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कांग्रेस पर वामपंथियों और नास्तिकों का कब्जा : आचार्य प्रमोद कृष्णम

 पूर्व कांग्रेस नेता प्रमोद कृष्णम ने हिमाचल सरकार के फूड वेंडर्स की दुकानों के बाहर नेम प्लेट लगाने के फैसले पर कांग्रेस नेता टी.एस. सिंह देव के विरोध पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

प्रमोद कृष्णम ने कहा, कांग्रेस पार्टी ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, लेकिन वह कांग्रेस अलग थी। वह महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और पंडित जवाहरलाल नेहरू की कांग्रेस थी। लेकिन यह कांग्रेस सनातन विरोधियों और देश विरोधियों की है। पार्टी के ऊपर वामपंथियों ने कब्जा कर लिया है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा कोई निर्देश लागू करने की उसकी योजना नहीं है। हालांकि सरकार के यू-टर्न से इस पर शुरू हुई बयानबाजी पर तत्काल लगाम लगती नहीं दिख रही।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तंज कसते हुए आगे कहा कि राहुल गांधी के आस-पास जो लोग हैं वे पार्टी को भ्रमित कर रहे हैं जिसके कारण कांग्रेस पार्टी की दुर्दशा हो रही है। कांग्रेस पार्टी में अगर कोई सच बोलता है तो उसका विरोध होता है और उसको पार्टी से बाहर कर दिया जाता है। उन्होंने कहा, पार्टी पर वामपंथियों और नास्तिक लोगों का कब्जा हो गया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश की तर्ज पर हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने भी दुकानों के बाहर नेम प्लेट लगाने के निर्देश दिए हैं। इसको लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंह ने कहा था कि हिमाचल सरकार के इस फैसले से वह सहमत नहीं हैं।

टी.एस. सिंह देव ने एक वीडियो का जिक्र करते हुए कहा था, मैंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा, जिसमें अल्पसंख्यकों की दुकानों के सामने कुछ लोग क्रॉस लगा रहे हैं कि इनका हमें बहिष्कार करना है, यह बहुत ही निंदनीय है। अगर हिमाचल की सरकार ऐसा कर रही है, तो वह सरकार में रहने लायक है कि नहीं इस पर प्रश्नचिन्ह है।

बता दें कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस शासित हिमाचल सरकार में लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने रेहड़ी पटरी, रेस्टोरेंट, ढाबा और फास्ट-फूड संचालकों को अपनी पहचान दिखाने का आदेश दिया, जिसको लेकर सियासत तेज है। कुछ लोग इसको उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के आदेश की तरह देख रहे हैं। वहीं, विक्रमादित्य के इस फैसले से कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में नाराजगी की बात भी कही जा रही है।

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प्रधानमंत्री आवास योजना से कुम्हार अमीरचंद को मिली आर्थिक स्थिरता

प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित अमीरचंद प्रजापति की कहानी बहुत प्रेरणादायक है। मिट्टी के दिए बनाकर जीवन गुजारा करने वाले अमीरचंद के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना एक वरदान साबित हुई है। इस योजना की मदद से उन्हें अपना खुद का पक्का घर मिला जिससे उनके सपने हकीकत में तब्दील हुई है। अब अमीरचंद न केवल अपने परिवार के साथ सुरक्षित जीवन जी रहे हैं, बल्कि उन्होंने अपने घर में एक छोटी सायकल एवं गाड़ी पंचर की दुकान भी शुरू कर दी है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर रहा है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रहा है।
बलरामपुर जिले के विकासखण्ड वाड्रफनगर के ग्राम पंचायत ओदारी निवासी अमीरचंद प्रजापति बताते है कि वे पेशे से कुम्हार है। मिट्टी को आकार देकर दीया एवं विभिन्न मिट्टी की वस्तुओं का निर्माण कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते है। उनका काम ही केवल उनकी रोजी-रोटी का साधन है, ऐसे में उनके पक्के आवास बनाना असंभव सा प्रतीत होता था लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अमीरचंद प्रजापति को अपना खुद का घर मिलना किसी वरदान से कम नही है। वे बताते है जैसे ही उन्हें आवास की स्वीकृति मिली और उनका आवास पूर्ण हो गया है। आवास मिलने से उन्हें काफी मदद मिली है और वे सकुशल अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहे है। और भरण पोषण के लिए उनका कुम्हार का कार्य उनकी कला और रचनात्मकता का भी प्रतीक है।
वे मिट्टी को आकार देकर न केवल अपनी कला को व्यक्त करते हैं, बल्कि वे अपने परिवार के लिए भी एक स्थिरता के साथ बेहतर जीवन तैयार कर रहे हैं। अमीर चंद प्रजापति की कहानी से हमें सीख मिलती है कि, किस तरह उन्होंने प्रधानमंत्री आवास मिलने से अपने काम को संजोए रखा है। श्री अमीरचंद ने गरीब लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का आवास देने के लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है।
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रोजी मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे कोमल सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने परिवार के लिए बनाया पक्का आवास

