंचल क्षेत्रो में बैंक अपनी उपस्थिति को और अधिक समग्र बनाने हेतु कार्य कर रही है जिससे आम नागरिक बैंकिंग सुविधाओं की गति से लाभ ले सके।
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अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को गंभीरता से लेकर पूरी गुणवत्ता के साथ समय सीमा में पूर्ण कराएं कलेक्टर्स: मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज जांजगीर-चांपा जिले के जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में प्राधिकरण के बजट को 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये करने की स्वीकृति दी गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने निर्देश दिए कि प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों को सभी कलेक्टर्स गंभीरता से लें और उन्हें उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयसीमा में पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अब प्राधिकरण की बैठक हर वर्ष समय पर आयोजित होगी और कार्यों की गहन समीक्षा की जाएगी।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि संविधान की मंशा के अनुरूप अनुसूचित जाति समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए हम बाबा गुरु घासीदास जी के ‘मनखे-मनखे एक समान’ के संदेश को आत्मसात कर समाज में सम्मान और समानता की भावना को सशक्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचे, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जांजगीर-चांपा जिले को इस बैठक के लिए विशेष रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य अपनी स्थापना के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और अब समय आ गया है कि हम विकास की दिशा में नए कीर्तिमान स्थापित करें। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की संकल्पना के अनुरूप राज्य में विकास के कार्य हुए हैं। अनुसूचित जाति समाज के समुचित विकास के लिए प्राधिकरण एक सशक्त माध्यम है, जिसके माध्यम से सरकार ठोस प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने गिरौधपुरी धाम के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये, अजा वर्ग के विद्यार्थियों हेतु कोचिंग व्यवस्था के लिए 50 लाख रुपये, प्रत्येक वर्ष अनुसूचित जाति वर्ग के 5 युवाओं को पायलट प्रशिक्षण हेतु सहायता, तथा जोड़ा जैतखंभ के निर्माण में सीमेंट के साथ-साथ लकड़ी के उपयोग हेतु राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। साथ ही, दिल्ली में संचालित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में सीट संख्या बढ़ाकर 200 करने की जानकारी दी और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु इसका लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने आगामी समय में सभी जिला मुख्यालयों में 'नालंदा परिसर' के निर्माण की भी बात कही।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक के दौरान प्राधिकरण मद से स्वीकृत कार्यों के वर्षों से लंबित रहने पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही प्राधिकरण के कार्यों की राशि कम हो, लेकिन उनका सामाजिक महत्व अत्यंत बड़ा है। इन कार्यों का समय पर पूर्ण न होना चिंता का विषय है।

बैठक को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अनुसूचित जाति समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सोच समाज के वंचित वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में स्पष्ट है। उन्होंने सभी लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए और सभी समाज को साथ लेकर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास का संकल्प दोहराया।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब ने मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में समाज के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु आभार प्रकट किया। उन्होंने गिरौधपुरी धाम में रोपवे निर्माण, मेला आयोजन के दौरान बुनियादी सुविधाओं के विस्तार, जोक नदी के पास स्नान हेतु आवश्यक व्यवस्था, ठहरने की सुविधा, जोड़ा जैतखंभ में लकड़ी के उपयोग, बाराडेरा धाम में ऐतिहासिक तालाब का संरक्षण और सौंदर्यीकरण, विद्यार्थियों के लिए स्मार्ट क्लास की व्यवस्था जैसी मांगें बैठक में रखीं। उन्होंने बजट वृद्धि और मांगों की स्वीकृति के लिए भी आभार व्यक्त किया।

बैठक में प्राधिकरण के स्वरूप, कार्यक्षेत्र, अनुमोदित कार्यों की समीक्षा, बजट प्रावधानों की जानकारी, एवं वित्तीय वर्ष 2020 से 2025 तक स्वीकृत कार्यों की प्रगति सहित नागरिक सुविधाओं, सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों, और शैक्षणिक सुविधा विस्तार जैसे विषयों पर गहन चर्चा की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं प्राधिकरण सदस्यों के प्रस्तावों के आधार पर 49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के विकास एवं हितग्राही मूलक कार्यों का अनुमोदन किया गया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री श्री दयाल दास बघेल, श्री लखन लाल देवांगन, श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, श्री टंकराम वर्मा, सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े, विधायक श्री पुन्नूलाल मोहले, श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा, श्री दिलीप लहरिया, श्रीमती शेषराज हरवंश, श्रीमती उतरी गणपत जांगड़े, श्रीमती कविता प्राण लहरे, श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल सहित रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के आयुक्त, आईजी, एवं 17 जिलों के कलेक्टर उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि अनुसूचित जाति प्राधिकरण का कार्यक्षेत्र संपूर्ण राज्य है जिसमें प्रदेश के 17 अनुसूचित जाति बाहुल्य जिले – जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, महासमुंद, राजनांदगांव, खैरागढ़ सहित अन्य वे जिले भी शामिल हैं, जिनमें अनुसूचित जाति जनसंख्या 25 प्रतिशत से अधिक है।

बैठक में जांजगीर-चांपा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता आनंद मिरी, बिलासपुर से श्री राजेश सूर्यवंशी, गरियाबंद से श्री गौरीशंकर कश्यप, अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद एवं श्री बसव राजू, पुलिस महानिदेशक श्री अरुणदेव गौतम, विभागीय सचिव श्रीमती शहला निगार, श्री रोहित यादव, श्री कमलप्रीत सिंह, श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, श्री आर. प्रसन्ना, श्रीमती शम्मी आबिदी सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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सरलता, करुणा और जनसामान्य से जुड़ाव की मिसाल बने मुख्यमंत्री श्री साय : किसान पिता बोले, जीवन भर रहेगा याद

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का नेतृत्व केवल जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास की दिशा में सशक्त पहल तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सहजता, आत्मीयता और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यवहार ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशेष स्थान दिलाया है। आज जांजगीर चांपा जिले में आगमन के दौरान हेलीपेड पर ऐसा ही एक क्षण सामने आया, जब मुख्यमंत्री ने नन्ही बच्ची सृष्टि को गोद में उठाकर स्नेह से दुलारा।


किसान श्री योगेंद्र पांडेय अपनी तीन वर्षीय पुत्री सुश्री सृष्टि पांडेय को लेकर ग्राम भणेसर से विशेष रूप से मुख्यमंत्री श्री साय से मिलने पहुंचे थे। जब मुख्यमंत्री श्री साय  की दृष्टि  मासूम बच्ची सृष्टि पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत आत्मीय मुस्कान के साथ निहारा और उसे स्नेह से अपनी गोद में उठा लिया।  मुख्यमंत्री से मिलकर नन्ही सृष्टि की आँखों में जो चमक थी, वह पूरे वातावरण को आत्मीयता से भर गई। 

सृष्टि के पिता श्री योगेंद्र पांडेय ने भावुक होकर बताया कि मुख्यमंत्री जी के आने की खबर सुनकर मैंने तय किया कि अपनी बेटी को उनसे मिलवाऊँगा। जब मुख्यमंत्री जी ने उसे गोद में उठाया, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मेरी बेटी और हम दोनों के लिए यह पल हमारे जीवन की सबसे अनमोल स्मृति बन गई है जो जीवन भर याद रहेगी।

सुश्री सृष्टि, जो वर्तमान में नर्सरी कक्षा की छात्रा हैं, अपने पिता के साथ मुख्यमंत्री श्री साय को देखने के लिए अत्यंत उत्साह के साथ पहुंची थीं। उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार है, जिसमें माता-पिता, दादा-दादी और सृष्टि स्वयं शामिल हैं।
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