रोजी मजदूरी कर जीवन यापन कर रहें बालोद जिले के समीपस्थ ग्राम देवारभाट के निवासी कोमल सिंह का परिवार एक कच्चे मकान में काफी लंबे समय से निवासरत् थे। उन्हंे जर्जर हो चुके अपने कच्चे मकान में रहन-सहन करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कोमल सिंह के परिवार की इन समस्याओं का समाधान प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के बालोद जिले में बेहतर क्रियान्वयन से संभव हुआ है। कोमल सिंह ने बताया कि उनका आवास काफी जर्जर हो चुका था। बारिश के दिनों में कच्चे छत से पानी का टपकना, घर में पानी का भर जाना और कभी भी जर्जर मकान के ध्वस्त होने का डर बना रहता था। रोजी-मजदूरी से ही घर का खर्च चलता है जिसमें अपने घर को पक्का बनाने में वे एवं उनके परिवार सक्षम नही थे। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जब उन्हंे आवास की स्वीकृति मिली तो उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नही था। उन्होंने योजना के तहत आवास निर्माण हेतु प्रथम किस्त की राशि आते ही उन्हांेने अपने घर का निर्माण शुरू कर दिया। उसने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शासन में उसके घर के निर्माण कार्य में तेजी आई और अब उनका आवास पूरी तरह पूर्ण हो चुका है। जहाँ कोमल सिंह और उसका परिवार खुशी-खुशी निवासरत है, अब उन्हें पक्का आवास में रहन-सहन में कोई समस्या नही आती है। कोमल सिंह और उसके परिवार ने पक्का आवास निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें बारंबार धन्यवाद कहा है।
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नई दिल्ली से लौटे माओवादी हिंसा पीड़ित बस्तरवासियों का मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत

 मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में माओवादी हिंसा से पीड़ित बस्तर के लगभग 55 नागरिकों को आमंत्रित किया गया, जो हाल ही में अपनी व्यथा और समस्याओं को व्यक्त करने दिल्ली गए थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मौसम खराब होने के कारण उड़ान बाधित होने से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अनुपस्थिति में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने माओवादी हिंसा पीड़ित बस्तरवासियों का स्वागत किया। 
 कौशल्या देवी साय ने नक्सल पीड़ितों को मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय का संदेश  देते हुए कहा कि आप सभी बस्तर के नागरिकों का साहस प्रशंसनीय है। आपके साहस, कठिन परिश्रम और प्रयासों के कारण ही बस्तर में शांति लौटी है। आपने माओवादी आतंक को अपनी आंखों से देखा, जिया और झेला है। आपने बड़े साहस के साथ इस त्रासदी का सामना किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय दौरे पर हैं आपके बीच नहीं आ पाए। आपका मुख्यमंत्री निवास में स्वागत और अभिनंदन है। उन्होंने सभी अतिथियों को उपहार स्वरूप एक बैग, ट्रैक सूट भेंट किया। इस दौरान उन्होंने यह भी पूछा कि दिल्ली यात्रा के अनुभव कैसे रहे, जिस पर सभी ने एक स्वर में कहा कि यह यात्रा बहुत अच्छी रही, और कई ग्रामीणों ने पहली बार हवाई जहाज में यात्रा का अनुभव भी साझा किया।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य सरकार के प्रयास से बस्तर में विकास कार्यों  को गति मिली है। उन्होंने कहा कि आपने दिल्ली जाकर बस्तर की व्यथा को केंद्र सरकार और पूरे देश के सामने रखा, जो आज तक किसी ने नहीं किया था। माओवादी हिंसा का दर्द अब पूरे देश ने जाना है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर से नक्सलवाद का समूल नाश करना है। श्री शर्मा ने यह भी कहा, आपने नक्सलियों की गोलियों और आईईडी के खतरे के बीच अपने साहस का परिचय दिया। बंदूक और हिंसा से विकास संभव नहीं है। अब समय आ गया है कि बस्तर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़े।

गौरतलब है कि माओवादी हिंसा से पीड़ित ये नागरिक हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर और जेएनयू में आंदोलन करने के साथ-साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर नक्सलियों के कृत्यों से हुई परेशानियों को साझा कर चुके हैं। इनकी दिल्ली यात्रा का मुख्य उद्देश्य नक्सल समर्थक समूहों द्वारा फैलाए झूठ का खुलासा करना, हिंसा से प्रभावित लोगों की आवाज को दिल्ली तक पहुंचाना था। इस अवसर पर विधायक ईश्वर साहू और बस्तर शांति समिति के सदस्यगण उपस्थित थे।
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धार्मिक स्थलों के आसपास बेचे जाने वाले प्रसादों की हुई जांच

नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन एवं कलेक्टर सरगुजा के निर्देशानुसार अभिहित अधिकारी के मार्गदर्शन में तिरूपति मंदिर में प्रसाद में मिलावट की घटना के मद्देनजर, जिला सरगुजा में नवरात्रि पर्व को ध्यान में रखते हुए जिले के समस्त धार्मिक स्थलों के आसपास स्थित पूजा सामग्री दुकानों में बेचे जाने वाले प्रसादों की नियमित जांच व निरीक्षण किया जा रहा है।

वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरआर देवांगन ने बताया कि इस तारतम्य में गुरुवार को जिले के बड़े सिद्धपीठ महामाया मंदिर परिसर के आसपास लगने वाले पूजा सामग्री एवं प्रसाद विक्रेताओं का औचक निरीक्षण कर उनके द्वारा बेचे जाने वाले समस्त प्रकार के प्रसादों की गहन जांच की गई। प्रसाद विक्रेताओं द्वारा बनाए एवं विक्रय किए जा रहे प्रसाद का उचित स्वास्थ्यकर (हाइजेनिक) दशाओं में निर्माण एवं खाद्य प्रतिष्ठान की साफ-सफाई हेतु समुचित दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

खाद्य अपमिश्रण की शंका के आधार पर 02 प्रतिष्ठानों मेसर्स आनंद श्रीफल भण्डार एवं मेसर्स जायसवाल प्रसाद एवं मिष्ठान भण्डार से पेड़ा एवं बेसन लड्डू का नमूना लेकर जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा गया है। राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला रायपुर से परीक्षण एवं विश्लेषण रिपोर्ट प्राप्त होने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 नियम विनियम 2011 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही की जावेगी।

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अभनपुर के स्कूल में मिला किताबों का ढेर, विकास ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

 छत्तीसगढ़ में स्कूली बच्चों को दी जाने वाली पाठ्यपुस्तकों के वितरण में लापरवाही और अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल ही में राजधानी रायपुर में करोड़ों रुपये की किताबें कबाड़ में बिकने के बाद, अब अभनपुर के एक सरकारी स्कूल में हजारों किताबें बेकार पड़ी हुई मिली हैं। गुरुवार को पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने स्वामी आत्मानंद स्कूल, अभनपुर में छापा मारकर दो कमरों में भरी हजारों किताबें बरामद कीं। उन्होंने इस पूरी घटना का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें कमरों में भरी किताबों के ढेर देखे जा सकते हैं। जिसके बाद उन्होंने किताबों की छपाई और रद्दी में डंप करने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।


सिलयारी में पहले भी हुआ था खुलासा
यह पहला मामला नहीं है जब ऐसी लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले पूर्व विधायक उपाध्याय ने सिलयारी की एक रियल पेपर मिल फैक्ट्री में छापा मारा था, जहां सरकारी किताबों को गलाकर पुनः कागज बनाया जा रहा था। यह किताबें इसी सत्र की थीं और बिल्कुल नई स्थिति में थीं। इसके बावजूद इन्हें कबाड़ बताकर फैक्ट्री में बेच दिया गया था। फैक्ट्री में किताबों का पहाड़नुमा ढेर लगा हुआ था, जो इन अनियमितताओं की गंभीरता को दर्शाता है।

फैक्ट्री के कर्मचारी हुए फरार
सिलयारी की घटना में फैक्ट्री कर्मचारियों से जब इन किताबों के स्रोत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दावा किया कि ये किताबें उन्हें कबाड़ से मिली हैं। हालांकि, विवाद बढ़ने पर फैक्ट्री के अधिकारी और कर्मचारी मौके से फरार हो गए। सरकारी विभागों से निकलने वाले रद्दी या कबाड़ की नीलामी के लिए एक प्रक्रिया होती है, जिसमें टेंडर जारी किया जाता है। इस मामले में भी पाठ्य पुस्तक निगम (पापुनि) से सवाल उठाए गए, लेकिन निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश पांडेय ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कांग्रेस सरकार से नहीं जुड़ा मामला: शैलेष नितीन त्रिवेदी


पूर्व पापुनि अध्यक्ष शैलेष नितीन त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि ये घटनाएं उनके कार्यकाल से नहीं जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि 2024-25 सत्र की किताबों की छपाई शुरू होने से पहले ही उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, और इसके बाद सभी प्रक्रियाएं नई सरकार के अंतर्गत हुई हैं।

किताबों की छपाई का फॉर्मूला
लोक शिक्षण संचालनालय हर वर्ष छात्रों की संख्या के आधार पर किताबों की छपाई के लिए आंकड़े पाठ्य पुस्तक निगम को भेजता है। क्योंकि छात्र प्रवेश जुलाई में होते हैं और किताबें पहले से तैयार की जाती हैं, इसलिए बीते सत्र के छात्रों की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि करके किताबों की छपाई की जाती है। यदि किताबें बच भी जाती हैं, तो उनकी संख्या 10-15 हजार से अधिक नहीं होती।

बढ़ती अनियमितताएं
छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सरकारी किताबों के वितरण और निपटान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस तरह की लापरवाही से सरकार के करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है और छात्रों को समय पर किताबें नहीं मिल पा रही हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में सरकार और प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

 

 

 
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अबूझमाड़: घने जंगलों में सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक जीत, तीन बड़े नक्सली ढे

अबूझमाड़। यह नाम सुनते ही घने जंगलों, कठिन पहाड़ियों और वहां छिपे खतरनाक नक्सलियों का ख्याल आता है। जहां आम इंसान का पहुंचना मुश्किल होता है, वहां सुरक्षा बलों ने एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। छत्तीसगढ़ का यह दुर्गम इलाका वर्षों से नक्सलियों का अड्डा बना हुआ था, पर अब हालात बदलने लगे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में चलाए गए "माड़ बचाओ" अभियान ने इस इलाके में शांति की एक नई उम्मीद जगाई है। सुरक्षा बलों ने सात दिनों तक चले एक लंबे और चुनौतीपूर्ण अभियान में न केवल नक्सलियों को करारा जवाब दिया, बल्कि उनके सबसे बड़े नेताओं में से तीन को भी खत्म कर दिया। 
 
यह मुठभेड़ 23 सितंबर 2024 को अबूझमाड़ के परादी के जंगलों में शुरू हुई, जब सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर नक्सलियों के एक बड़े समूह को घेर लिया। सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने को कहा, परंतु नक्सलियों ने जवाब में गोलीबारी शुरू कर दी। इसके बाद, सुरक्षा बलों ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया और रुक-रुक कर चली मुठभेड़ में तीन कुख्यात नक्सली मारे गए। इनमें सबसे प्रमुख डीकेएसजेडसी के रूपेश थे, जिन पर ₹25 लाख का इनाम था। उनके साथ डीव्हीसीएम जगदीश और महिला नक्सली सरिता उर्फ बसंती भी मारे गए, जिन पर क्रमशः ₹16 लाख और ₹8 लाख का इनाम था।
 
सात दिन का संघर्ष और नक्सलियों का पतन
 
अबूझमाड़ में 124 घंटों तक चले इस सर्च ऑपरेशन में डीआरजी, एसटीएफ और बीएसएफ की टीमें शामिल थीं। यह अभियान नारायणपुर, कोण्डागांव और दंतेवाड़ा जिलों में एक साथ संचालित हुआ। मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए, जिनमें एके-47, इंसास, एसएलआर, और बीजीएल लॉन्चर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल थे। 
 
मारे गए नक्सलियों में रूपेश सबसे खतरनाक था। उस पर 66 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें 2009 का मदनवाड़ा हमला भी शामिल था, जिसमें 29 जवान शहीद हुए थे। जगदीश, डीव्हीसीएम, पर 43 से ज्यादा मामले दर्ज थे, और सरिता नक्सली कंपनी नंबर 10 की प्रमुख सदस्य थी।
 
मुख्यमंत्री का नेतृत्व: सतत समीक्षा और विकास की दिशा
 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का नेतृत्व नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं इन अभियानों की निरंतर समीक्षा कर रहे हैं, और हर कदम की बारीकी से निगरानी करते हैं। पुलिस अधिकारियों से समय-समय पर फीडबैक लेकर, साय ने यह सुनिश्चित किया है कि हर अभियान नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक साबित हो। उनका उद्देश्य स्पष्ट है—नक्सल प्रभावित इलाकों को आतंक से मुक्त कर, वहाँ शांति और सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना। मुख्यमंत्री ने कहा, "हम अबूझमाड़ और अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह से मुक्त करेंगे, ताकि वहाँ के लोगों को विकास और स्थिरता का अनुभव हो।"
 
मुख्यमंत्री साय का ध्यान केवल सुरक्षा अभियानों तक सीमित नहीं है। वह इन इलाकों में विकास कार्यों को भी अत्यधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। सड़क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को तेज़ी से लागू करने के लिए उन्होंने विशेष निर्देश दिए हैं।
 
केंद्रीय गृह मंत्री की मॉनिटरिंग
 
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार छत्तीसगढ़ में चला जाए नक्सली अभियान और इन क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों की रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री से ले रहे हैं। शाह ने कहा था कि नक्सलियों के पास अब दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे आत्मसमर्पण करें या सुरक्षा बलों की कार्रवाई का सामना करें। उनका यह बयान नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने और शांति की राह अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला है, जिससे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा की दिशा में सकारात्मक बदलाव आ सके।
 
ग्रामीणों में उमंग और नक्सलियों की हार
 
अबूझमाड़ की इस ऐतिहासिक मुठभेड़ ने वहां के ग्रामीणों को एक नई आशा दी है। नक्सल आतंक के साए में जी रहे लोग अब अपनी आजादी और विकास की उम्मीद में जी रहे हैं। सुरक्षा बलों के इस साहसिक अभियान ने साबित कर दिया है कि नक्सलियों का अबूझमाड़ में अब टिक पाना असंभव है। 
 
पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. ने बताया कि इस वर्ष बस्तर क्षेत्र में 157 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं, 663 को गिरफ्तार किया गया है, और 556 ने आत्मसमर्पण किया है। अबूझमाड़ में नक्सलियों की कमर टूट चुकी है और बहुत जल्द यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त हो जाएगा।
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मुख्यमंत्री अपने बचपन के स्कूली शिक्षक से मिलकर हुए भाव विभोर

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय अपने बचपन के स्कूली शिक्षक श्री राजेश्वर पाठक से मुलाकात कर भाव विभोर हो गए। उन्होंने अपने स्कूल के दिनों को याद किया और अपने शिक्षक का चरण स्पर्श कर अभिवादन किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरूजनों का ही आशीर्वाद है कि मैं यहां तक पहुंच पाया हूँ ऐसा कहते हुए उन्होंने अपने शिक्षक से फिर से आशीर्वाद मांगा और उनके शिक्षक ने भी पूरे दिल से आशीर्वाद दिया।
 
मुख्यमंत्री साय को स्कूल पढ़ाने वाले 94 वर्षीय शिक्षक श्री राजेश्वर पाठक ने बताया कि जब वे लोयला उच्चतर माध्यमिक शाला कुनकुरी में पढ़ाया करते थे तब मुख्यमंत्री साय छात्र हुआ करते थे। वे बचपन से ही बहुत प्रतिभावान, आज्ञाकारी और विनम्र स्वाभाव के थे। सौम्यता और सरलता उनकी विशिष्ट पहचान थी। जब वे सांसद थे तब भी और मुख्यमंत्री बनने के बाद, जब भी वे मिले तो उनमें वही विनम्रता और वही सम्मान का भाव दिखा जो अद्भुत है।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर विधि विभाग में 362 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए वित्त की मंजूरी

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वित्त विभाग ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत न्यायालयों में नई भर्ती के लिए मंजूरी दे दी है। कुल 362 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों की कमी को दूर कर न्यायपालिका के कार्यों को सुचारू बनाना है।
 
उपमुख्यमंत्री अरूण साव ने विधि विधायी विभाग को इस आशय के प्रस्ताव भेजने के निर्देश  दिए थे, जिसके बाद वित्त विभाग ने प्राप्त प्रस्तावों को मुख्यमंत्री के निर्देश पर  तत्काल मंजूरी प्रदान कर दी। इसमें व्यवहार न्यायाधीश के 57, स्टेनोग्राफर के 46, सहायक ग्रेड-3 के 118, स्टेनोटायपिस्ट के 07, वाहन चालक के 08, प्रोसेस सर्वर के 05 और  चौकीदार, गार्डनर, स्वीपर, वाटरमेन के 83 एवं एक सहायक प्रोग्रामर के पद शामिल हैं।
 
यह निर्णय न केवल न्यायालयों में कार्य दक्षता बढ़ाने बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने में भी सहायक होगा। न्यायालयों में कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या होने से  कामकाज का निष्पादन भी समय पर हो सकेगा।
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प्रथम अखिल भारतीय पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर चैम्पियनशिप

भिलाई की मिनी स्टेडियम में चल रही प्रथम अखिल भारतीय पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर चैम्पियनशिप 2024-25 स्पर्धा में आज उत्तर प्रदेश की पुलिस टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 12 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 03 गोल्ड, 05 सिल्वर तथा 04 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इस चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में 33 केन्द्रीय और राज्य पुलिस की टीमें भाग ले रही है। 
 
प्रथम अखिल भारतीय पुलिस वेटलिफ्टिंग क्लस्टर चैम्पियनशिप प्रतियोगिता का समापन समारोह 27 सितम्बर को संध्या 4.30 बजे से प्रथम वाहिनी, छसबल भिलाई में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता गृह मंत्री श्री विजय शर्मा करेंगे। कार्यक्रम में खेल मंत्री श्री टंक राम वर्मा, सांसद श्री विजय बघेल, विधायक दुर्ग शहर श्री गजेन्द्र यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। 
 
आज 25 सितम्बर को आयोजित हुई विभिन्न स्पर्धाओं में बीएसएफ की टीम ने 03 गोल्ड, एक सिल्वर सहित कुल 04 पदक प्राप्त किया। राजस्थान की पुलिस टीम ने 02 गोल्ड, 02 सिल्वर, 02 ब्रोंज सहित कुल 06 मेडल, छत्तीसगढ़ पुलिस 02 गोल्ड, 01 ब्रोंज सहित कुल 03 मेडल, एसएसबी ने 02 गोल्ड मेडल, पंजाब पुलिस ने 04 मेडल, उड़ीसा पुलिस 02 मेडल, सीआरपीएफ ने 02 मेडल जीते। महाराष्ट्र पुलिस 01 गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रही। इस चैंम्पियनशिप स्पर्धा ने पुलिस कर्मियों के बीच खेल भावना और उनके उत्साह को बढ़ावा मिला है। आयोजन में हिस्सा लेने वाली सभी टीमों ने अपने शानदार प्रदर्शन से इस आयोजन को बेहद सफल बनाया है। 
 
मेडल सेेरेमनी में मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री दीपांशु काबरा, पुलिस अधीक्षक दुर्ग श्री जितेन्द्र शुक्ला एवं रीजनल हेड बैंक ऑफ बड़ौदा श्री दिवाकर प्रसाद सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने विजयी टीमों एवं खिलाड़ियों को मेडल प्रदान किए और उन्हें शुभकामनाएं दीं।
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मुख्यमंत्री श्री साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें किया नमन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर जिले के मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में एकात्म मानववाद के प्रवर्तक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया है। साय ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक ऐसे युगदृष्टा थे, जिनके विचारों व सिद्धांतों ने देश को एक प्रगतिशील विचारधारा देने का काम किया।  साय ने कहा कि उनकी विचारधारा राष्ट्र के पुनर्निर्माण और भारत के गौरव को पुनः स्थापित करने के लिए थी। उन्होंने जन समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में आजीवन काम किया। उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास नहीं होता, तब तक समाज का समग्र विकास संभव नहीं है। इस विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के चलते उनके जन्मदिन को अंत्योदय दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भारतीय समाज में गरीबों और वंचितों के उत्थान के प्रति समर्पण को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके अंत्योदय सिद्धांत पर चलकर हम समस्त जनमानस का जीवन स्तर बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे सदैव हमारे प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।
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देश में सबसे कम बेरोज़गारी दर वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ ने पाया स्थान, उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ा

छत्तीसगढ़ राज्य ने रोजगार सृजन के मामले में देश भर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जारी *Periodic Labour Force Survey (PLFS)*की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में पांचवां स्थान प्राप्त किया है। राज्य में चल रहे रोजगार सृजन और विकास प्रयासों के कारण छत्तीसगढ़ अब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ चुका है, जो बेरोजगारी दर के मामले में राज्य की बड़ी सफलता को दर्शाता है।
 
   ग़ौरतलब है कि ⁠राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (NSSO) द्वारा पीएलएफएस के लिए नमूना सर्वेक्षण और डेटा संग्रह का कार्य किया जाता है। जो कि भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आता है। 
 
रोजगार सृजन में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण प्रगति
 
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में, छत्तीसगढ़ सरकार ने बेरोजगारी को कम करने और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। सरकार ने हाल ही में पुलिस, स्वास्थ्य, पीएचई (सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी) और पंचायत विभागों में 1,068 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी है। इन भर्तियों से राज्य में युवाओं को सरकारी नौकरियों में अवसर मिलेंगे, जिससे राज्य की विभिन्न योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने में भी मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री साय ने इस बात पर जोर दिया है कि यह पहल राज्य के विकास को गति देने के साथ-साथ युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगी।
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने खासतौर पर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। सरकार ने स्वरोजगार और कौशल विकास को प्रोत्साहन देने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, ताकि गांव के युवाओं को अपने ही इलाके में काम करने का अवसर मिल सके और उन्हें महानगरों की ओर पलायन न करना पड़े।
 
PLFS रिपोर्ट में अन्य राज्यों की स्थिति
 
*Periodic Labour Force Survey (PLFS)*की रिपोर्ट ने देश भर के विभिन्न राज्यों में बेरोजगारी के आंकड़ों का भी खुलासा किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, केरल में बेरोजगारी दर सबसे अधिक रही, जहां 15-29 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर 29.9% दर्ज की गई। केरल में महिलाओं में बेरोजगारी दर 47.1% और पुरुषों में 19.3% रही। इसके अलावा, लक्षद्वीप में बेरोजगारी दर सबसे अधिक 36.2% दर्ज की गई, जिसके बाद अंडमान और निकोबार द्वीप समूहमें यह दर 33.6% रही। 
 
इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ ने देश में सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्यों में पांचवां स्थान प्राप्त किया है, जो राज्य सरकार की रोजगार सृजन नीतियों की सफलता का प्रतीक है। 
 
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर
 
छत्तीसगढ़ सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में माना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास करें, जिससे वे नए उद्योगों में काम करने के लिए तैयार हो सकें। राज्य में कई कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं, जहां युवाओं को आधुनिक तकनीकों और कौशलों की शिक्षा दी जा रही है, ताकि वे रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकें।
 
छत्तीसगढ़ का विकास और प्रधानमंत्री मोदी का विज़न
 
छत्तीसगढ़ राज्य, जो कि पहले से ही अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, अब रोजगार सृजन और विकास के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को भी साकार कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के जरिए सरकार ने राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
 
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार देश के हर कोने में विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है, छत्तीसगढ़ सरकार उसी दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दिशा में प्रदेश के प्रत्येक गांव में रोजगार सृजन की योजनाओं का विस्तार करने का संकल्प लिया है, ताकि राज्य का हर युवा आत्मनिर्भर बन सके और राज्य का विकास तेज़ी से हो सके।
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विख्यात पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई के स्वास्थ्य पर रखी जा रही निगरानी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विख्यात पंडवानी गायिका पद्मविभूषण श्रीमती तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने श्रीमती तीजन बाई के बेहतर स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। मुख्यमंत्री साय ने जिला प्रशासन को श्रीमती तीजन बाई के बेहतर उपचार और देखभाल के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं।
 
मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर चिकित्सकों का दल द्वारा श्रीमती तीजन बाई के स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों के दल द्वारा दुर्ग जिले के ग्राम गनियारी स्थित आवास में उनकी नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
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पीएम श्री योजना में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की और 78 शालाएं

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के 78 और स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए पीएम योजना में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में 263 पीएमश्री स्कूल स्वीकृत किए गए थे, नई स्वीकृति मिलने से यह संख्या बढ़कर अब 341 हो गई है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि यह हर्ष का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प लिया है और इस दिशा में लगातार नए फैसले ले रहे हैं। पीएम श्री योजना के माध्यम शैक्षणिक अधोसंरचना एवं शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास निश्चित रूप से विकसित भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। 
      
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पीएम योजना में शामिल इन स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत उत्कृष्ट विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, व्यावसायिक लैब्स की व्यवस्था होगी, जो छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाईयों पर ले जाएगी। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी आभार व्यक्त किया है। 
 
गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा पीएम योजना के अंतर्गत प्रथम चरण में 211 तथा तृतीय चरण में 52 और चौथे चरण में 78 शालाएं स्वीकृत की गई है। चौथे चरण में शामिल सभी 78 शालाएं कक्षा पहली से 12 वीं तक की हैं। 
 
प्रथम चरण में पीएम श्री योजना के तहत स्वीकृत शालाओं को अपग्रेड किया जा चुका है, वहीं तृतीय चरण में स्वीकृत शालाओं को अपग्रेड किया जा रहा है। इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान और गणित के लिए अत्याधुनिक लैब्स, खेल सुविधाएं, और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। 
 
यहां यह उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में पीएम श्री योजना का शुभारंभ 19 फरवरी 2024 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने किया था। उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर किए जा रहे प्रयासों को सराहा था। पीएम श्री के तहत प्रति स्कूल 2-2 करोड़ रूपए व्यय कर आदर्श स्कूल के रूप में विकसित करने की योजना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पीएम श्री योजना के अंतर्गत शालाओं को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है।
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उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 35.56 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और भूमिपूजन

उप मुख्यमंत्री तथा कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने आज चारामा में 35 करोड़ 56 लाख 68 हजार रुपए लागत के 16 विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण किया। इनमें 15 करोड़ 84 लाख 40 हजार रुपए के चार निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और 19 करोड़ 72 लाख 28 हजार रुपए के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण शामिल हैं। कांकेर के सांसद भोजराज नाग और विधायकगण सर्वश्री किरण देव सिंह, विक्रम देव उसेंडी और आशाराम नेताम भी लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।
 
उप मुख्यमंत्री साव ने कार्यक्रम में जल जीवन मिशन के तहत सिंगल विलेज नल जल प्रदाय योजनांतर्गत कांकेर विकासखण्ड के ग्राम बोरगांव, आंवराभाठ और माकड़ीसिंगराय तथा चारामा विकासखण्ड के भुईंगांव, तेलगरा, काटागांव, भोथा और रतेडीह में कुल 19 करोड़ 72 लाख 28 हजार रुपए लागत के 12 कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने चारामा में पंडित दीनदयाय उपाध्याय की मूर्ति का अनावरण भी किया। 
 
उप मुख्यमंत्री साव ने चारामा में मुख्य मार्ग के पास आयोजित लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बताए मार्ग पर चलकर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों, जवानों और महिलाओं सहित सभी वर्गों का सतत् विकास कर रही है। शहरों को स्वच्छ और सुंदर बनाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर इन दिनों 'स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत चारामा के विकास के लिए नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा एक करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। 
 
कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भोजराज नाग और जगदलपुर के विधायक किरण देव सिंह ने भी नगरवासियों को संबोधित किया। पूर्व सांसद मोहन मंडावी, चारामा नगर पंचायत के अध्यक्ष प्यारेलाल देवांगन, उपाध्यक्ष  केशर नागवंशी, मत्स्य विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भरत मटियारा और स्थानीय पार्षदों सहित कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर एवं जिला पंचायत के सीईओ सुमित अग्रवाल भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
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प्रधानमंत्री आवास योजना: विष्णु के सुशासन में जशपुर जिले के 10 हजार से अधिक हितग्राहियों को मिला अपना पक्का आवास

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सुशासन में दूरस्थ अंचल के लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। हर एक व्यक्ति का सपना होता है कि उनका अपना एक पक्का मकान हो, जिसे पूरा करने के लिए वह आजीवन परिश्रम करता है लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए स्वयं का पक्का मकान बना पाना एक सपने ही रह जाता है। ऐसे में उनके सपने साकार प्रधानमंत्री आवास योजना कर रहा है।
 
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत् जशपुर जिले के हितग्राहियों को लाभान्वित हो रहे है। इनमें दिसम्बर 2023 से 22 सितम्बर 2024 तक कुल 10 हजार 706 हितग्राहियों का आवास निर्माण कराया जा चुका है। 
ऐसी ही एक कहानी जशपुर जिले के जनपद पंचायत मनोरा के ग्राम पंचायत करदना (छतौरी) के हितग्राही श्रीमती करमी बाई का है, जो राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहलाने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा से हैं। ये जनजाति ज्यादातर घने जंगलो में पेड़, पत्ते एवं छाल से झोपड़ी बनाकर निवास करते थे जिन्हें बरसात के मौसम में टपकते छत एवं सांप-बिच्छू की समस्या रहती थी। जिसके कारण उन्हें जीवन-यापन करना एक चुनौती थी। इनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना एक वरदान साबित हुई है। मुख्यमंत्री के सार्थक प्रयास से विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा के सपने भी पूरे हो रहे हैं। हितग्राही ने पक्का मकान मिलने से मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया है।
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मुख्यमंत्री ने आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मृत्यु पर गहरी संवेदना व्यक्त की

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजनांदगांव जिले में आकाशीय बिजली गिरने की घटना में मृतकों और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने जिला प्रशासन अधिकारियों को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराने साथ-साथ घायलों के उपचार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। 
 
गौरलतब है कि राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम जोरातराई में आकाशीय बिजली गिरने से 8 लोगों की मृत्यु हो गई है। जिला प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को आरबीसी 6-4 के तहत 4-4 लाख रूपए की सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। आकाशीय बिजली गिरने से 5 बच्चे तथा 3 लोगों की मृत्यु हो गई है। इस घटना में एक घायल व्यक्ति का ईलाज अस्पताल में किया जा रहा है, वह खतरे से बाहर है।
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रिकेश सेन के अल्टिमेटम के बाद गदा चौक से हटाई गई शराब दुकान

  भिलाई के सुपेला घड़ी चौक से गदा चौराहा मुख्य मार्ग पर स्थित अंग्रेजी शराब दुकान को वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन के प्रयासों के बाद सोमवार को भिलाई नगर निगम के पीछे स्थानांतरित कर दिया गया। विधायक सेन ने शनिवार की रात प्रदेश के संबंधित अधिकारी को 48 घंटे के भीतर दुकान शिफ्ट करने का अल्टिमेटम दिया था।

विधायक बनने के तुरंत बाद से ही रिकेश सेन ने गदा चौक के पास स्थित इस शराब दुकान और चखना सेंटर को हटाने का फैसला किया था। मुख्य मार्ग पर इस दुकान के चलते आसामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा था, जिससे स्कूली बच्चों और परिवारों के लिए यह क्षेत्र असुरक्षित और अशोभनीय हो गया था। गदा चौक, जो हनुमान जी के शस्त्र गदा को समर्पित है, के पास इस तरह के आसामाजिक तत्वों की उपस्थिति से स्थानीय जनता में भी नाराजगी थी।



विधायक सेन ने इस मुद्दे पर जिले के प्रभारी और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर दुकान हटाने की मांग की थी। इसके बाद, भिलाई नगर निगम के पीछे एक नया स्थान तय किया गया, और सारी तैयारियां कर ली गईं। हालांकि, सुपेला के कुछ होटल व्यवसायियों ने इस स्थानांतरण को रोकने का प्रयास किया, जिसके कारण प्रक्रिया में देरी हो रही थी।



शनिवार रात जब विधायक सेन इस मार्ग से गुजर रहे थे, तो उन्होंने गदा चौक पर बैठे आसामाजिक तत्वों को देखा। इसके बाद उन्होंने मौके पर रुककर निरीक्षण किया और देरी पर नाराजगी जाहिर की। विधायक ने तुरंत प्रदेश के एक अधिकारी को फोन कर 48 घंटे के भीतर दुकान को शिफ्ट करने का निर्देश दिया। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक अधिकारी को सख्त निर्देश देते हुए दिखाई दे रहे हैं।



विधायक के निर्देशों के बाद रविवार को छुट्टी के दिन भी संबंधित विभाग सक्रिय हुआ और कर्मचारियों को लगाकर दुकान और चखना सेंटर को भिलाई नगर निगम के पीछे खाली मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। आज से यह दुकान वहां संचालित होगी।

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